डॉ. माथुर की पांच रचनाओं का विमोचन
दल्ली राजहरा नगर की वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. शिरोमणि माथुर की पांच पुस्तकों का विमोचन किया गया। समारोह के मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ शासन के कैबिनेट मंत्री दर्जा प्राप्त खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के अध्यक्ष राकेश पांडे थे। अध्यक्षता छत्तीसगढ़ शासन से राज्यमंत्री का दर्जा प्राप्त कृषक कल्याण बोर्ड अध्यक्ष सुरेश कुमार चंद्रवंशी ने की। विशेष अतिथि के रूप में हेमचंद विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार भूपेंद्र कुलदीप, नगर पालिका अध्यक्ष तोरण लाल साहू, विधायक प्रतिनिधि पीयूष सोनी, जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष चंद्रेश हिरवानी, जिला भाजपा महामंत्री सौरभ लूनिया उपस्थित थे।
कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के छायाचित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन कर किया गया। स्वागत भाषण आयोजक कैलाश बारमेचा ने दिया। तत्पश्चात समस्त अतिथियों द्वारा सभी पांच पुस्तकों का विमोचन किया गया। मुख्य अतिथि खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के अध्यक्ष राकेश पांडे ने कहा कि दल्ली राजहरा से उनका 40 साल पुराना नाता है। नगर में वे पूर्व में 1 वर्ष व्यतीत कर चुके हैं। उन दिनों से डॉक्टर शिरोमणि माथुर से उनकी जान पहचान है और अब 40 वर्षों के बाद उनकी पुस्तकों के विमोचन अवसर पर उन्हें आने का सौभाग्य मिला है, यह उनके लिए गर्व का विषय है। मां सरस्वती की विशेष कृपा के कारण डॉक्टर शिरोमणि माथुर लगातार साहित्य सेवा कर रही हैं और नित नई प्रेरणा प्रदान करने वाली पुस्तकों का लेखन कर समाज को नई दिशा प्रदान करने का कार्य कर रही हैं। उन्होंने माताजी को उनकी कृति व रचनाओं के लिए शुभकामनाएं देते हुए भविष्य में दुर्ग भिलाई क्षेत्र में कवि सम्मेलन आयोजित कर माताजी की रचनाओं से वहां के लोगों को अवगत कराने का आश्वासन दिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे राज्यमंत्री दर्जा प्राप्त कृषक कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष सुरेश कुमार चंद्रवंशी ने कहा कि आज साहित्य सम्मेलन व विमोचन कार्यक्रम में आना उनके लिए सौभाग्य का विषय है।
लगातार इस उम्र में भी साहित्य सेवा और नई नई रचनाओं का सृजन कर उन्हें आकार देना अद्भुत कार्य है। माताजी डॉक्टर शिरोमणि माथुर लगातार साहित्य सेवा कर लोगों को मार्गदर्शन प्रेरणा प्रदान कर रही हैं। विशेष अतिथि हेमचंद विश्वविद्यालय के कुलपति ने विश्वविद्यालय के हिंदी एमए के पाठ्यक्रम में माताजी डॉक्टर शिरोमणि माथुर की पुस्तक को शामिल किए जाने की जानकारी दी। साथ ही उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले दिनों में एम ए हिंदी के बाद छात्र माताजी के पुस्तकों पर पीएचडी भी करेंगे। कार्यक्रम में आए हुए समस्त अतिथियों ने भी पुस्तक पर अपने विचार व्यक्त किया और नई पुस्तकों के लिए डॉक्टर शिरोमणि माथुर को शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्जवल भविष्य की कामना की हस्ताक्षर साहित्य समिति के वरिष्ठ साहित्यकारों का सम्मान मुख्य अतिथि व अन्य अतिथियों द्वारा स्मृति चिन्ह शाल श्रीफल प्रदान कर किया गया। दुर्ग भिलाई से आए हुए वरिष्ठ साहित्यकारों व विशिष्टजनों का सम्मान अभिनंदन पत्र भेंट कर किया गया। आयोजकों में प्रमुख रूप से आशुतोष माथुर, रश्मि अग्रवाल, दिगंत माथुर, पार्थ माथुर द्वारा अतिथियों को स्मृति चिन्ह शाल श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का संचालन सुनील श्रीवास्तव ने व आभार प्रदर्शन लायंस क्लब दुर्ग अध्यक्ष रश्मि अग्रवाल ने किया।
बरमेचा का बड़ा योगदान
विमोचन समारोह के आयोजन में कैलाश बरमेचा ने सबसे अहम भूमिका निभाई। कैलाश बरमेचा ने साहित्यकार, कवियित्री एवं समाजसेविका डॉ. शिरोमणि माथुर को अपनी धर्म मां माना है। उन्होंने साहित्य में डॉ. शिरोमणि माथुर के अमूल्य योगदान को रेखांकित करते हुए स्थानीय साहित्यकारों के साथ साथ देश के विभिन्न क्षेत्रों के साहित्यकारों को इस मंच पर एकत्र किया था। बरमेचा खुद एक पत्रकार के साथ साथ आला दर्जे के साहित्यकार भी हैं। कार्यक्रम के दौरान बरमेचा की साहित्यिक सेवा के साथ डॉ शिरोमणि माथुर के प्रति साहित्यिक समर्पण लोगो के बीच काफी सुखद अनुभूति देने वाला रहा। ममतामयी मां डॉ शिरोमणि माथुर की आंखों से जहां वात्सल्य बरस रहा था, वहीं कैलाश बरमेचा एक आज्ञाकारी बेटे की तरह डॉ श्रीमती माथुर के हर आदेश को शिरोधार्य करते चले जा रहे थे। यह साहित्यिक आयोजन रिश्तों की मधुरता की एक नई कहानी गढ़ गया।



