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नक्सली हिंसा में पति की जान गई, नौकरी पाने के बाद पत्नी ने बच्चों को बेसहारा छोड़ अपने जानू संग बसा लिया घर

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  • पति की मौत पर पत्नी को मिली है अनुकंपा नियुक्ति
  • बेसहारा बच्चों का भविष्य हो गया है अंधकारमय
  • विधायक टेकाम और कलेक्टर ने साझा किया दोनों अनाथ मासूमों का दर्द

अर्जुन झा

जगदलपुर पति ने जीते जी तो उसकी दुनिया आबाद कर ही दी थी, अपनी मौत के एवज में भी उसे जीने का बड़ा सहारा दे गया। इसके अलावा पति अपने प्यार की दो अनमोल निशानियां भी छोड़ गया है। मगर हवस में अंधी विधवा पत्नी को न पति की कुर्बानी याद रही और न अपने दोनों मासूम बच्चों की कोई परवाह। बहुत ही कम उम्र वाले दोनों बच्चों पर इस बेदर्द महिला को रत्तीभर भी तरस नहीं आई और उन्हें बेसहारा छोड़ उसने अपने प्रेमी के संग अपनी नई दुनिया आबाद कर ली। सिर से बाप का साया उठ जाने और मां के पराये मर्द के साथ चले जाने से दोनों मासूम बच्चों का भविष्य पूरी तरह अंधकारमय हो गया है। हालांकि केशकाल के विधायक नीलकंठ टेकाम और कोंडागांव के कलेक्टर श्री दुदावत ने जो संवेदनशीलता दिखाई है, उससे बच्चों की जिंदगी में उम्मीद की किरण प्रस्फुटित होने की आस जाग उठी है।

पत्थर के भी आंसू निकाल देने वाली यह दास्तां है बस्तर संभाग के कोंडागांव जिले की धनौरा तहसील के केशकाल ब्लाक में स्थित ग्राम पड्डे निवासी स्व. मन्नूराम नाग और उसके बेटे प्रज्ज्वल एवं आशु की। 27 जून 2010 को नक्सलियों ने मन्नूराम नाग की हत्या कर दी थी । मन्नूराम नाग की जब हत्या की गई थी उस समय उसके बड़े बेटे प्रज्जवल की उम्र मात्र दो ढाई वर्ष थी और दूसरा बेटा आशु अपनी मां अमिका नाग के गर्भ में पल रहा था। अब प्रज्जवल की उम्र लगभग 15 वर्ष हो चुकी है और वह इस वर्ष दसवीं कक्षा की पढ़ाई करने वाला है। दूसरा बेटा आशु अब लगभग 13 वर्ष का हो चुका है। आशु जिसने अपने पिता का चेहरा तक देख नहीं पाया था और जिसे पिता का लाड़ प्यार भी नसीब नहीं हो पाया था वह इस वर्ष आठवीं कक्षा में पढ़ाई करेगा। इन दोनों बच्चों के लिए इससे बड़ी बदनसीबी की बात और कोई दूसरी नहीं हो सकती कि पिता की असमय मौत के बाद मां और बाप दोनों का लाड़ प्यार तथा संरक्षण जिस मां से मिलना था वह मां ही कुमाता निकल गई। मां की ममता और फर्ज को दागदार कर देने वाली मां अमिका नाग ने अपने पति की मृत्यु के एवज मिली अनुकंपा नियुक्ति के बाद अपने जिगर के टुकड़ों को बेसहारा छोड़ अपने प्रेमी संग कोर्ट मैरिज कर चली गई। इस तरह पिता और मां के संरक्षण व लाड़ प्यार से वंचित बच्चों के समक्ष जीवन निर्वाह और शिक्षा दीक्षा की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। ज्ञात हो कि छग शासन के गृह विभाग के आदेश और सामान्य प्रशासन विभाग मंत्रालय रायपुर के निर्देशों के तहत नक्सली हिंसा में मृत व्यक्ति के परिवार के आश्रित सदस्य को अनुकंपा नियुक्ति देने का प्रावधानों है। इसी आधार पर कार्यालय कलेक्टर आदिवासी विकास शाखा बस्तर जगदलपुर ने 12 अक्टूबर 2011 ने आदेश जारी कर अमिका नाग पति स्व. मन्नूराम ग्राम पड्डे थाना ईरागांव विकासखंड केशकाल को अनुकंपा नियुक्ति प्रदान की थी।

क्या कहता है नियम?

नक्सली हिंसा में मौत पर अनुकंपा नियुक्ति के नियम शर्त की कंडिका क्रमांक 10 में प्रावधान है कि अनुकंपा नियुक्ति पाने वाले उम्मीदवार को मृतक के समस्त आश्रित सदस्यों के भरण पोषण की सम्पूर्ण जिम्मेदारी का निर्वाह करना अनिवार्य होगा। इस लिहाज से अनुकंपा नियुक्ति प्राप्त अमिका नाग का कर्तव्य बनता था कि वह अपने दिवंगत पति मन्नूराम नाग के माता पिता, अन्य आश्रित परिजनों का भरण पोषण करती। मगर नक्सली हिंसा में मृत मन्नूराम नाग के आश्रित सभी सदस्यों के भरण पोषण की बात तो दूर, अमिका नाग अपने ही कोख से जन्मे और पूरी तरह उस पर निर्भर अपने नाबालिग बच्चों को भी बेसहारा छोड़ नया पति बनाकर उसके साथ रंगरलियां मनाने चली गई।

अपने बच्चों को बेसहारा छोड़कर जाने वाली मां ने यह भी नहीं सोचा कि मेरे जाने के बाद बच्चों का क्या होगा?अब नाबालिग बच्चों के भरण पोषण और शिक्षा दीक्षा को लेकर चिंतित मृतक मन्नू राम के भाई व परिजन यहां वहां फरियाद करते, आवेदन देते भटक रहे हैं।

दो आईएएस ने जगाई आस

केशकाल विधायक नीलकंठ टेकाम जो कि पूर्व आईएएस हैं और कोंडागांव कलेक्टर दुदावत ने दोनों बच्चों के भविष्य से जुड़े मसले को गंभीरता से लिया और संवेदनशीलता दिखाते हुए पहल भी शुरू कर दी है। बच्चों को लेकर उनके पालक बीते दिनों केशकाल विधायक नीलकंठ टेकाम के पास फरियाद करने पंहुचे थे। विधायक श्री टेकाम ने बड़ी संवेदनशीलता दिखाई और बच्चों की पढ़ाई की व्यवस्था कराने का भरोसा दिलाते हुए तुरंत पहल भी प्रारंभ कर दी।

इसके दूसरे दिन पालक बच्चों को लेकर कोंडागांव कलेक्टर श्री दुदावत से मिले और उन्हें आपबीती सुनाई। बच्चों के दर्द को कलेक्टर ने बड़ी गंभीरता से सुना और फौरन दंतेवाड़ा कलेक्टर से बच्चों को जवंगा के आवासीय स्कूल में भर्ती कराने की आवश्यकता बताते हुए उनसे इस बाबत सहयोग का आग्रह किया। बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित परिवार को अपने क्षेत्र के विधायक और जिला कलेक्टर से मिलने के बाद यह उम्मीद जाग उठी है कि अब बच्चों की पढ़ाई का इंतजाम हो जाएगा।

परिवारजनों की मांग

अपने बच्चों को बेसहारा छोडकर जाने पर बच्चों के पालक व नक्सली हिंसा में मृत मृतक के परिवार जन की यही मांग है कि नक्सली हिंसा में मृत मन्नूराम नाग की पत्नी अमिका ने अनुकंपा नियुक्ति आदेश के नियम शर्त कंडिका क्रमांक 10 का उल्लंघन करते दूसरी शादी कर जिम्मेदारी से मुख मोड़ लिया है। इस मामले को देखते हुए उसकी अनुकंपा नियुक्ति तत्काल निरस्त कर दी जाए और मन्नू राम नाग के दोनों बच्चों की पढ़ाई के लिए आवासीय व्यवस्था वाले स्कूल, आश्रम में उन्हें दाखिला दिलाया जाए। इसके साथ ही बस्तर संभाग के अनेक प्रबुद्ध नागरिकों की राय है कि नक्सली हिंसा के मृतकों के अनुकंपा नियुक्ति प्राप्त आश्रितों के लिए नियम शर्त की कंडिका क्रमांक 10 के प्रावधान का पालन कड़ाई से सुनिश्चित कराया जाए, ताकि फिर किसी प्रज्ज्वल और आशु को दर दर भटकना न पड़े।

जमीन विवाद के चलते दो सगे भाइयों की हत्या

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जगदलपुर शहर से लगे ग्राम इरिकपाल में जमीन विवाद के चलते दो सगे भाईयों की हत्या कर दी गई। जमीन विवाद का मामला अभी अदालत में विचाराधीन है।

खेत में काम कर रहे बड़े भाई योगेश कश्यप और छोटे भाई चंद्रशेखर कश्यप की हत्या कर दी गई। मौके पर कोतवाली पुलिस और फोरेंसिक टीम पहुंची थी। शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। मृतकों के परिजनों के अनुसार मारने वाले हल्बा जाति के हैं, जिनके साथ जमीन का विवाद कोर्ट में चल रहा है।

एक बस में दूधमुहे बच्चों सहित 240 सवारी! .. ऎसी बेदर्दी और बेरहमी तो जानवरों के साथ भी नहीं की जाती

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  • जगदलपुर के कुशवाहा ट्रेवल्स संचालक की सामने आई अमानवीयता
  • किरण देव ने कहा- मामले में कराएंगे कड़ी कार्रवाई

अर्जुन झा

जगदलपुर जगदलपुर शहर के बस स्टैंड में जिसने भी इस दिल दहला देने वाले मंजर को देखा, उसकी रूह कांप उठी। जगदलपुर के कुशवाहा ट्रेवल्स की एक यात्री बस में दूधमुहे बच्चों सहित ओड़िशा के 240 मजदूरों को आज हैदराबाद से जगदलपुर लाकर छोड़ दिया गया। यात्रियों को ठूंस ठूंस कर भरे जाने से कई बच्चे और किशोरियां बीमार पड़ गईं। एक बच्चे को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा है। गनीमत है कि छत्तीसगढ़ प्रदेश भाजपा अध्यक्ष एवं स्थानीय विधायक किरण देव और सहृदय बस्तर कलेक्टर विजय दयाराम के. ने इन मजदूरों की तुरंत सुध ले ली। अन्यथा बड़ी अनहोनी हो सकती थी। विधायक और कलेक्टर की पहल पर मजदूरों के ठहरने और भोजन पानी तथा इलाज का तुरंत प्रबंध कर दिया गया।

ओड़िशा से खाने कमाने हैदराबाद गए 240 मजदूरों को कुशवाहा ट्रेवल्स जगदलपुर की एक ही बस में जानवरों की तरह भरकर जगदलपुर के नया बस स्टैंड पर लाकर छोड़ दिया गया।उड़ीसा के इन मजदूरों के साथ दर्जनों छोटे-छोटे बच्चे और अनेक दूधमुहे बच्चे भी शामिल थे। इसके साथ ही उनके बर्तन, कपड़े लत्तों और दीगर सामानों के लगेज को भी ठूंस दिया गया था। ये मजदूर ओड़िशा तक के लिए कुशवाहा ट्रेवल्स की बस को बुक कराकर हैदराबाद से रवाना हुए थे। बस को जगदलपुर से होते हुए ओड़िशा के बलांगीर तक जाना था, मगर कुशवाहा ट्रेवल्स के बस संचालक ने बलांगीर तक के लिए बस की व्यवस्था न होने की बात कहते हुए मजदूरों को बस स्टैंड जगदलपुर में ही छोड़ दिया। भूखे प्यासे और गर्मी के चलते बस स्टैंड में बैठे-बैठे बच्चे बीमार हो गए। इनमें से दो बच्चों की हालत गंभीर है साथ ही काफी संख्या में दूधमुहे बच्चे भी मजदूर परिवारों के साथ मौके पर नजर आए। सहज अनुमान लगाया जा सकता है कि 52-55 सीटर बस में 240 मजदूरों को किस तरह ठूंस ठूंसकर भरा गया होगा और इन गरीबों ने हैदराबाद से जगदलपुर तक की लंबी दूरी कितनी मुसीबत के साथ तय की होगी। किरण देव सिंह और कलेक्टर विजय दयाराम के. ने मजदूरों के ठहरने की व्यवस्था नगर के टाउनहाल में कराई है। साथ ही उनके लिए भोजन, पानी का भी इंतजाम किया गया है। कलेक्टर के निर्देश पर मजदूरों के इलाज के लिए स्वास्थ्य विभाग ने मेडिकल टीम भी टाउन हाल में तैनात कर दी है। ज्यादा बीमार दो बच्चों को महारानी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। प्रशासन द्वारा मजदूरों को ओड़िशा भेजने की व्यवस्था की जा रही है। किरण देव ने कहा है मामला बड़ा ही गंभीर है, दोषी लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई कराई जाएगी।

बस संचालक का कृत्य अक्षम्य

ऎसी बेरहमी और बेदर्दी तो जानवरों के साथ भी नहीं की जाती, जैसी बेरहमी और बेदर्दी भरा सलूक कुशवाहा ट्रेवल्स के संचालक और उनके कर्मचारियों द्वारा ओड़िशा के मजदूरों के साथ किया गया है। यह अमनवीय कृत्य अक्षम्य है। इस पर जिला प्रशासन, महिला एवं बाल आयोग तथा आरटीओ को कड़ा एक्शन लेना होगा। कुशवाहा ट्रेवल्स की सारी बसों की परमिट रद्द कर संचालक और मजदूरों के साथ अमानवीय व्यवहार करने वाले कर्मियों के खिलाफ पुलिस में एफआईआर दर्ज कराई जाने की जरूरत है। ताकि दूसरे बस ऑपरेटर फिर कभी ऐसा दुस्साहस न कर सकें। बता दें कि कुशवाहा ट्रेवल्स की यात्री बसें जगदलपुर से हैदराबाद के बीच अंतर राज्यीय परमिट पर चलती हैं। परमिट अभी जीवित हैं या नहीं, इसकी भी जांच जरूरी है। हैदराबाद में बस्तर और ओड़िशा के मजदूर रोजी रोटी की तलाश में बड़े पैमाने पर गए हुए हैं। ये मजदूर अपने तीज त्यौहारों पर अपने गांव एकसाथ लौटते हैं। इसी का फायदा उठाते हुए बस ऑपरेटर यात्रियों को ठूंस ठूंसकर बसों में भरते हैं।

सरकारी स्कूल मूली के प्राचार्य ने कबाड़ी के हाथों बेच दी स्कूल की अच्छी भली 400 टेबल कुर्सियां

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  • मामला शासकीय उच्चतर माध्यमिक शाला मूली का
  • संवाददाता के कैमरे को देख भाग निकला कबाड़ी

अर्जुन झा-

बकावंड विकासखंड बकावंड की शासकीय उच्चतर माध्यमिक शाला मूली के प्राचार्य ने शाला की 400 पुरानी टेबल कुर्सियों को कबाड़ी के हाथों बेच दिया। जबकि इन टेबल कुर्सियों की मरम्मत कराकर उन्हें फिर से उपयोग में लाया जा सकता था। वहीं इस संवाददाता के कैमरे को देखते ही कबाड़ी मौके से भाग निकला।

जनपद पंचायत बकावंड के अंतर्गत शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय मूली संकुल केंद्र मूली के प्राचार्य दीपक देवांगन द्वारा स्कूल के छात्र छात्राओं के बैठने के उपयोग में लाई जाने वाली अच्छी कंडीशन वाली 400 टेबल कुर्सियों और बेंच को क्लास रुम्स से निकलवाया और कबाड़ी वाले को बुलाकर उन सभी फर्नीचर्स को बेच दिया गया। मूली संकुल केंद्र के कर्मचारियों ने स्कूल के पिछले भाग में ले जाकर 200 नग टेबल और 200 बेंच कुर्सियों समेत कुल 400 नग लोहे के फर्नीचर्स को कबाड़ी वालों हवाले कर दिया था। वहां इन टेबल, कुर्सियों और बेंचेज को हथौड़े से तोड़कर लोहे के स्ट्रक्चर से लकड़ी की सीट को तोड़कर अलग किया जा रहा था। जानकारी मिलने पर यह संवाददाता कैमरा लेकर वहां पहुंच गया। मामले की फोटो वीडियो बनाने पर कबाड़ी वाले सारा फर्नीचर छोड़कर भाग गए। लोहे के स्ट्रक्चर का ढेर एक जगह लगा दिया गया था।

बीईओ मिश्रा ने झाड़ा पल्ला

जब इस संवाददाता ने मूली स्कूल के फर्नीचर्स को कबाड़ी वाले हाथों बेचे जाने के संबंध में बकावंड के विकासखंड शिक्षा अधिकारी श्रीनिवास मिश्रा से चर्चा करनी चाही, तो वे पल्ला झाड़ते नजर आए। बीईओ श्रीनिवास मिश्रा ने साफ कह दिया कि यह मेरा जिम्मेदारी नहीं है, आप जिला शिक्षा अधिकारी भारती मैडम से जानकारी ले लीजिए। जबकि इस पूरे मामले में बीईओ श्री मिश्रा की ही पहली जिम्मेदारी बनती है। उनका प्रथम कर्तव्य बनता था कि वे तुरंत शासकीय उच्चतर माध्यमिक शाला मूली पहुंचते, फर्नीचर्स को कबाड़ियों के हाथों बिकने से रोकते और प्राचार्य दीपक देवांगन की करतूत से अपने वरिष्ठ अधिकारी जिला शिक्षा अधिकारी बस्तर को पूरे मामले की जानकारी देते। मगर बीईओ श्रीनिवास मिश्रा ने अपना दायित्व नहीं निभाया। वहीं प्रकरण में प्राचार्य दीपक देवांगन से चर्चा करने पर उन्होंने चुप्पी साध ली

कराई जा सकती थी मरम्मत

जिन 400 नग कुर्सी, टेबल, बेंचेज को चंद रुपयों के लालच में कबाड़ी वालों के हवाले कर दिया गया, उनकी मामूली मरम्मत कराकर उन्हें नया स्वरूप दिया जा सकता था और फिर से काम लाया जा सकता था। कुर्सियों और बेंचेज की सीट की लकड़ी और टेबलों के ऊपर के लकड़ी से निर्मित पटरे भर को बदलवाने की जरूरत थी। कई कुर्सी, टेबलों और बेंचेज की स्क्रू, किलें ही निकली हुई थीं, जिन्हें आसानी से बदला जा सकता था। यह काम स्कूल स्टॉफ भी कर सकता था। वहीं कुर्सियों, बेंचों और टेबलों पर नई लकड़ी लगाने का काम गांव के ही किसी बढ़ई को बुलाकर कराया जा सकता था। बढ़ई ज्यादा से ज्यादा 700 रुपए प्रतिदिन की दर से मजदूरी लेता। वहीं साइज वाली लकड़ियां, स्क्रू और कीलें बाजार से खरीदकर लाई जा सकती थीं। इतनी रकम शाला विकास समिति मद से ली जा सकती थी, मगर इतनी सी भी जहमत प्रचार्य ने नहीं उठाई। एक सच्चाई तो यह भी है कि स्कूलों में जो फर्नीचर्स उपलब्ध कराए जाते हैं, वे निहायत ही घटिया स्तर के होते हैं। फर्नीचर आपूर्ति करने वालों से कमीशनखोरी के फेर में बड़े अधिकारी फर्नीचर्स की गुणवत्ता पर ध्यान नहीं देते।

रतनजोत बीज खाकर आंगनबाड़ी के बच्चे हुए बीमार, जिला अस्पताल में ईलाज जारी

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  •  कोंडागांव के बनजुगानी गांव का है यह मामला

कोंडागांव कोंडागांव जिले की ग्राम पंचायत बनजुगानी के आंगनबाड़ी केंद्र के करीब दस बच्चे रतनजोत के बीज खाकर बीमार पड़ गए। हालत बिगड़ने पर सभी बच्चों को कोंडागांव लाकर यहां जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया गया है।

मंगलवार की सुबह 7 बजे ग्राम बनजुगानी के बच्चे आंगनबाड़ी केंद्र गए थे। वहां से लगभग 9 बजे आंगनबाड़ी कार्यकर्ता द्वारा छुट्टी दी जाने के बाद बच्चे अपने घर वापस लौट रहे थे। बताया जा रहा है इसी दौरान 8 से 10 बच्चों ने रतन जोत पेड़ के बीज तोड़कर खा लिए। घर पहुंचने के बाद ये बच्चे लगातार उल्टी करने लगे। जिसकी सूचना परिजनों ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को दी, जिसके बाद उन्हें एंबुलेंस संजीवनी 108 से जिला अस्पताल कोंडागांव लाया गया। जहां बच्चों का उपचार जारी है आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सुखयारिन पोयाम ने बताया कि आज आंगनबाड़ी में यूनिसेफ का एक कार्यक्रम आयोजित होना था इसलिए बच्चों को निधार्रित समय से पहले छुट्टी दे दी गई। वहीं सुपरवाइजर ऋतु देवांगन ने बताया कि बच्चे जब हॉस्पिटल आ गए तब उन्हें कार्यकर्ता ने सूचना दी। उन्होंने बताया कि सहायिका बच्चों को घर तक छोड़ने गई थी या नहीं यह उन्हें जानकारी नहीं है। फिलहाल 7 बच्चों का इलाज जिला अस्पताल में जारी है।

वर्सन

खतरे से हैं बाहर

रतनजोत बीज खाने वाले आंगनबाड़ी के सात बच्चों को जिला अस्पताल में लाए हैं, जिनका उपचार जारी है। सभी बच्चे फिलहाल खतरे से बाहर हैं।

  डॉ. सीआर ठाकुर,

सिविल सर्जन, जिला चिकित्सालय कोंडागांव

जनता के विश्वास और कार्यकर्ताओं की कर्मठता से भाजपा को मिली जीत: किरण देव

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  •  प्रदेश भाजपा अध्यक्ष किरण देव का भव्य स्वागत
  •  किरण देव ने छत्तीसगढ़ की जनता व कार्यकर्ताओं का माना आभार

जगदलपुर भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष व विधायक किरण देव के बस्तर आगमन पर सोमवार को भाजपा कार्यकर्ताओं ने उनका जोशीला स्वागत किया। बस्तर सहित छत्तीसगढ़ में भाजपा की एकतरफा शानदार विजय और तीसरी बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केन्द्र में सरकार बनने की बधाई कार्यकर्ताओं ने दी।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण देव ने श्री दंतेश्वरी मंदिर मे मत्था टेका और मांईजी के दर्शन कर पूजा अर्चना की। प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष किरण देव ने कहा कि देश की जनता का विश्वास व आशीर्वाद भाजपा के साथ है। लगातार तीसरी बार नरेंद्र मोदीजी प्रधानमंत्री बने हैं, विकसित भारत का सपना अब तेजी से साकार होगा। डबल इंजन की सरकार के रहते छत्तीसगढ़ में भी अब विकास की गति तीव्र होगी। किरण देव ने कहा कि छत्तीसगढ़ की जनता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दस वर्ष के विकास कार्यो व मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सुशासन पर मुहर लगाई है। भाजपा के सभी कार्यकर्ताओं ने कर्मठता से कार्य किया और छत्तीसगढ़ में कमल खिलाया है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण देव ने प्रदेश की जनता और कार्यकर्ताओं के प्रति आभार व्यक्त किया और तीसरी बार देश का नेतृत्व कर रहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बधाई और शुभकामनाएं प्रेषित की।

मोटरसाइकिल चालक पत्थर से टकराकर गिरा हुई मौत

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आज करीब 11:30 बजे के आस पास दल्ली राजहरा लोहारा मार्ग में मोटरसाइकिल से अपने गांव जाते समय से अनियंत्रित होने पर रोड के किनारे रखे पत्थर में जाकर टकराकर घायल हो गया जिसे उपचार हेतु सी एच सी डोंडी लोहारा ले जाया गया जहां डॉक्टर द्वारा मृत घोषित कर दिया गया मृतक चालक डोमन पिस्दा पिता उदय राम पिस्दा उम्र 48 वर्ष ग्राम सहगांव का रहने वाला बताया जा रहा है मौके पर पुलिस पहुंच कर आगे की कार्यवाही कर रही।

राज्य की भाजपा सरकार की लापरवाही से जल उठा बलौदाबाजार: दीपक बैज

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  •  पीसीसी चीफ ने घटना को बताया दुर्भाग्यपूर्ण
  • लोगों से की शांति बनाए रखने की अपील की बैज ने

अर्जुन झा

जगदलपुर बलौदा बाजार की घटना से बस्तर के आदिवासी नेता एवं प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष दीपक बैज बुरी तरह मर्माहत हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर घटना को दुर्भाग्यजनक बताते हुए इसके लिए राज्य की भाजपा सरकार को जिम्मेदार ठहराया है।

सहृदय युवा आदिवासी नेता एवं पीसीसी चीफ दीपक बैज ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा है कि बलौदा बाजार की घटना दुर्भाग्यपूर्ण है। मै लोगो से शांति बनाए रखने का आग्रह करता हूं। सरकार की लापरवाही से यह अप्रिय स्थित निर्मित हुई है। पंद्रह दिनों पहले असामाजिक तत्वों द्वारा पवित्र जैतखाम को नुकसान पहुंचाने के मामले मे त्वरित कठोर कार्रवाई की गई होती तो शायद यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना नहीं होती। दीपक बैज ने लोगों से संयम और शांति बनाए रखने तथा क़ानून को हाथ मे न लेने की अपील की है। उन्होंने कहा है कि सभ्य समाज मे हिंसा हरगिज बर्दाश्त नहीं की जा सकती। बाबा साहेब के बनाए क़ानून पर भरोसा रखें। दरअसल बलौदाबाजार में सतनामी समुदाय के प्रदर्शन के दौरान सोमवार को जमकर बवाल हो गया। लोगों ने कलेक्ट्रेट में खड़ी अधिकारियों की गाड़ियों में तोड़फोड़ की, बल्कि कलेक्ट्रेट, तहसील और जिला पंचायत कार्यालय में भी आग लगा दी।प्रदर्शनकारियों ने पथराव भी किया। वहीं प्रदर्शनकारियों को रोकने में पुलिस नाकाम रही। सतनामी समाज के करीब चार हजार लोग पहुंचे थे। हालात लगातार बिगड़ने पर राजधानी से भी बड़ी संख्या में फोर्स मौके पर भेजी गई है।

हालात बिगड़ने की वजह

पुलिस ने जैतखाम को नुकसान पहुंचाने के मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। सतनामी समाज के लोगों का आरोप है कि पकड़े गए लोग असली आरोपी नहीं हैं। समाज के लोग स्थानीय पुलिस पर असली दोषियों को बचाने का आरोप लगा रहे हैं। बताया जा रहा है कि सोमवार को प्रदर्शन के दौरान लोग इसी बात को लेकर आक्रोशित हो गए और हालात बिगड़ते चले गए। जैतखाम सतनामी पंथ का ध्वज स्तंभ और संप्रदाय की आस्था का सबसे बड़ा प्रतीक है। आमतौर पर सतनाम समुदाय के लोग मोहल्ले या गांव में किसी चबूतरे या प्रमुख स्थल पर खंभे में सफेद झंडा लगाते हैं।

दुबके रहे पुलिसकर्मी

पथराव के दौरान पुलिसकर्मी जान बचाने कार्यालयों में छिपे रहे। बताया जा रहा है कि भीड़ उग्र हो रही थी, लेकिन लाठीचार्ज के आदेश नहीं मिले। इसके चलते पुलिसकर्मियों को वहां से भागना पड़ा। प्रदर्शनकारी इमारतों पर चढ़ गए और जमकर उत्पात मचाया। आगजनी की खबर पर दमकल की गाड़ियां मौके पर पहुंची तो दमकल गाड़ियों में तोड़फोड़ करते हुए कई गाड़ियों को क्षतिग्रस्त कर दिया गया।

शर्मा ने की थी शांति की अपील

एक दिन पहले ही रविवार को उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने जैतखाम में हुई तोड़फोड़ मामले की न्यायिक जांच कराने की घोषणा की थी। उन्होंने कहा था कि प्रदेश में कही भी सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने वाली घटनाओं को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ऐसे कृत्य करने वाले दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने सभी से सामाजिक सौहार्द्र बनाए रखने की अपील भी की थी।वहीं तीन दिन पहले ही बलौदाबाजार कलेक्टर केएल चौहान और एसएसपी सदानंद कुमार ने शांति समिति की बैठक ली थी। इसमें सभी समाज के लोग और प्रमुख शामिल हुए थे।

नक्सलियों की घर वापसी की पहल ‘लोन वर्राटू’ ने दंतेवाड़ा जिले में मचाई धूम, फिर तीन नक्सली लौटे राह पर

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  •  एक महिला समेत तीन नक्सलियों का समर्पण
  • अब तक 820 नक्सली कर चुके आत्मसमर्पण

अर्जुन झा

जगदलपुर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और उप मुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री विजय शर्मा के मार्गदर्शन में बस्तर संभाग के विभिन्न जिलों में नक्सलियों और उनके सहयोगी ग्रामीणों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए अलग अलग नामों से चलाई जा रही विशेष मुहिम व्यापक असर दिखा रही है। मुहिम और राज्य सरकार की पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर रोज बड़ी संख्या में नक्सली आत्म समर्पण कर रहे हैं। इसी कड़ी में आज फिर दंतेवाड़ा जिले में एक महिला नक्सली समेत तीन नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। दंतेवाड़ा जिले में इस वर्ष अब तक 820 नक्सली आत्मसमर्पण कर चुके हैं।

दंतेवाड़ा जिले में चलाए जा रहे अभियान ‘लोन वर्राटू’ घर वापस आईए तथा छत्तीसगढ़ शासन की पुनर्वास नीति के तहत विगत कुछ माह में जिला पुलिस बल और सीआरपीएफ द्वारा भटके हुए माओवादियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए लगातार संपर्क एवं संवाद किया जा रहा है। साथ ही शासन की नक्सल पुनर्वास नीति का व्यापक प्रचार-प्रसार गांव गांव में किया जा रहा है। इसके सकारात्मक और उत्साह जनक परिणाम भी सामने आ रहे हैं। बड़ी संख्या में माओवादी कैडर का आत्मसमर्पण हो रहा है। बाहरी और कुछ पुराने स्थानीय नक्सलियों के अमानवीय, आधारहीन विचारधारा एवं उनके शोषण, अत्याचार तथा स्थानीय आदिवासियों पर की जाने वाली हिंसा से तंग आकर नक्सलवाद की ओर भटके युवा अब समाज की मुख्यधारा से जुड़ने का संकल्प लेकर आगे आ रहे हैं।

इन्होंने किया समर्पण

गंगालूर, भैरमगढ़ एवं कटेकल्याण एरिया कमेटी के प्रतिबंधित संगठन में मनकेली, पेद्दाकोरमा पंचायत जनमिलिशिया सदस्य संजय बारसे, कुन्ना पंचायत कमेटी सदस्य सुकड़ा मड़कामी, ग्राम फुलगट्टा संघम सदस्या रीना कोरसा ने आज 10 जून को डीआरजी कार्यालय दंतेवाड़ा में आत्मसमर्पण किया। पुलिस अधीक्षक दंतेवाड़ा ने इन आत्मसमर्पित नक्सलियों को छत्तीसगढ़ शासन की पुनर्वास योजना के तहत 25- 25 हजार रूपए की प्रोत्साहन राशि दी एवं पुनर्वास योजना के तहत मिलने वाले सभी प्रकार के लाभ प्रदान कराने की बात कही। लोन वर्राटू अभियान के तहत् अब तक 180 ईनामी नक्सलियों सहित कुल 820 नक्सली आत्मसमर्पण कर समाज की मुख्यधारा से जुड़ चुके हैं।

अभी से जवाब देने लगी है मेसर्स अरोड़ा कंस्ट्रक्शन की बनाई किंजौली -राजनगर पक्की सड़क

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  •  दरारों और गड्ढों से भरी नजर आ रही है यह सड़क
  • निर्माण में बरती गई है जमकर अनियमितता

अर्जुन झा

बकावंड ब्लॉक मुख्यालय बकावंड से पहुंच मार्ग राजनगर रोड से किंजौली पांच चौक तक घटिया डामर रोड का निर्माण कराया गया है। कुछ माह पहले बनी इस पक्की सड़क पर दरारें पड़ गई हैं और गड्ढे हो गए हैं। पटरियों पर बहुत कम मुरुम मिट्टी डाली गई थी और उसे रोलर से दबाया भी नहीं गया था। अब पटरियों पर मुरुम नजर ही नहीं आ रही है।

इस सड़क का निर्माण लोक निर्माण विभाग द्वारा अरोड़ा कंस्ट्रक्शन के माध्यम से कराया गया है। यह ठेका फर्म निर्माण कार्यों में गुणवत्ता की अनदेखी और सार्वजनिक एवं सरकारी जगहों से गौण खनिज का अवैध खनन कर उसका इस्तेमाल सड़क निर्माण में करने के लिए बेहद चर्चित है। लोक निर्माण विभाग के अधिकारी मेसर्स अरोड़ा कंस्ट्रक्शन पर कुछ ज्यादा ही मेहरबान हैं। यही वजह है कि उसके कराए गए निर्माण कार्यों की खामियों को नजर अंदाज कर दिया जाता है और बाद में इसका खामियाजा संबंधित क्षेत्र के ग्रामीणों को भुगतना पड़ता है। कुछ ऎसी ही कारगुजारी मेसर्स अरोड़ा कंस्ट्रक्शन ने राजनगर से किंजौली तक डामरीकृत मार्ग के निर्माण में भी की है। हाल ही में बनकर तैयार हुई यह सड़क अभी से जवाब देने लगी है। सड़क पर जगह जगह गड्ढे और दरारें नजर आने लगी हैं। रोड के दोनों किनारों से मुरुम की पटरियां अस्तित्व हीन हो चुकी हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पुरानी सड़क पर गिट्टी मुरुम का ढंग से भराव नहीं किया गया और न ही उसे रोड रोलर के जरिए अच्छे से दबाया गया। डामर रोड की बुनियाद ही कमजोर रखी गई थी और उस पर मिक्स तारकोल की बहुत ही पतली परत बिछा दी गई। वहीं पटरियों को भी दबाया नहीं गया था। इसी के चलते यह पक्की सड़क अभी से उखड़ने लगी है। अरोड़ा कंस्ट्रक्शन द्वारा कराए गए रोड चौड़ीकरण और पुलिया निर्माण के दौरान बड़ी दुर्घटना भी हो चुकी है। इसे लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों ने ऐसे लापरवाह ठेकेदार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और उनके टेंडर को रद्द करने की मांग की है।

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