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दल्ली राजहरा में भीषण सड़क हादसा: विवाह समारोह में शामिल युवक की दर्दनाक मौत

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दल्लीराजहरा। नगर के कारूटोला मोड़ के आगे मुर्गा बाजार के पास सड़क पर शनिवार सुबह करीब 5 बजे एक दर्दनाक सड़क हादसे में विवाह समारोह में शामिल होने आए एक युवक की मौत हो गई। हादसा इतना भयावह था कि अज्ञात वाहन की ठोकर से युवक का सिर बुरी तरह कुचल गया। घटना की खबर मिलते ही विवाह समारोह की खुशियां मातम में बदल गईं और पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल निर्मित हो गया। प्राप्त जानकारी के अनुसार मृतक नाम ओम प्रकाश कोमरे उम्र 32 वर्ष काकड़ कसा रहने वाला था। मृतक युवक दूसरे गांव से विवाह कार्यक्रम में शामिल होने आया था। शुक्रवार रात से चल रहे नाच-गाने एवं विवाह समारोह में वह देर रात तक कार्यक्रम में व्यस्त रहा।

बताया जा रहा है कि सुबह किसी कारणवश युवक सड़क की ओर गया था, तभी तेज रफ्तार अज्ञात वाहन ने उसे अपनी चपेट में ले लिया। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि युवक की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई।

घटना की जानकारी मिलते ही विवाह समारोह में शामिल लोगों एवं ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया। ग्रामीणों ने कारूटोला मोड़ के पास सड़क पर चक्का जाम कर विरोध प्रदर्शन किया। चक्का जाम के दौरान सड़क के दोनों ओर ट्रकों और अन्य वाहनों की लंबी कतार लग गई, जिससे यातायात पूरी तरह बाधित हो गया। मौके पर बड़ी संख्या में ग्रामीण एवं राहगीरों की भीड़ जमा हो गई थी।सूचना मिलने पर पुलिस टीम तत्काल घटनास्थल पहुंची और ग्रामीणों को समझाइश देकर स्थिति को नियंत्रित किया। पुलिस ने शव का पंचनामा कार्रवाई पूरी कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। वहीं अज्ञात वाहन की तलाश शुरू कर दी गई है। इस हृदयविदारक घटना से विवाह समारोह में शामिल लोगों सहित पूरे क्षेत्र में गहरा शोक व्याप्त है।

सूडा के सहायक अभियंता गगन वासन के लिए नहीं है कोई नियम कायदा

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तबादले के बाद भी नहीं ले रहे हैं जगदलपुर में ज्वाइनिंग

करोड़ों रुपयों की गड़बड़ी के आरोपों से घिरे हैं सहायक अभियंता वासन

जगदलपुर लगता है कि राज्य शहरी विकास प्राधिकरण सूडा के अफसरों के लिए सरकारी नियम कायदे और आदेश कोई मायने नहीं रखते। यही वजह है कि वे अपनी मनमर्जी चलाते रहते हैं।राजयपाल के आदेश भी इन अफसरों के लिए बेमानी हो गए हैं। विभाग के सीईओ और एक सहायक अभियंता की ऎसी ही नफरमानी का बड़ा मामला सामने आया है। सहायक अभियंता को रायपुर से जगदलपुर स्थानांतरित किया गया है, लेकिन उन्होंने आज तक जगदलपुर में ज्वाइनिंग नहीं ली है। कहा जा रहा है कि सीईओ उन्हें रिलीव करने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। चर्चाओं के मुताबिक ये सहायक अभियंता करोड़ों रुपयों की गड़बड़ी के आरोपों से घिरे हुए हैं। उन्हें रिलीव न करने की पीछे की एक वजह इसी गड़बड़ी को भी माना जा रहा है।

राज्य शहरी विकास प्राधिकरण को उप सचिव द्वारा 9 मई 2026 को राज्यपाल के नाम से एक आदेश जारी कर सूडा के आठ अधिकारियों का ट्रांसफर किया गया था। ट्रांसफर लिस्ट में सहायक अभियंता गगन वासन का भी नाम शामिल है।

वासन को रायपुर से जगदलपुर स्थानांतरित किया गया है, लेकिन आज दिनांक वासन ने जगदलपुर में ज्वाइनिंग नहीं ली है। बताया गया है कि सूडा के सीईओ द्वारा गगन वासन को जगदलपुर के लिए रिलीव नही किया जा रहा है। इससे प्रतीत होता है कि वासन की पहुंच और सेटिंग कितनी तगड़ी है। एक चर्चा यह भी है कि करोड़ों रुपए की अफरा तफरी के मामले में उक्त अधिकारी का नाम सामने आया है। शायद अपने कारनामे करने के लिए ही वे रायपुर में डटे रहना चाहते हैं और बस्तर आने से बच रहे हैं। सुशासन सरकार में बड़े प्रशासनिक अधिकारी से सांठगांठ कर वे अपना तबादला रुकवाने के प्रयास में लगे हैं।

बस्तर में होने वाली मध्य क्षेत्रीय परिषद की ऐतिहासिक बैठक को लेकर भाजयुमो की महत्वपूर्ण बैठक संपन्न,अमित शाह की अध्यक्षता में जुटेंगे चार राज्यों के मुख्यमंत्री

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जगदलपुर: भारतीय जनता युवा मोर्चा जिला बस्तर की प्रथम संगठनात्मक बैठक आज भाजपा जिला कार्यालय जगदलपुर में आयोजित की गई। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य नवनियुक्त जिला पदाधिकारियों का स्वागत करने के साथ साथ आगामी 19 मई 2026 को बस्तर की पावन धरा पर होने वाली ‘मध्य क्षेत्रीय परिषद’ की उच्च-स्तरीय बैठक की तैयारियों और युवा मोर्चा की सहभागिता पर चर्चा करना रहा। बैठक के दौरान वक्ताओं ने इस बात पर हर्ष व्यक्त किया कि बस्तर के इतिहास में पहली बार इतने बड़े स्तर की सुरक्षा और विकास केंद्रित बैठक आयोजित हो रही है। आगामी 19 मई को देश के केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ,मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी शिरकत करेंगे। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 18 मई की रात्रि को ही जगदलपुर पहुंच जाएंगे, जो बस्तर के प्रति केंद्र सरकार की संवेदनशीलता और प्राथमिकता को दर्शाता है।बैठक

में यह रेखांकित किया गया कि इस हाई लेवल बैठक के केंद्र में नक्सलवाद का उन्मूलन,अंतर्राज्यीय सुरक्षा, बॉर्डर सेफ्टी और बस्तर सहित मध्य भारत के विकास जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण विषय होंगे। इस अवसर पर भाजयुमो जिला अध्यक्ष अभिलाष यादव ने सभी नवनियुक्त पदाधिकारियों को उज्जवल कार्यकाल की शुभकामनाएं दिया। बैठक में मुख्य रूप से प्रदेश सह कोषाध्यक्ष कीर्ति पाढ़ी,नगर अध्यक्ष पश्चिम मंडल प्रकाश झा,पूर्वी मंडल अध्यक्ष अविनाश श्रीवास्तव,भरत बघेल,आंनद झा, विकास पात्रों, जीवनाथ मौर्य, राम प्रसाद मौर्य, डीकेश नाग, मयंक दीवान, सोम प्रकाश जोशी, अनुष्का साहू, अमित कपूर, रोहन घोष, मोरध्वज सेठिया, तमिश नायडू, मनी विक्रम नायडू, तेजस्विता घोष, काजल वर्मा, शैलेन्द्र भदौरिया, रवि नेताम, शरद श्रीवास्तव, जशवंत जोशी, प्राचीन तिवारी, आदर्श ठाकुर, मुकेश शर्मा, विवेक साहू, नरेन्द्र पांडे, रमेश नायडू, अनिमेष चौहान, रुपेश समरथ, गुलाम अशरफ गोरी, राज पांडे और रितेश झा सहित भारी संख्या में युवा मोर्चा के कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

कभी नक्सल गढ़ रहे गोमपाड़ में उग आया सुशासन का सूरज

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पूरी तरह बदल गई गांव की तस्वीर और तकदीर

सुशासन तिहार के में जमीन पर बैठ कर अफसरों ने सुनी समस्याएं

जगदलपुर/कोंटा जहां कभी नक्सलियों की समानांतर सरकार चलती थी, नक्सल प्रभावित क्षेत्र के रूप में कुख्यात उस गोमपाड़ का इतिहास अब तेजी से बदल रहा है। लाल आतंक के साये में सरकारी योजनाएं जहां दम तोड़ देती थीं, उसी धरती पर छत्तीसगढ़ सरकार का ‘सुशासन तिहार’ उम्मीद और विश्वास के साथ आयोजित हुआ। नक्सल उन्मूलन की घोषणा के बाद पहली बार जिला प्रशासन का अमला जब गोमपाड़ पहुंचा तो ग्रामीणों की आंखों में अविश्वास की जगह उम्मीद की चमक साफ दिखाई दे रही थी। प्रशासनिक अधिकारियों ने गांव की चौपाल में ग्रामीणों के बीच बैठकर उनके साथ आत्मीय संवाद किया। इस दौरान दशकों से विकास की बाट जोह रहे ग्रामीणों ने खुलकर अपनी मांगें प्रशासन के समक्ष रखीं।

प्रशासनिक अमले में शामिल अधिकारी ने ग्रामीणों को संबोधित करते हुए कहा कि गोमपाड़ अब नक्सलियों का नहीं, संविधान को मानने वालों का गांव है। इस गांव का दर्द वैसे तो दशकों पुराना है, पर अब समाधान महीनों में दिखेगा। उन्होंने मौके पर ही स्वास्थ्य विभाग को हर 15 दिन में हेल्थ कैंप लगाने, शिक्षा विभाग को शिक्षकों की व्यवस्था करने और पंचायत विभाग के अधिकारियों को तालाब गहरीकरण का प्रस्ताव जल्द तैयार करने के निर्देश दिए। भरोसा दिलाया कि मोबाईल टॉवर के लिए सुरक्षा और तकनीकी सर्वे इसी सप्ताह शुरू होगा। प्रशासनिक अधिकारियों को अपने बीच पाकर गांव के एक बुजुर्ग ने कहा कि हमने कभी सोचा भी नहीं था कि प्रशासन हमारे गांव की माटी पर हमारे बीच बैठकर हमारी समस्याओं को सुनेगा। पहले यहां बंदूक बोलती थी, आज सरकार बोल रही है। यही असली आजादी है। नक्सलवाद की काली छाया से निकलकर सुशासन के उजाले की ओर बड़ रहा है गोमपाड़।*बॉक्स

भावुक हुए पी. विजय

सुशासन तिहार के ऐतिहासिक अवसर पर कोंटा क्षेत्र के वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता एवं नक्सल विरोधी अभियान के नेता पी. विजय पहली बार नक्सल मुक्त गोमपाड़ पहुंचे। दशकों तक नक्सल हिंसा का दंश झेल चुके बस्तर में शांति और नक्सल विरोध की अलख जगाने वाले पी. विजय की आंखें गांव की बदली हुई तस्वीर देखकर नम हो गईं। उन्होंने कहा कि आज गोमपाड़ की माटी को नमन करते हुए मेरा सिर गर्व से ऊंचा हो गया है। मैंने अपने जीवन के 25 वर्ष इस लाल आतंक के विरुद्ध लड़ते-लड़ते गुजार दिए। कभी इसी गोमपाड़ का नाम सुनते ही रूह कांप उठती थी। कभी यह गांव व नक्सलियों की ‘लिबरेटेड जोन’ और समानांतर सरकार का प्रतीक माना जाता था। यहां भारत का संविधान नहीं, बंदूक का कानून चलता था। पर आज यहां तिरंगा लहरा रहा है, प्रशासनिक अधिकारी जमीन पर बैठकर माता-बहनों की बात सुन रहे हैं, और बच्चे ‘भारत माता की जय’ बोल रहे हैं। इससे बड़ा चमत्कार लोकतंत्र के लिए और क्या हो सकता है। मैं उन वीर जवानों को शत-शत नमन करता हूं, जिन्होंने अपना रक्त देकर इस धरती को भयमुक्त किया। उन शहीद परिवारों को प्रणाम करता हूं, जिनके अपनों की कुर्बानी से आज गोमपाड़ में सुशासन का सूरज उगा है, पर यह शुरुआत मात्र है, मंजिल नहीं। इस अवसर पर उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया कि गोमपाड़ को विशेष अपेक्षित गांव के तौर पर लेते हुए यहां मूलभूत सुविधाओं का विस्तार करें। शासन की योजनाओं को गांव के हर व्यक्ति तक पहुंचाएं। यहां विकास की ऐसी इबारत लिखें कि हमारा गोमपाड़ आदर्श नक्सलमुक्त ग्राम बन सके। ग्रामीणों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि डरने का समय अब चला गया अब गढ़ने का समय आया है। सरकार आपके द्वार पर है, पर विकास की मशाल आपके हाथ में है। शिक्षा को अपना हथियार बनाओ, संविधान को अपना कवच बनाओ। फिर देखना, कोई भी ताकत गोमपाड़ को दोबारा अंधेरे में नहीं धकेल सकेगी।

विभा कंस्ट्रक्शन पर घटिया निर्माण और धोखाधड़ी का आरोप

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ठेकेदार के खिलाफ एफआईआर की तैयारी

बारिश में टपकने लगी छत, रिसने लगी दीवारें

उपभोक्ता फोरम की शरण में जाने की तैयारी

जगदलपुर शहर में मकान निर्माण को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। एक परिवार ने निर्माण एजेंसी विभा कंस्ट्रक्शन और उससे जुड़े ठेकेदार पर घटिया निर्माण कार्य करने, भरोसे का दुरुपयोग करने और आर्थिक नुकसान पहुंचाने के आरोप लगाए हैं। मामले में बोधघाट थाना में लिखित शिकायत दी गई है। पीड़ित परिवार ने साफ कहा है कि अगले सप्ताह तक ठेकेदार के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के साथ ही उपभोक्ता फोरम में भी मामला पंजीकृत कराया जाएगा।

शिकायत के अनुसार परिवार ने वर्ष 2024 में अपने मकान के प्रथम तल के निर्माण के लिए विभा कंस्ट्रक्शन से लिखित अनुबंध किया था। निर्माण कार्य के लिए लगभग 14 से 15 लाख रुपए तक का भुगतान ऑनलाइन और नगद माध्यम से किया गया। परिवार का आरोप है कि भुगतान लेने के बावजूद निर्माण कार्य बेहद लापरवाही पूर्वक और खराब गुणवत्ता के साथ किया गया, जिसके कारण अब मकान में गंभीर समस्याएं सामने आने लगी हैं। आवेदन में बताया गया है कि बारिश शुरू होते ही मकान की छत और दीवारों से कई जगह पानी टपकने लगा है। लगातार रिसाव के कारण मकान के दोनों तल की दीवारों, छत और अन्य हिस्सों को नुकसान पहुंचा है। शिकायतकर्ता ने कहा है कि हल्की बारिश में भी मकान के अंदर सीपेज शुरू हो जाता है। मामले से जुड़े फोटो और वीडियो प्रमाण भी पुलिस को उपलब्ध कराए गए हैं। पीड़ित पक्ष का कहना है कि निर्माण में गड़बड़ी सामने आने के बाद कई बार ठेकेदार को समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिलता रहा।

शिकायत में बताया गया है कि पुलिस के हस्तक्षेप के बाद जल्दबाजी में केवल डैम प्रूफिंग का कार्य कराया गया, लेकिन बारिश से हुए नुकसान के बाद अब भी पोताई और टाइल्स समेत कई जरूरी काम अधूरे पड़े हैं। आरोप है कि ठेकेदार लगातार पैसों की कमी और इस कार्य में लाभ नहीं होने जैसी बातें कहकर जिम्मेदारी से बचने का प्रयास कर रहा है। इधर पीड़ित परिवार ने दावा किया है कि निर्माण कार्य के दौरान ठेकेदार का कोई भुगतान बकाया नहीं रखा गया और तय राशि पूरी तरह चुका दी गई थी। इसके बावजूद अब मरम्मत और अधूरे कार्यों को लेकर लगातार टालमटोल किया जा रहा है। बोधघाट थाना को दिए गए आवेदन में भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर वैधानिक कार्रवाई की मांग की गई है। पूरे घटनाक्रम के सामने आने के बाद शहर में निजी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और ठेकेदारों की जवाबदेही को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

प्रधानमंत्री मोदी की अपील का असर; बैलगाड़ी में निकली बारात, न डीजे, न धमाल, फिर भी कमाल

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परंपरा, सादगी और प्रकृति की उपासना का अनूठा संगम

बस्तर के युवा कुबेर देहारी ने जीता दिल

अर्जुन झा

जगदलपुर न कारों और बसों का काफिला, न ही डीजे, बैंड एवं धमाल बाजा का शोर शोराबा, फिर भी दिखा एक बरात में गजब का कमाल। बस्तर के दूल्हे राजा कुबेर देहारी ने जीत लिया सबका दिल। आदिवासी वैसे भी प्रकृति के उपासक होते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील का भी असर रहा कि कुबेर ने अपनी बरात बैलगाड़ी से निकाली।संस्कृति और परंपरा का पुराना वैभव पुनः आलोकित हो उठा। देखने वाले देखते ही रह गए। गजब की सादगी, प्रकृति के सामिप्य का अनूठा अनुभव। यह अतुल्य दृश्य देखने को मिला बस्तर संभाग के नारायणपुर जिले में।

आधुनिक युग में जहां शादियों में महंगी कारों, डीजे और हेलीकॉप्टर का चलन बढ़ता जा रहा है, वहीं नारायणपुर जिले के डूमरतराई गांव निवासी देहारी परिवार ने बैलगाड़ी में बरात निकालकर भारतीय ग्रामीण संस्कृति और पुरानी परंपराओं को जीवंत करने का अनूठा संदेश दिया।दूल्हे राजा कुबेर देहारी एवं उनके परिवार द्वारा निकाली गई यह पारंपरिक बरात समूचे अंचल के लिए दर्शनीय और चर्चा का विषय बन गई। सजी-धजी बैलगाड़ी, पारंपरिक वेशभूषा और ग्रामीण माहौल ने लोगों को पुरानी संस्कृति की याद दिला दी। देहारी परिवार के लोगों का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य खर्चीली शादियों को कम करने, परंपराओं को जीवित रखने तथा पर्यावरण संरक्षण का संदेश देना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “पर्यावरण संरक्षण एवं ईंधन बचत” के आह्वान से प्रेरित होकर यह अनूठी पहल की गई।

सब कुछ ईको फ्रेंडली

बरात में न डीजे था, न बैंड और न धमाल बाजा। तेज ध्वनि की बजाय पारंपरिक वाद्ययंत्रों का उपयोग किया गया। वहीं टेंट के स्थान पर छिंद पत्तों से मंडप तैयार किया गया था। स्वागत द्वार को पेड़-पौधों की पत्तियों और फूलों से सजाया गया था। ग्रामीण परिवेश में आयोजित यह विवाह समारोह लोगों के आकर्षण का केंद्र बना रहा। स्थानीय लोगों ने इसे भारतीय संस्कृति, सादगी और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में प्रेरणादायक पहल बताया।

महापौर के आदेश को ठेंगा दिखा रहे सुलभ शौचालय के संचालक

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वाशरूम इस्तेमाल पर महिलाओं से वसूला जा रहा है 10 रुपए का शुल्क

यूरिनल उपयोग पर कोई चार्ज न लेने की हिदायत दी थी मेयर पाण्डेय ने

जगदलपुर महापौर संजय पाण्डेय के स्पष्ट निर्देश के बावजूड जगदलपुर के नया बस स्टैंड स्थित सुलभ जन सुविधा केंद्र में महिलाओं से मूत्रालय उपयोग के नाम पर 10 रुपए का शुल्क वसूला जा रहा है। इसे लेकर बस यात्रियों और स्थानीय लोगों में नाराजगी देखी जा रही है। बस स्टैंड पहुंचने वाली महिला यात्रियों का कहना है कि सार्वजनिक सुविधा होने के बावजूद इतनी अधिक राशि की वसूली उचित नहीं है।

महिलाओं का आरोप है कि बस स्टैंड में सफर के दौरान मजबूरीवश उन्हें इस सुविधा का उपयोग करना पड़ता है और इसके बदले 10 रुपए तक शुल्क देना पड़ रहा है। कई यात्रियों ने इसे आम लोगों, विशेषकर गरीब एवं ग्रामीण क्षेत्र से आने वाली महिलाओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बताया है।स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार और प्रशासन द्वारा सार्वजनिक स्थलों पर स्वच्छता एवं मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए विभिन्न योजनाएं चलाई जा रही हैं, लेकिन इसके बावजूद ऐसी जगहों पर मनमाना शुल्क वसूला जाना सवाल खड़े करता है। लोगों ने प्रशासन से मामले की जांच कर निर्धारित शुल्क सूची सार्वजनिक करने तथा नियमों के अनुरूप ही राशि लेने की मांग की है। बस स्टैंड में प्रतिदिन बड़ी संख्या में यात्री पहुंचते हैं, जिनमें महिलाएं भी शामिल रहती हैं। ऐसे में सुलभ केंद्र में लिए जा रहे शुल्क को लेकर अब सामाजिक संगठनों और यात्रियों के बीच चर्चा तेज हो गई है। वहीं, इस पूरे मामले पर संबंधित विभाग या प्रबंधन की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

मेयर संजय पाण्डेय ने दिए थे निर्देश

हाल हीे में महापौर संजय पाण्डेय ने नया बस स्टैंड स्थित सार्वजनिक सुलभ शौचालयों का औचक निरीक्षण किया था। इस दौरान शौचालय परिसर एवं उसके आसपास फैली गंदगी को देखकर महापौर ने नाराजगी जताते हुए सुलभ शौचालय के संचालक को कड़ी समझाईश दी थी। उन्होंने स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा था कि सुलभ शौचालयों में मूत्रालय का उपयोग पूरी तरह निःशुल्क है तथा किसी भी व्यक्ति से इसके लिए राशि नहीं ली जानी चाहिए। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे सार्वजनिक स्थानों पर यूरिन करने के बजाय शौचालयों एवं मूत्रालयों का उपयोग करें, जिससे स्वच्छता बनी रहे।उन्होंने यह भी कहा था कि सभी सुलभ शौचालयों में लगाए जाने वाले फ्लैक्स एवं सूचना बोर्ड पर “मूत्रालय उपयोग निःशुल्क है” का उल्लेख बड़े एवं स्पष्ट अक्षरों में किया जाए ताकि आमजन को सही जानकारी मिल सके और अनावश्यक शुल्क वसूली जैसी शिकायतें सामने न आएं।इसके साथ ही नया बस स्टैंड परिसर में स्वच्छता व्यवस्था को और बेहतर बनाने के उद्देश्य से सफाई टीम को नियमित सफाई, कचरा उठाव एवं शौचालयों की निगरानी संबंधी आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए गए थे।

दल्ली राजहरा बस स्टैंड में होटल संचालक के साथ मारपीट

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दल्लीराजहरा। नगर के बस स्टैंड क्षेत्र में स्थित एक होटल में चाय-नाश्ते के पैसे मांगने पर होटल संचालक के साथ गाली-गलौज, मारपीट और जान से मारने की धमकी देने का मामला सामने आया है। घटना में होटल संचालक गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसे उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया। राजहरा पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है, जबकि मामले में शामिल अन्य फरार आरोपियों की तलाश जारी है।प्राप्त जानकारी के अनुसार बस स्टैंड क्षेत्र स्थित “आदिल होटल” के संचालक अब्दुल यूसुफ ने राजहरा थाने में शिकायत दर्ज कराई कि वह मंगलवार दोपहर अपने होटल में कैश काउंटर पर बैठा हुआ था।इसी

दौरान वार्ड क्रमांक 20 निवासी अजय बिहारी, निजाम शरीफ, पिट्टू सोनी उर्फ लक्ष्मीनारायण सोनी एवं विजय बिहारी होटल पहुंचे और वहां चाय-नाश्ता किया।होटल संचालक द्वारा जब उनसे पैसे मांगे गए तो आरोपी भड़क गए और विवाद शुरू कर दिया। आरोपियों ने होटल बंद करा देने की धमकी देते हुए गाली-गलौज शुरू कर दी। इसके बाद सभी ने मिलकर शराब पीने के लिए पैसों की मांग की। विरोध करने पर अजय बिहारी ने अपने छोटे भाई विजय बिहारी को फोन कर मौके पर बुलाया। कुछ अन्य युवक भी वहां पहुंच गए और सभी ने मिलकर होटल संचालक अब्दुल यूसुफ के साथ जमकर मारपीट की।मारपीट में होटल संचालक के सिर, दाहिने जबड़े और दोनों आंखों के नीचे गंभीर चोटें आई हैं। घटना के बाद आसपास मौजूद लोगों ने बीच-बचाव कर घायल को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया। मामले की सूचना मिलते ही राजहरा पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कीपुलिस

ने प्रकरण दर्ज कर कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया। आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 115(2), 119(1), 191(2), 296 एवं 351(3) के तहत मामला दर्ज किया गया है।नगर पुलिस अधीक्षक विकास पाटले ने बताया कि घटना में शामिल अन्य फरार आरोपियों की तलाश की जा रही है। पुलिस लगातार संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है और जल्द ही बाकी आरोपियों को भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा। घटना के बाद बस स्टैंड क्षेत्र के व्यापारियों और होटल संचालकों में आक्रोश का माहौल है।

भाजपा नगरनार मंडल में पांच मोर्चों की नई कार्यकारिणी

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जगदलपुर भारतीय जनता पार्टी ने नगरनार मंडल में पांच मोर्चों की नवीन कार्यकारिणी व पदाधिकारियों की घोषणा की है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव व भाजपा संगठन महामंत्री पवन साय की अनुमति से भाजपा जिला अध्यक्ष वेदप्रकाश पाण्डेय ने नगरनार मंडल में महिला मोर्चा, किसान मोर्चा, पिछड़ा वर्ग मोर्चा, अनुसूचित जनजाति मोर्चा व अनुसूचित जाति मोर्चा की नई कार्यकारिणी की घोषणा की है।

भाजपा महिला मोर्चा मंडल अध्यक्ष लक्ष्मी घरत, उपाध्यक्ष पुष्पा मिश्रा, रेवती सेठिया, सुमन ठाकुर, महामंत्री राधा वड्डे व वृंदा साहू नियुक्त की गई हैं। मंत्री कमली ठाकुर, धनकेशरी, प्रमिला, कोषाध्यक्ष दलजीत चालकी, सह कोषाध्यक्ष सुषमा यादव नियुक्त की गई हैं। भाजपा किसान मोर्चा, मंडल अध्यक्ष का दायित्व घनश्याम सेठिया को सौंपा गया है। उपाध्यक्ष लिंगेश्वर सेठिया, त्रिपति नागेश, शिरो नाग, थनुर्जय बघेल, महामंत्री बलराम नाग व जयंत जोशी बने हैं। वहीं मंत्री खगेश्वर देवांगन, भगवती कश्यप, प्रेम सेठिया, राजेंद्र नाग, सोनधर कश्यप, कोषाध्यक्ष भीषम नेताम, सह कोषाध्यक्ष दयालु कश्यप, मीडिया प्रभारी मेहत्तर नाग, सह मीडिया प्रभारी बनसिंह ठाकुर नियुक्त हुए हैं। पिछड़ा वर्ग मोर्चा मंडल अध्यक्ष दुजेश्वर देवांगन, उपाध्यक्ष धनुर्जय देवांगन, पुनीत साहू, आनंद राव, राजेश सेठिया, महामंत्री किरत सागर यादव व मुरली मनोहर दास को बनाया गया है। कोषाध्यक्ष गौतम ठाकुर, सह कोषाध्यक्ष गोविंद देवांगन, मंत्री सूरज सेठिया, नारायण ठाकुर, भूपेंद्र ठाकुर, आशीष ठाकुर, जयमन सेठिया व मीडिया प्रभारी बनें हैं। अजजा मोर्चा मंडल अध्यक्ष नीलकंठ ध्रुव, उपाध्यक्ष गुखबंधु रामप्रसाद गोयल, अनंतराम मौर्य, उमेश नाग, महामंत्री रामचंद्र बघेल व सूरज नाग बनाए गए हैं। मंत्री पद पर मनीराम बघेल, मन्नू राम बघेल, सम्पत कश्यप, रैनू बघेल, लछिंदर भारती, कोषाध्यक्ष प्रेम नाग, सह कोषाध्यक्ष मनदेव बघेल, मीडिया प्रभारी गिरीश घरत, सोशल मीडिया प्रभारी आसमान भारती व कार्यालय प्रभारी नीलकंठ नाग की नियुक्ति की गई है। अजा मोर्चा मंडल अध्यक्ष बाबूलाल कश्यप, उपाध्यक्ष हरिसिंह बेसरा, पीलादास नेताम, देवकी कश्यप, महामंत्री देवराज सोनवानी व जयराम बघेल, मंत्री मनीष चालकी, महादेव नाग, आनंद नाग, कोषाध्यक्ष तिलक बेसरा, सह कोषाध्यक्ष जगतराम बेसरा, कार्यालय मंत्री हरिनाथ नायर, मीडिया प्रभारी प्रीतम पात्रे, सह मीडिया प्रभारी रिंकू चालकी, सोशल मीडिया प्रभारी योगेंद्र नाग, सह सोशल मीडिया प्रभारी धरम सिंह कश्यप, छात्रावास प्रभारी छेवदास बघेल, महिला प्रमुख रिंकी बेसरा, आईटी सेल प्रभारी महेश नागेश नियुक्त हुए हैं।

आठ आदिवासी परिवार लौट आए मूल धर्म में, ईलाज के नाम पर हुआ था ब्रेनवाश

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अबूझमाड़ तक फैला है मतांतरण का जाल

घर वापसी पर हुआ धूमधाम से स्वागत

अर्जुन झा-

जगदलपुर नक्सली आतंक से मुक्त बस्तर के आदिवासी अब मतांतरण के भी कुचक्र से बाहर निकलते जा रहे हैं। मनो वैज्ञानिक तरीके से ब्रेनवाश कर धर्मांतरित किए गए आदिवासी तेजी से अपनी जड़ों की ओर लौट रहे हैं। ऐसे ही एक घटनाक्रम में अबूझमाड़ जैसे दुरूह और अति संवेदनशील क्षेत्र के आठ आदिवासी परिवार अपने मूल धर्म में लौट आए हैं।

बस्तर संभाग में अबूझमाड़ वह क्षेत्र है, जहां के कई गांवों में अफसरों और जनप्रतिनिधि के तक कदम नहीं पड़ पाए हैं। वहां एक तो नक्सली काबिज रहे हैं और दूसरे मतांतरण कराने वाले लोग। ये लोग सेवा, ईलाज आदि के नाम पर भोले भाले आदिवासियों का ब्रेनवाश कर उन्हें अपने समाज व धर्म में शामिल करते आए हैं। कथित चंगाई सभाओं में बीमारियां ठीक करने का दावा करते हुए हजारों आदिवासियों काकन्वर्जन करा लिया गया है। लेकिन अब बयार उलटी बहने लगी है। कन्वर्ट हो चुके आदिवासियों का उस मायाजाल से मोहभंग होता जा रहा है और वे फिर अपनी जड़ों से जुड़ने लगे हैं। बस्तर संभाग के नारायणपुर जिले के 84 परगना छोटेडोंगर क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण सामाजिक घटनाक्रम सामने आया है। 11 मई को ग्राम धनोरा और ग्राम जम्हरी के आठ आदिवासी परिवारों ने ईसाई धर्म त्याग कर पुनः अपने मूल धर्म और आदिवासी संस्कृति को अपना लिया है। ग्राम पंचायत धनोरा में आयोजित एक सामाजिक बैठक में समाज के वरिष्ठों, मांझी, मुखियाओं और ग्रामीणों की उपस्थिति में इन परिवारों का तिलक लगाकर स्वागत किया गया। पारंपरिक पूजा-पाठ और सामाजिक विधि-विधान के साथ शुद्धिकरण कर उन्हें आदिवासी समाज की मुख्यधारा में पुनः शामिल किया गया।

बीमारी बनी थी वजह

मूल धर्म में लौटने वालों में लक्ष्मीनाथ उसेंडी, मसी उसेंडी, रामदई उसेंडी और रुचि उसेंडी जैसे नाम प्रमुख हैं। रामदई उसेंडी ने बताया कि वर्षों पहले परिवार में गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के कारण वे मिशनरी प्रार्थना सभाओं और ‘चंगाई कार्यक्रमों’ जाने लगी थीं। वहां प्रार्थना से बीमारियां ठीक होने का दावा किया गया था। सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय नेता गायता प्रदीप उसेंडी और राकेश उसेंडी ने इस वापसी को धर्म स्वतंत्रता विधेयक और समाज में बढ़ती जागरूकता का परिणाम बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि दूर-दराज के इलाकों में अशिक्षा और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव का लाभ उठाकर बाहरी तत्व ग्रामीणों को भ्रमित करते हैं। वर्तमान में, अबुझमाड़ क्षेत्र में धर्मांतरण एक संवेदनशील मुद्दा बना हुआ है, जिसे रोकने के लिए सामाजिक जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।

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