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सेटलिंग टैंक की सफाई के चलते जगदलपुर के 7 वार्डों में बुधवार को ठप रहेगी जलापूर्ति, निगम ने किया अलर्ट

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जगदलपुर, 26 मई 2026 गर्मी के मौसम में जगदलपुर शहर के हजारों घरों के लिए परेशानी की खबर है। नगर पालिक निगम के जलप्रदाय शाखा ने सूचना जारी कर बताया है कि बुधवार, 27 मई को शहर के 7 प्रमुख वार्डों में दोपहर के बाद से जलापूर्ति पूरी तरह बंद रहेगी।

क्यों बंद होगा पानी?

निगम के अनुसार पावर हाउस स्थित फिल्टर प्लांट में लगे सेटलिंग टैंक की वार्षिक सफाई का कार्य बुधवार को किया जाना है। यह टैंक शहर को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने में अहम भूमिका निभाता है। समय-समय पर इसमें जमी गाद और अशुद्धियों को साफ करना जरूरी होता है, जिससे पानी की गुणवत्ता बनी रहे। इसी अनिवार्य रखरखाव कार्य के कारण जलापूर्ति बाधित करने का निर्णय लिया गया है।

किन-किन वार्डों पर पड़ेगा असर?

इस सफाई अभियान के चलते प्रवीर वार्ड क्र0-01, विजय वार्ड क्र0-02, शिव मंदिर वार्ड क्र0-03, भैरमदेव वार्ड क्र0-04, वीरसावरकर वार्ड क्र0-05, प्रतापदेव वार्ड क्र0-11 तथा बालाजी वार्ड क्र0-13 में पानी की सप्लाई नहीं होगी। ये सभी वार्ड सीधे पावर हाउस फिल्टर प्लांट से जुड़े हैं। अनुमान है कि इन क्षेत्रों के 8 से 10 हजार परिवार इस अस्थायी कटौती से प्रभावित होंगे।*निगम की अपील: पहले से करें पानी का इंतजाम*नगर निगम प्रशासन ने प्रभावित वार्डों के सभी नागरिकों से अपील की है कि वे बुधवार सुबह तक ही पीने व अन्य घरेलू कार्यों के लिए आवश्यकतानुसार पानी का संग्रहण कर लें।

झीरम की त्रासदी पर राजनीति करना बंद करे कांग्रेस: केदार कश्यप

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वन मंत्री केदार कश्यप का कांग्रेस पर पलटवार

अपने शासनकाल में जांच आगे नहीं बढ़ा पाने वाली कांग्रेस अब जनता को गुमराह कर रही

जगदलपुर झीरम घाटी के दर्दनाक हादसे को लेकर कांग्रेस द्वारा दिए गए बयान पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए छत्तीसगढ़ शासन के वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने कहा है कि कांग्रेस एक बार फिर शहीद नेताओं की संवेदनाओं का राजनीतिक दोहन कर रही है। भाजपा और तत्कालीन सरकार पर निराधार आरोप लगाकर कांग्रेस अपनी विफलताओं को छिपाने का प्रयास कर रही है।

मंत्री केदार कश्यप ने कहा है कि झीरम घाटी की घटना पूरे छत्तीसगढ़ और देश के लिए अत्यंत दुखद एवं हृदय विदारक थी। इस घटना में कई वरिष्ठ नेताओं, जनप्रतिनिधियों और सुरक्षाकर्मियों ने अपने प्राण गंवाए। भाजपा ने हमेशा इस घटना की निष्पक्ष जांच और दोषियों को सजा दिलाने की बात कही है। लेकिन कांग्रेस लगातार इस संवेदनशील विषय को राजनीतिक हथियार बनाकर जनता की भावनाओं को भड़काने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस यह बताए कि वर्ष 2018 से 2023 तक जब प्रदेश में उसकी सरकार थी, तब उसने जांच को अंतिम निष्कर्ष तक क्यों नहीं पहुंचाया? यदि कांग्रेस के पास इतने तथ्य और सबूत थे तो पांच वर्षों तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई? केवल बयानबाजी और राजनीतिक आरोप लगाने से सत्य स्थापित नहीं होता।वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि कांग्रेस को यह भी बताना चाहिए कि उनके शासनकाल में गठित एसआईटी ने आखिर क्या ठोस उपलब्धि हासिल की? कांग्रेस सरकार ने जनता को केवल आश्वासन दिया, लेकिन परिणाम शून्य रहे। अब सत्ता से बाहर होने के बाद भाजपा पर झूठे आरोप लगाकर अपनी राजनीतिक जमीन बचाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भाजपा पर षड्यंत्र और जांच रोकने जैसे आरोप पूरी तरह तथ्यहीन और दुर्भावनापूर्ण हैं। न्यायालयीन प्रक्रिया देश के संविधान और कानून के तहत चलती है। किसी भी पक्ष द्वारा कानूनी अधिकारों का उपयोग करना लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है, इसे षड्यंत्र बताना कांग्रेस की मानसिकता को दर्शाता है।

आत्म मंथन करे कांग्रेस

वनमंत्री केदार कश्यप ने कहा कि कांग्रेस को पहले आत्ममंथन करना चाहिए कि आखिर नक्सलवाद के नाम पर दशकों तक राजनीति करने वालों ने बस्तर को क्या दिया? भाजपा सरकार आज बस्तर में विकास, विश्वास और सुरक्षा का वातावरण तैयार कर रही है। सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और जनकल्याण की योजनाओं के माध्यम से बस्तर तेजी से आगे बढ़ रहा है, जिसे कांग्रेस पचा नहीं पा रही।

शहीदों के सपने साकार करते हैं ह

मंत्री कश्यप ने कहा कि भाजपा शहीदों के सम्मान में राजनीति नहीं करती, बल्कि उनके सपनों का सुरक्षित और विकसित बस्तर बनाने के लिए कार्य कर रही है। कांग्रेस को चाहिए कि वह शहीद नेताओं की स्मृति का सम्मान करे और इस संवेदनशील विषय पर ओछी राजनीति बंद करे।

सीसीटीवी में कैद हुआ दर्दनाक सड़क हादसा, सड़क पार कर रहे बुजुर्ग की इलाज के दौरान मौत

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बालोद दल्लीराजहरा में तेज रफ्तार बाइक की टक्कर से एक 95 वर्षीय बुजुर्ग की इलाज के दौरान मौत हो गई। हादसे का सीसीटीवी वीडियो भी सामने आया है, जिसमें पूरी घटना कैद हो गई। पुलिस ने आरोपी चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार घटना 24 मई 2026 की शाम करीब 7:45 बजे की है। बताया जा रहा है कि 95 वर्षीय मोहन सिंह सड़क पार कर रहे थे, तभी तेज गति और लापरवाही से बाइक चला रहे युवक भूपेंद्र निषाद ने उन्हें जोरदार टक्कर मार दी।

हादसे में बुजुर्ग गंभीर रूप से घायल हो गए।घटना के बाद आसपास मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों की मदद से घायल मोहन सिंह को तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया। प्रारंभिक उपचार के बाद कुछ घंटे तक उनकी हालत गंभीर बनी रही और धीरे-धीरे उनकी स्थिति और खराब होती गई। देर रात इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई।घटना का पूरा दृश्य पास में लगे सीसीटीवी कैमरे में रिकॉर्ड हो गया। वीडियो में साफ दिखाई दे रहा है कि मोहन सिंह सड़क पार कर रहे थे, तभी तेज रफ्तार बाइक क्रमांक CG24C5592 ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया। हादसे के बाद मौके पर लोगों की भीड़ जुट गई और मदद के प्रयास शुरू किए गए।मामले में पुलिस ने बाइक चालक भूपेंद्र निषाद के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 125(ए), 281 तथा मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 184 के तहत अपराध दर्ज किया है। पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है।

जो काम एक साल पहले हो चुका है, उसके नाम पर फर्जी भुगतान

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टलनार पंचायत में 15वें वित्त का फर्जीवाड़ा

रनिंग वाटर का कार्य के नाम पर फर्जी भुगतान दर्शा कर हड़पे लाख रुपए

बकावंड ग्राम पंचायत टलनार में 15वें वित्त आयोग की राशि में बड़े गबन का खुलासा हुआ है। प्राथमिक शाला टलनार में रनिंग वाटर का कार्य वर्ष 2024-25 में ही पूर्ण हो चुका था। तत्कालीन सचिव भोलाराम बघेल ने दूसरी पंचायत में ट्रांसफर होने से पहले इस कार्य का भुगतान कर दिया था। इसके बावजूद वर्तमान सरपंच और सचिव ने मिलीभगत कर मई 2026 में उसी कार्य के नाम पर डिलेश ट्रेडर्स नया पारा, आसना को तीन अलग-अलग बिलों से फर्जी भुगतान कर दिया है।

मौजूदा सरपंच और सचिव ने बिल नंबर 822 से 49 हजार 500 रुपए का भुगतान सबमर्सिबल पंप, टंकी आदि के नाम पर,बिल नंबर 823 से 49 हजार 500 रुपए का भुगतान गामा पाइप, जीआई वायर आदि के नाम पर और बिल नंबर 825 से 14 हजार 250 रुपए का भुगतान सरिया के नाम पर समेत कुल 1 लाख 13 हजार 250 रुपए का भुगतान किया गया है।चौंकाने वाली बात यह है कि तीनों बिलों में भुगतान की तारीख अंकित नहीं है, जबकि सरपंच-सचिव के हस्ताक्षर व सील लगे हैं।

गांजा के साथ महिला गिरफ्तार

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जगदलपुर पुलिस अधीक्षक शलभ कुमार सिन्हा के नेतृत्व मेें बस्तर पुलिस के द्वारा नशे तथा अपराधिक तत्वों के विरूद्ध व्यापक रूप से लगातार कार्रवाई की जा रही है। इसी कड़ी में गांजा बिक्री करने वाली एक महिला को जगदलपुर कोतवाली पुलिस ने 49 हजार रुपए कीमत के 930 ग्राम गांजा के साथ पकड़ा है।

कोतवाली पुलिस को सूचना मिली थी कि एक महिला गांजा बिक्री करने हेतु ग्राहक के इंतजार में पनारापारा स्कूल के पीछे रानी के घर के पास खड़ी है। सूचना पर पुलिस अधीक्षक शलभ कुमार सिन्हा के दिशानिर्देशन में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक माहेश्वर नाग के मार्गदर्शन में एवं नगर पुलिस अधीक्षक सुमीत कुमार डी धोत्रे के पर्यवेक्षण में थाना प्रभारी कोतवाली लीलाधर राठौर के नेतृत्व में महिला पुलिस सहित टीम गठित कर टीम को कार्रवाई हेतु रवाना किया गया। पुलिस टीम ने पनारापारा स्कूल के पीछे घेराबंदी कर महिला निशा नाग पति सोनू को पकड़ा गया। उसके कब्जे से 930 ग्राम गांजा बरामद हुआ।

महिला के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत केस दर्ज कर उसे विशेष न्यायालय भेजा गया। आरोपिया को पकड़ने में निरीक्षक लीलाधर राठौर उप निरीक्षक अरुण मरकाम, प्रमोद ठाकुर,सहायक उप निरीक्षक सतीश यादव व मीना यादव, प्रधान आरक्षक विनोद चांदने, आरक्षक रीना अनंत, पुनीता ठाकुर, रंगलाल खरे, वरुण बघेल, सोमालू, तोमन बघेल आदि का योगदान रहा।

9000 शिक्षकों की सेवा पुस्तिका का ऑडिट होना

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विकासखंड में लगाएं विशेष कैंप – छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन

अनुसूचित क्षेत्र में कार्यरत शिक्षकों के लिए 10 दिवस का अतिरिक्त अर्जित अवकाश स्वीकृत किया जाना।

एसोसिएशन ने कमिश्नर बस्तर संभाग और कोष लेखा संचालक को सौंपा ज्ञापन

छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन के प्रदेश उपाध्यक्ष प्रवीण श्रीवास्तव ने संभाग के 9000 एल.बी. संवर्ग के शिक्षकों की सेवा पुस्तिका के ऑडिट से जुड़ी लंबित समस्याओं को लेकर अनुसूचित क्षेत्र में कार्यरत शिक्षकों के लिए 10 दिवस का अतिरिक्त अर्जित अवकाश स्वीकृत करने हेतु कमिश्नर बस्तर संभाग और कोष लेखा एवं पेंशन संचालक को ज्ञापन सौंपकर त्वरित कार्रवाई की मांग की है। एसोसिएशन ने मांग की है कि शिक्षकों को परेशान होने से बचाने के लिए प्रत्येक विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) कार्यालय में विशेष कैंप आयोजित किए जाएं। छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन के प्रवीण श्रीवास्तव(प्रदेश उपाध्यक्ष) लुदर सन कश्यप (जिला अध्यक्ष)अमित पॉल (जिला कोषाध्यक्ष)मंगल राम मौर्य(जिला उपाध्यक्ष) श्रीमती भूमिका निषाद , बुधराम कश्यप (ब्लॉक अध्यक्ष दरभा)अकबर खान, रविंद्र अजापाल, कमलेश रामटेके,हेमंत पाटनी ने संयुक्त रूप से बताया कि सेवा पुस्तिका का समय पर और त्रुटिरहित ऑडिट होना शिक्षकों के भविष्य के लिए बेहद अनिवार्य है। संविलियन पूर्व की सेवा की गणना, पदोन्नति, समयमान, समतुल्य वेतनमान, सातवां वेतनमान और आगामी समय में सेवानिवृत्ति के मामलों को देखते हुए यह प्रक्रिया जल्द पूरी की जानी चाहिए।अभी जो सिस्टम है उसमे डीडीओ द्वारा सेवा पुस्तिका को कोष लेखा एवं पेंशन के संभागीय कार्यालय ले जाकर, तथा कुछ जिलों में स्वयं शिक्षक द्वारा कोष लेखा एवं पेंशन के संभागीय कार्यालय ले जाकर आडिट कराया जाता है। “सेवा पुस्तिका” के समयबद्ध ऑडिट और सत्यापन के लिए शिक्षकों को अवांछित वित्तीय भार का सामना करना पड़ता है। अक्सर यह देखा गया है कि ऑडिट कार्य को गति देने के लिए शिक्षकों से आर्थिक सहयोग या अनुचित साधनों की अपेक्षा की जाती है।” “सेवा पुस्तिका के ऑडिट को पूर्णतः निःशुल्क और पारदर्शी बनाया जाए, ताकि शिक्षकों को किसी भी प्रकार का आर्थिक मानसिक तनाव न झेलना पड़े।

एसोसिएशन की प्रमुख मांगें:

BEO स्तर पर कैंप का आयोजन:

शिक्षकों को अपनी सेवा पुस्तिका के ऑडिट के लिए जिला मुख्यालय या कोष लेखा कार्यालय के चक्कर न काटने पड़ें। इसके लिए प्रत्येक विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) कार्यालय में विशेष कैंप लगाया जावे, जिससे शिक्षकों के समय की बचत हो और कार्य समय-सीमा में पूर्ण हो सके।

संविलियन पूर्व की सेवा का ऑडिट:

शिक्षकों की संविलियन से पूर्व की सेवा अवधि (शिक्षा कर्मी/पंचायत/नगरीय निकाय) का ऑडिट स्थानीय नियमों के तहत स्थानीय निधि संपरीक्षा (Local Fund Audit) के माध्यम से कराया जावे।

रजही डैम में डूबे युवक का शव 7 घंटे बाद मिला, छुट्टी में घर आया था छात्र

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दल्लीराजहरा के पथराटोला के पास स्थित रजही डैम में डूबे युवक का शव करीब 7 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद गोताखोरों द्वारा बाहर निकाला गया। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल व्याप्त है।मिली जानकारी के अनुसार मृतक युवक की पहचान अनीश कुमार कौशल, पिता झुमक लाल कौशल, निवासी मानपुर चौक के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि अनीश भिलाई में छात्रावास में रहकर पढ़ाई करता था और छुट्टियों में अपने घर आया हुआ था।

बताया जा रहा है कि रविवार को वह रजही डैम घूमने गया था। इसी दौरान वह गहरे पानी में चला गया और डूब गया। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस, ग्रामीण एवं गोताखोरों की टीम मौके पर पहुंची और युवक की तलाश शुरू की गई। करीब 7 घंटे तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद गोताखोरों ने युवक का शव डैम से बाहर निकाला।घटना के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। पूरे इलाके में मातम पसरा हुआ है। पुलिस द्वारा पंचनामा कार्रवाई कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है तथा मामले की जांच की जा रही है।

अंतागढ़ थाना प्रभारी जायसवाल फिर फंसे विवादों में, पत्रकारों से दुर्व्यवहार के बाद कड़ा विरोध

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सरपंच आंदोलन की हिमायती बने दरोगाजी

कांकेर जिले के अंतागढ़ थाना प्रभारी रमेश जायसवाल एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गए हैं। पत्रकारों के साथ कथित दुर्व्यवहार के मामले ने अब तूल पकड़ लिया है, जिसके विरोध में क्षेत्र के पत्रकार थाना परिसर के बाहर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए हैं। पत्रकारों का आरोप है कि थाना प्रभारी रमेश जायसवाल ने एक वरिष्ठ पत्रकार के साथ अभद्र व्यवहार करते हुए पद का रौब दिखाया और अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया।

बताया जा रहा है कि पत्रकार एक मामले के कवरेज के लिए थाना पहुंचे थे, जहां मामूली बात को लेकर थाना प्रभारी रमेश जायसवाल भड़क गए। घटना के बाद पत्रकारों में भारी नाराजगी देखने को मिली और उन्होंने थाना प्रभारी को हटाने की मांग को लेकर मोर्चा खोल दिया। आंदोलन को स्थानीय पत्रकारों के साथ-साथ कांकेर प्रेस क्लब के पदाधिकारियों का भी समर्थन मिल रहा है। इस पूरे विवाद के बीच एक दिन पहले सामने आई घटना ने भी थाना प्रभारी रमेश जायसवाल की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दरअसल, अंतागढ़ में सरपंच आंदोलन के दौरान मुख्य मार्ग घंटों जाम रहा और यात्री भीषण गर्मी में परेशान होते रहे। आरोप है कि उस दौरान भी थाना प्रभारी आम लोगों और पत्रकारों की मदद करने के बजाय एक दुकान में बैठकर कूलर की हवा खाते नजर आए थे। रास्ता बंद होने पर कुछ पत्रकारों ने वैकल्पिक मार्ग और सहयोग की जानकारी मांगी, लेकिन थाना प्रभारी ने संवेदनशीलता दिखाने के बजाय उन्हें वापस लौटने की सलाह दे दी थी। स्थानीय लोगों और पत्रकारों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब रमेश जायसवाल के व्यवहार को लेकर सवाल उठे हों। इससे पहले भी उन पर आम लोगों और पत्रकारों से रौबदार एवं असहयोगात्मक रवैया अपनाने के आरोप लग चुके हैं। अब लगातार सामने आ रही घटनाओं के बाद क्षेत्र में यह चर्चा तेज हो गई है कि आखिरकार पुलिस का रवैया जनता और मीडिया के प्रति इतना कठोर क्यों होता जा रहा है। हालांकि थाना प्रभारी रमेश जायसवाल ने वर्तमान विवाद में किसी भी तरह की अभद्रता से इंकार करते हुए कहा है कि उन्होंने केवल मर्यादित तरीके से बैठने की बात कही थी। लेकिन पत्रकारों का सवाल है कि यदि व्यवहार सामान्य था तो फिर विरोध और धरने की स्थिति क्यों बनी। फिलहाल मामला अब प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा का विषय बन चुका है तथा पत्रकारों ने स्पष्ट कर दिया है कि कार्रवाई नहीं होने तक आंदोलन जारी रहेगा।

कांग्रेस नेता से हैं मधुर संबंध

कल ही प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में सरपंचों द्वारा बीच सड़क पर तंबू लगाकर दिन भर सरकार और बीजेपी नेताओं को कोसा गया था, लेकिन जब इस मामले की जानकारी लेने स्थानीय पत्रकार थाने पहुंचे तो थानेदार रमेश जायसवाल ने पत्रकारों से भी दुर्व्यवहार किया और अपनी औकात में रहने की नसीहत पत्रकारों को दे डाली। इससे स्थानीय पत्रकारों ने थानेदार के खिलाफ मोर्चा खोल उन्हें हटाने और सस्पेंड करने की मांग जिला पुलिस अधीक्षक से की है। इधर विश्वस्त सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पूर्व कांग्रेसी नेता जो विधायक भी रह चुके हैंजे वे पहले पुलिस विभाग में अधिकारी रहे हैं। सूत्र बताते हैं इस नेता के साथ टीआई जायसवाल के मधुर संबंध हैं।

इसी मधुर संबंध को बनाए रखने और भाजपा सरकार को नीचा दिखाने दरोगाजी ने सरपंचों को सड़क पर कब्जा करने दिया और पत्रकारों से दुर्व्यवहार किया। इस मामले में एसडीएम रजक ने भी अपना मौन समर्थन दिया। लेकिन वह भूल गए कि तपती दोपहरी में बस, कार अन्य सैकड़ों वाहनों में सवार लोग कितने परेशान हुए। अंतागढ़ के पत्रकार साथियों के साथ हुए इस दुर्व्यवहार के मामले में भानुप्रतापपुर प्रेस क्लब द्वारा समर्थन देने की बात सामने आ रही है, वहीं छत्तीसगढ़ जर्नलिस्ट यूनियन द्वारा भी अंतागढ़ के पत्रकारों को आश्वस्त किया गया है कि अगर वे हमारे संगठन की जरूरत महसूस करेंगे, तब हम सभी साथी उनके आंदोलन में साथ रहेंगे

सुरक्षा के नाम पर डकार गए 10 लाख और बचा नहीं पाए बेशकीमती चंदन के पेड़ भी

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बस्तर का चंदन वन खत्म होने की कगार पर

2 हजार से घटकर रह गए सिर्फ 200 पेड़

यहां तो विभागीय कर्मी ही निभा रहे हैं चंदन तस्कर वीरप्पन की भूमिका

अर्जुन झा

जगदलपुर कर्नाटक के कुख्यात चंदन तस्कर वीरप्पन ने दशकों तक वन महकमे और पुलिस की नाक में दम किए रखा था। उसने बड़े पैमाने पर चंदन पेड़ों का सफाया कर दिया था। अब बस्तर में भी कोई वीरप्पन पैदा हो गया है, जो बस्तर जिले में चंदन के जंगलों का सफाया कर रहा है। जिस जंगल में कभी चंदन के दो हजार से भी ज्यादा पेड़ खुशबू बिखेर रहे थे, अब उस जंगल में 200 पेड़ भी नहीं बचे हैं। दरअसल यहां वीरप्पन कोई और नहीं बल्कि विभागीय अधिकारी कर्मचारी ही हैं। अधिकारी चंदन के जंगल की सुरक्षा के नाम पर दस लाख डकार गए, मगर पेड़ नहीं बचा पाए।

बस्तर जिले के बड़े आरापुर स्थित दुर्लभ प्राकृतिक सफेद चंदन वन पर अब अस्तित्व का संकट गहरा गया है। कभी अपनी प्राकृतिक समृद्धि और हजारों चंदन वृक्षों के लिए पहचाने जाने वाला यह क्षेत्र आज धीरे-धीरे इतिहास बनने की कगार पर पहुंच चुका है। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, यहां पहले 2 हजार से अधिक सफेद चंदन के पेड़ मौजूद थे, लेकिन अब मुश्किल से 200 वृक्ष ही बचे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि वर्षों से सक्रिय चंदन तस्करों ने जंगल और गांव के आसपास लगे अधिकांश पेड़ों को काट डाला है। तस्करों ने केवल जंगल क्षेत्र ही नहीं, बल्कि आरापुर बस्ती, डोंगरीपारा, शिव मंदिर परिसर और रेलवे लाइन किनारे लगे चंदन वृक्षों को भी नहीं छोड़ा है। लगातार हो रही अवैध कटाई के कारण अब यह प्राकृतिक धरोहर समाप्त होने के मुहाने पर खड़ी दिखाई दे रही है।

सुरक्षा पर शुरू नहीं हुआ काम

जानकारी के मुताबिक, करीब 15 वर्ष पहले वन विभाग ने चंदन वन की सुरक्षा के लिए लगभग 10 लाख रुपये की योजना तैयार की थी। इस योजना में तार की बाड़, सोलर लाइट और सुरक्षा व्यवस्था जैसी सुविधाएं शामिल थीं, ताकि चंदन पेड़ों की कटाई और तस्करी पर रोक लगाई जा सके। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि योजना केवल कागजों तक सीमित रह गई और जमीनी स्तर पर कोई काम शुरू नहीं हो पाया। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यदि समय रहते सुरक्षा व्यवस्था लागू कर दी जाती तो आज यह स्थिति पैदा नहीं होती। वन विभाग की कथित लापरवाही और निगरानी की कमी के कारण तस्करों का नेटवर्क लगातार सक्रिय बना रहा।

ग्रामीणों ने संभाली जिम्मेदारी

चंदन वन को बचाने के लिए ग्रामीणों ने अपने स्तर पर भी प्रयास किए। गांव के लोगों ने समिति बनाकर निगरानी शुरू की और कई बार तस्करों को पकड़कर पुलिस के हवाले भी किया। बावजूद इसके, स्थायी सुरक्षा व्यवस्था और सख्त कार्रवाई नहीं होने से अवैध कटाई रुक नहीं सकी।ग्रामीणों का कहना है कि तस्कर रात के अंधेरे में पेड़ों को काटकर आसानी से फरार हो जाते हैं। जंगल क्षेत्र में पर्याप्त गश्त और आधुनिक सुरक्षा व्यवस्था नहीं होने का फायदा लगातार उठाया जा रहा है। ग्रामीणों और पर्यावरण प्रेमियों ने प्रशासन से तत्काल ठोस कदम उठाने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जल्द प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई तो आने वाली पीढ़ियां केवल कहानियों में ही बस्तर के चंदन वन के बारे में सुन पाएंगी। ग्रामीणों ने चंदन वन क्षेत्र को संरक्षित क्षेत्र घोषित करने, नियमित सुरक्षा गश्त बढ़ाने और तस्करों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। फिलहाल पूरे मामले में जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

ढाई साल में बदले गए भाजपा सरकार के 8 मंत्रियों के ओएसडी

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सरकार की छवि पर पड़ रहा है खराब असर

अब बदली मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े की ओएसडी

रायपुर छत्तीसगढ़ में भाजपा सरकार के दौरान कई मंत्रियों के विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारियों (ओएसडी) और निजी सहायकों (पीए) को उनके पदों से हटाया गया है। प्रशासनिक व्यवस्था में कसावट, खराब तालमेल और अनैतिक कार्यों की शिकायतों के कारण यह कार्रवाई की गई है। कुछ जगहों पर भष्टाचार के मामलों के चलते उन पर गाज गिरी है। मगर इससे सरकार की ही छवि पर खराब असर पड़ने लगा है।

अब तक डिप्टी सीएम अरुण साव के ओएसडी विपुल कुमार गुप्ता को हटाकर उनकी जगह अजय कुमार त्रिपाठी को नया ओएसडी नियुक्त किया गया था। वन मंत्री केदार कश्यप के ओएसडी सुनील तिवारी और जितेंद्र गुप्ता को हटाकर मूल विभाग में वापस भेजा गया था। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन, खाद्य मंत्री दयालदास बघेल, राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा और कृषि मंत्री रामविचार नेताम के निजी स्टाफ को भी प्रशासनिक कारणों से बदला गया है। छत्तीसगढ़ में भाजपा सरकार के दो साल के कार्यकाल के दौरान मंत्रियों के निजी स्टाफ में बड़े पैमाने पर फेरबदल देखने को मिला है। पिछले 25 महीनों में करीब 8 मंत्रियों के एक दर्जन से ज्यादा ओएसडी और पीए पदों से हटाए जा चुके हैं। इस सामूहिक रवानगी ने प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है। विपक्ष इस मुद्दे को भ्रष्टाचार और ‘पैसे के बंटवारे के विवाद से जोड़ रहा है। वहीं सत्ता पक्ष इसे केवल प्रशासनिक सुधार और कामकाज की बेहतरी के लिए उठाया गया कदम बता रहा है। सरकार के विभिन्न विभागों में काम कर रहे अधिकारियों और सहायकों को हटाने का सिलसिला लगातार जारी है।

सामंजस्य की कमी और विभागीय सुस्ती बनी हटाने की मुख्य वजह। मंत्री केदार कश्यप के पीए सर्कषण सिंह को संविदा में गलत ढंग से नियुक्त किए जाने के कारण सामान्य प्रशासन विभाग ने इसी माह 5 मई को उनकी छुट्टी कर दी थी। तीन दिन पहले ही महिला बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े की ओएसडी रूही टेंभुलकर को हटा दिया गया। वे पंचायत विभाग मेें उपायुक्त पद पर थीं। उन्हें मूल विभााग में वापस भेजा गया है। बताया जा रहा है कि मंत्रियों और उनके ओएसडी के बीच तालमेल ठीक नहीं था। कई मामलों में ओएसडी मंत्रियों के क्षेत्र और विभागीय कामकाज में वैसी सक्रियता नहीं दिखा रहे थे जैसी उनसे उम्मीद की जा रही थी। इसके अलावा भाजपा संगठन को भी कई माध्यमों से इन निजी सहायकों के व्यवहार और कामकाज को लेकर शिकायतें मिल रही थीं। माना जा रहा है कि मंत्रियों के काम को और अधिक पारदर्शी और तेज बनाने के लिए इन चेहरों को बदला गया है ताकि सरकार की छवि पर कोई आंच न आए।स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के ओएसडी संजय मरकाम और अजय कन्नौजे को पद से हटाया गया। उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन के ओएसडी भागवत जायसवाल और पीए प्रवीण पांडेय की छुट्टी की गई। डिप्टी सीएम अरुण साव के ओएसडी विपुल गुप्ता को हटाया गया।राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा के ओएसडी दुर्गेश वर्मा, बी. रघु और पीए दुर्गेश धारे हटाए गए। खाद्य मंत्री दयालदास बघेल के ओएसडी संजय गजघाटे की सेवाएं समाप्त की गईं।कृषि मंत्री रामविचार नेताम के ओएसडी तारकेश्वर देवांगन को हटाया गया। वन मंत्री केदार कश्यप के ओएसडी सुनील तिवारी, जितेंद्र गुप्ता और तीर्थराज अग्रवाल को भी पद छोडऩा पड़ा। और अब महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े की ओएसडी रूही टेंभुलकर को हटा दिया गया है।

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