दल्लीराजहरा सभी समस्त दल्ली राजहरा नगर में माता दुर्गा जी के पंडालों में अभी पावन नवरात्रि पर्व में गरबा का आयोजन समितियों द्वारा होना है सभी से आग्रह है की माता रानी का आगमन स्वच्छ स्वस्थ और पवित्र विचारों के साथ हो एवं उनकी विदाई भी शालीनतापूर्वक की जाए साथ ही यदि सभी दुर्गा समितियों द्वारा ये व्यवस्था की जाए की माँ दुर्गा के पंडालों में मंगलवार एवं शनिवार हनुमान चालीसा का पाठ एवं सम्पूर्ण नौ दिनों तक दुर्गा चालीसा माताओं बहनों एवं समिति के सदस्यों द्वारा प्रातः तथा संध्या आरती के पश्चात् हो सके तो अतिउत्तम होगा ऐसा विचार एवं आग्रह है एवं इसी में हम सभी एवं सम्पूर्ण विश्व का कल्याण है..
भाजपा के गले की फांस बना नगरनार स्टील प्लांट
- निजीकरण के प्रयासों का हो रहा है चौतरफा विरोध मुख्यमंत्री ने भी कांकेर की धरती से कर दिया ऐलान
अर्जुन झा
जगदलपुर राष्ट्रीय खनिज विकास निगम (एनएमडीसी) द्वारा नगरनार में स्थापित इस्पात संयंत्र भाजपा के गले की फांस बन गया है।. इस संयंत्र के निजीकरण के प्रयासों का चौतरफा विरोध लगातार हो रहा है। चुनाव आते तक यह मामला और भी गरमा सकता है और यह बड़ा चुनावी मुद्दा बनने वाला है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी साफ संकेत दे दिया है कि उनकी सरकार नगरनार स्टील प्लांट का किसी भी सूरत में निजीकरण नहीं होने देगी। अब देखना यह है कि चारों ओर से घिर चुकी भाजपा इस मुश्किल से उबरने के लिए क्या कदम उठाती है।
बस्तर के पहाड़ों के गर्भ में मौजूद लाखों टन लौह अयस्क भंडार के दोहनकर्ता एनएमडीसी ने करीब बीस हजार करोड़ रुपए खर्च कर जगदलपुर विधानसभा क्षेत्र के ग्राम नगरनार में विशाल इस्पात संयंत्र की स्थापना की है। इस संयंत्र में उत्पादन गतिविधियां भी शुरू हो चुकी हैं। बीते 3 अक्टूबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नगरनार इस्पात संयंत्र का लोकार्पण किया था। संयंत्र स्थापना के दौर से ही इसके निजीकरण की सुगबुगाहट शुरू हो गई थी। चर्चा है कि केंद्र सरकार बस्तर के एकमात्र इस बड़े इस्पात कारखाने को निजी क्षेत्र के उस बड़े उद्योगपति के हाथों बेचने जा रही है, जिसे कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी दल प्रधानमंत्री का परम मित्र बताते आ रहे हैं। कहा जा रहा है की प्लांट के विक्रय की सारी प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, सिर्फ औपचारिक घोषणा बाकी है। नगरनार स्टील प्लांट के निजीकरण का फैसला भाजपा के गले की फांस बन गया है। न निगलते बन रहा है, न उगलते। भाजपा के एक भी बड़े नेता ने अब तक यह नहीं कहा है कि नगरनार संयंत्र का निजीकरण नहीं होगा, विपक्षी दल केवल दुष्प्रचार कर रहे हैं। इससे साफ जाहिर होता है कि संयंत्र का बस्तरवासियों के हाथ से निकलना तय है।
जनभावना जुड़ी है इस प्लांट से
नगरनार इस्पात संयंत्र से बस्तर की जनभावना जुड़ी हुई है और अब तो यह बस्तर की अस्मिता का सवाल भी बन गया है। स्टील प्लांट की स्थापना के लिए नगरनार समेत लगभग बारह ग्राम पंचायतों के आदिवासियों ने अपनी उपजाऊ जमीन एनएमडीसी को खुशी -खुशी सौंप दी थी। उन्हें भरोसा था कि प्लांट में उनके बेटे बेटियों को नौकरी मिलेगी, उद्योग व्यवसाय फूलेंगे फलेंगे और बस्तर का विकास होगा। अब यह भरोसा टूटता प्रतीत हो रहा है और जनभावना आहत हो रही है। इस प्लांट के प्रति आम बस्तरिहा का विशेष लगाव हो गया है। अगर इस लगाव को तोड़ने का प्रयास हुआ, तो बस्तर में जन विद्रोह की संभावना से भी इंकार नहीं किया जा सकता।
बस्तर के सम्मान का सवाल:भूपेश
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल नगरनार स्टील प्लांट के मामले में लगातार संवेदनशील नजर आ रहे हैं। कुछ ही दिन पहले कांकेर में आयोजित पंचायती राज प्रतिनिधियों के सम्मेलन में मुख्यमंत्री ने नगरनार इस्पात संयंत्र को बस्तर के मान सम्मान, अस्मिता और स्वाभिमान का प्रतीक बताया था। मुख्यमंत्री बघेल ने साफ तौर पर कहा था कि अगर बात हमारे मान सम्मान और स्वाभिमान पर आएगी, तो हम चुप बैठे रहने वाले नहीं हैं। संयंत्र का निजीकरण रोकने हर जरूरी कदम उठाएंगे। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की पहल पर उद्योग मंत्री कवासी लखमा ने निजीकरण का विरोध करते हुए प्रस्ताव केबिनेट में लाया था। श्री लखमा ने कहा था कि नगरनार संयंत्र का संचालन राज्य सरकार करे। केबिनेट में यह प्रस्ताव पारित हो गया और केंद्र सरकार के पास भेज भी दिया गया है।
सांसद बैज संसद में कर चुके हैं विरोध
बस्तर लोकसभा क्षेत्र के मुखर सांसद दीपक बैज नगरनार इस्पात संयंत्र के निजीकरण के खिलाफ शुरू से आवाज बुलंद करते आए हैं। लोकसभा में भी श्री बैज संयंत्र के निजीकरण का कई बार विरोध कर चुके हैं। वे साफ तौर पर कह चुके हैं कि नगरनार इस्पात संयंत्र को केंद्र सरकार स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया (सेल) के अधीन कर दे और भिलाई इस्पात संयंत्र की तरह नगरनार इस्पात संयंत्र का भी संचालन सेल ही करे। सांसद दीपक बैज यह भी कह चुके हैं कि अगर केंद्र सरकार ऐसा नहीं कर सकती, तो नगरनार प्लांट को छत्तीसगढ़ सरकार के हवाले कर दे। छत्तीसगढ़ सरकार उसे चला लेगी। दीपक बैज लोकसभा में यह दलील भी दे चुके हैं कि नगरनार इस्पात संयंत्र के निजी हाथों में चले जाने से वहां नौकरियों में अनुसूचित जाति -जनजाति, ओबीसी, गरीब वर्गों के युवाओं को आरक्षण का लाभ नहीं मिलेगा। क्योंकि निजी क्षेत्र में आरक्षण की व्यवस्था लागू नहीं है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष बनने के बाद दीपक बैज की यह मुहिम और धारदार हुई है। उन्होंने आम बस्तरवासियों को इस मामले में जगाने का काम किया है।
शुरू से मुखर रहे हैं रेखचंद जैन
स्टील प्लांट प्रभावित नगरनार व अन्य सभी गांव जगदलपुर विधानसभा क्षेत्र में आते हैं। इस क्षेत्र का विधायक होने के नाते रेखचंद जैन नगरनार इस्पात संयंत्र के निजीकरण के विरोध में शुरू से मुखर रहे हैं। संसदीय सचिव एवं विधायक रेखचंद जैन हर मंच पर निजीकरण के खिलाफ आवाज उठाते रहे हैं। ग्रामीणों के आंदोलन, धरना प्रदर्शन में भी जैन उपस्थिति दर्ज कराते आए हैं। बीते दिनों प्लांट से उत्पादित माल के परिवहन का काम देने की मांग को लेकर स्थानीय ट्रांसपोर्टरों और बस्तर परिवहन संघ द्वारा आयोजित धरना प्रदर्शन को भी समर्थन देने जैन और शहर जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सुशील मौर्य नगरनार पहुंचे थे। इसके अलावा निजीकरण के विरोध में प्रदेश कांग्रेस कमेटी और सर्व आदिवासी समाज एवं पिछड़ा वर्ग समाज द्वारा 3 अक्टूबर को आयोजित बस्तर संभाग महाबंद को सफल बनाने में भी जैन और मौर्य ने अहम भूमिका निभाई थी। जैन का कहना है कि बस्तर के आदिवासियों की भावना का सम्मान करते हुए केंद्र सरकार को अपना फैसला वापस लेना चाहिए।
गंगानगर वार्ड में बहने लगी अब विकास की गंगा
- वार्ड में 35 लाख रु. से अधिक के विकास कार्यों का विधायक और मेयर ने किया भूमिपूजन
जगदलपुर विधायक जगदलपुर तथा संसदीय सचिव नगरीय प्रशासन एवं श्रम विभाग रेखचंद जैन और महापौर सफीरा साहू ने शहर के गंगानगर वार्ड – 23 में 35 लाख 11 हजार रुपए लागत के बीटी सड़क नवीनीकरण, आरसीसी नाली निर्माण एवं सीसी सड़क निर्माण कार्य का भूमिपूजन किया।
वार्ड के वरिष्ठ नागरिकों , मितानिनों एवं स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं, सफाई कर्मचारियों का शॉल एवं श्रीफल भेंटकर सम्मानित किया गया। मलेरिया, डेंगू एवं मच्छर जनित बीमारियों से बचाव के लिए मच्छरदानी वितरित की गई। जिन कार्यों का भूमिपूजन किया गया उनमें शीतला होटल से अशरफ घर तक बीटी सड़क नवीनीकरण कार्य लागत 9.24 लाख रुपए, ध्रुव घर से माड़िया सराय एवं कर्मा गली तक आरसीसी नाली निर्माण कार्य लागत 12.19 लाख रुपए एवं पंप हाउस से सरदार घर तक सीसी सड़क निर्माण कार्य लागत 13.68 लाख रुपए के कार्य शामिल हैं। इस अवसर पर संसदीय सचिव रेखचंद जैन ने कहा कि हमारे प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की मंशा के अनुरूप शहर के सर्वांगीण विकास के लिए लगातार कार्य किया जा रहा है। शहर के हर वार्ड में लाखों रुपए के आधारभूत संरचना के कार्य किए जा रहे हैं। पूर्ववर्ती सरकार में जहां शहर का विकास कुछ विशेष वार्डों तक सीमित था, आज हर वार्ड में बिना किसी भेदभाव के विकास हो रहा है। उन्होंने वार्ड पार्षद एवं एमआईसी सदस्य राजेश राय की तारीफ करते हुए कहा कि आपके जुझारू पार्षद वार्ड के विकास के लिए लगातार संघर्षशील रहते हैं। वार्ड विकास के लिए उनकी लगन का ही परिणाम है कि आपके वार्ड में करोड़ों रुपए के कार्य कराए गए हैं। महापौर सफीरा साहू ने कहा कि गढ़बो नवा छत्तीसगढ़ की अवधारणा अनूरूप गढ़बो नवा जगदलपुर को साकार किया जा रहा है। शहर विकास के लिए धन की कोई कमी नहीं है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, नगरीय प्रशासन मंत्री शिव डहरिया तथा विधायक एवं संसदीय सचिव रेखचंद जैन का लगातार आशीर्वाद प्राप्त हो रहा है। इस अवसर पर संसदीय सचिव रेखचंद जैन, महापौर सफीरा साहू, इंद्रावती विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष राजीव शर्मा , वरिष्ठ पार्षद एवं एमआईसी सदस्य यशवर्धन राव, राजेश राय, पार्षद सुखराम नाग, सूर्या पाणी मनोनीत पार्षद सुरेंद्र झा ,अम्माजी राव, वरिष्ठ नेता अंगद प्रसाद त्रिपाठी, ओमकार सिंह जसवाल, परमजीत सिंह जसवाल, जगजीत सिंह बेनीपाल, वरिष्ठ नागरिक बृजबिहारी झा, बटोही शर्मा, भोगी झा, सूरज महंत, रियाज खान, रमजान बेग, प्रेमलाल यादव, लोकेश यादव, मोटम बेसरा, आयुष मोहंती, गोलू यादव, हीरा यादव समेत बड़ी संख्या में वार्डवासी उपस्थित रहे।
अधिकारी की लापरवाही बच्चों पर पड़ रही है भारी
- धरना प्रदर्शन के चलते आंगनबाड़ी केंद्र हो गए बंद
जगदलपुर बस्तर जिले के सुदूर वनांचल बास्तानार विकासखंड में महिला एवं बाल विकास विभाग की परियोजना अधिकारी उर्मिला खोब्रागढ़े की मनमानी और लापरवाही बच्चों पर भारी पड़ रही है। परियोजना अधिकारी के रवैए के खिलाफ आंगनबाड़ी कार्यकर्त्ता एवं सहायिकाएं आंदोलन पर चली गई हैं। इसके चलते आंगनबाड़ी केंद्रों की व्यवस्था चरमरा गई है। विकासखंड के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों में ताले लटक रहे हैं।

दरअसल विगत पांच वर्षों से बतौर प्रभारी विकासखंड में पदस्थ परियोजना अधिकारी आंगनबाड़ी कार्यकर्त्ताओं से समन्वय बनाने और शासन की योजनाओं को सुचारू रूप से संचालित करने में नाकाम रही हैं। वर्तमान में स्थिति यह है कि क्षेत्र की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं परियोजना अधिकारी पर आतंक का राज कायम करने का आरोप लगाते हुए आंदोलित हो उठी हैं। कार्यकर्ताओं ने बताया कि परियोजना अधिकारी कभी भी आकस्मिक रूप से आंगनबाड़ी केंद्रों में उपस्थित होकर कार्यकर्ताओं को लगातार परेशान करने का कार्य करती हैं। जिसके चलते उन्हें बेवजह परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। आंगनबाड़ी केंद्रों के निरीक्षण के दौरान अनावश्यक आरोप लगाते हुए कारण बताओ नोटिस जारी कर कई कार्यकर्ताओं को बर्खास्त करने की धमकी भी परियोजना अधिकारी द्वारा दी जाती है। साथ ही प्रतिमाह मानदेय राशि और अन्य देयकों को बेवजह रोक दिया जाता है। इसके चलते आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं को मानसिक प्रताड़ना के दौर से गुजरना पड़ रहा है।
विकासखंड के अधिकारियों की पदस्थापना पर गौर किया जाए तो 5 वर्षों में जनपद पंचायत बास्तानार के कई मुख्य कार्यपालन अधिकारियों की पद स्थापना और स्थानांतरण विकासखंड से हो चुका है, लेकिन परियोजना अधिकारी उर्मिला खोब्रागढ़े पांच साल से यहीं पदस्थ हैं। उन्हें को वर्तमान में दो विकासखंड संभालने की जिम्मेदारी दे दी गई है। उनके अधीन दरभा ब्लॉक और बास्तानार ब्लॉक शामिल हैं।लगातार 5 वर्षों से बास्तानार विकासखंड की प्रभारी होने की वजह से दोनों ही
विकासखंडों का शासकीय कार्य लगातार बाधित हो रहा है। दोनों ब्लॉकों में आंगनबाड़ी केंद्रों के कर्मचारियों के साथ परियोजना अधिकारी समन्वय बनाकर कार्य करने में अब तक नाकाम रही हैं। उनकी मनमानी और लापरवाही के चलते नौनिहालों के लिए शासन द्वारा संचालित योजनाओं का क्रियान्वयन भी प्रभावित हो रहा है। वर्तमान में बास्तानार विकासखंड की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं द्वारा परियोजना अधिकारी को हटाने की मांग को लेकर विकासखंड मुख्यालय में धरना प्रदर्शन किया जा रहा है। इसके चलते आंगनबाड़ी केंद्र बंद पड़े हुए हैं और महिला बाल विकास विभाग की लगातार किरकिरी भी हो रही है।
विधानसभा चुनाव से पहले डॉ. पुजारी का तबादला
- प्रभारी संयुक्त संचालक से जिला अस्पताल में पोस्टिंग
- महारानी अस्पताल की लचर व्यवस्था में सुधार लाने छ्ग शासन ने उठाया कदम
*जगदलपुर।* प्रभारी संयुक्त संचालक लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण बस्तर संभाग डॉ. बीआर पुजारी का तबादला जगदलपुर के जिला चिकित्सालय महारानी अस्पताल में कर दिया गया है। गौरतलब है कि महारानी अस्पताल की व्यवस्था बुरी तरह चरमरा गई है।
कहने को तो यह बस्तर का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल है, लेकिन डॉक्टरों की मनमानी के चलते इस अस्पताल का समुचित लाभ लोगों को नहीं मिल रहा है। ड्यूटी समय में डॉक्टर मरीजों को स्टॉफ नर्सेज के भरोसे छोड़ अस्पताल से गायब रहते हैं। मरीज और उनके परिजन हलाकान होते रहते हैं। हफ्तेभर पहले की ही बात है इस अस्पताल में प्रसव के लाई गई एक महिला घंटों तड़पती रही, मगर डॉक्टर उसे देखने भी नहीं पहुंचे। अंततः परिजन महिला को निजी अस्पताल में ले जाने के लिए मजबूर हो गए। यहां के डॉक्टर्स प्राइवेट प्रेक्टिस में मशगूल रहते हैं। इसी तरह अस्पताल में शासन द्वारा उपलब्ध कराए गए कीमती जांच उपकरणों का लाभ भी मरीजों को नहीं मिल रहा है। बताते हैं कि निजी एक्स रे, एंजियोग्राफी, सिटी स्कैन सेंटर्स संचालकों को उपकृत करने के लिए जिला चिकित्सालय के उपकरणों में तकनीकी खराबी ला दी जाती है। इसकी शिकायत राज्य शासन तक हुई थी। माना जा रहा है कि महारानी अस्पताल जिला चिकित्सालय की व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए ही डॉ. बीआर पुजारी की नियुक्ति जिला चिकित्सालय में की गई है। एक और बात उल्लेखनीय है कि डॉ. पुजारी का नाम बस्तर संभाग की बीजापुर विधानसभा सीट से भाजपा के संभावित प्रत्याशी के रूप में लगातार सामने आ रहा था। ऐन चुनाव से पहले शासन ने उनका तबादला कर सभी को चौंका दिया है। डॉ. पुजारी की जगह जिला चिकित्सालय के वरिष्ठ चिकित्सक एवं पैथालॉजिस्ट डॉ. कृष्ण कुमार नाग को प्रभारी संयुक्त संचालक लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण बस्तर संभाग नियुक्त किया गया है।
जगदलपुर के भाजपाइयों का विरोध था प्रायोजित
- विरोध के चक्कर में संतोष पर हो सकती है कार्रवाई
- सामू की तरह लग सकती है कमलचंद्र भंजदेव की लाटरी
रायपुर बस्तर संभाग की जगदलपुर विधानसभा सीट से भाजपा के पूर्व विधायक और कुछ भाजपा नेताओं ने 2013 में कांग्रेस द्वारा की गई गलती दोहरा दी है। मामला तूल पकड़ चुका है और रिपोर्ट दिल्ली तक जा चुकी है। प्रायोजित विरोध पूर्व भाजपा विधायक पर भारी पड़ सकता है। पूर्व विधायक पर अनुशासनात्मक कार्रवाई हो सकती है और कमलचंद्र भंजदेव की लॉटरी लगने की संभावना बढ़ गई है।
भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश मुख्यालय कुशाभाऊ ठाकरे भवन में टिकट वितरण को लेकर उहापोह की स्थिति निर्मित हो गई है। जगदलपुर विधानसभा क्षेत्र के कुछ भाजपा कार्यकर्त्ताओं के हंगामा खड़ा कर दिया था। इसके बाद संगठन मंत्री पवन साय ने कुछ लोगों से गोपनीय चर्चा की तो खुलासा हुआ कि हंगामा करने वालों को पूर्व विधायक संतोष बाफना ने भेजा था। हंगामे में शामिल कुछ लोगों ने इस आशय की स्वीकारोक्ति पवन साय के समक्ष भी की और बताया कि उन्हें पूर्व विधायक ने भेजा था। इन लोगों ने ऐसी ही जानकारी प्रदेश भाजपा अध्यक्ष अरुण साव और डॉ. रमनसिंह को भी दी। इससे अनुशासनहीनता परिलक्षित हो गई। इस कदम को भारतीय जनता पार्टी के संविधान के विपरीत मानते हुए मामले की शिकायतें दिल्ली मुख्यालय तक किए जाने की भी चर्चा है। संगठन से जुड़े एक बड़े नेता ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि चौंकाने वाले नाम सामने आएंगे। बस्तर संभाग की एकमात्र सामान्य विधानसभा सीट जगदलपुर से करीब 600 बाफना समर्थक कार्यकर्ताओं ने रायपुर पहुंचकर किरण देव को प्रत्याशी बनाए जाने का विरोध किया। बाफना समर्थकों को उनके विश्वस्त लोगों ने फंडिंग की थी। फंडिंग करने वालों में शहरी और ग्रामीण दोनों थे। बाफना समर्थक प्रदेश भाजपा कार्यालय में प्रदेश अध्यक्ष अरुण साव के तथा पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. रमन सिंह से भेंटकर संभावित सूची में आए किरण देव के नाम का विरोध कर वापस जगदलपुर जा चुके हैं। बाफना के इस कृत्य की जानकारी प्रदेश संगठन ने दिल्ली भेज दी है और अब चौंकाने वाले नाम को आगे बढ़ाया जा सकता है। ज्ञात हो कि 2013 में कांग्रेस पार्टी के लोगों ने ठीक इसी अंदाज में गजराज पगारिया के नाम का विरोध किया था। उसके बाद सामू कश्यप की लाटरी लग गई थी। अब यह कहा जा रहा है कि यदि जगदलपुर सीट से किरण देव का नाम कटता है, तो 27440 हजार वोटों से हार का स्वाद चख चुके संतोष बाफना की जगह महाराज कमलचंद्र भंजदेव को टिकट दिया जा सकता है।
भूपेश की रणनीतिक कसौटी पर खरे उतर रहे बैज
- कांग्रेस में अब सब साथ- साथ हैं
(अर्जुन झा)
रायपुर चुनावी वक्त में छत्तीसगढ़ की कांग्रेस राजनीति कदम से कदम मिलाकर चल रही है। इसके पीछे मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की वह रणनीति है, जो उन्होंने संगठन की कमान युवा नेतृत्व को देने में अहम भूमिका निभाई और एक ही झटके में नई और पुरानी पीढ़ी के बीच समन्वय स्थापित करवा दिया। जब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के पद पर पारी पूरी कर चुके मोहन मरकाम को संगठन के दायित्व से मुक्त कर सत्ता की राजनीति में नई भूमिका दी गई और बस्तर सांसद दीपक बैज को प्रदेश कांग्रेस का अध्यक्ष नियुक्त किया गया, तब कांग्रेस की वह जरूरत पूरी हो गई जो चुनावी समय में एकदम आवश्यक थी। पुरानी कहावत है कि एक को साधे सब सधे, सब सधे सब जाए। भूपेश बघेल ने राजनीतिक रणकौशल दिखाते हुए संगठन को साध लिया। संगठन सध गया तो समझो सब सध गया। सत्ता के स्तर पर भूपेश बघेल जो कर सकते हैं, वह तो वे पौने पांच साल से कर ही रहे हैं। चुनाव के समय मैदान में संगठन सामने होता है और सत्ता पीछे चली जाती है। जबकि शेष समय सत्ता आगे होती है और संगठन पीछे चला जाता है। संगठन की अहमियत कभी समाप्त नहीं होती लेकिन उसे सत्ता काल में सत्ता के साथ चलना होता है।कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रहे मौजूदा मंत्री मोहन मरकाम ने अपने कार्यकाल के दौरान सत्ता और संगठन के बीच पर्याप्त समन्वय स्थापित करने की कोशिश की लेकिन कार्यकाल समाप्ति के बाद जब उन्हें अतिरिक्त समय मिला, तब सत्ता और संगठन के बीच कुछ गतिरोध खुलकर सामने आए। यह तो तय था कि मोहन मरकाम को नए चुनाव के पहले संगठन की सरदारी से मुक्त किया जाएगा। कांग्रेस के राष्ट्रीय अधिवेशन के समय यह संकेत मिल गए थे कि अधिवेशन निपटने के बाद फेरबदल हो सकता है। इस बीच सांसद दीपक बैज का नाम नए अध्यक्ष के तौर पर सबसे आगे आ चुका था। लेकिन मामला कुछ समय के लिए ठंडे बस्ते में चला गया। इसके बाद अचानक दिल्ली से फैसला आ गया और छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस की कमान युवा सांसद दीपक बैज को सौंप दी गई। विधानसभा चुनाव की तैयारी के लिए दीपक बैज को बहुत कम समय मिला है। इसलिए उन्हें ज्यादा मेहनत करने की जरूरत है, जो भी कर रहे हैं। अब सवाल उठता है कि कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व ने प्रदेश इकाई का उत्तरदायित्व देने के लिए दीपक बैज को ही क्यों चुना? दरअसल दिल्ली में सांसद बैज छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व दमदारी से करते रहे हैं। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की भावनाओं के अनुरूप संसद में छत्तीसगढ़ की आवाज बुलंद करते रहे हैं और यहां जिन बातों को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल उठाते हैं, उन्हें संसद में उठाने की जिम्मेदारी दीपक बैज ने बखूबी निभाई है। वह युवा हैं तो जाहिर है कि युवा पीढ़ी के कांग्रेसी उनसे प्रभावित होंगे। दूसरी बात यह है कि दीपक बैज की कार्यशैली ऐसी है कि विरोधी विचारधारा के लोग भी उनकी बात को वजन देते हैं। चुनाव में केवल आंतरिक राजनीति की बात की जाती है तो कांग्रेस की आंतरिक राजनीति में जो मोहन मरकाम के संगठन नेतृत्व के समय चल रहा था, वह दीपक बैज ने एकदम उलट दिया है। अब कांग्रेस के बड़े से बड़े नेता और छोटे से छोटे नेता सब मिलकर काम कर रहे हैं। वजह यह है कि पूरी कांग्रेस को जोड़ने का काम दीपक बैज ने कर दिया है। ऐसा कहा जा सकता है कि एक सुनियोजित रणनीति के तहत मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सांसद दीपक बैज का नाम आगे बढ़ाया और उन्हें प्रदेश संगठन का नेतृत्व उपलब्ध करवाया इस कसौटी पर अब तक दीपक बैज एकदम खरे उतरे हैं और उन्होंने कांग्रेस संगठन में जो एक गड्ढा दिख रहा था, उसे भरने की सफल कोशिश की है।
आदिवासी मंत्री टुडू की बैठक से दूर रहे भाजपाई
- नगर मंडल भाजपा में ऑल इज नॉट वेल, बैकफुट पर आई बीजेपी
- मोदी के स्वागत को लेकर सामने आई नाराजगी
जगदलपुर आदिवासी हितैषी होने का दावा करने वाली भाजपा की पोल तब खुल गई, जब भाजपा नेताओं ने अपने ही आदिवासी केंद्रीय मंत्री विश्वेश्वर टुडू द्वारा आहूत बैठक का बहिष्कार कर दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्वागत करने वालों की सूची में नाम न होने से नाराज पार्टी नेताओं ने ऐसा कदम उठाया।
आदिवासी समुदाय से आने वाले मंत्री टुडू का विरोध इसलिए किया गया कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से स्थानीय नेताओं को नहीं मिलवाया, जबकि चापलूस किस्म के लोग मोदी से मिलकर फोटो वायरल करते रहे। केंद्रीय जलशक्ति राज्यमंत्री विश्वेश्वर टुडू दो दिवसी यबस्तर दौरे पर पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने बीजेपी के शक्ति केंद्र प्रभारियों की बैठक आहूत की थी। कथित रूप से उपेक्षित शक्ति केंद्र प्रभारियों ने केंद्रीय मंत्री की बैठक का बहिष्कार कर दिया। पार्टी का झंडा उठाने वाले समर्पित कार्यकर्ताओं का नाम 3 अक्टूबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे के दौरान उनसे मुलाकात करने वालों की सूची में नहीं था।
इसके कारण वरिष्ठ कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों की उपेक्षा से पार्टी के जमीनी कार्यकर्ता नाराज हो गए और उन्होंने आदिवासी केंद्रीय मंत्री की बैठक का बहिष्कार कर दिया।प्रधानमंत्री के दौरे के दौरान भाजपा जिला संगठन और बस्तर के वरिष्ठ नेताओं ने पार्टी और समाज प्रमुखों की मुलाकात प्रधानमंत्री के साथ तय की थी। सूची में नेताओं के परिजनों और ऐसे लोगों के नाम थे, जो नेताओं की परिक्रमा करते रहते हैं। ऐसे लोगों का बीजेपी से कोई वास्ता ही नहीं है। इससे कार्यकर्ता खुद को उपेक्षित महसूस करने लगे। उन्हें इस बात का मलाल था कि शीर्ष नेताओं से मुलाकात का समय आता है, तो हमारी उपेक्षा कर चापलूसों को आगे बढ़ा दिया जाता है। प्रधानमंत्री की सभा के लिए भीड़ जुटाने का कार्य यही उपेक्षित कार्यकर्त्ताओं और नेताओं ने किया था। उन्हें उपेक्षित रखा गया, जो कई वर्षों से पार्टी की सेवा करते आ रहे हैं। इन कार्यकर्ताओं को भी प्रधानमंत्री के से मिलने का अवसर नहीं प्रदान किया गया और ऐसे लोगों को प्रधानमंत्री से मिलने का पास उपलब्ध करवाया गया, जो कनिष्ठ कार्यकर्ता की श्रेणी में आते हैं।
रचनाकारों ने दी पूर्वजों को को काव्यमयी पुण्यांजलि
- आओ पूर्वजों को याद करें विषय पर हुई काव्य गोष्ठी
- अहिसास अमरावती की इंदौर शाखा का आयोजन
रायपुर साहित्यिक संस्था अहिसास अमरावती की इंदौर शाखा द्वारा श्राद्ध पक्ष के परिप्रेक्ष्य में 71वीं ऑनलाईन ऑडियो काव्य गोष्ठी “आओ पूर्वजों को याद करें ” विषय पर आयोजित की गई।
काव्यगोष्ठी की मुख्य अतिथित प्रोफेसर डॉ. मीना श्रीवास्तव पुष्पांशी ग्वालियर, विशिष्ट अतिथि दल्ली राजहरा की वरिष्ठ कवियित्री डॉ. शिरोमणि माथुर थीं। देश के 41 कवियों ने अपनी नई स्व रचित रचनाएं सुनाकर सभी को अभिभूत कर दिया। अध्यक्ष डॉ. बनवारी लाल जाजोदिया यथार्थ ने कहा कि भारतीय संस्कृति और हिंदू धर्म में श्रद्धा, भावना, सहिष्णुता को विशेष महत्व दिया गया है।पुनर्जन्म को मान्यता देने के साथ अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा एवम् कृतज्ञता प्रकट करने का विधान है श्राद्ध पक्ष में। ज्योतिष शास्त्र एवं ब्रह्म पुराण के अनुसार जब सूर्य कन्या राशि में विचरण करते तब पितृलोक पृथ्वी के सबसे नजदीक होता है, इस समय हमारे पूर्वज मृत्यु तिथि पर अपने घर के दरवाजे पर पहुंच कर ब्राह्मणों के माध्यम से वायु रूप में भोजन करते हैं और आशीर्वाद देकर पुनः अपने लोक लौट जाते हैं। काव्य गोष्ठी में सरस्वती वंदना की प्रस्तुति आशा जाखड़ ने दी।स्वागत गीत शोभारानी तिवारी ने गया। सम्मान पत्र का वाचन अशोक द्विवेदी ने किया।अथिति परिचय डॉ. राजेंद्र खरे ने दिया। डॉ. खरे ने आभार व्यक्त भी किया। कविता पाठ नीति, शोभारानी, मीना अग्रवाल, संतोष तोसनीवाल, शेषणारायण चौहान, राजकुमार हांडा, स्नेह नीमा, डॉ. राज गोस्वामी, मोहन त्रिपाठी गुजरात, महेंद्र शर्मा, डॉ. अजीत जैन आगरा, मनीराम शर्मा, पूर्णचंद्र शर्मा और डॉ. अरविंद श्रीवास्तव दतिया, डॉ. रामस्वरूप साहू मुंबई, डॉ. राजेंद्र खरे, चंद्रकला जैन चंडीगढ़, हंसा मेहता, डॉ. शिरोमणि माथुर, डॉ. नूतन जैन, सोनल सीकर, डॉ. विजयलक्ष्मी अन्नू आगरा, डॉ. बनवारी जाजोदिया, डॉ. बिनोद हंसोड़ा दरभंगा, जयप्रकाश अग्रवाल काठमांडू, हरिप्रकाश भिलाई, दिनेंद्र दास कबीर आश्रम, डॉ. मीना श्रीवास्तव ग्वालियर, डॉ. नूतन जैन आगरा, अनिल वर्मा अलीगढ़, डॉ. ललित सिंह ठाकुर भाटापारा ने किया। संचालन शोभारानी तिवारी ने किया। राष्ट्रगान के बाद सभी ने पूर्वजों को श्रद्धा से नमन किया।
कोंटा क्षेत्र में बदलाव की बयार : कवासी लखमा
- मंत्री ने किया निर्माण कार्यों का भूमिपूजन लोकार्पण
- नुक्कड़ सभा में शामिल हुए उद्योग एवं आबकारी =
जगदलपुर उद्योग एवं आबकारी मंत्री कवासी लखमा ने शनिवार को अपने निर्वाचन क्षेत्र कोंटा के ग्राम पेंटा में विभिन्न निर्माण कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन किया। उन्होंने नुक्कड़ सभा को संबोधित भी किया। मंत्री कवासी लखमा का ग्रामीणों ने ढोल नगाड़े की थाप के बीच आत्मीय स्वागत किया।
सभा को संबोधित करते हुए मंत्री कवासी लखमा ने कहा कि छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद आज अंदरूनी क्षेत्रों में सड़क, पानी, शिक्षा, चिकित्सा, बिजली की सुविधा मिल रही है, लोगों को वन अधिकार पट्टे दिए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कुछ दिन पूर्व मैं कोर्रा पहाड़ गया था। पहले वहां बिजली, सड़क, स्कूल की सुविधा नही थी। मैं मोटर साईकल से गया था। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार के प्रयास से इस गांव में आज बिजली, स्कूल, आंगनबाड़ी की सुविधा उपलब्ध हो गई है। जल्द ही सड़क का भी निर्माण किया जाएगा। आज कोर्रा पहाड़ गांव बदल रहा है। श्री लखमा ने ग्रामीणों से पूछा कि अभी आप लोगों को कैसा लग रहा है ? लोगों ने नक्सल प्रभाव कम होने की बात कही और बताया कि पहले राशन कार्ड काटने का काम किया जाता था, आज सभी का राशन कार्ड बनाने के साथ ही खाद्यान्न भी वितरण किया जा रहा है। पहले लोग घर से निकलने में डरते थे, आज लोग कहीं भी आ जा सकते हैं। रोड बनाने की मांग पर श्री लखमा ने कहा कि अंदर वालों से हम डरने वाले नहीं हैं। ग्रामीणों को सड़क, पानी, बिजली, शिक्षा, इलाज समेत सभी सुविधाएं उपलब्ध कराने का काम हमारी सरकार कर रही है। उन्होंने आगे कहा कि आज के समय में रोड, पुल बनाना आवश्यक है। सड़क बनने से ही आपके गांव में विकास पहुंचेगा।एंबुलेंस, दवाई, खाद्यान्न व जरूरी सामानों की उपलब्धता व हॉस्पिटल जाने के साथ ही दूसरे गांव से जुड़ने के लिए रोड और पुल पुलिया बहुत जरूरी है। टेटराई जाने के लिए पक्की सड़क न होने के कारण गाड़ी नहीं पहुंच पाती है। एर्राबोर में टेटराई के लिए सड़क निर्माण की घोषणा मैने की थी। दिसंबर से मई के बीच रोड निर्माण कार्य पूरा कर लिया जाएगा। मेड़वाई की रोड प्रस्तावित है, रेगडगट्टा में रोड का निर्माण चल रहा है आने वाले समय में सड़क मार्ग से बड़ी गाड़ी के जरिए जाऊंगा।उन्होंने कहा कि बारूवाड़ा और एर्राबोर की सबरी नदी में पुल बनाने का काम किया जाएगा। श्री लखमा ने कहा कि आज हमारी सरकार भूमिहीन किसानों, गायता, पुजारी, हाटपहरिया, मांझी, चालकी, कोटवार आदि को सात हजार रुपए सालाना मानदेय दे रही है। 2640 रु. क्विंटल में धान की खरीदी की जा रही है। आने वाले समय मे 3000 रुपए में धान की खरीदी की जाएगी। रोड, पुल निर्माण के साथ ही गरीब आदिवासियों की जेब मे सरकार की जनकल्याणकारी योजनों के माध्यम से पैसा पहुंचाने का काम किया जा रहा है। आज कोदो की 3200 रु. में तथा कोसरा की 3500 रु. में खरीदी की जा रही है। अंदरुनी क्षेत्र के गोलापल्ली, किस्टाराम, जगरगुंडा में हॉस्पिटल खोलने, आधार कार्ड, राशन कार्ड बनाने का काम कांग्रेस की सरकार कर रही है।
विकास विरोधी हैं कम्युनिस्ट
कवासी लखमा ने कहा कि सड़क व पुल निर्माण, थाना व कैंप खोलने का विरोध करने वाली कम्युनिस्ट पार्टी को वोट मांगने का अधिकार नहीं है। ऐसी विकास विरोधी पार्टी को वोट नहीं देना चाहिए। यह पार्टी सड़क, धान खरीदी, तेंदूपत्ता आदि के बारे में बात नहीं करती है, सीपीआई को वोट देने से विकास नही होगा। उन्होंने कहा कि पहले केवल कोंटा विधानसभा क्षेत्र में एकमात्र तहसील हुआ करती थी। सुकमा जिला बनने के बनने के बाद आज हमारी सरकार ने गादीरास, तोंगपाल, केरलापाल, दोरनापाल, छिंदगढ़, जगरगुंडा को तहसील बनाने का काम किया है।
महंगाई कम करेगी कांग्रेस सरकार
आज महंगाई दिनों दिन बढ़ते जा रही है, आज खाने पीने के समान से लेकर पहनने के कपड़ो में जीएसटी लग रहा है, जिससे व्यापारी वर्ग से लेकर गरीब आदमी परेशान हैं। हम नहीं कहते कि जीएसटी नहीं लगना चाहिए, बड़े वर्ग के व्यापारियों पर जीएसटी लगना चाहिए न कि गरीबों पर। महंगाई खत्म करने के लिए कांग्रेस को वोट देना है। सुकमा जिले के लोगों को तेंदूपत्ता से 50 करोड़ का मुनाफा हुआ है। अगले साल इसे बढ़ाकर 60 करोड़ करना है। उन्होंने कहा कि मुझे पूरी उम्मीद है दो महीने बाद होने वाले चुनाव में कांग्रेस पार्टी को समर्थन देकर प्रचंड बहुमत से पुनः कांग्रेस की सरकार बनाने में आप लोग अहम योगदान देंगे। मंत्री कवासी लखमा ने स्वेच्छानुदान के तहत 21 लोगों को 1 लाख 20 हजार रुपए के चेक और 32 हितग्राहियों को वनाधिकार पट्टा वितरण किया।


