अभनपुर आत्मानंद स्कूल में सेवा संकल्प अभियान के तहत सेवा समर्पण शसक्त युवा विकसित भारत का कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमें अलग अलग स्कूलों के बच्चों द्वारा विभिन्न विषयों अदभूत व्याख्यान प्रस्तुत किया गया। विकासित भारत के विषय पर प्रकाश डाला गया। कार्यक्रम शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित किया गया था।जिसमें मुख्य अतिथि इंद्र कुमार साहू विधायक अभनपुर, चंद्रिका बंजारे अध्यक्ष जनपद पंचायत अभनपुर, उत्रसेन गहिवारे नगर पालिका अध्यक्ष, जनपद उपाध्यक्ष खेलूराम साहू, पार्षद मीना साहू व चंपा लेदेकर, बीईओ जैन, प्राचार्य आत्मानंद स्कूल अभनपुर, अध्यक्ष गोयल भट्ट आत्मानंद स्कूल, राधवेंद्र साहू, वेदप्रकाश, विनोद चंद्राकर उपस्थित रहे
बस्तर की पत्रकारिता को फिर मिला राज्य स्तर पर सम्मान
वरिष्ठ पत्रकार अनिल सामंत सम्मानित
जगदलपुर बस्तर की पत्रकारिता को राज्य स्तर पर एक बार फिर सम्मान मिला है। एक दैनिक समाचार पत्र के बस्तर संभाग प्रमुख अनिल सामंत को पत्रकारिता और सामाजिक सरोकारों के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए राज्य स्तरीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया। बेमेतरा में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में उन्हें मोमेंटो, शाल और श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया गया।
विशेष बात यह है कि पत्रकारिता के क्षेत्र में अनिल सामंत को इससे पहले भी राज्य स्तरीय सम्मान मिल चुका है। एक अन्य दैनिक समाचार पत्र में कार्यरत रहने के दौरान भी उन्हें पत्रकारिता में उत्कृष्ट योगदान के लिए राज्य स्तरीय सम्मान से नवाजा गया था। अब दूसरे समाचार पत्र के बस्तर संभाग प्रमुख के रूप में कार्य करते हुए उन्हें पुनः राज्य स्तर पर सम्मानित किया गया है। लगातार दूसरी बार मिला यह सम्मान उनकी लंबी पत्रकारिता यात्रा और जनसरोकारों से जुड़े कार्यों की राज्य स्तर पर मिली पहचान के रूप में सामने आया है। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, कौशल विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, दुर्ग सांसद विजय बघेल, बेमेतरा विधायक दीपेश साहू, आलोक मेहता, अखबार के प्रधान संपादक यशवंत धोटे एवं समाचार संपादक संदीप दीवान सहित अन्य अतिथियों ने अनिल सामंत को सम्मानित किया।
बस्तर के लिए गौरव का क्षण: राणा
राज्य स्तरीय सम्मान मिलने पर राजस्व सभापति एवं पार्षद संग्राम सिंह राणा ने अनिल सामंत को बधाई देते हुए कहा कि बस्तर संभाग से जुड़े पत्रकार का राज्य स्तर पर सम्मानित होना पूरे बस्तर के लिए गौरव की बात है। उन्होंने कहा कि अनिल सामंत ने पत्रकारिता के माध्यम से बस्तर के मुद्दों, जनसमस्याओं और सामाजिक सरोकारों को लगातार प्रमुखता से उठाया है। उनके कार्यों ने बस्तर सहित पूरे छत्तीसगढ़ को गौरवान्वित किया है। उन्होंने कहा कि ऐसे सम्मान केवल व्यक्ति की उपलब्धि नहीं, बल्कि पत्रकारिता के माध्यम से समाज और क्षेत्र के प्रति जिम्मेदारी निभाने वालों के लिए प्रेरणा भी हैं। इससे युवा पत्रकारों को जनसरोकारों से जुड़कर अपनी भूमिका मजबूत करने का संदेश मिलता है। सम्मान समारोह में विभिन्न जनप्रतिनिधियों के साथ सरगुजा और बस्तर से पहुंचे पत्रकार,बेमेतरा के समाजसेवी तथा विभिन्न क्षेत्रों के गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
गड़े धन के लिए बच्चे की बलि देने की तैयारी?
कोहकापाल में 12 वर्षीय बच्चे को तांत्रिक क्रियाओं में शामिल करने का आरोप
गड़े धन का हंडा पाने के लिए नरबलि की तैयारी का दावा
ग्रामीणों ने एसपी से लगाई जांच की गुहार
बकावंड बस्तर जिले की बकावंड तहसील अंतर्गत ग्राम कोहकापाल में 12 वर्षीय बच्चे को कथित तांत्रिक क्रियाओं में शामिल किए जाने का मामला सामने आने के बाद ग्रामीणों में आक्रोश है। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव के बाहर जंगल में जमीन के अंदर दबे कथित धन, जिसे स्थानीय स्तर पर ‘हंडा’ कहा जाता है, को निकालने के लिए तांत्रिक गतिविधियां की जा रही थीं और इसी दौरान बच्चे को निशाना बनाया गया और उसकी बलि देने की तैयारी की गई थी।
परिजनों और ग्रामीणों के अनुसार, बच्चे की आंखों पर करीब तीन दिनों तक पट्टी बांधकर उसे अलग-अलग तांत्रिक क्रियाओं में शामिल किया गया। ग्रामीणों का दावा है कि कथित रूप से गड़े धन को हासिल करने के लिए बच्चे की बलि देने की तैयारी की जा रही थी। मामले की जानकारी मिलने के बाद ग्रामीणों ने हस्तक्षेप कर बच्चे को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। घटना की जानकारी सामने आने के बाद ग्रामीण कथित तांत्रिक और उसके सहयोगियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर नगरनार थाना पहुंचे। ग्रामीणों का आरोप है कि थाना स्तर पर उनकी शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया गया। इतना ही नहीं, ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि उनके द्वारा दिए गए आवेदन को फाड़ दिया गया। हालांकि, इन आरोपों की पुलिस स्तर से स्वतंत्र पुष्टि अभी सामने नहीं आई है। मामले को लेकर बच्चे के परिजनों सहित ग्रामीण जगदलपुर पहुंचे और पुलिस अधीक्षक से मुलाकात कर पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच तथा संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। ग्रामीणों ने बच्चे की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि कथित तांत्रिक गतिविधियों में शामिल लोगों के खिलाफ समय रहते जांच और कार्रवाई नहीं की गई तो भविष्य में किसी अन्य बच्चे को भी निशाना बनाया जा सकता है। उन्होंने पुलिस प्रशासन से मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी पहलुओं की जांच करने और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।
कटघरे में पुलिस
सुशासन सरकार में प्रशासनिक लचरता के कारण अब जादू टोना, तांत्रिक क्रियाओं से पुराने गड़े धन को किस विधि से निकाली जाए जैसी हरकत सामने आ रही है। नर बलि देने की कुत्सित मानसिकता और नगरनार पुलिस की कार्यप्रणाली ने इस मामले में कई सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय पुलिस प्रशासन ऐसे लोगों को दंड देने के बजाय संरक्षण देने पर आमदा है। बकावंड ब्लॉक की घटना को नगरनार पुलिस सुलझाने के बजाय बहुत ही हल्के में लेकर अपनी लचर कार्यप्रणाली का नमूना पेश किया है। जिस पुलिस कर्मी ने ग्रामीणों का आवेदन फाड़ कर फेंक दिया, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जरूरत है।
आगामी त्योहारों को लेकर बस्तर पुलिस और बस परिवहन संघ की बैठक
सफर सुरक्षित बनाने बस्तर पुलिस ने कसी कमर
परिवहन संघ की ली बैठक, दिए दिशा निर्देश
जगदलपुर आगामी त्योहारों के मद्देनजर शहर की यातायात व्यवस्था को सुगम और सुरक्षित बनाए रखने के लिए बस्तर पुलिस और बस परिवहन संघ की महत्वपूर्ण बैठक त्रिवेणी परिसर में आयोजित की गई। बैठक में त्योहारों के दौरान बढ़ने वाले यातायात दबाव, भीड़ नियंत्रण और सड़क सुरक्षा को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। पुलिस अधीक्षक बस्तर शालभ कुमार सिन्हा के निर्देशन तथा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुखनंदन राठौर और नगर पुलिस अधीक्षक सुमीत कुमार धोत्रे के मार्गदर्शन में आयोजित बैठक में बस परिवहन संघ एवं विभिन्न ट्रैवल्स संचालकों सहित करीब 45 पदाधिकारी और प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक में बसों में स्पीड गवर्नर की जांच, फर्स्ट एड बॉक्स, सुरक्षा उपकरण, अग्निशमन यंत्र और आपातकालीन खिड़की की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। साथ ही बसों की पार्किंग व्यवस्था पर विशेष ध्यान देने और अवैध पार्किंग पर पूरी तरह रोक लगाने की हिदायत दी गई।
पुलिस अधिकारियों ने कहा कि त्योहारों के दौरान सड़क पर बढ़ने वाली भीड़ और यातायात दबाव के बीच दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए सुरक्षा मानकों का पालन जरूरी है। बैठक में विश्वनाथ ट्रैवल्स के संचालक अनुज कुमार सिंह, एआरएमटी ट्रैवल्स के संचालक दिलीप सुंदरानी, गुप्ता ट्रैवल्स के संचालक संजय गुप्ता, कुशवाहा ट्रैवल्स के संचालक विक्रम सिंह कुशवाहा, भारत ट्रैवल्स के संचालक नितिन तिवारी, तन्मना ट्रैवल्स के संचालक भीम कश्यप, रॉयल ट्रैवल्स के संचालक बिजेंद्र समरथ सहित अन्य ट्रैवल्स संचालक और पदाधिकारी उपस्थित रहे।इस दौरान यातायात उप पुलिस अधीक्षक जयराम चेरमाको, यातायात प्रभारी मुखुदन सिंह नाग, निरीक्षक कमलेश देवांगन, बोधघाट थाना प्रभारी टामेश्वर चौहान, एसआई सुदर्शन दुबे, राजकुमार आडिल, प्रधान आरक्षक प्रकाश देवांगन, आरक्षक समरथ मरकाम, नोमलाल साहू, तरुण पटेल, परमेश्वर मंडावी, सैनिक वेदप्रकाश राजपूत सहित यातायात विभाग के अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे।
भारत गढ़ रहा है ब्रिक्स-लेखक: शाश्वत, स्वतंत्र पत्रकार
भारत की सभ्यता ने सदियों पहले ही दुनिया को देखने की ऐसी दृष्टि दी थी, जिसमें विचारों, ज्ञान और संवाद के लिए सीमाएं नहीं थीं। ऋग्वेद का सूक्त “आ नो भद्राः क्रतवो यन्तु विश्वतः” (ऋग्वेद 1.89.1), अर्थात “हमारे पास सभी दिशाओं से कल्याणकारी और श्रेष्ठ विचार आते रहें”। भारत इसी व्यापक और समावेशी दृष्टि का प्रतिनिधित्व करता है। आज बदलती विश्व व्यवस्था के दौर में यही भावना अंतरराष्ट्रीय सहयोग, बहुपक्षवाद और वैश्विक संवाद के संदर्भ में नए अर्थ ग्रहण करती दिखाई देती है। जी-20 शिखर सम्मेलन 2023 के बाद भारत ने एक बार फिर दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है। सितंबर 2026 में नई दिल्ली में आयोजित 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन केवल एक अंतरराष्ट्रीय बैठक नहीं था, बल्कि बदलती विश्व व्यवस्था में भारत की भूमिका को समझने का एक महत्वपूर्ण अवसर भी बना। 2023 में जी-20 की अध्यक्षता के दौरान नई दिल्ली में नेताओं की घोषणा पर सहमति बनी और अफ्रीकी संघ को जी-20 का स्थायी सदस्य बनाया गया। भारत ने उस दौरान वैश्विक दक्षिण की प्राथमिकताओं को अंतरराष्ट्रीय विमर्श में अधिक प्रमुखता देने पर भी जोर दिया। 2026 में ब्रिक्स की अध्यक्षता के दौरान भी भारत ने विकास, सहयोग, वैश्विक शासन में सुधार और वैश्विक दक्षिण से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता दी। ब्रिक्स का इतिहास भारत की भूमिका को समझने के लिए महत्वपूर्ण है। इसका पहला शिखर सम्मेलन 2009 में रूस के येकातेरिनबर्ग में हुआ था। भारत ने 2012 में नई दिल्ली में चौथे ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी की, 2016 में गोवा में आठवें शिखर सम्मेलन की मेजबानी की और 2021 में ब्रिक्स की अध्यक्षता की। 2026 में नई दिल्ली में आयोजित 18वां शिखर सम्मेलन भारत की तीसरी भौतिक मेजबानी और चौथी अध्यक्षता का अवसर बना। इस दौरान ब्रिक्स का स्वरूप भी काफी बदल चुका है। पांच देशों से शुरू हुआ यह समूह अब 11 सदस्य देशों का विस्तारित समूह बन चुका है। इस विस्तारित समूह का वैश्विक महत्व केवल सदस्य देशों की संख्या से नहीं समझा जा सकता। ब्रिक्स के 11 सदस्य देश मिलकर विश्व की लगभग 49.5 प्रतिशत आबादी, वैश्विक जीडीपी का करीब 40 प्रतिशत और विश्व व्यापार का लगभग 26 प्रतिशत प्रतिनिधित्व करते हैं। भौगोलिक दृष्टि से भी इसका विस्तार उल्लेखनीय है। सदस्य देशों का संयुक्त क्षेत्रफल लगभग 4.78 करोड़ वर्ग किलोमीटर है, जो दुनिया की आबाद भूमि के करीब 32 प्रतिशत के बराबर है। यानी ब्रिक्स केवल एक राजनीतिक या आर्थिक मंच नहीं, बल्कि जनसंख्या, भूगोल, संसाधनों और बाजारों के लिहाज से भी एक व्यापक वैश्विक समूह है। यही बदलाव 2026 के ब्रिक्स को विशेष बनाता है। नई दिल्ली घोषणा में राजनीतिक एवं सुरक्षा, आर्थिक एवं वित्तीय तथा सांस्कृतिक एवं जन-से-जन सहयोग इन तीन क्षेत्रों को ब्रिक्स सहयोग के प्रमुख आधार के रूप में रेखांकित किया गया। साथ ही संप्रभु समानता, पारस्परिक सम्मान, समावेशिता, सहयोग और सहमति को ब्रिक्स की कार्यप्रणाली का आधार बताया गया।सवाल इसलिए उठता है कि क्या यह विस्तारित ब्रिक्स भारत को आकार दे रहा है या भारत इस नए ब्रिक्स को अपनी प्राथमिकताओं के अनुरूप दिशा देने का प्रयास कर रहा है? इसका उत्तर किसी एक पक्ष में देना आसान नहीं है। वास्तव में दोनों प्रक्रियाएं एकसाथ चल रही हैं। ब्रिक्स बदल रहा है और भारत भी उस बदलाव के बीच अपनी भूमिका को नए तरीके से परिभाषित कर रहा है।भारत की 2026 की अध्यक्षता केवल दो दिन के शिखर सम्मेलन तक सीमित नहीं रही। प्रधानमंत्री के अनुसार, अध्यक्षता के दौरान 350 से अधिक बैठकें और उच्चस्तरीय कार्यक्रम आयोजित किए गए तथा लगभग 30 शहरों में ब्रिक्स से जुड़े कार्यक्रम हुए। आधिकारिक पृष्ठभूमि दस्तावेज के अनुसार, इन बैठकों में राजनीतिक-सुरक्षा, आर्थिक-वित्तीय तथा सांस्कृतिक और जन-से-जन सहयोग के तीनों क्षेत्रों में व्यावहारिक सहयोग को आगे बढ़ाया गया। यहीं भारत की सम्मेलन-संचालन क्षमता दिखाई देती है अर्थात अलग-अलग हित रखने वाले देशों को एक मंच पर लाकर बातचीत की जमीन तैयार करने की क्षमता। ब्रिक्स के सदस्य देशों के हित हर मुद्दे पर समान नहीं हैं। भारत और चीन के बीच सीमा और व्यापार से जुड़े प्रश्न हैं। रूस के साथ भारत के ऐतिहासिक और रणनीतिक संबंध हैं। पश्चिम एशिया के संदर्भ में ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के अपने अलग-अलग हित हैं। अफ्रीकी देशों की प्राथमिकताओं में विकास, वित्त, खाद्य सुरक्षा और अवसंरचना जैसे विषय प्रमुख हैं। ऐसे विविध हितों के बीच साझा मंच पर बातचीत बनाए रखना अपने आप में कूटनीति की बड़ी चुनौती है। 12 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग की बैठक इसका एक प्रत्यक्ष उदाहरण रही। दोनों नेताओं ने कहा कि मतभेद विवाद में नहीं बदलने चाहिए और संबंधों को दीर्घकालिक दृष्टि से देखा जाना चाहिए। भारत ने सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता को संबंधों के विकास का महत्वपूर्ण आधार बताया। व्यापार असंतुलन, आपूर्ति शृंखला और बाजार पहुंच जैसे आर्थिक विषयों पर भी चर्चा हुई। इसका अर्थ यह नहीं है कि भारत और चीन के सभी मतभेद समाप्त हो गए हैं। बल्कि इसका महत्व इस बात में है कि मतभेदों के बावजूद संवाद का रास्ता खुला रखा गया। कूटनीति में हर समस्या का तत्काल समाधान संभव नहीं होता। कई बार उसका पहला उद्देश्य ही यह होता है कि असहमति को टकराव में बदलने से रोका जाए और बातचीत के लिए जगह बनी रहे। इसे समझने के लिए भारत की विदेश नीति में रणनीतिक स्वायत्तता की अवधारणा उपयोगी है। सरल शब्दों में इसका अर्थ है कि भारत अपने महत्वपूर्ण विदेश नीति संबंधी निर्णय अपने राष्ट्रीय हित और परिस्थितियों के आधार पर स्वतंत्र रूप से ले। विदेश मंत्रालय भी भारत की विदेश नीति के प्रमुख उद्देश्यों में रणनीतिक स्थान और स्वायत्तता को रेखांकित करता है। एक दूसरी अवधारणा है बहु संरेखण। इसका अर्थ यह नहीं कि भारत हर देश के साथ समान संबंध रखता है, बल्कि यह कि वह अलग-अलग देशों के साथ अपने हितों के अनुसार अलग-अलग क्षेत्रों में सहयोग कर सकता है। अमेरिका के साथ तकनीक और रक्षा, रूस के साथ ऊर्जा और रक्षा, पश्चिम एशिया के साथ व्यापार एवं निवेश और ब्रिक्स के भीतर चीन सहित अन्य देशों के साथ आर्थिक तथा बहुपक्षीय सहयोग- ये सभी संबंध एक-दूसरे को अनिवार्य रूप से समाप्त नहीं करते।यही भारत की कूटनीति की व्यावहारिक विशेषता है। भारत कई देशों के साथ एक साथ संबंध रखता है, लेकिन हर संबंध का अपना संदर्भ और अपना हित है। इसलिए किसी एक देश के साथ भारत की निकटता को दूसरे देश के साथ उसके संबंधों के चश्मे से देखना हमेशा सही नहीं होगा।2023 के जी-20 और 2026 के ब्रिक्स को साथ रखकर देखें तो वैश्विक दक्षिण का प्रश्न भी लगातार सामने आता है। जी-20 के दौरान अफ्रीकी संघ को स्थायी सदस्य बनाया गया और भारत ने विकासशील देशों की आवाज को वैश्विक आर्थिक विमर्श में अधिक स्थान देने पर जोर दिया। 2026 के ब्रिक्स में भी वैश्विक शासन व्यवस्था में सुधार और विकासशील देशों की भागीदारी का प्रश्न प्रमुख रहा। प्रधानमंत्री ने वैश्विक दक्षिण को केवल नियमों का पालन करने वाला पक्ष न रहकर नियमों को आकार देने वाली भूमिका की ओर बढ़ने की बात कही। आर्थिक क्षेत्र में भी ब्रिक्स के सामने कई महत्वपूर्ण प्रश्न हैं। दुनिया में बढ़ते संरक्षणवाद, एकतरफा शुल्क और व्यापारिक बाधाओं के बीच भारत की अध्यक्षता में व्यापार मंत्रियों की बैठक में विश्व व्यापार संगठन को केंद्र में रखते हुए बहुपक्षीय व्यापार व्यवस्था, व्यापार में संतुलन, सेवाओं के व्यापार और अधिक लचीली एवं विविध आपूर्ति शृंखलाओं पर जोर दिया गया। साथ ही छोटे और मध्यम उद्यमों के लिए व्यापार वित्त तक पहुंच बढ़ाने के लिए जयपुर सहमति जैसे प्रयास सामने आए।स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और भुगतान का विषय भी ब्रिक्स की चर्चा में महत्वपूर्ण रहा है। इसे किसी साझा ब्रिक्स मुद्रा की स्थापना या डॉलर को तुरंत हटाने की योजना के रूप में देखना उचित नहीं होगा। अधिक व्यावहारिक प्रश्न यह है कि सदस्य देश आपसी व्यापार में भुगतान की लागत और जोखिम कैसे कम करें तथा अपनी-अपनी मुद्राओं के इस्तेमाल और भुगतान प्रणालियों के बीच सहयोग को कैसे बढ़ाएं। यहां ब्रिक्स की सफलता का वास्तविक परीक्षण घोषणाओं से आगे होगा। यदि आर्थिक सहयोग व्यापार सुविधा, भुगतान व्यवस्था, निवेश, आपूर्ति शृंखला और विकास परियोजनाओं में दिखाई देता है, तो उसका प्रभाव अधिक ठोस होगा। केवल घोषणाएं अपने आप में पर्याप्त नहीं होंगी।कृषि, खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य, डिजिटल प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज, जलवायु परिवर्तन और आपदा प्रबंधन जैसे विषय भी अब ब्रिक्स के व्यापक एजेंडे का हिस्सा हैं। भारत की अध्यक्षता के दौरान उद्योग, व्यापार, संचार, श्रम, आपदा जोखिम न्यूनीकरण और अन्य क्षेत्रों में कई मंत्रीस्तरीय बैठकें हुईं। उदाहरण के लिए, उद्योग मंत्रियों की बैठक में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों, स्टार्टअप, सौर ऊर्जा और लॉजिस्टिक्स पर सहयोग की पहल सामने आई, जबकि संचार मंत्रियों की बैठक में डिजिटल अवसंरचना, साइबर सुरक्षा, डिजीटल कौशल और नवाचार पर चर्चा हुई। इससे स्पष्ट है कि ब्रिक्स केवल भू-राजनीति की चर्चा का मंच नहीं रह गया है। ब्रिक्स में संवाद केवल सरकारों के स्तर पर भी नहीं होता। ब्रिक्स के भीतर व्यापार, शोध, शिक्षा, विशेषज्ञों और नागरिक समाज के स्तर पर भी संवाद की व्यवस्थाएं विकसित हुई हैं। नई दिल्ली घोषणा में विभिन्न संस्थागत और गैर-सरकारी मंचों के योगदान को भी मान्यता दी गई है। यह प्रक्रिया सरकारी कूटनीति के समानांतर विचार और विशेषज्ञता के आदान-प्रदान की जगह बनाती है। भारत की कूटनीति में शिखर कूटनीति भी महत्वपूर्ण है अर्थात शीर्ष नेताओं की सीधी बातचीत के माध्यम से संवेदनशील और महत्वपूर्ण मुद्दों पर संवाद। लेकिन केवल शीर्ष नेताओं की बैठक को ही पूरी कूटनीति मानना उचित नहीं होगा। उसके पीछे अधिकारियों, विशेषज्ञों, मंत्रिस्तरीय बैठकों और संस्थागत संवाद की लंबी प्रक्रिया होती है। भारत की 2026 की ब्रिक्स अध्यक्षता में वर्षभर हुई बैठकों की बड़ी संख्या इसी व्यापक प्रक्रिया की ओर संकेत करती है।इसीलिए भारत की भूमिका को केवल “नेतृत्व” के दावे से समझना पर्याप्त नहीं होगा। महत्वपूर्ण यह है कि भारत अलग-अलग हितों वाले देशों के बीच साझा जमीन कितनी प्रभावी ढंग से तैयार कर पाता है। यही मुद्दा-आधारित सहयोग की भावना है। हर विषय पर समान राय होना जरूरी नहीं, लेकिन जिस मुद्दे पर साझा हित हो, वहां साथ काम किया जा सकता है।ब्रिक्स को केवल पश्चिमी व्यवस्था के विकल्प के रूप में देखना भी पर्याप्त नहीं होगा। इसके सदस्य देशों के हित अनेक मुद्दों पर अलग हैं और कई बार एक-दूसरे से प्रतिस्पर्धी भी हैं। ब्रिक्स की वास्तविक भूमिका शायद इस बात में अधिक है कि वह ऐसे देशों को एक मंच देता है जो वैश्विक शासन, व्यापार, विकास और वित्तीय व्यवस्था में अधिक प्रभाव चाहते हैं। तो क्या भारत ब्रिक्स को गढ़ रहा है? इसका अंतिम उत्तर देना अभी भी जल्दबाजी होगी। लेकिन यह जरूर कहा जा सकता है कि भारत ने अपनी अध्यक्षता के दौरान वैश्विक दक्षिण, बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार, आर्थिक सहयोग, तकनीक, सतत विकास और संवाद जैसे विषयों को प्रमुखता दी। नई दिल्ली घोषणा ने भी राजनीतिक-सुरक्षा, आर्थिक-वित्तीय तथा सांस्कृतिक-जन-से-जन सहयोग के तीनों क्षेत्रों को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई है। दूसरी ओर, ब्रिक्स की दिशा केवल भारत तय नहीं कर सकता। चीन, रूस, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका और अन्य सदस्य देशों के अपने राष्ट्रीय हित हैं। इसलिए भारत की कूटनीतिक भूमिका को सबसे उचित रूप से इस रूप में देखा जा सकता है कि वह अलग-अलग हितों वाले देशों के बीच साझा जमीन तलाशने और संवाद को आगे बढ़ाने का प्रयास कर रहा है। जी-20 2023 और ब्रिक्स 2026 के बीच यही निरंतरता दिखाई देती है। 2023 में भारत ने एक व्यापक वैश्विक आर्थिक मंच पर सहमति बनाने और अफ्रीकी संघ को स्थायी सदस्यता दिलाने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया। 2026 में उसने एक अधिक विस्तारित और विविध समूह की अध्यक्षता करते हुए वैश्विक दक्षिण, आर्थिक सहयोग और वैश्विक शासन सुधार जैसे प्रश्नों को आगे रखा। इसलिए शायद मूल प्रश्न का उत्तर यह नहीं है कि ब्रिक्स भारत को गढ़ रहा है या भारत ब्रिक्स को। वास्तविकता यह है कि दोनों एक-दूसरे को प्रभावित कर रहे हैं। बदलता ब्रिक्स भारत की विदेश नीति के लिए नए अवसर और नई चुनौतियां पैदा कर रहा है, जबकि भारत अपनी प्राथमिकताओं और कूटनीतिक अनुभव के माध्यम से इस मंच के विमर्श को प्रभावित करने का प्रयास कर रहा है।आखिरकार किसी भी शिखर सम्मेलन की सफलता केवल तस्वीरों, भाषणों या घोषणाओं से तय नहीं होती। उसका वास्तविक मूल्य इस बात से सामने आता है कि उसके बाद व्यापार कितना बढ़ता है, आर्थिक सहयोग कितना गहरा होता है, विकासशील देशों की आवाज कितनी प्रभावी होती है और मतभेदों के बावजूद संवाद की परंपरा कितनी मजबूत होती है। नई दिल्ली में 2026 का ब्रिक्स इसी कसौटी पर भारत की बदलती कूटनीतिक भूमिका का अगला अध्याय है।
ग्राम भाटागुड़ा में धूमधाम से मना ‘अंगना मिलन’ समारोह
पोषण और पारंपरिक गतिविधियों के जरिए दिया गया स्वास्थ्य का संदेश
जगदलपुर सेवा संकल्प अभियान तथा राष्ट्रीय पोषण माह के अवसर पर महिला एवं बाल विकास विभाग के तत्वावधान में जगदलपुर विकासखंड के ग्राम पंचायत गरावांड कला के आश्रित ग्राम भाटागुड़ा में बुधवार को ‘अंगना मिलन’ व विशेष पोषण जागरूकता समारोह पूरे उल्लास और गरिमा के साथ संपन्न हुआ। कुपोषण मुक्त समाज के निर्माण और जन-स्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से आयोजित इस साझा उत्सव में ग्रामीण महिलाओं, किशोरी बालिकाओं, बच्चों और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने अभूतपूर्व उत्साह के साथ भाग लिया।कार्यक्रम परिसर में स्थानीय स्तर पर उगाई जाने वाली हरी साग-सब्जियों, मौसमी फलों और पारंपरिक व्यंजनों की आकर्षक प्रदर्शनी सजाई गई, जिसने उपस्थित जनसमुदाय को विविध एवं संतुलित आहार के महत्व से रूबरू कराया।
इस दौरान विभागीय अधिकारियों ने पोषण में विविधता और स्थानीय खान-पान के लाभों पर प्रकाश डालते हुए महतारी वंदन योजना की हितग्राही महिलाओं से सीधा संवाद स्थापित कर उनके अनुभव जाने और शासन की कल्याणकारी योजनाओं का पूरा लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया।समारोह को जीवंत और सहभागितापूर्ण बनाने के लिए कई मनोरंजक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों का ताना-बाना बुना गया। जहां महिलाओं ने मटका फोड़ और कुर्सी दौड़ जैसे पारंपरिक खेलों में अपनी ऊर्जा व हुनर का प्रदर्शन किया, वहीं किशोरी बालिकाओं ने रंगोली और मेहंदी प्रतियोगिताओं में अपनी अप्रतिम रचनात्मक कला बिखेरी। इसके साथ ही नन्हे बच्चों के लिए आयोजित फैंसी ड्रेस और स्वस्थ शिशु प्रतियोगिता विशेष आकर्षण का केंद्र बनी, जिसने समुदाय को बाल स्वास्थ्य और नियमित देखभाल के प्रति संवेदनशील बनाने का कार्य किया।जनसमुदाय को संबोधित करते हुए महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी मनोज सिन्हा ने कुपोषण उन्मूलन के लिए स्वच्छता, संतुलित खान-पान और विभागीय योजनाओं की सक्रिय सहभागिता पर विशेष जोर दिया। इस अवसर पर जनपद अध्यक्ष पदलाम नाग, अपने सेवानिवृत्ति के दिन उपस्थित परियोजना अधिकारी संध्या ज्योति बाला, कार्यक्रम आयोजक सुपरवाइजर निहारिका गौतम, सुपरवाइजर रेखा नाग, अनीता सिंह, ज्योत्सना सहित ग्रामीण क्षेत्र की सुपरवाइजर्स, स्थानीय पंच और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। समारोह के समापन पर विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कृत किया गया तथा अपने-अपने पोषक क्षेत्रों में उत्कृष्ट एवं अनुकरणीय सेवाएं देने वाली कर्मठ आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को प्रशस्ति पत्र भेंट कर सम्मानित किया गया।
कला केंद्र बालोद चुनाव आयोग की स्पष्टीकरण से विपक्षी नेगेटिव पर सवाल झूठ और मनगढ़ंत कहानियों का पर्दाफाश
चुनाव आयोग की स्पष्टता के बाद विपक्ष के आप पर उठे सवाल तथ्यों ने खोली पोल-चुनाव आयोग और देश से माफी मांगे राहुल गांधी-SIR पर भाजपा का पलटवार कांग्रेस के आप बताए तथ्य इन निर्वाचन आयोग का एवं न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान करें-संवैधानिक संस्था पर सवाल उठाने कांग्रेस की राजनीति हताशा का परिचायक-चुनाव आयोग के संयुक्त बयान से कांग्रेस और विपक्षी इंडी गठबंधन के झूठ का पर्दाफाश कला केंद्र,
बालोद SIR विवाद पर भाजपा का पलटवार मतदाता सूची के special intensive Renision (SIR) को लेकर कांग्रेस और विपक्षी दलों की ओर से उठाए जा रहे सवालों के बीच भारतीय जनता पार्टी ने बालोद में प्रेस वार्ता कर अपनी प्रतिक्रिया दी।भारतीय निर्वाचन आयोग ने एक आधिकारिक संयुक्त बयान जारी कर कांग्रेस और विपक्षी इंडी गठबंधन द्वारा फैलाई जा रहे भ्रम और मनगढ़ंत कहानियों को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया, आयोग ने स्पष्ट किया है कि विपक्षी दल अपनी राजनीति हार की हताशा निकालने के लिए संवैधानिक संस्थाओं पर झूठे आरोप लगा रहे हैं। भाजपा नेताओं ने कांग्रेस के आरोपों को तथ्यहीन बताते हुए कहा कि निर्वाचन प्रक्रिया को लेकर किसी भी प्रकार की आशंका या भ्रम के बजाय तथ्यों और संवैधानिक प्रक्रिया के आधार पर चर्चा होनी चाहिए।शहर के स्थानीय कला केंद्र में आयोजित प्रेस वार्ता में वक्ताओं ने कहा कि निर्वाचन आयोग की मतदाता सेवा व्यवस्था में SIR -2026 से संबंधित सुविधाएं उपलब्ध है।

नागरिक अपने नाम की जांच करने के साथ ही आवश्यक सुधार और नए मतदाता के रूप में पंजीयन की प्रक्रिया भी पूरी कर सकते हैं। निर्वाचन आयोग के आधिकारिक पोर्टल पर नए मतदाताओं के लिए फॉर्म -6 की सुविधा भी उपलब्ध है।भाजपा नेताओं ने SIR को लेकर अपने पक्ष में 27 मई 2026 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि बिहार में कराए गए SIR को लेकर दायर याचिकाओं पर सर्वोच्च न्यायालय ने निर्वाचन आयोग के अधिकार और अपनाई गई प्रक्रिया पे जुड़े महत्वपूर्ण पहेलुओं पर विचार किया था।सुप्रीम कोर्ट के अनुसार आधिकारिक निर्णय सारांश के अनुसार अदालत में बिहार में किए गए SIR की वैधता को बरकरार रखा, अदालत ने माना कि यह प्रक्रिया संविधान के अनुच्छेद 324 और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 की धारा 21(3) से जुड़ी शक्तियों के तहत की जा सकती है, तथा प्रक्रिया में निर्धारित कानूनी सुरक्षा उपाय मौजूद है।प्रेस वार्ता में भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि कांग्रेस और विपक्ष द्वारा निर्वाचन आयोग तथा अन्य संवैधानिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली पर लगातार सवाल उठने से आम मतदाताओं के बीच अनावश्यक भ्रम की स्थिति बन रही है।उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में राजनीतिक दलों को अपने सवाल और आपत्तियां तथ्यों, कानून और संवैधानिक प्रक्रियाओं के आधार पर सामने रखनी चाहिए।
साथ ही निर्वाचन आयोग की प्रक्रिया पर अंतिम निष्कर्ष निकालने से पहले आधिकारिक जानकारी और निर्धारित कानूनी प्रक्रिया को समझना आवश्यक है। भाजपा नेताओं ने कहा कि मतदाता सूची को अघतन और त्रुटि रहित बनाए रखना निर्वाचन प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है। हर पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची में सुनिश्चित करने के लिए नागरिकों की भागीदारी भी जरूरी है। निर्वाचन आयोग की सेवा के माध्यम से मतदाता अपने नाम की जांच, नए पंजीयन, विवरण के सुधार, आवेदन की स्थिति की जानकारी और अन्य संबंधी सेवाओं का उपयोग कर सकते हैं।

नये मतदाताओं के पंजीयन के लिए फॉर्म -6 की व्यवस्था भी उपलब्ध है।स्रोतों के अनुसार राहुल गांधी और विपक्षी गठबंधन बार-बार ईवीएम को ब्लैक बॉक्स बताकर न्यायपालिका पर दबाव का आरोप लगाकर और राफेल वह सर्जिकल स्ट्राइक जैसे मुद्दों पर भ्रम फैला कर देश की संस्थाओं की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा रहे हैं। जब भी विपक्ष चुनाव हारता है वह ईवीएम और संवैधानिक संस्थाओं पर कीचड़ उछालने लगता है।निर्वाचन आयोग ने दोहराया कि वह हर पात्र नागरिक को मताधिकार देने के लिए प्रतिबद्ध है, और जमीनी स्तर पर मतदाताओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए विशेष कैंप लग रहा है। आयोग ने कहा कि पिछले सभी चुनाव पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से संपन्न हुए हैं।भाजपा नेताओं ने मांग की कि राहुल गांधी और कांग्रेस नेतृत्व को संवैधानिक संस्थाओं पर बेबुनियाद आरोप लगाए गए झुठे आरोपों और केन्द्रीय निर्वाचन आयोग से बिना शर्त माफी मांगनी चाहिए।इस प्रेस वार्ता में -जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती तारिणी चंद्राकर, गुण्डरदेही नगर पंचायत अध्यक्ष प्रमोद जैन, लोहारा नगर पंचायत अध्यक्ष लाल निवेंद्र सिंह टेकाम, जनपद अध्यक्ष श्रीमती सरस्वती टेमरिया, जिला पंचायत सदस्य -श्रीमती कांति सोनेश्वरी, जिला प्रवक्ता जितेंद्र साहू,नगर पंचायत अध्यक्ष डौंडी-श्रीमती मोहनतिन बाई चौरका, चिखलाकसा नगर पंचायत अध्यक्ष -श्रीमती कुंती देवांगन, जनपद अध्यक्ष गुण्डरदेही -पुरुषोत्तम लाल चंद्राकर, जनपद अध्यक्ष गुरुर -श्रीमती सुनीता साहू, जनपद अध्यक्ष डौंडीलोहारा -श्रीमती कांति सोनबरसा,मीडिया प्रभारी कमल पनपालिया उपस्थित रहे।कमल पनपालिया मीडिया प्रभारी भारतीय जनता पार्टी जिला बालोद
बालोद में अवैध गांजा बिक्री पर पुलिस की कार्रवाई, दो आरोपी गिरफ्तार
बालोद। ग्राम सिवनी स्थित अटल विहार कॉलोनी में बालोद पुलिस ने अवैध गांजा बिक्री के खिलाफ कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 1.436 किलोग्राम गांजा, दो मोबाइल फोन सहित कुल ₹85,300 का मशरूका जब्त किया है।पुलिस के अनुसार, 29 सितंबर 2026 को मुखबिर से सूचना मिली थी कि ग्राम सिवनी अटल विहार कॉलोनी के EWS/92 क्वार्टर में दो व्यक्ति गांजा बिक्री के लिए रखे हुए हैं। सूचना के आधार पर वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराते हुए थाना बालोद पुलिस की टीम ने मौके पर दबिश देकर घेराबंदी और तलाशी की कार्रवाई की।
पूछताछ में दोनों की पहचान टेकचंद साहू (24) निवासी नीचे पारा, ग्राम सिवनी और गौतेश कुमार साहू (26) निवासी स्कूल पारा, ग्राम सिवनी के रूप में हुई।तलाशी के दौरान पुलिस ने दोनों के कब्जे से 1.436 किलोग्राम गांजा, जिसकी कीमत करीब ₹69,300 बताई गई है, बरामद किया। इसके अलावा टेकचंद साहू के पास से Redmi Note 10 5G और गौतेश कुमार साहू के पास से Samsung F15 5G मोबाइल फोन भी जब्त किया गया। पुलिस के मुताबिक जब्त सामान की कुल कीमत ₹85,300 है।
मामले में थाना बालोद में अपराध क्रमांक 510/2026, धारा 20(बी) एनडीपीएस एक्ट के तहत अपराध दर्ज कर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। मामले में आगे की वैधानिक कार्रवाई जारी है।यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक किरण गंगाराम चव्हाण, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक चन्द्रकांत गवर्ना और एसडीओपी बालोद विनय कुमार साहू के मार्गदर्शन में की गई। कार्रवाई में थाना प्रभारी निरीक्षक शिशुपाल सिन्हा सहित पुलिस टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही।बालोद पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि मादक पदार्थों के अवैध कारोबार या बिक्री से संबंधित जानकारी तत्काल पुलिस को दें।
गणेश विसर्जन में नियम तोड़ने पर पुलिस की कार्रवाई, 9 डीजे साउंड सिस्टम जब्त
धारदार कड़े-चूड़े उतरवाकर किए जब्त, रातभर शहर में तैनात रही पुलिस
बालोद। गणेश विसर्जन के दौरान नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ बालोद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 9 डीजे साउंड सिस्टम जब्त किए। वहीं शोभायात्रा में शामिल कुछ युवकों के हाथों में पाए गए धारदार कड़े-चूड़े भी पुलिस ने उतरवाकर जब्त किए। पुलिस अधीक्षक किरण गंगाराम चव्हाण के निर्देशन तथा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक चन्द्रकांत गवर्ना के मार्गदर्शन एवं उपस्थिति में गणेश विसर्जन को शांतिपूर्ण, सुरक्षित और व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की गई थी।मंगलवार रात करीब 9 बजे से शुरू हुई गणेश विसर्जन शोभायात्रा बुधवार सुबह करीब 4 से 5 बजे तक शहर के विभिन्न मार्गों से होकर गुजरी। इस दौरान विभिन्न गणेश समितियों द्वारा प्रतिमाओं एवं झांकियों के साथ विसर्जन यात्रा निकाली गई।

पुलिस अधिकारियों और जवानों ने शोभायात्रा के दौरान कानून-व्यवस्था, यातायात व्यवस्था और आम नागरिकों की सुरक्षा पर लगातार निगरानी रखी।शोभायात्रा के दौरान डीजे साउंड सिस्टम एवं ध्वनि स्तर की भी पुलिस टीमों द्वारा निगरानी की गई। निर्धारित नियमों एवं निर्देशों का उल्लंघन पाए जाने पर कुल 9 डीजे साउंड सिस्टम जब्त किए गए। जब्त डीजे के संबंध में आवश्यक वैधानिक कार्रवाई पूर्ण कर उन्हें न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया।इसी तरह भीड़भाड़ वाले विसर्जन मार्गों में सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पुलिस टीमों ने शोभायात्रा में शामिल लोगों की जांच की। इस दौरान कुछ युवकों के हाथों में धारदार कड़े-चूड़े पाए जाने पर पुलिस ने उन्हें तत्काल उतरवाकर जब्त कर लिया। पुलिस के अनुसार, इस कार्रवाई का उद्देश्य भीड़ के बीच किसी विवाद, चोट अथवा अप्रिय घटना की संभावना को रोकना था।
गणेश विसर्जन के दौरान शहर के विभिन्न मार्गों एवं संवेदनशील स्थानों पर पर्याप्त पुलिस बल तैनात रहा। पुलिस टीमों ने विद्युत तारों, भीड़भाड़ वाले स्थानों तथा अन्य संभावित सुरक्षा जोखिमों पर भी विशेष निगरानी रखी। पुलिस की सतत मौजूदगी और सुरक्षा व्यवस्था के बीच गणेश विसर्जन शांतिपूर्ण एवं सुरक्षित रूप से संपन्न हुआ।बालोद पुलिस ने आमजन से धार्मिक एवं सामाजिक आयोजनों के दौरान निर्धारित नियमों और ध्वनि मानकों का पालन करने, डीजे का उपयोग नियमानुसार करने, शोभायात्रा में धारदार वस्तुएं नहीं रखने तथा भीड़भाड़ वाले स्थानों पर संयम एवं अनुशासन बनाए रखने की अपील की है। पुलिस ने विद्युत तारों एवं अन्य संभावित सुरक्षा जोखिमों से दूरी बनाए रखने तथा पुलिस-प्रशासन द्वारा जारी सुरक्षा निर्देशों का पालन करने की भी अपील की है।
फलीभूत हो उठी है मां शिरोमणि माथुर की आठ दशक की साधना
वैश्विक पुरस्कारों से सम्मानित साहित्यकार एवं ममतामयी मां प्राप्त डॉ. शिरोमणि माथुर ने पार किए उम्र के 8 दशक
अर्जुन झा-
दल्ली राजहरा भगवान सबको सभी कुछ नहीं दे देते, कुछ न कुछ कमी बाकी रखते हैं, ताकि वह ईश्वर का दर्जा न प्राप्त कर ले। मगर सृष्टि के रचयिता परमपिता ने दल्ली राजहरा की धरा पर अपना एक साक्षात रूप जरूर भेज दिया है, वह भी सभी अच्छे गुणों से परिपूरित कर। इस मां में वो सारे सद्गुण हैं, जो दयालु परमपिता परमेश्वर में होते हैं। ममता की मूरत वो मां हैं डॉ. शिरोमणि माथुर। साहित्य जगत की महान विभूति, दल्ली राजहरा ही नहीं बल्कि समूचे छत्तीसगढ़ की शान, जिनकी ख्याति भारत ही नहीं, बल्कि सात समंदर पार भी है। हमेशा शांतचित्त रहने वाली होठों से झरती ममतामयी मुस्कान वाली मां डॉ शिरोमणि माथुर 81 वर्ष की उम्र में भी साहित्य साधना और जनसेवा में उसी तरह लीन हैं जैसा की छह दशक पहले थीं। कॉलेज की पूर्व प्रोफेसर, आंगनबाड़ी की शुरुआत करने वाली, प्रौढ़ शिक्षा में उल्लेखनीय योगदान देने वाली महान विभूति का नाम है डॉ. शिरोमणि माथुर।

आज मां शिरोमणि माथुर का 81वां जन्मदिन है। हमने अपने पाठकों के लिए उनसे जुड़ी खट्टी मीठी यादें यहां संग्रहित की हैं। मां कहती हैं- जीवन के इस अंतिम पड़ाव में भी मुझे किसी चीज की चिंता नहीं है। मुझे लगता है कि मैंने जो चाहा वह मुझे मिला, चाहे मेरा व्यक्तिगत जीवन हो या मेरी सामाजिक जीवन हो या साहित्यिक जीवन, मुझे पूरी तरह संतुष्टि है। समाज ने जो जरूरत से ज्यादा दिया है, इसके लिए मैं आभारी हूं। अपनी साहित्यिक यात्रा के संदर्भ में मां ने कहा- मन की भावनाओं को कोरे कागज पर उकेरना मेरी शुरू से आदत रही है। मैं बचपन में से लिखती आ रही हूं, बंगाली क्लब की पुस्तक में हर वर्ष नवरात्रि पर मेरा लेख छपता था। गगन सर मुझे प्रेरणा देते थे। बड़े बेटे के निधन के बाद मैं टूट गई और अपने आप को तन्हाई से दूर करने के लिए साहित्य को अपना लिया। ‘अर्पण’ पुस्तक के नाम से लेख प्रकाशित किया। उसके बाद कुछ युवाओं के आग्रह पर राजहरा के इतिहास को लिपिबद्ध किया। ट्रेड यूनियन, राजहरा का निर्माण, व्यापारी वर्ग, राजहरा कैसे बना, विकास कैसे हुआ, राजहरा की स्थापना के बारे में मैंने शोध ग्रंथ के रूप में लिखा। यहां की आदिवासी संस्कृति से प्रभावित रही हूं। यहां ट्रेड यूनियन की शुरुआत, शिक्षा की जानकारी पूरी लिपिबद्ध कर दी। मैंने माइंस से जो प्रदूषण होता है, आदिवासी कल्चर से छेड़छाड़ होती है, विकास अपने साथ बहुत कुछ अच्छाइयां लाता है तो कमियां भी लाता है, उन सब को लिपिबद्ध किया। इसलिए यह पुस्तक अपने आप में अंतर्राष्ट्रीय स्तर के खनिज उत्खनन के क्षेत्र में बहुत महत्वपूर्ण मानी गई और इसी पुस्तक पर मुझे गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड और वर्ल्ड वाइड बुक के पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
डॉ. शिरोमणि माथुर ने बताया- मेरी सबसे प्रिय पुस्तक ‘मेरा दल्ली राजहरा’ है। मैं आध्यात्मिक रूचि वाली , इसलिए मैंने दोहों पर लिखना शुरू किया। अब तक 16,000 दोहे लिख चुकी हूं, जिनमें से 13,500 दोहे प्रकाशित हो चुके हैं, 2500 दोहे प्रकाशित होना बाकी हैं। ये सभी आध्यात्मिक दोहे हैं। मैं राजहरा को अपना घर समझती हूं, जिस तरह एक महिला अपने घर को सजाती है, वैसे ही शुरू से मेरी इच्छा रही कि राजहरा मेरा घर है। यहां के बच्चों के लिए आंगनबाड़ी नहीं थी, तब यहां के बच्चों को आंगनबाड़ी बनाकर ज्ञान दिया, प्रौढ़ शिक्षा के समय बहुत सारी सेवाएं दी, नगर के विकास में भी सेवाएं दी, जिससे ‘मेरा दल्ली राजहरा’ मुझे बहुत पसंद है।
शिक्षा और संस्कार जरूरी
महिला सशक्तिकरण को लेकर डॉ. शिरोमणि माथुर कहती हैं- हमने जिस जमाने में पढ़ाई की, उस जमाने में महिलाओं को नहीं पढ़ाते थे, लड़कों को ही पढ़ाते थे, लड़कियों को नहीं पढ़ाते थे। मेरा जन्म ग्रामीण परिवेश में हुआ, मां की रुचि थी, उसने हमें पढ़ाया और हमने भी दिल लगाकर पढ़ाई की। तब और आज के परिवेश में बहुत अंतर है। 1964 में मैंने ग्रेजुएशन की, उस समय मानसिक सोच अलग थी। आज के परिवेश में लड़कियों और परिवार की मानसिकताएं अलग हैं। भौतिकतावादी सोच के चक्कर में हम परिवार के बीच संतुलन नहीं बना पा रहे हैं। मेरा मानना है, महिलाओं को अपना घर सजाना चाहिए। पढ़ाई और संस्कार बहुत जरूरी हैं। शिक्षा के क्षेत्र में सब कुछ अधूरा है। हमारी बहन और बेटियों को अपने घरों में संतुलन बनाना चाहिए, अपने पति, अपने बच्चे, अपने घर परिवार सबके बीच संतुलित व्यवहार रखें, सबसे प्यार करें, प्यार के बिना सब कुछ अधूरा है। डॉ. माथुर अपनी लेखन यात्रा को लेकर कहती हैं- अब तक मैंने कई क्षेत्र में, लिखने के हर क्षेत्र में प्रयास किया है। कविताएं, कहानी, अब तक मेरे 7 दोहे संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं, दो कहानी संग्रह, ‘मेरा दल्ली राजहरा’ और ‘अर्पण’ जैसे कई पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं और 100 से अधिक पुस्तकों में मैं सह-लेखिका हूं और कई अंतर्राष्ट्रीय पत्रिकाओं में मेरी रचनाएं छपती हैं।
नशे से बचें युवा
नशे की गर्त में जा रही युवा पीढ़ी को लेकर डॉ. शिरोमणि माथुर का कहना है- मेरा पूरा साहित्य इसी से जुड़ा है। हम जब तक इंसान न बन जाएं, तब तक हमारा जीवन सफल नहीं होता। अति भौतिकता और अति फैशन के चक्कर में हम और हमारी युवा पीढ़ी भटक रही है। मेरा बेटों और बेटियों से यही निवेदन है कि अपना घर, अपना परिवार पहले देखो और अपनी जिम्मेदारी समझो। अति भौतिकता और अति मित्रता के साथ दौड़ना और गलत लोगों की संगति का परिणाम बहुत ज्यादा खराब होता है। आज समाज भटक रहा है, हत्याएं, आत्महत्याएं हो रही हैं, लड़ाई-झगड़े बढ़ रहे हैं, आपसी क्लेश बढ़ रहा है, यह शुभ संकेत नहीं है। मैं चाहती हूं कि लोग आपस में प्रेम से रहें, यही देखकर मेरा मन कभी-कभी बहुत दुखी हो जाता है। मैं चाहती हूं कि लोग आपस में मिलजुल कर रहें। राजहरा की पहचान खनिज से तो है ही, लेकिन यहां का प्रेम, यहां की वाणी, संदेश लोगों को खींचता रहा है। आज भी दल्ली राजहरा के लड़के यहां से बाहर जाते हैं तो दल्ली राजहरा से प्रेम करते हैं, वह अपने घरों की फोटो और यादों को मंगवाते हैं। आज राजहरा में जो प्रेम मिलता है, वह कहीं और नहीं मिलता। डॉ. माथुर ने हमारे पाठकों के लिए दोहा साझा किया सदा दुआएं दीजिए, काम दुआएं आए, पैसे से ना मिलती दुआ, दुआ ना हाट बिकाय।
मेरी सांसों में बसा है राजहरा
दल्ली राजहरा से लोगों के लगाव के बारे में डॉ. शिरोमणि माथुर का कहना है- मैं राजहरा से बहुत प्रभावित हूं। लोग कहते हैं कि ‘शिरोमणि माथुर है तो राजहरा है और राजहरा है तो शिरोमणि माथुर है।’ मेरी हर रचना में दल्ली राजहरा जुड़ा है, मेरी हर कहानी में आपको दल्ली राजहरा का जिक्र अवश्य मिलेगा। मैं जीती हूं तो दल्ली राजहरा के लिए और मेरी हर सांसों में दल्ली राजहरा बसी है।





