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दुर्ग के पांच मंजिला होटल में लगी आग

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दुर्ग। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में पांच मंजिला इमारत में आग लग गई। अभी तक 9 लोगों को सुरक्षित इमारत से निकाला गया है। दुर्ग जिले के पुलिस अधिकारियों ने बताया कि शहर के कोतवाली थाना क्षेत्र स्थित चार मंजिला इमारत में रविवार रात करीब ढाई बजे आग लगी। इमारत के निचले हिस्से में कपड़े की एक दुकान और ऊपरी तीन मंजिल पर होटल है। 10 दमकल की गाड़ियां लगातार कई घंटों से आग बुझाने में लगी हुई थी । आगजनी की इस दुर्घटना में 1 युवक के पैर में चोट आई है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार आग शार्ट सर्किट की वजह से लगी है। सुबह तक आग में पूरी तरह से काबू पा लिया गया है । होटल से सभी नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। इसमें एक युवक के पैर में मोच आई है। इसमें ग्राउंड और फर्स्ट फ्लोर में घर संसार है। यह खिलौने, बर्तन, लकड़ी के सामान, बिजली के सामान, प्लास्टिक के सामान और कपड़ों आदि की एक बड़ी सेल है। बताया जा रहा है कि ग्राउंड फ्लोर में एक बड़ा सा इलेक्ट्रिक पैनल है। रात 2 बजे के करीब उस पैनल से तेज आवाज आई। घर संसार सेल का एक कर्मचारी उठकर देखने गया तो देखा कि पैनल में आग लगी है। वह अन्य लोगों को इसकी जानकारी देता उससे पहले ही आग बिजली के तार से होते हुए ऊपर के मंजिल (फर्स्ट फ्लोर) तक पहुंच गई। देखते ही देखते बिल्डिंग के ग्राउंड और फर्स्ट फ्लोर को आग ने पूरी तरह से अपनी चपेट में ले लिया।

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जिस समय होटल शीला की बिल्डिंग में आग लगी होटल में 5 लोग सहित दो कर्मचारी सोये हुए थे। होठल में ठहरे लोगों को रेश्क्यू कर निकाला गया । बिल्डिंग से इतना काला धुआं निकल रहा था कि दो लोग उसी समय बेहोश हो गए थे उन्हें अस्पताल ले जाया गया | वहीं दंतेवाड़ा से आया नितीश कुमार नवीन जल्दबाजी में पहली मंजिल से कूद गया। नीचे खड़े लोगों ने उसे बचा लिया, लेकिन उसके पैर में काफी चोट आई स्थिति पहले से सामान्य है |

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डौंडी – दशहरा अवकाश पर चोर ने स्कूल को बनाया निशाना, प्रोजेक्टर पंखा किया पार

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डौंडी – दशहरा अवकाश पर चोर ने स्कूल को निशाना बनाते हुए प्रोजेक्टर और पंखा पार किया गया है | स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विघालय डौंडी के भवन का मरम्मत कार्य ठेकेदार द्वारा किया जा रहा है तथा भवन की चाबी को ठेकेदार के कर्मचारी को सौपा गया था। दशहरा अवकाश 13/10/21 से 17/10/21 के मध्य स्कुल बंद था । दिनांक 20 अक्टूबर को पता चला कि स्कूल से प्रोजेक्टर व दो पंखा किसी अज्ञात चोर द्वारा चोरी कर लिया गया है जिस पर स्कूल के व्याख्याता चमन कुमार कोठारी द्वारा थाने में अज्ञात चोर के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई कि प्रोजेक्टर जिसकी कीमत 25000 व दो पंखे कीमत 2000 रुपये दशहरा अवकाश के समय चोरी कर लिया गया है | इस चोरी की घटना को गंभीरता से लेते हुए पुलिस अज्ञात आरोपियों की तलाश में जुट गई है |  

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प्रभारी मंत्री कवासी लखमा ने रविवार को तोकापाल ब्लाक मुख्यालय में आयोजित सम्मेलन में कार्यकर्ताओं को संबोधित किया

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जगदलपुर। लगभग 3 साल से छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल की सरकार सत्ता में है। समाज के सभी वर्ग की उन्नति और खुशहाली के लिए हमारे मुख्यमंत्री ने हर तरह की योजना बनाकर लोगों को लाभ दिया है। अगले चुनाव के लिए दो साल बचे हैं इसलिए अभी से कार्यकर्ताओं को कमर कस लेनी चाहिए। क्योंकि विपक्षी दल भाजपा झुठे अफवाह फैलाकर सरकार के खिलाफ माहौल बना रही है जिसका हमें कड़ा विरोध करना है। प्रभारी मंत्री कवासी लखमा ने रविवार को तोकापाल ब्लाक मुख्यालय में आयोजित कार्यकर्ता सम्मेलन में यह बात कही। बूथ सेक्टर जोन कमेटी की बैठक को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि किसी भी पार्टी की ताकत और रीढ़ कार्यकर्ता होते हैं। कार्यकर्ता ही घर-घर जाकर पार्टी के लिए काम करते हैं। भूपेश सरकार ने तीन साल में ऐसे-ऐसे काम किए हैं जो काम पहले कभी नहीं हुआ। 2500 रूपये में धान की खरीदी और गोबर खरीदी में छत्तीसगढ़ सरकार पूरे हिन्दुस्तान में पहली सरकार है। साथ ही बेरोजगारों को अवसर देने के लिए व्याख्याता, शिक्षक, भृत्य, पुलिस जवान और अनेक पदों पर भर्ती चल रही है। सरकार की मंशा है हर घर में खुशहाली आए लेकिन भारतीय जनता पार्टी लगातार महंगाई बढ़ाकर लोगों का सुख चैन छिन रही है। पेट्रोल, डीजल के दाम 100 रूपये पार हो गया है। प्रतिदिन इसके दाम बढ़ने से आम आदमी की कमर टूट गई है। लोगों का बजट बिगड़ गया है। लेकिन केंद्र सरकार लगातार कीमत बढ़ाकर लोगों की परेशानी भी बढ़ा रही है। सांसद दीपक बैज और विधायक राजमन बेंजाम ने भी मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की जनहितकारी योजनाओं को लोगों तक पहुंचाने और केंद्र की मोदी सरकार की बढ़ती महंगाई पर नियंत्रण नहीं करने से लोगों को हो रही परेशानियों को उजागर करने की बात कही। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं के बल पर ही नेताओं को ताकत मिलती है। हर कार्यकर्ता यदि सक्रिय होकर काम करें तो कांग्रेस को कोई हरा नहीं सकता। आजादी से लेकर अभी तक कांग्रेस का लंबा इतिहास है हमें गर्व है कि हम कांग्रेस से जुड़े हैं यह बात हर किसी के दिमाग में रहनी चाहिए। सम्मेलन में जिला कांग्रेस अध्यक्ष बलराम मौर्य, प्रदेश महासचिव रूकमणी कर्मा, सहदेव नाग, सामु कश्यप, विक्रम सिंह डांगी समेत बड़ी संख्या में कांगे्सी मौजूद थे ।
सुरेश रावल, मीडिया सलाहकार

डीएमएफटी के अंतर्गत पदस्थ अधिकारी/कर्मचारियों के लंबित वेतन भुगतान के संबंध में कवासी लखमा प्रभारी मंत्री बस्तर जिला से मिलकर चर्चा किया गया

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आज दिनांक 24/10/21 को छग प्र स्वा कर्म संघ जिला बस्तर जिलाध्यक्ष अजय सिंह परिहार के नेतृत्व में डी एम एफ टी के अंतर्गत पदस्थ अधिकारी/कर्मचारियों के लंबित वेतन भुगतान के संबंध में कवासी लखमा, प्रभारी मंत्री बस्तर जिला से मिलकर चर्चा किया गया, संघ के मांग को गंभीरतापूर्वक लेते हुए अपनी सहनभूति दर्शाते हुए तत्काल कलेक्टर बस्तर से चर्चा करने पर बताया गया कि मंगलवार तक समस्त अधिकारी/कर्मचारियों का वेतन भुगतान कर दिया जावेगा।

कवासी लखमा मंत्री महोदय के द्वारा आश्वत किया गया कि बुधवार तक वेतन न मिलने पर मुझको दूरभाष पर सूचना देवे कहा गया।

उक्त ज्ञापन देने हेतु संभागीय अध्यक्ष अनिल बड़कस, उपाध्यक्ष रूपेंद्र सिंह, जिला संयोजक नेत्र सहा.अधिकारी प्रकोष्ठ हनुमंत राव, महारानी अस्पताल इकाई अध्यक्ष लक्ष्मी ताडिया, महारानी अस्पताल सचिव नीरज कुमार, अंकुश, भीकम साहू, एवम डी एम एफ टी के समस्त कर्मचारी सुशीला, सुष्मिता,शकुंतला,रीना,रोशन, मोती,अमर दास, डुमर, सुषेण, अर्जुन, सुजाता ,श्रद्धा, आकृति, हरेन दर्शिका, चामसिंह, लता, राजेश, कविता, बिंदिया,कामेश्वरी, दीपमाला, दिलीप काशिआ मसीह आदि कर्मचारी उपस्थित थे।
संघ माननीय मंत्री महोदय जी का आभार एवम धन्यवाद ज्ञापित करता है।

जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अध्यक्षता एवं प्रभारी मंत्री, सांसद एवं संसदीय सचिव के विशिष्ट आतिथ्य में हुआ अधिवक्ता संघ का शपथग्रहण

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जिला अधिवक्ता संघ के चुनाव अधिकारियों का शाल श्रीफल भेंट कर किया गया सम्मानित

संघ के संरक्षक वरिष्ठ अधिवक्ता रमन लाल शुक्ला को किया गया सम्मानित

जगदलपुर

जिला अधिवक्ता संघ का शपथग्रहण समारोह जिला एवं सत्र न्यायालय परिसर में आयोजित किया गया जिसमें कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुमन एक्का एवं उधोग एवं आबकारी मंत्री कवासी लखमा, सांसद बस्तर दीपक बैज एवं विधायक जगदलपुर एवं संसदीय सचिव रेखचंद जैन की विशिष्ट अतिथि रहे।

इस अवसर पर नवनिर्वाचित पदाधिकारियों अध्यक्ष दिनेश चंद्र जोशी, वरिष्ठ उपाध्यक्ष बसंत जोशी, कनिष्ठ उपाध्यक्ष प्रीति वानखेड़े, सचिव भुपेंद्र सिंह ठाकुर, सह सचिव विकास दाऊ, सांस्कृतिक सचिव विपुल श्रीवास्तव एवं कार्यकारिणी सदस्य अवधेश कुमार झा, ऋषि तिवारी, नितिन लुनावत, राजकुमार दूधी ने शपथ ग्रहण किया

उधोग एवं आबकारी मंत्री कवासी लखमा ने कहा की आपके अधिवक्ता संघ से सीख लेनी चाहिए जो जीतने वाले का भी सम्मान करता है और हारने वाले का भी सम्मान करता है इस अवसर पर उन्होंने जिला अधिवक्ता संघ को हर संभव मदद देने का आश्वासन दिया।

सांसद बस्तर दीपक बैज ने कहा की आपके अधिवक्ता संघ के द्वारा गरीबों और जरूरतमंदों के हक में न्याय दिलाने के जो प्रयास किए जा रहे हैं वह काबिले तारीफ़ है और आप लोगों की वजह से ही न्याय पालिका पर लोगों का भरोसा कायम है।

विधायक जगदलपुर एवं संसदीय सचिव रेखचंद जैन ने कहा की आप सभी बुद्धिजीवी वर्ग से आते हैं और समाज को दिशा प्रदान करने का कार्य करते हैं उन्होंने उच्च न्यायालय की खंडपीठ का जगदलपुर में समर्थन करते हुए कहा की आपकी जायज मांगों का पूर्ण समर्थन है एवं इस हेतु मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जी से अनुरोध किया जाएगा उन्होंने कहा की प्रभारी मंत्री कवासी लखमा जी के माध्यम से कैबिनेट में भी इस मामले को उठाया जाएगा राजस्व न्यायालय एवं जिला उपभोक्ता फोरम में सदस्यों की नियुक्ति का भी जल्द से जल्द आश्वासन दिया इसके अलावा जिला अधिवक्ता संघ के भवन के लिए जो भी आर्थिक सहायता दी जा सकती है वह जल्द से जल्द प्रदान करने का आश्वासन दिया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रही जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुमन एक्का ने बार एवं बेंच में आपसी सामंजस्य स्थापित कर न्याय दिलाने एवं न्याय व्यवस्था को सुचारू संचालन की बात कही इस अवसर पर उन्होंने कहा की पूर्व की कार्यकारिणी के द्वारा जो सहयोग किया गया वहीं सहयोग आगे भी किया जाएगा।

नव निर्वाचित अध्यक्ष दिनेश चंद्र जोशी ने विभिन्न मांगों को अतिथियों के सामने रखा एवं आभार व्यक्त किया।

जिला एवं सत्र न्यायधीश सुमन एक्का, न्यायालय के समस्त न्यायधीश, प्रभारी मंत्री कवासी लखमा, सांसद बस्तर दीपक बैज, विधायक जगदलपुर एवं संसदीय सचिव रेखचंद जैन, जिला पंचायत अध्यक्ष वेदवती कश्यप, महापौर सफीरा साहू नगर निगम की सभापति कविता साहू, पूर्व विधायक संतोष बाफना संघ के वरिष्ठ सदस्य पूर्व अध्यक्ष एवं समस्त सम्माननीय सदस्य उपस्थित रहे।

सांसद बैज की मेहनत रंग लाई, सीएम बघेल की शाबासी पाई…

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अर्जुन झा

जगदलपुर। दुनिया भर में मशहूर ढाई माह तक चलने वाले ऐतिहासिक बस्तर दशहरा में 75 दिनों तक कार्यक्रम की गरिमा और भव्यता को बनाने में सांसद दीपक बैज की मेहनत रंग लाई और उन्होंने समारोह के समापन अवसर पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की शाबासी पाई। बस्तर दशहरा के सफल आयोजन के लिए मुख्यमंत्री बघेल ने सांसद बैज की कई जगहों पर खूब तारीफ की। ऐतिहासिक मुरिया दरबार में भी सांसद दीपक बैज के कार्य को सीएम की सराहना मिली। सांसद बैज ने मुख्यमंत्री बघेल, प्रशासन, मांझी, चालकी, मेंबर मेंबरीन व पुजारी सहित सभी के प्रति आभार व्यक्त किया।बस्तर दशहरा समिति के अध्यक्ष का दायित्व बस्तर सांसद दीपक बैज को सौंपा गया और

उनके कुशल नेतृत्व में बस्तर दशहरा का आयोजन कर्जमुक्त होता जा रहा है। सांसद दीपक बैज का कहना है कि माई जी के आशीर्वाद और बस्तर की जनता के सहयोग से यह चुनौतीपूर्ण वृहद आयोजन को सफलता मिली। अब इस आयोजन के मद्देनजर सीएम बघेल द्वारा सांसद दीपक बैज की तारीफ के सियासी मायने निकाले जाएं तो सांसद बैज बस्तर की जनता और मुख्यमंत्री बघेल की उम्मीदों पर खरे उतर रहे हैं। संसद में बस्तर और राज्य की आवाज़ बुलंद करने वाले सांसद दीपक बैज ने रचनात्मक क्षेत्र में भी अपना कौशल दिखा दिया है। वे बस्तर की जनता के साथ हर मोर्चे पर सक्रिय हैं। सांसद का काम क्षेत्र विकास और अपने राज्य के हित के प्रयास के साथ ही देश हित के काम में भागीदारी करना होता है। इन तीनों ही स्तर पर दीपक बैज अपनी भूमिका निभा रहे हैं। संसद में विपक्षी सांसद के तौर पर वे केंद्र सरकार की नीतियों की जमकर मुखालफत करते हैं तो बस्तर और छत्तीसगढ़ के हक की आवाज बुलंद करते हैं। स्थानीय लोगों की भावनाओं के अनुरूप काम हों, यह उनकी प्रार्थमिकता है। अपने लोकसभा क्षेत्र के सभी विधायकों और जनप्रतिनिधियों के साथ उनका बेहतर समन्वय बस्तर विकास में भागीदार बन रहा है।

आदिवासी बनने की अजब दांस्ता – जिस स्कूल में बाप राउत बनकर पढ़ा वंही उसका बेटा गोंड हो गया

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केशकाल। अनुविभागीय अधिकारी राजस्व 24दिसंबर 2018को बगैर आवश्यक प्रमाणिंत दस्तावेजों के एक ऐसे ब्यक्ति को गोंड जाति का स्थायी जाति प्रमांण पत्र जारी कर दिया जिसके भाईयों के भी राउत मद्रासी और उसके बाद गोंड बन जाने का अजीबोगरीब दास्तान सामने आया है। प्राथमिक स्कूलों के अभिलेख से यह उजागर हुआ है की जिस बमलेश्वर बोमडे को अनुविभागीय अधिकारी राजस्व ने गोंड जाति का स्थाई जाति प्रमांण पत्र प्रदान कर दिया उसके दो जुडवा भाई एक ही स्कूल में जब प्राथमिक शाला में पढ़ने गये तब उनका नाम दाखिल करते वक्त उनकी जाति राऊत दर्ज है पर उन्ही दो भाई में से एक भाई जब अपने बच्चे को उसी प्राथमिक शाला में पढ़ाने के लिए नाम दाखिल कराया तो अपने बच्चे की जाति गोंड लिखवा दिया था वंही उसी के एक भाई का उसी गांव के दूसरे प्राथमिक शाला में नाम दाखिल कराया गया था तब उसकी जाति ही नहीं लिखवाया गया था और शाला के प्रधानाचार्य द्वारा जाति वाला कालम कोरा छोड़ दिया गया था। परन्तु उसी शाला के दूसरे अभिलेख में उसकी जाति मद्रासी लिखा हुआ मिला। मद्रासी भी “जाति” होता है यह शाला का अभिलेख प्रमाणित करता है।एक पिता के सभी संतानों की जाति जिस तरह से शालाओं के अभिलेख में दर्ज करवाया गया और बाद में सभी खुद को गोंड लिखकर आदिवासी बन गये और आदिवासी का लाभ अर्जित करने लग गये।

यह देखने में आते रहता है कि आदिवासी होने का अपना फर्जी जाति प्रमाण-पत्र बनवाकर आरक्षित वर्ग को प्रदत्त संवैधानिक अधिकार – संरक्षण एवं रियायत का लाभ अर्जित करने के लिए लोग एक से एक हथकंडा अपनाते हैं वंही अधिकारियों को जाति प्रमाण-पत्र बनाने हेतु सावधानी बरतने हेतु समय समय पर दिशा निर्देश भी जारी किया जाता है फिर भी फर्जी जाति प्रमाण-पत्र धारियों की संख्या बढ़ती ही जा रही है।

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समय समय पर अनुसूचित जाति जन जाति वर्ग के हित एवं हक के लिए सजग रहकर सक्रिय रहने वाले नेताओं एवं संघ संगठन द्वारा भी फर्जी जाति प्रमांण पत्रधारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाया जाता रहा है फिर भी आज तक भी फर्जी जाति प्रमांणपत्र धारियों पर कोई ठोस कानूनी कार्रवाई नहीं हो पाया और फर्जी लोग आज भी असली आदिवासियों एवं दलितों का हक मारकर बड़े मजे से मौज उडा रहे हैं।

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मूलतः दक्षिण प्रदेश से पिछले दो तीन दशक पूर्व केशकाल के डिहीपारा में एक दो परिवार आया जो पत्थर तोड़ने का काम करके जीवन निर्वाह करते यंही बस गया। जिन्हे यंहा के लोग मद्रासी मद्रासी बोलने लग गये। उसमें से एक परिवार प्रमुख …..ने जामगांव में एक गैर आदिवासी से कृषि भूमि लेकर लंबे समय तक कृषि करता रहा पर बहुत लंबा समय तक रहने के बाद उसे अपनी कृषि भूमि बिक्री करके जाना पड़ा और वह अपना कृषि भूमि एक गैर आदिवासी परिवार को बिक्री करके यंहा से चला गया । वंही उसके सांथ ही दक्षिण से आया कलीप्पा और उसका परिवार यंही का होकर रह गया तथा सदा सदा के लिए यंही बस गया। कलीप्पा ने बहुत गरीबी में जीवन गुजर बसर करके पत्थर तोड तोड़कर अपने परिवार का पालन पोषंण किया। कलीप्पा ने अपने बच्चों को जब प्राथमिक शाला डिहीपारा 19-8-1998को पढ़ाने के लिए भर्ती करवाया तो श्रीराम एवं लक्ष्मंण नाम के जुडवा दोनों बच्चों की जाति राऊत लिखवा दिया था। पर उसी स्कूल में जब श्रीराम 11-8-2020 को अपने पुत्र भावेश को पढ़ाने के लिए उसका नाम दाखिल करवाया तो उसकी जाति गोंड लिखवा दिया।जो खुद उसी स्कूल में राउत जाति का होकर पढ़ा था वहीं अपने बेटे को गोंड बताकर भर्ती कराया जो समझ से परे है।इसका मतलब यह की इस बीच जाति परिवर्तन कर श्रीराम गोंड बन गया।जबकि उसका एक भाई जो भी कलीप्पा का ही पुत्र हैं जिसका नाम कृष्णा है उसका नाम प्राथमिक शाला बोरगांव में10-8-1985 को दाखिल करवाया गया है तो वंहा जाति लिखवाया ही नहीं गया था। परन्तु शाला के एक अभिलेख में उसकी जाति-मद्रासी लिखा हुआ आज भी देखा पढ़ा जा सकता है। आश्चर्य की बात तो यह भी है कि नाम दाखिल खारीज पंजी में जाति वाला एक कालम होता है जिसमें बच्चों की जाति लिखना ज़रूरी होता है क्योंकि यही भविष्य में जाति निर्धारंण एवं जाति प्रमांण पत्र बनाने का मुख्य आधार बनता है ।उस शाला में दाखिल खारीज पंजी में सभी बच्चों की जाति लिखा गया है बस कलीप्पा के पुत्र कृष्णा की जाति न लिखकर कोरा छोड़ दिया गया ।

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श्रीराम लक्षमंण कृष्णा के अलावा कलीप्पा का एक और पुत्र बमलेश्वर बोमडे है जिसे लोग आज भी बोमडे उपनाम से ही जानते पहचानते हैं ,परन्तु वह ग्रामपंचायत बोरगांव के रहुनाओं और राजस्व विभाग के कर्मचारी-अधिकारी के कृपा से अब सरकारी अभिलेखों एवं मतदाता सूची आधार कार्ड में मरकाम बन गया है।बताया जाता है की वह विधिसम्मत जाति प्रमांण पत्र के बगैर ही खुद को गोंड जाति का होना लिखकर केशकाल से सटे बोरगांव के थनवारीन बेवा रजनाथ एवं दिगर से उसके खसरा नं.77/912में से 21डिसमिल कृषि भूमि क्रय कर लिया था और उसी का बी वन और ग्रामपंचायत बोरगांव के ग्रामसभा 25-7-2008के प्रस्ताव की छायाप्रति लगाकर अनुविभागीय अधिकारी राजस्व के पास आवेदन लगा दिया था और उस वक्त पदस्थ अनुविभागीय अधिकारी राजस्व ने भी बडी उदारतापूर्वक जाति प्रमांण पत्र 24-12-2008को पुस्तक क्र.16से बनाकर जारी कर दिया था। अनुविभागीय अधिकारी राजस्व से गोंड जाति का प्रमांण पत्र मिलने के बाद गोंड जाति के आदिवासी की जमीन खरीदने बेचने का काम भी करने लगा फलस्वरूप आज उसके पास राष्ट्रीय राजमार्ग के तीगड्डे पर और कयी स्थानों पर जमीन है । अन्य प्रदेश से आदिवासी बाहुल्य बस्तर में आकर नफा नुकसान के दृष्टिकोण से गोंड बनकर आदिवासी होने का लाभ अर्जित करने वाले कलीप्पा के पुत्रों के जाति की सही ढंग से जांच पड़ताल करने से यह साफ हो जायेगा की किस तरह से कूटरचित फर्जी दस्तावेज से आदिवासी होने का जाति प्रमाण-पत्र प्राप्त कर लिया जाता है और फिर जाति प्रमांण पत्र प्राप्त कर नकली आदिवासी असली आदिवासी की अपेक्षा कितनी जल्दी कितना ज्यादा फायदा उठा लेता हैं और संबंधित सक्षम अधिकारी अपने आंखों के सामने तथा अपनी जानकारी में होने वाले गैरकानूनी कृत्य को जानते हुए भी कैसे अनजान होने का स्वांग करते आंख मूंद लेते हैं।

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बाबा बगावत नहीं कर सकते, सियासी अदावत से बघेल का कुछ नहीं बिगड़ेगा…

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(अर्जुन झा)
रायपुर। छत्तीसगढ़ में राजनीति के गलियारों में अब यह चर्चा चहलकदमी कर रही है कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव के बीच जारी सत्ता संघर्ष में भूपेश बघेल पूरी तरह विजेता की भूमिका में हैं। राज्य में सत्ता की सियासत में आंतरिक संघर्ष की कथित लौ भले ही जलती सी दिखने का अहसास कराती रहे लेकिन राज्य के विकास और जनता की खुशहाली के लिए यह जरूरी जान पड़ रहा है कि यथास्थिति बनाए रखना अनिवार्य होगा। और, कांग्रेस का शिखर नेतृत्व इस तथ्य से भली प्रकार अवगत है, इसलिए यह माना जा रहा है कि हल्की फुल्की उथल पुथल के बावजूद गहराई में कोई हलचल पैदा नहीं होगी। राजनीति में स्थिरता बहुत जरूरी है। यह विकास और जनहित की जरूरत है। छत्तीसगढ़ में पंद्रह साल तक भारतीय जनता पार्टी की सरकार में डॉ. रमन सिंह ने मुख्यमंत्री का दायित्व सम्हाला। उनकी पार्टी ने उन्हें तब तक अवसर दिया, जब तक जनता ने चाहा। राज्य गठन के बाद कांग्रेस ने भी अपनी पहली सरकार के मुख्यमंत्री अजीत जोगी को खुले दिल दिमाग से छत्तीसगढ़ के विकास की बुनियाद रखने का अवसर दिया। यही वजह है कि छत्तीसगढ़ अपने साथ अस्तित्व में आए झारखंड और उत्तराखंड के मुकाबले ऊंचाइयों पर खड़ा है। यह अवधारणा बदलना छत्तीसगढ़ के हित में नहीं होगा। जनभावनाओं के विपरीत भी होगा। छत्तीसगढ़ की जनता ने नई और कई उम्मीदों के साथ भूपेश बघेल के नेतृत्व में कांग्रेस को चुना। तीन चौथाई सा विशाल बहुमत दिया तो वह इस कारण कि राज्य की जनता स्थायित्व चाहती है। सरकार का और उसके सरदार का भी। इसीलिए तो यह राज्य लगातार जन भावनाओं के अनुरूप काम करते हुए आगे बढ़ रहा है। इसमें कोई दो मत नहीं कि वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव में तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल और तब के नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव ने मिलकर बेहद मेहनत की और कांग्रेस को अभूतपूर्व सफलता दिलाई। तब भूपेश बघेल सीएम पद के स्वाभाविक दावेदार थे लेकिन टीएस सिंहदेव की भी खूब चर्चा हुई। पार्टी नेतृत्व ने भूपेश बघेल में अधिक संभावनाएं देखीं और उन्हें दायित्व सौंपा गया। शुरुआती दौर में कभी किसी बंटवारे की बात नहीं उठी लेकिन फिर रह रहकर यह बात उठने लगी। जब सीएम पद पर भूपेश बघेल ने आधा कार्यकाल पूरा कर लिया तो उसके बाद ढाई ढाई साल का फार्मूला जोरशोर से उठा। दिल्ली दौड़ शुरु हो गई और यह दौर जारी है। टीएस सिंहदेव लगातार दिल्ली जा रहे हैं तो सीएम बघेल यूपी चुनाव में कांग्रेस के वरिष्ठ पर्यवेक्षक की हैसियत से दिल्ली और उत्तर प्रदेश में सक्रिय हैं। इधर राज्य की जनता उनकी शैली और नीति पर मोहित है। दूसरी ओर मंत्री सिंहदेव यह बता चुके हैं कि उनके संस्कार कैसे हैं। जाहिर है कि वे किसी हाल में कांग्रेस से बगावत नहीं कर सकते और भूपेश बघेल की फितरत ऐसी नहीं है कि छोटी मोटी सियासी अदावत से उनका कुछ भी बिगड़ सके।

डी. एम. एफ. टी. मे पदस्थ कर्मचारी को तीन महीने से वेतन नही मिलने से कर्मचारी नाराज

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छतीसगढ प्रदेश स्वास्थ्यकर्मचारी संघ जिला बस्तर के जिला अध्यक्ष अजय परिहार के नेतृत्व मे महारानी अस्पताल मेडिकल कालेज कोविड हेल्थ सेंटर समस्त सी. एच. सी.केन्द्रो मे कार्यरत स्टाप नर्सो व महारानी के 171 समस्त अधिकारी/कर्मचारी का तीन महीने से वेतन का भुगतान ना होने पर आज काली पट्टी का तीसरा दिन लगाकर कार्य को सुचारू रूप से किया गया है डी. एम एफ टी. के समस्त अधिकारी/कर्मचारी के समर्थन मे समस्त महारानी अस्पताल के कर्मचारी द्वारा विगत एक सफ्ताह तक काली पट्टी लगा कर इनका समर्थन कर कार्य का संचालन किया जाएगा स्वास्थ्य कर्मचारीयो को वेतन का भुगतान ना होने के कारण बहुत से अधिकारी/कर्मचारियों को अपने वितीय खर्च पूरे करने के लिये उधार लेने तक विवश होना पड़ रहा है ऐसे समय मे दीपावली का बड़ा त्योहार है तो कर्मचारी त्योहार मनाये केसे डी. एम. एफ. टी. संविदा कर्मचारियों मे स्टाफ नर्स लैब टेक्नीशियन ओ. टी. टेक्नीशियन xray/ct scan टेक्नीशियन वाड बॉय वाड आया o.p.d. अस्सिटेंट क्लीनर जैसे लगभग 500 से डी. एम. एफ. टी. कार्यरत कर्मचारी कोरोना जैसे संकट काल मे अपनी सेवाऐ दे रहे है ऐसे कर्मचारी का तीन माह से वेतन का भुगतान ना होना प्रशासन के उदासीनता को दर्शाता है संघ जिला प्रशासन से माग करता है की स्वास्थ्य कर्मचारियो का तीन माह का वेतन यथाशीघ्र प्रदान करे अन्यथा वेतन का भुगतान ना करने पर संघ को आंदोलन के लिये बाध्य होगा जिसकी जबाबदारी प्रशासन की होगी प्रदर्शन कारीयो मे रूपेन्द्र सिंह डाँ भगत बघेल लक्ष्मी टाडिया गीतांजलि सिंह वाल्मीकि आकृति भीकम साहू सुलेखा प्रीति शोभना सपना धामनी लक्ष्मी आदि कर्मचारी उपस्थित थे |

सेल कर्मियों के 58 माह से लंबित वेतन समझौते के लिए एनजेसीएस के सदस्य यूनियन और सेल प्रबंधन के बीच हुआ – MOU

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दिनांक 22.10.2021 को नई दिल्ली में महारत्न सेल के कर्मियों के 58 माह से लंबित वेतन समझौते के लिए एनजेसीएस के सदस्य यूनियन और सेल प्रबंधन के बीच MOU हुआ जिसपर प्रबंधन के प्रतिनिधियों के साथ-साथ NJCS के पांच सदस्य यूनियन में से तीन यूनियन के प्रतिनिधियों ने हस्ताक्षर किये और दो यूनियन ने इस MOU पर हस्ताक्षर करने से स्पष्ट मना कर दिया। जिन तीन यूनियन ने हस्ताक्षर किये वे हैं इंटुक, एटक और एचएमएस। बीएमएस और सीटू ने इस MOU पर हस्ताक्षर करने से साफ़ मन कर दिया। इस सम्बन्ध में विस्तृत जानकारी देते हुए बीएमएस से सम्बद्ध खदान मजदूर संघ भिलाई के उपाध्यक्ष (केंद्रीय) राजीव सिंह ने कहा कि 58 माह से लंबित वेतन समझौता का जिस तरह से अंत हुआ है वो सचमुच में निराशाजनक है और इस MOU से ये साफ़ हो जाता है कि सेल प्रबंधन के साथ इन तीन श्रम संगठनों ने मिलकर कर्मियों के साथ विश्वासघात किया है।

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राजीव सिंह ने आगे कहा कि इंटुक, एटक और एचएमएस ने न केवल श्रम संगठनों के एकता पर करारा प्रहार किया है बल्कि उन्होंने कर्मियों के साथ भी छल किया है। जब कोर ग्रुप की बैठक में सभी यूनियन ने 28% पर्क्स पर सहमति बना ली थी तो फिर प्रबंधन के साथ बैठक में 26.5% पर सहमति देने के पीछे क्या औचित्य था? आज ये तीन यूनियन यह कहते फिर रहे रहे हैं कि पहले से ही काफी देर हो चूका था और कर्मियों को नुकसान हो रहा था इसलिए उन्होंने 26.5% पर हस्ताक्षर कर दिया। अपने इस वक्तव्य से ये तीनों यूनियन अपने आपको कर्मियों के रहमनुगार साबित करने में लगे हैं। भारतीय मजदूर संघ और सभी कर्मी इन तीनों श्रम संगठनों से यह सवाल पूछते हैं कि अगर 26.5% पर्क्स पर ही समझौता करना था तो फिर 30 जून को सेल के सभी यूनिट्स में एक दिवसीय हड़ताल कराकर कर्मियों के एक दिन का वेतन कटौती क्यों कराई गयी? इस हड़ताल के वजह से आज कई कर्मियों को शो कॉज नोटिस, विभागीय कारवाई, ट्रांसफर आदि जैसे वीभत्स मानसिक यंत्रणा से गुजरना पड़ रहा है। क्या ये तीन यूनियन उन पीड़ित कर्मियों के इस मानसिक व्यथा के लिए जिम्मेद्दार नहीं हैं? जब कर्मियों ने अपना पूरा समर्थन इन नेताओं को दिया था तब ऐसे में कोर कमिटी की बैठक में सर्वसम्मति से लिए गए निर्णय से पीछे हटकर, यूनियन की एकता को तोड़ते हुए, कर्मियों के साथ विश्वासघात करते हुए इन तीन यूनियन ने जो कृत्य किया है उसका भारतीय मजदूर संघ कड़े शब्दों में निंदा करता है।

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जहाँ तक 26.5% पर्क्स पर समझौते की बात है तो भा.म.सं. को यह कहने में कोई हिचक नहीं है कि अगर इस एनजेसीएस में बीएमएस शामिल नहीं होता तो ये तीन यूनियन के नेता मिलकर कर्मियों का गला काटकर और अपनी जेब भरकर 20% पर्क्स पर ही हस्ताक्षर करके इसे कर्मियों की जीत बताते। इन्ही तीन यूनियन ने पेंशन के वक्त भी कर्मियों के साथ विश्वासघात किया। जब बीएमएस ने 6% पेंशन अंशदान को 2007 से लागू करने या फिर 2012 से 9% पेंशन अंशदान देने की मांग की तब भी इन्ही तीन यूनियन ने यह कहा कि बीएमएस देर करके कर्मियों के पेंशन के मामले को लटकाना चाहता है प्रबंधन के पक्ष में बात की और कर्मियों को नुकसान पहुँचाया। वर्तमान MOU के साईन होने के तत्काल बाद यह खबर आ रही है कि अधिकारीयों को 15% एमजीबी और 35% पर्क्स दिया जावेगा और साथ ही उन्हें पर्क्स की राशि का एरियर्स भुगतान भी किया जावेगा। हालाँकि अभीतक ये बातें केवल हवा में ही हो रही है किन्तु अगर ऐसा होता है तो ये कर्मियों के साथ न केवल प्रबंधन का कपटपूर्ण व्यवहार होगा बल्कि इन तीन यूनियन के नेताओं द्वारा कर्मियों के साथ किये गए धोखाधड़ी का ज्वलंत उदाहरण होगा। दरअसल में इंटुक और एटक पहले से ही प्रबंधन की गोद में बैठनने के लिए कर्मियों का गला काटते आये हैं।

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अंत में राजीव सिंह ने कहा कि वर्तमान MOU सर्वसम्मति से नहीं हुआ है जो कि NJCS के मूल सिद्धांत के विपरीत है। इसके अलावा जिस तरह से इंटुक, एटक और एचएमएस ने एनजेसीएस कोर समिति में हुए निर्णय से पलटकर प्रबंधन का साथ दिया वो न केवल निंदनीय है बल्कि कर्मियों के प्रति उनकी संवेदनहीनता का भी प्रतिक है। भा.म.सं. यह प्रयास कर रहा है कि MOS साईन होने के समय भी कर्मियों के हितार्थ पर्क्स की राशि में बढ़ोतरी हो और अगर अधिकारीयों को पर्क्स की राशि का एरियर्स दिया जाता है तो बीएमएस इसके विरुद्ध न्यायलय जाने से भी पीछे नहीं हटेगा। बीएमएस कर्मियों के हित को सर्वोपरि मानता है और कर्मियों के वाजिब हक़ के लिए सभी लड़ाई लड़ने के लिए हमेशा तैयार रहा है और आगे भी तैयार रहेगा। साथ ही उन्होंने यह भी आशा व्यक्त की कि कर्मी अपने हित को देखते हुए बीएमएस का साथ देंगे। MOU पर हस्ताक्षर न करने के लिए सीटू को भी बीएमएस की तरफ से उन्होंने धन्यवाद दिया।

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