जगदलपुर कलेक्टर विजय दयाराम के. शुक्रवार को मतदान केंद्रों के निरीक्षण पर निकले थे। इसी दौरान कापानार मतदान केंद्र के समीप संचालित शासकीय उचित मूल्य की दुकान में खाद्य सामग्री का भंडारण कार्य किया जा रहा था। कलेक्टर पीडीएस दुकान में भंडारण कार्य का औचक निरीक्षण करने पहुंच गए। उन्होंने दुकान संचालक से भंडारण की सामानों की सूची दिखाने कहा और खाद्य सामग्री की मात्रा तथा वजन करवाने के निर्देश दिए। गुड, चना, शक्कर की मात्रा और वजन में कोई कमी नहीं मिली, लेकिन मौके पर चावल की बोरियों का तौल करवाने पर निर्धारित मात्रा से कम पाया गया। इसके लिए कलेक्टर ने नाराजगी जाहिर कर एसडीएम और नायब तहसीलदार को पंचनामा करवाने के निर्देश दिए।
कलेक्टर अपने साथ उक्त चावल बोरियों को लाकर केशलूर स्थित एफसीआई के गोदाम में दोबारा वजन का जांच करवाया। इसके लिए संबंधितों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई हेतु खाद्य विभाग, नागरिक आपूर्ति विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किए साथ ही अपर कलेक्टर की अध्यक्षता में जांच करवाने के निर्देश दिए। इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक शलभ सिन्हा, जिला पंचायत सीईओ प्रकाश सर्वे, एसडीएम तोकापाल सुब्रत प्रधान सहित राजस्व एवं खाद्य विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री के समक्ष पुरोबी ने किया भाजपा में प्रवेश
दल्लीराजहरा पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष पुरोबी वर्मा सहित कई महिलाओं ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के समक्ष भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली।
डौण्डी लोहारा में गुरुवार को आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के समक्ष कई महिला नेत्रियों ने बीजेपी में प्रवेश किया। इनमें एक महत्वपूर्ण महिला शख्सियत ने बीजेपी में शामिल होकर सबका ध्यान खींचा। वह थीं छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा की पूर्व नेता पुरोबी वर्मा, जो दो बार दल्ली राजहरा नगर पालिका की अध्यक्ष रही हैं। पुरोबी वर्मा लगातार दो बार शानदार ढंग से कांग्रेस और बीजेपी के प्रत्याशी को चुनाव में मात देकर पालिका अध्यक्ष बनीं थीं। लोगों के बीच कयास चल रहा था कि पुरोबी वर्मा कांग्रेस में प्रवेश करेंगी, किंतु बीजेपी प्रवेश कर उन्होंने अब अपनी अगली राजनीतिक पारी का आगाज कर दिया है। बीजेपी में अक्सर पढ़े लिखे और विचारवान नेताओं का स्वागत होता है। इस अभियान में बीजेपी सफल रही, ठीक लोकसभा चुनाव से पूर्व डौण्डी लोहारा से ही बीजेपी को एक सुलझे हुई महिला नेत्री मिल गई है, जो शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के अलावा मजदूर बाहुल्य इलाके में भी अपनी अलग पहचान रखती हैं। भाजपा को पुरोबी वर्मा के रूप में अब बड़ी ताकत मिल गई है और भाजपा उनका उपयोग पार्टी हित में कर सकेगी। पुरोबी वर्मा और अन्य विचारवान महिलाओं के भाजपा से जुड़ जाने के बाद कांकेर लोकसभा क्षेत्र का चुनाव परिणाम भी निश्चित रूप से प्रभावित होगा।
पुरोबी का सियासी करियर
पुरोबी वर्मा सन 2000 से 2009 तक लगातार दो बार दल्ली राजहरा नगर पालिका की अध्यक्ष रहीं हैं। राजहरा नगर पालिका की पहली अध्यक्ष बनने का गौरव भी उन्ही के खाते में दर्ज है।इनकी एक विशेषता यह है कि वे भले ही छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा की तरफ से पालिका अध्यक्ष रहीं, किंतु वे तत्कालीन सीएम रमन सिंह से काफी प्रभावित हैं। वे कहती हैं मैंने शहर विकास के लिए जब भी अपनी बात डॉ. रमन सिंह के समक्ष रखी उन्होंने बिना राजनैतिक भेदभाव किए भरपूर सहयोग किया। इसी प्रकार दुर्ग की तत्कालीन सांसद एवं महापौर सरोज पांडे भी अपने साथी महिला अध्यक्षों को काफी सम्मान देती रही हैं। दिए जाने की बात कही, मैडम पुरोबी वर्मा के बीजेपी प्रवेश अब ऐसे समय में हुआ है, जब नगरीय निकायों के चुनाव एक साल बाद होने हैं। आज तक बीजेपी दल्ली राजहरा नगर पालिका अध्यक्ष चुनाव जीत नही पाई है। लेकिन इस बार सबकुछ ठीक ठाक रहा तो इस पूर्व अध्यक्ष और वर्तमान बीजेपी नेत्री पुरोबी के अनुभव के साथ बीजेपी इस बार अध्यक्ष पद साध लेगी।
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र चिखलाकसा में मूलभूत सुविधाओं को बढ़ाने मुख्यमंत्री जी से की गई मांग
दल्लीराजहरा:–छत्तीसगढ़ के यशस्वी मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय जी के प्रथम डौंडीलोहार आगमन पर नगर पंचायत चिखलाकसा उपाध्यक्ष अब्दुल इब्राहिम सैयद ने मुलाकात की और उन्होंने नगर पंचायत चिखलाकसा में स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में मूलभूत सुविधा की कमी से अवगत कराया ज्ञात हो की नगर पंचायत चिखलाकसा में स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में दल्लीराजहरा चिखलाकसा सहित आसपास के मरीज इलाज के लिए आते हैं लेकिन वास्तविकता में यहां सुविधाओं की भारी कमी है। जिसे मद्देनजर रखते हुए अब्दुल इब्राहिम सैयद ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन सोपा।अब्दुल इब्राहिम ने कहा की नगर पंचायत चिखलाकसा स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में केवल 10 बिस्तर अस्पताल है जो की मरीजो के लिए बहुत ही कम है चिखलाकसा के आस-पास के गांवो एवं दूरदराज से ईलाज हेतु मरीज आते है जिनकी सुविधा हेतु 50 बिस्तर अस्पताल की आवश्यकता है व उचित ईलाज हेतु डॉक्टर एवं ड्रेसर की अत्यंत ही आवश्यकता है ड्रेसर ना होने से मरीजों को छोटे-मोटे चोट लगने से मरहम पट्टी नही हो पाता है।
बेटे के लिए बहू ढूंढने गया था पार्टी ने मुझे दुल्हन सौंप दी: लखमा
अर्जुन झा
जगदलपुर लोकसभा सीट बस्तर का चुनाव पार्टी द्वारा निर्धारित मापदंड से हटकर प्रत्याशी के किए प्रहसन पर ही आधारित हो रहा है। बस्तर लोकसभा सीट से कांग्रेस प्रत्याशी कवासी लखमा जो कोंटा विधानसभा से एमएलए भी हैं उन्होंने कहा है कि मैंने अपने पुत्र हरीश कवासी के लिए संसद का टिकट मांगा था, लेकिन पार्टी ने मुझे दे दिया।अब वर्तमान सांसद दीपक बैज का विरोध भी इसी क्रम में किया कि मैं एमएलए तो मेरा बेटा एमपी बने, इस समय कांग्रेस पर परिवारवाद का आरोप चरम सीमा पर है। शायद पार्टी ने यही सोचकर टिकिट मुझे ही दिया, अब भरी सभा में अपनी मजबूरी बताते हुए कवासी लखमा कह रहे हैं कि मेरे पुत्र को टिकिट नहीं दिया तो मुझे मजबूरी में लड़ना पड़ रहा है। अब क्या सवाल नहीं बनता कि कवासी लखमा मजबूरी में चुनाव लड़ रहे हैं। विधानसभा चुनाव में भाजपा को जिताने के आरोप से घिरे रहे कवासी लखमा आखिर किस मजबूरी के चलते भाजपा से लगातार नजदीकी बढ़ाते जा रहे हैं और कांग्रेस से दूरी बनाते चले जा रहे हैं। जाहिर है छत्तीसगढ़ के बहु चर्चित आबकारी घोटाले के दाग कवासी लखमा के दामन पर भी लगे हैं।. जब यह तथाकथित घोटाला हुआ, तब कवासी लखमा ही आबकारी मंत्री थे। जनचर्चा है कि कवासी लखमा इस दाग से उबरने के लिए भाजपा से नजदीकियां बढ़ा रहे हैं। यानि बस्तर लोकसभा सीट को कांग्रेस के हाथ से फिसल जाने देने की पूरी पटकथा विधानसभा चुनाव के समय ही लिखी जा चुकी थी। इसी रणनीति के तहत कांग्रेस के एक शीर्ष नेता के इशारे पर बस्तर में भाजपा को बंपर जीत दिला दी गई और अब अबकी बार 400 पार के भाजपाई लक्ष्य की पूर्ति में भी तथाकथित कांग्रेस नेता बड़ा योगदान देने में लग गए हैं। कोयला घोटाले में फंसे भिलाई नगर के विधायक देवेंद्र यादव को पैरशूट प्रत्याशी बनाकर बिलासपुर लोकसभा क्षेत्र में भेजा जाना भी इसी रणनीति का ही एक हिस्सा है।
एक तो कोयले का दाग, दूसरा बाहरी होने का तोहमत। ऐसे में बिलासपुर की जंग कांग्रेस के लिए आसान भला कैसे रह जाएगी? अब आते हैं बस्तर लोकसभा सीट की ओर। तो जनाब कवासी लखमा एक मसखरे नेता हैं, मगर राजनीति में मसखरापन कभी भी टिकाऊ नहीं होता। लोग ऐसे नेताओं की बातों को सीरियसली नहीं लेते। राजनेताओं का धीर गंभीर होना जरूरी होता है और हमारे लखमा जी में तो इस चीज की बड़ी कमी है। बस्तर सीट से दीपक बैज कांग्रेस के लिए जिताऊ प्रत्याशी साबित हो सकते थे, मगर उनकी दावेदारी का प्रबल विरोध कांग्रेस के ही एक गुट विशेष द्वारा किया गया। इसमें कवासी लखमा को मोहरे की तरह इस्तेमाल किया गया। अब वही लखमा दुहाई देते फिर रहे हैं कि टिकट मुझे नहीं, कांग्रेस के सबसे बड़े नेता दीपक बैज को देना था। अपने बयानों के लिए हमेशा सुर्खियों में रहने वाले कवासी लखमा ने एकबार फिर से मंच से बड़ा बयान दे दिया कि बस्तर लोकसभा से मुझे टिकट न देकर बस्तर के बड़े नेता दीपक बैज को देना चाहिए था। साथ ही कवासी लखमा ने यह भी जोड़ दिया कि मैं तो अपने बेटे के लिए दुल्हन खोजने गया था, लेकिन पार्टी ने तो मुझे ही दुल्हन थमा दी। बुधवार को कांग्रेस द्वारा जगदलपुर के लालबाग मैदान पर नामांकन रैली व सभा का आयोजन किया गया था। इस दौरान सभा को संबोधित करते हुए कवासी लखमा ने यह बातें कही। ज्ञात हो कि लोकसभा चुनाव के प्रबल दावेदार माने जा रहे पीसीसी अध्यक्ष दीपक बैज को टिकट न देते हुए बस्तर लोकसभा से कांग्रेस ने कोंटा विधानसभा क्षेत्र से 6 बार विधायक रह चुके कवासी लखमा को प्रत्याशी बनाया है। टिकट मिलने से पहले तक कवासी लखमा दिल्ली में डेरा डाले बैठे थे। कवासी लखमा का विचार था कि कांग्रेस पार्टी उनके बेटे सुकमा जिला पंचायत अध्यक्ष हरीश कवासी को लोकसभा चुनाव का टिकट दे। कवासी लखमा के इस बयान ने कांग्रेस के अंदर टिकट को लेकर चल रहे खींचतान को भी साफ कर दिया है। सभा को सम्बोधित करते हुए कवासी लखमा ने पीसीसी अध्यक्ष दीपक बैज को पार्टी का सबसे बड़ा नेता बताया। दीपक बैज को लोकसभा का टिकट नहीं मिलने से उनके समर्थकों में नाराजगी देखी जा रही है। कवासी लखमा को इस बात का अंदाजा है कि अगर उन्हें लोकसभा चुनाव में जीत दर्ज करानी है तो उन्हें बस्तर से दीपक बैज के समर्थकों को भी साथ लेकर चलना होगा।
ठीकरा फोड़ने के लिए बैज हैं न
कवासी लखमा ने अपने बयान से यह स्पष्ट कर दिया है कि दीपक बैज पीसीसी अध्यक्ष है, साथ ही प्रदेश के सबसे बड़े नेता हैं और उनकी जिम्मेदारी 11 लोकसभा सीटों पर पार्टी प्रत्याशियों को जिताने की है। मतलब चित भी मेरी, पट भी मेरा। जीत गए, तो कहेंगे अपनी काबिलियत से जीते हैं और हार गए, तो ठीकरा फोडने के लिए दीपक बैज तो हैं ही। हार की जिम्मेदारी थोपने के लिए अभी से भूमिका बनाई जाने लगी है।
जगदलपुर लोकसभा क्षेत्र क्रमांक -10 बस्तर के लिए दाखिल किए गए नामांकन पत्रों की जांच की गई। जांच में 11 प्रत्याशियों के नामांकन पत्र विधि मान्य पाए हैं।
जांच के बाद जिला निर्वाचन कार्यालय द्वारा प्रत्याशियों की सूची जारी कर दी गई है। इस सूची के मुताबिक बस्तर सीट पर फिलहाल कवासी लखमा इंडियन नेशनल कांग्रेस, महेश कश्यप भारतीय जनता पार्टी, नरेंद्र बुरका हमरराज पार्टी, कंवलसिंह बघेल राष्ट्रीय जनसभा पार्टी, आयतूराम मंडावी बहुजन समाज पार्टी, फूलसिंग कचलाम सीपीआई, शिवराम नाग सर्व आदि दल, टीकम नागवंशी गोड़वाना गणतंत्र पार्टी, जगदीश प्रसाद नाग आजाद जनता पार्टी, प्रकाश कुमार गोटा, निर्दलीय और सुंदर बघेल निर्दलीय मैदान पर रह गए हैं। अब देखना यह होगा कि इनमें से कितने लोग मैदान छोड़ते हैं।
जगदलपुर बीआईओएम बचेली कॉम्प्लेक्स ने मुंबई में आयोजित 14वें सीआईआई राष्ट्रीय एचआर उत्कृष्टता पुरस्कार समारोह 2023-24 में “स्ट्रॉन्ग कमिटमेंट टू एचआर एक्सिलेंस” पुरस्कार प्राप्त किया।
बीआईओएम, बचेली कॉम्प्लेक्स की ओर से यह पुरस्कार बचेली परियोजना के अधिशासी निदेशक बी वेंकटेश्वरलु एवं महाप्रबंधक (कार्मिक) धर्मेन्द्र आचार्य ने ग्रहण किया। इस उपलब्धि ने मानव संसाधन उत्कृष्टता के प्रति एनएमडीसी बचेली की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया है।
अत्यंत दुःख के साथ सूचित करना पड़ रहा है कि स्वर्गीय सुख सागर देवी झा जो भाजपा के वरिष्ठ नेता व शहर के प्रतिष्ठित व्यक्ति कमल देव झा ( भोला झा ) की माता व भाजपा जगदलपुर मंडल के सदस्य रौशन झा की दादी का निधन कल शाम हो गया है। अंतिम यात्रा दिनांक 29 मार्च 2024 दिन -शुक्रवार को सुबह 9:00 बजे आजाद चौक जगदलपुर स्थित निवास से निकलेगी।
भारतीय जनता पार्टी डौडी लोहारा विधानसभा प्रभारी राजेश ताम्रकार ने डौडी लोहारा मंडल दल्ली राजहरा मंडल डौंडी मंडल का दौरा कर अलग अलग बैठक लेकर कार्यकर्ताओं को कांकेर लोकसभा के प्रत्याशी भोजराज नाग को विजयश्री दिलाने आवश्यक बैठक लिया
डौंडीलोहारा विधानसभा क्षेत्र प्रभारी राजेश ताम्रकार ने कार्यकर्ताओं से कहा कि 30 मार्च के दिन बुथ विजय संकल्प अभियान के तहत प्रत्येक कार्यकर्ता को अपने घरों मे कमल का झंडा फहराना है तथा आसपास के घरों में 10 घरों में कमल का झंडा फहराना है-यह चुनाव का महाभियान चल रहा है प्रभारी राजेश ताम्रकार ने कहा कि प्रत्येक कार्यकर्ता को 200 लाभार्थी परिवार में सम्पर्क करना इस लाभार्थी सम्पर्क अभियान में बहुत अध्यक्ष संयोजक सहसंयोजक आदि कार्यकर्ता को जबरदस्त अभियान छेडकर लाभार्थी सम्पर्क अभियान को सफल बनाना है श्री ताम्रकार ने कहा कि एक दिन परिवार के सदस्यों को जैसे भाई बहन भतीजा को सदस्य बनाने के लिये मिस्ड कॉल करें तथा उनसे मान प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के किए गये कार्यों की चर्चा भी करना चाहिए बहुत विजय अभियान के तहत कार्यकर्ताओ को दिवाल लेखन अब की बार400 पार इस बार मोदी सरकार सहित पार्टी प्रत्याशी को विजयश्री दिलाने का नारा लेखन करें
ताम्रकार ने कहा कि पॅ श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने कश्मीर में धारा 370का विरोध करते हुए अपना बलिदान कर दिया और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सरकार ने धारा 370 समाप्त कर दिया और अब सभी कार्यकर्ताओ को चाहिए कि अपने अपने सुरों में जाकर 370वोटो की बढ़ोतरी करके भाजपा के पक्ष में वोट कराकर हमारे प्रणेता श्यामा प्रसाद मुखर्जी को सच्ची श्रद्धांजलि दे श्री राजेश ताम्रकार ने कार्यकर्ताओं से कहा कि कमजोर बहुत में कार्य प्रारंभ कर प्रभारी संयोजक सहसंयोजक बुथो का दौरा कर सामाजिक सांस्कृतिक धार्मिक लोगों से सम्पर्क कर बैठक करके जाति पंथ संप्रदाय से ऊपर उठकर कार्य करें और कमजोर बुथो को मजबूत करें ताम्रकार ने कहा कि भा जा पा को विजयश्री दिलाकर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी को मजबूत करें ताकि मजबूत राष्ट्र विकसित भारत का सपना साकार कर सके बैठक में छाया विधायक देवलाल ठाकुर मंडल अध्यक्ष रुपेश कुमार सिन्हा मंडल अध्यक्ष राकेश द्विवेदी मंडल अध्यक्ष मनीष झा देवेंद्र जायसवाल होरी लाल रावते जयेश ठाकुर दिलीप शर्मा मदन मायती संतोष देवांगन महेंद्र पिपरे सुरेश जायसवाल स्वाधीन जैन मनजीत कौर अंजु साहु गीता मरकाम कुमारी रावते टी ज्योती सुखवतीन ठाकुर उषा साहु रानी ठाकुर डौडी मडल से दिनेश अग्रवाल संजीव मानकर अजय चौहान माध्यम क्षेत्र सोमेश सोरी छगन यदु छगन साहु हिन्छाराम साहु रुपेश नायक सहित अनेक कार्यकर्ता उपस्थित थे l राजेश ताम्रकार
अपने विश्वस्त सहयोगी के पलायन की भनक तक नहीं लग पाई पूर्व सीएम को
अर्जुन झा
जगदलपुर बुधवार को जिस वक्त पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल चंद कदम दूर एक मंच पर मौजूद थे, ठीक उसी वक्त उनकी सबसे विश्वस्त रही जगदलपुर की महापौर सफीरा साहू भाजपा का दामन थाम रही थीं। जगदलपुर में इतना बड़ा खेला हो गया और भूपेश बघेल को अपने विश्वस्त सहयोगी के पलायन की कानों कान भनक तक नहीं लग पाई? आखिर यह कैसे मुमकिन है। इस बात की यहां बड़ी चर्चा हो रही है।
हालांकि सफीरा साहू के भाजपा प्रवेश पर भूपेश बघेल ने शायराना अंदाज में यह जरूर कहा है कि ‘यूं ही कोई बेवफा नहीं हो जाता, कुछ तो मजबूरियां रही होंगी।’ भूपेश बघेल ने यह भी कहा कि दवाब की राजनीति से लोगों को भाजपा में ले जाया जा रहा है। इस बयान से भूपेश की भी मजबूरी झलकती है। क्योंकि उन्ही के खेमे के विश्वस्त सलाहकारों के बीच की महापौर का पलायन बीजेपी में हुआ है।अब भूपेश बघेल अपनी मजबूरी और अपने दर्द को ही बयान कर रहे हैं। मान भी लें कि भाजपा दबाव की राजनीति के तहत मेयर को अपने पाले में ले गई है, तो जो कुछ भी हुआ होगा, वह कांग्रेस के ही शासन काल में हुआ होगा। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि क्या कांग्रेसी मुख्यमंत्री ने नगर निगम में काला पीला करने की खुली छूट महापौर को दे रखी थी? क्या कांग्रेस के लोग सत्ता को सिर्फ कमाई का ही जरिया मानते हैं? सवाल सिर्फ कांग्रेस से ही नहीं, बल्कि भाजपा से भी है कि बुधवार से पहले तक जो दाग भाजपा नेताओं को बुरे लगते थे वे दाग क्या अब अच्छे हो गए हैं? क्या भाजपा की वाशिंग मशीन में वो दाग धुल गए हैं? जनता जनार्दन सब देख और समझ रही है, वह जब फैसला सुनाएगी, तो उसका दर्द पांच साल तक राजनेताओं को चैन से सोने नहीं देगा। कहते हैं वक्त की मार बड़ी बुरी होती है और इतिहास खुद को दोहराता है। एक आदिवासी नेता दीपक बैज के बढ़ते कदमों को रोकने के लिए बीते विधानसभा चुनाव में जो हठकंडे कांग्रेस के ही कुछ बड़े नेताओं के इशारे पर बस्तर संभाग के पूर्व मंत्री, दो विधायकों, एक पूर्व विधायक और निगम, प्राधिकरण के दो पदाधिकारियों ने अपनाए थे, उनके बारे में बस्तर की जनता अब अच्छे से जान चुकी है। और तो और दीपक बैज को दोबारा कांग्रेस से लोकसभा का टिकट न मिल पाए इसके लिए विरोधी गुट ने पूरी ताकत झोंक दी थी। इस लॉबी के झूठ फरेब के आगे कांग्रेस नेतृत्व नत मस्तक हो गया। अब उसी पुराने घटनाक्रम की पुनरावृति लोकसभा चुनाव में होने वाली है। फर्क इतना है कि इस घटनाक्रम का किरदार कोई कांग्रेस नेता नहीं, बल्कि आम मतदाता है। दीपक बैज के बारे में तो कहावत चल पड़ी है कि वे बुरा करने वालों को भी माफ करते हुए आगे बढ़ने और पार्टी की भलाई के लिए काम करने में विश्वास रखते हैं। आज वे पार्टी प्रत्याशी को जिताने के लिए तन मन से काम कर रहे हैं।
सफीरा गईं या भेजी गईं भाजपा में
महापौर सफीरा साहू के अचानक भाजपा प्रवेश से एक बड़ा सवाल यह भी उठ रहा है कि सफीरा साहू अपनी मर्जी से भाजपा में गई हैं, या फिर किसी बड़े कांग्रेस नेता के कहने पर? जगदलपुर के कांग्रेस नेताओं के बीच चर्चा है कि सफीरा साहू जब चारों ओर से घिर गईं, तब उन्होंने अपने बचाव के लिए पूर्व मुख्यमंत्री तथा कुछ अन्य बड़े कांग्रेस नेताओं से मदद मांगी, लेकिन सभी ने अपने हाथ खड़े कर दिए। उन्हें सुझाव दिया गया कि भाजपा की वाशिंग मशीन में जाकर ही आपके दामन के दाग धुल सकते हैं। इस तरह उन्हें भाजपा में जाने के लिए प्रेरित किया गया। इसका मतलब तो यही निकलता है कि खुद कांग्रेसियों ने ही सफीरा साहू को भाजपा में शामिल होने के लिए उकसाया था। पूरे पांच साल तक काला पीला करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता रहा, कांग्रेस सरकार की बदनामी का ध्यान नहीं रखा गया और ऐन लोकसभा चुनाव के बीच महापौर समेत पांच बड़े कांग्रेस नेताओं को भाजपा ज्वाइन करने की खुली छूट दे दी गई
मेयर ने मौर्य पर फोड़ा ठीकरा
महापौर ने अपने भाजपा प्रवेश का ठीकरा शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष सुशील मौर्य पर फोड़ा है। अपने भाजपा प्रवेश के बाद पत्रकारों से चर्चा में सफीरा साहू ने कहा कि कांग्रेस में महिलाओं की कोई इज्जत नहीं है। जिला कांग्रेस कार्यालय में महिला कार्यकर्ताओं को सरेआम बेइज्जत किया जाता है। शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष का व्यवहार जरा भी शालीन नहीं है। सफीरा साहू ने कहा कि जब दो महिला नेत्रियों ने त्यागपत्र दिया तो कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने उन्हें समझाने की भी जरूरत नहीं समझी। साथ ही सफीरा साहू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष किरण देव के कामकाज की जमकर सराहना भी की और कहा कि इन नेताओं ने बिना भेदभाव किए शहर के विकास के लिए पर्याप्त धन राशि उपलब्ध कराई है। उन्होंने बताया कि विकसित भारत संकल्प के कार्यक्रमों में भाग लेने के दौरान ही मैंने भाजपा में जाने का मन बना लिया था।
अपने विश्वस्त सहयोगी के पलायन की भनक तक नहीं लग पाई पूर्व सीएम को
अर्जुन झा
जगदलपुर बुधवार को जिस वक्त पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल चंद कदम दूर एक मंच पर मौजूद थे, ठीक उसी वक्त उनकी सबसे विश्वस्त रही जगदलपुर की महापौर सफीरा साहू भाजपा का दामन थाम रही थीं। जगदलपुर में इतना बड़ा खेला हो गया और भूपेश बघेल को अपने विश्वस्त सहयोगी के पलायन की कानों कान भनक तक नहीं लग पाई? आखिर यह कैसे मुमकिन है। इस बात की यहां बड़ी चर्चा हो रही है।
हालांकि सफीरा साहू के भाजपा प्रवेश पर भूपेश बघेल ने शायराना अंदाज में यह जरूर कहा है कि ‘यूं ही कोई बेवफा नहीं हो जाता, कुछ तो मजबूरियां रही होंगी।’ भूपेश बघेल ने यह भी कहा कि दवाब की राजनीति से लोगों को भाजपा में ले जाया जा रहा है। इस बयान से भूपेश की भी मजबूरी झलकती है। क्योंकि उन्ही के खेमे के विश्वस्त सलाहकारों के बीच की महापौर का पलायन बीजेपी में हुआ है।अब भूपेश बघेल अपनी मजबूरी और अपने दर्द को ही बयान कर रहे हैं। मान भी लें कि भाजपा दबाव की राजनीति के तहत मेयर को अपने पाले में ले गई है, तो जो कुछ भी हुआ होगा, वह कांग्रेस के ही शासन काल में हुआ होगा। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि क्या कांग्रेसी मुख्यमंत्री ने नगर निगम में काला पीला करने की खुली छूट महापौर को दे रखी थी? क्या कांग्रेस के लोग सत्ता को सिर्फ कमाई का ही जरिया मानते हैं? सवाल सिर्फ कांग्रेस से ही नहीं, बल्कि भाजपा से भी है कि बुधवार से पहले तक जो दाग भाजपा नेताओं को बुरे लगते थे वे दाग क्या अब अच्छे हो गए हैं? क्या भाजपा की वाशिंग मशीन में वो दाग धुल गए हैं? जनता जनार्दन सब देख और समझ रही है, वह जब फैसला सुनाएगी, तो उसका दर्द पांच साल तक राजनेताओं को चैन से सोने नहीं देगा। कहते हैं वक्त की मार बड़ी बुरी होती है और इतिहास खुद को दोहराता है। एक आदिवासी नेता दीपक बैज के बढ़ते कदमों को रोकने के लिए बीते विधानसभा चुनाव में जो हठकंडे कांग्रेस के ही कुछ बड़े नेताओं के इशारे पर बस्तर संभाग के पूर्व मंत्री, दो विधायकों, एक पूर्व विधायक और निगम, प्राधिकरण के दो पदाधिकारियों ने अपनाए थे, उनके बारे में बस्तर की जनता अब अच्छे से जान चुकी है। और तो और दीपक बैज को दोबारा कांग्रेस से लोकसभा का टिकट न मिल पाए इसके लिए विरोधी गुट ने पूरी ताकत झोंक दी थी। इस लॉबी के झूठ फरेब के आगे कांग्रेस नेतृत्व नत मस्तक हो गया। अब उसी पुराने घटनाक्रम की पुनरावृति लोकसभा चुनाव में होने वाली है। फर्क इतना है कि इस घटनाक्रम का किरदार कोई कांग्रेस नेता नहीं, बल्कि आम मतदाता है। दीपक बैज के बारे में तो कहावत चल पड़ी है कि वे बुरा करने वालों को भी माफ करते हुए आगे बढ़ने और पार्टी की भलाई के लिए काम करने में विश्वास रखते हैं। आज वे पार्टी प्रत्याशी को जिताने के लिए तन मन से काम कर रहे हैं।
सफीरा गईं या भेजी गईं भाजपा में
महापौर सफीरा साहू के अचानक भाजपा प्रवेश से एक बड़ा सवाल यह भी उठ रहा है कि सफीरा साहू अपनी मर्जी से भाजपा में गई हैं, या फिर किसी बड़े कांग्रेस नेता के कहने पर? जगदलपुर के कांग्रेस नेताओं के बीच चर्चा है कि सफीरा साहू जब चारों ओर से घिर गईं, तब उन्होंने अपने बचाव के लिए पूर्व मुख्यमंत्री तथा कुछ अन्य बड़े कांग्रेस नेताओं से मदद मांगी, लेकिन सभी ने अपने हाथ खड़े कर दिए। उन्हें सुझाव दिया गया कि भाजपा की वाशिंग मशीन में जाकर ही आपके दामन के दाग धुल सकते हैं। इस तरह उन्हें भाजपा में जाने के लिए प्रेरित किया गया। इसका मतलब तो यही निकलता है कि खुद कांग्रेसियों ने ही सफीरा साहू को भाजपा में शामिल होने के लिए उकसाया था। पूरे पांच साल तक काला पीला करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता रहा, कांग्रेस सरकार की बदनामी का ध्यान नहीं रखा गया और ऐन लोकसभा चुनाव के बीच महापौर समेत पांच बड़े कांग्रेस नेताओं को भाजपा ज्वाइन करने की खुली छूट दे दी गई।
मेयर ने मौर्य पर फोड़ा ठीकरा
महापौर ने अपने भाजपा प्रवेश का ठीकरा शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष सुशील मौर्य पर फोड़ा है। अपने भाजपा प्रवेश के बाद पत्रकारों से चर्चा में सफीरा साहू ने कहा कि कांग्रेस में महिलाओं की कोई इज्जत नहीं है। जिला कांग्रेस कार्यालय में महिला कार्यकर्ताओं को सरेआम बेइज्जत किया जाता है। शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष का व्यवहार जरा भी शालीन नहीं है। सफीरा साहू ने कहा कि जब दो महिला नेत्रियों ने त्यागपत्र दिया तो कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने उन्हें समझाने की भी जरूरत नहीं समझी। साथ ही सफीरा साहू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष किरण देव के कामकाज की जमकर सराहना भी की और कहा कि इन नेताओं ने बिना भेदभाव किए शहर के विकास के लिए पर्याप्त धन राशि उपलब्ध कराई है। उन्होंने बताया कि विकसित भारत संकल्प के कार्यक्रमों में भाग लेने के दौरान ही मैंने भाजपा में जाने का मन बना लिया था।