सिरफिरों ने कर रखा है शहरवासियो की नाक में दम
अर्जुन झा
जगदलपुर नशीली गोलियों, कैप्सूल्स और गांजे की लत बस्तर के युवाओं को मनोरोगी बना रही है। नशेड़ी युवा उल जलूल हरकतें करते रहते हैं। जगदलपुर शहर में आजकल मानसिक रूप से अस्वस्थ लोगों की तादाद काफी बढ़ गई है।ऐसे लोगों को कोतवाली थाना तथा नगर पुलिस अधीक्षक कार्यालय के आसपास लगने वाली चाय और फल दुकानों के नजदीक अजीबो गरीब हरकतें करते देखा जा सकता है। इन लोगों ने संभ्रांत शहरवासियों की नाक में दम कर रखा है।
दरअसल सल्फी, ताड़ी और महुआ शराब पीकर मस्त लेकिन संयमित रहने वाले बस्तर के लोग अपना घरेलू कामकाज, खेती बाड़ी तथा वनोपज संग्रह में लीन रहा करते थे। सल्फी और ताड़ी पाचक एवं शरीर को शीतलता प्रदान करने वाले पेय माने जाते हैं। मगर अब कई बस्तरिहा युवा इन परंपरागत पेय पदार्थों से इतर जाकर आधुनिक नशा करने लगे हैं। वे नाइट्रोवेट-10 जैसी नशीली गोलियों, कैप्सूल्स, कफ सिरप, गांजा आदि का जमकर इस्तेमाल कर रहे हैं। नाइट्रोवेट-10 और अन्य नशीली गोलियां, सिरप तथा कैप्सूल मनो मस्तिष्क पर बेहद प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं। इनका असर ऐसा होता है कि नशापान करने वाला व्यक्ति अपने हाथों और चेहरों को ब्लेड, चाकू आदि से काटने लग जाता है। साथ ही वह पागलों जैसी हरकतें भी करने लगता है। इन चीजों का लगातार सेवन करने से व्यक्ति अंततः मनोरोगी और पूर्णतः पागल बन जाता है। बस्तर में नशीली दवाएं उपलब्ध कराने और इनका सेवन करने वालों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है।
यहां तक कि पड़ोसी राज्य ओडिशा से लाकर नशीली दवाएं बस्तर में खापाई जाती हैं। पुलिस ने ऐसे कई मामले पकड़े भी हैं। जगदलपुर शहर मनो विकृति वाले युवकों की संख्या में आश्चर्यजनक ढंग से वृद्धि देखने में आई है। ये लोग सड़कों, चौराहों और भीड़भाड़ वाले स्थानों पर पहुंच कर ऎसी ऎसी हरकतें करने लग जाते हैं कि आम नागरिक शर्मसार हो उठते हैं। नौकरीपेशा लोग, अखबारी पेशे से जुड़े लोग, कामकाजी महिलाएं जो रोज चाय दुकान में चाय लेने अथवा फल दूध खरीदने आती है इनकी हरकतों से काफी परेशान हैं। ये लोग हल्ला करने और जबरदस्ती पैसे मांगने जैसी हरकत तो करते ही हैं, जबरन छीना झपटी भी करने पर भी आमादा हो जाते हैं। लोगों ने मांग की है ऐसे लोगों को यहां से दूर विस्थापित किया जाए, ताकि स्त्री पुरुष अपनी रोजमर्रा की दिनचर्या निर्विघ्न पूरी कर सकें।






