तेलंगाना में रह रहे हैं बस्तर के लगभग 60 हजार आदिवासी
वर्षों बाद अपने नेता से मिलकर भावुक हो उठे विस्थापित ग्रामीण
जगदलपुर अपनी जमीन से वर्षों की दूरी, अनकही पीड़ा और अधूरी राह के बीच बीजापुर के विधायक विक्रम मंडावी शनिवार और रविवार को तेलंगाना के दो दिवसीय दौरे पर रहे। वे उन बस्तियों में पहुंचे, जहां छत्तीसगढ़ के बीजापुर, दंतेवाड़ा और सुकमा जिलों से विस्थापित होकर बसे आदिवासी परिवार आज भी अनेक समस्याओं को झेल रहे और समस्याओं के समाधान के लिए सहारा की राह देख रहे हैं? इन लोगों के लिए बीजापुर के विधायक उनके लिए नई उम्मीद बनकर तेलंगाना पहुंचे। दौरे के समापन पर विधायक ने कहा- “कई वर्षों बाद अपनों के बीच आया हूं। अपनों से मिलना भावुक पल था।

” यह एक वाक्य पूरे प्रवास की तस्वीर बन गया।विधायक विक्रम मंडावी तेलंगाना राज्य के वेंकटचेरुवू, कंदीपडू, चिन्नासमुद्रम, चेरला, क्रांतिपुरम, रामचंद्रपुरम, मांगवाया, वेंकटपुरम, योगिता नागरम, येटुरनगरम, भूपतपुरम, मांगपेटा, सलवा, मदुलगुडम, सुंदरनगर, उमेशचंद्र नागरम, मीरलापुरम, सरापका और भद्रचलम सहित उन गांवों और बस्तियों में गए, जहां बीजापुर, दंतेवाड़ा और सुकमा जिले से निकले 50-60 हजार आदिवासी परिवार 20 से 25 वर्षों से संघर्षमय जीवन यापन कर रहे हैं। विस्थापित हुए लोग जिन जगह पर रह रहे है वे वहां का स्थायी पट्टा और सरकार की समस्त योजनाओं और सुविधाओं का लाभ चाहते हैं, जो अब तक उन्हें नहीं मिल रहा है। अपने बच्चों के भविष्य की बात लेकर आए कई चेहरे नम हो गए। कईयों ने पहली बार खुलकर कहा कि उनकी आवाज अब तक किसी ने सुनी ही नहीं। विस्थापित आदिवासियीं ने विधायक विक्रम मंडावी को बताया कि वे तेलंगाना सरकार से पिछले 20 से 25 वर्षों से लगातार जमीन का पट्टा और सरकारी सुविधाएं मांग रहे हैं, लेकिन सरकार उन्हें अब तक कोई सहायता नहीं दे रही है। यही स्थिति पैतृक गांवों की है वहां रह रहे परिवारों को छत्तीसगढ़ की सरकार कोई भी सहायता नहीं दे रही है। इस अनिश्चितता का नतीजा यह हो रहा है कि परिवार बीच रास्ते में अटका हुआ है, एक ओर रोजी-रोटी की चिंता है, दूसरी ओर बच्चों की पढ़ाई और आने वाले कल की चिंता, पेट पालने और पैतृक जड़ों से जुड़ने के बीच यह द्वंद्व उनकी रोजमर्रा की जिंदगी बन चुका है।

उनकी इस स्थिति को समझने व समाधान की दिशा में पहल करने पहुंचे विधायक विक्रम मंडावी का गर्मजोशी से हुए स्वागत के बीच विस्थापित लोगों ने कहा कि विधायक विक्रम मंडावी से हुई मुलाकात से पहली बार लगा कि उनकी पीड़ा सुनी जा रही है। विधायक मंडावी की मौजूदगी को उन्होंने एक उम्मीद की नई किरण बताया। चर्चा में यह सहमति बनी कि समस्या व्यक्तिगत नहीं, सामूहिक है, इसलिए उसका हल भी सामूहिक रास्ते से निकलना चाहिए। विस्थापित आदिवासी अपना एक प्रतिनिधि मंडल गठित करेंगे। यह प्रतिनिधि मंडल तेलंगाना सरकार और छत्तीसगढ़ सरकार दोनों से बात करेगा, ताकि वे जमीन के पट्टा सहित अपने अन्य मांगों को तेलंगाना सरकार और छत्तीसगढ़ सरकार तक पहुंच सकें। विधायक विक्रम मंडावी ने कहा कि बीजापुर, दंतेवाड़ा और सुकमा ज़िलों के अंतर्गत आने वाले गांवों से लगभग 50 से 60 हजार आदिवासी तेलंगाना में विस्थापित हैं। इनकी तेलंगाना सरकार से मांग है कि उन्हें जमीन का स्थायी पट्टा और अन्य सरकारी सुविधाओं और योजनाओं का लाभ मिले। दौरा समाप्ति के बाद विस्थापित बस्तियों में एक बात बार-बार दोहराई जा रही है कि वर्षों बाद कोई अपना उनके बीच पहुंचा, उनकी बात सुनी, और उनकी मांगों को सरकारों के दरवाजे तक ले जाने का भरोसा दिलाया। अब नजर प्रतिनिधि मंडल के गठन और दोनों सरकारों से होने वाली चर्चा पर है।







