दल्लीराजहरा की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर “जुवारी नदी” को उसका खोया हुआ सम्मान दिलाने के लिए अब स्थानीय जनप्रतिनिधि और सामाजिक कार्यकर्ता सामने आने लगे हैं। भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता समर्थ लाखानी ने नगर पालिका परिषद, दल्लीराजहरा के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और मुख्य नगर पालिका अधिकारी को ज्ञापन सौंपते हुए इस पवित्र नदी की पहचान बहाल करने की मांग की है।
ज्ञापन में उन्होंने उल्लेख किया कि जुवारी नदी—जिसे ग्रामीण क्षेत्र में देवदहरा के नाम से भी जाना जाता है—का उल्लेख 1921 के ऐतिहासिक ग्रंथ “दुर्ग दर्पण” में भी मिलता है। वर्तमान में यह नदी अपनी सांस्कृतिक पहचान खो चुकी है और एक उपेक्षित नाले का रूप ले चुकी है।
प्रमुख मांगें:
1. नगर के प्रमुख स्थानों पर “जुवारी नदी” के नामपट लगाए जाएं, ताकि नागरिकों को इसकी ऐतिहासिक और धार्मिक महत्ता की जानकारी हो सके।
2. जनजागरण अभियान के माध्यम से लोगों को नदी के महत्व से अवगत कराया जाए।
3. नदी के उद्गम स्थल मां शीतला मंदिर परिसर स्थित प्राचीन जलकुंड को संरक्षित सांस्कृतिक स्थल के रूप में विकसित किया जाए। इसमें भव्य द्वार, जानकारी युक्त पट्टिका, स्वच्छता अभियान, बैठने की व्यवस्था और वृक्षारोपण का प्रस्ताव शामिल है।



