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30 सितंबर 2026राहुल गांधी को निर्वाचन आयोग और देश से भी माफी मांगनी चाहिए : संजय पाण्डेय

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जगदलपुर | जनता से बार-बार पराजित कांग्रेस अब संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठाकर लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने का प्रयास कर रही : महापौर जगदलपुरजगदलपुर। कांग्रेस नेता एवं लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता और चुनावी प्रक्रिया को लेकर लगाए जा रहे आरोपों पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए जगदलपुर महापौर संजय पाण्डेय ने कहा कि निर्वाचन आयोग के हालिया संयुक्त बयान ने SIR से जुड़े निर्णयों में आयोग के तीनों निर्वाचन आयुक्तों की सर्वसम्मति को स्पष्ट कर दिया है।

ऐसे में कांग्रेस द्वारा आयोग में कथित मतभेदों को लेकर किए जा रहे दावों पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। पाण्डेय ने कहा कि राजनीतिक असहमति लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर बिना पर्याप्त तथ्य के आरोप लगाना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए उचित नहीं है।उन्होंने कहा कि कांग्रेस को निर्वाचन आयोग से सवाल पूछने का पूरा अधिकार है, लेकिन सवाल तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर होने चाहिए। निर्वाचन आयोग के स्पष्टीकरण के बाद कांग्रेस नेतृत्व को अपने पूर्व दावों की समीक्षा करनी चाहिए और यदि उसके आरोप तथ्यहीन साबित होते हैं तो देश और संवैधानिक संस्थाओं से माफी मांगनी चाहिए।SIR पर सुप्रीम कोर्ट का निर्णय भी महत्वपूर्णमहापौर संजय पाण्डेय ने कहा कि 27 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने बिहार में SIR की वैधानिकता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर निर्णय देते हुए निर्वाचन आयोग के इस अभ्यास की वैधानिक शक्ति को स्वीकार किया था। न्यायालय ने SIR को स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के उद्देश्य से मतदाता सूची को अधिक सटीक और विश्वसनीय बनाने से जोड़ा।उन्होंने कहा कि—“जब देश की सर्वोच्च अदालत किसी प्रक्रिया की वैधानिकता पर निर्णय दे चुकी हो और निर्वाचन आयोग स्वयं अपने निर्णयों की प्रक्रिया को स्पष्ट कर चुका हो, तब राजनीतिक आरोपों को तथ्य और प्रमाण की कसौटी पर परखा जाना चाहिए।”चुनाव हारने पर संस्थाओं पर सवाल उठाना उचित नहींश्री पाण्डेय ने कहा कि चुनाव में हार या जीत लोकतंत्र की स्वाभाविक प्रक्रिया है। किसी राजनीतिक दल को चुनावी परिणामों से असहमति हो सकती है और वह कानूनी एवं संवैधानिक माध्यमों से सवाल उठा सकता है, लेकिन हर चुनाव के बाद EVM, निर्वाचन आयोग या अन्य संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठाना लोकतांत्रिक संस्थाओं में जनता के विश्वास को प्रभावित कर सकता है।उन्होंने कहा कि कांग्रेस सहित सभी राजनीतिक दलों के निर्वाचित जनप्रतिनिधि इसी संवैधानिक चुनावी व्यवस्था के माध्यम से सदन में पहुंचे हैं। इसलिए व्यवस्था में कमियों की शिकायत हो तो उसका समाधान संवैधानिक और कानूनी प्रक्रिया के भीतर किया जाना चाहिए।“लोकतंत्र में आरोप नहीं, प्रमाण महत्वपूर्ण हैं”महापौर ने कहा—“लोकतंत्र केवल चुनाव जीतने का नाम नहीं है। लोकतंत्र का आधार है—मतदाता का विश्वास, निष्पक्ष प्रक्रिया और संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान। राजनीतिक दलों को अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है, लेकिन देश की संस्थाओं पर लगाए गए प्रत्येक आरोप के साथ ठोस तथ्य और प्रमाण भी होने चाहिए।”उन्होंने कहा कि कांग्रेस को चाहिए कि वह राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से ऊपर उठकर निर्वाचन आयोग के स्पष्टीकरण और न्यायालय के निर्णयों को गंभीरता से देखे।संजय पाण्डेय ने कहा कि राहुल गांधी और कांग्रेस नेतृत्व को देश की जनता के सामने यह स्पष्ट करना चाहिए कि उनके द्वारा लगाए गए आरोपों के पीछे ठोस प्रमाण क्या हैं। यदि आरोप प्रमाणित नहीं होते हैं, तो उन्हें निर्वाचन आयोग तथा देश से माफी मांगनी चाहिए।उन्होंने कहा कि—“देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था किसी एक दल की नहीं, 140 करोड़ देशवासियों की व्यवस्था है। सत्ता पक्ष हो या विपक्ष—सभी की जिम्मेदारी है कि संविधान, चुनाव प्रक्रिया और संवैधानिक संस्थाओं के प्रति जनता का विश्वास मजबूत करें।”

दीपक बैज ने पेश की स्वच्छ राजनीति की मिसाल

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प्रदेश भाजपा अध्यक्ष किरण देव से मिलने पहुंचे प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष

जगदलपुर राजनीति अपनी जगह और इंसानियत अपनी जगह। सियासत में विचारधाराएं भले ही मेल नहीं खातीं, मगर भावनाओं का अपना अलग स्थान है। राजनीति संबंध खराब करती है और भावनाएं संबंधों को मजबूत बनाती हैं। आज ऐसा ही पुरसुकून नजारा प्रदेश भाजपा अध्यक्ष किरण सिंह देव के निवास में तब देखने को मिला, जब उनसे मिलने और उनका कुशलक्षेम जानने के लिए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज पहुंचे। छत्तीसगढ़ की राजनीति के दोनों शीर्ष नेताओं की आत्मीय मुलाकात से वातावरण सौहाद्रपूर्ण नजर आया। पीसीसी अध्यक्ष दीपक बैज को लेकर सभी जानते हैं कि वे उच्च शिक्षित आदिवासी युवा नेता हैं।

बैज अपने धुर राजनीतिक विरोधियों का भी हमेशा सम्मान करते हैं। उनका व्यवहार विरोधी नेताओं का भी दिल जीत लेता है। बस्तर संभाग से जुड़े दो प्रमुख दल भाजपा और कांग्रेस के अध्यक्षों की इस मुलाकात से ऐसे लोगों को नसीहत मिलेगी, जो राजनीति के खेल में अंधे होकर मर्यादा की सारी हदें पार कर जाते हैं, खासकर उन अंधभक्तों और चमचों को जो मर्यादा की सीमा रेखा लांघ कर अक्सर एक दूसरे पर कीचड़ उछालते नजर आते हैं। दीपक बैज ने पहुंचते ही दुआ सलाम के बाद किरण सिंह देव के स्वास्थ्य की जानकारी ली और उनके जल्द पूर्णतः स्वस्थ होने की कामना की। इस दौरान प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी संगठन महामंत्री मलकीत सिंह गैदू, सत्तार अली एवं महामंत्री सकलेन कामदार भी मौजूद थे।

सरपंच संतोष कश्यप ने ली बाढ़ प्रभावित गुमड़ेल और कुरूषपाल के ग्रामीणों की सुध

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पीड़ित परिवारों का जाना हालचाल

बकावंड सरपंच संघ बकावंड के सचिव एवं ग्राम पंचायत छोटे देवड़ा के सरपंच संतोष कुमार कश्यप ने बाढ़ प्रभावित ग्राम गुमड़ेल एवं कुरूषपाल का भ्रमण कर प्रभावित परिवारों से मुलाकात की तथा उनकी स्थिति का जायजा लिया। भ्रमण के दौरान सरपंच संतोष कुमार कश्यप ने देखा कि बाढ़ का पानी उतर जाने के बावजूद अनेक परिवार अभी भी कठिन परिस्थितियों से गुजर रहे हैं। कई घर क्षतिग्रस्त हो चुके हैं तथा घरों में नमी और कीचड़ बने रहने के कारण लोगों को रहने, बैठने और सोने में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। विशेष रूप से बच्चों, महिलाओं एवं बुजुर्गों को काफी कठिनाइयां झेलनी पड़ रही हैं। संतोष कुमार कश्यप ने प्रभावित परिवारों से चर्चा कर उनकी समस्याओं को सुना तथा कहा कि इस कठिन समय में समाज के सभी लोगों को एकजुट होकर प्रभावित परिवारों के साथ खड़ा होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि जनसेवा केवल एक दायित्व नहीं बल्कि मानवता की सेवा का माध्यम है, और संकट की इस घड़ी में पीड़ित परिवारों का सहयोग करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।उन्होंने ग्रामीणों का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि ऐसी विषम परिस्थितियों में पूरा समाज प्रभावित परिवारों के साथ खड़ा है तथा सभी के सहयोग और सहभागिता से लोग इस संकट से उबर सकेंगे।भ्रमण के दौरान ग्रामीणों ने बाढ़ से हुए नुकसान एवं अपनी समस्याओं से अवगत कराया। इस अवसर पर स्थानीय ग्रामीण एवं जनप्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।

राष्ट्रपति का मुरिया दरबार में आगमन बस्तर के लिए गौरव का क्षण : महेश कश्यपकेंद्र गृह मंत्री अमित शाह के बाद अब राष्ट्रपति का मुरिया दरबार में आगमन,बस्तर के लिए गौरव का अवसर : महेश कश्यप

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जगदलपुर। बस्तर दशहरा के अवसर पर 23 अक्टूबर 2026 को जगदलपुर में आयोजित होने वाले मुरिया दरबार में राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु को आमंत्रित किया गया है। राष्ट्रपति ने आमंत्रण पर जरूर प्रयास करेंगी कहते हुए अपनी सहमति व्यक्त की है। बस्तर लोकसभा सांसद महेश कश्यप ने महामहिम राष्ट्रपति के आगमन को बस्तरवासियों के लिए गौरव का अवसर बताया है।नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय का निमंत्रण पत्र राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु को सौंपा गया। इस अवसर पर केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू, छत्तीसगढ़ संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल तथा संस्कृति एवं पर्यटन विभाग के सचिव डॉ. एस. भारतीदासन उपस्थित रहे।श्री कश्यप ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के आमंत्रण को राष्ट्रपति द्वारा स्वीकार किया जाना बस्तर की समृद्ध जनजातीय संस्कृति और परंपराओं के लिए गौरव की बात है। पिछले वर्ष इसी मुरिया दरबार में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की गरिमामयी उपस्थिति रही थी। अब राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का आगमन इस ऐतिहासिक परंपरा को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान देने वाला अवसर है। उन्होंने कहा कि मां दंतेश्वरी को समर्पित बस्तर दशहरा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं,बल्कि बस्तर की जनजातीय आस्था,सामाजिक परंपराओं का जीवंत प्रतीक है। मुरिया दरबार इस विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है।सांसद ने कहा कि राष्ट्रपति की उपस्थिति से बस्तर की लोक परंपराओं और जनजातीय विरासत को देशभर में पहचान मिलेगी तथा बस्तर की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान को नई ऊंचाई मिलेगी।

बाढ़ की विभीषिका से रूबरू हुए पूर्व विधायक

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बाढ़ प्रभावित गावों में पहुंचकर हालात का लिया जायजा

शासन से प्रभावित परिवारों को आवास देने, ऋण माफ़ी की मांग की

जगदलपुर. पूर्व विधायक व संसदीय सचिव रेखचंद जैन बाढ़ की विभीषिका से रूबरू होते प्रभावित गावों में पहुंचकर हालात का जायजा लिया. उन्होंने शासन से प्रभावित परिवारों को आवास देने, ऋण माफ़ी आदि की मांग की है. मंगलवार को बाढ़ प्रभावित गांव नदी बोड़ना, भेजापदर व रामपाल अपने सहयोगियों के साथ पहुंचे पूर्व विधायक रेखचंद जैन ने हालात का जायजा लिया।

उन्होंने ग्रामीणों को राहत सामग्री प्रदान की. उन्होंने शासन- प्रशासन से मांग भी की. इस दौरान उनके साथ हेमू उपाध्याय, सुरेंद्र झा, गौरनाथ नाग, लैखन बघेल, बुधसन नाग, घनश्याम महापात्र आदि मौजूद थे. *यह रही मांगे*पूर्व विधायक रेखचंद जैन ने कहा कि कांग्रेस इस वक़्त प्रभावित परिवारों के साथ खड़ी है. उन्होंने शासन से मांग की है कि प्रभावित परिवारों को तत्काल आवास योजना का लाभ देते आवास उपलब्ध कराया जाए. साथ ही ऋण माफ किया जाए और खेती – किसानी के समस्त लाभ व सुविधाएं प्रदान की जाएं ताकि प्रभावित परिवारों का जीविकोपार्जन हो सके. नुकसान की भरपाई के लिए सर्वेक्षण और शासन द्वारा निर्धारित रकम का वितरण जल्द से जल्द करने की मांग भी पूर्व विधायक ने की है.

अनुसूचित क्षेत्रों के शिक्षकों को 10 दिन का अतिरिक्त अर्जित अवकाश

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बस्तर के शिक्षकों में छाई खुशी की लहर

जगदलपुर छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन की मांग पर सहमति जताते हुए बस्तर जिला प्रशासन एवं जिला शिक्षा अधिकारी ने अनुसूचित क्षेत्र के शिक्षकों को दस दिन का अतिरिक्त अर्जित अवकाश देने का फैसला किया है। इस संबंध में जिला शिक्षा अधिकारी ने आदेश भी जारी कर दिया है। बस्तर कलेक्टर आकाश छिकारा एवं जिला शिक्षा अधिकारी बीआर बघेल की इस त्वरित और न्यायसंगत कार्रवाई के लिए टीचर्स एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने कलेक्टर छिकारा एवं डीईओ बघेल के प्रति आभार व्यक्त किया है।

इस आदेश से बस्तर जिले के हजारों शिक्षकों और कर्मचारियों में खुशी की लहर है। आदेश जारी करने पर छग टीचर्स एसोसिएशन के संभागीय अध्यक्ष प्रवीण श्रीवास्तव, जिला अध्यक्ष डॉ. लुदरसन कश्यप, जिला सचिव मोहम्मद ताहिर शेख, जिला कोषाध्यक्ष अमित पाल, मनीष अहीर, जिला प्रवक्ता तुलादास मानिकपुरी, प्रदेश आईटी सेल नीलमणी साहू, जिला संगठन मंत्री ओमप्रकाश पटेल, जिला पदाधिकारी एवं सदस्य राजेश देशमुख, सितेंद्र कुमार साहू, डोमेश्वर सिँह साहू अन्य पदाधिकारियों ने डीईओ श्री बघेल को बधाई दी।

अतिवृष्टि और बाढ़ के बाद बस्तर में तबाही का मंजर

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गिरे मकान, फसलें हो गईं तबाह घर, संकट में ग्रामीण और किसान

अर्जुन झा-

जगदलपुर बस्तर में अतिवृष्टि और बाढ़ ने जमकर तबाही मचाई है। बारिश थमने और बाढ़ का पानी उतारने के बाद तरफ तबाही का मंजर नजर आ रहा है। बस्तर और बकावंड विकासखंडों में मकानों तथा धान की खड़ी फसलों को बहुत ज्यादा नुकसान हुआ है। बस्तर विकासखंड के मधोता, खैरगुड़ा, भैंसगांव, बोदरा, टिकनपाल, उसरी और सोनारपाल सहित कई गांवों में लगातार बारिश और बाढ़ से किसानों की परेशानी बढ़ गई है। कई स्थानों पर घरों में पानी घुसने से मकानों को नुकसान पहुंचा है, वहीं खेतों में खड़ी धान की फसल लंबे समय तक पानी में डूबे रहने के कारण अब सड़ने और सूखने लगी है। कई एकड़ फसल प्रभावित होने की स्थिति सामने आ रही है।

किसानों का कहना है कि धान की खेती में खाद, बीज, दवा और मजदूरी पर काफी खर्च किया गया है। कई किसानों ने खेती के लिए ऋण भी लिया है। ऐसे में फसल खराब होने से उन्हें कर्ज चुकाने और परिवार का खर्च चलाने की चिंता सताने लगी है। पानी उतरने के बाद खेतों में धान के पौधों की जड़ों में सड़न दिखाई दे रही है, जिससे नुकसान बढ़ने की आशंका है। बाढ़ प्रभावित किसानों में कुछ ने प्रधानमंत्री फसल बीमा कराया है, लेकिन बीमा दावा करने की प्रक्रिया और नुकसान की सूचना देने संबंधी जानकारी कई किसानों को स्पष्ट नहीं है। वहीं जिन किसानों ने फसल का बीमा नहीं कराया है, वे प्राकृतिक आपदा से फसल नुकसान पर शासन से मिलने वाली राहत को लेकर जानकारी चाहते हैं। किसानों की मांग है कि प्रशासन प्रभावित गांवों में मकान और फसल नुकसान का मौके पर सर्वे कराए और वास्तविक क्षति दर्ज करे। साथ ही बीमित किसानों को दावा प्रक्रिया की जानकारी तथा बिना बीमा वाले पात्र किसानों को प्राकृतिक आपदा राहत के प्रावधानों की जानकारी दी जाए। किसानों का कहना है कि समय पर सर्वे और राहत प्रक्रिया शुरू होने से ही बाढ़ से हुए नुकसान की भरपाई में उन्हें सहायता मिल सकेगी।

सर्व आदिवासी समाज और अधिकारी-कर्मचारी प्रभाग ने बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए बढ़ाए हाथ

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भेजापदर और बैलगांव में बांटी राहत सामग्री

जगदलपुर सर्व आदिवासी समाज बस्तर संभाग एवं अधिकारी- कर्मचारी प्रभाग के संयुक्त तत्वावधान व संभागीय कार्यकारिणी के नेतृत्व में सामाजिक सरोकार और मानवता की मिसाल पेश करते हुए बस्तर जिले के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में व्यापक राहत वितरण अभियान सफलतापूर्वक चलाया गया। सर्व आदिवासी समाज बस्तर संभाग के संभागीय अध्यक्ष प्रकाश ठाकुर एवं अधिकारी कर्मचारी प्रभाग की संभागीय कार्यकारिणी के नेतृत्व में समाज की टीम ने बाढ़ प्रभावित ग्राम भेजापदर एवं बेलगांव में स्थिति का जायजा लिया और जरूरतमंद पीड़ित परिवारों के बीच 400 नग कंबल एवं 100 नग ग्रीन चटाई का वितरण किया।राहत सामग्री वितरण के दौरान प्रभाग व समाज के पदाधिकारियों ने प्रभावित ग्रामीण परिवारों से संवाद कर उनका हालचाल जाना, उनकी तात्कालिक आवश्यकताओं को समझा और उन्हें ढांढस बंधाया।

इस अवसर पर पदाधिकारियों ने कहा कि मानवता और सेवा ही हमारा परम धर्म है। आपदा और विपरीत परिस्थितियों में समाज के जरूरतमंद लोगों के साथ खड़े होना हमारी सामाजिक जिम्मेदारी है। सर्व आदिवासी समाज भविष्य में भी जरूरत के मुताबिक पीड़ित एवं प्रभावित परिवारों की सहायता के लिए हरसंभव प्रयास करता रहेगा। राहत सामग्री प्राप्त होने पर प्रभावित ग्रामीणों ने सर्व आदिवासी समाज एवं अधिकारी-कर्मचारी प्रभाग की संवेदनशील पहल के प्रति आभार व्यक्त किया। इस राहत कार्य में सर्व आदिवासी समाज बस्तर संभाग के पदाधिकारियों, अधिकारी-कर्मचारियों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं की सक्रिय सहभागिता रही। अभियान में प्रमुख रूप से प्रकाश ठाकुर संभागीय अध्यक्ष, सर्व आदिवासी समाज बस्तर संभाग, गंगाराम नाग जिला अध्यक्ष सर्व आदिवासी समाज बस्तर जिला पप्पूराम नाग कोषाध्यक्ष, बसंत कश्यप अध्यक्ष युवा प्रभाग सर्व आदिवासी समाज, माखन लाल सोरी सलाहकार, संभागीय कर्मचारी अधिकारी प्रभाग, स्थानीय ग्रामीण, बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

सरपंच संतोष कश्यप ने ली बाढ़ प्रभावित गुमड़ेल और कुरूषपाल के ग्रामीणों की सुध

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पीड़ित परिवारों का जाना हालचाल

बकावंड सरपंच संघ बकावंड के सचिव एवं ग्राम पंचायत छोटे देवड़ा के सरपंच संतोष कुमार कश्यप ने बाढ़ प्रभावित ग्राम गुमड़ेल एवं कुरूषपाल का भ्रमण कर प्रभावित परिवारों से मुलाकात की तथा उनकी स्थिति का जायजा लिया। भ्रमण के दौरान सरपंच संतोष कुमार कश्यप ने देखा कि बाढ़ का पानी उतर जाने के बावजूद अनेक परिवार अभी भी कठिन परिस्थितियों से गुजर रहे हैं। कई घर क्षतिग्रस्त हो चुके हैं तथा घरों में नमी और कीचड़ बने रहने के कारण लोगों को रहने, बैठने और सोने में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। विशेष रूप से बच्चों, महिलाओं एवं बुजुर्गों को काफी कठिनाइयां झेलनी पड़ रही हैं। संतोष कुमार कश्यप ने प्रभावित परिवारों से चर्चा कर उनकी समस्याओं को सुना तथा कहा कि इस कठिन समय में समाज के सभी लोगों को एकजुट होकर प्रभावित परिवारों के साथ खड़ा होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि जनसेवा केवल एक दायित्व नहीं बल्कि मानवता की सेवा का माध्यम है, और संकट की इस घड़ी में पीड़ित परिवारों का सहयोग करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।उन्होंने ग्रामीणों का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि ऐसी विषम परिस्थितियों में पूरा समाज प्रभावित परिवारों के साथ खड़ा है तथा सभी के सहयोग और सहभागिता से लोग इस संकट से उबर सकेंगे।भ्रमण के दौरान ग्रामीणों ने बाढ़ से हुए नुकसान एवं अपनी समस्याओं से अवगत कराया। इस अवसर पर स्थानीय ग्रामीण एवं जनप्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।

सरपंच-सचिव की लापरवाही ले डूबी बस्ती को

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जैतीगिरि में जलभराव, डूब गया पूरा मोहल्ला

जल निकासी के लिए ग्रामीणों ने अपने खर्च पर बुलाई जेसीबी

बकावंड सरपंच और सचिव की लापरवाही ने पूरी बस्ती को बड़ी परेशानी में डाल दिया है।लगातार बरसात और जल निकासी की व्यवस्था न होने के कारण बस्ती जलमग्न हो गई। मुसीबत में फंसे ग्रामीणों को राहत पहुंचाने जब सरपंच और सचिव ने कोई पहल नहीं की तो, परेशान ग्रामीणों ने अपनी जंग खुद लड़ने का फैसला कर लिया। ग्रामीणों ने अपने खर्चे पर जेसीबी बुलाकर जल निकासी की व्यवस्था कराई।

मामला विकासखंड बकावंड अंतर्गत ग्राम पंचायत जैतीगिरि का है। यहां बारिश के कारण एक मोहल्ला पूरी तरह जलमग्न हो गया है, जिससे ग्रामीणों का निकलना मुश्किल हो गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार सूचना देने के बाद भी सरपंच, सचिव और पंच मौके पर नहीं पहुंचे। सरपंच अपने निजी काम में व्यस्त रहे और मोहल्ले की सुध लेने तक की जरूरत उन्होंने नहीं समझी। परेशान होकर ग्रामीणों ने जनपद पंचायत बकावंड की अध्यक्ष सोनबारी भद्रे से संपर्क कर समस्या बताई। अध्यक्ष ने शाम तक गांव का दौरा कर लापरवाह सरपंच-सचिव को फटकार लगाने का आश्वासन दिया और मुआवजा दिलाने की बात कही है। जब कोई अधिकारी नहीं पहुंचा तो ग्रामीणों ने खुद चंदा इकट्ठा कर जेसीबी मशीन बुलाई और नाली की सफाई कर पानी की निकासी कराई।

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