बकावंड सरपंच संघ बकावंड के सचिव एवं ग्राम पंचायत छोटे देवड़ा के सरपंच संतोष कुमार कश्यप ने बाढ़ प्रभावित ग्राम गुमड़ेल एवं कुरूषपाल का भ्रमण कर प्रभावित परिवारों से मुलाकात की तथा उनकी स्थिति का जायजा लिया। भ्रमण के दौरान सरपंच संतोष कुमार कश्यप ने देखा कि बाढ़ का पानी उतर जाने के बावजूद अनेक परिवार अभी भी कठिन परिस्थितियों से गुजर रहे हैं। कई घर क्षतिग्रस्त हो चुके हैं तथा घरों में नमी और कीचड़ बने रहने के कारण लोगों को रहने, बैठने और सोने में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। विशेष रूप से बच्चों, महिलाओं एवं बुजुर्गों को काफी कठिनाइयां झेलनी पड़ रही हैं। संतोष कुमार कश्यप ने प्रभावित परिवारों से चर्चा कर उनकी समस्याओं को सुना तथा कहा कि इस कठिन समय में समाज के सभी लोगों को एकजुट होकर प्रभावित परिवारों के साथ खड़ा होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि जनसेवा केवल एक दायित्व नहीं बल्कि मानवता की सेवा का माध्यम है, और संकट की इस घड़ी में पीड़ित परिवारों का सहयोग करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।उन्होंने ग्रामीणों का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि ऐसी विषम परिस्थितियों में पूरा समाज प्रभावित परिवारों के साथ खड़ा है तथा सभी के सहयोग और सहभागिता से लोग इस संकट से उबर सकेंगे।भ्रमण के दौरान ग्रामीणों ने बाढ़ से हुए नुकसान एवं अपनी समस्याओं से अवगत कराया। इस अवसर पर स्थानीय ग्रामीण एवं जनप्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।
जल निकासी के लिए ग्रामीणों ने अपने खर्च पर बुलाई जेसीबी
बकावंड सरपंच और सचिव की लापरवाही ने पूरी बस्ती को बड़ी परेशानी में डाल दिया है।लगातार बरसात और जल निकासी की व्यवस्था न होने के कारण बस्ती जलमग्न हो गई। मुसीबत में फंसे ग्रामीणों को राहत पहुंचाने जब सरपंच और सचिव ने कोई पहल नहीं की तो, परेशान ग्रामीणों ने अपनी जंग खुद लड़ने का फैसला कर लिया। ग्रामीणों ने अपने खर्चे पर जेसीबी बुलाकर जल निकासी की व्यवस्था कराई।
मामला विकासखंड बकावंड अंतर्गत ग्राम पंचायत जैतीगिरि का है। यहां बारिश के कारण एक मोहल्ला पूरी तरह जलमग्न हो गया है, जिससे ग्रामीणों का निकलना मुश्किल हो गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार सूचना देने के बाद भी सरपंच, सचिव और पंच मौके पर नहीं पहुंचे। सरपंच अपने निजी काम में व्यस्त रहे और मोहल्ले की सुध लेने तक की जरूरत उन्होंने नहीं समझी। परेशान होकर ग्रामीणों ने जनपद पंचायत बकावंड की अध्यक्ष सोनबारी भद्रे से संपर्क कर समस्या बताई। अध्यक्ष ने शाम तक गांव का दौरा कर लापरवाह सरपंच-सचिव को फटकार लगाने का आश्वासन दिया और मुआवजा दिलाने की बात कही है। जब कोई अधिकारी नहीं पहुंचा तो ग्रामीणों ने खुद चंदा इकट्ठा कर जेसीबी मशीन बुलाई और नाली की सफाई कर पानी की निकासी कराई।
कुंरदी के सुलियागुड़ा में रीति रिवाज के साथ हुई सनातन धर्म में वापसी
अपनी जड़ों से पुनः जुड़ना स्वागत योग्य कदम: धनुर्जय बघेल
जगदलपुर विकासखंड जगदलपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत कुंरदी के सुलियागुड़ा पारा में कचरा पाटी परगना माहरा समाज के नेतृत्व में एक परिवार के छह सदस्यों ने बाइस वर्षों से अपना रखे ईसाई धर्म को छोड़कर पुनः अपनी पारंपरिक संस्कृति,रीति रिवाज और सामाजिक परंपराओं से पुनः जुड़ने की इच्छा के साथ सनातन धर्म अपनाया। गांव के पारंपरिक रीति रिवाज एवं विधि विधान के अनुसार नाइक,पाइक एवं माहरा समाज के समाज प्रमुखों तथा ग्रामीणों की उपस्थिति में रुक्मणी कश्यप, बुदरी कश्यप, बाबूलाल कश्यप, राजमनी कश्यप, राममूर्ति कश्यप एवं अमन कश्यप ने फिर से सनातन धर्म स्वीकार कर लिया।इस अवसर पर समाज के धनुर्जय बघेल ने कहा कि बाइस वर्षों बाद परिवार का अपनी मूल सनातन परंपरा और संस्कृति से पुनः जुड़ना स्वागतयोग्य है। यह परिवार का स्वेच्छा से लिया गया निर्णय है। समाज उनकी परंपरा और सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने की भावना का सम्मान करता है। कार्यक्रम में कचरा पाटी परगना माहरा समाज अध्यक्ष धनुर्जय बघेल एवं संरक्षक प्रेम चालकी, नाइक पाइक सहित समाज प्रमुख और ग्रामीण उपस्थित रहे।
जगदलपुर। बाढ़ की गंभीर स्थिति के बीच राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) इकाई, शासकीय काकतीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय जगदलपुर के स्वयंसेवकों ने राहत एवं सेवा कार्य में सक्रिय भागीदारी निभाई।NSS स्वयंसेवक भुवनेश्वर कश्यप के नेतृत्व में स्वयंसेवक भीमसिंह मंडावी एवं सुखदेव के साथ बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचकर करीब 2000 बाढ़ पीड़ित लोगों तक राहत सामग्री पहुंचाई गई।इस दौरान प्रभावित लोगों को भोजन, कैंडल, बिस्किट सहित आवश्यक राहत सामग्री वितरित की गई। स्वयंसेवकों ने बाढ़ प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर उनकी समस्याओं और जरूरतों को जाना तथा हर संभव सहयोग का भरोसा दिलाया।भुवनेश्वर कश्यप ने कहा कि आपदा की घड़ी में जरूरतमंद लोगों के साथ खड़ा होना ही सच्ची मानव सेवा है। राष्ट्रीय सेवा योजना का उद्देश्य भी समाज के जरूरतमंद लोगों की सहायता करते हुए सेवा और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करना है।इस राहत कार्य में भीमसिंह मंडावी एवं सुखदेव ने सक्रिय रूप से सहयोग करते हुए बाढ़ पीड़ितों तक राहत सामग्री पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
नवा रायपुर, 29 सितंबर 2026। छत्तीसगढ़ शासन के सामान्य प्रशासन विभाग ने राज्य प्रशासनिक सेवा के 125 अधिकारियों के स्थानांतरण एवं नवीन पदस्थापना का आदेश जारी किया है। आदेश के अनुसार अधिकारियों को प्रशासनिक आधार पर स्थानांतरित करते हुए आगामी आदेश तक नवीन पदस्थापना दी गई है।जारी सूची में अपर कलेक्टर, संयुक्त कलेक्टर और डिप्टी कलेक्टर स्तर के अधिकारियों के पदस्थापना स्थल में बदलाव किया गया है। बालोद जिले से भी कई अधिकारियों का तबादला हुआ है
। अपर कलेक्टर चंद्रकांत कौशिक को बालोद से सारंगढ़-बिलाईगढ़ का अपर कलेक्टर बनाया गया है। वहीं अपर कलेक्टर गिरधारी लाल यादव को मुंगेली से बालोद पदस्थ किया गया है।इसके अलावा आदेश में डिप्टी कलेक्टर स्तर के अधिकारियों के भी विभिन्न जिलों में स्थानांतरण किए गए हैं। प्रेमूलाल साहू, जो दुर्ग में डिप्टी कलेक्टर थे, को राज्य निर्वाचन आयोग, नवा रायपुर में अवर सचिव पद पर पदस्थ किया गया है। वहीं गोविंद कुमार सिन्हा, डिप्टी कलेक्टर नारायणपुर, को छत्तीसगढ़ राज्य वक्फ बोर्ड, रायपुर में मुख्य कार्यपालन अधिकारी की जिम्मेदारी दी गई है।सामान्य प्रशासन विभाग ने संबंधित अधिकारियों को नवीन पदस्थापना में कार्यभार ग्रहण कर पालन प्रतिवेदन तत्काल विभाग को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। आदेश 29 सितंबर 2026 को जारी किया गया है।
भानपुरी l क्षेत्र में लगातार हुई मूसलाधार बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर के कारण उत्पन्न हुई बाढ़ व जलभराव की स्थिति का जायजा लेने के लिए पूर्व विधायक श्री चंदन कश्यप ने कांग्रेस पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के साथ बाढ़ प्रभावित गांवों का सघन दौरा किया। इस दौरान उन्होंने ग्राम घोटिया, नारायणपाल, राजपुर, सरगीगुड़ा, कोहका सिवनी और पालाबहार पहुंचकर सीधे बाढ़ पीड़ित ग्रामीणों, किसानों और माता-बहनों से मुलाकात किया तथा उनका हाल-चाल जाना।राशन की समस्या पर तत्काल एक्शन: ग्राम कोहका सिवनी में मुलाकात के दौरान माता-बहनों ने राशन नहीं मिलने की गंभीर समस्या पूर्व विधायक को बताई।
उनकी पीड़ा को गंभीरता से लेते हुए कश्यप ने मौके से ही उच्च अधिकारियों से दूरभाष पर चर्चा की और प्रभावित क्षेत्र में तत्काल राशन उपलब्ध कराने के सख्त निर्देश दिए।साथ ही गांवों में पहुंचकर घरों में पानी भरने, रोजमर्रा की बाधाओं और खेतों में पानी भरने से किसानों की बर्बाद हुई फसलों का बारीकी से निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि जिस फसल के लिए किसान ने महीनों मेहनत की, पूंजी लगाई और उम्मीदें जोड़ीं, आज उसके नुकसान से किसान गहरी चिंता और आर्थिक संकट में है।और श्री कश्यप ने राज्य सरकार और प्रशासन से पुरजोर मांग की है कि बाढ़ उतरते ही तुरंत सर्वे करवाया जाए। बाढ़ और जलभराव से प्रभावित किसानों को फसल नुकसान के आधार पर उचित मुआवजे के साथ-साथ कम से कम ₹50,000 की तत्काल राहत राशि दी जाए, ताकि संकट की इस घड़ी में उन्हें आर्थिक संबल मिल सके।”किसान की फसल का नुकसान केवल खेत का नुकसान नहीं, बल्कि उसके पूरे परिवार की आजीविका पर आघात है।
ऐसे कठिन समय में सरकार और प्रशासन को संवेदनशीलता के साथ आगे आकर किसानों का हाथ थामना चाहिए।” ब्लॉक कांग्रेस कमेटी भानपुरी के अध्यक्ष धनुर्जय नेताम ने भी कहा कि राहत केवल औपचारिकता नहीं होनी चाहिए, बल्कि किसानों की वास्तविक जरूरत के अनुरूप समय पर मिलनी चाहिए।इस दौरान ब्लॉक कांग्रेस कमेटी भानपुरी के अध्यक्ष धनुर्जय नेताम, निलय कश्यप (नानु), जीवन सेठिया, मोसूराम बघेल, सुखराम बघेल, सत्यकान्त कश्यप, सोनधर दिवान, छोटू चौबे, प्रमोद मौर्य, त्रिलोक कश्यप, चिंगडु कश्यप सहित बड़ी संख्या में स्थानीय कांग्रेस कार्यकर्ता और ग्रामीण उपस्थित रहे, जिन्होंने अपनी समस्याएं पूर्व विधायक के समक्ष रखीं।
खैरगुड़ा में 51 और मुंडकटिया में 16 लोगों ने दी परीक्षा-महिलाओं की
जगदलपुर नवभारत उल्लास साक्षरता महापरीक्षा का आयोजन प्राथमिक शाला खैरगुड़ा एवं पूर्व माध्यमिक शाला मुंडकटिया में संपन्न हुआ। दोनों परीक्षा केंद्रों में नवसाक्षरों ने उत्साह के साथ परीक्षा में हिस्सा लिया। प्राथमिक शाला खैरगुड़ा में 51 परीक्षार्थियों, जबकि पूर्व माध्यमिक शाला मुंडकटिया में 16 परीक्षार्थियों ने परीक्षा दी।
खैरगुड़ा परीक्षा केंद्र की खास बात यह रही कि यहां पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं की अधिक भागीदारी रही। बड़ी संख्या में महिलाएं परीक्षा केंद्र पहुंचीं और उत्साह के साथ परीक्षा में शामिल हुईं। ग्रामीण क्षेत्र में महिलाओं की यह सहभागिता साक्षरता के प्रति बढ़ती जागरूकता को दर्शाती है। उल्लास महापरीक्षा के माध्यम से ऐसे नवसाक्षरों को अपनी पढ़ने-लिखने की क्षमता परखने का अवसर मिला, जिन्होंने साक्षरता कार्यक्रम के तहत बुनियादी शिक्षा हासिल की है। परीक्षा केंद्रों पर निर्धारित व्यवस्था के साथ परीक्षा कराई गई तथा परीक्षार्थियों को आवश्यक मार्गदर्शन भी दिया गया।खैरगुड़ा परीक्षा केंद्र में नोडल अधिकारी हरदेव बघेल, केंद्राध्यक्ष छन्नूराम मंडावी एवं सह केंद्राध्यक्ष चिंगड़ूराम कश्यप थे। वहीं मुंडकटिया परीक्षा केंद्र में नोडल कृष्णा सिंह ठाकुर, केंद्राध्यक्ष लोकेश्वर यदु एवं सह केंद्राध्यक्ष राजेंद्र सिंह ने परीक्षा व्यवस्था की कमान संभाली।ग्रामीण क्षेत्रों में उल्लास महापरीक्षा के आयोजन से नवसाक्षरों में शिक्षा के प्रति उत्साह देखने को मिला। खासकर खैरगुड़ा में महिलाओं की अधिक भागीदारी ने साक्षरता अभियान में उनकी सक्रिय भूमिका को सामने रखा।
जगदलपुर। बस्तर जिले में इंद्रावती नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी के कारण आए बाढ़ से प्रभावित लोगों की मदद के लिए छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन आगे आया है। एसोसिएशन के पदाधिकारियों द्वारा जगदलपुर के राहत शिविरों में पहुंचकर बाढ़ प्रभावित परिवारों को दैनिक उपयोग की आवश्यक सामग्रियां वितरित की गईं। शिक्षक संगठन के पदाधिकारियों ने अंजुमन इस्लामिया उर्दू स्कूल और भैरमगंज स्कूल जगदलपुर प्रांगण में संचालित राहत शिविरों का दौरा किया। इस दौरान बाढ़ पीड़ितों को दैनिक दिनचर्या में उपयोगी वस्तुएं जैसे साबुन, तेल, शैम्पू और टूथपेस्ट आदि राहत सामग्री का वितरण किया गया। इस सेवा कार्य में छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन के प्रदेश पदाधिकारी प्रवीण श्रीवास्तव, जिला अध्यक्ष लुदरसन कश्यप, जिला सचिव मोहम्मद ताहीर शेख, जिला कोषाध्यक्ष अमित पॉल और सीएसी दीपक यादव मुख्य रूप से उपस्थित रहे।
सीएम विष्णु देव साय ने किया बस्तर के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा
जगदलपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज सोमवार को अतिवृष्टि एवं बाढ़ प्रभावित बस्तर संभाग के बस्तर और सुकमा जिलों का दौरा कर हालात का जायजा लिया।इस दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि बाढ़ और बारिश में पूर्णतः क्षतिग्रस्त प्रत्येक मकान के पुर्ननिर्माण के लिए 1 लाख 20 हजार रुपए का मुआवजा दिया जाएगा। साथ ही मुख्यमंत्री राहत कोष से भी 10-10 रुपए की आर्थिक मदद दी जाएगी। क्षतिग्रस्त फसलों और आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त मकानों का भी मुआवजा दिया जाएगा।
बस्तर में तीन दिन तक हुई घनघोर और इंद्रावती समेत तमाम नदी नालों में आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय हालात का जायजा लेने आज बस्तर संभाग के दौरे पर आए थे। उन्होंने सुकमा और बस्तर जिलों के प्रभावित इलाकों का दौरा किया। श्री साय ने प्रशासन द्वारा बनाए गए राहत शिविरों में जाकर पीड़ितों से मुलाकात की और इंतजामों का जायजा भी लिया। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने जगदलपुर नगर निगम क्षेत्र के डोंगाघाट पहुंचकर बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का जायजा लिया और प्रभावित परिवारों से भेंटकर उन्हें हरसंभव सहायता प्रदान करने आश्वस्त किया। वहीं हरेक प्रभावित परिवार को शासन की सहायता के साथ ही मुख्यमंत्री राहत कोष से दस-दस हजार रुपए की मदद देने की घोषणा की। उन्होंने बाढ़ से उत्पन्न स्थिति, प्रभावित परिवारों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं तथा प्रशासन द्वारा संचालित राहत कार्यों की जानकारी ली और अधिकारियों को उक्त दिशा में तेजी लाने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री साय ने बाढ़ प्रभावित सुनील पिता दशरथी और कुशल पिता दशरथी से उनके परिवारों से चर्चा करते हुए कहा शासन-प्रशासन की ओर से हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। साथ ही अन्य बाढ़ प्रभावित परिवारों से भेंटकर उन्हें मदद देने भरोसा दिलाया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि बाढ़ प्रभावित लोगों तक आवश्यक राहत सामग्री समय पर पहुंचाई जाए और किसी भी परिवार को परेशानी न हो, इसका विशेष ध्यान रखा जाए। मुख्यमंत्री ने इंद्रावती पुल पहुंचकर नदी के जलस्तर एवं आसपास के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का भी अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने विभागीय अधिकारियों से बस्तर जिले में बाढ़ की स्थिति, प्रभावित क्षेत्रों तथा राहत एवं बचाव कार्यों की विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों को खाद्य सामग्री, पेयजल, स्वास्थ्य सेवाएं और अन्य आवश्यक सुविधाएं प्रभावित परिवारों तक प्राथमिकता के साथ पहुंचाने के निर्देश दिए। साथ ही प्रभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी बनाए रखने तथा आवश्यकता के अनुसार राहत दलों को तत्काल सक्रिय करने के लिए कहा। विशेष तौर पर बाढ़ का पानी कम होने के बाद शुद्ध पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने और जल जनित बीमारियों की रोकथाम के लिए सकारात्मक प्रयास किए जाने के निर्देश दिए। वहीं बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में संवेदनशीलता के साथ मकान, फसल, पशुधन क्षति का सर्वे कर आंकलन किए जाने सहित संबंधित परिवारों को सहायता सुनिश्चित किए जाने के निर्देश दिए।मुख्यमंत्री साय ने कहा कि विषम परिस्थितियों में शासन-प्रशासन प्रभावित परिवारों के साथ खड़ा है। बाढ़ प्रभावित लोगों की सुरक्षा और उन्हें आवश्यक सहायता उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
उन्होंने अधिकारियों को संवेदनशीलता और तत्परता के साथ कार्य करते हुए राहत कार्यों को प्रभावी ढंग से संचालित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री के निर्देश पर जिला प्रशासन द्वारा बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्य लगातार संचालित किए जा रहे हैं। प्रभावित परिवारों की आवश्यकताओं का आकलन कर उन्हें भोजन, स्वास्थ्य सुविधा और अन्य जरूरी सहायता उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। प्रशासन द्वारा स्थिति पर निरंतर नजर रखते हुए आवश्यकता के अनुसार त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है। इस दौरान महापौर संजय पाण्डेय, नगर निगम के सभापति खेमसिंह देवांगन, बस्तर राज परिवार के सदस्य कमलचंद्र भंजदेव सहित अन्य जनप्रतिनिधि और कमिश्नर बस्तर डोमन सिंह, आईजी बीएन मीणा, कलेक्टर आकाश छिकारा, पुलिस अधीक्षक शलभ सिन्हा एवं अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
इतने गांव हुए प्रभावित
मुख्यमंत्री ने पत्रकारों को जानकारी दी की भारी बरसात और बाढ़ से प्रदेश के 571 गांव और 22 हजार 375 लोग प्रभावित हुए हैं। पूरे प्रदेश में 173 जगह राहत कैंप खोले गए हैं। प्रदेश भर में 16 हजार लोगों का रेस्क्यू किया गया है। प्रदेश में 199 मकान पूर्णतः क्षतिग्रस्त हुए हैं। 8 जनहानि और 172 पशु धन की हानि हुई है। पूर्णतः क्षतिग्रस्त प्रत्येक मकान पर 1.20 लाख रुपए का मुआवजा दिया जाएगा। साथ ही मुख्यमंत्री राहत कोष से भी 10-10 हजार की मदद दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने बताया कि फसल क्षति और आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त मकानों पर भी मुआवजा दिया जाएगा।
मेयर पांडे और कलेक्टर छिकारा की तारीफ
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आपदा के हालात से निपटने और पीड़ितों की मदद के लिए किए गए इंतजामों को लेकर जगदलपुर के महापौर संजय पांडेय और कलेक्टर आकाश छिकारा की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि बस्तर जिला प्रशासन, कलेक्टर, नगर निगम प्रशासन और महापौर संजय पांडे ने प्रभावितों को राहत पहुंचाने के लिए बढ़िया व्यवस्थाएं की हैं। राहत शिविरों में भोजन, पानी, चिकित्सा और आवास की अच्छी व्यवस्था की गई है।
बकावंड विकासखंड बकावंड अंतर्गत ग्राम पंचायत तारेका और चारगांव के लगभग 500 ग्रामीणों ने गुरुवार को जिला मुख्यालय पहुंचकर प्रदर्शन किया। आदिवासी नेता एवं बस्तर जिला युवा कांग्रेस उपाध्यक्ष हेमंत कश्यप के नेतृत्व में ग्रामीणों ने कलेक्टर कार्यालय का घेराव कर ज्ञापन सौंपा।ग्रामीणों ने बताया कि ग्राम चारगांव में राशन वितरण में लगातार अनियमितता बरती जा रही है। आरोप है कि राशन संचालक युवराज बघेल द्वारा हितग्राहियों को निर्धारित मात्रा में राशन नहीं दिया जा रहा है।
कई हितग्राहियों से दो माह का बायोमेट्रिक सत्यापन करा लेने के बाद भी राशन नहीं दिया गया, जिससे गरीब परिवार परेशान हैं।वहीं प्राथमिक शाला चारगांव में 90 छात्र-छात्राओं पर मात्र एक शिक्षक पदस्थ होने से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। ग्रामीणों ने अतिरिक्त शिक्षक की तत्काल व्यवस्था की मांग की।संयुक्त कलेक्टर अगर सिंह राणा ने ज्ञापन लेते हुए जिला खाद्य अधिकारी से दूरभाष पर चर्चा कर दो दिनों के भीतर राशन वितरण व्यवस्था दुरुस्त कराने का आश्वासन दिया।इस दौरान हेमंत कश्यप ने कहा कि गरीबों के हक के राशन और बच्चों की शिक्षा से समझौता नहीं किया जाएगा। तय समय में कार्रवाई नहीं हुई तो लोकतांत्रिक तरीके से आगे की लड़ाई लड़ी जाएगी।प्रदर्शन में सरपंच जोगेंद्र बघेल, रवि बघेल सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।