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धर्मांतरण में कमी आने के बाद अब लव जिहाद के जाल में बस्तर

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अब्दुल के निशाने पर बस्तर की एक और बेटी

युवती को लव जिहाद में फंसाने का आरोप

कोंडागांव में मचा बवाल, थाना घेरा

अर्जुन झा

जगदलपुर विष्णु देव साय की सुशासन सरकार आने के बाद आदिवासी बहुलता वाले बस्तर संभाग में धर्मांतरण गतिविधियों पर काफी हद तक अंकुश लग गया है, मगर अब बस्तर दूसरे चक्रव्यूह में फंसता नजर आ रहा है। यहां अब लव जिहाद का जाल फैलाया जा रहा है और इस जाल में हिंदू, आदिवासी युवतियां फंसती चली जा रही हैं। ऐसा ही एक मामला बस्तर संभाग के कोंडागांव जिले से सामने आया है। इस प्रकरण ने जिला मुख्यालय कोंडागांव में कोहराम मचा दिया है।

मिली जानकारी के अनुसार कोंडागांव निवासी एक हिंदू युवती लापता हो गई है। आरोप है कि उसे लव जिहाद के जाल में फंसा कर भगा ले गया है। अब्दुल अंसारी नामक एक मुस्लिम युवक पर युवती का अपहरण करने या उसे भागा ले जाने का आरोप लगा है।युवती के लापता होने से कोंडागांव में बवाल मच गया है।सर्व हिंदू समाज ने कोतवाली का किया घेराव कर युवती को युवक के चंगुल से छुड़ाने के लिए 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया है।

इस बीच बताया जाता है कि युवती का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें वह खुद को बालिग बताते हुए अपनी मर्जी से आने की बात कहती नजर आ रही है।युवती के लापता होने का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। 28 अक्टूबर को युवती के अचानक घर से चले जाने के बाद परिजनों और सामाजिक संगठनों ने एक युवक पर उसे बहला-फुसलाकर ले जाने का आरोप लगाया है। मामले को लेकर शुक्रवार को सर्व हिंदू समाज, बजरंग दल सहित विभिन्न सामाजिक संगठनों के लोगों ने बड़ी संख्या में सिटी कोतवाली पहुंचकर थाने का घेराव किया और जमकर विरोध प्रदर्शन किया।प्रदर्शन कर रहे लोगों ने पुलिस प्रशासन से युवती की तत्काल तलाश कर उसकी सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने की मांग की। साथ ही 24 घंटे के भीतर युवती का पता लगाकर मामले में उचित कार्रवाई करने का अल्टीमेटम दिया। संगठनों ने चेतावनी दी है कि निर्धारित समय में संतोषजनक कार्रवाई नहीं होने पर उग्र आंदोलन और कोंडागांव नगर बंद कराया जा सकता है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच सोशल मीडिया पर युवती का एक वीडियो सामने आया है। वीडियो में युवती कथित तौर पर कह रही है कि वह 18 वर्ष की हो चुकी है और अपनी मर्जी से घर से आई है। इस वीडियो के सामने आने के बाद मामले ने नया मोड़ ले लिया है। हालांकि वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि और युवती की वास्तविक स्थिति को लेकर पुलिस की आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है।

पुलिस जांच पर निगाहें

पुलिस ने परिजनों की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर युवती की तलाश शुरू कर दी है। पुलिस की अलग-अलग टीमें संभावित लोकेशन और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जांच में जुटी हैं। अब इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल युवती की सुरक्षा, उसकी स्वतंत्र इच्छा और घटना की वास्तविक हालात को लेकर है। यदि युवती बालिग है, तो कानून के अनुसार उसकी स्वतंत्र इच्छा का सम्मान भी आवश्यक है। पुलिस की जिम्मेदारी है कि युवती से सुरक्षित माहौल में संपर्क कर उसका बयान दर्ज करे और सभी आरोपों की निष्पक्ष जांच करे। फिलहाल कोंडागांव में इस मामले को लेकर माहौल गरमाया हुआ है। अब देखना होगा कि पुलिस प्रशासन 24 घंटे के अल्टीमेटम के बीच क्या कार्रवाई करता है और जांच में आगे क्या तथ्य सामने आते हैं।

बस्तर में नई साजिश?

आदिवासियों की बहुलता वाले बस्तर संभाग बार बार नई नई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। लगभग चार दशक तक नक्सलियों ने यहां के आदिवासियों को विका स और सुविधाओं से दूर रखा। पुलिस की मुखबिरी करने के आरोप लगाकर आदिवासियों की हत्याएं की। इस आतंक ने हजारों आदिवासी परिवारों को अपनी धरती छोड़ने के लिए मजबूर कर दिया। इसी बीच यहां मिशनरी ने यहां अपना प्रभाव जमाना शुरू कर दिया। छल, प्रपंच, प्रलोभन के जरिए धर्मांतरण का खेल चल पड़ा। हजारों आदिवासियों को उनकी मूल संस्कृति, परंपराओं से विलग कर ईसाई बना लिया गया। सुशासन सरकार आने के बाद यह खेल लगभग बंद हो गया है। मगर दूसरा खेल शुरू हो गया है। लव जिहाद के इस खेल में भोलीभाली लड़कियां फंसती चली जा रही हैं। कोंडागांव की ताजा घटना इस ओर इशारा करती नजर आती है।

बाल संरक्षण समितियों का प्रशिक्षण, ओरियंटेशन कार्यक्रम

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पंचायत प्रतिनिधियों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और शिक्षकों को दी गई बाल संरक्षण कानूनों की जानकारी

जगदलपुर ग्राम पंचायत बिलौरी के पंचायत भवन में विलेज लेवल चाइल्ड प्रोटेक्शन कमेटी एवं वार्ड लेवल चाइल्ड प्रोटेक्शन कमेटी के सदस्यों का प्रशिक्षण एवं ओरियंटेशन कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में बाल कल्याण समिति, जिला बस्तर के अध्यक्ष नरेंद्र पाणिग्रही एवं जिला बाल संरक्षण इकाई के लीगल प्रोबेशन ऑफिसर संतोष बैद उपस्थित रहे।

प्रशिक्षण के दौरान अतिथियों ने बाल संरक्षण से संबंधित विभिन्न कानूनों एवं ग्राम पंचायत तथा वार्ड स्तर पर गठित बाल संरक्षण समितियों की महत्वपूर्ण भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि बच्चों के अधिकारों की रक्षा, बाल शोषण एवं बाल उत्पीड़न की रोकथाम तथा संकटग्रस्त बच्चों की पहचान कर उन्हें समय पर सहायता उपलब्ध कराने में स्थानीय स्तर की समितियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। कार्यक्रम में पॉक्सो अधिनियम 2012, बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम तथा बाल संरक्षण से संबंधित कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी गई। साथ ही बाल अधिकारों के उल्लंघन एवं बच्चों से संबंधित किसी भी आपात स्थिति में चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 एवं आपातकालीन सेवा 112 पर सूचना देने और रिपोर्टिंग प्रक्रिया के संबंध में भी विस्तारपूर्वक प्रशिक्षण दिया गया।कार्यक्रम संस्था सचिव डॉ. सुशील कुमार पांडेय के निर्देशन एवं फील्ड ऑफिसर डॉ. नारायण दास पंथ के नेतृत्व में संपन्न हुआ। प्रशिक्षण कार्यक्रम में 12 ग्राम पंचायतों के सरपंच, उप सरपंच, स्व सहायता समूहों की सदस्याएं, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं शिक्षक शामिल हुए। कार्यक्रम का उद्देश्य पंचायत एवं वार्ड स्तर पर बाल संरक्षण तंत्र को मजबूत बनाना तथा बच्चों के लिए सुरक्षित एवं संरक्षणयुक्त वातावरण तैयार करने में सामुदायिक सहभागिता सुनिश्चित करना रहा।

इंद्रावती बाढ़ पीड़ित किसानों के हक में मैदान पर उतरे जनपद सदस्य राजू सोढ़ी

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शासन-प्रशासन से सोढ़ी ने की की पर्याप्त मुआवजे की मांग

6 नवंबर की किसान महा रैली एवं कलेक्टर कार्यालय घेराव आंदोलन को दिया पूर्ण समर्थन

जगदलपुर दरभा जनपद पंचायत के सदस्य राजू सोढ़ी ने इंद्रावती नदी में आई भीषण बाढ़ से प्रभावित किसानों एवं ग्रामीण परिवारों की बदहाल स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए राज्य सरकार और जिला प्रशासन से तत्काल राहत एवं उचित मुआवजा देने की मांग की है। उन्होंने 6 नवंबर को प्रस्तावित किसान महारैली एवं कलेक्टर कार्यालय घेराव का समर्थन किया है। जनपद सदस्य राजू सोढ़ी ने कहा है कि इंद्रावती नदी में आई भीषण बाढ़ के कारण अनेक ग्रामीण परिवारों के मकान क्षतिग्रस्त हो गए हैं, वहीं हजारों किसानों की धान सहित अन्य फसलें पूरी तरह बर्बाद हो चुकी हैं।

इसके बावजूद प्रभावित किसानों और परिवारों को अब तक अपेक्षित राहत नहीं मिल पाई है। राजू सोढ़ी ने कहा है कि किसान फसल बीमा, उचित मुआवजा और कर्ज माफी की मांग को लेकर लगातार कलेक्टर कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं। विगत दिनों भी किसानों ने अपनी समस्याओं को लेकर प्रशासन के समक्ष आवाज उठाई थी, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय सामने नहीं आया है। क्षेत्र के विधायक, सांसद एवं अन्य जनप्रतिनिधियों को भी किसानों की इस गंभीर समस्या को मजबूती से उठाना चाहिए। सरकार की उदासीनता के चलते किसान आर्थिक संकट और भविष्य की चिंता से जूझ रहे हैं। उन्होंने कहा कि 6 नवंबर को किसानों द्वारा आयोजित महारैली एवं कलेक्टर कार्यालय घेराव आंदोलन किसानों के हक और अधिकार की जायज लड़ाई है। इस आंदोलन को अपना पूर्ण समर्थन देते हुए उन्होंने सभी किसान भाइयों, युवाओं, सामाजिक संगठनों एवं जनप्रतिनिधियों से एकजुट होकर किसानों की आवाज बुलंद करने की अपील की। जनपद सदस्य राजू सोढ़ी ने बताया कि किसानों की प्रमुख मांगें बाढ़ प्रभावित फसलों का निष्पक्ष एवं वास्तविक सर्वे कराकर नुकसान के आधार पर उचित मुआवजा दिया जाए। बाढ़ प्रभावित खसरों में दर्ज कृषि ऋण माफ किया जाए।आरबीसी 6-4 के तहत तत्काल आर्थिक सहायता दी जाए तथा गंभीर रूप से प्रभावित किसानों को प्रति एकड़ 50,000 तक की विशेष राहत प्रदान की जाए। पात्र किसानों को फसल बीमा एवं कृषि बीमा की राशि का तत्काल भुगतान किया जाए। बस्तर जिले के लिए विशेष राहत एवं पुनर्वास पैकेज स्वीकृत किया जाए। क्षतिग्रस्त मकानों का सर्वे कराकर 1.20 लाख से 2.50 लाख रुपए तक आवासीय सहायता दी जाए। मुख्यमंत्री राहत कोष से मिलने वाली सहायता राशि 10,000 से बढ़ाकर 50,000 की जाए। पूर्णतः क्षतिग्रस्त मकानों वाले परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना में प्राथमिकता दी जाए तथा वीबी- जी राम जी योजना के अंतर्गत 50 हजार रुपए तक अतिरिक्त मजदूरी सहायता उपलब्ध कराई जाए। सोढ़ी ने कहा कि किसानों की मांग कोई राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि उनके जीवन, परिवार और आजीविका से जुड़ा न्याय का सवाल है। जिन किसानों ने अपनी मेहनत से अनाज पैदा किया, आज वही किसान बाढ़ की मार से आर्थिक संकट में हैं। ऐसे समय में सरकार की जिम्मेदारी है कि वह किसानों के साथ खड़ी हो और उन्हें उनका अधिकार दिलाए। श्री सोढ़ी ने कहा है कि जब तक बाढ़ पीड़ित किसानों को उचित मुआवजा, कृषि ऋण माफी और सम्मानजनक राहत नहीं मिलेगी, तब तक किसानों की आवाज बुलंद होती रहेगी।

एटीएम बूथों की सुरक्षा नशेड़ी, गंजेड़ियों के हवाले

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नशे के आदी तत्वों का आरामगाह बने जगदलपुर के एटीएम बूथ

अर्जुन झा-

जगदलपुर नगर में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के एटीएम बूथों की सुरक्षा की जिम्मेदारी अब बेसहारा नशेड़ी, गंजेड़ी, भंगेड़ी लोग सम्हाल रहे हैं। लगता है बैंक प्रबंधन और पुलिस को अपनर इंतजामों की अपेक्षा इन पर कुछ ज्यादा ही भरोसा हो गया है। इससे बैंक और पुलिस विभाग को काफी सहयोग मिल रहा है। निशुल्क सुरक्षा व्यवस्था देने वाले ये नशेड़ी लोग ने अब अपना आशियाना और ठिकाना ऐसे ही एयर कंडीशंड एटीएम बूथों को बनाने लगे हैं। जगदलपुर में विभिन्न बैंकों के दर्जनों एटीएम बूथ सेंटर हैं।

बैंक प्रबंधन इन बूथों में रात्रिकालीन सुरक्षा का कोई इंतजाम नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे में लगता नशेड़ी, गंजेड़ी, भंगेड़ी लोग बैंकों के मददगार बनकर सामने आ गए हैं। एटीएम बूथों की सुरक्षा की चिंता बैंक प्रबंधन से कहीं ज्यादा ऐसे तत्वों को सताती है ऐसा लगने लगा है। ज्यादातर एटीएम बूथों पर शराब और गांजा के आदी लोग आराम फरमाते नजर आते हैं। वहीं कई बूथों को बेसहारा बुजुर्गों ने भी अपना आशियाना बना लिया है। वहां ये हालत है तो शहर के किनारे लगे ऐसे बूथों की हालत का अंदाजा आप लगा सकते हैं। बहरहाल बात चाहे जो भी हो, एटीएम बूथों की सुरक्षा तो हो रही है न! बैंक प्रबंधन बेफिक्र और पुलिस भी निश्चिंत।

नाबालिग बालिका को शादी का झांसा देकर भगाने एवं दुष्कर्म करने के आरोपी को गुण्डरदेही पुलिस ने किया गिरफ्तार

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थाना गुण्डरदेही में अपराध क्रमांक 372/2026 के तहत आरोपी के विरुद्ध बीएनएस एवं पॉक्सो एक्ट की गंभीर धाराओं में अपराध दर्ज।

पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय के समक्ष पेश किया।

दिनांक 29.10.2026 को थाना गुण्डरदेही में उपस्थित होकर अपनी नाबालिग पुत्री के संबंध में लिखित शिकायत दर्ज कराई गई। शिकायत में बताया गया कि आरोपी संजय जायसवाल द्वारा नाबालिग बालिका को शादी का झांसा देकर अपने बहकावे में लिया गया तथा उसे अपने साथ ले जाकर उसके साथ शारीरिक संबंध स्थापित किया गया।प्राप्त शिकायत पर थाना गुण्डरदेही में अपराध क्रमांक 372/2026, धारा 137(2), 87, 64(2) बीएनएस एवं धारा 6 पॉक्सो एक्ट के तहत अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया।प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए थाना गुण्डरदेही पुलिस द्वारा त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी संजय जायसवाल पिता भागीरथी जायसवाल, उम्र 20 वर्ष, निवासी ग्राम कोड़वा, थाना भाटापारा ग्रामीण जिला बलौदाबाजार को दिनांक 30.10.2026 को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार आरोपी को माननीय न्यायालय के पेश किया गया है उक्त कार्रवाई में थाना गुण्डरदेही पुलिस की सराहनीय भूमिका रही।

तेलंगाना के जाहिराबाद से नाबालिग बालिका बरामद, दुष्कर्म के आरोपी को बालोद पुलिस ने किया गिरफ्तार

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अर्जुन्दा पुलिस की त्वरित कार्रवाई, आरोपी को न्यायिक रिमांड पर भेजा गया

बालोद। जिले के थाना अर्जुन्दा क्षेत्र में नाबालिग बालिका को बहला-फुसलाकर भगाकर ले जाने एवं उसके साथ दुष्कर्म करने के मामले में बालोद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को तेलंगाना के जाहिराबाद से गिरफ्तार किया है। पुलिस ने नाबालिग बालिका को भी सकुशल बरामद कर लिया है।पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, दिनांक 06 अक्टूबर 2026 को पीड़िता के परिजनों द्वारा उसे बहला-फुसलाकर भगाकर ले जाने की रिपोर्ट थाना अर्जुन्दा में दर्ज कराई गई थी। मामले में पुलिस ने संदेही चन्द्रजीत यादव के विरुद्ध अपराध क्रमांक 174/2026 के तहत धारा 137(2) बीएनएस में अपराध पंजीबद्ध कर उसकी तलाश शुरू की थी। जांच के दौरान आरोपी का लोकेशन तेलंगाना के जाहिराबाद में होना पता चला। इसके बाद थाना अर्जुन्दा की पुलिस टीम तत्काल तेलंगाना रवाना की गई, जहां से पुलिस ने पीड़िता को बरामद किया।पीड़िता के कथन के आधार पर मामले में दुष्कर्म से संबंधित धारा 64(2)(F), 64(2)(M) बीएनएस एवं धारा 4, 6 पॉक्सो एक्ट की धाराएं भी जोड़ी गईं। पुलिस ने आरोपी चन्द्रजीत यादव (31 वर्ष), पिता भुजबल यादव, निवासी परसतराई की पतासाजी कर उसे जाहिराबाद, तेलंगाना से गिरफ्तार किया। आरोपी को दिनांक 30 अक्टूबर 2026 को विधिवत गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।उक्त कार्रवाई पुलिस अधीक्षक बालोद श्री किरण चौहान के निर्देशन में, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री चन्द्रकांत गवर्ना एवं पुलिस अनुविभागीय अधिकारी गुण्डरदेही श्रीमती श्रुति सिंह के मार्गदर्शन में थाना अर्जुन्दा पुलिस द्वारा की गई।

कत्लखाना से बचाई गईं 27 गायें; 9 क्विंटल गौमांस बरामद

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गौ सेवा आयोग सदस्य दीपक पनपलिया ने विधायक रूपु भतरा एवं पुलिस प्रशासन का जताया आभार

गौसेवक मुन्ना बजरंगी एवं रोहन घोष ने उठाई गौमांस तस्करी नेटवर्क की व्यापक जांच की मांग

जगदलपुर गौवंश संरक्षण के लिए बस्तर जिले के गौ सेवकों द्वारा किए जा रहे प्रयासों के बीच पड़ोसी राज्य ओडिशा के कोटपाड़ में बड़ी कार्रवाई हुई है। इस कार्रवाई में 27 गायों को कत्लखाने से बचाया गया, वहीं मौके से लगभग 9 क्विंटल गौमांस भी बरामद किया गया है। बचाई गई गायों को सुरक्षित रखने एवं उनकी देखभाल सुनिश्चित करने की दिशा में भी आवश्यक कदम उठाए गए हैं। गौरतलब है कि बस्तर जिले के गौ सेवकों ने ओडिशा के विधायक रूपु भतरा से मुलाकात कर गौवंश की सुरक्षा एवं संरक्षण का विषय प्रमुखता से उठाया था। इसके बाद हुए प्रयासों के क्रम में कोटपाड़ में यह कार्रवाई हुई। पुलिस कार्रवाई के बाद कत्ल होने से बचाई गई 27 गायों में से 19 गायों को बस्तर जिले के कुरंदी स्थित हैप्पी कामधेनु गौशाला के सुपुर्द किया गया है, जबकि शेष 8 गायों को कोटपाड़ के स्थानीय गौपालकों को सौंप दिया गया। बस्तर के गौ सेवकों के अनुसार, इस मामले का एक गंभीर पहलू गौमांस के कारोबार का संभावित विस्तार छत्तीसगढ़ के जगदलपुर तक होना है। उनका कहना है कि पूर्व में पकड़े गए एक गौमांस तस्करी के आरोपी ने कथित तौर पर कोटपाड़ क्षेत्र से गौमांस का परिवहन कर उसका विक्रय करने की बात स्वीकार की थी। ऐसे में गौ सेवकों ने संबंधित एजेंसियों से मामले की व्यापक जांच कर गौवंश वध, गौमांस के परिवहन और बिक्री से जुड़े संभावित नेटवर्क का पता लगाने की मांग की है। गौ सेवक मुन्ना बजरंगी ने कहा कि 27 गायों को कत्लखाने से बचाया जाना राहत की बात है, लेकिन मौके से लगभग 9 क्विंटल गौमांस की बरामदगी इस मामले की गंभीरता को दर्शाती है। गौवंश की सुरक्षा के लिए इस पूरे मामले से जुड़े लोगों, परिवहन के रास्तों और मांस की बिक्री के संभावित ठिकानों की भी जांच होनी चाहिए।

इसके साथ ही मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाए।गौ सेवक रोहन घोष ने कहा कि ओडिसा में भाजपा की सरकार बनने के बाद कोटपाड़ में 27 गायों को बचाया जाना सराहनीय है। उन्होंने कहा कि संबंधित एजेंसियों को मामले की तह तक जाकर यह पता लगाना चाहिए कि गौमांस का स्रोत क्या था, उसका परिवहन किन रास्तों से किया जा रहा था। यदि जांच में किसी की संलिप्तता सामने आती है, तो उसके विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि बस्तर और ओडिशा के गौ सेवक आपसी समन्वय के साथ गौवंश की सुरक्षा एवं संरक्षण के लिए निरंतर प्रयास करते रहेंगे। गौ सेवा आयोग के सदस्य दीपक पनपलिया ने कोटपाड़ में गौवंश को बचाने तथा गौमांस बरामदगी की बड़ी कार्रवाई के लिए ओडिशा के विधायक रूपु भतरा एवं पुलिस विभाग के प्रति धन्यवाद एवं आभार व्यक्त किया। उन्होंने उम्मीद जताई कि मामले की गहन जांच कर गौवंश वध एवं गौमांस के अवैध कारोबार से जुड़े अन्य लोगों के विरुद्ध भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

अन्नदाता की गर्जना, व्यवस्था से न्याय की अपेक्षा

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लेखक:आशीष सीताशरण सोनी

जगदलपुर छत्तीसगढ़ को यूं ही ‘धान का कटोरा’ नहीं कहा जाता। यहां की उपजाऊ धरती, धान की समृद्ध परंपरा और मेहनतकश अन्नदाताओं ने राज्य की पहचान को विशिष्ट बनाया है। लेकिन जब अन्न उपजाने वाला ही अपनी उपज का उचित मूल्य पाने, समय पर भुगतान कराने और सरकारी व्यवस्थाओं की जटिलताओं से जूझने को विवश हो, तब यह सवाल केवल कृषि का नहीं, बल्कि आर्थिक न्याय और ग्रामीण विकास का भी बन जाता है। इसी संदर्भ में भारतीय किसान संघ छत्तीसगढ़ द्वारा 27 अक्टूबर को आयोजित ‘अन्नदाता गर्जना रैली’ को अन्नदाताओं की समस्याओं, अधिकारों और अपेक्षाओं को शासन-प्रशासन तक पहुंचाने के एक महत्त्वपूर्ण प्रयास के रूप में देखा जाना चाहिए।

विगत वर्षों में प्रदेश के अन्नदाता अपने अधिकारों के प्रति अपेक्षाकृत सुप्तप्राय रहे हैं। अधिकारों के प्रति जागरूकता और संगठित होकर अपनी माँगों को प्रभावी ढंग से उठाने की आवश्यकता के बावजूद, प्रदेशव्यापी स्तर पर ऐसी सक्रियता कम दिखाई देती थी। लेकिन पिछले एक वर्ष से भारतीय किसान संघ के सतत प्रयासों ने इस स्थिति में एक नई हलचल पैदा की है। आज छत्तीसगढ़ के अन्नदाता अपने अधिकारों के प्रति अधिक सजग, सक्रिय और संगठित होकर अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं। वे अपनी समस्याओं को केवल व्यक्तिगत कठिनाई मानकर सहने के बजाय, सामूहिक रूप से उनके समाधान की मांग कर रहे हैं। इसी बदलती चेतना और संगठनात्मक सक्रियता का परिणाम है कि 27 अक्टूबर को राजधानी रायपुर में आयोजित ‘अन्नदाता गर्जना रैली’ में उठी आवाजों से पूरा प्रदेश अन्नदाताओं के अधिकारों की गूंज से गुंजायमान हो उठा। यह रैली केवल एक प्रदर्शन नहीं, बल्कि प्रदेश के कृषि समाज में बढ़ती अधिकार चेतना और संगठित भागीदारी का प्रतीक भी है।भारतीय किसान संघ के प्रदेश संगठन मंत्री मनीष शर्मा के अनुसार संघ अन्नदाताओं के अधिकारों और उनकी उन्नति के लिए तहसील से जिला और प्रदेश स्तर तक निरंतर प्रयास कर रहा है। उनका कहना है कि अन्नदाताओं के साथ किसी भी प्रकार का अन्याय स्वीकार नहीं किया जाएगा। यह वक्तव्य संगठन की उस भूमिका को रेखांकित करता है, जिसके तहत स्थानीय स्तर पर सामने आने वाली कृषि संबंधी समस्याओं को व्यापक मंच पर उठाकर शासन-प्रशासन तक पहुँचाने का प्रयास किया जाता है। हालाँकि, इन प्रयासों की वास्तविक सफलता इस बात से भी तय होगी कि उठाई गई माँगों पर कितना ठोस संवाद होता है और अन्नदाताओं की समस्याओं के समाधान के लिए कितनी समयबद्ध कार्रवाई की जाती है। रैली के माध्यम से सामने रखी गई मांगों में धान का उचित मूल्य, लंबित भुगतान, उपार्जन केंद्रों की व्यवस्था में सुधार, टोकन वितरण की समस्या, तौल में पारदर्शिता, खाद की उपलब्धता और निर्धारित दरों पर बिक्री जैसे विषय प्रमुख हैं। संगठन ने वर्ष 2022-23 से संबंधित लगभग 1,700 करोड़ रुपये के कथित लंबित भुगतान का मुद्दा उठाते हुए धान का मूल्य 3,358 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग भी रखी है। इन आंकड़ों और मांगों को संगठन के दावों के रूप में देखा जाना चाहिए; लंबित राशि, उसके पात्र हितग्राहियों और भुगतान की वर्तमान स्थिति की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है। इसी प्रकार, टोकन की संख्या और उपार्जन की समय-सीमा से जुड़ी मांगों का मूल्यांकन वास्तविक कृषि क्षेत्रफल, उपज, भंडारण क्षमता और केंद्रों की कार्यक्षमता के आधार पर किया जाना चाहिए।अन्नदाता की समस्या को केवल समर्थन मूल्य तक सीमित कर देना भी उचित नहीं होगा। खेती की लागत में बीज, खाद, कीटनाशक, सिंचाई, डीजल, बिजली, मशीनरी और श्रम का खर्च शामिल है। इसके साथ मौसम की अनिश्चितता, बेमौसम वर्षा, सूखा, कीट-प्रकोप और बाजार में कीमतों के उतार-चढ़ाव का जोखिम भी जुड़ा रहता है। ऐसे में उपज का उचित मूल्य तभी सार्थक होगा, जब भुगतान समय पर हो, फसल का नुकसान होने पर मुआवजा पारदर्शी ढंग से मिले और खेती के लिए आवश्यक संसाधन सुलभ दरों पर उपलब्ध हों। धान उपार्जन की व्यवस्था छत्तीसगढ़ की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में विशेष महत्त्व रखती है। प्रदेश में बड़ी संख्या में परिवारों की आय धान की खेती और उससे जुड़ी गतिविधियों पर निर्भर है। इसलिए उपार्जन केंद्रों पर लंबी प्रतीक्षा, टोकन संबंधी कठिनाइयाँ, तौल को लेकर विवाद या भुगतान में विलंब सीधे परिवारों के घरेलू बजट, अगली फसल की तैयारी और ग्रामीण बाजार की क्रय-शक्ति को प्रभावित कर सकते हैं। प्रशासन के लिए यह आवश्यक है कि उपार्जन केंद्रों पर शिकायत निवारण की स्पष्ट व्यवस्था हो, तौल और भुगतान के अभिलेख उपलब्ध रहें तथा प्रत्येक शिकायत पर कार्रवाई की स्थिति संबंधित अन्नदाता को बताई जाए। न्यूनतम समर्थन मूल्य और प्रदेश में घोषित अतिरिक्त सहायता के बीच अंतर को भी स्पष्ट रूप से समझना होगा। केंद्र सरकार विभिन्न कृषि उपजों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित करती है, जबकि राज्य सरकार अपनी नीतियों के अनुसार अतिरिक्त सहायता या अन्य प्रोत्साहन दे सकती है। धान का मूल्य निर्धारित करते समय यह सुनिश्चित होना चाहिए कि घोषणा, पात्रता, वास्तविक भुगतान और उपार्जन की प्रक्रिया के बीच कोई अस्पष्टता न रहे। अन्नदाताओं को केवल घोषित दर नहीं, बल्कि उनकी उपज के बदले वास्तव में प्राप्त होने वाली राशि और भुगतान की समय-सीमा भी स्पष्ट रूप से मालूम होनी चाहिए।रैली में अरपा-भैंसाझार सिंचाई परियोजना से संबंधित अधूरे कार्यों, फसल क्षति के मुआवजे, खाद की कथित अधिक कीमत, मक्का और गेहूँ जैसी अन्य फसलों के समर्थन मूल्य पर उपार्जन तथा गौ-संरक्षण से जुड़ी योजनाओं को लेकर भी माँगें उठाई गई हैं। इन विषयों का दायरा धान की खरीद से कहीं व्यापक है। सिंचाई परियोजनाओं में देरी से कृषि उत्पादकता प्रभावित होती है, जबकि मक्का, दलहन, तिलहन और अन्य फसलों के लिए प्रभावी बाजार व्यवस्था न होने पर फसल विविधीकरण की संभावनाएँ सीमित हो जाती हैं। यदि प्रदेश धान पर निर्भरता कम करते हुए कृषि को अधिक टिकाऊ और विविधतापूर्ण बनाना चाहता है, तो वैकल्पिक फसलों के लिए बीज, तकनीकी मार्गदर्शन, प्रसंस्करण, भंडारण और सुनिश्चित बाजार की व्यवस्था भी विकसित करनी होगी।कृषि नीति की सफलता केवल अधिक उत्पादन से नहीं मापी जा सकती। भारतीय कृषि में उत्पादन बढ़ाने के साथ मिट्टी की उर्वरता, भूजल की स्थिति, जैव विविधता और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को भी प्राथमिकता देना आवश्यक है। संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन ने भूमि और जल संसाधनों पर बढ़ते दबाव को वैश्विक खाद्य सुरक्षा की प्रमुख चुनौतियों में शामिल किया है। छत्तीसगढ़ जैसे कृषि और वन-संपदा से समृद्ध प्रदेश के लिए यह विशेष रूप से महत्त्वपूर्ण है कि कृषि विकास की योजनाएँ स्थानीय पारिस्थितिकी के अनुकूल हों। जल-संरक्षण, मृदा स्वास्थ्य, फसल विविधीकरण, जैविक एवं प्राकृतिक कृषि के उपयुक्त विकल्प और स्थानीय कृषि ज्ञान का वैज्ञानिक मूल्यांकन भविष्य की कृषि नीति के महत्त्वपूर्ण आधार बन सकते हैं।यहाँ शासन और अन्नदाता संगठनों, दोनों की जिम्मेदारी सामने आती है। संगठन का दायित्व है कि वह समस्याओं को प्रमाणों, स्पष्ट माँगों और प्राथमिकताओं के साथ प्रस्तुत करे; वहीं शासन-प्रशासन को शिकायतों को केवल ज्ञापन या प्रदर्शन तक सीमित न रखते हुए उनके समाधान की समयबद्ध प्रक्रिया सुनिश्चित करनी चाहिए। लंबित भुगतान की जाँच, उपार्जन केंद्रों की क्षमता का आकलन, खाद की कीमतों और उपलब्धता की निगरानी, सिंचाई परियोजनाओं की प्रगति तथा फसल क्षति के मुआवजे की स्थिति पर नियमित सार्वजनिक जानकारी इस दिशा में उपयोगी कदम हो सकते हैं।लोकतंत्र में शांतिपूर्ण प्रदर्शन और संगठित माँगें नीति-निर्माण को बेहतर बनाने का माध्यम हैं। भारतीय किसान संघ के प्रयासों से प्रदेश के अन्नदाताओं में बढ़ती सक्रियता इस बात का संकेत है कि अपने अधिकारों के प्रति जागरूक समाज अपनी समस्याओं को अधिक प्रभावी ढंग से सामने रख सकता है। लेकिन किसी आंदोलन का वास्तविक परिणाम तभी सामने आता है, जब उसके बाद संवाद हो, जिम्मेदारी तय हो और निर्णयों की समीक्षा की जा सके। अन्नदाताओं की समस्याओं का समाधान राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से नहीं, बल्कि स्पष्ट आँकड़ों, पारदर्शी प्रशासन और जवाबदेह व्यवस्था से संभव है।अंततः, ‘धान का कटोरा’ कहलाने वाले छत्तीसगढ़ की समृद्धि का वास्तविक माप केवल धान के उत्पादन या उपार्जन के आँकड़ों में नहीं, बल्कि अन्नदाताओं के जीवन की खुशहाली में भी दिखाई देना चाहिए। ऋग्वेद का मंत्र “अक्षैर्मा दीव्यः कृषिमित् कृषस्व” (ऋग्वेद 10.34.13) जुए में मत उलझो, बल्कि खेती करो का संदेश देता है। यह मंत्र कृषि और श्रम की महत्ता को रेखांकित करता है। जो हाथ धरती से अन्न उपजाते हैं, उन्हें अपनी उपज का उचित मूल्य पाने और अपने श्रम के सम्मान के लिए बार-बार संघर्ष न करना पड़े, यह किसी भी संवेदनशील शासन व्यवस्था की प्राथमिकता होनी चाहिए। भारतीय किसान संघ की 27 अक्टूबर की ‘अन्नदाता गर्जना रैली’ ने समूचे प्रदेश को यह स्पष्ट संदेश दिया है कि प्रदेश के अन्नदाता अपने अधिकारों के प्रति सजग हैं और अपनी मांगों को संगठित स्वर देने के लिए तैयार हैं। अब शासन-प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वह इस आवाज को सुने और उठे प्रश्नों का उत्तर केवल आश्वासनों से नहीं, बल्कि ठोस निर्णयों, पारदर्शी व्यवस्था और धरातल पर दिखाई देने वाले परिणामों से दे। क्योंकि अन्नदाता का सम्मान केवल शब्दों से नहीं, उसके श्रम के उचित मूल्य और अधिकारों की सुनिश्चितता से होता है।

नशीली दवाइयों और गांजा पर लगातार हो रही कार्रवाई पर श्रमिक नेता संजय सिंह ने बालोद कलेक्टर से मिलकर जताया आभार

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रंग ला रहा संजय सिंह का आमरण अनशन

दल्ली राजहरा लौह नगरी दल्ली राजहरा को नशा मुक्त बनाने के लिए श्रमिक नेता संजय सिंह द्वारा जुलाई माह में किया गया आमरण अनशन आखिरकार रंग लाने लगा है। उनके अनशन के बाद जिला प्रशासन हरकत में आया और अब दल्ली राजहरा में शराब माफियाओं, नशीली दवाइयों और गांजा कारोबारियों पर पुलिस की सख्त और लगातार कार्रवाई चल रही है। बताया जा रहा है कि दल्ली राजहरा क्षेत्र में लंबे समय से अवैध शराब, नशीली टेबलेट और गांजा का कारोबार फल-फूल रहा था।

जिससे युवा पीढ़ी नशे की चपेट में आ रही थी। इसी को लेकर श्रमिक नेता संजय सिंह ने नशा मुक्त बालोद की मांग को लेकर आमरण अनशन किया था। अनशन के बाद प्रशासन ने इस मामले को गंभीरता से लिया। वर्तमान में पुलिस द्वारा लगातार छापेमार कार्रवाई की जा रही है और नशे के कारोबार में लिप्त लोगों को गिरफ्तार किया जा रहा है। इस सकारात्मक कार्रवाई को लेकर श्रमिक नेता संजय सिंह ने बालोद जिला कलेक्टर मैडम से सौजन्य मुलाकात कर उनका आभार व्यक्त किया और आगे भी इसी तरह सख्त कार्रवाई जारी रखने की मांग की ताकि दल्ली राजहरा पूरी तरह से नशा मुक्त हो सके।

कार से हेरोइन और देशी पिस्टल बरामद, राजहरा का 25 वर्षीय युवक गिरफ्तार

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बालोद में ANTF पुलिस की कार्रवाई, 11.83 लाख रुपये की सामग्री जब्तबालोद, 29 अक्टूबर। बालोद पुलिस की एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) ने अवैध मादक पदार्थों और हथियारों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए नया बस स्टैंड के पीछे खड़ी एक कार से 6.40 ग्राम हेरोइन (चिट्टा) और एक देशी पिस्टल बरामद की है। पुलिस ने मामले में दल्लीराजहरा के रेलवे कॉलोनी निवासी 25 वर्षीय लीनेश बंसोड़ उर्फ बाड़ू को गिरफ्तार किया है। आरोपी के कब्जे से मादक पदार्थ, देशी पिस्टल, मोबाइल फोन और टाटा हेक्सा कार सहित कुल 11 लाख 83 हजार रुपये की सामग्री जब्त की गई है।पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार, 28 अक्टूबर की रात ANTF टीम को मुखबिर से सूचना मिली थी कि नया बस स्टैंड बालोद के पीछे सफेद रंग की टाटा हेक्सा कार क्रमांक CG 17 KM 4455 में बैठा एक व्यक्ति हेरोइन और देशी पिस्टल रखे हुए है। सूचना पर वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराते हुए पुलिस टीम गवाहों के साथ मौके पर पहुंची।

कार की तलाशी लेने पर डैशबोर्ड के अंदर पारदर्शी झिल्ली में रखा लगभग 6.40 ग्राम हेरोइन तथा एक देशी पिस्टल बरामद हुई। पूछताछ में आरोपी ने अपना नाम लीनेश बंसोड़ उर्फ बाड़ू, पिता सुनील बंसोड़, उम्र 25 वर्ष, निवासी वार्ड क्रमांक 21, रेलवे कॉलोनी, राजहरा, थाना दल्लीराजहरा, जिला बालोद बताया। पुलिस के अनुसार, आरोपी देशी पिस्टल के वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका।पुलिस ने बरामद हेरोइन की अनुमानित कीमत 1 लाख 28 हजार रुपये, देशी पिस्टल की कीमत 50 हजार रुपये, आईक्यू कंपनी के मोबाइल फोन की कीमत 5 हजार रुपये तथा टाटा हेक्सा कार की कीमत 10 लाख रुपये आंकी है। इस प्रकार कुल 11 लाख 83 हजार रुपये की सामग्री जब्त की गई है। आरोपी के विरुद्ध थाना बालोद में एनडीपीएस एक्ट की धारा 22(ख) एवं आर्म्स एक्ट की धारा 25 के तहत अपराध पंजीबद्ध कर वैधानिक कार्रवाई की गई है। पुलिस मामले में मादक पदार्थ और हथियार के संबंध में आगे की विवेचना कर रही है।यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक बालोद किरण गंगाराम चव्हाण के निर्देशन तथा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक चन्द्रकांत गवर्ना एवं एसडीओपी बालोद विनय साहू के मार्गदर्शन में की गई। कार्रवाई में थाना प्रभारी निरीक्षक शिशुपाल सिन्हा, आरक्षक बनवाली साहू, चुलेन्द्र कुर्रे, भूपेश साहू, संजय सोनी एवं ANTF बालोद की टीम की सराहनीय भूमिका रही। बालोद पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि मादक पदार्थों के अवैध कारोबार और अवैध हथियारों से संबंधित किसी भी गतिविधि की जानकारी तत्काल पुलिस को दें तथा नशे एवं अवैध हथियारों के विरुद्ध पुलिस कार्रवाई में सहयोग करें।

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