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नक्सलियों को पसंद नहीं है बस्तर के बच्चों का राष्ट्रप्रेम पढना लिखना

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  •  नक्सलियों का राष्ट्रविरोधी और शिक्षा विरोधी चेहरा हो गया है अब बेनकाब
  • सहन नहीं करते शिक्षा और तिरंगे का सम्मान

अर्जुन झा

जगदलपुर नक्सली जो कारगुजारियां दिखा रहे हैं, उससे साबित हो गया है कि वे आदिवासी हितैषी होने का सिर्फ ढोंग करते हैं। जल जंगल, जमीन और खनिज संपदा पर बस्तर के आदिवासियों के हक की दुहाई देने वाले नक्सली दरअसल नहीं चाहते कि बस्तर के बच्चे पढ़ लिखकर देश की सेवा में योगदान दें, देशभक्त बन जाएं। उन्हें तो राष्ट्र ध्वज तिरंगे से भी नफरत है। नक्सलियों की यही सोच बस्तर में नक्सलवाद के अंत का एक बड़ा कारण बन रही है।

बस्तर संभाग में एक के बाद एक कुल 9 शिक्षादूतों की हत्या और नक्सली स्मारक पर स्वतंत्रता दिवस के दौरान तिरंगा फहराने का शानदार साहस दिखाने वाले युवक की हत्या इन तथ्यों को पुख्ता करते हैं। नक्सली पहले शाला भवनों सरकारी बिल्डिंगों में आगजनी, सड़कों, पुल पुलियों को बम से उड़ाने का काम किया करते थे। यह घटनाएं उनकी शिक्षा और विकास विरोधी सोच को दर्शाती रही हैं। नक्सलगढ़ के गांवों में सुरक्षा बलों के कैंप स्थापित होने और फोर्स की पहुंच बढ़ जाने के बाद इस तरह की घटनाएं थम गईं हैं। मगर अब अपनी शिक्षा विरोधी सोच को आगे बढ़ाते हुए नक्सलियों ने अपना पैतरा बदल लिया है। अब वे बस्तर के बच्चों को सुपोषित बनाने, उनके बीच ज्ञान का उजियारा फैलाने वाले आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और शिक्षदूतों को खत्म कर बस्तर संभाग के बच्चों को कुपोषित और अशिक्षित बनाए रखने का अभियान चला रहे हैं। अपने इस मिशन के तहत नक्सली बस्तर संभाग में नौ शिक्षादूतों और दो आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को मौत के घाट उतार चुके हैं। सुकमा जिले में चार शिक्षादूतों और बीजापुर

जिलों में पांच शिक्षादूतों के साथ ही दो आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की हत्या नक्सली कर चुके हैं। नक्सलियों का राष्ट्र विरोधी चेहरा तब सामने आया, जब उन्होंने सुकमा जिले के सिलगेर में नक्सली स्मारक पर 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस की खुशी में तिरंगा फहराने वाले एक आदिवासी युवक की जान नक्सलियों ने ले ली थी। ये घटनाएं नक्सलियों के चाल, चरित्र और चेहरे को उजागर करती हैं। बता दें कि शिक्षादूत की भूमिका वे युवक निभाते हैं, जो पढ़े लिखे होते हैं और गांवों के बच्चों को शिक्षित बनाने का जिनमें जुनून होता है। उन्हें एवज में महज दस हजार रुपए का मानदेय मिलता है। ये युवा उन स्कूलों को पुनः खोलकर शिक्षा की रौशनी बिखेरते हैं, जिन्हें नक्सलियों ने ही बंद करा दिया था।

फिर एक शिक्षा दूत की हत्या

नक्सलियों बस्तर संभाग के बीजापुर जिले में फिर एक शिक्षा दूत की हत्या कर दी है। जिले के गंगालूर थाना क्षेत्र के तोड़का गांव में नक्सलियों ने 25 वर्षीय शिक्षादूत कल्लू ताती पिता मंगल ताती निवासी तोड़का की बेरहमी से हत्या कर दी। कल्लू ताती गंगालूर क्षेत्र के नेंड्रा स्कूल में बच्चों को पढ़ाता था। जानकारी के मुताबिक सोमवार शाम स्कूल से लौटते समय नक्सलियों ने कल्लू ताती का अपहरण कर लिया था और देर रात उन्हें मौत के घाट उतार दिया। घटना से पूरे इलाके में दहशत का माहौल है। पुलिस घटना की जांच में जुट गई है। बस्तर संभाग के दुर्गम और नक्सल प्रभावित इलाकों में लंबे समय तक स्कूल बंद रहे हैं। ऐसे में शासन ने स्थानीय युवाओं को शिक्षादूत के रूप में नियुक्त कर स्कूलों को पुनः संचालित करने का प्रयास किया है। उनकी वजह से कई गांवों में शिक्षा की लौ फिर से जल उठी है और बच्चे स्कूल लौटने लगे हैं। बंद पड़े स्कूलों के पुनः संचालन के बाद से अब तक नक्सली बीजापुर जिले में कुल शिक्षादूतों की हत्या कर चुके हैं।

बड़े घर परिवार में बड़ी धूमधाम से मनाया गया प्रमुख पारंपरिक लोक त्योहार नवा खानी

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बस्तर बस्तर जिले के मधोता खैरगुड़ा के बड़े घर परिवार में नवा खानी पर्व बड़े धूमधाम से मनाया गया। यह पर्व बस्तर वासियों का प्रमुख पारंपरिक लोक त्योहार है, जो नए धान की फसल के आगमन की खुशी में मनाया जाता है।

इस पर्व के दौरान, धाकड़ समुदाय के लोग अपने खेतों में नए धान की बालियों को तोड़ते हैं और फिर पूजा अर्चना कर उन्हें अपने इष्ट देवताओं को अर्पित करते हैं। इसके बाद, वे नए धान को कुटकर मिश्रण तैयार कर पूरे परिवार के सदस्यों को टीका लगा कर नवा खानी पर्व मनाते हैं चावल से बने खीर पुड़ी दाल बड़ा और अन्य पारंपरिक व्यंजनों का भोग देवताओं को लगाते हैं और फिर परिवार के साथ मिलकर प्रसाद के रूप में भोजन करते हैं। परिवार के सदस्य एक दूसरे को प्रणाम (जुहार भेंट) कर आशीर्वाद लेते हैं।

नवाखाई पर्व का महत्व बस्तर वासियों के लिए बहुत अधिक है, क्योंकि यह उनके इष्ट देवी देवताओं को सम्मानित करने और नए अनाज की फसल का जश्न मनाने का अवसर है। यह पर्व धाकड़ समुदाय की संस्कृति, परंपरा और इष्ट देवी देवताओं के प्रति श्रद्धा का प्रतीक है।

सड़क दुर्घटना में पिता- पुत्री की दर्दनाक मौत

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बालोद :- डौंडीलोहारा सड़क दुर्घटना में  कोंडे निवासी सुरेंद्र कुमार नेताम  अपनी बेटी के साथ मोटरसाइकिल क्रमांक सीजी -24 N-3640 अझोली स्कूल के पास ही ट्रक और मोटरसाइकिल  की भिडंत से मोटरसाइकिल के परखच्चे उड़ गए ।एवं मोटरसाइकिल चालाक सुरेन्द्र कुमार नेताम दुर्घटना स्थल में ही मौके पर ही मौत हो गई  तथा गंभीर रूप से घायल अवस्था में नजदीकी अस्पताल ले जाया गया जहां उसके बेटी  को भी मृत घोषित कर दिया गया ।

सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार मृतक सुरेंद्र कुमार नेताम धोबेदण्ड पंचायत के ग्राम कोंडे का रहने वाला था। जिसका ससुराल डौंडीलोहारा के आसपास बताया है घटना के पश्चात् पुलिस मौके पर पहुंचकर परिजन को सूचित कर पतासाजिश कर सूचना देने का प्रयास किया जा रहा हैl

 

राष्ट्रीय राजमार्ग NH-63 बना मुसीबत का रास्ता

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  • छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और तेलंगाना को जोड़ने वाला मुख्य मार्ग बदहाल, यात्रियों और वाहन चालकों को भारी परेशानी

बीजापुर 29 अगस्त।छत्तीसगढ़ के बस्तर से तेलंगाना के निजामाबाद तक फैला राष्ट्रीय राजमार्ग एनएच-63 इन दिनों भारी बदहाली का शिकार है। लगभग 550 किलोमीटर लंबे इस मार्ग में छत्तीसगढ़ का हिस्सा 220 किलोमीटर, महाराष्ट्र का 60 किलोमीटर और तेलंगाना का 270 किलोमीटर है। इनमें महाराष्ट्र के 60 किलोमीटर हिस्से की हालत सबसे ज्यादा खराब है — खासकर लगभग 30 किलोमीटर का stretch तो पूरी तरह से जर्जर हो चुका है।

यात्री और वाहन चालक बेहाल

इस बदहाल सड़क के कारण पिछले 2-3 वर्षों से बसें, मालवाहक गाड़ियाँ और यात्री बुरी तरह से परेशान हैं। बारिश के मौसम में यह स्थिति और भी भयावह हो जाती है। सड़क पर गहरे गड्ढे पड़ चुके हैं, जिनमें भारी वाहन फंस जाते हैं। इन फंसी हुई गाड़ियों को निकालने के लिए जेसीबी, क्रेन और ट्रैक्टरों की मदद लेनी पड़ती है। कई बार एक ही वाहन एक से अधिक जगहों पर फंस जाता है, जिससे यात्रियों की स्थिति बेहद दयनीय हो जाती है।

जंगलों से घिरा मार्ग, सुरक्षा भी बनी चुनौती

इस मार्ग में अधिकांश हिस्सा जंगलों से घिरा हुआ है और गांव बहुत कम हैं, जिससे यात्रियों को न सिर्फ सड़क की खराबी बल्कि सुरक्षा की भी चिंता सताती है। मोबाइल नेटवर्क की कमी और सहायता की अनुपलब्धता इस मार्ग को और अधिक खतरनाक बना देती है।

प्रशासन की उदासीनता पर सवाल

जहां छत्तीसगढ़ और तेलंगाना की ओर सड़क की स्थिति अपेक्षाकृत ठीक है, वहीं महाराष्ट्र के हिस्से की सड़क की स्थिति को लेकर राज्य सरकार और प्रशासन की गंभीर उदासीनता सामने आ रही है। 2019-20 में निर्मित यह सड़क मात्र 5-6 साल में ही इतनी खराब हो चुकी है कि कुछ बस ऑपरेटरों ने इस मार्ग पर सेवाएं बंद कर दी हैं। इससे यात्रियों को वैकल्पिक मार्गों से लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है।

जनहित में माँग: जल्द हो मरम्मत

जनता की ओर से यह मांग बार-बार उठ रही है कि महाराष्ट्र शासन तत्काल इस दिशा में ठोस कदम उठाए और इस मार्ग की मरम्मत कराए। यह सिर्फ तीन राज्यों को जोड़ने वाला एक मार्ग नहीं, बल्कि हजारों लोगों की जीवन रेखा है — जिसमें व्यवसाय, शिक्षा, स्वास्थ्य और आवागमन की अनेक जरूरतें जुड़ी हुई हैं।

जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है कि इस विषय को प्रशासन तक पहुँचाया जाए ताकि जल्द से जल्द कार्रवाई हो सके। यह समाचार जनहित में प्रकाशित किया गया है।

जिला अस्पताल बालोद में चार पीजी डॉक्टरों की नियुक्ति, स्वास्थ्य मंत्री के प्रति आभार

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बालोद, जिला अस्पताल बालोद में लंबे समय से विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी बनी हुई थी, जिससे आमजन को इलाज के लिए अन्य जिलों में भटकना पड़ रहा था। इस गंभीर समस्या को देखते हुए भाजपा नेताओ व जिला पंचायत उपाध्यक्ष एवं चेयरमेन इंडियन रेडक्रॉस सोसायटी रायपुर श्री द्वारा प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री माननीय श्याम बिहारी जायसवाल को मांग पत्र सौंपा गया था।

मांग पत्र पर त्वरित संज्ञान लेते हुए प्रदेश सरकार ने जिला अस्पताल बालोद हेतु चार पीजी डॉक्टरों की बॉन्ड पोस्टिंग के आदेश जारी किए हैं। नियुक्त किए गए डॉक्टर इस प्रकार हैं –

1. डॉ. मधु (MS Ophthalmologist)

2. डॉ. अविनाश कुमार मंडावी (MD Anesthesia)

3. डॉ. निरंजन बेहेरा (MS ENT)

4. डॉ. शरथ बाबू वी.एस. (MD General Medicine)

इन विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति से जिला अस्पताल बालोद में चिकित्सा सेवाओं की गुणवत्ता में वृद्धि होगी और मरीजों को अब धमतरी, दुर्ग या रायपुर रेफर होने की आवश्यकता कम पड़ेगी।

तोमन साहू ने इस महत्वपूर्ण पहल के लिए माननीय स्वास्थ्य मंत्री का आभार जताते हुए कहा कि सरकार का यह कदम जिले की बड़ी आबादी के लिए राहतकारी सिद्ध होगा। साथ ही उन्होंने अपेक्षा जताई कि शेष रिक्त विशेषज्ञ पद भी शीघ्र भरे जाएंगे।

क्षेत्रीय जनता में खुशी की लहर – स्वास्थ्य मंत्री और भाजपा सरकार पर विश्वास बढ़ा

जिला अस्पताल बालोद में चार विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति की खबर मिलते ही जिले की जनता में हर्ष और संतोष का वातावरण है। लंबे समय से अस्पताल में विशेषज्ञों की कमी के कारण मरीजों को कठिनाई का सामना करना पड़ता था, किंतु अब एनेस्थीसिया, ईएनटी, नेत्र रोग और मेडिसिन जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञ सेवाएँ स्थानीय स्तर पर उपलब्ध होंगी।

जनता ने इस पहल के लिए जहाँ प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री माननीय श्याम बिहारी जायसवाल को धन्यवाद दिया है, वहीं भाजपा नेताओ मे प्रदेश महामंत्री भाजपा यशवंत जैन जिलाध्यक्ष भाजपा चेमन देशमुख जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्री तोमन साहू के प्रयासों की भी सराहना की है। लोगों का कहना है कि उनके द्वारा समय-समय पर उठाई गई मांगें अब धरातल पर साकार हो रही हैं।

क्षेत्रीय लोगों का विश्वास स्वास्थ्य मंत्री और भाजपा सरकार दोनों के प्रति और प्रगाढ़ हुआ है। आमजन का मानना है कि इस निर्णय से न केवल बेहतर स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध होंगी बल्कि ग्रामीण और गरीब तबके की जानें भी सुरक्षित होंगी।

 

अज्ञात पुरुष की संदिग्ध मौत,झाड़ियों में मिला सड़ी गली शव

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बालोद:- जिले के गुरुर थाना क्षेत्र से आज सुबह नारागांव के पास के झाड़ियों में एक अज्ञात पुरुष की सड़ी – गली मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई । यह घटना नारागांव के पास झाड़ियों का हैं जहां हेमू ठाकुर उम्र 60 वर्ष जो पिपरछेड़ी का रहने वाला था । प्राप्त जानकारी के अनुसार मृतक 19 अगस्त को घर से बिन बताए लापता हुआ था। ग्रामीणों ने सूचना देने पर गुरुर पुलिस और दुर्ग से फोरेंसिक टीम जांच के लिए पहुंची जांच के दौरान शव 3-4 दिन का पुराना बताया जा रहा है । अब जांच के बाद ही मौत का असली वजह स्पष्ट नहीं हुआ हैं मामले में हत्या के सभी पहलुओं पर जांच जारी है ।

हमें जीवन मूल्य भी सिखाते हैं खेल: मेयर संजय पाण्डे

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  • राष्ट्रीय खेल दिवस पर मैराथन दौड़ का आयोजन

जगदलपुर नगर के धरमपुरा पीजी कॉलेज मैदान से निकली मैराथन दौड़ केवल एक खेल आयोजन नहीं, बल्कि यह राष्ट्रीय खेल दिवस पर युवाओं के जोश और भारत की खेल परंपरा के प्रति सम्मान का प्रतीक भी बन गई। हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद की जयंती पर आयोजित इस दौड़ ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि खेल केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का सशक्त साधन है।

कार्यक्रम की शुरुआत मेजर ध्यानचंद के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उनकी स्मृति को नमन करने से हुई। इसके बाद हरी झंडी दिखाकर दौड़ का शुभारंभ किया गया। खेल भावना से सराबोर इस आयोजन में युवा धावकों का उत्साह देखते ही बन रहा था। इस अवसर पर जनप्रतिनिधियों से लेकर प्रशासनिक अधिकारी और शिक्षा जगत से जुड़े लोग मौजूद रहे। महापौर संजय पाण्डे, नगर निगम अध्यक्ष खेमसिंह देवांगन, एमआईसी सदस्य निर्मल पाणिग्रही, लक्ष्मण झा, संग्राम सिंह राणा, जिला पंचायत सीईओ प्रतीक जैन, नगर निगम आयुक्त प्रवीण कुमार वर्मा, एसडीएम ऋषिकेश तिवारी, जिला शिक्षा अधिकारी बलिराम बघेल, पार्षद पूनम सिन्हा, अतुल शुक्ला, कोटेश्वर नायडू सहित शिक्षा और खेल विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे। यह व्यापक भागीदारी इस बात का प्रमाण है कि खेल समाज को एकजुट करने की क्षमता रखते हैं। महापौर संजय पांडे ने कहा कि खेल न केवल शरीर को मजबूत बनाते हैं, बल्कि अनुशासन, धैर्य और टीम भावना जैसे जीवन मूल्य भी सिखाते हैं। यही कारण है कि मेजर ध्यानचंद जैसे महान खिलाड़ी की जयंती को राष्ट्रीय खेल दिवस के रूप में मनाना भारतीय खेल इतिहास की सबसे बड़ी उपलब्धि मानी जाती है। यह दौड़ केवल एक प्रतियोगिता नहीं थी, बल्कि यह युवाओं को यह याद दिलाने का प्रयास था कि यदि हम स्वस्थ और सशक्त राष्ट्र चाहते हैं तो खेलों को शिक्षा और जीवनशैली का अभिन्न हिस्सा बनाना होगा।

मेजर ध्यानचंद ने अपने अद्भुत खेल कौशल से भारत को हॉकी में विश्वशक्ति बनाया। उनकी प्रतिभा, समर्पण और अनुशासन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। ऐसे आयोजनों से उनकी विरासत जीवित रहती है और नई पीढ़ी को यह संदेश मिलता है कि कठिन परिश्रम और निष्ठा से ही सफलता की राह तैयार होती है।

बालोद पुलिस द्वारा जिले में निरंतर साइबर सुरक्षा, नशामुक्ति एवं यातायात जागरूकता कार्यक्रम आयोजन

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आज दिनांक 28.08.2025– को पुलिस अधीक्षक महोदय  योगेश कुमार पटेल के कुशल नेतृत्व एवं दिशा-निर्देशन एवं अति. पुलिस अधीक्षक श्रीमती मोनिका ठाकुर के मार्गदर्शन व एसडीओपी  देवांश सिंह राठौर के पर्यवेक्षण में बालोद पुलिस द्वारा जिले में निरंतर साइबर सुरक्षा, नशामुक्ति एवं यातायात जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

इसी क्रम आज थाना लोहारा क्षेत्र के ग्राम धनगांव में आयोजित रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के ’ वित्तीय समावेशन संतृप्ति अभियान ’के तहत भारतीय स्टेट बैंक और अन्य बैंकों के संयुक्त शिविर में जाकर ग्रामवासी सरपंच. पंच.स्कूली छात्र छात्राओं परिजनों को साइबर संबंधी अपराधों के बारे में विस्तृत जानकारी देकर लोगों को  अपराधों से बचाव हेतु ठगी के तरीकों जैसे सोशल मीडिया प्लेटफार्म जैसे facebook. Instagram.पर शॉपिंग न करने, शॉपिंग के लिए वैध ई कॉमर्स साइट का सावधानी पूर्वक उपयोग करने ,व्हाट्सअप ,इंस्टाग्राम आदि सोशल मीडिया प्लेटफार्म में  प्राप्त किसी भी ट्रेडिंग ऐप या लिंक को नहीं खोलने ,किसी भी प्रकार के खबरों की सत्यता को जांचे बिना  सोशल मीडिया पर शेयर नहीं करने की जानकारी दी गई।

शिविर में लोगों को .apk फाइल के बारे जानकारी दिया गया बताया गया कि यह फाइल आपके मोबाइल से डेटा चोरी कर सकती है, बैंकिंग ऐप्स फोन पे . को हैक कर सकती है या स्पाईवेयर इंस्टॉल कर सकती है।”Unknown Sources” से इंस्टॉलेशन की अनुमति हमेशा बंद रखने का सुझाव दिया गया।

ऑनलाइन धोखाधड़ी की शिकायत हेतु 1930 या www.cybercrime.gov.in पर रिपोर्ट करने, साइबर जागरूक रहने के लिए साइबर प्रहरी एवं साइबर दोस्त को सोशल मीडिया पर फॉलो करने की जानकारी दी गई।

कार्यक्रम के दौरान शिविर में आए लोगों को यातायात के नियमों से अवगत कराकर कम उम्र के बच्चों को वाहन न चलाने, सिग्नल रूल्स फॉलो करने, प्रॉपर सीटबेल्ट एवं हेलमेट लगाने व अन्य ट्रैफिक रूल्स बताया जाकर जागरूक किया गया।

जागरूकता के दिशा में एक सशक्त कदम:-

पुलिस अधीक्षक श्री योगेश कुमार पटेल के निर्देशन में जिले के अन्य विद्यालयों एवं अन्य स्थानों में इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रम लगातार आयोजित होते रहेंगे ताकि साइबर सुरक्षित, नशामुक्त और कानून-सचेत समाज का निर्माण हो सके।

उक्त कार्यक्रम में मुख्य अतिथि श्रीमती रिनी अजीत छत्तीसगढ़ प्रभारी . एवं रीजनल डायरेटर आर बी आई एवं विभिन्न बैंकों के ब्रांच मैनेजर एवं पुलिस विभाग से एसडीओपी श्री देवांश सिंह राठौर ,, थाना प्रभारी लोहारा श्री मुकेश सिंह और थाना स्टाफ  एवं  साइबर सेल से प्रधान आरक्षक रुमलाल चुरेंद्र ,आरक्षक रविकांत और ग्रामवासी उपस्थित रहें।

रेडक्रॉस गतिविधियों को जन-जन तक पहुंचाने पर चर्चा

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बालोद :–भारतीय रेडक्रास सोसायटी जिला शाखा बालोद के प्रबंध समिति की बैठक दिनांक को जिला अस्पताल बालोद में आदरणीय कलेक्टर मैडम दिव्या उमेश मिश्रा के अध्यक्षता में संपन्न हुआ। इस बैठक में प्रबंध समिति के सदस्यों के साथ विभिन्न बिंदुओं पर चर्चा की गई, जिसमें सदस्यता अभियान पर चर्चा पर अध्यक्ष एवं सदस्यों के द्वारा सुझाव आया कि सभी सरकारी अधिकारियों, कर्मचारियों, अनुविभागीय अधिकारियों, सभी पंचायत प्रतिनिधियों को रेडक्रास सदस्यता दिलाने पर जोर दिया गया। अध्यक्ष द्वारा प्रत्येक कार्य के लिए अलग से अनुमानित बजट बनाकर प्रस्तुत करने का सुझाव दिया गया। प्राथमिक सहायता प्रशिक्षण शिविर का आयोजन प्रत्येक महाविद्यालय, स्कूलों एवं दुर्घटनाग्रस्त क्षेत्र में जहां पर अक्सर दुर्घटनाएं होती है। ऐसे जगहों पर प्रशिक्षण दिये जाने हेतु जिला संगठक को आदेशित किया गया। जूनियर रेडक्रॉस के अंतर्गत जिले के समस्त शैक्षणिक संस्थाआओ का पंजीयन कराने पर जोर दिया गया,और डीईओ,और सभी बीईओ को आत्मानंद स्कूल को भी रेडक्रास की गतिविधियों से जोड़ने की सलाह दी गई। रेडक्रास की गतिविधियां बढ़ाने के लिए जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला बाल विकास द्वारा छोटी-छोटी गतिविधियों से रेडक्रॉस को जन जन तक पहुंचाने हेतु सुझाव दिया गया। साथ ही कोई भी संस्था सीएमएचओ बालोद के अनुमति बिना कहीं भी रक्तदान शिविर नहीं लगाने का निर्देश दिया गया । जिला स्तरीय मेगा स्वास्थ्य शिविर रेडक्रास के बैनर तले सार्वजनिक उपक्रमों के साथ मिलकर आयोजित करने का सुझाव प्राप्त हुआ। सी.एस. आर और रेडक्रास की बैठक करने की बात कही गई, सदस्यो द्वारा रेडक्रास के साथ क्षेत्र में विशिष्ट कार्य करने वाले संस्था ,कॉलेज एवं काउंसलर को पुरस्कृत करने को कहा गया।प्राथमिक व माध्यमिक स्तर के शिक्षकों को हाइजीन ,पाक्सो, सड़क सुरक्षा, अग्नि सुरक्षा व साइबर क्राइम की जानकारी हेतु बीईओ,व डीईओ के माध्यम से स्कूलों को दिए जाने हेतु निर्देशित किया गया ।राज्य चेयरमेन तोमन साहु ने भी अपने विचार प्रस्तुत करते हुए कहा कि हमारे ग्रामीण क्षेत्रों में कैंसर जागरूकता की कमी के कारण हम कैंसर के शिकार हो जाते हैं जिससे बचने के लिए सभी को कैंसर जागरूकता कार्यक्रम चलाने की सलाह दिया गया।

ज़िला चेयरमेन डॉक्टर प्रदीप जैन ने टी.बी मुक्त भारत अभियान के तहत सभी को निक्षय मित्र बनने एवं रक्तदान हेतु वेबसाइट बनाने की बात कही। रेडक्रास अध्यक्ष ने प्रबंध समिति के सभी सदस्यों के लिए आई कार्ड व डोनेशन व सदस्यता अभियान के लिए क्यूआर कोड सभी जगह पर चस्पा करने हेतु सुझाव प्राप्त हुआ। आज विभिन्न समिति के तहत वित्त समिति ,जूनियर रेडक्रास उप समिति , यूथरेडक्रास उप समिति , स्वास्थ्य समिति ,आपदा प्रबंधन समिति, सेंट जॉन एंबुलेंस समिति का गठन किया गया। बैठक के अंत में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी व सचिव श्री डा.जे.एल. उइके द्वारा आए हुए सभी सदस्यों का आभार प्रदर्शन किया गया एवं राष्ट्रगान के साथ बैठक की समाप्ति की घोषणा की गई ।

 

इस बैठक में प्रमुख रूप से कलेक्टर बालोद एवं अध्यक्ष रेडक्रॉस श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा , राज्य चेयरमैन तोमन साहू, एसडीएम नूतन कंवर, जिला चेयरमेन डॉ.प्रदीप जैन, सिविल सर्जन श्री माली, जिला उपसभापति कमला वर्मा, जिला कोषाध्यक्ष रूप नारायण देशमुख, कमलेश सोनी उपाध्यक्ष नगर पालिका परिषद बालोद, डॉ अजय साहू , डीईओ योगदास साहू,समस्त विकासखंड के शिक्षा अधिकारी, जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला बाल विकास विभाग,आरटीओ अधिकारी,,डॉ जे.के खलको प्राचार्य महाविद्यालय बालोद, दिनेश तापड़िया ,अकबर तिगाला,शरद ठाकुर ,अश्विन बारले, एनुका सार्वा, राधा कौशिक, राकेश द्विवेदी, अंचल प्रकाश साहू, किशोर मेहरा खेल अधिकारी,चंद्रशेखर पवार, भेखराम साहू, रघुनंदन गंगबेर एवं अन्य सदस्य उपस्थित थे।

कांग्रेस में यह कैसा साजिश का खेल; जुझारू आदिवासी अध्यक्ष बैज को पचा नहीं पा रहे सत्तामोही नेता?

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  •  अध्यक्ष नहीं, नेताओं को नीयत बदलने की दरकार
  • जो लड़ाका है, उसे हटाने की साजिश रच हैं कांग्रेस के पिटे मोहरे
  • जख्मी पार्टी को और भी घायल करने पर तुले नेता

अर्जुन झा-

जगदलपुर वैसे तो पूरे देश में कांग्रेस अपनी आंतरिक गुटबाजी और टांग खिंचाई की राजनीति के लिए बदनाम है, मगर छत्तीसगढ़ कांग्रेस में बीते कुछ दिनों से जो बयानबाजी का दौर कांग्रेस के एक खेमे की ओर से शुरू किया गया है, वह एक बड़ी साजिश की ओर इशारा कर रहा है। घर परिवार छोड़कर जो प्रदेश अध्यक्ष पार्टी को मजबूत बनाने के लिए दिन रात एक किए हुए है, जमकर पसीना बहा रहा, बाढ़ में फंसे पत्नी बच्चों की चिंता छोड़ पार्टी की सेवा में लगा हुआ है, उस आदिवासी प्रदेश अध्यक्ष को हटाने तिकड़मबाजी की जा रही है। बेवजह पार्टी की बखिया उधेड़ी जा रही है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा आदिवासी हित में उठाए जा रहे कदमों पर बेड़ियां जकड़ने जैसा है और यह पार्टी के लिए कतई शुभ संकेत नहीं है।

प्रदेश के कुछ बड़े कांग्रेस नेता अचानक फिर सिर उठा चुके हैं। वे कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष को हटाने की बात कह रहे हैं, मगर अपनी इस मांग के पीछे की कोई दलील या वजह नहीं बता रहे हैं, बस रटे जा रहे हैं प्रदेश अध्यक्ष को हटाना है, हटाना है। छत्तीसगढ़ की पूरी कांग्रेस और उसके मैदानी कार्यकर्ता जहां दीपक बैज के नेतृत्व न केवल संतुष्ट हैं, बल्कि उससे आशान्वित भी हैं, वहीं दूसरी ओर सत्तामोही कुछ नेता आम कार्यकर्ताओं की भावनाओं को दरकिनार कर अनाप शनाप बयानबाजी कर रहे हैं। जो नेता भाजपा की दूरदर्शी सोच की वजह से पहली बार राजनीतिक क्षितिज पर उभरे मजदूर और किसान बुजुर्ग से चुनाव हार गए, वही नेता कांग्रेस की मजबूती की दुहाई देते हुए अध्यक्ष बदलने की वकालत कर रहे हैं। यह हास्यास्पद ही नहीं, बल्कि गैर जिम्मेदाराना कदम भी है। जो चौबे जी साजामें फिर से अपना दरबार सजा नहीं पाए, अपनी जमीन बचा नहीं पाए, वही चौबे जी कांग्रेस की जमीन बचाने के लिए प्रदेश अध्यक्ष बदलने की दुहाई दे रहे हैं। लोग तो कह रहे हैं कि आजकल चौबे जी छब्बे जी बनने की फिराक में हैं और इस चक्कर में कहीं वे दुबेजी बनकर न रह जाएं।चर्चा तो यह भी है कि रवींद्र चौबे उन मौका परस्त नेताओं में शुमार हैं, जो अपनी राजनीति चमकाने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं। सभी को मालूम है कि कांग्रेस की राजनीति में उनकी रुचि नहीं रहती है वह कूटनीति में विश्वास करते हैं। एक जमाने में भूपेश बघेल को फूटी आंख भी देखना पसंद नहीं करने वाले रवींद्र चौबे खुद मंत्री बनने के लिए मंच पर ही भूपेश बघेल का चरण चुंबन की हद तक चले गए थे। अति महत्वकांक्षा से ओतप्रोत चौबे जी दीपक बैज को प्रदेश कांग्रेस की बागडोर सौंपे जाने लेकर कभी संतुष्ट नहीं रहे। उनकी शुरू से यही मंशा रही है कि रायपुर के ब्राह्मण पारा या दुर्ग के आसपास के किसी सवर्ण नेता को अध्यक्ष बनाया जाए, जो उनका कहा माने, उनकी हर जरूरत पूरी करे। सूत्रों की बातों पर यकीन करें जब चौबे जी यूपी में चुनाव प्रचार के लिए गए थे और वहां बीमार होकर एक निजी अस्पताल में भर्ती हुए तब उस समय उन्होंने सीएम भूपेश बघेल से अपनी जन बचाने की गुहार लगाई थी, भूपेश बघेल ने भी इस कूटनीतिक पंडित को अपनी राजनीति चमकाने के उद्देश्य से मदद की थी। राजनीति में यह चलन है कि मदद के एवज में टर्म्स एंड कंडीशन लागू होता है कमोबेश अब यही राजनीतिक शर्त और समझौते का कर्ज उतारने के लिए वे इस तरह की बयानबाजी कर रहे हैं। यह तथ्य भी सर्व विदित है कि भूपेश बघेल भी मुख्यमंत्री बनने से पहले तक पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष बनने लालायित रहे हैं। मुख्यमंत्री की कुर्सी चली जाने के बाद उनकी यह लालसा और भी बलवती हो उठी है। ईडी की राडार में पुत्र के आने के बाद बचाव के लिए केंद्र और राज्य सरकारों पर दबाव डालने के लिए अध्यक्ष पद को अनुकूल मानकर एक सोची समझी साजिश के तहत ऎसी बयानबाजी की जा रही है। कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व को झुकाने के लिए तिकड़मबाजी की जा रही है

अनमोल है दीपक बैज का योगदान

दीपक बैज एक सहृदय आदिवासी नेता के रूप में जाने पहचाने जाते हैं। पार्टी के लिए उनका योगदान अनमोल है। जनहित के मुद्दों को लेकर 400 किलोमीटर की पदयात्रा, हसदेव अरण्य को बचाने का मसला हो, बस्तर के जल, जंगल, जमीन और इंद्रावती नदी को बचाने का मुद्दा हो या फिर कवर्धा जिले के साहू परिवार को इंसाफ दिलाने का मसला, दीपक बैज हर मसले पर मुखर रहे हैं। भरी बरसात में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मालकिकार्जुन खड़गे की सभा को सफल बनाने में दीपक बैज ने कोई कसर नहीं छोड़ी थी। मृतप्राय हो चली पार्टी में नई जान फूंकने वाले जिस दीपक बैज के अवदान योगदान की पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी तक ने पत्र लिखकर प्रशंसा की है, उस दीपक बैज को आज परेशान किया जा रहा है। अगर चौबेजी भूपेश के उकसाने पर छब्बेजी बनने का प्रयास कर रहे हैं, तो उन्हें दुबेजी ही बनकर रह जाना पड़ सकता है।

धरा रह जाएगा राहुल गांधी का सपना

कांग्रेस नेता राहुल गांधी सदैव आदिवासी हित की बात करते आए हैं। वे आदिवासियों को ऊंचे सोपान पर देखना चाहते हैं। यही वजह है कि राहुल गांधी ने छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस का नेतृत्व बस्तर के आदिवासी नेता दीपक बैज को सौंपा है। राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री खड़गे और राहुल गांधी के इस निर्णय ने भाजपा को भी सांसत में डाल दिया था और मजबूर होकर भाजपा ने प्रदेश में आदिवासी मुख्यमंत्री बनाया है। यही नहीं भाजपा ने पार्टी का प्रदेश नेतृत्व की जिम्मेदारी भी बस्तर के ही नेता को सौंपी है। इन तथ्यों के हवाले से कहा जा सकता है कि कांग्रेस नेता स्वार्थ के चलते हुए प्रदेश अध्यक्ष को बदलने की जो बात कह रहे हैं, उससे प्रदेश के आदिवासी समुदाय में कांग्रेस के प्रति नाराजगी बढ़ सकती है और यह कांग्रेस के लिए आत्मघाती है।

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