बिग ब्रेकिंग दल्ली राजहरा वार्ड क्रमांक 1 में बीएसपी क्वार्टर नंबर 07 आई वी डी टाइप में रहने वाली अर्पिता चतुर्वेदी उम्र 43 वर्ष नाम की विवाहित महिला ने घर में फाशी लगाकर आत्महत्या कर ली महिला पूर्व में बालोद महाविद्यालय में बायो टेक्नालॉजी अतिथि प्राध्यापक के रूप में सेवाएं दी थी वर्तमान में पुनः अतिथि प्राध्यापक के लिए पत्र जारी हुआ था महिला का पति दल्ली राजहरा में माइंस में उच्च अधिकारी पद पर कार्यरत था यहां से प्रमोशन पर नंदिनी माइंस डीजीएम के पद पर कार्यरत है आत्महत्या का कारण अज्ञात है घटना दिनांक महिला द्वारा पति का फोन न उठाए जाने पर पुलिस थाने में सूचना दी गई जिस पर थाना राजहरा स्टाफ मौके पर पहुंचकर संदिग्ध स्थिति देखने पर घर के दरवाजे तोड़कर देखा गया महिला फांसी पर लड़की हुई दिखी जिस पर पुलिस द्वारा अपने उच्च अधिकारी को सूचित किया गया जिस पर की आज सुबह पुलिस अधिकारी अपने दल बल के साथ मौके पर पहुंचे जिसमें फॉरेंसिक टीम के साथ दल्ली राजहरा सिटी मजिस्ट्रेट सुरेश साहू पुलिस अधीक्षक चित्रा वर्मा मौके पर उपस्थित होकर घटना स्थल की तहकीकात की शव का पंचनामा कर पोस्टमार्टम के लिए भेजागया आगे के कार्यवाही जारी है
कलेक्टर श्रीमती मिश्रा ने विद्युत दुर्घटना में मृत फलेश्वर यादव के पिता को प्रदान किया 04 लाख रूपए अनुग्रह राशि का चेक
बालोद, 29 जुलाई 2025 कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा ने आज संयुक्त जिला कार्यालय स्थित अपने कक्ष में विद्युत दुर्घटना में मृत फलेश्वर यादव के पिता श्री शिव कुमार को 04 लाख रूपए की सहायता राशि का चेक वितरण किया। विद्युत विभाग के कार्यापालन अभियंता ने बताया कि जिले के गुरूर विकासखण्ड के ग्राम घोघोपुरी निवासी श्री फलेश्वर यादव 17 फरवरी 2025 को ग्राम सनौद में आयोजित शादी समारोह में बाजा बजाने आया था। विवाह कार्यक्रम के दौरान समारोह में लगाए गए टेंट मंे बिजली प्रवाहित होने पर वह टेंट में लगे लोहे के संपर्क में आने से फलेश्वर यादव की मृत्यु हो गयी थी। इस घटना के लिए छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी व राज्य सरकार द्वारा मुआवजे के प्रावधान के अनुसार मृतक के उत्तराधिकारी पिता शिवकुमार यादव को चेक के माध्यम से 04 लाख रूपये का मुआवजा राशि प्रदान किया गया है।
बीईओ भारद्वाज का निलंबन आदेश हाईकोर्ट से निरस्त; फिर से सम्हालेंगे जगदलपुर खंड शिक्षा अधिकारी की कुर्सी
- प्रभारी बीईओ वापस भेजे जाएंगे मूल संस्था में
- चार अतिशेष शिक्षकों का पदस्थापना आदेश भी किया गया निरस्त
जगदलपुर विकासखंड शिक्षा अधिकारी जगदलपुर मानसिंह भारद्वाज के निलंबन आदेश को हाईकोर्ट ने निरस्त कर दिया है। भारद्वाज अब फिर से यहां बीईओ की कुर्सी सम्हालेंगे। प्रभारी बीईओ को उनकी मूल संस्था में वापस भेजा जाएगा। इसके साथ ही जिला शिक्षा अधिकारी बीआर बघेल ने युक्तियुक्तकरण के तहत की गई चार शिक्षकों की पदस्थापना के आदेश को रद्द कर दिया है।
उल्लेखनीय है प्रभारी कलेक्टर एवं जिला पंचायत सीईओ प्रतीक जैन द्वारा 6 जून को युक्तियुक्तकरण के लिए शिक्षकों और स्कूलों की गलत जानकारी देने एवं बैठक में उपस्थित न होने के आरोप में जगदलपुर के विकासखंड शिक्षा अधिकारी मानसिंह भारद्वाज को निलंबित कर दिया गया था। उस समय भारद्वाज पारिवारिक शोक कार्यक्रम के सिलसिले में मध्यप्रदेश के सिवनी गए हुए थे। प्रशासन की इस कार्रवाई की वजह से उन्हें यह कार्यक्रम बीच में छोड़कर जगदलपुर लौटना पड़ा था। अपने निलंबन को चुनौती देते हुए मानसिंह भारद्वाज ने बिलासपुर हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। मानसिंह भारद्वाज याचिका की सुनवाई करने के बाद हाईकोर्ट की डबल बेंच द्वारा उनका निलंबन आदेश निरस्त कर उन्हें पुनः उसी कार्यालय में पदस्थ करने का शासन को आदेश शासन को दिया गया है। कोर्ट से मिली इस बड़ी राहत के बाद भारद्वाज जगदलपुर बीईओ कार्यालय में आज ज्वाईनिंग देने पहुंचे। प्रभारी बीईओ अनिल दास की अब वहां छुट्टी होना तय है। उन्हें उनकी मूल संस्था में वापस भेजा जाएगा। खंड शिक्षा अधिकारी मानसिंह भारद्वाज के निलंबन के बाद उनके स्थान पर अनिल दास को प्रभारी बीईओ की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। भारद्वाज ने बताया कि 28 जुलाई को हाईकोर्ट की डबल बेंच ने निलंबन आदेश निरस्त कर दिया है। भारद्वाज ने बताया कि कोर्ट के आदेशानुसार आज बीईओ कार्यालय में अपनी ज्वाइनिंग देंगे। अब देखना होगा कि कोर्ट के आदेश के बाद जिला प्रशासन आहरण एवं वितरण का अधिकार किसे देता है।
4 शिक्षकों की पदस्थापना निरस्त
राज्य शासन द्वारा चलाई गई शिक्षकों के युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया के तहत भारी तादाद में शिक्षक प्रभावित हुए थे। शिक्षकों की नई जगहों के लिए पदस्थापना आदेश जारी किए गए थे। स्कूलों में अतिशेष शिक्षक होने पर उनकी दूसरे स्कूलों में पदस्थापना की गई थी।
जिला शिक्षा अधिकारी बीआर बघेल ने 4 अतिशेष शिक्षकों की पदस्थापना के आदेश को निरस्त करते हुए उन्हें उनकी पूर्व संस्थाओं में भेजने का नया आदेश जारी किया है। इनमें अतिशेष सहायक शिक्षिका एलबी शशि किस्पोट्टा को प्राथमिक शाला मांझीगुड़ा जगदलपुर ब्लॉक से बस्तर ब्लॉक के बागबाहर रोतमा पदस्थ किया गया था। वीणा गुप्ता को बस्तर विकासखंड के भानपुरी भेजा गया था। श्रृंखला पाढ़ी को विवेकानंद विद्यालय जगदलपुर से बस्तर बागमोहलई भेजा गया था। हरदीप कौर को प्राथमिक शाला खूंटपदर से बकावंड विकासखंड के पाहुरबेल में पदस्थापना kaआदेश जारी किया गया। इनके द्वारा प्रस्तुत अभ्यावेदनों के परीक्षण उपरांत स्वास्थ्यगत कारणों का हवाला देते हुए अतिशेष शिक्षक स्थापना आदेश निरस्त कर उन्हें पूर्व में पदस्थ शालाओं में यथावत रखने के लिए आदेश जारी किया गया है।
पर्यावरण को संरक्षित करने धीगरमल ने वनमित्रा चुल्हा का किया आविष्कार
- शासकीय इंजीनियरिंग कॉलेज ने मुख्य शोधकर्ता के प्रयास पर लगाई मुहर
- विज्ञान एवं पौद्योगिक परिषद रायपुर को भेजा पत्र
- छ.ग. विज्ञान एवं प्रौद्योगिक परिषद ने पेटेंट फाईलिंग के लिए नई दिल्ली में सम्बधित विभाग निर्देशक को लिखा पत्र
- वनमित्रा के उपयोग से लकड़ी और गैस की होगी बचत
नवीन गुप्ता
जगदलपुर। पर्यावरण को संरक्षित करने एवं जंगलों की हो रही कटाई से बचाने के लिए शहर के एक 73 वर्षीय मुख्य शोधकर्ता धींगरमल खत्री अपने अथक प्रयास एवं शासकीय इंजीनियरिंग कॉलेज के सहयोग से वनमित्र नामक चुल्हा का आविष्कार किया है। जिसका उपयोग धान के भूसा द्वार संचालित होगा जिसमें लकड़ी की आवश्यकता नाम मात्र होगी। 20 रूपये के खर्च में वनमित्रा चुल्हा से निकलने वाला ईंधन से 50 व्यक्तियों का भोजन तैयार करने की क्षमता है। जिसका उपयोग घर के रसोईसे लेकर उद्योग हेतु समान एवं सहज में किया जा सकता है। शासकीय इंजीनियरिंग कॉलेज जगदलपुर प्राचार्य डॉ. अशोक दुबे, डॉ. हिमांशु अग्रवाल ने मौके का मुआयना कर पर्यावरण संरक्षित के दिशा में बेहतर शोध बतया है। उक्त उपकरण को पेटेंट फाईलिंग के लिये इंजीनियरिंग कॉलेज जगदलपुर द्वारा रायपुर विज्ञान एवं प्रौद्योगिक परिषद को पत्र भेजा जा चुका है। रायपुर से संबंधित विभाग द्वारा मई 2022 को वनमित्र के पेटेंट फाईलिंग के लिये निर्देशक यशवंत देव पनवार विज्ञान एवं औद्योगिकी विभाग रायपुर को पत्र भेजा चुका है। जो दिल्ली में संबंधी विभाग से अनुमति का इंतजार है।
जिले के जगदलपुर कुम्हारपारा निवासी मुख्य शोधकर्ता धींगरमल खत्री के द्वारा वनमित्रा चुल्हा का आविष्कार किया जा चुका है। जिसके पेटेंट फाईलिंग के लिये सबंधित विभाग नई दिल्ली को भेजा जा चुका है। वनमित्रा चुल्हा के निर्माण में शासकीय इंजीनियरिंग कॉलेज प्राचार्य दुबे के मागर्दशन में महाविद्यालय यांत्रिकी विभाग के सहयोगी खत्री द्वारा देश के हित में वन संरक्षण के उद्देश्य से धान भूसा द्वारा संचालित वनमित्रा चुल्हा विकसित किया गया है। जिसमें लकड़ी की आवश्यकता नाम मात्र की होती है तथा यह पूर्ण रूपेण पर्यावरण को संरक्षित कर धान भूसा एवं खरपतवार के उपयोग से संचालित होती है। उक्त चुल्हे में ईंधन के रूप में धान की पलारी सुखे पत्त्ते, घांस, छोटी सूखी झाड़ी इस प्रकार से अन्य सूखी वनस्पति का उपयोग किया जा सकता है। उक्त चुल्हा घर को वायुप्रदूषण मुक्त रखने के लिए चिमनीका उपयोग कर घर के वातावरण को स्वच्छ रखा जा सकता है।
लकड़ी की होगी बचत:-
वनमित्रा चुल्हा का उपयोग से लकड़ी की बचत होगी। ग्रामीण इलाकों में भोजन पकाने के लिये बड़े पैमाने पर जंगलों की कटाई हो रही है जिसे पर्यावरण की समस्या बढ़ने लगी है। उक्त चुल्हा 2 फीट उंचाई एवं गोलाई का आकार का है। जिसमें हवा हेतु इनलेट वाल्व लगाया गया है। बर्नर, फिल्टर, चिमनी, फ्यूट इन्ट्री गेट लगा हुआ है। बताया गया है 20 रूपये के खर्च में 50 व्यक्तियों का भोजन तैयार करने की क्षमता है। उक्त उपकरण का बाजार में लांच करने केन्द्र सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की अनुमति का इंतजार है। वहां से अनुमति मिलते ही यह संबंधित आविष्कार के माध्यम से उपलब्ध होगा।
वनमित्रा चुल्हा के आविष्कार खत्री ने बताया कि वनमित्रा चुल्हा का उपयोग से पेट्रोलियम पदार्थ के आयात का बढ़ता बोझ में वृहद रूप में कमी आयेगी देश के नागरिकों को आर्थिक राहत मिलेगा। उन्होंने बताया कि गांव में गृहणियों को चावल के साथ-साथ पकान हेतु इको फेे्रंडली ईंधन भी सुलभ होगा।
पेटेंट फाईलिंग क्या है?
भारत में पेटेंट प्राप्त करने से मुख्य शोधकर्ता को फाईल करने की तारीख से लगभग 20 वर्षो तक अपना आविष्कार बनाने उपयोग करने और बेचने का पूरा अधिकार मिलता है। यह आविष्कारक के अनुमति के बिना किसी अन्य द्वारा कॉपी या इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है।
जगदलपुर में विश्व हेपेटाइटिस दिवस पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित
जगदलपुर। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संजय बसाक के निर्देशानुसार एवं डी.पी.एम. (शहरी) पी.डी. बस्तिया के मार्गदर्शन में 28 जुलाई 2025 को शहरी क्षेत्र के समस्त स्वास्थ्य केन्द्रों में विश्व हेपेटाइटिस दिवस “Let’s Break It Down” थीम पर मनाया गया। इस अवसर पर स्वास्थ्य विभाग द्वारा आमजन को हेपेटाइटिस बी की गंभीरता, इसके कारणों, लक्षणों एवं बचाव के उपायों की जानकारी देते हुए जागरूक किया गया।

विशेषज्ञों ने बताया कि हेपेटाइटिस बी एक गम्भीर वायरल संक्रमण है, जो मुख्यतः लिवर को प्रभावित करता है। समय पर इलाज नहीं होने पर यह लिवर सिरोसिस, फेल्योर अथवा कैंसर जैसे जानलेवा रोगों का कारण बन सकता है।
कार्यक्रम में बताया गया कि यह संक्रमण संक्रमित रक्त, असुरक्षित यौन संबंध, संक्रमित चिकित्सा उपकरण, तथा मां से बच्चे में प्रसव के दौरान फैल सकता है। टैटू या पियर्सिंग के दौरान अस्वच्छ सुइयों का उपयोग भी इसके प्रसार का कारण बनता है।
हेपेटाइटिस के प्रमुख लक्षणों में अत्यधिक थकावट, भूख न लगना, मतली, हल्का बुखार, पेट दर्द, गहरा रंग का पेशाब, त्वचा और आंखों का पीलापन (पीलिया) आदि शामिल हैं। कई मामलों में प्रारंभिक अवस्था में कोई लक्षण दिखाई नहीं देते, जिससे यह और भी खतरनाक हो जाता है।
बचाव के लिए टीकाकरण सबसे कारगर उपाय बताया गया। नवजात शिशुओं, बच्चों व उच्च जोखिम समूहों के लिए हेपेटाइटिस बी का टीका अनिवार्य बताया गया। साथ ही, सुरक्षित यौन संबंध, स्वच्छ सिरिंज का उपयोग, व्यक्तिगत वस्तुओं को साझा न करना, और टैटू/पियर्सिंग के दौरान सेनेटाइज्ड उपकरणों का इस्तेमाल जैसे सावधानियों पर भी बल दिया गया।
कार्यक्रम के दौरान लोगों को निःशुल्क परामर्श, जानकारी और स्क्रीनिंग सेवाएं भी उपलब्ध कराई गईं।
इस अवसर पर शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र कुम्हारपारा से डॉ. विराट तिवारी, डॉ. मोमीता बसाक, डॉ. नमन जैन, डॉ. अपूर्वा शुक्ला, डॉ. तृषा अवस्थि, प्रशांत श्रीवास्तव, युवराज बघेल, एनी भूषणम, दिनेश सलाम, मीता घोष, डोमेश्वर एवं अनामिका दुबे की उपस्थिति उल्लेखनीय रही। साथ ही बड़ी संख्या में मितानिनें एवं वार्डवासी भी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का उद्देश्य था कि लोगों को इस गंभीर संक्रमण के प्रति सजग किया जाए और समय पर जांच व इलाज कराकर समाज को हेपेटाइटिस मुक्त बनाया जा सके।
मेगा आंकलन और चिन्हांकन शिविर का आयोजन संपन्न हुआ
जगदलपुर समग्र शिक्षा विभाग की ओर से जिला प्रशासन एवं जिला मिशन समन्वयक के सहयोग से विकासखंड स्तरीय दिव्यांग जनों के (विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के) लिए मेगा आंकलन और चिन्हांकन शिविर का आयोजन जिला शिक्षा मिशन समन्वयक ,जिला परियोजना कार्यालय, बीआरसी कार्यालय कुम्हारपारा में लगाया गया।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के पांचवी वर्षगांठ के अवसर पर इस शिविर का आयोजन किया गया था। जिसमें दिव्यांग छात्रों का प्रमाणीकरण, शल्य चिकित्सा हेतु चिन्हांकन, सहायक उपकरण का वितरण, फिजियोथैरेपी ,स्पीच थेरेपी ,सिकल सेल का परीक्षण एवं चिन्हाकन इस शिविर में किया गया।शिविर में आंखों की जांच के लिए नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉक्टर सरिता थॉमस अपने सहयोगी नेत्र सहायक अधिकारी के. हनुमंत राव और अमृत राव के साथ उपस्थित रही। इसी तरह अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉक्टर लखन ठाकुर अपने सहयोगी फिजियोथैरेपिस्ट डॉक्टर रुपेश खेडुलकर के साथ उपस्थित रहे।

शिशु रोग विशेषज्ञ आर.के.एस. राज और मनोरोग विभाग से डॉक्टर रुखसार खान और मोनिका साहू उपस्थित रहे. नाक कान गला रोग विशेषज्ञ नवदीप सिंह ने भी अपनी सेवाएं शिविर में दी ।उदित साहू और सिकल सेल जांच के लिए mlt अंशुला मौजूद रही और अपना सहयोग प्रदान किया। इस अवसर पर कुल 17 बच्चों की सिकल सेल की जांच की गई जिसमें आठ बच्चे सिकल सेल पॉजिटिव पाए गए ।समग्र शिक्षा विभाग से राजेंद्र सिंह ठाकुर BRC हीरालाल नागेश, गोपाल बीसाई, और श्रीमती अनीता मिश्रा के द्वारा इस शिविर में पूर्ण सहयोग कर शिविर को सफल बनाया गया। इस अवसर पर महारानी लक्ष्मीबाई क्रमांक 1 की छात्रा कुमारी महिमा मांझी पिता सुशील मांझी (कक्षा ग्यारहवीं) को बैसाखी का वितरण भी किया गया।
मोदीजी आपके जांगला के ककाड़ीपारा के आदिवासी बच्चों के सपने रौंद डाले साय सरकार ने: विक्रम मंडावी
- ककाड़ीपारा के ग्रामीणों का जज्बे को मिला विधायक विक्रम मंडावी का साथ
- शिक्षा के अधिकार को ख़त्म कर रही है भाजपा सरकार: विक्रम मंडावी
जगदलपुर बस्तर संभाग के बीजापुर जिले के भैरमगढ़ ब्लॉक अंतर्गत जांगला संकुल की प्राथमिक शाला ककाड़ीपारा को बंद किए जाने पर बीजापुर विधायक विक्रम मंडावी ने कड़ी आपत्ति जताई है और भाजपा सरकार पर बड़ा हमला बोला है।

कांग्रेस के मुखर विधायक विक्रम मंडावी ने कहा है बीजापुर जिले के भैरमगढ़ ब्लॉक का ग्राम जांगला वही गांव है, जहां 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आए थे। उसी जांगला संकुल अंतर्गत ककाड़ीपारा गांव में शिक्षा विभाग के युक्तियुक्तकरण के तुगलकी फैसले ने आदिवासी बच्चों के सपनों पर ताला जड़ने की कोशिश की है। इस फैसले के तहत गांव की प्राथमिक स्कूल को बंद कर दिया गया है और बच्चों को 5 किलोमीटर दूर जंगला स्कूल जाने को कहा गया है।

इस अन्यायपूर्ण आदेश के खिलाफ ककाड़ीपारा के ग्रामीणों ने हार नहीं मानी। उन्होंने प्रशासन के फैसले को चुनौती देते हुए गांव की रसोइया पार्वती कोवासी को स्कूल की शिक्षिका की जिम्मेदारी सौंपी। पार्वती ही अब स्कूली बच्चों के लिए मध्याह्न भोजन तैयार करती हैं और बच्चों को भोजन खिलाने के साथ-साथ बच्चों को क, ख, ग सिखाती हैं। बच्चों को मध्याह्न भोजन की व्यवस्था ग्रामीणों द्वारा की जा रही है। तय दिन अनुसार गांव के हर परिवार द्वारा बच्चों के लिए मध्याह्न भोजन की व्यवस्था की जाती है। गांव के ही युवक हरिराम पोयाम बच्चों को स्कूल लाने और घर पहुंचाने की जिम्मेदारी सम्हाल रहे हैं।इस संघर्ष में ग्रामीणों को बीजापुर के विधायक विक्रम मंडावी का साथ मिल गया है। श्री मंडावी ने मंगलवार को ही ककाड़ीपारा स्कूल पहुंचकर बच्चों, रसोइया पार्वती और ग्रामीणों से मुलाकात की। विधायक विक्रम मंडावी स्कूली बच्चों के लिए मध्याह्न भोजन का राशन, बच्चों को स्कूल ड्रेस, कॉपी, पेन और खेल सामग्री आदि लेकर स्कूल पहुंचे थे। ये चीजें उन्होंने बच्चों को वितरित की। विधायक विक्रम मंडावी ने ग्रामीणों में शिक्षा के प्रति जज़्बे को सलाम किया और हर संभव स्कूल के संचालन में सहयोग करने की बात कही। ग्रामीणों और बच्चों से चर्चा करते हुए विधायक विक्रम मंडावी ने कहा, “शिक्षा देश के हर एक नागरिक का मौलिक अधिकार है, भाजपा सरकार युक्तियुक्तकरण के बहाने आदिवासी बच्चों से उनके संवैधानिक अधिकार छीन रही है।” विधायक विक्रम मंडावी ने ककाड़ीपारा के ग्रामीणों के प्रयासों को प्रेरणादायक बताते हुए शिक्षा को जन आंदोलन बनाने व हर गांव में स्कूल खोलने की मांग भाजपा की डबल इंजन की सरकार के आदिवासी मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से की है। साथ ही विधायक विक्रम मंडावी ने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अनुरोध किया कि वे भी इन ग़रीब आदिवासी बच्चों के मन की बात सुनें। ग्रामीणों ने विधायक विक्रम मंडावी को बताया कि कलेक्टर और जिला शिक्षा अधिकारी से बार-बार गुहार लगाने के बावजूद केवल टालमटोल जवाब मिलता रहा है। प्रशासन द्वारा आने वाले समय में स्कूल को पुनः संचालन नहीं किए जाने की स्थिति को देखते हुए हम ग्रामीणों द्वारा गांव के स्कूल को ग्रामीणों को आपसी सहयोग के द्वारा संचालन करने का फैसला लिया है।
कांग्रेस नेता ने भाजपाइयों को कहा- कुत्ते, गीदड़ और कांग्रेसियों को बताया शेर; मच गया बवाल
- सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर की अभद्र टिप्पणी
- आहत भाजपाइयों ने थाने में दर्ज कराई एफआईआर
जगदलपुर सियासत में राजनीतिक दलों के बीच वैचारिक असहमति और मतभेद स्वभाविक है, मगर नेता अक्सर भाषाई मर्यादा लांघ जाते हैं। ऐसा ही कुछ हुआ है बस्तर संभाग के बीजापुर जिले में। यहां एक कांग्रेस नेता के सोशल मीडिया पोस्ट ने बड़ा बवाल खड़ा कर दिया है। इस कांग्रेस नेता ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में भाजपाइयों को कुत्ता, गीदड़ और कांग्रेसियों को शेर बताया है।इसे लेकर भाजपाई खेमा उबल पड़ा है।

बीजापुर कांग्रेस नेता पुरषोत्तम सल्लूर ने अपने सोशल मीडिया फेसबुक अकाउंट में पिछले दिनों एक ऎसी पोस्ट की थी, जिसने भाषाई मर्यादा को तार तार करके रख दिया है। कांग्रेस नेता सल्लूर ने इस पोस्ट में टिप्पणी की है- “भाजपा में सारे कुत्ते गीदड़ को शेर बनाने में लगे हुए हैं और हमारे यहां सभी शेर हैं। बाकी सब समझदार।” यह अभद्र, अमर्यादित और अशोभनीय टिप्पणी भाजपाइयों को नागवार गुजरी है। भाजपा के लोगों ने कहा है कि यह अभद्र व अशोभनीय टिप्पणी कतई स्वीकार योग्य नहीं है, अक्षम्य है। राजनैतिक दलों में वैचारिक लड़ाई स्वभाविक है,साथ ही साथ अपने अपने सरकार में किए गए कार्यों को लेकर तार्किक बहस सहज रूप से किया जाना चाहिए, परंतु कांग्रेस की हमेशा मानसिकता और संस्कार कुंठिता भरा रहता है। इसलिए इस प्रकार की टिप्पणी करने से चूकते नही है, चूंकि वे अन्य दलों के कार्यकर्ताओं को द्वेष भाव से देखते हैं। कांग्रेस नेता एवं पूर्व नगर पालिका उपाध्यक्ष पुरषोत्तम सल्लूर द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पोस्ट पर भाजपाइयों की गई इस अभद्र, अशोभनीय टिप्पणी के विरोध में भाजपा युवा मोर्चा ने बीजापुर कोतवाली पहुंचकर कांग्रेस नेता के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई। भाजपा युवा मोर्चा के नेताओं ने पुलिस प्रशासन से मामले की जांच कर उचित कार्रवाई की मांग की है। तीन दिवस के भीतर कार्रवाई न होने की स्थिति में बीजापुर कोतवाली का घेराव की चेतावनी दी गई है। इस दौरान युवा मोर्चा प्रदेश कार्यसमिति सदस्य फूलचंद गागड़ा, जिला पंचायत सदस्य मैथ्यूज कुजूर, पूर्व युवा मोर्चा महामंत्री गौतम राव, पार्षद अरविंद पुजारी, आईटी सेल सह संयोजक केजी सुधाकर, युवा मोर्चा मंडल अध्यक्ष मिथलेश नाग, मंडल उपाध्यक्ष संदीप तेलम, मंडल महामंत्री दीपक भट्ट, पार्षद संजय रिवानी, पार्षद हितेश साहनी, पार्षद मुकेश राठी, पार्षद विक्रम दूधी, पुरषोत्तम भंडारी, जितेंद्र तेलम, गनपत धुर्वा उपस्थित रहे।
एसडीएम कौशिक ने ली बीईओ, एबीईओ, बीआरसी और संकुल समन्यवकों की बैठक
सोमवार को बीआरसी भवन जगदलपुर में कलेक्टर बस्तर के निर्देशानुसार एसडीएम भरत लाल कौशिक ने विकासखंड शिक्षा अधिकारी, सहायक खंड शिक्षा अधिकारी, बीआरसी और संकुल समन्वयकों की बैठक ली। बैठक में विभिन्न एजेंडो पर दिशा निर्देशदिए गए।
बैठक में एसडीएम श्री कौशिक ने एक एक बिंदु पर विस्तार से चर्चा की और उसे अमल में लाने हेतु निर्देश दिए। शालाओं में पुस्तकों के स्कैनिंग की वास्तविक स्थिति और पूर्ण रूप से पुस्तक वितरण की स्थिति पर एक एक स्कूल की जानकारी मांगी। वर्तमान में चल रही मासिक परीक्षा का हर संस्था में निरीक्षण करने हेतु निर्देश दिए गए। उन्होंने जाति प्रमाण पत्र के टारगेट को कैसे पूरा करें, इस हेतु भी विस्तार से अपनी बाते रखी। इसके पश्चात बीईओ अनिल दास ने संयुक्त संचालक बस्तर द्वारा दिए गए निर्देशों का परिपालन करने हेतु एक पेड़ मा के नाम नोटिफिकेशन को अपलोड करवाने और सभी स्कूलों में एक पेड़ मां के नाम लगवाने हेतु कहा। एबीईओ राजेश गुप्ता ने मध्यान्ह भोजन में गुणवत्ता लाने और कक्ष की साफ सफाई पर विशेष ध्यान देने हेतु कहा। श्री गुप्ता ने विनोबा एप की सतत मॉनिटरिंग करने और जानकारी देने हेतु भी निर्देश दिए। बीआरसी राजेंद्र ठाकुर ने संध्याकालीन क्लास की प्रतिदिन फोटोग्राफ़्स भेजने एवं और पाठ्यक्रम विभाजन कर अध्यापन कराने हेतु कहा। बैठक में जगदलपुर विकासखंड के समस्त सीएसी उपस्थित थे। यह जानकारी भूपेश पाणिग्रही ने दी।
इस गांव में लगा पादरी, पास्टर के लिए नो एंट्री का बोर्ड ; बस्तर में धर्मांतरण के खिलाफ लामबंद होने लगे हैं आदिवासी
- धर्म, संस्कृति, परंपराओं के विनाश से चिंतित हो उठी है आदिम जनजाति
- गांवों में गठित की जा रही हैं निगरानी समितियां भी
अर्जुन झा-
जगदलपुर बस्तर संभाग में धर्मांतरण गंभीर चिंता का विषय बन गया है। ज्यादातर आदिवासियों का धर्मांतरण कराया जा रहा है। चंगाई और प्रार्थना सभाओं की आड़ में धर्मांतरण का खेल चल रहा है। आलम यह है कि यहां मूल आदिवासियों की संख्या निरंतर घटती जा रही है, उनकी पूजा पद्धति, आस्था स्थलों, धर्म परंपराओं और संस्कृति का हास होता जा रहा है। वहीं अपनी माटी और संस्कृति से जुड़े आदिवासियों ने अब धर्मांतरण के खिलाफ शंखनाद कर दिया है। गांवों में बैठकें हो रही हैं। धर्मांतरण की गतिविधियों और संदिग्ध लोगों की आमदरफ्त पर नजर रखने के लिए निगरानी समितियां गठित की जा रही हैं। एक गांव में तो पादरी, पास्टर और मिशनरी से जुड़े लोगों के प्रवेश पर पाबंदी तक लगा दी गई है। इसके लिए बाकायदा गांव के बाहर मुख्य मार्ग पर बोर्ड भी लगाया गया है।

बस्तर संभाग में सात में से एक भी जिला ऐसा नहीं है, जो धर्मांतरण से अछूता हो। संभाग के सभी जिलों के गांव, कस्बों, शहरी क्षेत्रों में मिशनरी की गतिविधियां काफी बढ़ गईं हैं। बस्तर के अंदरूनी क्षेत्रों तक इनकी पैठ काफी बढ़ चुकी है। चर्चों की संख्या में आश्चर्यजनक ढंग से वृद्धि हो गई है। बस्तर के आदिवासी तो जन्मजात भोलेभाले शांत और सरल स्वभाव के आ जाते हैं। वे जल्द ही हर किसी की बातों और प्रभाव में आ जाते हैं, चमत्कारों चमत्कृत विस्मित हो उठते हैं। उनके इसी भोलेपन का नाजायज फायदा धर्मांतरण कराने वाले लोग उठा रहे हैं। नक्सलियों के गढ़ तक में भी ऐसी गतिविधियां बेखौफ चल रही हैं। ऐसे घटनाक्रमों को लेकर अपनी जमीन, संस्कृति, धर्म, आस्था और परंपराओं से जुड़े कट्टर आदिवासी चिंतित हैं। वे अपने समुदाय का अस्तित्व बचाने लामबंद हो रहे हैं। वे समुदाय के लोगों को समझा बुझा रहे हैं कि अपनी आस्था, संस्कृति और परंपराओं से मत डिगो, अपनी जड़ों से जुड़े रहो। ऎसी ही जमीनी पहल कांकेर जिले के भानुप्रतापपुर
ग्राम साल्हे से सामने आई है। साल्हे में धर्मांतरण को लेकर आदिवासी समाज की सर्कल स्तरीय विशेष बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में साल्हे, ईरागांव, ठेकाढोड़ा सहित आसपास के ग्रामों के समाज प्रमुखों, जनप्रतिनिधियों एवं ग्रामीणों ने भाग लिया। बैठक में धर्मांतरण की बढ़ती घटनाओं पर गंभीर चर्चा की गई तथा समाज में इसकी रोकथाम को लेकर रणनीति बनाने पर जोर दिया गया। कार्यक्रम में जिला पंचायत सदस्य देवेंद्र टेकाम, सर्व आदिवासी समाज के जिला उपाध्यक्ष ज्ञानसिंह गौर, जनपद सदस्य प्रमिला उसेंडी, साल्हे सरपंच संतोष पद्दा, ईरागांव सरपंच मनीता नेताम, नरेश कोमरा, पूर्व जनपद सदस्य जीवराखन सलाम, सर्कल अध्यक्ष रामकुमार कोला, सर्कल सचिव पुखराज आंचला, रतन मांडावी, विजय सोरी, हेमंत अमिला, कृष्णा कोसमा सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। में बैठक सामाजिक एकता पर बल दिया गया। बैठक में एक स्वर में कहा गया कि क्षेत्र में बाहरी प्रभावों के चलते पारंपरिक संस्कृति और धर्म पर संकट उत्पन्न हो रहा है। समाज प्रमुखों ने लोगों से अपील की कि वे जागरूक रहें और अपनी पहचान व संस्कृति को बनाए रखने में सहयोग करें। बैठक में यह प्रस्ताव भी रखा गया कि यदि किसी स्थान पर धर्मांतरण की गतिविधियां सामने आती हैं, तो उसकी सूचना तत्काल समाजिक संगठन एवं प्रशासन को दी जाए। साथ ही ग्राम स्तरीय निगरानी समितियां भी गठित की जाएं, जो ऎसी गतिविधियों पर नजर रखेंगी। यह बैठक सामाजिक समरसता बनाए रखने तथा आदिवासी समाज की एकजुटता को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखी जा रही है।
कुड़ाल गांव में नो एंट्री का बोर्ड
मिशनरी गतिविधियों को लेकर आदिवासियों और अन्य समुदायों के ग्रामीणों में आक्रोश चरम पर पहुंच गया है। इसका एक बड़ा उदाहरण कांकेर जिले से ही सामने आया है। कांकेर जिले के भानुप्रतापपुर विकासखंड के ग्राम कुड़ाल में लगा एक बोर्ड सबका ध्यान खींच रहा है। इस बोर्ड पर शीर्षक लिखा है- ₹पास्टर और पादरी काप्रवेश सख्त मना है। ” आगे लिखा है- ‘ग्राम कुड़ाल, थाना भानुप्रतापपुर जिला उत्तर बस्तर कांकेर भारत के संविधान की पांचवी अनुसूची क्षेत्र अंतर्गत आता है। हमारे गांव में पेशा (पंचायत उपबंध अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) अधिनियम 1996 लागू है, जिसके अंतर्गत ग्रामसभा को अपनी परंपरा एवं रूढ़िवादी संस्कृति का संरक्षण करने का अधिकार है। अतः ग्रामसभा के प्रस्ताव के आधार पर हमारे गांव कुड़ाल में ईसाई धर्म के पास्टर, पादरी एवं बाहर गांव से आने वाले किसी भी धर्मांतरित व्यक्ति के प्रवेश एवं ईसाई धर्म की प्रार्थना प्रयोजन एवं धार्मिक आयोजन पर रोक लगाई जाती है।’ कुल मिलाकर यह दृश्य बताता है कि आदिवासी समुदाय धर्मांतरण से किस कदर आहत है।
कहां हैं नन मामले में शोर मचाने वाले
एक दिन पहले ही दो ननों को ह्यूमन ट्रैफिकिंग और धर्मांतरण के आरोप में दुर्ग स्टेशन पर जीआरपी द्वारा हिरासत में लिए जाने को लेकर संसद में कांग्रेस और यूडीएफ ने जमकर हंगामा मचाया था। मीडिया में बयानबाजी कर भाजपा सरकारों पर हमला बोला गया। ये नन बस्तर संभाग के नारायणपुर जिले की तीन आदिवासी युवतियों को कथित नर्सिंग ट्रेनिंग के लिए बाहर ले जा रही थीं। बजरंग दल की शिकायत पर जीआरपी ने यह कार्रवाई की है। मामले की सच्चाई तो जांच के बाद ही सामने आएगी, मगर दो ननों के लिए आंसू बहाने वाले कांग्रेस और यूडीएफ के तथाकथित सेक्युलर नेताओं को बस्तर के लाखों आदिवासियों के आंसू क्यों नजर नहीं आते? वे धर्मांतरण और उन्हें आदिवासी समुदाय की घटती आबादी नजर क्यों नहीं आती? इन दिनों जेल की हवा खा रहे बस्तर के एक आदिवासी नेता एवं कांग्रेस सरकार के पूर्व मंत्री ने तो ताल ठोंकते हुए दावा किया था- “बस्तर में एक भी धर्मांतरण नहीं हुआ है, कोई साबित कर दे तो मैं राजनीति छोड़ दूंगा।” तो क्या जमीन से जुड़े बस्तर के आदिवासी झूठ बोल रहे हैं?


