जगदलपुर। जगदलपुर एवं संसदीय सचिव रेखचंद जैन के प्रयासों से जगदलपुर शहर में जिला खनिज न्यास निधि से 58.84 लाख की लागत से विधुत शव दाह मशीन के स्थापना की स्वीकृती प्राप्त हो गई है जिसे नगर निगम जगदलपुर द्वारा स्थापित किया जाएगा जिसमें से 46 लाख रुपए की लागत से शव दाह मशीन क्रय एवं 12.84 लाख की लागत से शव दाह मशीन स्थापना हेतु शेड निर्माण होगा।
शहर के समाजसेवी संस्थाओं एवं विभिन्न समाजों द्वारा लंबे समय से विधुत शव दाह मशीन की स्थापना हेतु मांग की जा रही थी और इस संबंध में विधायक जगदलपुर एवं संसदीय सचिव ( नगरीय प्रशासन एवं श्रम ) रेखचंद जैन द्वारा लगातार प्रयास किया जा रहा था जिसे देखते हुए बड़े शहरों की तर्ज़ पर अब जगदलपुर के मुक्तिधाम में भी शव दाह मशीन की स्थापना का मार्ग प्रशस्त हो गया है।
रायपुर – छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस पर उत्कृष्ट कार्य करने वाले पुलिस कर्मी “शौर्य पदक” से होंगे सम्मानित | 1 नवम्बर को छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री निवास में आयोजित सम्मान समारोह मे 7 पुलिसकर्मियों को शौर्य पदक देने की घोषणा की गई है
7 पुलिसकर्मियों को शौर्य पदक देने की घोषणा की गई है उनके नाम इस प्रकार है –
बस्तर।तत्कालीन भारतीय जनता पार्टी शासनकाल के ट्रायबल मंत्री व भाजपा प्रदेश यह प्रवक्ता केदार कश्यप ने कांग्रेस पार्टी की वर्तमान सरकार को गुंडागर्दी व माफियाओं की सरकार बोलते हुए करारा हमला बोला है।
प्रदेश प्रवक्ता केदार कश्यप ने आगे कहा कि छत्तीसगढ़ की वर्तमान सरकार में कांग्रेसी कार्यकर्ताओं की गुंडागर्दी, शराबखोरी व रेत के अवैध खनन जैसे कई कार्य कर रहे हैं जिसके आमजनता भयांक्रांत हैं। छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार के खिलाफ बड़ा आंदोलन छेड़ा जाएगा और जनता के बीच इनकी कारगुजारियां उजागर किया जायेगा।
रायपुर – छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के पंडरी थाने में हत्या के आरोपी युवक ने फांसी लगाकर आत्महत्या करने के बाद परिजन और मोहल्लेवासियों ने थाने का घेराव कर पुलिस के खिलाफ आक्रोशित हो गए है | परिजनों का मानना है कि युवक आत्महत्या नहीं कर सकता उसे पुलिस वालों द्वारा मारकर लटका दिया गया है |
प्राप्त जानकारी के अनुसार 25 अक्टूबर रविवार को हुए चाकूबाजी में अमित नाम का युवक घायल हो गया था , जिसकी इलाज के दौरान मौत हो गई थी. पंडरी पुलिस द्वारा हत्या के आरोप में अश्विनी मानिकपुरी (20 वर्ष) मोवा के चंद्रशेखर नगर का रहने वाला था को कल दोपहर में गिरफ्तार कर लिया गया था | जिसके बाद शाम 4 बजे आरोपी ने बाथरूम में बेल्ट
से फांसी लगाकर आत्महत्या कर लिया | परिजनों और मोहल्लेवासियों को घटना की सुचना मिलते ही उन्होंने थाने का घेराव कर दिया और पुलिस के खिलाफ नारे लगाने लगे | थाने के बाहर भीड़ इतनी जमा हो गई कि सड़क जाम हो गया. बीच सड़क में बढ़ते तनाव की स्थिति को देखते भारी संख्या में पुलिस बल बुलाना पड़ा, फिर अनियंत्रित भीड़ को भगाने के लिए
पुलिस ने लोगों को खदेड़ दिया | परिजनों का आरोप है कि पुलिसवालों ने अश्विनी की पिटाई की, फिर उसको फांसी पर लटका दिया है | पुलिस की लापरवाही के चलते उनके बेटे की जान गई है. वो खुदकुशी नहीं कर सकता, उसे मारा गया है | मौके पर पहुंचे स्थानीय पार्षद प्रमोद
साहू ने कहा कि इस मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए. पुलिस की नाकामी और लापरवाही के चलते यह घटना हुई है | एसएसपी ने मामले को देखते हुए एसआई समेत चार पुलिस-कर्मियों को लाइन अटैच कर दिया गया है |
जगदलपुर – केंद्र सरकार के प्लांट निजीकरण के फैसले व बस्तर हितो पर राज्य सरकार की उदासीनता के विरुद्ध श्रमिक यूनियन के आंदोलन को मुक्तिमोर्चा ने दिया अपना समर्थन
बस्तर अधिकार मुक्तिमोर्चा ने केंद्र सरकार फैसले के विरुद्ध बस्तर हित मे राज्य सरकार से मांगा श्वेत पत्र-मुक्तिमोर्चा
बस्तर के सभी वर्ग को संयुक्त रूप से बस्तर हित मे आंदोलन के हिस्सा बने की मुक्तिमोर्चा की अपील
बस्तर के विकास व रोजगार -स्वरोजगार के सपनो से ओतप्रोत होकर बस्तर की नई पीढ़ी के विकशित भविष्य की नींव रखने वाले एक मात्र नगरनार स्टील प्लांट का केंद्र सरकार द्वारा निजीकरण करने का फैसला, वही राज्य सरकार द्वारा इस फैसले के विरुद्ध एक उदासीन रवैया के खिलाफ स्टील प्लांट के दो श्रमिक यूनियन व भू -प्रभावित ग्राम पंचायत के समितियों के
सँयुक्त रूप दिए जा रहे अनिश्चित कालीन धरना प्रदर्शन प्रारम्भ कर दिया है। उक्त धरना को बस्तर अधिकार मुक्तिमोर्चा के सयोजक नवनीत चाँद के नेतृत्व में मुक्तिमोर्चा के पदअधिकारियों ने धरना स्थल पहुच अपना समर्थन प्रदाय करते हुए केंद्र व राज्य की सरकारो को इस फैसलों को आड़े हाथ लेते हुए मुक्तिमोर्चा के सयोजक नवनीत चाँद ,सह सयोजक अमित पीटर व जिला संयोजक भरत कश्यप ने अपने उद्बोधन में कहा की नगरनार स्टील प्लांट बस्तर के विकास व रोजगार -स्वरोगार व आने वाले युवाओं के पीढ़ी का बेहतर भविष्य तय करने इरादों व वादों को सुन कर बस्तर के लोगो ने न चाह कर भी राज्य सरकारो के प्रलोभन व दबाव में आकर अपनी जमीन बस्तर के सम्पूर्ण विकास के नाम पर दी। पर केंद्र सरकार द्वारा बिना बस्तर के हितों विचार किये निर्माणाधीन प्लांट को प्रारम्भ करने से पहले ही नुकशान बता कर निजीकरण करने का तुगलकी फरमान सुना दिया वही ,बस्तर के हितों के संरक्षण की जिमेदारी निभाने वाले राज्य सरकार ने भी अपने विपक्षीय वादे को भूल केंद्र सरकार व NMDC की निजीकरण की मंशा जानते हुए भी नियम विरुद्ध चल रहे बस्तर के चार लौह खदानों को 17 सो करोड़ों के सरकारी जुर्माने के बाबजूद भी बिना बस्तर के हितों की शर्तें तय किये लीज को आगामी 20 वर्ष के लिए नवीनीकरण कर दिया गया ,वही राज्य सरकार के इस कदम के बाद केंद्र सरकार ने नगरनार स्टील प्लांट के डीमर्जर करने के अपने तुगलकी फरमान को जारी कर बस्तर के सपनो को कुचलने का प्रयाश किया ,बस्तर के इन विकट परिस्थितियों को देख समझ कर भी राज्य सरकार की जारी उदासीनता व गतिविधिया राज्य सरकार को कठघेरे में खड़ा कर रहा है। मुक्तिमोर्चा व बस्तर के हर नागरिक की राज्य सरकार से यह मांग है। कि वह बस्तर के हितों की रक्षा करने के अपने संकल्प व कर्तव्य को निभाते हुए बस्तर हित केंद्र सरकार के संपूर्ण फैसले पर अपनी मंशा व योजना पर श्वेत पत्र जारी कर जाहिर करे। ताकि बस्तर के लोगो को वास्तविक रक्षक व भखक्षक का पता चल सके,इस धरना प्रदर्शन में बस्तर अधिकार मुक्तिमोर्चा के पदाधिकारी शोभा गंगोत्री,एकता रानी,सी एच भारती, सुनीता सिंह,शलेन्द्र वर्मा,जानी,तुलसी मौर्य व श्रमिक यूनियन के पाधिकारी व कार्यकर्ता मौजूद थे।
दल्लीराजहरा – तहसील साहू संघ राजहरा की आवश्यक बैठक स्थानीय साहू सदन बस स्टैंड के पास तोरनलाल साहू अध्यक्ष तहसील साहू संघ की अध्यक्षता में आयोजित किया गया ।अध्यक्ष तोरनलाल साहू द्वारा बैठक में आगामी 13 दिसम्बर दिन रविवार को महादेव भवन गंजपारा बालोद में जिला साहू संघ बालोद द्वारा आयोजित जिला स्तरीय युवक -युवती परिचय
सम्मेलन आयोजन के सम्बंध में चर्चा एवम कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी प्रदान किया गया।उन्होंने सभी परिक्षेत्रीय अध्यक्ष ,तहसील साहू संघ के समस्त पदाधिकारियों एवम सभी प्रकोष्ठ के पदाधिकारियों को युवक युवती परिचय सम्मेलन हेतु अधिक से अधिक सामाजिक सदस्यों को जिनके घर मे विवाह योग्य युवक -युवती हैं उन्हें पंजीयन करवाने हेतु प्रेरित करने को कहा।इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य अभिभावकों द्वारा वर – वधु की खोज में व्यर्थ का
समय एवम आर्थिक बर्बादी को कम करना है।अतः सामाजिक सदस्यों को अपने विवाह योग्य पुत्र -पुत्रियों का आवश्यक रूप से पंजीयन करवाना चाहिए।पंजीयन हेतु अपने परिक्षेत्रीय अध्यक्ष एवम तहसील साहू संघ के पदाधिकारियों से सम्पर्क करें व 25 नवम्बर तक तहसील साहू संघ में अनिवार्य रूप से जमा कर देंवे ।युवक युवती परिचय सम्मेलन कार्यक्रम में वैवाहिक परिचायिका “तैलिक ज्योति अंक -9” का विमोचन किया जावेगा।बैठक में सामाजिक संगठन से संबन्धित चर्चा एवम सदन में हो रहे भवन निर्माण कार्य प्रथम तल पर अतिरिक्त कमरा निर्माण के सम्बंध में भी जानकारी प्रदान किया गया।
बैठक का संचालन राधेश्याम साहू सचिव तहसील साहू संघ एवम आभार व समापन गोविंद साहू उपाध्यक्ष द्वारा किया गया।
बैठक में श्री रूपलाल साहू जिला प्रतिनिधि ,राधा साहू उपाध्यक्ष,श्री किशोर साहू,शीतल साहू,बसन्त साहू,चेतन साहू, रमेश्वर कुमार साहू ,गजेंद्र साहू,खूबलाल साहू, रामेश्वर साहू,
जगदलपुर।विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा में 75 दिनों तक चलने वाले इस पर्व में बस्तर क्षेत्र के घड़वा जाति के लोग घड़वा धातु से बने शिल्प के साथ जगदलपुर पहुँचते है।इस धातु को छत्तीसगढ़ के आदिवासी-लोक धातु शिल्प को ढोकरा धातु शिल्प कहकर संबोधित किया गया है । इस शब्द का प्रचलन संभवतः 1970 के दशक में आरंभ हुआ और जल्द ही आम बोल-चाल में आ गया । लेखिका रूथ रीव्स ने अपनी पुस्तक ’फोक मेटल्स ऑफ इंडिया’ में संभवतः पहली बार ढोकरा शब्द का प्रयोग पश्चिम बंगाल के घुमक्कड़ धातु शिल्पी समुदाय के लिए किया था ।
किंतु बस्तर , छत्तीसगढ़ के धातु शिल्प के लिए ढोकरा धातु शिल्प का संबोधन औचित्यपूर्ण नही है । यहां के धातु-शिल्पी स्वयं को ढोकरा समुदाय का अंग नही मानते और वे अपने शिल्प को भी ढोकरा नाम से संबोधित भी नही करते । बस्तर के धातु शिल्पी स्वयं को मूलतः घसिया जाति से उदभूत मानते हैं और अब अपने को घढ़वा कहते हैं । इस आधार पर बस्तर के धातु शिल्प को घढ़वा धातु शिल्प कहना अधिक सार्थक होगा ।
बस्तर के घढ़वा धातु शिल्पी द्वारा बनाया गया बैल,मोम के तार द्वारा शरीर की सज्जा किये जाने के कारण बैल के शरीर पर धागे के सामान टेक्सचर दिखाई दे रहा है जो आदिवासी धातु ढलाई पद्यति की पहचान है।
इस प्रकार भारत में लॉस्ट-वैक्स पद्धति से धातु ढलाई की लगभग 4500 साल पुरानी एक अटूट परंपरा है । इस परंपरा का एक विशेष रूप पश्चिमी बंगाल, बिहार, उड़ीसा एवं छत्तीसगढ़ के आदिवासी-लोक धातु शिल्प में आज भी देखा जा सकता है । इस पद्यति में मोम एवं साल वृक्ष के गौंद (धुअन) के तारों को मिटटी के आधार पर लपेटकर मूर्ति को आकार दिया जाता है । जिससे मूर्ति की सतह पर एक विशेष प्रकार का अलंकारिक टेक्चर उभर आता है जो इस धातु शिल्प की विशेषता है और इसे एक अलग पहचान देता है ।
बस्तर का घढ़वा धातु शिल्पी समुदाय
बस्तर के धातु-शिल्प का प्रमाणिक उल्लेख सन १९५० में प्रकाशित डा. वैरियर एल्विन की पुस्तक ट्राइबल आर्ट ऑफ़ मिडिल इंडिया में मिलता है । उन्होंने बस्तर में धसिया जाति के लोगों द्वारा पीतल के बर्तन, गहने और मूर्तियां बनाये जाने का उल्लेख किया था । रसल और हीरालाल ने अपनी पुस्तक में, सेन्ट्रल प्रविंस के गजेटियर 1871 के हवाले से लिखा है घसिया एक द्रविडियन मूल की जाति है जो बस्तर में पीतल के बर्तन सुधारने और बनाने का काम भी करती है ।
परंतु आज बस्तर के अनेक धातु शिल्पी अपने को घसिया जाति का नहीं मानतें वे अपने का स्वतन्त्र घढ़वा आदिवासी जाति का बताते हैं। बहुत से घढ़वा यह बात भी स्वीकारते हैं कि, घसिया जाति की वह शाखा जो धातु ढलाई का कार्य करने लगी, घढ़वा कहलाने लगी है । वे कहते हैं घढ़वा का शाब्दिक अर्थ घढ़ने वाला है अर्थात वह व्यक्ति जो मूर्तियां और गहने आदि गढता है, घढवा कहलाता है ।
इस सम्बन्ध में बस्तर में अनेक किवदंतियां प्रचलित हैं इनमें से एक प्रमुख कहानी जो थोडे़ बहुत परिवर्तन के साथ अधिकांशतः घढवा लोगों द्वारा मान्य की जाती है, यह है कि बस्तर रियासत के समय में बस्तर के राज दरवार में किसी व्यक्ति ने पैर में पहनने का आभूषण पैरी महाराज को भेंट दिया था । महाराज ने गहने के कलात्मक सौन्दर्य से प्रभावित होकर कहा कि भाई तुम लोग तो गहने घढ़ते हो, इसलिए तुम घढ़वा हो, आज से तुम्हे घढ़वा कहा जायेगा । तब से बस्तर के धातु शिल्पी घढ़वा कहलाने लगे।
यू तो घढवा सारे बस्तर में फैले हुए हैं, किन्तु इनके बस्तर का मूल निवासी होने के बारे में यहां दो प्रकार की मान्यतायें प्रचलित हैं । कुछ लोग यह मानते हैं कि घढ़वा बस्तर के ही मूल निवासी हैं, क्योंकि इनका रहन-सहन, रीति-रिवाज, आचार व्यवहार, वेश भूषा, नृत्य-गीत, देवी-देवता वही हैं जो बस्तर में रहने वाले अन्य आदिवासियों के हैं, वे बोली भी स्थानीय ही बोलते हैं ।
घढ़वाओं में प्रचलित दूसरा मत यह है कि वे बस्तर के मूल निवासी नहीं हैं, अपितु उड़ीसा से यहां आकर बसे हैं । कहते हैं कि एक बार बस्तर महाराज ने अपना महल बनवाया तब उन्हे दंतेश्वरी देवी की धातु मूर्ति बनवाने की आवश्यकता हुई । इस समय सारे बस्तर में धातु मूर्ति ढाल सकने वाला कोई व्यक्ति नही मिला । तब उड़ीसा से पांच घढ़वा परिवारों को यहां बुलाया गया और उन्होंने दंतेश्वरी देवी की चांदी की मूर्ति ढालकर तैयार की । कालांतर में वे परिवार ही सारे बस्तर में फैल गये ।
जगदलपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भारतीय जनता पार्टी पर बड़ा हमला बोलते हुए कहा कि भाजपा चुप नहीं बैठने वाली है जबकि भीतर ही भीतर वह कुछ न कुछ षड्यंत्र करने से भी वह चुकती है जिसकी जानकारी मीडिया के माध्यम से सामने आती है।
सिरहासार भवन में पत्रकारों ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से छत्तीसगढ़ सहित बस्तर के परिदृश्य में भाजपा की प्रासंगिकता व भाजपा के शांत पडने के जवाब में कहा कि वह लोग कहां शांत बैठने वाले हैं । भीतर ही भीतर षड्यंत्र करने से वह पिछे नहीं हटते हैं। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बोधघाट परियोजना, नगरनार स्टील प्लांट, बस्तर में लगाए जाने वाले स्टील प्लांट सहित अन्य प्रश्न पत्रकारों ने पूछा। इसका बेबाकी से जवाब दिया और पत्रकारों को निरुत्तर किया।
जगदलपुर – छत्तीसगढ़ ही नहीं पूरे देश में चर्चित झीरम नरसंहार ने जिस बस्तर में कांग्रेस नेतृत्व के अग्रिम पंक्ति के नेता शहीद हुए।उनकी याद में शहीद स्मारक का निर्माण किया जायेगा। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इसकी आधारशीला रखीं। ज्ञात हो कि बस्तर टाइगर महेंद्र कर्मा, पूर्व गृहमंत्री व प्र्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल सहित लगभग 34 लोग शहीद हो गए थे।
बस्तर की ऐतिहासिक दशहरा पर्व के मुरिया दरबार कार्यक्रम में आए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने जगदलपुर प्रवास के दौरान बस्तरवासियों को 562 करोड़ 77 लाख रुपए से अधिक के विकास कार्यों की सौगात दिए । मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मांई दंतेश्वरी के दर्शन के पश्चात वे सिरहासार में आयोजित मुरिया दरबार में शामिल हुये इसके पश्चात् लालबाग में प्रस्तावित झीरम शहीद स्मारक का भूमिपूजन कर । साथ ही यहां अन्य विकास कार्यों के लोकार्पण व शिलान्यास किया गया। उसके पश्चात् वे पुलिस आॅफिसर्स मेस में मांझी चालकी के साथ भोजन करने के बाद राजधानी रायपुर के लिए रवाना हुये ।
सबसे बड़ी बात यह रही कि झीरम कांड़ में शहीद कांग्रेसी नेताओं, शहीद जवानों व कांग्रेसी कार्यकर्ताओं की याद में लालबाग में लगभग दो करोड़ की लागत से झीरम शहीद स्मारक का निर्माण किया जाएगा। इसके साथ ही यहां 560 करोड़ रुपए से अधिक के विकास कार्यों का लोकार्पण शिलान्यास एवं सामग्री वितरण किया गया। इनमें 196 करोड़ 76 लाख रुपए से अधिक के 58 विकास कार्यों का लोकार्पण और 360 करोड़ 89 लाख रुपए से अधिक के 224
विकास कार्यों के भूमिपूजन के साथ ही 82235 हितग्राहियों को 512 लाख रुपए से अधिक के हितग्राहीमूलक सामग्री का वितरण शामिल था । मुख्यमंत्री यहां बस्तर जिले के 3515.94 करोड़ रुपए के 18 विकास कार्यों का लोकार्पण और 104 करोड़ 48 लाख से अधिक राशि के 31 कार्यों का भूमिपूजन करेंगे। इसके साथ ही वे दंतेवाड़ा के 161 करोड़ 60 लाख रुपए से अधिक के 140 विकास कार्यों का लोकार्पण और 107 करोड़ 32 लाख रुपए से अधिक के 125 कार्यों का भूमिपूजन किये । इसके साथ ही यहां कांकेर जिले के 69 करोड़ 33 लाख रुपए से अधिक के 33 कार्य, कोंडागांव जिले के 35 करोड़ 72 लाख रुपए से अधिक के 18 कार्य, सुकमा जिले के 39 करोड़ 26 लाख रुपए से अधिक के 15 कार्य और नारायणपुर जिले के 4 करोड़ 39 लाख रुपए से अधिक के एक विकास कार्य का भूमिपूजन किये।