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इस्पात मंत्री का भव्य स्वागत

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जगदलपुर केंद्रीय इस्पात एवं भारी उद्योग मंत्री एचडी कुमार स्वामी का भाजपा पदाधिकारियों ने भव्य स्वागत किया। महापौर सफीरा साहू, भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता एवं जगदलपुर नगर निगम के वरिष्ठ पार्षद संजय पाण्डेय एवं अन्य नेताओं ने जगदलपुर के विमान तल पर मंत्री कुमार स्वामी का आत्मीय स्वागत किया। एचडी कुमार स्वामी नगरनार इस्पात संयंत्र का निरीक्षण करने सोमवार को बस्तर जिले के प्रवास पर आए थे।

 

पार्षद राजेश राय के समर्थन में उतरे कांग्रेस नेता

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  •  मेयर द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत को बताया गलत 

जगदलपुर नगर के वार्ड -23 गंगा नगर के कांग्रेस पार्षद राजेश राय के खिलाफ महापौर द्वारा पुलिस में की गई शिकायत को पूर्व विधायक एवं संसदीय सचिव रेखचंद जैन, शहर जिला कांग्रेस कमेटी व अन्य कांग्रेस पार्षदों ने झूठा करार देते हुए दर्ज केस को रद्द करने की मांग की है।

इस संबंध में आज सोमवार को शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष सुशील मौर्य और पूर्व विधायक रेखचंद जैन के नेतृत्व में कांग्रेस पार्षदों और नेताओं के प्रतिनिधि मंडल ने पुलिस अधीक्षक शलभ सिन्हा से भेंट की और उन्हें ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में कहा गया है कि महापौर ने वार्ड 23 गंगानगर के पार्षद एवं नगर निगम में उप नेता प्रतिपक्ष राजेश राय के खिलाफ जो शिकायत की है, वह पूर्वाग्रह से ग्रसित है। राजेश राय एक जिम्मेदार जनप्रतिनिधि हैं और हमेशा महिलाओं का सम्मान करते हैं।. शहर जिला कांग्रेस कमेटी ने उन्हें सूचना के अधिकार के जरिए नगर निगम के सभी कार्यों और गतिविधियों की जानकारी हासिल करने की जिम्मेदारी दे रखी है। इसी के तहत वे आरटीआई का इस्तेमाल करते हुए समय समय पर महापौर और नगर निगम का कच्चा चिट्ठा खोलते रहते हैं। नगर निगम की बैठकों में भी राजेश राय सशक्त विपक्षी की भूमिका निभाते हुए जनहित के मुद्दे उठाते रहते हैं।

इससे बौखला कर महापौर ने उनके खिलाफ झूठी शिकायत की है। कांग्रेस नेताओं ने राजेश के खिलाफ दर्ज शिकायत को रद्द करने की मांग एसपी से की है। इस दौरान वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं पूर्व विधायक रेखचंद जैन, शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष सुशील मौर्य, महिला कांग्रेस अध्यक्ष एवं पार्षद लता निषाद, पार्षद सुषमा कश्यप, बी. ललिता राव, कोमल सेना व सुखराम नाग, कांग्रेस नेता कमलेश पाठक व अन्य लोग उपस्थित थे।

नगरनार स्टील प्लांट के निजीकरण की बात से इस्पात मंत्री कुमार स्वामी ने किया इंकार

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  • फिर झूठ कौन बोल रहा है कांग्रेस, कुमार स्वामी या केंद्र सरकार की वेबसाइट?

अर्जुन झा-

जगदलपुर बस्तर के इकलौते बड़े उद्योग नगरनार इस्पात संयंत्र के निजीकरण की बात से इस्पात एवं भारी उद्योग मंत्री एचडी कुमार स्वामी ने साफ इंकार किया है। ऐसे में अब एक नया सवाल पैदा हो गया है कि इस स्टील प्लांट के बारे में झूठ आखिर कौन परोस रहा है – कांग्रेस, केंद्र सरकार की वेब साइट या फिर इस्पात मंत्री।

राष्ट्रीय खनिज विकास निगम का नगरनार स्टील प्लांट अपनी स्थापना के आरंभिक दिनों से ही चर्चाओं के केंद्र में रहा है। कांग्रेस शुरू से आरोप लगाती आई है कि केंद्र की मोदी सरकार नगरनार स्टील प्लांट का निजीकरण करने वाली है। कई अखबारों ने भी इस बात को हवा दी। संसद से लेकर सड़क तक संयंत्र के निजीकरण का मसला छाया रहा। तत्कालीन सांसद दीपक बैज इस मसले को लोकसभा में निरंतर उठाते रहे हैं। उन्होंने लोकसभा में यह भी दलील दी थी कि नगरनार इस्पात संयंत्र को बेचा जाना बस्तर के आदिवासियों के साथ विश्वासघात होगा। संयंत्र का निजीकरण हो जाने से वहां आरक्षण का क्राईटेरिया लागू नहीं हो पाएगा और वहां बस्तर के आदिवासी युवा नौकरी पाने से वंचित हो जाएंगे। श्री बैज ने सदन में यह भी मांग उठाई थी कि नगरनार इस्पात संयंत्र को छत्तीसगढ़ सरकार के हवाले कर दिया जाए, छग सरकार उसका बेहतर संचालन कर लेगी। बतौर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज सार्वजनिक मंचों से भी इसके निजीकरण का पुरजोर विरोध करते रहे हैं।. कई बार कहा गया कि नगरनार स्टील प्लांट को केंद्र सरकार अडानी ग्रुप के हाथों बेचने जा रही है। वहीं सर्व आदिवासी समाज भी संयंत्र के निजीकरण के विरोध में सड़क पर उतर आया था। इसके विरोध में बस्तर बंद का भी आह्वान किया गया था। वहीं विधानसभा एवं लोकसभा चुनावों के दौरान बस्तर दौरे पर आए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने भरी सभा में ऐलान किया था कि नगरनार इस्पात संयंत्र को हरगिज बेचा नहीं जाएगा। उस पर पहला और पूरा हक बस्तर के आदिवासियों का है। अब एक नया मामला सामने आया है कि केंद्र सरकार की वेब साइट में नगरनार इस्पात संयंत्र को बेचे जाने की प्रक्रिया का जिक्र है। इसे लेकर भी प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने इस्पात मंत्री एचडी कुमार स्वामी पर सवालों की बौछार कर दी। उन्होंने कहा कि कुमार स्वामी इस बारे में अपना स्टैंड क्लियर करें। इन्हीं चर्चाओं और कयासों के बीच केंद्रीय इस्पात एवं भारी उद्योग मंत्री एचडी कुमार स्वामी का सोमवार को बस्तर आगमन हुआ। जगदलपुर के मां दंतेश्वरी एयरपोर्ट में मीडिया से चर्चा करते हुए इस्पात मंत्री कुमार स्वामी ने कहा कि वह नगरनार स्टील प्लांट के विजिट पर जा रहे हैं। वहां के कामकाज की समीक्षा करेंगे। जिन विषयों पर आज ही निर्णय लिया जा सकता है, लेंगे। अन्य विषय जिन पर अभी निर्णय नही हो सकता उसके लिए समय सीमा तय की जाएगी। पत्रकारों ने जब उनसे पूछा कि क्या एनएमडीसी के नगरनार स्टील प्लांट को निजी हाथों में दिए जाने की कोई योजना है ? कुमार स्वामी ने साफ कहा कि ऎसी कोई प्लानिंग ही नहीं है।

कांग्रेस के दोनों हाथ में लड्डू

कुमार स्वामी तो निजीकरण के सवाल का जवाब एक लाइन में दे गए, मगर अपने पीछे एक नया सवाल छोड़ गए कि फिर आखिर झूठ कौन बोल रहा है? क्या जनता के बीच कांग्रेस झूठ परोस रही है? क्या केंद्र सरकार की वेब साइट की बात झूठी है? क्या प्रधानमंत्री व गृहमंत्री बस्तर आकर झूठ बोल गए हैं या फिर स्वयं इस्पात मंत्री मीडिया को गलत जानकारी दे गए हैं? जब तक इन सवालों का तसल्ली भरा एकमुश्त जवाब नहीं मिल जाता, तब तक बस्तर की जनता की बेचैनी और चिंता दूर नहीं होने वाली है। इसलिए केंद्र सरकार को अपना स्टैंड क्लियर करना होगा। इस मामले में कांग्रेस के दोनों हाथों में लड्डू है। अगर केंद्र सरकार नगरनार स्टील प्लांट का निजीकरण कर देती है तो कांग्रेस डंके की चोट पर विरोध में न सिर्फ खड़ी हो जाएगी, बल्कि बस्तर की जनता को भी अपने साथ करने में सफल हो जाएगी। वहीं अगर निजीकरण नहीं होता है तो कांग्रेस जनता के बीच यह प्रचारित करेगी कि हमारे दबाव के चलते केंद्र सरकार को निजीकरण का फैसला वापस लेना पड़ा है।

इस्पात मंत्री कुमार स्वामी से पूछता है बस्तर

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  • नगरनार स्टील प्लांट को बेचोगे तो नहीं?
  • आज नगरनार स्टील प्लांट के विजिट पर आ रहे मंत्री

अर्जुन झा-

जगदलपुर केंद्रीय इस्पात एवं भारी उद्योग मंत्री एचडी कुमार स्वामी आज 16 सितंबर को बेंगलुरु से जगदलपुर पहुंचेंगे। वे यहां बहुचर्चित नगरनार स्टील प्लांट का अवलोकन करने के बाद शाम को जगदलपुर से रायपुर जाकर सीधे भिलाई चले जाएंगे। कुमार स्वामी 17 सितंबर को भिलाई स्टील प्लांट का अवलोकन करने के बाद शाम को रायपुर एयरपोर्ट लौटकर नई दिल्ली के लिए रवाना हो जाएंगे।

इस्पात एवं भारी उद्योग मंत्री के बस्तर आगमन को लेकर यहां के लोगों में काफी उत्सुकता है। खासकर नगरनार स्टील प्लांट के निजीकरण के संबंध में मंत्री कुमार स्वामी से बस्तर पूछ रहा है कि नगरनार स्टील प्लांट को बेच तो नहीं दोगे?बस्तर संभाग के नागरिक और बस्तर के आदिवासी इस्पात मंत्री एचडी कुमार स्वामी से यह स्पष्ट जानना चाहते हैं कि केंद्र सरकार की वेबसाइट में साफ नजर आ रहा है कि बस्तर संभाग मुख्यालय जगदलपुर के नजदीक संचालित राष्ट्रीय खनिज विकास निगम के नगरनार स्टील प्लांट को बेचने अथवा उसमें विनिवेशीकरण की प्रक्रिया तेजी से प्रारंभ हो चुकी है। बस्तर वासियों और यहां के बहुसंख्यक आदिवासियों का कहना कि पिछले पंचवर्षीय कार्यकाल के दौरान जब केंद्र में भाजपा के पूर्ण बहुमत की सरकार थी तब विधानसभा एवं लोकसभा चुनावों के दौरान बस्तर प्रवास पर आए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने बस्तर की जनता और बस्तर के आदिवासियों के साथ तथा समूचे छत्तीसगढ़ की जनता से ताल ठोंकते हुए वादा किया था नगरनार स्टील प्लांट को हरगिज नहीं बचेंगे। प्रधानमंत्री ने तो यहां तक कहा था कि नगरनार स्टील प्लांट बस्तर के आदिवासियों का है, उसे उनसे कोई नहीं छीन सकता। जबकि आज केंद्र सरकार की वेबसाइट बता रही है कि नगरनार स्टील प्लांट को निजी हाथों में सौंपने की पूरी तैयारी कर ली गई है। आज बस्तर पूछ रहा है कि क्या बस्तर की धरती से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह ने झूठ बोला था? बस्तर इस्पात मंत्री एचडी कुमार स्वामी से यह भी पूछता है नगरनार स्टील प्लांट के बारे में केंद्र सरकार की असल नीति क्या है, इस बारे में मंत्री कुमार स्वामी अपनी राय स्पष्ट करेंगे? इस्पात एवं भारी उद्योग मंत्री श्री कुमार स्वामी से बस्तर यह भी पूछ रहा है कि जब बस्तर संभाग के किरंदुल, बैलाडीला और बचेली में एनएमडीसी की बड़ी बड़ी लौह अयस्क खदानें हैं तथा सबसे ज्यादा राजस्व छत्तीसगढ़ से मिलता है तो एनएमडीसी का मुख्यालय बस्तर अथवा रायपुर में क्यों नहीं हो सकता? पूछता है बस्तर, जानना चाहता है बस्तर।

इस्पात एवं भारी उद्योग मंत्री के छत्तीसगढ़ दौरे पर कांग्रेस के सवाल, नगरनार के विनिवेशीकरण पर क्या है सरकार का स्टैंड?

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  • प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज का सवाल
  • माइनिंग और उद्योग में छत्तीसगढ़ से भेदभाव क्यों
  • एनएमडीसी का मुख्यालय हैदराबाद से रायपुर क्यों नहीं लाया जा सकता ?

अर्जुन झा

जगदलपुर केंद्रीय इस्पात एवं भारी उद्योग मंत्री एचडी कुमार स्वामी के समक्ष प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने छत्तीसगढ़ के हितों से जुड़े कई गंभीर सवाल रखते हुए उनका जवाब जानना चहा है। श्री कुमार स्वामी दो दिवसीय छत्तीसगढ़ प्रवास पर 16 सितंबर को आ रहे हैं। वे बस्तर संभाग के एकमात्र सार्वजनिक क्षेत्र के बड़े उद्योग नगरनार स्टील प्लांट का भी विजिट करेंगे।

कुमार स्वामी के प्रवास के मद्देनजर पीसीसी चीफ दीपक बैज छत्तीसगढ़ के हितों से जुड़े कई अहम मुद्दे और सवाल उठाते हुए कहा है कि लोकसभा और विधानसभा चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री ने बस्तर और छत्तीसगढ़ की जनता से वादा किया था कि एनएमडीसी का नगरनार प्लांट निजी हाथों में नहीं बेचा जाएगा। केंद्र सरकार के विनिवेशीकरण की वेबसाइट दीपम पर एनएमडीसी के नगरनार प्लांट को बेचने की प्रक्रिया तेजी से पूरी की जा रही है।  बैज ने कहा कि केंद्रीय इस्पात मंत्री एचडी कुमार स्वामी को नगरनार प्लांट के विनिवेशीकरण के संदर्भ में भाजपा सरकार का स्टैंड स्पष्ट करना चाहिए। श्री बैज ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी की केंद्र सरकार के फोकस में केवल अपने चंद पूंजीपति मित्रों का हित है, भाजपा की सरकार में छत्तीसगढ़ की लगातार उपेक्षा की जा रही है। लोकसभा में छत्तीसगढ़ से भाजपा के 10 सांसद हैं, लेकिन छत्तीसगढ़ की लगातार उपेक्षा होने के बाबजूद भाजपा के सांसद मौन हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि मध्य भारत में लौह अयस्क के उत्खनन का काम करने वाली अग्रणी नवरत्न कंपनी एनएमडीसी एक सरकारी उपक्रम है, जिसकी 6 बड़ी माइंस छत्तीसगढ़ में संचालित हैं। बचेली के अंतर्गत 5 नंबर, 10 नंबर और 11-ए नंबर की खदानें तथा किरंदुल के अंतर्गत 14 नंबर, 11 सी और 11 बी वर्तमान में कार्यशील हैं। एनएमडीसी की एक खदान कर्नाटक में संचालित है। उड़ीसा और आंध्र में एनएमडीसी की लौह अयस्क की कोई भी खदान नहीं है। एनएमडीसी का कुल वार्षिक टर्न ओवर लगभग 22000 करोड़ का है जिसमें से 80 प्रतिशत राजस्व एनएमडीसी को केवल छत्तीसगढ़ से ही प्राप्त होता है, लेकिन अब भी एनएमडीसी का मुख्यालय तेलंगाना के हैदराबाद में है। मुख्यालय दूसरे राज्यों में होने के कारण कॉरपोरेट टैक्स और जीएसटी में राज्य की हिस्सेदारी का भाग, जो छत्तीसगढ़ को मिलना चाहिए, वह छत्तीसगढ़ के हक का पैसा अन्य राज्यों को मिल रहा है। पूर्व में एनएमडीसी के मुख्यालय को हैदराबाद से रायपुर स्थानांतरित करने का विधानसभा का सर्वसम्मति से पारित प्रस्ताव केंद्र सरकार को अनुशंसा हेतु प्रेषित किया जा चुका है, केंद्रीय इस्पात और भारी उद्योग मंत्री यह बताएं कि एनएमडीसी का मुख्यालय हैदराबाद से रायपुर कब स्थानांतरित होगा?

कोल रायल्टी की पेनल्टी लंबित

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि छत्तीसगढ़ का आयरन ओर, छत्तीसगढ़ का कोयला, छत्तीसगढ़ से बॉक्साइड, टीन सहित तमाम खनिजों का दोहन केंद्र की सरकार और उनके सरकारी उपक्रम करते हैं, लेकिन जब छत्तीसगढ़ को उनके हक और अधिकार देने की बारी आती है तो भाजपा की सरकार में छत्तीसगढ़ की हर बार उपेक्षा होती है। कोल की रॉयल्टी में पेनल्टी के छत्तीसगढ़ का हिस्सा पिछले 7 साल से केंद्र के पास लंबित है। आयरन ओर की रॉयल्टी में पहले प्रोडक्शन अर्थात खुदाई और संग्रहण पर रॉयल्टी मिलती थी, खनन कंपनियों को मुनाफा पहुंचाने के लिए अब केंद्र की मोदी सरकार ने विक्रय पर रॉयल्टी देने की व्यवस्था बनाई है, जिससे छत्तीसगढ़ को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है।

स्थानीय को नौकरी क्यों नहीं

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि एनएमडीसी में स्थानीय लोगों की भर्ती पिछले 10 साल से लगभग बंद है। छत्तीसगढ़ से ही अपने कुल राजस्व का अधिसंख्यक हिस्सा प्राप्त करने वाली कंपनी एनएमडीसी का मुख्यालय हैदराबाद होने की वजह से रोजगार के मामले में भी छत्तीसगढ़ के स्थानीय युवाओं के हितों की उपेक्षा हो रही है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि आयरन ओर पर रॉयल्टी, गुणवत्ता और ग्रेड के आधार पर तय होती है, लेकिन पिछले कई सालों से स्थानीय प्रशासन, माइनिंग विभाग और जियोलॉजी विभाग की मिलीभगत से आयरन ओर में आयरन की मात्रा और गुणवत्ता में रॉयल्टी के निर्धारण और भुगतान में हेरफेर करके सरकार को करोड़ों का चूना लगाया जा रहा है, इससे केंद्र के साथ ही छत्तीसगढ़ को भी प्राप्त होने वाले राजस्व में नुकसान उठाना पड़ रहा है। छत्तीसगढ़ में एनएमडीसी को आबंटित खदानों में संचलित खनन गतिविधि, ग्रेडिंग की प्रक्रिया, विवरण, रिकॉर्ड, कुल मात्रा और गुणवत्ता, रायल्टी की गणना सहित तमाम अनियमितताओं पर पारदर्शिता पूर्वक जांच करके तत्काल कार्यवाही होनी चाहिए।

वनमंत्री केदार कश्यप ने किया इंजीनियर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया की प्रतिमा का अनावरण

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जगदलपुर राज्य सरकार के वनमंत्री व नारायणपुर विधायक केदार कश्यप ने 15 सितंबर को नारायणपुर के नव स्थापित इंजीनियर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया की प्रतिमा का अनावरण किया। उन्होंने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि अभियंता श्री विश्वेश्वरैया ने अभियांत्रिकी क्षेत्र में देश को अलग पहचान दिलाई। डॉ. मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया एक सिविल इंजीनियर राजनेता और मैसूर के 19वें दीवान थे, जिन्होंने भारत के विकास में अतुलनीय योगदान दिया। विश्वेश्वररैया की सबसे उल्लेखनीय उपलब्धियां में से एक मांड्या में कृष्ण राजा सागर बांध है। भारत के प्रथम अभियंता विश्वेश्वररैया को वर्ष 1955 में भारत के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से विभूषित किया गया था।उन्होंने कहा कि नारायणपुर को विकसित करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।

नारायणपुर के नवमी दसवीं के बच्चों ने जिनके माता -पिता मनरेगा के कार्य करने वाले हैं फिर भी उन्होंने आईआईटी में चयनित होकर बड़ी कामयाबी हासिल की है। नारायणपुर को विकसित करने में हमारी सरकार द्वारा विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही हैं। अभियंता कर्मचारियों द्वारा अभियंता भवन बनाए जाने की मांग की जाने पर वनमंत्री केदार कश्यप ने 30 लाख रुपए से अभियंता भवन निर्माण कराने की घोषणा की। इस अवसर पर भाजपा जिलाध्यक्ष रूपसाय सलाम, कलेक्टर बिपिन मांझी, पुलिस अधीक्षक प्रभात कुमार, डीएफओ सचिकानंदन के., एसडीएम वासु जैन, लोकनिर्माण विभाग के कार्यपालन अभियंता जेएल मानकर, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के कार्यपालन अभियंता एसके वर्मा, पीएमजीएसवाई के कार्यपालन अभियंता विनय वर्मा, जल संसाधन विभाग के कार्यपालन अभियंता एके चौधरी, बलराम नायक, प्रणव रॉय व सभी अभियंता मौजूद थे। कार्यक्रम का संचालन अभियंता सतीश झा ने किया।

जादू टोना के शक में पांच ग्रामीणों की पीट पीटकर हत्या

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  • सभी आरोपियों को पुलिस ने लिया हिरासत में 

अर्जुन झा-

जगदलपुर छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार जिले के बाद अब बस्तर संभाग के सुकमा जिले में भी जादू टोना के शक में पांच ग्रामीणों की पीट पीटकर हत्या का मामला सामने आया है। घटना आज 15 सितंबर की है। मृतकों में तीन महिलाएं और दो पुरुष शामिल हैं।

मिली जानकारी के अनुसार सुकमा जिले के कोंटा थाना क्षेत्र के ग्राम एतकल में यह खूनी वारदात हुई है। जादू टोना के शक में तीन महिला सहित कुल पांच ग्रामीणों को लाठी डंडे से पीट-पीटकर मार डाला गया है। मृतकों का नाम क्रमशः मौसम कन्ना पिता लच्छा उम्र 60 वर्ष, मौसम बुच्चा पिता मौसम कन्ना उम्र 34 वर्ष, मौसम बिरी पति मौसम कन्ना, करका लच्छी पति करका लच्छा उम्र 43 वर्ष और मौसम अरजो पति मौसम बुच्चा उम्र 32 वर्ष शामिल हैं। ये सभी ग्राम एतकल थाना कोंटा के निवासी थे। हत्या के आरोपियों में सवलम राजेश पिता सवलम कन्ना उम्र 21 वर्ष, सवलम हिड़मा पिता सवलम लच्छा, कारम सत्यम पिता कारम रामा उम्र 35 वर्ष, कुंजाम मुकेश पिता कुंजाम कन्ना उम्र 28 वर्ष एवं पोड़ियाम एंका पिता पोड़ियाम जोगा शामिल हैं।सभी आरोपी भी ग्राम एतकल के ही रहने वाले हैं।घटना स्थल पर पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी पहुंच चुके हैं। पुलिस ने वारदात को अंजाम देने वाले आरोपियों को हिरासत में ले लिया है। घटना के संबंध में थाना कोंटा में अग्रिम वैधानिक लिखा पढ़ी की प्रक्रिया पूरी की जा रही है।

नक्सलियों ने जन–अदालत लगाकर शिक्षादूत को लाठियों से बेतहाशा पीटा, फिर रस्सी से घोंट दिया गला

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  • बस्तर संभाग में फिर एक आदिवासी युवक को उतार दिया मौत के घाट 

अर्जुन झा-

जगदलपुर पुलिस और सुरक्षा बलों के हाथों लगातार शिकस्त खाते चले आ रहे नक्सली अब निरीह ग्रामीणों पर अपनी भड़ास निकलकर लगातार उनकी हत्याएं कर रहे हैं। बीजापुर में दो आदिवासियों को फांसी पर लटकाने के बाद अब सुकमा जिले में एक आदिवासी नौजवान को पहले डंडे से जमकर पीटा गया, फिर रस्सी से गला घोंटकर उसकी हत्या कर दी गई।

बस्तर संभाग में पुलिस और सुरक्षा बल ग्रामीणों का दिल जीतने में जहां कामयाब रहे हैं, वहीं ग्रामीणों का नक्सलियों से मोहभंग भी होता जा रहा है। नक्सलियों के गलत कार्यों और आदेशों का ग्रामीण छिटपुट विरोध भी करने लगे हैं। यही वजह है कि नक्सली अब अपने भय और आतंक के राज को पुनः बहाल करने में लगे हुए हैं।. इसके लिए वे निरीह आदिवासियों को सरेआम मौत की नींद सुला रहे हैं। बस्तर संभाग के बीजापुर जिले में दो आदिवासियों को फांसी पर लटकाने के बाद अब नक्सलियों ने सुकमा जिले में एक शिक्षित आदिवासी युवक को मार डाला।नक्सलियों ने जन अदालत लगाकर गांव के स्कूल में शिक्षादूत दूधी अर्जुन पिता दूधी मंगडू की हत्या कर दी। घटना सुकमा जिले के जगरगुंडा थाना क्षेत्र के गोंदपल्ली गांव की है। नक्सलियों ने जन अदालत में शिक्षादूत दूधी अर्जुन पर पुलिस के लिए मुखबिरी करने का आरोप लगाया और पहले उसे लाठी से जमकर पीटा फिर रस्सी से गला घोंटकर उसकी हत्या कर दी।

नक्सलियों की धमकी के भय से मृतक के परिजनों ने घटना की सूचना पुलिस को नहीं दी है। रविवार को गांव में दूधी अर्जुन का अंतिम संस्कार किए जाने ने की सूचना पुलिस को प्राप्त हुई है। एसपी सुकमा किरण चव्हाण ने बताया कि अंदरूनी क्षेत्रों में सुरक्षा बलों के कैंप खुलने से नक्सलियों का जनाधार खत्म होता जा रहा है। इस वर्ष सीधी मुठभेड़ में नक्सलियों को लगातार क्षति हुई है। इसकी बौखलाहट में वे अब ग्रामीणों को निशाना बनाकर उनकी हत्या कर रहे हैं। उल्लेखनीय है कि चार दिन पहले ही बीजापुर जिले के जप्पेमरका गांव में नक्सलियों ने दो निरीह आदिवासियों को सरेआम फांसी पर लटका दिया था। इन दोनों पर भी पुलिस की मुखबिरी करने का आरोप लगाकर उन्हें मौत की सजा दी गई थी। इसके अलावा छात्रावास से बुलवाकर एक मासूम आदिवासी छात्र को घंटों बंधक बनाए रखा और मसनसिक यंत्रणा दी गई थी।दरअसल नक्सली जिसे चाहते हैं, दोषी ठहरा देते हैं और सजा भी तुरंत दे देते हैं। सामने वाले को अपने बचाव में पैरवी का मौका भी नहीं देते। ठीक वैसे ही जैसे तालिबानी लड़ाके सजा देते हैं। बस्तर संभाग के बीजापुर जिले के सुदूर एवं नक्सल प्रभावित क्षेत्र की ग्राम पंचायत मरदापाल के आश्रित गांव जप्पेमरका के जंगल में मंगलवार और बुधवार को दो दिनों तक नक्सलियों की भैरमगढ़ एरिया कमेटी ने जन अदालत लगाकर दो ग्रामीणों को मौत की सजा सुनाई और उन्हें फांसी पर लटका दिया था। दोनों ग्रामीण जप्पेमरका के रहने वाले थे। उन पर नक्सलियों ने पुलिस की मुखबिरी का आरोप लगाया और उन्हें अन्य ग्रामीणों के सामने फांसी पर टांग दिया गया था। इसके साथ ही मीरतुर के छात्रावास में रखर सातवीं कक्षा की पढ़ाई कर रहे इसी गांव के 13 वर्षीय छात्र पोडियम हिड़मा को उसके पालक के माध्यम से गांव बुलवा कर नक्सली जन अदालत वाली जगह पर ले गए थे। जन अदालत में नक्सालियों ने छात्र को घंटों बंधक बनाए रखा और उससे लंबी पूछताछ की। उसके बाद छात्र छोड़ने का फरमान जारी किया गया। इस दौरान यह नाबालिग छात्र घंटों मानसिक यंत्रणा के दौर से गुजरता रहा। इसी जन अदालत में जप्पेमरका के मांडवी सुजा व पोडियामी कोसा को सरेआम फांसी पर लटका दिया गया था। इन दोनों ग्रामीणों के शवों के पास नक्सली पर्चे भी पड़े मिले थे। दोनों ग्रामीण गांव में खेती किसानी का काम करते थे। जप्पेमरका के दो ग्रामीणों की मौत के बारे में पुलिस को कोई सूचना परिजनों द्वारा नहीं दी गई।

आखिर किस जनप्रतिनिधि की शिकायत पर हटाए गए बस्तर जिले के कलेक्टर विजय दयाराम के.

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  •  तबादले पर सरगर्म है चर्चाओं का बाजार
  • सुकमा कलेक्टर हरिस एस का भी हो गया तबादला 

अर्जुन झा

जगदलपुर बस्तर जिले के कलेक्टर विजय दयाराम के. के तबादले से जिले के अधिकांश नागरिक हैरान हैं। खबरों के मुताबिक कलेक्टर विजय को शिकायतों के आधार पर हटाया गया है। वहीं यहां चर्चाओं का बाजार गर्म है कि विजय दयाराम के

सरीखे सहृदय अफसर से भला किस जनप्रतिनिधि को तकलीफ हो रही थी? उनके नेतृत्व में प्रशासनिक कामकाज ठीक ठाक चल रहा था और आमजन को त्वरित न्याय दिलाने का काम भी वे भलिभांति कर रहे थे। ऐसे में उन्हें बस्तर से हटाना कई लोगों को नागवार गुजर रहा है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कलेक्टर-एसपी कांफ्रेंस में कामकाज की समीक्षा के बाद सख्ती दिखाते हुए दो कलेक्टरों और एक एसपी को हटाने का फरमान जारी कर दिया है। प्रदेशभर कलेक्टरों और पुलिस अधीक्षकों की परफॉरमेंस रिपोर्ट खंगालने के बाद सरकार ने यह फैसला लिया है। बस्तर और सुकमा के कलेक्टरों को हटाए जाने के पीछे जो कारण बताए जा रहे हैं उनमें जनप्रतिनिधियों के साथ समन्वय न रख पाना और जनहित के कार्याें में संजीदगी न दिखा पाना शामिल हैं। इस मामले में हम सुकमा कलेक्टर हरिस एस के बारे में ज्यादा कुछ कह नहीं सकते, मगर बस्तर कलेक्टर विजय दयाराम के. के संदर्भ में दावे के साथ कह सकते हैं कि वे निहायत ही संजीदा, इंसाफ पसंद और जिंदादिल अफसर हैं। बस्तर में अपने सेवाकाल के दौरान उन्होंने कई ऐसे कार्य किए, जो एक प्रशासनिक अधिकारी को करना चाहिए।गरीब, शोषित और वंचित वर्ग को न्याय दिलाने में कलेक्टर विजय हमेशा अग्रणी भूमिका में नजर आते थे। शहर हो या गांव या फिर दफ्तर, हर जगह वे एक नेक इंसान और उत्कृष्ट अधिकारी के रूप में काम करते दिखाई देते थे। आम बस्तरवासी और बस्तरिहा संस्कृति के प्रति उनमें लगाव इतना ज्यादा रहा कि उन्होंने बस्तरिहा बोली भी सीख ली थी। आम दक्षिण भारतीय को जहां हिंदी विरोधी माना जाता है, वहीं दक्षिण भारतीय होते हुए भी कलेक्टर विजय दयाराम के. ने बस्तरिहा बोली में गीत गाकर इस मिथक को भी तोड़ दिया था। खैर अब ये सब तो अब अतीत की बातें हो जाएंगी, मगर एक अच्छे अफसर से जुदाई बहुतों को खल रही है। लोग पूछ रहे हैं कि आखिर वह जनप्रतिनिधि कौन है, जिसकी नाराजगी की वजह से कलेक्टर विजय दयाराम के. को यहां से हटाया गया है? वैसे देर सबेर यह बात भी पता चल ही जाएगी। उधर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने लचर कानून व्यवस्था और प्रशासन के साथ समन्वय न रखने पर मुंगेली एसपी को हटा दिया है। सामान्य प्रशासन विभाग ने आदेश जारी कर बस्तर कलेक्टर विजय दयाराम को सीईओ कौशल विकास अभिकरण के पद पर पदस्थ किया है। उनके स्थान पर सुकमा कलेक्टर हरिस एस. कलेक्टर बस्तर बनाए गए हैं। देवेंद्र कुमार ध्रुव को सुकमा कलेक्टर के पद पर पदस्थ किया गया है। वहीं मुंगेली एसपी के पद पर भोजराज पटेल को पदस्थ करते हुए वहां पुलिस अधीक्षक गिरिजा शंकर जायसवाल को पुलिस मुख्यालय में उप पुलिस महानिरीक्षक नियुक्त किया गया है।

जनहित के कार्यों पर फीडबैक

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कलेक्टर-एसपी कांफ्रेंस में सभी जिलों के कलेक्टर्स को विकास योजनाओं को धरातल पर लाने, लोगों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने और जिलों में चल रही केंद्र प्रायोजित योजनाओं की सतत मॉनीटरिंग करने के आदेश दिए थे। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने पहले ही सभी जिलों से फीडबैक ले लिया था। श्री साय ने कान्फ्रेंस में ही साफ कर दिया था कि काम न करने वालों को अंजाम भुगतना होगा। फीडबैक लेने के बाद जहां कमी पाई गई वहां पर तत्काल एक्शन लिया गया है।

बीमार कबूतरों ने कर दी छुट्टी?

मुंगेली एसपी गिरजाशंकर जायसवाल के खिलाफ गंभीर शिकायतें शासन का प्राप्त हुई थीं। जिले में कानून व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठे थे। एसपी का प्रशासन के साथ समन्वय न होने के कारण उनकी कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में थी। उनके मामले में यह भी कहा जा रहा है कि स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रम में बीमार कबूतरों को उड़ाने के लिए लाने को लेकर मुख्य सचिव तक शिकायत की गई थी। वहीं स्थानीय प्रशासन के साथ उनका समन्वय ठीक नहीं था। यहां तक हालात थे कि कार्यप्रणाली ही संदेह और सवालों के घेरे में आ गई थी। उस वजह से उनके ऊपर गाज गिरी। कहा जा रहा है कि बस्तर कलेक्टर विजय दयाराम के. का स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ समन्वय का अभाव था। समन्वय की कमी के चलते राज्य और केंद्र सरकार की योजनाओं को आम आदमी तक पहुंचाने में कठिनाईयां पैदा होने लगी थीं। इसकी लगातार शिकायत मुख्यमंत्री तक पहुंच रही थी। शासन की कल्याणकारी योजनाओं को लागू करने के प्रति उदासीनता दिख रही थी। जनहित के कार्याें को लेकर संजीदगी में कमी थी। उल्लेखनीय है कि सरकार बस्तर को लेकर बेहद संवेदनशील है। नक्सल खात्मे की ओर बढ़ रही सरकार आम आदमी को सहूलियतें दे रही है।लापरवाही को सरकार ने गंभीरता से लिया। रिपोर्ट मिलने पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय खिन्न हुए और कलेक्टर को तत्काल विदा कर दिया।

तबादलों पर चौतरफा घिर गए राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा, कांग्रेस के बाद कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संघ ने भी खोला मोर्चा

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  • संघ के पदाधिकारियों को टारगेट करने का आरोप 
  • ट्रांसफर में लेन देन का भी लगाया गंभीर आरोप 

अर्जुन झा

जगदलपुर छत्तीसगढ़ में तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों के थोक में तबादले को लेकर राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा चौतरफा घिर गए हैं। कांग्रेस तो मंत्री और सरकार पर हमलावर है ही, तबादलों से नाराज कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संघ ने भी राजस्व मंत्री के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। संघ ने ट्रांसफर में पैसे के भारी लेन देन होने का आरोप लगाया है। वहीं इस मामले को लेकर कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संघ ने हाईकोर्ट जाने की बात भी कही हैं। वहीं एक दिन पहले ही प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने जगदलपुर में पत्रकारों से चर्चा करते हुए तहसीलदारों के ताबदले पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए विष्णु देव साय सरकार को घेरा था।

दो दिन पहले ही छत्तीसगढ़ में बड़े पैमाने पर सैकड़ा भर से ज्यादा तहसीलदारों, नायब तहसीलदारों और राजस्व निरीक्षकों का तबादला किया गया था। इन तबादलों से प्रदेश के प्रशासनिक महकमे में खलबली मच गई है। कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संघ के प्रदेश अध्यक्ष नीलमणी दुबे का आरोप है कि जो मंत्री बंगले के दर पर नतमस्तक हुए, उन्हें उनकी मनचाही जगह पर पदस्थापना दी गई है। ट्रांसफर पोस्टिंग में किसी प्रकार का क्राइटेरिया नहीं बनाया गया है। किसी का एक वर्ष के अंदर भी स्थानांतरण कर दिया गया है, तो किसी का 3 वर्ष के बाद ही स्थानांतरण कर दिया गया है। दुबे ने पूछा है कि क्या मंत्री यह बताने का कष्ट करेंगे कि किसी भी अधिकारी का 3 वर्ष के बाद ही स्थानांतरण करने का नियम है? उन्होंने कहा है कि तबादले में एक वर्ष, दो वर्ष या किसी भी क्राइटेरिया का पालन ही नहीं किया गया है। पदस्थापना में घोर अनियमितता हुई है।नीलमणी दुबे ने कहा है कि जो अधिकारी 6 महीने बाद रिटायर होने वाला है उसका भी स्थानांतरण कर दिया गया है। 55 वर्ष का जो व्यक्ति आईसीयू में भर्ती है उनका भी स्थानांतरण कर दिया गया है। न ही हेल्थ क्राइटेरिया का ध्यान रखा गया है, न ही उम्र का। दुबे ने अपना उदाहरण देते हुए बताया कि पिछले 2 साल में यह उनका छठवीं बार तबादला किया गया है। संघ के अध्यक्ष ने कहा कि तबादलों में जानबूझकर संघ के पदाधिकारियों को टारगेट किया गया है। मैं अध्यक्ष हूं, मेरा ट्रांसफर मोहला-मानपुर कर दिया गया है। संघ का अध्यक्ष होने के नाते मैं लोगों की बातों को रायपुर जाकर रखता हूं। मुझे जानबूझकर मोहला-मानपुर भेज दिया गया है, ताकि मैं किसी भी प्रकार की बातों को लेकर रायपुर न आ सकूं। उन्होंने कहा कि संघ के सक्रिय सदस्य राकेश देवांगन का रायपुर से सुकमा ट्रांसफर कर दिया गया है। संघ के पदाधिकारी गुरुदत्त पंचभाई को दुर्ग में गए एक साल हुआ है, उनका ट्रांसफर बलरामपुर कर दिया गया है। संघ के प्रवक्ता पेखंड टोकरे को सुकमा भेज दिया गया है।

हाईकोर्ट खारिज कर चुका है लिस्ट

अध्यक्ष दुबे ने कहा कि संघ हाईकोर्ट में अपनी बात रखेगा। 3 महीने पहले 150 लोगों की सूची निकली थी। हमारी अपील पर उसे हाईकोर्ट ने निरस्त कर दिया था। लोग विधानसभा चुनाव से 2-3 महीने पहले स्थनांतरित हुए थे। जैसे ही सरकार बदली फिर ट्रांसफर कर दिया गया।

पीसीसी चीफ बैज भी हैं खफा

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज भी थोक में हुए इन तबादलों को लेकर सहमत नहीं हैं। तबादला सूची आने के बाद जगदलपुर में पत्रकारों से चर्चा करते हुए पीसीसी चीफ दीपक बैज ने तबादलों पर तल्ख़ तेवर दिखाए थे। उन्होंने आरोप लगाया था कि भाजपा सरकार ने ट्रांसफर पोस्टिंग का व्यवसाय शुरू कर दिया है। इस तरह के एकमुश्त तबादलों से राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था चरमरा जाएगी। उन्होंने इन तबादलों पर गंभीर सवाल उठाते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से स्वतः संज्ञान लेते हुए कदम उठाने का आग्रह किया था।

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