शिक्षक न्यूज़//- शासकीय पूर्व “माध्यमिक शाला-शेरपार में शिक्षक दिवस” बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। सर्वप्रथम बच्चों व शिक्षकों द्वारा भारत के दूसरे राष्ट्रपति सर्वपल्ली डॉ. राधाकृष्णन की 137 वे जयंती को “शिक्षक दिवस” के रूप में मनाया तत्पश्चात छात्र-छात्राओं द्वारा कतारबद्ध खड़े होकर पुष्प वर्षा करते हुए अपने गुरुजनों शिक्षकों ऊपर पुष्प बरसाते हुए व डायरी एवम पेन उन्हें भेंटकर सम्मानित किया।

शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला- शेरपार के प्राचार्य- श्रीमती निर्मला ठाकुर ने अपने उद्बोधन में कहा कि “गुरू गोविंद दोउ खड़े, काके लागु पांय, बलिहारी गुरु आपकी गोविंद दियो बताय,” का उल्लेख करते हुए कहा कि संत कबीर दास द्वारा गुरुजनों की महिमा को व्यक्त कर उनकी महानता को प्रदर्शित किया गया है। इसके अलावा हमारे ग्रंथों में भी गुरु को सर्वोच्च स्थान दिया गया है। माता-पिता के बाद गुरु ही एक बालक का प्राथमिक मार्गदर्शक होता है, जो उसे अनुशासन, ईमानदारी, कर्तव्य पालन का महत्व बताने के साथ-साथ समाज में रहन-सहन का सलीखा सिखाते है।

प्रधानपाठक-रमेश सलामे ने कहा कि शिक्षकों के अथक मेहनत एवं प्रयासों से छात्रों को पढ़ाई व खेलकूद में बेहतरीन प्रदर्शन कर अपने माता-पिता, गुरुजनों के साथ गांव,जिला व प्रदेश में नाम रोशन करने का आग्रह किया।
छत्तीसगढ़ प्रदेश शासकीय शिक्षक फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष- शंकर साहू ने शिक्षकों से आग्रह किया कि इस नवीन टेक्नोलॉजी के दौर में शिक्षक नई तकनीक अपनाकर आगामी पीढ़ी की शिक्षा को नयी दिशा देवें। बच्चों के आधारभूत व्यक्तित्व विकास में शिक्षकों का योगदान सर्वाधिक होता है अतः प्राथमिक, माध्यमिक और हाई स्कूल स्तर तक हर छात्र का भविष्य संवारना शिक्षकों का प्राथमिक दायित्व है, ताकि वह देश का जिम्मेदार नागरिक बन सके।
शिक्षक दिवस कार्यक्रम को सफल बनाने में स्कूली बच्चों के साथ संकुल प्राचार्य- श्रीमती निर्मला ठाकुर, प्रधान पाठक- रमेश सलामें, श्रीमती इंदुमती ठाकुर व्याख्याता, आधार सिंह कुमेटी शिक्षक, शंकर साहू शिक्षक, सुश्री लता पटवा शिक्षक आदि प्रमुख रूप से उपस्थित थे।








इस मसले को लेकर विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ताओं ने जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा है। विश्व हिंदू परिषद ने ज्ञापन में कहा है कि बस्तर दशहरे जैसे महान पर्व पर किसी भी प्रकार की लापरवाही अथवा आस्था को ठेस पहुंचाने वाला कार्य स्वीकार्य नहीं होगा। अतः हम जिला प्रशासन से आग्रह करते हैं कि उक्त निविदा को निरस्त कर इसे ऐसे व्यक्ति या संस्था को दिया जाए जो परंपरा, आस्था और श्रद्धा का पूर्ण सम्मान करता हो।विहिप ने आगे कहा है- बस्तर दशहरा केवल उत्सव नहीं, बल्कि यह हमारी अस्मिता, श्रद्धा और सांस्कृतिक धरोहर का जीवंत प्रतीक भी है। इसकी पवित्रता और गरिमा बनाए रखना प्रशासन और समाज, दोनों की सामूहिक जिम्मेदारी है। विहिप नेताओं ने इस मुद्दे को बस्तर दशहरा समिति के अध्यक्ष एवं बस्तर सांसद महेश कश्यप के समक्ष भी रखा है। इस पर कश्यप ने विहिप के लोगों को भरोसा दिलाया कि वे यह इसे बस्तर दशहरा समिति में उठाएंगे। ज्ञात हो कि बस्तर सांसद परम सनातनी नेता माने जाते हैं और सनातन एवं आदिवासी परंपराओं, प्रथाओं, पूजा प्रथा के संरक्षण के लिए और कन्वर्जन के खिलाफ सदैव मुखर रहे हैं। अब देखना होगा कि बस्तर दशहरा के प्रसाद की पवित्रता एवं शुद्धता को लेकर वे क्या कदम उठाते हैं?