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महात्मा गांधी के नाम से ही चिढ़ती है भाजपा: का द्वेष उजागर, मनरेगा को खत्म कर काम के अधिकार पर हमला-विधायक लखेश्वर बघेल

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मनरेगा को खत्म करना, काम के हक पर हमला

बकावंड में मनरेगा बचाओ संग्राम का हुआ आगाज

बकावंड: ब्लॉक कांग्रेस कमेटी बकावंड द्वारा ग्राम पंचायत बजावंड में मनरेगा बचाओ संग्राम कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम प्रदेश कांग्रेस के निर्देशानुसार एवं जिला कांग्रेस की अनुशंसा पर आयोजित हुआ, जिसमें बस्तर विधायक लखेश्वर बघेल मुख्य रूप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विधायक बघेल ने केंद्र की भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी के नाम से संचालित योजना को समाप्त करने की कोशिश कर भाजपा ने एकबार फिर गांधी जी के प्रति अपना द्वेष उजागर कर दिया है।

मनरेगा केवल एक योजना नहीं बल्कि देश के करोड़ों गरीब मजदूरों का संवैधानिक अधिकार है, जिसे खत्म करने की साजिश केंद्र सरकार कर रही है। श्री बघेल नें कहा कि कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार ने मनरेगा जैसी ऐतिहासिक योजना लागू कर गरीबों को काम का अधिकार दिया था, लेकिन आज भाजपा सरकार अपने पूंजीपति मित्रों को खुश करने के लिए इस योजना को कमजोर कर रही है मनरेगा के बहाने केंद्र सरकार काम के अधिकार को ही समाप्त करना चाहती है। बस्तर विधायक लखेश्वर बघेल ने कहा कि केंद्र सरकार ने मनरेगा के कई महत्वपूर्ण प्रावधानों को खत्म कर दिया है। अब केंद्र की मर्जी से चुनिंदा राज्यों और जिलों में ही काम दिया जाएगा इसके साथ ही राज्यों को मिलने वाली राशि में कटौती कर दी गई है। अब 40 प्रतिशत राशि राज्यों को स्वयं वहन करनी पड़ेगी। इससे पहले से ही आर्थिक संकट से जूझ रहे राज्यों की कमर टूट जाएगी। बस्तर जिला कांग्रेस ग्रामीण के अध्यक्ष प्रेमशंकर शुक्ला ने कहा कि मनरेगा योजना को सीएजी समेत लगभग 200 से अधिक रिपोर्टों में बेहतरीन योजना बताया गया है। कोविड-19 महामारी के दौरान यह योजना देश के गरीब मजदूरों के लिए जीवन रेखा साबित हुई थी।

इस योजना की सफलता ने केंद्र सरकार के दुष्प्रचार की पोल खोल दी है। शुक्ला ने कहा कि कांग्रेस पार्टी काम के अधिकार के साथ-साथ पंचायतों की शक्ति बहाली की मांग कर रही है तथा मनरेगा के तहत न्यूनतम मजदूरी 400 रुपये प्रतिदिन किए जाने की मांग भी कर रही है। उन्होंने मनरेगा बचाओ संग्राम की चार प्रमुख मांगों की जानकारी देते हुए कहा कि यदि यह योजना समाप्त होती है तो ग्रामीण क्षेत्रों से शहरों की ओर पलायन बढ़ेगा और शहरी क्षेत्रों पर भारी दबाव पड़ेगा। कार्यक्रम के दौरान विधायक लखेश्वर बघेल ने मनरेगा बचाओ संग्राम के अन्य बिंदुओं से भी ग्रामीणों को अवगत कराया और केंद्र सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ एकजुट होकर संघर्ष करने का आह्वान किया। इस दौरान विधायक लखेश्वर बघेल ग्रामीण जिला अध्यक्ष प्रेमशंकर शुक्ला, ब्लॉक अध्यक्ष शिवराम बिसाईं, ब्लॉक प्रभारी हेमराज बघेल, आयतू राम भारती, जगमोहन बघेल, तुलाराम सेठिया, जानकी राम भारती, वीरेंद्र सेठिया, रियाज खान, मोहन झाली, नारायण बघेल, भगवान भारती, कार्तिक बघेल, सुरेश बघेल, निर्मला कश्यप, पूरन गोयल, गुड्डू, अनश खान, कृपालु कश्यप, जितेंद्र तिवारी, राजेश कुमार, तुलसी राम ठाकुर, बल्लू बघेल सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता एवं ग्रामीण उपस्थित थे।

संजय बैस (पूर्व जनपद सदस्य) ने की पेश की मानवता की मिसाल दूसरे चरण में लेकर गए 40 लोगों को नेत्र ऑपरेशन के लिए

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जन्म देने वाले मां पिताजी को मृत्यु उपरांत याद करना तो कई बेटे और बेटियां करते हैं। लेकिन अपने पिता की पुण्यतिथि पर सैकड़ो की संख्या में लोगों को रोशनी देने का कार्य बिरले ही लोग करते हैं । उनके द्वारा किए गए कार्य की प्रशंसा मानव तो करते ही हैं लेकिन देवताओं के द्वारा भी उनके कार्य की प्रशंसा किए बिना नहीं रह जा सकता । ऐसे ही बिरले लोगों में है कुसुमकसा के पूर्व जनपद सदस्य संजय बैस पिता की प्रथम पुण्य स्मृति पर उन्होंने श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ सप्ताह का आयोजन किया था ।

साथ ही उन्होंने विशाल निशुल्क नेत्र शिविर का भी आयोजन किया था । उस नेत्र शिविर में डॉक्टरो के द्वारा चिन्हांकित 168 लोगों को मोतियाबिंद के ऑपरेशन करने के लिए वह तीन भागों में अपने खर्चों पर रायपुर ले जा रहे हैं । आज उनके द्वारा दूसरा भाग में 40 लोगों को नेत्र आपरेशन के लिए गणेश विनायक आई हॉस्पिटल रायपुर लेकर गए इसके पूर्व सभी लोगों का कुसुमकसा रेलवे स्टेशन पर ही सभी लोगों का महावीर पैथोलॉजी के सौजन्य से निःशुल्क बीपी शुगर की जांच उनके प्रशिक्षित डाक्टरों की टीम द्वारा किया गया ताकि आपरेशन में किसी भी प्रकार की समस्या ना हो । स्व. जयपाल सिंह जी के प्रथम पुण्यतिथि पर विशाल नेत्र जांच शिविर कराया गया था जिसमें 700 लोगों का निःशुल्क नेत्र जांच किया गया था जिसमें 250 लोगों को निःशुल्क चश्मा वितरण और 168 लोगो का आपरेशन होना है।जिसमें प्रथम चरण में 60 लोगों का आपरेशन सफल रहा और दूसरे चरण के आपरेशन के लिए 40 लोगों को संजय बैंस की माता जी श्रीमती कमला बैंस द्वारा लोगो को अभिन्नदन कर रायपुर के लिए रवाना किया गया ।

जनपद सदस्य मंजू बैंस द्वारा सभी लोगों को आई कार्ड पहनाकर सभी की कुशलता पूर्वक नेत्र आपरेशन के लिए भेजा गया । इस आयोजन के केयर टेकर राहुल जैन विनोद सोनी पंकज जेठवानी द्वारा बताया गया हम सभी प्रबुद्ध जनों को आपरेशन के लिए गणेश विनायक आई हॉस्पिटल रायपुर लेकर जा रहे है । जिसमें सभी लोगों की जिम्मेदारी पूर्वक हम घर जैसे माहौल प्रदान करते है । जिसमें चाय नाश्ता भोजन लाना ले जाना हमारे बड़े भैया जिन्होंने इस नेत्र शिविर का जिम्मा उठाए है उनके द्वारा किया जाता है हमारे गांव के प्रतिष्ठित समाजसेवी संजय बैंस के इस पुण्य आयोजन में हम सहभागिता निभा रहे उनके परिवार द्वारा आपरेशन से लेकर लाना ले जाना भोजन की व्यवस्था निःशुल्क किया जाता है । आज दूसरे दल को बिदा करने के लिए पूरे कुसुमकसा के व्यापारी जनप्रतिनिधि राम जानकी सेवा समिति के सभी लोगों की उपस्थित रहे । इस अवसर पर राम जानकी सेवा समिति के अध्यक्ष संतोष जैन उप सरपंच नितिन जैन महावीर पैथोलॉजी के प्रोपाइटर अन्वी जैन देवराज जैन कमलकांत साहू मोती कुचेरिया दिनेश जैन संजय रस्तोगी मनीष जेठवानी किशोर सेन ड्राक्टर नसीम खान जी सहित गणमान्य जन उपस्थित रहे ।

अबूझमाड़ के दुर्गम गांवों में पहली बार हुई किसी विधायक की आमद, विक्रम मंडावी को देख खुशी से झूम उठे ग्रामीण

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शेष दुनिया से कटी अबूझमाड़ियों की दुनिया में पहली बार पड़े किसी जनप्रतिनिधि के कदम

ग्रामीणों ने सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा, रोजगार और स्वास्थ्य सुविधाओं की रखी मांग

अर्जुन झा-

जगदलपुर बस्तर संभाग का अबूझमाड़ क्षेत्र हालांकि सुरक्षा बलों के लगातार कैंप बनाने के बाद उतना अबूझ नहीं रह गया है, फिर भी बड़े जनप्रतिनिधियों की आमद रफ्त से यह क्षेत्र अब तक अछूता रहा है। पहली बार अबूझमाड़ के सुदूर एवं अति दुर्गम गांवों बीजापुर विधानसभा क्षेत्र के विधायक विक्रम मंडावी ने कदम पड़े। अपने विधायक को अपने सामने साक्षात देख इन गांवों के ग्रामीण न सिर्फ हैरान हो उठे, बल्कि खुशी के मारे झूमने भी लगे।

दरअसल बस्तर संभाग के नारायणपुर जिले और बीजापुर जिले की सीमाओं में फैला अबूझमाड़ क्षेत्र अपने नाम के अनुरूप ही अबूझ माना जाता रहा है। अबूझमाड़ियों की अपनी अलग ही दुनिया है, जहां वे अपने आप में मस्त और मगन रहते हैं। दैनिक जरूरत का सामान वे नजदीकी बड़े गांव में लगने वाले साप्ताहिक हाट बाजार से खरीद ले जाते हैं, बाकी जरूरतें वे वनोपजों से पूरी कर लेते हैं। शेष दुनिया से अबूझमाड़ियों को कोई वास्ता ही नहीं है। वे आज भी रोजी रोजगार, स्वास्थ्य, शिक्षा, चिकित्सा, बिजली, पानी, सड़क जैसी मौलिक सुविधाओं से वंचित हैं। मगर अब धीरे धीरे ही सही उन तक ये सुविधाएं पहुंचने लगी हैं। अबूझमाड़ नक्सलियों का गढ़ रहा है। सुरक्षा बलों ने इस गढ़ को ढाहते हुए अबूझमाड़ के दुर्गम गांवों तक पहुंच बना ली है। कई गांवों में सुरक्षा बलों के कैंप स्थापित हो चुके हैं, जिनके जरिए वहां के लोगों को कुछ हद तक सड़क, पानी और इलाज की थोड़ी बहुत सुविधा मिलने लगी है। बीजापुर के कांग्रेस विधायक विक्रम शाह मंडावी ने बीते मंगलवार 13 जनवरी को इंद्रावती नदी पार अबूझमाड़ के घने जंगलों से सटे बीजापुर जिले के अत्यंत दुर्गम और दूरस्थ आदिवासी गांवों का ऐतिहासिक दौरा किया। यह दौरा विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण होने के साथ-साथ इन क्षेत्रों के लिए पूरी तरह से ऐतिहासिक साबित हुआ, क्योंकि अब तक किसी भी विधायक ने इन गांवों तक पहुंचकर ग्रामीणों से सीधे मुलाकात नहीं की थी और उनकी समस्याओं को व्यक्तिगत रूप से नहीं सुना था।

इन गांवों में पहुंचे मंडावी

विधायक विक्रम मंडावी ने ग्राम बांगोली, सतवा, बेलनार, चिडंगेर, पोनोडवाया, पल्लेवाया, ताकिलोड, बोडगा, रेखावाया, जाडका, करकावाया, ईतामपार छोटेपल्ली, बड़ेपल्ली, गुडरा किसकेल, कोलनार, ताडवला, मरामेटा, मिरदीनपल, डूंगा, बेड़मा, बैल, धर्मा और मरकापाल सहित कई अन्य गांवों का भ्रमण किया। ये गांव अबूझमाड़ के सबसे दुर्गम इलाकों में बसे हुए हैं, जहां पहुंचना बेहद चुनौतीपूर्ण है। यहां आज भी सड़क, बिजली, शुद्ध पेयजल, स्कूल और अस्पताल जैसी बुनियादी सुविधाएं लगभग नहीं हैं। दौरे के दौरान ग्रामीणों ने विधायक विक्रम मंडावी से खुले दिल से अपनी पीड़ा साझा की। ग्रामीणों ने विधायक विक्रम मंडावी से बच्चों के लिए स्थायी स्कूल भवन और नियमित शिक्षकों की उपलब्धता। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की स्थापना, ताकि बीमारियों से जूझते ग्रामीणों को दूर-दराज अस्पताल न जाना पड़े। घने जंगलों में सड़कों का अभाव होने से स्कूल, बाजार और अस्पताल तक पहुंच बेहद कठिन है। इसलिए पक्की सड़कों का निर्माण किया जाए। नदी-नालों के दूषित पानी पर निर्भरता खत्म करने के लिए हैंडपंप, ट्यूबवेल और जल स्रोतों की व्यवस्था की जाए। गांवों में बिजली पहुंचाई जाए। स्थानीय स्तर पर अधिक से अधिक रोजगार सृजन, ताकि युवा पलायन न कर सकें। आदि मांगे प्रमुख है।

विक्रम ने किया वादा*विधायक विक्रम मंडावी ने ग्रामीणों को पूरा भरोसा दिया कि वे जिला प्रशासन बीजापुर और सरकार से तत्काल संपर्क करेंगे और इन सभी मांगों को प्राथमिकता से पूरा करवाने के लिए ठोस प्रयास करेंगे। उन्होंने कहा कि अबूझमाड़ के ये गांव सालों से विकास से वंचित रहे हैं। अब समय आ गया है कि सरकार की सभी योजनाएं और सुविधाएं इन गांवों तक पहुंचें। मैं ग्रामीणों की हर समस्या का समाधान करवाने के लिए प्रतिबद्ध हूं।

खुशी से नाचने लगे ग्रामीण

इससे पहले विधायक के गांवो में पहुंचते ही पूरे क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ गई। ग्रामीणों ने जगह-जगह बाजे बजाकर, नाच गाकर और फूल-मालाओं से विधायक मंडावी का स्वागत किया। और पारंपरिक नृत्य-गान से उनका अभिनंदन किया। बच्चे, महिलाएं, बुजुर्ग सभी उत्साहित नजर आए। कई ग्रामीणों ने भावुक होकर कहा- पहली बार कोई विधायक हमारे गांव आया है, हमारी बात सुनी है। अब उम्मीद जगी है कि हमारे गांव का विकास होगा और हम मुख्यधारा से जुड़ पाएंगे।दौरे के समापन पर विधायक विक्रम मंडावी ने कहा- ये गांव अबूझमाड़ के दिल में बसे हैं। यहां के आदिवासी भाई-बहन सालों से मुख्यधारा से कटे हुए हैं। मैंने ग्रामीणों से वादा किया है कि उनकी हर समस्या का समाधान करवाऊंगा। विकास की रफ्तार अब इन गांवों तक जरूर पहुंचेगी।यह दौरा न केवल विधायक विक्रम मंडावी की जन-कल्याण और आदिवासी विकास के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है, बल्कि अबूझमाड़ के आदिवासियों के लिए एक नई उम्मीद की किरण भी लेकर आया है। जल्द ही इन गांवों में सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा, रोजगार और स्वास्थ्य जैसी सुविधाओं के विकास कार्य शुरू होने की उम्मीद जताई जा रही है। विधायक विक्रम मंडावी के इस दौरान जिला पंचायत सदस्य लच्छू राम मौर्य, जिला कांग्रेस कमेटी के महामंत्री सुखदेव नाग, ब्लॉक कांग्रेस कमेटी भैरमगढ़ के अध्यक्ष नकुल ठाकुर, सहदेव नेगी, मोहित चौहान सहित अन्य स्थानीय नेता और कार्यकर्ता साथ रहे।

अपने कामकाज से गांव में राम-राज ला रही हैं कलियुग की “सुमित्रा

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बड़े देवड़ा सरपंच सुमित्रा कश्यप जुटी हैं ग्राम विकास और नारी उत्थान मेंअर्जुन झा-

बकावंड त्रेता युग में एक माता थी कैकेयी जिन्होंने पुत्र मोह में सौतेले पुत्र मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम को वनवास दिला दिया और एक माता थी सुमित्रा जिन्होंने श्रीराम के वन गमन में अपने पुत्र लक्ष्मण जी के भी साथ जाने की मंशा को आत्मसात करते हुए उन्हें श्रीराम के साथ जाने की सहृदय अनुमति दे दी थी। कलियुग में भी एक सुमित्रा है जिन्होंने स्वहित की चिंता न कर पर हित को अपने जीवन का उद्देश्य बना लिया है। त्रेता युग की माता सुमित्रा की तरह ही कलियुग की यह सुमित्रा भी लोक कल्याण की दिशा में कदम बढ़ा चुकी हैं। यह सुमित्रा आज अपनी पंचायत में अपने काम काज के माध्यम से राम राज लाने की शानदार पहल कर रही हैं। आप भी कलियुग की इस सुमित्रा की बेमिसाल पहल के बारे में जानिए-

यह कहानी बस्तर जिले के बकावंड अंतर्गत करपावंड क्षेत्र की ग्राम पंचायत बड़े देवड़ा से सामने आई है। कल तक जो सुमित्रा साधारण सी गृहिणी थी, आज नारी कल्याण और ग्राम विकास की पुरोधा बन गई हैं। सुशासन सरकार में महिलाओं को मिलने वाली सरकारी सहायता और शासन की योजनाओं ने महिलाओं को केवल उनके स्वरोजगार तक ही सीमित नहीं रक्षा है, बल्कि राजनीति और ग्राम सुराज नीति में भी सफलता दिला रही हैं। इसका जीता जगता उदाहरण हैं ग्राम पंचायत बड़े देवड़ा की सरपंच सुमित्रा कश्यप। आम गृहिणी रहते सुमित्रा कश्यप ने अपने कृषक पति सुरेंद्र कश्यप के प्रोत्साहन पर आजीविका मिशन के तहत समूह से जुड़ कर ग्राम सेवा का निर्णय लिया। इस दौरान उन्होंने गांव की महिलाओं को शासन की योजनाओं के तहत स्वावलंबी बनाने और स्व रोजगार की ओर उन्मुख करने का कार्य किया। भाजपा की रीति नीतियों और देशहित की भावना से प्रभावित होकर सुमित्रा कश्यप धीरे धीरे भारतीय जनता पार्टी की ओर आकर्षित होती चली गईं और भाजपा से जुड़ गईं।अपने नेताओं के सहयोग से उन्होंने सरपंच पद तक पहुंचने में कामयाबी हासिल की। ग्राम पंचायत में बैठ कर सुमित्रा राम राज और काम काज की बातें करती हैं। महिलाओं को स्वालंबी बनाने और शिक्षित करने हेतु लगातार पहल करती हैं। आज जब सनातनियों को क्रिश्चियनिज्म में मंतांतरित करने की मुहिम चल रही है, तो सुमित्रा कश्यप महिलाओं के बीच धर्म के प्रति जागरण फैला रही हैं। उड़ीसा सीमा क्षेत्र से जुड़ी पंचायत की सरपंच बन कर वह विकास के कार्य के साथ महिलाओं के प्रति काफी जागरूक होकर उनके हक हेतु प्रतिबद्ध हैं। सुमित्रा कश्यप खुद तो ज्यादा पढ़ी लिखी नहीं हैं, बावजूद वे अपनी पंचायत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ मुहिम पर बेहतरीन काम कर रही हैं। उनकी मंशा कि कोई भी बेटी अशिक्षित न रहे। इसके साथ ही सरपंच सुमित्रा कश्यप पंचायत की मुखिया होने का अपना धर्म भी बखूबी निभा रही हैं।

करीतगांव स्कूल में राष्ट्रीय युवा दिवस पर गूंजा स्वामी विवेकानंद का संदेश

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छात्र- छात्राओं ने लिया लक्ष्य प्राप्ति का संकल्प

जगदलपुर शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय करीतगांव में राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) इकाई के तत्वावधान में स्वामी विवेकानंद जी की 164वीं जन्म जयंती ‘राष्ट्रीय युवा दिवस’ के रूप में पूरे उत्साह और गरिमा के साथ मनाई गई। इस अवसर पर विद्यालय के शिक्षकों और एनएसएस स्वयंसेवकों ने स्वामी जी के विचारों को आत्मसात करने का संकल्प लिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ स्वामी विवेकानंद जी के छायाचित्र पर तिलक लगाकर और दीप प्रज्वलित कर किया गया। इस आध्यात्मिक शुरुआत के बाद छात्राओं ने अपनी मधुर वाणी से वातावरण को संगीतमय बना दिया। छात्रा मोनिका कश्यप, खुशबू कश्यप, रोशनी नाग और नैना कश्यप ने ‘सुस्वागतम’ गीत प्रस्तुत किया। इसके बाद रूपाली सेठिया, पद्मिनी नाग और भगवती बघेल ने आवाहन गीत गाया, जबकि अजय सेठिया और हेमंत बघेल ने ‘लक्ष्य गीत’ के माध्यम से युवाओं में जोश भरा। बौद्धिक सत्र में विद्यालय के व्याख्याता राजेंद्र कलिहारी ने स्वामी विवेकानंद की जीवनी पर प्रकाश डाला। उन्होंने स्वामी जी के वेदांत दर्शन और उनके ओजपूर्ण कार्यों के इतिहास को स्वयंसेवकों के साथ साझा किया। व्याख्याता मोहम्मद अकबर खान ने स्वामी विवेकानंद और उनके गुरु श्री रामकृष्ण परमहंस के बीच के अनूठे गुरु-शिष्य संबंध को रेखांकित किया। उन्होंने विद्यार्थियों को गुरु की प्रेमपूर्ण शिक्षा और आज्ञा पालन के महत्व को समझाया। कार्यक्रम में छात्रों का मार्गदर्शन करते हुए व्याख्याता लुप्तेश्वर आचार्य ने जीवन में लक्ष्य निर्धारण पर जोर दिया। उन्होंने स्वामी विवेकानंद जी के विश्वप्रसिद्ध उद्घोष “उठो, जागो और लक्ष्य की प्राप्ति तक मत रुको” को उद्धृत करते हुए छात्रों को सफलता के पथ पर निरंतर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में एनएसएस इकाई के कार्यक्रम अधिकारी राहुल सिंह ठाकुर, सहायक कार्यक्रम अधिकारी वाणी हुमने और लोकेश निषाद की भूमिका अहम रही। कार्यक्रम में व्याख्याता अनिता पाणिग्रही, रीना दास सहित समस्त एनएसएस स्वयंसेवक और विद्यार्थी उपस्थित रहे।

जंबूरी कार्यक्रम से लौट रहे युवक-युवती पर चढ़ाई कार, शराब की बोतलें मिलीं

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बालोद।जिला मुख्यालय बालोद के लोहारा मार्ग पर जूगेरा पेट्रोल पंप के सामने एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया। जंबूरी कार्यक्रम से लौट रहे एक युवक और युवती को तेज रफ्तार कार ने टक्कर मार दी। हादसे में दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए हैं और उनकी हालत नाजुक बताई जा रही है।प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, युवक-युवती ग्राम दुधली में आयोजित राष्ट्रीय जंबूरी कार्यक्रम देखकर लौट रहे थे, तभी सामने से आ रही एक तेज रफ्तार कार ने उन्हें जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी तेज थी कि दोनों सड़क पर दूर जा गिरे और मौके पर अफरा-तफरी मच गई।हादसे के बाद जब कार की तलाशी ली गई तो उसके अंदर से शराब की बोतलें बरामद हुईं, जिससे स्पष्ट हुआ कि चालक नशे में था। पुलिस ने तुरंत मौके पर पहुंचकर कार चालक को हिरासत में ले लिया।घायल युवक और युवती को तुरंत जिला अस्पताल बालोद पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने उनकी हालत गंभीर बताते हुए इलाज शुरू किया।पुलिस के अनुसार, कार चालक की पहचान ग्राम दुडेरा निवासी गोपाल हिरवानी के रूप में हुई है। मामले की सूचना घायलों के परिजनों को दे दी गई है और आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

संविदा शिक्षकों की 12 सूत्रीय मांगों को लेकर मुख्यमंत्री के नाम सौंपा गया ज्ञापन

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छत्तीसगढ़ स्वामी आत्मानंद संविदा शिक्षक एवं कर्मचारी संघ, सेजेस दहींकोंगा के समस्त शिक्षकों द्वारा अपनी 12 सूत्रीय मांगों को लेकर माननीय मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नाम एक ज्ञापन विधायक कोंडागांव सुश्री लता उसेंडी के माध्यम से सौंपा गया। ज्ञापन में संविदा शिक्षकों एवं कर्मचारियों के नियमितीकरण, सेवा-सुरक्षा, वेतन विसंगति, कार्यस्थल की स्थिरता तथा अन्य मूलभूत समस्याओं को प्रमुखता से रखा गया।यह कार्यक्रम बस्तर संभाग सचिव प्रकाश राव के नेतृत्व में शांतिपूर्ण, संगठित एवं गरिमामय ढंग से संपन्न हुआ। संघ के पदाधिकारियों एवं शिक्षकों ने आशा व्यक्त की कि राज्य सरकार संविदा शिक्षकों की 12 सूत्रीय मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेकर उन्हें न्याय प्रदान करेगी। इस अवसर पर संघ ने एकजुटता के साथ संघर्ष को संवैधानिक एवं लोकतांत्रिक तरीके से आगे बढ़ाने का संकल्प दोहराया।

चिंतलनार में सड़ गया गरीबों के हिस्से का 35 लाख का राशन, गीदम में 18 करोड़ का चावल हुआ खराब

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बस्तर में पीडीएस का निकल रहा है जनाजा

बस्तर संभाग की राशन दुकानों में घटिया चावल का हो रहा है वितरण

अर्जुन झा

जगदलपुर बस्तर संभाग में सार्वजनिक वितरण प्रणाली का बंठाधार हो गया है। गरीबों को उनके हक का राशन नहीं मिल रहा है। पीडीएस दुकान संचालक राशन की कालाबाजारी कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर आपूर्ति विभाग एवं खाद्य विभाग की घोर लापरवाही के चलते कहीं लाखों का राशन सड़ गया है, तो कहीं करोड़ों का चावल खराब हो गया है। संभाग के सुकमा जिले में 35 लाख का राशन सड़ गया है। दंतेवाड़ा जिले में 18 करोड़ का चावल खराब हो गया है। बस्तर जिले में भी कुछ ऐसा ही हाल है।

सरकार दावा करते नहीं थक रही है कि पीडीएस में लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कड़ी कार्रवाई की जाएगी, लेकिन यह दावा सिर्फ बयानबाजी और मंचों तक ही सिमट कर रह गया है। सुकमा जिले की दो पंचायतों के सैकड़ों परिवारों के हिस्से का राशन जिले के चिंतलनार के गोदाम में रखे रखे सड़ गया है। यह राशन 35 लाख से अधिक का था। इस राशन में चावल, शक्कर, गुड़, चना शामिल हैं। लेकिन जिला प्रशासन दो वर्षों में यह जिम्मेदारी तय नहीं कर पाया है कि विभाग के किस अधिकारी के लापरवाही से लाखों का चावल और राशन सड़ा है। सड़े चावल की गुणवत्ता जांच रायपुर के लैब में कराई गई थी। जांच में यह चावल मानव उपयोग के लायक नहीं पाया गया है। अब विभाग इस चावल को नीलाम कराने की कोशिश कर रहा है, लेकिन खरीदार नहीं मिलने से चावल गोदाम में पड़ा हुआ है। सुकमा में दो कलेक्टर बदले जा चुके हैं फिर भी इस बड़े मामले की जांच तक नहीं हो पाई है। उधर दंतेवाड़ा जिले के गीदम के वेयर हाउस में 18 करोड़ का चावल रख रखाव के अभाव में खराब हो चुका है। वहीं बस्तर जिले में पीडीएस दुकानों में घटिया चावल का वितरण किया जा रहा है। ज्ञातव्य हो कि चिंतलनार गोदाम में राशन सड़ने के मामले को जिला प्रशासन, खाद्य सचिव, प्रभारी मंत्री, विभागीय मंत्री के संज्ञान में भी लाया जा चुका है। इन दो वर्षों में 90 से अधिक बार जिला प्रशासन की समय सीमा साप्ताहिक बैठकें एवं मंत्रियों की समीक्षा बैठकें हो चुकी हैं। किसी ने गरीबों के राशन पर गंभीरता पूर्वक चर्चा नहीं की। जिसका यह परिणाम है कि खाद्य विभाग के अफसरों के हौसले बुलंद हो चले हैं। ये अफसर बड़े अफसरों को गुमराह करने से बाज नहीं आते।

नहीं मिल रहे खरीददार

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार हाल ही में लगभग 9 लाख से अधिक का चावल चिंतलनार में नष्ट किया जा चुका है। अब 35 लाख के चावल को नष्ट करने की तैयारी है। यह चावल सड़ चुका है जो मानव उपयोग के लायक नहीं है। ऐसे में सड़े चावल को नीलाम करने दो बार टेंडर की प्रक्रिया अपनाई गई लेकिन इस चावल का कोई खरीददार नहीं मिला अब उसे नष्ट करना ही एकमात्र विकल्प है।सुकमा कलेक्टर अमित कुमार ने बताया कि मामले की जांच के संबंध में सम्बधित विभाग को निर्देशित कर शीघ्र मामला का निराकरण करने की बात कही।दो कलेक्टर बदले अब तीसरी की …?चावल मामले में दो कलेक्टर को संज्ञान में लाया था लेकिन किसी ने गरीबों का चावल कैसे सड़ गया उस पर गंभीरता नहीं दिखाई। जिम्मेदार अधिकारी को बचाने रिश्तेदारी निभाई गई और लापरवाह अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई के बजाय उसे ही जांच की जिम्मेदारी सौंप दी गई। अब जिले के नए तेज तर्रार आईएएस अफसर के भी संज्ञान में मामला लाया जा चुका है।

गीदम में 18 करोड़ का चावल नष्ट*बस्तर संभाग के ही दंतेवाड़ा जिले के गीदम वेयर हाउस से चावल पीडीएस दुकानों के लिए सुकमा, बीजापुर भी भेजा जाता है। विभाग की लापरवाही के कारण इस गोदाम में रखा 18 करोड़ से अधिक का चावल खराब हो चुका है। दवा के छिड़काव के कारण 30 हजार क्विंटल चावल को कैप कवर कर दिया गया है। यहां पर 50 से 60 हजार क्विंटल चावल रखा हुआ है। यह चावल दंतेवाड़ा जिला प्रशासन के लिए बड़ा सिरदर्द बन गया है। सुकमा से भी चावल मामले को सुलझा नहीं पाए अब यह दंतेवाड़ा में आकर चावल मामले में उलझ गए हैं। वहीं कांग्रेसी नेता भी मामले की पड़ताल करने वेयर हाउस पहुंचे और उन्होंने चावल की गुणवत्ता पर सवाल उठाए। गीदम वेयर हाउस में 30 हजार क्विंटल से अधिक चावल खराब होने के मामले में कलेक्टर से संपर्क कर जांच में क्या कार्रवाई की गई को लेकर प्रतिक्रिया जाने का प्रयास किय तो उनका मोबइल लगातार व्यस्त रहा।

बस्तर में बंट रहा घटिया चावल

इधर बस्तर जिले की कई राशन दुकानों में घटिया चावल का वितरण किया जा रहा है। बकावंड ब्लॉक की कई राशन दुकानों के चावल में फफूंद लगे नजर आए। यही अमानक स्तर का चावल गरीबों को वितरण किया जा रहा था जिसको लेकर कई कार्ड धारकों ने आपत्ति भी की, लेकिन उनका सुनने वाला कोई नहीं है। खासतौर से जैन राईस मिल धमतरी के लाट नम्बर 32421 मिल आईडी एमए591708, विमल राईस मिल धमतरी के लाट नं. 18153 मिल आईडी 597451 का चावल अमानक स्तर का पाया गया है। वहीं नमक के पैकेट में पैकिंग तिथि भी गायब है। बस्तर अंचल में पीडीएस प्रणाली विपक्ष को बैठे बिठाए मुद्दा दे गया है।

जगदलपुर शहर का ये हाल

बस्तर में धान संग्रहण में काफी अनियमितताएं सामने आने के बाद भी अब तक किसी भी जनप्रतिनिधि ने सामने आकर इस मामले में प्रशासनिक अधिकारियों से सवाल जवाब नहीं किया है। अब यहां पीडीएस की दुकानों से जो राशन आम गरीब लोगों को दिए जाते है उसमें भी काफी अनियमितताएं सामने आ रही हैं। जगदलपुर की दर्जनों पीडीएस दुकानों से मिलने वाले राशन आम लोगों तक पहुंचने से पहले ही व्यपारियों के गोदामों में पहुंच रहा है। जानकारी के अनुसार गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले लोगों को ये पीडीएस दुकान संचालक राशन देने के नाम पर चक्कर लगवाते हैं। इससे जिससे परेशान होकर गरीब वहां जाना ही छोड़ देते हैं। उनके हिस्से के राशन की दुकानदार कालाबाजारी करते हैं। एक बड़ी बात यह भी सामने आई है कि ये पीडीएस दुकान संचालक कार्ड धारकों से उनके राशन 10 से 12 रुपए के भाव में लेकर वे बाहर 20 से 25 रुपए की दर पर बेच देते हैं। सीधे दुगने दामों में बेच कर वे गरीबों के पेट पर डाका डाल रहे हैं।

शिकायत कर चुके हैं गुप्ता

इस मामले में दीनदयाल उपाध्याय वार्ड के पार्षद और वरिष्ठ भाजपा नेता सुरेश गुप्ता ने राशन की कालाबाजारी के मामले की पुष्टि करते हुए कहा कि ऎसी शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। नगर निगम जगदलपुर कई मेयर इन काउंसिल में जल विभाग के सभापति सुरेश गुप्ता ने बताया कि उन्होंने राशन वितरण में गड़बड़ी और लापरवाही की शिकायत कई बार विभाग में दर्ज कराई है लेकिन आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।

मनरेगा बचाने गांवों की गलियों में पहुंच रहे हैं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज

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पंचायत जनसंपर्क पदयात्रा का आगाज

गांव गांव में दीपक बैज का अभूतपूर्व स्वागत

जगदलपुर मनरेगा बचाओ संग्राम के तहत आज से प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने पंचायत से पंचायत तक जनसंपर्क यात्रा प्रारंभ की है। यात्रा के दौरान ग्रामीण महिलाओं ने उनका स्वागत कर अपनी समस्या से अवगत कराया। छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज के नेतृत्व में आज मनरेगा बचाओ संग्राम के तहत पंचायत जनसंपर्क पदयात्रा की शुरुआत टांडपाल पंचायत से हुई। दीपक बैज ने महात्मा गांधी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन करते हुए इस जनआंदोलन का शुभारंभ किया। गांव गांव में दीपक बैज का भव्य स्वागत किया जा रहा है।

महिलाएं आरती उतारकर और तिलक लगाकर दीपक बैज के संघर्ष को नमन करती नजर आईं। इस दौरान पीसीसी चीफ दीपक बैज ग्रामीणों को संबोधित करते हुए कहा कि केंद्र की मोदी सरकार देश के गरीब ग्रामीणों से काम का अधिकार छीन रही है। कांग्रेस की सरकार ने हर गरीब मजदूर को महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना लाकर काम का जो अधिकार दिया था, उसे मोदी सरकार ने बंद कर दिया है। आप लोगों को काम के अवसर से वंचित कर दिया है। मनरेगा की जगह जो दूसरी योजना लाई गई है, उसमें मजदूरों के साथ ही ग्राम पंचायतों को भी अधिकार से वंचित कर दिया गया है। श्री बैज ने कहा कि भाजपा शुरू से आदिवासी, मजदूर, किसान और महिला विरोधी रही है। जिस राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को पूरी दुनिया देवतुल्य मानती है, उस महान आत्मा के नाम से भी भाजपा और उसके नेताओं को बड़ी चिढ़ है। महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे के समर्थक भाजपा देश से गांधी नेहरू का नामों निशान मिटाने पर आमादा हो गई है। गांधी और नेहरू खानदान से नफ़रत के चलते ही महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना को बंद कर वी बी जी राम जी योजना लाई गई है। यह नई योजना पूरी तरह मजदूर विरोधी है और पंचायती राज व्यवस्था के विपरीत है। प्रदेश कांग्रेस प्रमुख दीपक बैज ने ग्रामीणों को आगाह किया कि भाजपा सरकार के इस मजदूर विरोधी नफरती कदम का अभी से विरोध नहीं करेंगे तो भविष्य अंधकार मय हो जाएगा।

फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी से पैतृक जमीन हड़पने का संगठित खेल

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पटवारी, बेटा और दलाल की तिकड़ी ने रची साजिश

सरकारी रिकॉर्ड से गायब करवा दी डेढ़ एकड़ से ज्यादा जमीन

जगदलपुर बस्तर जिले की भानपुरी तहसील अंतर्गत ग्राम करंदोला में पैतृक भूमि को लेकर सामने आया मामला केवल आपसी विवाद नहीं, बल्कि सरकारी तंत्र की मिलीभगत से रचा गया एक सुनियोजित भूमि घोटाला है। इस पूरे प्रकरण में फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी, कूटरचना, धोखाधड़ी, न्यायालयीन आदेश की अवहेलना और राजस्व रिकॉर्ड में खुली हेरफेर कर करोड़ों की जमीन हड़पने के गंभीर आरोप लगे हैं। आरोप है कि तत्कालीन पटवारी रामू कश्यप, मुख्य खातेदार का पुत्र जाहिद खान और कोंडागांव निवासी भूमि दलाल नेमीचंद सोनी ने मिलकर ऐसा संगठित खेल खेला, जिससे वैधानिक वारिसों को उनके हक से वंचित कर जमीन को कई टुकड़ों में बेच दिया गया।

प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम करंदोला स्थित खसरा नंबर 153/1 सहित कुल पैतृक भूमि स्वर्गीय अब्दुल हसीम खान पिता अब्दुल रऊफ खान के नाम दर्ज थी। इस भूमि का कुल रकबा 2.570 हेक्टेयर था। मुस्लिम पर्सनल लॉ और राजस्व नियमों के अनुसार इस भूमि पर उनकी बहनों और भांजों सहित सभी वारिसों का समान अधिकार था। भूमि के विधिवत बंटवारे को लेकर तहसील और कमिश्नर कोर्ट में आवेदन भी लगाया गया था, लेकिन इसी बीच जाहिद खान ने अपने बुआओं और अन्य परिजनों को हिस्सा न देने की नीयत से पूरे प्रशासनिक तंत्र को अपने पक्ष में मोड़ने की साजिश रच डाली। सबसे गंभीर और चौंकाने वाला पहलू यह है कि 50 रूपए के नॉन ज्यूडिशियल स्टांप पेपर पर एक फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी तैयार किया गया। जबकि कानूनन पावर ऑफ अटॉर्नी का विधिवत पंजीकरण अनिवार्य होता है। आरोप है कि यह दस्तावेज 22 अक्टूबर 2021 की तारीख दर्शाकर बनाया गया और इसमें मृतक की बहन स्व. हबीबुल बेगम के फर्जी हस्ताक्षर तक कर दिए गए, जबकि उनका निधन बंटवारा प्रकरण जारी रहने के दौरान 9 दिसंबर 20223 को हो गया था। इससे भी गंभीर तथ्य यह है कि मुख्य खातेदार अब्दुल हसीम खान का निधन 12 अप्रैल 2022 को हो चुका था और उनकी मृत्यु के बाद ही इस फर्जी दस्तावेज के आधार पर जमीन की खरीदी–बिक्री को तेज़ी से अंजाम दिया गया, ताकि वारिसों को कानूनी लड़ाई लड़ने का मौका ही न मिल सके।

आरोप है कि तत्कालीन पटवारी रामू कश्यप ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए बिना किसी वैधानिक आदेश, बिना नामांतरण और बिना तहसील रिकॉर्ड में विधिवत प्रविष्टि किए मूल खसरा नंबर 153/1 को मनमाने ढंग से 153/1 से 153/16 खसरा नंबर बनाते हुए विभाजित कर दिया। इस प्रक्रिया में करीब 62,340 वर्गफुट यानि लगभग डेढ़ एकड़ भूमि मूल खाते से गायब कर दी गई। इसके बाद भूमि दलाल कोंडागाव निवासी नेमीचंद सोनी ने इस जमीन को अपनी दुकान में काम करने वाले शिवलाल बैद के पुत्र मनचीत बैद के नाम फर्जी तरीके से बिना पंजीयन के नामांतरण करा दिया और जमीन को 12 से 15 हिस्सों में अलग-अलग लोगों को बेच डाला। फर्जी दस्तावेजों से जमीन के टुकड़े कर भूखंड नेमीचंद, बलराज सिंह भारद्वाज, करण सिंह नेताम, गोविंद कुमार साहू, चंद्रशेखर यादव, विजय दीवान, सोनमती ठाकुर, सविता बैद, कुंती सेठिया, हरिश्चंद्र सेठिया, डाकेश्वरी वर्मा सहित अन्य लोगों को बेचे गए और चौंकाने वाली बात यह है कि फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी खरीददारों से इलाज के नाम पर उधारी में राशि लेना बताया गया। मामला उस समय उजागर हुआ जब इन जमीनों पर निर्माण कार्य शुरू हुआ और पीड़ित वारिसों ने देखा कि उनके खातों से जमीन गायब हो चुकी है। इस बीच कमिश्नर कोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिया था कि खसरा नंबर 153/1 की भूमि का बंटवारा जाहिद खान सहित सभी वैधानिक वारिसों सहेदुन बेगम, खतीजा बेगम, शाहिदा बेगम, मोहम्मद रमजान खान और खातून उर्फ साधना के बीच समान रूप से किया जाए, लेकिन आरोप है कि कोर्ट के आदेश के तुरंत बाद ही पटवारी ने रिकॉर्ड से जमीन का बड़ा हिस्सा गायब कर दिया। जब इस हेरफेर का खुलासा हुआ तो पीड़ित वारिसों ने भानपुरी थाना और कलेक्टर बस्तर को लिखित शिकायत दी। कलेक्टर द्वारा जांच हेतु तहसील भानपुरी को पत्र भी लिखा है बावजूद आज तक न तो जांच रिपोर्ट सार्वजनिक हुई, न ही एफआईआर दर्ज की गई और न ही फर्जी रजिस्ट्रियों पर रोक लगाई गई। मामला सामने आने के बाद पटवारी रामू कश्यप ने आनन-फानन में अपना तबादला लौंहडीगुड़ा तहसील में करवा लिया, जबकि इस प्रकरण से जुड़ा एक अन्य आरोपी मानचित्र वेद गायब है। पीड़ित परिवारों का आरोप है कि शिकायत के बाद भी पुलिस और राजस्व विभाग ने केवल औपचारिकता निभाई और पूरे मामले को दबाने का प्रयास किया गया।फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी, कूटरचना, धोखाधड़ी और सरकारी रिकॉर्ड में हेरफेर जैसे गंभीर आरोपों के बावजूद प्रशासन की चुप्पी यह सवाल खड़ा कर रही है कि क्या दोषियों को राजनीतिक या प्रशासनिक संरक्षण प्राप्त है? क्या राजस्व विभाग के भीतर और अधिकारी भी इस संगठित खेल में शामिल हैं? और आखिर कब फर्जी दस्तावेजों की फॉरेंसिक जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी? पीड़ित वारिस आज भी अपनी पैतृक जमीन के लिए न्याय की आस लगाए प्रशासनिक दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं, जबकि आरोपियों की आर्थिक हैसियत में अचानक आई बढ़ोत्तरी कई संदेहों को जन्म दे रही है।

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