आज ग्राम पंचायत अरमुरकसा में छतीसगढ़ सरकार की महत्वपूर्ण योजना नरवा गरवा घुरवा बॉडी योजना के अंर्तगत आज गौठान कार्य का भूमिपूजन जनपद सदस्य संजय बैस ने किया 8लाख की लागत से यहां गौठान का निर्माण काम होगा अभी लाकडाउन की इस्तिथि में लोगो को रोजगार के लिये भड़कना पड़ रहा है गाँव मे ही रोजक मूलक कार्य प्रारंभ होने से मजदूरों को काम की तकलीफ दूर होगा संजय बैस ने कहा कि गौठान बन जाने से गाँव गाँव की महिला समिति को सबसे ज्यादा फायदा मिलेगा गाँव मे ही गोबर की खरीदी के साथ साथ महिला समिति का आर्थिक विकास होगा पूरे गाँव के लोग के भरपूर सहयोग से यहां योजना आगे बढ़ेगा आज भूमिपूजन में सरपंच उप सरपंच पंच गण के साथ गाँव के पटेल एवम गणमान्य नागरिक उपस्तित थे |
बालोद जिले के डौंडी ब्लॉक में स्थिति सामान्य है उसे देखते हुए प्रशासन द्वारा लॉकडाउन बढाया गया है किन्तु उसके साथ ही कुछ छुट प्रदान की गई है | प्रदेश के अन्य जिलों में भी लॉकडाउन के कारण कोरोना संक्रमण की स्थिति में कमी आई है और मौतों का सिलसिला थमा है उसके बावजूद अभी फिर से नियमों की अनदेखी की गई तो संक्रमण फैलने में देर नहीं लगेगी |
डौंडी ब्लॉक में डौंडी एवं आसपास के क्षेत्र एवं दल्लीराजहरा में वार्डवार मिले संक्रमितों कि जानकारी इस प्रकार है –
|| विशेष अनुरोध – सिटी मीडिया नगर के समस्त नागरिकों एवं पाठकों से अनुरोध है कि सोशल डिस्टेसिंग एवं मास्क का सदैव उपयोग करें और फिर से कोविड को महामारी का रूप न लेने दे ||
बीएसपी अस्पताल के बंद हिस्से में बनाये जा रहे कोविड वार्ड का अवलोकन करने राजेश दशोड़े सांसद प्रतिनिधि एवं राकेश द्विवेदी महामंत्री भाजपा मंडल, सुजीत झा उपाध्यक्ष भाजपा मंडल पहुंचे |
बीएसपी प्रबंधन द्वारा कांकेर लोकसभा के सांसद मोहन मंडावी की पहल एवं भाजपा पदाधिकारी, यूनियन व जन प्रतिनिधियों की लगातार मांग पर एवं प्रशासन के सहयोग से बीएसपी प्रबंधन द्वारा कोविड 19 के इलाज हेतु सकारात्मक पहल करते हुए बीएसपी अस्पताल के बंद पड़े एक हिस्से में 10 बिस्तर का आइसोलेशन वार्ड बनाने का कार्य प्रारंभ कर दिया गया | सांसद द्वारा सीजीएम माइंस तपन सूत्रधार से चर्चा कर जल्द से जल्द कोविड वार्ड का कार्य पूरा करने का आग्रह किया इस पर सीजीएम माइंस द्वारा जानकारी दी गई कि वर्तमान में अस्पताल के एक भाग का कार्य पूरा होने पर है एवं इसके लिए 4 डॉक्टरों एवं 10 स्टाफ नर्सों व 6 वार्ड बॉय की नियुक्ति की प्रक्रिया भी चल रही है यथाशीघ्र इसे प्रारंभ कर दिया जायेगा एवं बाकि ऊपर के भाग पर भी आवश्यकता के अनुसार कार्य प्रारंभ किया जायेगा | कुछ समय पूर्व स्थानीय भाजपा नेता राकेश द्विवेदी एवं जनप्रतिनिधि की मांग पर जिला कलेक्टर एवं सिटी मजिस्ट्रेट ऋषिकेश तिवारी, तहसीलदार प्रतिमा अभिषेक झा,सीजीएम् तपन सूत्रधार बीएसपी अस्पताल के बंद हिस्से का निरिक्षण कर कोविड वार्ड खोलने की सहमति दी थी |
राजेश दशोड़े सांसद प्रतिनिधि ने कांकेर लोकसभा लोकप्रिय भाजपा सांसद मोहन मंडावी एवं प्रशासन व बीएसपी प्रबंधन के प्रति आभार व्यक्त किया एवं कहा कि बीएसपी अस्पताल के बंद हिस्से में आइसोलेशन सेंटर के निर्माण से शहर की जनता एवं आसपास के क्षेत्रों के लोगों के लिए यह जर्जर भवन प्राणदायिनी बनेगा |
भाजपा के मण्डल महामंत्री राकेश द्विवेदी ने कहा कोरोना के बढ़ते प्रकोप के बीच शासन प्रशासन अपनी क्षमता के अनुरूप रोकथाम के प्रयास में जुटा हुए है | संक्रमित मरीजों को टीकाकरण के लिए घर घर जाकर जागरूक करने में लगे हुए है | वहीँ बीएसपी प्रबंधन भी अपने कर्मचारियों एवं उनके परिजनों के साथ साथ शहर के नागरिकों के हितों को ध्यान में रखते हुए कार्य कर रही है |
सुजीत झा भाजपा मंडल उपाध्यक्ष ने कहा कि बीएसपी अस्पताल के 70 प्रतिशत सर्वसुविधायुक्त हिस्सा जो कि बंद पड़ा था उसे एक कोविड 19 आइसोलेशन अस्पताल के रूप में विकसित किया जा रहा है | यह जनता एवं बीएसपी के कर्मचारियों को अब भिलाई भेजने की जरुरत नहीं पड़ेगी और मरीजों को जल्द ही बेहतर सुविधा उपलब्ध हो सकेगी | बीएसपी प्रबंधन द्वारा सकारात्मक पहल करते हुए निम्न कार्यों के लिय शासन को सहयोग प्रदान करते हुए जगह उपलब्ध कराया जिसमे कोविड जांच केंद्र (माइंस ऑफिस गेट के पास), आइसोलेशन सेंटर (लाल मैदान), कोविड टीकाकरण के लिए बीएसपी अस्पताल में स्थान दिया गया है बीएसपी द्वारा बंद किये स्कूल भवन को शासन ने एकलव्य विद्यालय में 100 बिस्तर ऑक्सीजन युक्त सेंटर प्रशासन के सहयोग से बनाया गया |
छत्तीसगढ़ में कोरोना संक्रमण की रफ्तार को रोकने लॉक डाउन के चौथे चरण की लॉकडाउन की घोषणा की गई । बता दें रायपुर और दुर्ग में आंशिक छूट के साथ लॉक डाउन की घोषणा 15 मई तक कि गयी है । इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग की ओर से तमाम कलेक्टरों को निर्देशित किया गया है. रायपुर और दुर्ग जिले के लिए नई गाइडलाइन के साथ लॉकडाउन को 15 मई तक बढ़ाया गया है। जिसमे रायपुर और दुर्ग जिलों में कुछ सेवाओं में छूट दी गई है। जिसमे कृषि सेवाओं से जुड़े दुकानों को खोला जाएगा। जिसमे कृषि उपकरणों को सुधारने वाले दुकान भी खुलेंगे। किराना दुकान सिर्फ मोहल्ले के अंदर वाले खुलेंगे।बैंक और पोस्टऑफिस पचास फीसदी स्टाफ के साथ खुलेंगे। लेकिन इनमे सिर्फ व्यापारिक ट्रांजेक्शन होंगे।
लॉकडाउन में क्या छुट मिलेगी उसके बारे में विस्तृत जानकारी
1. कृषि क्षेत्र – बीज, उर्वरक, कीटनाशक, कृषि यंत्रों की दुकानों और उनकी मरम्मत के लिए दुकानें / गोदाम खोलना। उर्वरक ट्रकों की आवाजाही। 2. किराना दुकानें खुल सकती हैं (लेकिन मौहल्लों में केवल स्वतंत्र प्रतिष्ठान, और मॉल और सुपरमार्केट में नहीं) 3. शारीरिक रूप से दुकानें खोलने के बिना, केवल होम डिलीवरी के माध्यम से दैनिक जरूरतों / प्रावधान स्टोर (मौहल्ले और सुपरमार्केट में उन लोगों के लिए स्वतंत्र प्रतिष्ठान जिनके पास नहीं हैं) 4. बैंकों और डाकघरों को 50% जनशक्ति के साथ खोलने के लिए – केवल व्यापार लेनदेन के लिए, सभी प्रकार के व्यवसायों के लिए। 5. डाक / डाक सेवाओं के लिए कूरियर सेवाएं (ई-कॉमर्स के लिए नहीं) 6. इलेक्ट्रीशियन / प्लंबर एसी, कूलर, सैनिटरी फिटिंग की घरेलू सेवाओं / मरम्मत के लिए। इसके अलावा उनकी मरम्मत की दुकानें। 7. एसी, पंखे, कूलर (बिना दुकानें खोले) की होम डिलीवरी। 8. पेट्रोल पंप – सभी उद्देश्यों के लिए खोलना, और बिना समय की पाबंदी के। 9. गैस एजेंसियां - खोलना। 10. पोल्ट्री, मांस, अंडा, दूध, डेयरी और डेयरी उत्पादों की दुकानें। 11. आटा मिल्स (अता चाकी)। 12. रजिस्ट्री कार्यालय खोलने के लिए, न्यूनतम कर्मचारियों और टोकन प्रणाली (50% कर्मचारियों के साथ, पिछले साल की तरह)। 13. अन्य केवल ऑनलाइन होम डिलीवरी की अनुमति है। 14. फल और सब्जी के तोले, फेरे करते हुए। 15. सभी श्रम गहन कार्य और सभी साइट पर काम करता है – पीडब्ल्यूडी, सिंचाई, पीएचई, वन, पी एंड आरडी / आरईएस / मनरेगा, आदि से संबंधित।
पत्रकार की कोरोना से मृत्यु होने पर मिले एक करोड़ मुआवजा,व नौकरी
कोरोना पीड़ित पत्रकारों का हो त्वरित और समुचित उपचार
पत्रकार संघ के संभागीय महासचिव ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर किया ध्यानाकर्षण
नारायणपुर ब्यूरो- देश में लगातार बढ़ते कोरोना के मरीजों और इसकी चपेट में आ रहे पत्रकारों की स्थिति बेहद चिंताजनक हैं छत्तीसगढ़ जर्नलिस्ट यूनियन पत्रकार संघ के संभागीय महासचिव अभिषेक बेनर्जी ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को पत्र लिखकर मांग की है कि कोरोना के दौरान शहीद हुए पत्रकारों के परिवार को एक-एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता उपलब्ध करवाई जाए. परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दिए जाने की भी मांग की है.बेनर्जी ने मांग किया कि आज जब देश में कोरोना की भयावह रूप ले रही ऐसी विषम परिस्थितियों में हमारे प्रिंट मीडिया व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के पत्रकार अपनी जान की परवाह किए बिना महामारी में पल-पल की खबरों को अपने पाठकों व दर्शकों तक पहुँचा रहे, प्रशासन व जनता को इस संदर्भ में सचेत भी कर रहे हैं. बेनर्जी ने माँग किया, राज्य में आपदा से जूझते कई पत्रकार साथी का असमय निधन हो गया है.उनके परिवार को विशेष संवेदनशीलता के साथ आर्थिक सहायता प्रदान की जानी चाहिए.नारायणपुर समेत पूरे बस्तर संभाग में बड़ी संख्या में पत्रकार साथी कोरोना कॉल में कर्तव्य निर्वहन करते हुए संक्रमित हो चुके हैं और लगातार संक्रमित हो भी रहे हैं.इनका त्वरित और समुचित उपचार भी होनी चाहिए.पत्रकारों के विशेष इलाज के लिए मेडिकल अफसरों को स्पष्ट निर्देश देने का भी अनुरोध बेनर्जी ने किया है. कोरोना के साथ-साथ नक्सलवाद जैसे समस्याओं के बीच निष्ठा व निर्भीकता से अपना कर्तव्य पालन कर रहे बस्तर के पत्रकारों पर सरकार को विशेष रुप से ध्यान देना चाहिए।
जगदलपुर। नगर के वरिष्ठ व्यवसासी व जगदलपुर नगर पालिका पूर्व अध्यक्ष सतपाल लखनपाल ने अपने पिता स्व.किशनचंद लखनपाल की स्मृति में संसदीय सचिव व जगदलपुर विधायक रेखचंद जैन, अंकुश लखनपाल व योगेश पानीग्राही की उपस्थिति में भारतीय रेड क्रॉस सोसायटी को कोरोना वैश्विक महामारी से निपटने एक लाख रुपए का चेक बस्तर कलेक्टर रजत बंसल को सौंपा। बस्तर कलेक्टर रजत बंसल ने कोरोना से लड़ने के लिए लखनपाल परिवार द्वारा किए गए सहयोग के लिए उनका तहेदिल से शुक्रिया अदा किया।
राष्ट्र के नाम संबोधन में 20 अप्रैल 2021 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था के दृष्टिगत लॉकडाउन अंतिम विकल्प है। दवाई, वैक्सीन, ऑक्सीजन समेत सभी आवश्यक वस्तुओं की समुचित व्यवस्था के निर्देश दिए गए हैं, देशवासियों को घबराने की आवश्यकता नहीं है, इस संकट की घड़ी में वे धैर्य से काम लें। परंपरागत तरीके से प्रधानमंत्री ने डॉक्टर्स, सफाई कर्मचारी, पुलिस प्रशासन समेत इमरजेंसी ड्यूटी कर रहे शासन से जुड़े लोगों की सराहना की और कोरोना से दिवंगत व उनके परिजनों के प्रति संवेदना प्रकट की। फिर प्रधानमंत्री ने मन की बात में आजादी के बाद के 70 साल पर भारी अपना 07 साल का ज्ञानानुभव उड़ेलाकर व्याकुल देशवासियों के दिल पर मरहम लगाया।
प्रधानमंत्री की इन दिनों की बातें केवल एक फिलॉस्फर और मोटिवेशनल गुरु की तरह लगने लगी है, जो केवल सैद्धांतिक रूप से कर्णप्रिय लगती हैं, लेकिन व्यावहारिक व प्रायोगिक रूप से बेहद कर्कश और कठिन हैं। चारों तरफ लाशों की ढेर, अपनों को खोने का गम, इलाज के नाम पर लूट, लचर स्वास्थ्य व्यवस्था, बर्बाद हो चुके लोग, इसमें भी आत्ममुग्ध सरकार, देखकर हृदय बैठ जाता है। प्रधानमंत्री की आपदा में अवसर की प्रासंगिकता इन दिनों चारों तरफ दिखाई दे रही है। लॉकडाउन को प्रधानमंत्री ने जो अंतिम विकल्प वह आज प्रथम विकल्प हो गया है, क्योंकि आत्मावलोकन व सक्षम नीति निर्माण की कमी की वजह से केंद्र सरकार ने प्रारंभिक विकल्प के अवसर को पहले ही खो दिया है।
आज प्रधानमंत्री को मानवता व मनुष्यता के बजाय अर्थव्यवस्था की चिंता हो रही है, जबकि पिछले वर्ष अर्थव्यवस्था की चिंता होनी थी, तब नहीं की। कोरोना दूसरे चरण में केंद्र सरकार का व्यवहार स्पष्ट रूप से उसकी दूरदर्शिता को परिलक्षित करता है। छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रधानमंत्री के बताएं अंतिम विकल्प को प्रथम विकल्प के रूप में अपनाया। इसके लिए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की सराहना की जा सकती है। उन्होंने दूरदर्शिता का परिचय देते हुए उन जिलों पर पहले लॉकडाउन किया, जहां कोरोना के मरीज कम थे और फिर चरणबद्ध तरीके से संपूर्ण छत्तीसगढ़ में लॉकडाउन किया जबकि दिगर भाजपा शासित प्रदेश व कांग्रेसी गठबंधन वाले प्रदेशों की सरकार ने निर्णय लेने में विलंब कर दिया इससे स्थिति और भी बिगड़ गई। छत्तीसगढ़ में अगर समय रहते लाजबाव नहीं लगाई गई होती तो स्थिति और भी भयावह होती।हालांकि समय रहते जिगर राज्यों सीमा को सील कर दिए होते तो स्थिति और भी बेहतर होती।
बाद में छत्तीसगढ़ सरकार ने यह भी किया। छत्तीसगढ़ सरकार की तर्ज पर ही केंद्र सरकार को यह निर्णय संपूर्ण देश में लेना था जिसमें केंद्र सरकार पीछे रह गई।
फरवरी 2020 में कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने करोना को लेकर जब आगाह किया तो केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन समेत केंद्र सरकार ने उनकी बातों को हल्के में लिया। उस समय कोरोना का प्रथम चरण संपूर्ण विश्व के लिए चिंता का विषय था। देश में आने जाने वालों का ना ही स्वास्थ्य परीक्षण किया गया और ना ही इस बीमारी को गंभीरता लिया गया। जब देश में कोरोना पांव पसार रहा था और मध्यप्रदेश के इंदौर शहर को निगलना शुरू कर दिया था, तब प्रधानमंत्री और गृह मंत्री अमित शाह मध्य प्रदेश के कमलनाथ सरकार को गिराने में लगे थे। जब तक मध्य प्रदेश में वे सरकार गिराते तब तक देश में कोरोना की भयावह स्थिति हो गई थी। तब प्रधानमंत्री ने आनन-फानन में संपूर्ण देश में लॉक डाउन कर दिया।
बिना तैयारी के लॉकडाउन से देश में हजारों लोग मर गए, बेघर हो गए, बर्बाद हो गए और देश की अर्थव्यवस्था चौपट हो गई। जैसे-तैसे देश उबरना शुरू किया था और व्यवस्थाएं धीरे-धीरे सुधरने लगी। मुख्यमंत्री रहते देश के नेतृत्व पर सवाल खड़े करने वाले नरेंद्र मोदी स्वयं केंद्रीय नेतृत्व में आके अपने ही कथनों को भूल गए। प्रधानमंत्री एवं उनकी टीम को लगा कि कोरोना का संकट चला गया है। अब दोबारा नहीं आएगा जबकि विश्व स्तर पर पहले ही आगाह कर दिया गया था कि निकट भविष्य में कोरोना की दूसरी लहर भारतवर्ष में आने वाली है। चेतावनी के बावजूद केंद्र सरकार ने कोई तैयारी नहीं की जब कोरोना का द्वितीय लहर देश में फैलने लगा तो प्रधानमंत्री और गृह मंत्री पश्चिम बंगाल समेत विभिन्न राज्यों के चुनाव में व्यस्त हो गए। कोरोना से निपटने के लिए देश में जब उचित रणनीति व सुविधाएं की आवश्यकता थी, तब वे चुनावी समर भूमि में पार्टी के नफे नुकसान व राजनीतिक सुविधा की रणनीति बना रहे थे। केंद्रीय नेतृत्व ने आपदा से निपटने के लिए कभी भी सर्वदलीय बैठक बुलाना उचित नहीं समझा। स्टार प्रचारक बनकर चुनाव में व्यस्त प्रधानमंत्री भूल गए कि वे किसी राजनीतिक दल और औद्योगिक घराने के नहीं बल्कि देश प्रधानमंत्री हैं। उन्हें किसी राजनीतिक दल या औद्योगिक घराने के लिए काम नहीं करनी है उन्हें देश की जनता के लिए काम करनी है।
प्रधानमंत्री और गृह मंत्री कुछ चाहिए था कि वे अपनी पार्टी के जिम्मेदार पदाधिकारी को संबंधित राज्य के चुनाव की जिम्मेदारी देकर देश संभालते। केंद्रीय नेतृत्व में मिली शक्ति, संसाधन और अधिकार का उपयोग देश की भलाई और विकास में लगाते हैं ना कि किसी राज्य में सरकार बनाने में।
दूसरे चरण के आगमन से पहले अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आने जाने वाले लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण करना था। दवाई, अस्पताल, ऑक्सीजन, की व्यवस्था करनी थी। देश के लोगों को पहले वैक्सीन लगना था, निर्यात होता तो बेहतर था। इलाज के लिए पर्याप्त दवाइयों का आयात नहीं किया गया तो क्या देश में बनी दवाइयों का स्टेंडर्ड उससे बेहतर यह भी विचार करना होगा। वैक्सीन को लेकर पूरे देश में भ्रम की स्थिति है केंद्रीय नेतृत्व ने यह फैसला राज्यों पर छोड़ दिया। छत्तीसगढ़ सरकार ने तो 18 वर्ष से 45 वर्ष आयु वर्ग के लगभग एक करोड़ 30 लाख लोगों को निःशुल्क वैक्सीन लगाने का निर्णय ले लिया है, लेकिन केंद्र सरकार की ओर से वैक्सीन की उपलब्धता एवं कीमत पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
केंद्र सरकार की सरकारी अस्पतालों में ऑक्सीजन प्लांट लगाने, सभी वर्ग के लिए वैक्सिंग, दवाई और इलाज की समुचित व्यवस्था की बातें “आग लगने पर कुआं खोदने जैसी” है। शायद केंद्र सरकार के पास कोई जादू की छड़ी है, जिससे यह सब कुछ पल में संभव है। यदि समय रहते यह तैयारियां की गई होती तो लोग इलाज के लिए अस्पताल में और अंतिम संस्कार के लिए श्मशान में नहीं लड़ रहे होते। सुबह चुनावी रैली और शाम को देश के नाम संबोधन में प्रधानमंत्री का करोना गाइड लाइन को लेकर विरोधाभास रहा है। सुबह की भीड़ खुशी और शाम के ज्ञान में सोशल डिस्टेंस का पालन का आह्वान उनकी कथनी और करनी के अंतर को स्पष्ट करता है। अब नरेंद्र मोदी की बातें प्रधानमंत्री पद की गरिमा के अनुकूल नहीं लग रही हैं।
कोरोना के दूसरे चरण के आगमन से पहले राजनीतिक दलों की सर्वदलीय बैठक और राज्यों से उचित संबंध में स्थापित किया जाना था, लेकिन हठधर्मिता और स्वयं की नीति को ही सर्वोत्तम नीति मानकर चलने वाली केंद्र सरकार की घनघोर लापरवाही के कारण देश आज इस स्टेज पर खड़ा है। केंद्रीय नेतृत्व ने गरिमा के विपरीत संवैधानिक ढांचे को छिन्न-भिन्न करने तक का प्रयास करती रही। सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट, सीबीआई ईडी, चुनाव आयोग आदि जैसी संस्थाएं वर्तमान कार्यशैली की कारण सवालों के घेरे में है। दरअसल इन संस्थाओं में सर्वोच्च पद पर आसीन पीठासीन अधिकारी सेवानिवृत्त होने के बाद सरकार के महत्वपूर्ण पदों पर उपकृत हो रहे हैं। इससे एक भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है और उनकी गतिविधियों पर सहज ही प्रश्नचिन्ह लग रहा है। न्यायिक संस्थाओं में भी राजनीतिक दल की तरह वैचारिक मतभेद हो गए जो उनके कार्य की व्यावहारिकता से झककने लगी है।
70 साल की दुहाई देकर 7 साल तक केंद्र सरकार ने केवल अपनी मनमानी की। परिणाम स्वरूप जाति, धर्म, क्षेत्रवाद की वैमनस्यता गांव-गांव, शहर-शहर में देश के भविष्य और युवा पीढ़ियों के दिलोदिमाग में घर कर रहा है। जिस संचार क्रांति से देश के लोगों में बौद्धिक विकास होना था अब वही अपभ्रम फैलाने का सबसे बड़ा माध्यम बन चुका है। संचार माध्यम से स्वास्थ्य प्रचार और स्वस्थ आलोचना दोनों ही देश के लिए अच्छे हैं, लेकिन दूषित आलोचना और दूषित प्रचार देश के लिए घातक है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पूरे कार्यकाल का अवलोकन करें तो स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय निर्माण प्रधानमंत्री आवास की राशि बढ़ाना तथा जम्मू कश्मीर से 370 हटाने के अलावा कोई बड़ी उपलब्धि नहीं है। इसमें शौचालय निर्माण एवं प्रधानमंत्री आवास निर्माण पूर्ववर्ती सरकार की योजना है, जिसे अपडेट किया गया है जबकि पूर्ण बहुमत की सरकार होने के कारण जम्मू कश्मीर से धारा 370 हटाना एक साहसिक और सराहनीय कार्य है। इसके अलावा कोई विशेष उपलब्धि नहीं है।
पूर्ण बहुमत की सरकार होने का केंद्र ने औद्योगिक घरानों को खुश करने के लिए करोना काल में भी अन्नदाताओं के खिलाफ संसद में विवादित बिल पास किए। किसान आंदोलन के खिलाफ तरह-तरह के हथकंडे और दमनकारी नीति केंद्र सरकार के पूर्ण बहुमत के अहंकार को दर्शाता है। इससे देशभर के अन्नदाता हूं के आंखभर आए हैं। भारतीय जनता पार्टी के आईटी सेल और केंद्र सरकार नीतियों समर्थन में खड़े लोग देश की हर छोटी-बड़ी उपलब्धि का श्रेय देश के प्रधानमंत्री को देते हैं। प्रधानमंत्री भी देश की विज्ञान और प्रौद्योगिकी की सफलता, वैज्ञानिकों की कोई खोज व शोध, व्यापार और व्यापारियों की तरक्की,सेना का शौर्य, खिलाड़ी का मैडल से लेकर हर कला और संस्कृति के क्षेत्र में मिलने वाली उपलब्धि के पीछे स्वयं को ही कारक मानते हैं, तो आज कोरोना के आपदा में उपजी भयावह स्थिति के कारक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी क्यों नहीं?
विगत दिनों हमारे पोर्टल द्वारा प्रमुखता से उठाए गए गुंडरदेही तहसील अंतर्गत रंगकठेरा में रेत के अवैध भंडारण के मुद्दे पर प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई । अवैध रूप से धारसा रोड में भंडारी रेत को रॉयल्टी पर्ची जारी कर अमर इंफ्रा लिमिटेड दुर्ग को शासकीय कार्य में उपयोग के लिए दे दिया। प्रशासन की इस तरह से की गई कार्रवाई से जनता में प्रशासन के प्रति विश्वास बढ़ा हैं।
छत्तीसगढ़ शासन द्वारा पदोन्नति की सूची जारी की गई जिसमे डौंडी लोहारा के अनुविभागीय दंडाधिकारी कुशल प्रशासनिक क्षमता व्यवहार कुशल सहज एवं सरल व्यक्तित्व के धनी एसडीएम ऋषिकेश तिवारी जी को छत्तीसगढ़ शासन द्वारा संयुक्त कलेक्टर के पद पर पदोन्नत होने पर नगर के नागरिकों एवं जन प्रतिनिधियों व प्रशंसकों द्वारा सोशल मीडिया फेसबुक एवं व्हाट्सअप के माध्यम से बधाई दी जा रही है |
इसके साथ सिटी मीडिया परिवार की ओर से डौंडी लोहारा एसडीएम ऋषिकेश तिवारी जी को संयुक्त कलेक्टर के पद पर पदोन्नत होने पर शुभकामनाएं एवं उज्जवल भविष्य की शुभकामना की |
छत्तीसगढ़ शासन द्वारा पदोन्नति की सूची जारी की गई जिसमे डौंडी लोहारा के अनुविभागीय दंडाधिकारी कुशल प्रशासनिक क्षमता व्यवहार कुशल सहज एवं सरल व्यक्तित्व के धनी एसडीएम ऋषिकेश तिवारी जी को छत्तीसगढ़ शासन द्वारा संयुक्त कलेक्टर के पद पर पदोन्नत होने पर नगर के नागरिकों एवं जन प्रतिनिधियों व प्रशंसकों द्वारा सोशल मीडिया फेसबुक एवं व्हाट्सअप के माध्यम से बधाई दी जा रही है |
इसके साथ सिटी मीडिया परिवार की ओर से डौंडी लोहारा एसडीएम ऋषिकेश तिवारी जी को संयुक्त कलेक्टर के पद पर पदोन्नत होने पर शुभकामनाएं एवं उज्जवल भविष्य की शुभकामना की |