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पंडुम” शब्द के प्रयोग पर आदिवासी समाज ने जताई आपत्ति

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यह आदिवासियों की आस्था से जुड़ा शब्द है यह: प्रकाश ठाकुर

जगदलपुर सर्व आदिवासी समाज ने अनुसूचित क्षेत्र बस्तर में प्रस्तावित एवं आयोजित कार्यक्रमों में “पंडूम” शब्द के प्रयोग पर आपत्ति दर्ज कराते हुए उक्त शब्द को तत्काल हटाने एवं आदिवासी धार्मिक परंपराओं की संवैधानिक रक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। सर्व आदिवासी समाज के बस्तर संभाग अध्यक्ष प्रकाश ठाकुर ने इस संबंध में राजयपाल, मुख्यमंत्री, आदिम जाति कल्याण मंत्री एवं शीर्ष अधिकारियों को पत्र प्रेषित किया है।

पत्र में प्रकाश ठाकुर ने कहा है कि वर्तमान में “बस्तर पंडूम” नाम से जिस प्रकार के शासकीय अर्ध-शासकीय अथवा सार्वजनिक आयोजन आयोजित किए जा रहे हैं, वह आदिवासी समाज की धार्मिक आस्था, परंपरा और जीवन-दर्शन के मूल स्वरूप के विपरीत हैं। “पंडूम” कोई उत्सव, प्रदर्शन, कार्यक्रम या प्रचारात्मक शब्द नहीं है। “पण्डुम आदिवासियों की पेन (देव) बुढ़ाल पेन, सजोर पेन, जिम्मेदारीन याया, डांड राव पेन, गांव गोसिन के सहयोगी पेन अर्थात देवों को गांव, परिवार के वडे, पुजारी, सिरहा, गायता के हाथों से सामुदायिक या पारिवारिक रूप से नए प्राकृतिक फल, फूल, अनाज, वनोपज की धार्मिक सेवा अर्जी पूजा पस्ट करने की विधिमय देव धामी तिहार को पंडुम कहते हैं। यह आदिवासी समाज की प्राचीन धार्मिक आस्था, सामूहिक चेतना, पारंपरिक अनुष्ठान और जीवन-प्रक्रिया से जुड़ा हुआ शब्द है। पंडूम के लिए परंपरागत रूप से निश्चित स्थान, समय, तिथि व दिन, मौसम, निर्धारित व्यक्ति (परंपरागत भूमिका-धारी), निर्धारित समुदाय, निर्धारित भाषा, निर्धारित सेवा-अर्जी अनुष्ठान का होना अनिवार्य है। ठाकुर ने कहा है कि इनके बिना किसी भी आयोजन को पंडूम कहना परंपरा का सीधा सीधा विकृतिकरण है एवं असंगत है। संविधान का अनुच्छेद 244 अनुसूचित क्षेत्रों में प्रशासन को आदिवासी परंपरा, रीति-रिवाज एवं संस्थाओं के संरक्षण के अनुरूप संचालित करने का दायित्व राज्य पर डालता है।पेसा अधिनियम, 1996 ग्राम सभा को परंपरागत प्रथाओं एवं सांस्कृतिक पहचान की रक्षा का सर्वोच्च अधिकार देता है। बिना ग्रामसभा की सहमति के किसी भी परंपरागत शब्द या प्रक्रिया का शासकीय उपयोग पेसा की भावना के विपरीत है।संविधान का अनुच्छेद 29 आदिवासी समाज को अपनी विशिष्ट भाषा और संस्कृति के संरक्षण का मौलिक अधिकार प्रदान करता है।संविधान का अनुच्छेद 13 किसी भी राज्य कार्रवाई को मौलिक अधिकारों के प्रतिकूल होने से रोकता है।इन प्रावधानों के आलोक में “पंडूम” शब्द का इस प्रकार उपयोग हमारी संधार्मिक आस्था विश्वास, संवैधानिक रूप से आपत्तिजनक है।

आदिवासी समाज की मांग

प्रकाश ठाकुर ने आदिवासी समाज की ओर से मांग की हैं कि “बस्तर पंडूम” अथवा किसी भी शासकीय सार्वजनिक आयोजन में ‘पंडूम’ शब्द का प्रयोग तत्काल रोका जाए, इस शब्द को सभी शासकीय दस्तावेजों, प्रचार सामग्री एवं आयोजनों से हमेशा के लिए हटाया जाए, भविष्य में किसी भी आदिवासी परंपरागत शब्द, प्रक्रिया के उपयोग से पूर्व ग्रामसभा एवं आदिवासी समुदाय के धार्मिक कार्य करने वाले व्यक्तियों की स्वीकृति अनिवार्य की जाए एवं अनुसूचित क्षेत्र में सांस्कृतिक आयोजनों हेतु पेसा के अनुरूप स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं।

सिंचाई, सड़क और सशक्त पंचायत से बदलेगी बस्तर की तस्वीर: मंत्री केदार कश्यप

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कश्यप ने बस्तर ब्लॉक को दी 3.46 करोड़ के विकास कार्यों की सौगात तुरपुरा जलाशय के जीर्णोद्धार से अंतिम छोर के खेतों तक पहुंचेगा पानी

जगदलपुर नारायणपुर विधानसभा क्षेत्र में विकास की अविरल धारा को निरंतर प्रवाहमान बनाए रखते हुए क्षेत्रीय विधायक और वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने गुरुवार को बस्तर विकासखंड के सघन भ्रमण के दौरान तुरपुरा और कोटगढ़ में आयोजित कार्यक्रमों में कुल 3 करोड़ 46 लाख 28 हजार रुपए के विकास कार्यों का भूमिपूजन और लोकार्पण किया। इन कार्यों का सीधा लाभ ग्रामीण जनता और किसानों को मिलेगा।

मंत्री केदार कश्यप का यह दौरा किसानों के लिए सिंचाई सुविधा के विस्तार पर फोकस रहा। वन मंत्री कश्यप ने जल संसाधन विभाग के अंतर्गत तुरपुरा जलाशय के व्यापक जीर्णोद्धार कार्य का भूमिपूजन किया। लगभग 2 करोड़ 95 लाख 28 हजार रुपये की लागत से होने वाले इस कार्य में जलाशय बांध के ऊपर गिट्टी कार्य, नवीन स्लूस, वेस्ट वियर कार्य और नहर लाइनिंग व स्ट्रक्चर निर्माण शामिल हैं। इस परियोजना के पूरा होने से क्षेत्र की सिंचाई क्षमता में वृद्धि होगी।

इसके अतिरिक्त ग्रामीण अधोसंरचना को मजबूत करने के लिए कोटगढ़ में 20 लाख रुपए की लागत से बनने वाले नवीन पंचायत भवन, मुंडागुड़ा में 5 लाख रुपए के रंगमंच निर्माण और केशरपाल में उसरीगुड़ा से नहरनी पहुंच मार्ग पर 5 लाख रुपये की लागत से बनने वाली पुलिया का भी भूमिपूजन किया गया। वन मंत्री केदार कश्यप ने क्षेत्र के भ्रमण के दौरान नए कार्यों की आधारशिला रखने के साथ ही ग्रामीणों के आवागमन को सुगम बनाने के लिए 21 लाख रुपये की लागत से निर्मित पक्की सड़कों का लोकार्पण भी किया। इसमें कुम्हली में मंगियापारा से मुख्यमार्ग तक, केशरपाल (सोरगांव) में हीरा घर से भागमन घर तक और सोलेमेटा में अक्षय घर से पंचू घर तक बनी तीन अलग-अलग सीसी सड़कें शामिल हैं, जिनमें से प्रत्येक की लागत 7 लाख रुपये है। इस प्रकार मंत्री ने कुल 3 करोड़ 25 लाख 28 हजार रुपए लागत के नए कार्यों का भूमिपूजन और 21 लाख रुपये के पूर्ण हो चुके कार्यों का लोकार्पण कर क्षेत्र के विकास के प्रति अपनी कटिबद्धता दोहराई। इस अवसर पर जनसभा को संबोधित करते हुए वन मंत्री श्री कश्यप ने क्षेत्र के सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर सार्थक प्रयास करने भरोसा दिलाया और इन योजनाओं के दूरगामी लाभों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार का लक्ष्य केवल आधारशिला रखना नहीं, बल्कि समय सीमा के भीतर गुणवत्तापूर्ण कार्य पूर्ण कर जनता को समर्पित करना है।

बस्तर की आत्मा है कृषि: कश्यप

जल संसाधन मंत्री केदार कश्यप ने क्षेत्र की सबसे बड़ी परियोजना 2.95 करोड़ रुपये की लागत वाले तुरपुरा जलाशय जीर्णोद्धार पर विस्तार से चर्चा करते हुए कहा बस्तर की आत्मा यहां की खेती-किसानी में बसती है। तुरपुरा जलाशय में नई स्लूस गेट, वेस्ट वियर और नहरों की लाइनिंग का कार्य केवल कंक्रिट का निर्माण नहीं है, बल्कि यह इस क्षेत्र के सैकड़ों किसानों के लिए जीवनदायिनी है। जब नहरें पक्की होंगी और अंतिम छोर के खेत तक भी पानी पहुंचेगा। इससे न केवल सिंचाई का रकबा बढ़ेगा, बल्कि किसान साल में एक से अधिक फसल लेने में सक्षम होंगे, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। वहीं कुम्हली, केशरपाल और सोलेमेटा में 21 लाख रुपये की लागत से बनी सीसी सड़कों के लोकार्पण पर उन्होंने कहा कि कुम्हली के मंगियापारा, सोलेमेटा के अक्षय घर और केशरपाल के अंदरूनी इलाकों तक पक्की सीसी सड़कें बनकर तैयार हैं। ये सड़कें न केवल आवागमन को आसान बनाएंगी, बल्कि मरीजों को अस्पताल पहुंचाने और बच्चों को स्कूल जाने में सहूलियत भी होगी। कोटगढ़ में 20 लाख रुपये की लागत से बनने वाले नवीन पंचायत भवन के भूमिपूजन के दौरान उन्होंने कहा कोटगढ़ में नवीन पंचायत भवन बनने से गांव के विकास की योजनाएं अब और बेहतर ढंग से बन सकेंगी। इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष वेदवती कश्यप, जनपद पंचायत अध्यक्ष संतोष बघेल, जिला पंचायत सदस्य निर्देश दीवान सहित अन्य जनप्रतिनिधि,अधिकारी, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।

तोमन साहू की एक और बड़ी जीत हाई कोर्ट ने खारिज की केस

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भारतीय रेड क्रॉस सोसाइटी छत्तीसगढ़ राज्य के चुनाव को रद्द करने की याचिका पर न्यायालय के निर्णय के बाद श्री तोमन साहू ने जताया आभार

बालोद भारतीय रेड क्रॉस सोसाइटी छत्तीसगढ़ राज्य के चुनाव को रद्द करने की याचिका पर छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के निर्णय के बाद तोमन साहू, उपाध्यक्ष जिला पंचायत बालोद और चेयरमेन भारतीय रेड क्रॉस सोसाइटी ने न्यायालय के प्रति आभार व्यक्त किया है। तोमन साहू के समर्थकों ने इस निर्णय पर खुशी जाहिर की है और कहा है कि यह न्याय की जीत है। उन्होंने कहा कि तोमन साहू ने हमेशा समाज के हित में काम किया है और इस निर्णय से उनकी प्रतिष्ठा और बढ़ी है।

तोमन साहू ने कहा कि वे न्यायालय के निर्णय का सम्मान करते हैं और आगे भी समाज के हित में काम करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि वे भारतीय रेड क्रॉस सोसाइटी के चेयर मैन के रूप में अपनी जिम्मेदारियों को पूरी तरह से निभाएंगे और समाज के लोगों के लिए काम करेंगे।इस अवसर पर तोमन साहू के समर्थकों ने उनके नेतृत्व में जश्न मनाया और उन्हें बधाई दी। उन्होंने कहा कि तोमन साहू का नेतृत्व समाज के लिए हमेशा फायदेमंद रहेगा और वे उनके साथ हमेशा खड़े रहेंगे।

नक्सल गढ़ में दिखने लगा मार्च का बासंती बयार

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अति नक्सल प्रभावित पिल्लूर में पहली दफे बनने जा रहा है स्कूल भवन

मार्च-2026 की शाह वाली डेड लाइन और साय के सुशासन का बड़ा असर

अर्जुन-

जगदलपुर बस्तर संभाग के अति नक्सल प्रभावित इलाकों में दो माह पहले ही बासंती बयार बहने लगी है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की 31 मार्च 2026 वाली डेड लाइन और साय के सुशासन का बड़ा असर नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में नजर आने लगा है। बस्तर के पूरी तरह नक्सल मुक्त होने के उत्साह वर्धक लक्षण दिखने लगे हैं। नक्सल आतंक के चलते बुझ चुका शिक्षा का दीपक अब फिर से प्रदीप्त हो उठा है, सड़कें बनने से विकास के रास्ते खुल गए हैं। सहमी सी रहने वाली इंद्रावती की लहरें फिर से हिलोरें मारने लगी हैं।

बस्तर संभाग का बीजापुर जिला दशकों से नक्सलवाद का दंश झेलते आया है। इस जिले के ज्यादातर अंदरूनी गांवों में नक्सलियों का कब्जा रहा है। नतीजतन इन गांवों में शुद्ध पेयजल, बिजली, सड़क, शिक्षा, चिकित्सा जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं पहुंच पा रही थीं। नक्सलियों ने अपने स्वार्थ के लिए ग्रामीणों को इन जरूरतों और बच्चों को शिक्षा से वंचित कर रखा था। देश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार आने, संकल्प शक्ति के धनी अमित शाह के केंद्रीय गृहमंत्री बनने और छत्तीसगढ़ में सुशासन वाली विष्णु देव साय सरकार बनने के बाद बस्तर की आबो हवा में भारी बदलाव आया है। हिंसक कारनामों से दहशत फैलाने नक्सली अब खुद दहशत में आ गए हैं। उच्च मनोबल के साथ सुरक्षा बलों और पुलिस के जवान तेजी से नक्सली गढ़ ढहाते जा रहे हैं। गांवों में सुरक्षा कैंपों की स्थापना के साथ ही सुविधाएं भी पहुंचने लगी हैं। बीजापुर जिले के भोपालपटनम क्षेत्र के अति नक्सल प्रभावित ग्राम पिल्लूर इसका एक बड़ा उदाहरण है, जहां दशकों बाद शिक्षा के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक पहल हुई है। यहां पहली बार स्थायी स्कूल भवन के निर्माण का रास्ता खुल गया है। पिल्लूर में स्कूल भवन हेतु भूमिपूजन कार्यक्रम आयोजित किया गया। भूमिपूजन जिला पंचायत उपाध्यक्ष पेरे पुलैया ने किया। अब तक ग्राम पिल्लूर में स्कूल का संचालन अस्थायी शेड में किया जा रहा था, जिससे विद्यार्थियों को पढ़ाई में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। नए स्कूल भवन के निर्माण से बच्चों को सुरक्षित और बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिलेगा।

नए युग की शुरुआत

गौरतलब है कि हाल ही में क्षेत्र में सुरक्षा कैंप खुलने के बाद विकास कार्यों को गति मिली है। इसी का परिणाम है कि अब शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधा गांव तक पहुंच रही है। भूमिपूजन के बाद गांव के लोगों में खुशी और उत्साह का माहौल देखा गया। ग्रामीणों ने इस पहल को क्षेत्र के लिए नए विकास युग की शुरुआत बताते हुए प्रशासन एवं जनप्रतिनिधियों के प्रति आभार व्यक्त किया है। लोगों को उम्मीद है कि आने वाले समय में शिक्षा, सड़क, स्वास्थ्य जैसी सुविधाओं का भी विस्तार होगा। पिल्लूर सरपंच कुम्मा समैया, टी. गोवर्धन राव, शिक्षक इंजीनियर एवं ग्रामीण मौजूद रहे।

जैतगिरी धान खरीदी केंद्र में किसानों से खुलेआम, ज्यादा धान कटौती का आरोप

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विरोध करने पर धान न तौलने की देते हैं धमकी

अर्जुन झा-

बकावंड बस्तर जिले केबकावंड विकासखंड की ग्राम पंचायत जैतगिरी स्थित धान खरीदी केंद्र में किसानों के साथ खुलेआम लूट की जा रही है। खरीदी केंद्र में पदस्थ मैनेजर सतीश कुमार पांडे पर किसानों से नियमों को ताक पर रखकर 41.220 ग्राम प्रति बोरी धान जबरन काटे जाने का गंभीर आरोप लगा है। यह कटौती न तो किसी शासकीय आदेश के अंतर्गत है और न ही इसका कोई वैधानिक आधार बताया जा रहा है, जिससे किसानों में भारी आक्रोश व्याप्त है। किसानों का कहना है कि पहले ही वे प्राकृतिक आपदाओं, बढ़ती लागत, खाद-बीज की महंगाई और मजदूरी संकट से जूझ रहे हैं, ऊपर से धान खरीदी केंद्र में इस तरह की अवैध कटौती उनके साथ आर्थिक शोषण और सीधी लूट के है।किसानों ने आरोप लगाया कि जब वे इस कटौती का विरोध करते हैं तो उन्हें धमकी दी जाती है कि धान नहीं तौलेंगे, वापस ले जाओ। जिससे मजबूर होकर किसान कटौती सहने को विवश हैं।

स्थानीय किसानों ने यह भी बताया कि यह गड़बड़ी कोई एक-दो दिन की नहीं, बल्कि लंबे समय से लगातार जारी है। हर बोरी में 41.220 ग्राम धान की कटौती करने से सैकड़ों क्विंटल धान का अवैध फायदा उठाया जा रहा है, जिसकी सीधी मार गरीब और छोटे किसानों पर पड़ रही है। किसानों का सवाल है कि यह कटा हुआ धान आखिर जा कहां रहा है और किसके संरक्षण में यह लूट चल रही है?ग्रामीणों और किसान संगठनों ने इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है तथा दोषी मैनेजर सतीश कुमार पांडे पर तत्काल निलंबन एवं कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है। साथ ही किसानों से अब तक की गई अवैध कटौती की पूरी भरपाई किए जाने की भी मांग उठ रही है।किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही इस मामले में प्रशासन द्वारा सख्त कदम नहीं उठाया गया, तो वे मजबूर होकर ब्लॉक एवं जिला स्तर पर उग्र आंदोलन करेंगे, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। यह मामला न सिर्फ किसानों के हक का है, बल्कि सरकार की धान खरीदी व्यवस्था की पारदर्शिता पर भी बड़ा सवाल खड़ा करता है।

जगदलपुर के लामनी एवियरी में आए नए मेहमान

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ब्लू गोल्ड मकाऊ और अफ्रीकन ग्रे पैरेट के आने से गुलजार हुआ बर्ड पार्क

जगदलपुर शहर के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल लामनी बर्ड पार्क में बुधवार का दिन प्रकृति प्रेमियों और पर्यटकों के लिए बेहद खास रहा। पार्क के प्राकृतिक सौंदर्य और जैव विविधता में चार चांद लगाने के लिए नए मेहमानों के रूप में विदेशी पक्षियों का आगमन हुआ है। बुधवार को एवियरी में बेहद आकर्षक ब्लू एंड गोल्ड मकाऊ और अफ्रीकन ग्रे पैरेट लाए गए। ये पक्षी पार्क में आकर्षण का केंद्र बने गए हैं। इन नए मेहमानों के आने से पार्क का पक्षी संग्रह अब और भी समृद्ध हो गया है। इस दौरान प्रकृति प्रेमियों, पर्यटकों सहित नागरिकों ने इन नए मेहमानों का उत्साह के साथ स्वागत किया।

लामनी बर्ड पार्क में पहुंचे इन नए मेहमानों में ब्लू एंड गोल्ड मकाऊ जिसे आरा अराराौना भी कहा जाता है, मूल रूप से मध्य और दक्षिण अमेरिका के जंगलों और सवाना का निवासी है। अपनी बुद्धिमत्ता और चटख रंगों के लिए मशहूर इस तोते का ऊपरी हिस्सा गहरा नीला और निचला हिस्सा पेट और छाती चमकदार सुनहरा पीली होती है, जो इसे अद्भुत सौंदर्य प्रदान करता है। इसके सिर पर हरा रंग और चोंच के पास काले पंखों से सजी सफेद त्वचा इसकी विशिष्ट पहचान है। लगभग 34 से 36 इंच की लंबाई और 41 से 45 इंच के पंखों के फैलाव वाले ये विशाल तोते न केवल देखने में सुंदर हैं, बल्कि इंसानों की तरह बातचीत करने में भी सक्षम हैं। इनके साथ ही आया अफ्रीकन ग्रे पैरेट अपनी सटीक नकल करने की क्षमता के लिए दुनिया भर में जाना जाता है, जो पर्यटकों विशेषकर बच्चों के लिए मनोरंजन का एक नया जरिया बनेगा।

बड़े बातूनी होते हैं ये परिंदे

बस्तर डीएफओ उत्तम कुमार गुप्ता ने बताया कि मकाऊ और अफ्रीकन ग्रे पैरेट पालतू पक्षी के रूप में बहुत लोकप्रिय हैं क्योंकि ये बहुत सामाजिक, बुद्धिमान और चंचल होते हैं। उन्होंने बताया कि ये पक्षी शब्दों और वाक्यांशों को दोहरा सकते हैं और अपने मालिकों के साथ गहरा भावनात्मक जुड़ाव बना लेते हैं। हालांकि इन्हें बहुत अधिक ध्यान, उचित पोषण और देखभाल की आवश्यकता होती है, क्योंकि इनकी चोंच बहुत मजबूत होती है और ये मेवे तोड़ने में सक्षम होते हैं। सबसे खास बात यह है कि ये पक्षी लंबे समय तक जीवित रहते हैं और इनकी आयु 80 साल तक हो सकती है, इसलिए इनका पालन-पोषण एक बड़ी जिम्मेदारी का काम है। लामनी पार्क में इन विदेशी पक्षियों के आगमन से उम्मीद है कि शहरवासी और पर्यटक, विशेषकर बच्चे, इन रंग-बिरंगे और बातूनी पक्षियों को करीब से देखने के लिए बड़ी संख्या में यहां पहुंचेंगे।

धान खरीदी में अव्यवस्था और किसानों की प्रताड़ना के खिलाफ कांग्रेस ने खोला मोर्चा

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कलेक्टर को दी चेतावनी- समस्या का समाधान नहीं हुआ तो रोक देंगे परिवहन

बालोद जिले में धान खरीदी के दौरान किसानों को आ रही समस्याओं और प्रशासनिक सख्ती के विरोध में जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष चंद्रेश हिरवानी के नेतृत्व में जिले के तीनों विधायकों अनिला भेड़िया डौंडी लोहारा, कुंवर सिंह निषाद गुंडरदेही एवं संगीता सिन्हा बालोद ने कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। चर्चा के दौरान विधायकों और कांग्रेस पदाधिकारियों ने शासन-प्रशासन द्वारा किसानों के घरों में जाकर धान का स्टॉक चेक करने की कार्रवाई की कड़ी निंदा की। नेताओं ने स्पष्ट कहा कि किसानों के साथ अपराधी की तरह ट्रीट करना और स्टॉक चेक कर टोकन प्रदान करने में देरी करना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

कांग्रेस ने इसे तत्काल बंद करने की मांग की है। कहा गया कि धान खरीदी के मात्र 11 दिन शेष हैं, जबकि जिले के हजारों किसानों का धान अब तक नहीं खरीदा जा सका है। खरीदी केंद्रों की सीमा को तुरंत बढ़ाने की मांग की गई है ताकि किसान तय समय के भीतर अपना धान बेच सकें। टोकन वितरण में हो रही देरी और अनावश्यक नियमों से किसानों को मुक्त करने की बात कही गई।

दी उग्र आंदोलन की चेतावनी

जिला कांग्रेस अध्यक्ष चंद्रेश हिरवानी एवं विधायकों ने कलेक्टर को दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही इन समस्याओं का निदान नहीं किया गया और किसानों को राहत नहीं मिली, तो कांग्रेस पार्टी बालोद जिले में धान का परिवहन रोकने जैसे उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होगी, जिसकी समस्त जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। इस दौरान पूर्व विधायक भैयाराम सिन्हा, प्रदेश पदाधिकारी कृष्णा दुबे, मिथलेश निरोटी, गुलशन चंद्राकर, भोला देशमुख, राजू प्रभाकर, धनेश्वरी सिन्हा, पीयूष सोनी, रतीराम कोसमा, अंचल साहू, डॉ. किशोर साहू, सादिक अली, नरेंद्र सिन्हा, कुलदीप नौम्हारे, देवेंद्र साहू, कमलेश श्रीवास्तव, मोनू ठाकुर, यशवंत पुरी गोस्वामी, संदीप साहू, वैभव साहू, दाउद खान, जमील बख्श, जितेंद्र यादव, भूषण साहू, तुल्लेस सिन्हा, हिमांशु सागर साहू सहित ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष एवं बड़ी संख्या में पदाधिकारी उपस्थित रहे।

बस्तर की बेटी वैष्णवी राज्य के खिलाड़ियों के लिए बनी प्रेरणा

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पुणे में होने वाली राष्ट्रीय पावर लिफ्टिंग चैंपियनशिप में दिखाएगी जौहर

जगदलपुर छत्तीसगढ़ राज्य (क्लासिक) बेंच प्रेस एवं डेडलिफ्ट सब जूनियर, जूनियर, सीनियर एवं मास्टर 1-2-3 महिला एवं पुरुष पावर लिफ्टिंग चैंपियनशिप का आयोजन 30 और 31 जनवरी को पुणे, महाराष्ट्र में किया जाना है। इस प्रतियोगिता के माध्यम से मास्टर पावर लिफ्टिंग नेशनल चैंपियनशिप के लिए खिलाड़ियों का चयन किया जाएगा। राज्यभर के प्रतिभावान खिलाड़ी इस आयोजन में अपनी ताकत और तकनीक का प्रदर्शन करेंगे। इससे पहले वर्ष 2025 में श्रीलंका के सिड़वा में आयोजित अंतरराष्ट्रीय बेंच प्रेस एवं डेडलिफ्ट प्रतियोगिता में विजयी खिलाड़ियों को छत्तीसगढ़ के राज्यपाल और विधानसभा अध्यक्ष द्वारा सम्मानित किया गया था। इस सम्मान समारोह में बस्तर जिले की बेटी कुमारी वैष्णवी प्रजापति ने भी सहभागिता की थी, जिन्होंने अपनी मेहनत और अनुशासन के बल पर बेंच प्रेस स्पर्धा में प्रथम स्थान हासिल कर जिले का नाम रोशन किया। वैष्णवी की सफलता के पीछे संघर्ष की एक लंबी कहानी है। उनके पिता संतोष प्रजापति दिव्यांग हैं ।

और आर्थिक रूप से सक्षम नहीं होने के बावजूद उन्होंने अपनी बेटी की खेल प्रतिभा पर भरोसा किया। सीमित संसाधनों के बीच भी उन्होंने वैष्णवी को देश के बाहर खेलने का अवसर दिलाया, जो आज बस्तर के लिए गर्व का विषय बन गया है। यह उपलब्धि केवल एक खिलाड़ी की जीत नहीं, बल्कि उन तमाम प्रतिभाओं का प्रतिनिधित्व करती है, जो संसाधनों के अभाव में आगे नहीं बढ़ पातीं। बस्तर जैसे क्षेत्रों में कई होनहार खिलाड़ी मौजूद हैं, लेकिन आर्थिक कमजोरी और सहयोग के अभाव में वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच तक नहीं पहुंच पाते। स्थानीय स्तर पर जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक सहयोग की कमी के कारण अनेक प्रतिभावान खिलाड़ी बाहर जाकर प्रतियोगिताओं में भाग नहीं ले पा रहे हैं। यदि ऐसे खिलाड़ियों को समय पर आर्थिक और संस्थागत सहयोग मिले, तो बस्तर के खिलाड़ी देश ही नहीं, विदेशों में भी अपनी पहचान बना सकते हैं। वैष्णवी प्रजापति की सफलता यह संदेश देती है कि सही मार्गदर्शन और सहयोग मिलने पर सीमित साधनों के बीच भी असाधारण प्रतिभाएं उभर सकती हैं। आने वाली राज्य स्तरीय और राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं से बस्तर के एकबार फिर गौरवान्वित होने की उम्मीद की जा रही है।

नक्सलमुक्त होने की राह पर गोगुंड़ा गांव

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40 साल से नक्सलियों का राज चल रहा था यहां

गोगुंड़ा के 29 नक्सलियों ने किया आत्म समर्पण

अर्जुन झा-

जगदलपुर बस्तर संभाग के सुकमा जिले का सबसे संवेदनशील और पिछले चार दशकों से नक्सलियों का गढ़ बना रहा गोगुंड़ा गांव अब नक्सल मुक्ति की राह पर तेजी से अग्रसर हो रहा है। इस गांव और आसपास के गांवों के 29 नक्सलियों ने आज आत्मसमर्पण कर गोगुंड़ा गांव के नक्सल मुक्त होने का रास्ता साफ कर दिया। कोंटा एरिया कमेटी सचिव मंगडू की मौत के बाद गोगुंड़ा गांव और आसपास इलाके में सक्रिय रहे 29 नक्सली आज 14 जनवरी को आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा से जुड़ गए। 31 मार्च 2026 की डेडलाइन से पहले ही नक्सल संगठन की कमर टूटती नजर आ रही है। जहां एक ओर एंटी नक्सल आपरेशन में नक्सली मारे जा रहे हैं, वहीं दूसरी और केंद्र एवं राज्य सरकारों की योजनाओं तथा छत्तीसगढ़ सरकार की आत्मसमर्पण नीति से प्रभावित होकर बड़ी संख्या में नक्सली आत्मसमर्पण कर रहे हैं।

सुकमा एसपी किरण चव्हाण ने पुष्टि करते हुए कहा कि सुकमा जिला तेजी से माओवादमुक्ति की ओर बढ़ रहा है। जो माओवादी अभी भी शेष हैं, उनसे अपील है कि वे आत्म समर्पण कर शासन की योजनाओं का लाभ लें और देश, राज्य तथा बस्तर के विकास में भागीदार बनें। आज जिन नक्सलियों ने सरेंडर किया है वे केरलापाल इलाके में सक्रिय रहे हैं।

इन्होंने किया सरेंडर

बुधवार को जिला मुख्यालय स्थित पुलिस अधीक्षक कार्यालय में गोगुंड़ा गांव के 29 नक्सली आत्मसमर्पण करने और मुख्यधारा से जुड़ने के लिए पहुंचे। जहां पुलिस अधीक्षक किरण चव्हाण और सीआरपीएफ अधिकारी हिमांशु लोहानी के समक्ष उन्होंने आत्मसमर्पण किया। जिसमें पोड़ियामी बुधरा दो लाख का इनामी, हेमला मंगडू, मड़कम हिड़मा, हेमला हिड़मा, माड़वी देवा, हेमला नंदा, मड़कम बुधरा, मुचाकी सोमा, मुचाकी गुट्टा, पोड़ियामी देवा, मुचाकी बुधरा, पोड़ियामी सोमड़ा, मुचाकी मुड़ा, सोढ़ी देवा, मुचाकि हिड़मा, वेट्टी देवा, मुचाकि नंदा, माड़वी राजा, पोड़ियामी बुधरी, सोड़ी नंदा, मड़कम कोसा, सोढ़ी बुधरा, मुचाकी आयता, मुचाकी नंदा, मुचाकी मुका, माड़वी सुक्का, माड़वी देवा, मुचाकी हिड़मा, मुचाकी लक्मा ने आत्म समर्पण किया। सभी आत्म समर्पण को सहयोग राशि के अलावा शासन की योजना का लाभ दिया जाऐगा। इस दौरान आईपीएस एएसपी रोहित शाह, मनीष रात्रे समेत पुलिस और सीआरपीएफ अधिकारी मौजूद रहे।

पहाड़ की चोटी पर है गोगुंड़ा गां

गोगुंड़ा गांव की भागौलिक स्थिति बेहद जटिल है। इस गांव पर चार दशकों नक्सली काबिज रहे हैं। जिले का सबसे अति संवेदनशील गांव गोगुंड़ा पूरी तरह पहाड़ पर बसा हुआ है। आपरेशन करने के लिए जवानों को खड़ी पहाड़ी पर करीब 8 किमी. पैदल चलना पड़ता था। घने जंगल और उंची पहाड़ की चोटी माओवादियों के लिए सेफ जोन हुआ करती थी। लेकिन दो माह पहले पुलिस और सुरक्षा बलों ने वहां नया कैंप खोल दिया है और पहाड़ को काटकर एक सड़क भी बना ली गई है। जिसके बाद यहं छुपे माओवादी भागने लगे। कुछ दिन पहले इसी गांव का रहने वाला कोंटा एरिया कमेटी का सचिव मंगडू मुठभेड़ में मारा गया था। वहीं पिछले दो माह से लगातार प्रशासन वहां पहुंच रहा है। कलेक्टर अमित कुमार और एसपी किरण चव्हाण पूरी टीम के साथ वहां पहुंचे थे। जिसके बाद ग्रामीण भी प्रभावित हुए और माओवाद संगठन के लिए स्थानीय स्तर में काम करने वालों ने आत्म समर्पण किया।

वर्सन

कम हो जाएगी माओवादी गतिविधि

जिला पुलिस बल और सीआरपीएफ द्वारा लगातार कैंप खोले जा रहे हैं और आपरेशन चलाए जा रहे हैं, जिसके कारण माओवादी संगठन पर दबाव बना है। 29 माओवादी गांव में स्थानीय स्तर पर काम करने वाले 29 माओ वादियों ने शासन की योजनाओं से प्रभावित होकर आत्मसमर्पण किया है। आने वाले समय में उस इलाके में माओवाद गतिविधि कम हो जाएगी।

खेलो इंडिया नेशनल ट्राइबल गेम्स: कलेक्टर श्रीमती मिश्रा ने ’मशाल गौरव यात्रा’ वाहन को हरी झण्डी दिखाकर किया रवाना

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बालोद, 14 जनवरी 2026 कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा ने आज संयुक्त जिला कार्यालय परिसर में ’खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स’ के शुभंकर ’मोर वीर’ का पुष्पगुच्छ भेंटकर स्वागत किया। इस दौरान कलेक्टर श्रीमती मिश्रा ने जिले में ’खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स’ के व्यापक प्रचार-प्रसार और आम लोगों को इससे जोड़ने के लिए पहुँचे ’मशाल गौरव यात्रा’ वाहन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। उल्लेखनीय है कि भारतीय खेल प्राधिकरण द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य में ’खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स’ का प्रथम संस्करण का आयोजन किया जाएगा। इस विशेष आयोजन के व्यापक प्रचार-प्रसार और आम लोगों को इससे जोड़ने के लिए ’मशाल गौरव यात्रा’ वाहन पूरे प्रदेश का भ्रमण कर नागरिकों को खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स के महत्व की विस्तृत जानकारी प्रदान कर रहा है। इस अवसर पर अपर कलेक्टर चंद्रकांत कौशिक एवं डिप्टी कलेक्टर श्रीमती प्राची ठाकुर सहित अन्य अधिकारी-कर्मचारीगण उपस्थित थे।

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