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चेरो बाई को जब तक आवास न उपलब्ध करा दूं, बैठूंगा नहीं चैन से: बनवासी मौर्य

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  • बेसहारा महिला की मदद के लिए भाजपा नेता का प्रण
  • फिलहाल अपाहिज वृद्धा को मिला सुरक्षित ठिकाना

अर्जुन झा

बकावंड बुजुर्ग महिला चेरो बाई की मदद के लिए बकावंड ब्लॉक के वरिष्ठ भाजपा नेता बनवासी मौर्य ने जो पहल की है उसकी सर्वत्र प्रशंसा हो रही है। प्रदेश भाजपा कार्यसमिति सदस्य बनवासी मौर्य ने तो जिद ही ठान ली है कि जब तक वे चेरो बाई को एक व्यवस्थित आवास न उपलब्ध नहीं करा देते, तब तक चैन से नहीं बैठेंगे।

चेरो बाई बकावंड विकासखंड की ग्राम पंचायत डिमरापाल की वो अभागन महतारी है, जिसे अपनों ने ही बेघर कर दिया है। बेबस चेरो बाई ने गांव की शासकीय उचित मूल्य की दुकान के एक हिस्से में बसेरा कर रखा था। इस समाचार पत्र ने चेरोबाई की दारुण दशा को प्रमुखता से उजागर किया था। इसके बाद से ही भाजपा नेता बनवासी मौर्य ने चेरो बाई की मदद के लिए हाथ आगे बढ़ा दिए थे। खबर प्रकाशित होते ही बनवासी मौर्य चेरो बाई से मिलने पहुंचे, उसका हालचाल जाना और उसके खाने पीने के इंतजाम किया। बस्तर संभाग में इन दिनों बेमौसम बरसात का दौर चल रहा है। ऐसे में सांप, बिच्छू और अन्य जहरीले कीड़े मकोड़े बिलों से बाहर निकलने लगे हैं। जिस राशन दुकान में चेरो बाई रह रही थी, वह जहरीले जीवों से कतई सुरक्षित नहीं था। ऐसे में चेरो बाई की जान पर कभी भी खतरा पैदा हो सकता था। इस बात को ध्यान में रखते हुए संवेदनशील एवं सहृदय भाजपा नेता बनवासी मौर्य ने गांव के सामुदायिक भवन में फिलहाल चेरोबाई के रहने की वैकल्पिक व्यवस्था कर दी है और चेरो बाई को वहां शिफ्ट भी कर दिया गया है। चेरो बाई को शिफ्ट करने में स्वयं बनवासी मौर्य ने भी हाथ बंटाया।

रोज मिलने जाते हैं मौर्य

भाजपा नेता मौर्य प्रतिदिन चेरो बाई से मिलने प्रायः पहुंच रहे हैं। पुनः दूसरे दिन चेरो बाई का हालचाल जानने के लिए भाजपा प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य बनवासी मौर्य अपने साथियों के साथ पहुंचे थे।  मौर्य ने कहा कि चेरो बाई को जब तक पक्का मकान नही दिलवा दूंगा, चैन से नही बैठूंगा। चाहे मुझे अपने खर्चे से मकान बनाकर देना क्यों ना पड़े। इस अवसर पर भाजपा प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य बनवासी मौर्य, फुलके पाण्डे, विषम ठाकुर, रैपाल निषाद, राम गामा पटेल, ग्राम पंचायत सचिव गणपत नागे, आदि मौजूद रहे। बनवासी मौर्य ने बताया कि चेरो बाई की मदद के लिए एसडीएम गगन शर्मा, हल्का पटवारी और पंचायत सचिव गणपत नागे भी जी जान से जुट गए हैं। बनवासी मौर्य का कहना है कि चेरो बाई को सिर्फ आवास ही नहीं, बल्कि सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना का लाभ भी मिलना चाहिए।

बस्तर में धड़ल्ले से खापाई जा रही है ओड़िशा की दुकानों की देसी -विदेशी शराब

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  • आबकारी अधिकारियों और ओड़िशा के शराब ठेकेदारों की मिलीभगत

अर्जुन झा

बकावंड छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में ओड़िशा की शराब धड़ल्ले से बिक रही है। छत्तीसगढ़ शासन के आबकारी विभाग के अधिकारियों और ओड़िशा की शराब लॉबी की सांठगांठ पर यह गोरखधंधा खूब फल फूल रहा है। बस्तर के सीमावर्ती इलाकों में छत्तीसगढ़ में सरकारी तौर पर बेची जाने वाली शराब की खपत न के बराबर हो रही है।

बस्तर संभाग के बकावंड विकासखंड के नलपावंड समेत कुछ अन्य गांव ओड़िशा की सीमा के बहुत ही करीब में स्थित हैं। इन्हीं गांवों के रास्ते ओड़िशा की शराब बस्तर में लाकर खपाई जा रही है। बताते हैं कि छत्तीसगढ़ की अपेक्षा ओड़िशा में देसी और अंग्रेजी शराब काफी सस्ती है और वहां शराब की खपत बहुत कम होती है। लिहाजा वहां के शराब ठेकेदारों ने अपनी शराब को बस्तर के गांवों में खपवाना शुरू कर दिया है। सूत्र बताते हैं कि इसके लिए ओड़िशा के शराब ठेकेदारों ने यहां के कुछ आबकारी अधिकारियों को सेट कर लिया है। ओड़िशा की शराब छत्तीसगढ़ में बिकवाने के बदले यहां के आबकारी अधिकारियों को मोटा कमीशन ओड़िशा के ठेकेदार देते हैं। वहीं बकावंड ब्लॉक के कई युवाओं को भी ओड़िशा के शराब ठेकेदारों ने अपना कोचिया नियुक्त कर रखा है। यही कोचिए ओड़िशा के सीमाई गांव – शहरों की शराब दुकानों से माल लाकर यहां गांव गांव में बेचने लगे हैं। चूंकि ओड़िशा की शराब कम क़ीमत पर मिल जाती है, इसलिए स्थानीय तलबगार वहीं की शराब का इस्तेमाल करने लगे हैं। बस्तर के आबकारी विभाग के अधिकारी और पुलिस वालों की मौन सहमति से यह काला कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है। इस तिकड़ी की मिलीभगत से गांव गांव में ओड़िशा की दारू बेची जा।रही है।

*बॉक्स*

*खेतों में शराब की टूटी बोतलें*

विकासखंड बकावंड की ग्राम पंचायत नलपावंड में ओड़िशा की शराब की खपत बहुत ही ज्यादा हो रही है। नलपावंड ओड़िशा के बहुत ही करीब है। यहां ओड़िशा की दुकानों में बिकने वाली अंग्रेजी शराब आसानी से मिल जाती है। नलपावंड के खेतों में अंग्रेजी शराब की टूटी फूटी बोतलों की भरमार नजर आ रही है। बियर और विभिन्न ब्रांडो की अंग्रेजी शराब नलपावंड की बेतहाशा खपत हो रही है। टूटी बोतलों के टुकड़ों की बहुतायत इस बात की गवाही दे रहे हैं कि ओड़िशा से छत्तीसगढ़ में शराब की तस्करी कितने बड़े पैमाने पर हो रही है। खेतों में हल चलाते और काम करते समय किसान, मजदूर और उनके मवेशी कांच के टुकड़ों से लगातार जख्मी हो रहे हैं।

बिग बेकिंग मानपुर चौक डामर प्लांट के पास खंबे से टकराकर युवक हुआ घायल

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दल्लीराजहरा मानपुर चौक स्थित डामर प्लांट के पास बाइक सवारी युवक बिजली खंभे से टकराकर हुआ घायल, घटना दोपहर 12:00 के आसपास की बताई जा रही है घटना का कारण अज्ञात है स्थानीय लोगों की मदद से घायल युवक को 108 की मदद से चिखलाकसा शासकीय अस्पताल पहुंचाया गया युवक का नाम ओमेश्वर कुमार पिता दीनाराम वार्ड क्रमांक -2 मंगचुआ, डौंडीलोहारा का रहने वाला है, घटना का कारण अज्ञात है स्थानियों युवकों को द्वारा, घायल युवक को 108 की मदद से शासकीय अस्पताल चिखलाकसा पहुंचाया गया।

 

बिजली विभाग की लापरवाही से गौमाता की मौत

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  • बिजली विभाग की लापरवाही, सुबह से टूटा था तार, करंट भी चालू, जनपद सदस्य संजय बैस के आंखों के सामने करंट की चपेट में आने से गौमाता की मौत

बालोद बालोद ब्लॉक के ग्राम उमरादाह, जो दुर्ग मार्ग पर स्थित है, में बिजली विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आई है। जहां विगत रात्रि से आंधी तूफान के कारण टूटे हुए बिजली तार से दूसरे दिन बुधवार को शाम तक भी असुरक्षित करंट सप्लाई होता रहा। इसी करंट की चपेट में आने से एक गौ माता की मौके पर मौत हो गई। यह पूरी घटना कुसुमकसा के निवासी जनपद सदस्य संजय बैस के आंखों के सामने हुई। जो बुधवार की शाम करीब 4.30 बजे उसी रास्ते से दुर्ग जा रहे थे। तभी उन्होंने प्राथमिक शाला मुख्य मार्ग के सामने एक गौमाता को छटपटाते हुए देखा। उन्होंने तत्काल गाड़ी रोक पास जाकर देखा तो गौमाता बिजली तार से लिपटी हुई थी। चंद सेकेंड में तड़पते हुए गौमाता ने अपने प्राण त्याग दिए। सुबह से तार टूटे होने की जानकारी हुई और इस घटना से साबित हुआ कि विभाग के कर्मचारियों ने लापरवाही करते हुए इस मुख्य हाई टेंशन तार से करंट की सप्लाई भी बंद नही की थी। उन्होंने तत्काल मामले की जानकारी बिजली विभाग के डीई को दी। जिन्होंने तत्काल मामले को स्टाफ भेजकर दिखवाने की बात कही। वहीं इस घटना के बाद विभाग हरकत में आ रहा है। लेकिन अगर समय पर सप्लाई बंद की जाती तो यह घटना नही होती । साथ ही लोगों के लिए भी यह सुबह से बड़ा खतरा बना हुआ है।

बेसहारा बच्चों की मां बन गई विधायक भावना बोहरा, पोंछे अपने आंचल से गरीबों के आंसू

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  • उठाई लालन पालन और शिक्षा की बड़ी जिम्मेदारी
  • विधायक भावना बोहरा ने कुकदुर हादसे में मृतकों के बच्चों को लिया गोद
  •  शिक्षा, विवाह और रोजगार तक जिम्मेदारी उठाने का दिया भरोसा 

पंडरिया सोमवार को कवर्धा जिले के पंडरिया वनांचल क्षेत्र स्थित कुकदुर के ग्राम बाहपानी में हुए भीषण सड़क हादसे में अपनी जान गंवाने वाले 19 आदिवासियों के परिवारों के बच्चों के लिए विधायक भावना बोहरा ममतामयी मां बनकर सामने आ गईं हैं।उन्होंने बेसहारा हुए इन बच्चों को गोद लेने की घोषणा की है। विधायक भावना बोहरा ने आज मृतकों के परिजनों से उनके निवास पर जाकर भेंट की और उन्हें ढांढस बंधाया। इस दौरान भावना बोहरा बहुत ही भावुक दिखीं। उनकी आंखें छलकी पड़ रही थीं। उन्हें देखकर परिवारजनों ने भी गले लगाकर अपनी पीड़ा व्यक्त की। विधायक भावना बोहरा ने कहा कि यह बहुत ही दुखद व पीड़ा दायक घटना है। जब परिवार का एक सदस्य जाता है, तो बड़ी पीड़ा होती है और उसकी कमी कभी पूरी नही हो सकती। विगत वर्षों में कुकदुर क्ष्रेत्र के आदिवासी भाई- बहनों ने हमेशा ही मुझे एक परिवार की भांति स्नेह व सहयोग दिया है। आज यहां इस दुख की घड़ी में मैं उन सभी परिवारजनों के साथ खड़ी हूं। इसलिए हमने निर्णय लिया है कि इस हादसे में जिन बच्चों के सिर से परिजनों का साया उठ गया हैं, जिनके माता-पिता ने इस हादसे में अपनी जान गंवाई है उनके परिजन की भूमिका हम निभाएंगे। भावना बोहरा ने बताया कि हादसे में दिवंगत हुए 19 लोगों के करीब 24 बेटे -बेटियों के आगे की शिक्षा, उनके रोजगार एवं विवाह तक की सारी जिम्मेदारी वे स्वयं अपने भावना समाजसेवी संस्थान के माध्यम से उठाएंगी। समूचा पंडरिया विधानसभा क्षेत्र मेरा परिवार है और जब परिवार पर विपदा आती है तो उनके दुख में उनके साथ रहना मेरी जिम्मेदारी भी है और कर्तव्य भी। मैं उनके परिजनों की कमी तो पूरी नही कर सकती, लेकिन उनके सुरक्षित भविष्य के लिए प्रयास जरूर कर सकती हूं इसलिए हमने यह निर्णय लिया है। विदित हो कि घटना होने के दिन विधायक भावना बोहरा झारखंड प्रवास पर थीं। उन्हें जैसे ही घटना की जानकारी प्राप्त हुई उन्होंने तत्काल अपने सभी कार्यक्रमों को स्थगित कर दिया और लगातार पुलिस प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से संपर्क में रहकर हताहतों की जानकारी लेती रहीं। पूरे घटनाक्रम और राहत एवं बचाव कार्य की जानकारी प्राप्त करती रहीं। उन्होंने अपने जनप्रतिनिधियों के माध्यम से तुरंत ही हादसे में हताहत परिवारजनों से संपर्क कर उन्हें अंतिम संस्कार के लिए आर्थिक सहायता भी उपलब्ध करवाई। वे तत्काल झारखंड से छत्तीसगढ़ के लिए रवाना हुईं और आज हताहत परिवारजनों के निवास पहुंचकर उनसे भेंट कर एवं संवेदनाव्यक्त की।

जिनकी जमीन ली गई, वो हैं बेरोजगार, बाहरी लोगों को मिल रहा है रोजगार

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  • नगरनार इस्पात संयंत्र के प्रभावितों के हक में फिर उठने लगी आवाज
    नगरनार :- एनएमडीसी द्वारा नगरनार में इस्पात संयंत्र स्थापना के लिए जिन लोगों की जमीन अधिग्रहित की गई है, उनके परिवार के लोग रोजगार के लिए दर दर भटक रहे हैं | और बाहरी लोगों को नगरनार इस्पात संयंत्र में भरपूर रोजगार मिल रहा है।वहीं स्थानीय ट्रांसपोर्टरों को भी काम नहीं दिया जा रहा है। जय झाड़ेश्वर परिवहन सहकारी समिति के प्रतिनिधि मंडल ने संयंत्र के अधिशासी निदेशक को ज्ञापन सौंपकर उपेक्षा पर रोक लगाने और स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की मांग की है।


समिति के लोगों का कहना है कि नगरनार इस्पात संयत्र में क्षेत्र के भू प्रभावित एवं शिक्षित बेरोजगारों को परिवहन एवं अन्य कार्यों में प्राथमिकता देते हुए रोजगार उपलब्ध कराया जाना चाहिए। सन 2001 में नगरनार में इस्पात सयंत्र का शिलान्यास यहां की जनता को प्रत्येक क्षेत्र में प्राथमिकता देते हुए हजारों रोजगार उपलब्ध करने के वादे के साथ हुआ था, परंतु आज तक यहां के बेरोजगार रोजगार पाने हेतु संघर्ष कर रहे हैं। क्षेत्र की दस मुख्य भू प्रभावित ग्राम पंचायतो में भी विकास धरातल पर दिखाई नहीं दे रहा है। आज संयंत्र पूर्णता की ओर है और संयत्र से उठने वाले धुएं एवं ध्वनि के प्रदूषण और जल प्रदूषण की मार स्थानीय लोग झेल रहे हैं। परंतु लाभ बाहरी व्यक्तियों को प्राप्त हो रहा है। संयंत्र में ठेकेदारी प्रथा का चलन धड़ल्ले से शुरू हो चुका है। समिति ने कहा है कि संयत्र शुरू होने के बाद यहां से जो भी परिवहन गतिविधि संचालित हो रही है, निर्यात सम्बंधित कार्य में बाहर के बाहुबली लोगों का आधिपत्य है। इससे स्थानीय जनता में रोष व्याप्त है। परिवहन हेतु स्थानीय समिति जय झाडेश्वर सहकारी समिति मर्यादित नगरनार से हजारों की संख्या में बेरोजगार एवं ग्रामीण जुड़े हुए हैं। इन समिति के माध्यम से परिवहन के कार्य निष्पादित किये जाएं जिससे यहां के बेरोजगारों को लाभ मिल सके।

इस्पात संयत्र निर्माण में वाहन की आवश्यकता को देखते हुए प्रभावित एवं शिक्षित बेरोजगारों द्वारा राष्ट्रीयकृत एवं प्राइवेट बैंकों से ट्रैक्टर, ट्रक, हाईवा, जेसीबी, ट्रेलर आदि वाहन फाइनेंस करवाकर लिए गए हैं, लेकिन उन्हें काम नहीं मिल रहा है। लिहाजा वे किस्त भरने में असमर्थ हैं और परेशानी झेल रहे हैं। एनएमडीसी द्वारा छोटे -छोटे ओपन टेंडर प्रक्रिया अपनाई जाती है, उसकी विधिवत जानकारी टेंडर पूर्व ग्राम पंचायतों को उपलब्ध कराई जानी चाहिए। इस्पात संयत्र में मेंटेनेंस कार्य हेतु हेल्पर हेतु अकुशल अर्ध कुशल, कुशल, मजदूरों की भर्ती में प्रभवित क्षेत्र के लोगों को पहले प्राथमिकता दी जानी चाहिए। जय झाड़ेश्वर परिवहन सहकारी समिति मर्यादित नगरनार ने उक्त सभी मुद्दों को दृष्टिगत रखते हुए जल्द से जल्द स्थानीय परिवहन समिति तथा क्षेत्रीय बेरोजगारों के हित में निर्णय लेने का आग्रह अधिशासी निदेशक से किया है।

मद्दी परिवार ने किया गृहमंत्री विजय शर्मा का स्वागत

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जगदलपुर छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री विजय शर्मा का स्थानीय प्रतिष्ठित मद्दी परिवार ने आत्मीय स्वागत किया। स्वागत करने वालों में अविनाश इंटरनेशनल के श्रीधर मद्दी, अनिल मद्दी, अभिषेक मद्दी व अन्य सदस्य शामिल थे।

हाटगुडा में ईसाई मत मानने वाले के कफन दफन को लेकर हुआ भारी विरोध

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  •  ग्रामीणों व विहिप बजरंग दल ने किया पुरजोर विरोध
  • वरिष्ठजनों एवं प्रशासन के समक्ष हुई हिंदू रीति नीति से अंत्येष्टि
    जगदलपुर जिले के ग्राम हाटगुड़ा में बुधवार को फिर एक मतांतरित आदिवासी के शव के अंतिम संस्कार को लेकर विवाद की स्थिति निर्मित हो गई। भारी विरोध के बीच अंततः हिंदू रीति रिवाज से अंत्येष्टि करनी पड़ी।
    दरअसल जिस आदिवासी का निधन हुआ था, उसने और परिजनों ने ईसाई धर्म स्वीकार कर लिया है। परिजन उसके शव को गांव में दफनाना चाहते थे। ग्रामीण इसके विरोध में उतर आए। विश्व हिंदू परिषद बजरंग दल के लोग भी बड़ी संख्या में हाटगुड़ा पहुंच गए थे।

स्थिति को देखते हुए प्रशासन के अधिकारी पुलिस बल के साथ मौके पर मौजूद थे। स्थानीय आदिवासी समाज के प्रबल विरोध को देखते हुए अंततः अंतिम संस्कार हिंदू रीति रिवाज़ से निपटना पड़ा। बस्तर जिले सहित जनजातीय क्षेत्रों में सांस्कृतिक हस्तक्षेप के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। बस्तर में प्रत्येक प्रकृति और माटी की पूजा होती है। यह परंपरा आदिकाल से चली आ रही है। संस्कृति में हस्तक्षेप से यह परंपरा नष्ट होती जा रही है। इतिहास गवाह है कि आदिवासियों ने बड़े बड़े विद्रोह व अग्रेजी सरकार के विरोध में किया है और अब यही आदिवासी अपनी संस्कृति बचाने लगातार संघर्ष कर रहे हैं। बस्तर संभाग पांचवी अनुसूची लागू होने के बाद भी अब तक की सरकारों ने संस्कृति को बचाने कोई ठोस कदम नहीं उठाए हैं। बस्तर की पहचान प्रकृति और यहां के प्रकृति पूजकों के वजह से है। इसके संरक्षण हेतु सरकार को कठोर नियम बनाने व संस्कृति के रक्षण हेतु विशेष पहल करने की आवश्यकता है।

बजरंग दल के नगर संयोजक भवानी सिंह चौहान ने बताया कि हिंदू और ईसाई की पूजा पद्धति अलग अलग हैं, आराधना स्थल भी अलग हैं।फिर भी हमारे अंतिम संस्कार स्थलों में बारंबार हस्तक्षेप हो रहा है। जब ईसाइयों के पादरी हिंदू से ईसाई में मतांतरण कर सकते हैं, तो अंतिम संस्कार के स्थल अलग क्यों नहीं कर रहे? लगातार जनजातीय क्षेत्र में गतिरोध पैदा हो रहा है। जिसे दूर करने, संस्कृति के संरक्षण हेतु सरकार और प्रशासन को इस ओर ध्यान देने की जरूरत है। इस कार्य में विहिप जिला अध्यक्ष हरि साहू, विभाग सेवा प्रमुख अनिल अग्रवाल, जिला उपाध्यक्ष प्रेम चालकी, जिला संयोजक घनश्याम नाग, जिला सहमंत्री होमेश राठौर, जिला सेवा प्रमुख देवेंद्र कश्यप, जिला धर्म प्रसार प्रमुख आशीष कोटक, प्रखंड अध्यक्ष कैलाश ठाकुर, प्रखंड संयोजक सुरेश नाग, उपाध्यक्ष शेखर देवांगन, अशोक देवांगन, सहमंत्री वीरेंद्र कच्छ, नगर सहमंत्री गौरव ठाकुर, नगर प्रसार प्रमुख सुमीत गुप्ता, नगर साप्ताहिक मिलन प्रमुख सन्नी रैली, नगर गौरक्षा प्रमुख योगेश ठाकुर, जसवंत जोशी, पारेश्वर यादव, डिलेश ठाकुर, मनीष ठाकुर, अमित ठाकुर, संतोष यादव, डालेश्वर कश्यप, मोहन ठाकुर, मोहन गोयल, कपिल कश्यप और गांव के वरिष्ठजन उपस्तिथ थे।

बस्तर की ये छोरियां भी कतई कम नहीं हैं हमारे शहरी छोरों से

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  •  ट्रेक्टर, बाईक रिपेयरिंग में दक्ष हैं बेटियां भी 
    -अर्जुन झा-
    बकावंड हाथों में पाना पेंचिस थामे ट्रेक्टर और बाईक रिपेयर करती बेटियों को देख यकबयक यकीन नहीं हुआ कि ये बस्तर की छोरियां हैं। करीब जाकर देखा, तो दिल में जो जज्बात उठे, उन्हें चंद अल्फाजों में बयां कर पाना मुमकिन नहीं है। हां हमारे बस्तर की छोरियां अब शहरी छोरों को भी मात देने के लिए कमर कस चुकी हैं। आत्मनिर्भरता की राह पर अब बस्तर की बेटियां भी अग्रसर हो रही हैं। वह भी बिना आईटीआई में प्रशिक्षण प्राप्त किए।
    बस्तर जिले के बकावंड विकासखंड के ग्राम जैबेल -1 में बाइक से लेकर फोर व्हीलर, ट्रेक्टर तक की रिपेयरिंग और सर्विसिंग की एक वर्कशॉप है प्रकाश ऑटो। बस्तर की दो कर्मठ बेटियां रामशीला बघेल और मीना बघेल बीते पांच माह से जैबेल के प्रकाश ऑटो सर्विस में अपने हुनर का जादू दिखा रही हैं।

रमशीला और मीना पक्की सहेलियां हैं। वे हाथों में पाना पेंचिस थामकर अपने हुनर का बखूबी प्रदर्शन कर रही हैं। दोनों किशोरियां हर तरह की बाईक, ट्रेक्टर और फोर व्हीलर की रिपेयरिंग कर अच्छी खासी कमाई कर लेती हैं। उनका हुनर देख कर आप उनकी तारीफ किए बिना नहीं रह सकते। बाइक से लेकर सभी तरह के फोर व्हीलर की वे रिपेयरिंग अच्छे से कर लेती हैं। उन्हें यह काम बहुत पसंद है और वे इसी फील्ड में अपना करियर बनाना चाहती हैं। रमशीला और मीना बताती हैं कि हमें इस कार्य से अच्छी कमाई हो जाती है और हम अपने परिवार की आजीविका में बेहतर योगदान दे पा रही हैं। हमें गर्व है कि हमारे माता पिता ने कभी यह काम करने से रोका नहीं, बल्कि हमारा हौसला बढ़ाने का ही काम किया है।

कलेकर को पसंद हैं ऐसी बेटियां
बस्तर के कलेक्टर विजय दयाराम के. रमशीला और मीना सरीखी बेटियों को खूब पसंद करते हैं और उनका हौसला बढ़ाने के मामले में जरा भी कंजूसी नहीं करते। उनकी इस नेकदिली की मिसालें गाहे बगाहे सामने आती रहती हैं। उम्मीद है रमशीला बघेल और मीना बघेल को भी कलेक्टर विजय दयाराम के. का आशीर्वाद जरूर मिलेगा। वैसे रमशीला और मीना भी कलेक्टर से मिलना चाहती हैं, मगर इसके लिए उनका जगदलपुर जा पाना संभव नहीं है।

प्रशासन और जनप्रतिनिधि ने ली बेसहारा बुजुर्ग महिला चेरो बाई की सुध

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  •  अपाहिज वृद्धा को आवास उपलब्ध कराने कवायद
  • अब चेरोबाई को मिलेगा प्रधानमंत्री आवास
    -अर्जुन झा-
    बकावंड हरिभूमि में बुजुर्ग महिला चेरो बाई की त्रासदी की गाथा प्रकाशित होने के बाद प्रशासन और जनप्रतिनिधि उसकी मदद के लिए आगे आ रहे हैं। भाजपा नेता एवं क्षेत्र के जनप्रतिनिधि बनवासी मौर्य बुजुर्ग को हर संभव मदद के लिए तत्पर दिख रहे हैं, वहीं प्रशासन ने भी चेरो बाई को आशियाना उपलब्ध कराने के लिए कवायद तेज कर दी है।
    बस्तर जिले के बकावंड विकासखंड की ग्राम पंचायत डिमरापाल निवासी 60 वर्षीय चेरो बघेल पैरों से विकलांग है। निशक्त चेरो बाई की परवरिश करने से उसकी ही संतानों और परिजनों ने हाथ खींच लिया और उसे घर से निकाल दिया है। चेरो बाई सरकारी उचित मूल्य की दुकान के भवन के एक हिस्से में रहकर दिन काट रही है।

उसके नाम पर स्वीकृत प्रधानमंत्री आवास भी रिश्तेदारों ने बनने नहीं दिया।डिमरापाल के सरपंच सचिव ने भी चेरो बाई की मदद नहीं की। इस समाचार पत्र ने जब चेरो बाई की त्रासदी को प्रशासन और जन सामान्य के बीच लाया, तब लोग उसकी मदद के लिए आगे आ रहे हैं।क्षेत्र के जनप्रतिनिधि एवं वरिष्ठ भाजपा नेता बनवासी मौर्य ने चेरो बाई के लिए आवास निर्माण की पहल की है।  मौर्य ने जल्द से जल्द प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत चेरो बाई के लिए आवास बनवाने की पहल शुरू कर दी है, मगर इस नेक राह में पंचायत सचिव रोड़ा बन रहे हैं। बनवासी मौर्य ने आज पटवारी और पंचायत सचिव को आवास के लिए जमीन की नापजोख करने बुलाया था, मगर सचिव नहीं पहुंचे। बनवासी मौर्य ने कहा है कि वे हर हाल में चेरो बाई के लिए एक आवास बनवा कर ही रहेंगे। वहीं बकावंड के एसडीएम गगन शर्मा ने भी चेरो बाई को आवास और सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना का लाभ दिलाने प्रशासनिक स्तर पर पहल शुरू कर दी है। एसडीएम का कहना है कि चेरो बाई के लिए जल्द ही आवास की व्यवस्था कर दी जाएगी।

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