जगदलपुर कांकेर जिले के अंतागढ़ में पत्रकार के साथ थाना प्रभारी अंतागढ़ द्वारा किए गए दुर्व्यवहार की शिवसेना (उद्धव बाला साहब ठाकरे) के छत्तीसगढ़ प्रदेश महासचिव चंद्रमौली मिश्रा ने कड़ी निंदा की है। मिश्रा ने कहा है कि बस्तर जैसे दुर्गम क्षेत्र में पत्रकार अपनी जान जोखिम में डालकर आम जनता की आवाज बन कर क्षेत्र की जन समस्याओं को शासन, प्रशासन तक पहुंचाते हैं। वे सच्चे मन से जनता की सेवा कर रहे हैं। वहां पर अगर पुलिस द्वारा पत्रकारों के साथ ऐसा व्यवहार किया जाता है, तो आम जनता के बीच पुलिस की छवि धूमिल होती है एवं आगे क्षेत्र का वातावरण खराब होगा। शिवसेना नेता चंद्रमौली मिश्रा ने शासन प्रशासन इस मामले की जांच करते हुए तत्काल थाना प्रभारी पर कार्रवाई करने की मांग की है।
खाद संकट को लेकर विधानसभा उप नेता प्रतिपक्ष एवं बस्तर विधायक श्री लखेश्वर बघेल का भाजपा सरकार पर बड़ा हमला, कहा-किसान खाद के लिए परेशान, सरकार मौन
प्रदेश में लगातार गहराते खाद संकट और किसानों को समय पर आवश्यक उर्वरक उपलब्ध नहीं होने की समस्या को लेकर छत्तीसगढ़ विधानसभा के उप नेता प्रतिपक्ष एवं बस्तर विधायक श्री लखेश्वर बघेल ने राज्य सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं उन्होंने कहा कि एक ओर सरकार किसानों के हितों की बात करती है और कृषि को प्राथमिकता देने के दावे करती है, वहीं दूसरी ओर प्रदेश का किसान आज डीएपी और यूरिया खाद के लिए दर-दर भटकने और घंटों लंबी कतारों में खड़े रहने को मजबूर है।
बघेल ने कहा कि वर्तमान समय खेती-किसानी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है खरीफ फसलों की बुवाई और कृषि कार्य तेजी से शुरू हो चुके हैं, लेकिन किसानों को समय पर बीज एवं खाद उपलब्ध नहीं होने के कारण वे गंभीर चिंता में हैं प्रदेश के विभिन्न सहकारी समितियों, सोसायटियों एवं खाद वितरण केंद्रों में किसानों की भारी भीड़ देखने को मिल रही है, लेकिन मांग के अनुरूप खाद की उपलब्धता नहीं हो पा रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि कई स्थानों पर किसानों को पर्याप्त मात्रा में डीएपी खाद नहीं दिया जा रहा है और दो एकड़ या उससे अधिक कृषि भूमि रखने वाले किसानों को भी केवल एक बोरी खाद देकर वापस भेजा जा रहा है इससे किसानों को खेती के कार्य में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
बस्तर विधायक नें कहा कि यह स्थिति केवल अव्यवस्था नहीं, बल्कि किसानों के साथ अन्याय है प्रदेश का किसान पहले से ही मौसम की अनिश्चितता, बढ़ती लागत और आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहा है ऐसे समय में बीज और खाद की कमी किसानों की परेशानियों को और बढ़ा रही है यदि किसानों को समय पर डीएपी, यूरिया एवं अन्य आवश्यक उर्वरक उपलब्ध नहीं कराए गए तो इसका सीधा असर फसल उत्पादन पर पड़ेगा, जिससे आने वाले समय में किसानों की आय प्रभावित होगी और कृषि व्यवस्था कमजोर होगी।
उन्होंने कहा कि सरकार की जिम्मेदारी केवल घोषणाएं करना नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर व्यवस्थाओं को मजबूत करना है यदि समय रहते खाद संकट का समाधान नहीं किया गया, तो प्रदेश के हजारों किसानों की खेती प्रभावित हो सकती है सरकार को चाहिए कि खाद भंडारण, वितरण और आपूर्ति व्यवस्था की तत्काल समीक्षा कर आवश्यक कदम उठाए।
बघेल ने प्रशासन से मांग की कि खाद वितरण व्यवस्था को पारदर्शी बनाया जाए तथा यह सुनिश्चित किया जाए कि वास्तविक किसानों तक खाद उचित मात्रा में पहुंचे साथ ही उन्होंने खाद की कालाबाजारी, जमाखोरी एवं वितरण में अनियमितता करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की उन्होंने कहा कि कई बार किसानों को पर्याप्त खाद नहीं मिलने के बावजूद निजी स्तर पर अधिक कीमतों पर खाद उपलब्ध होने की शिकायतें सामने आती हैं, जिसकी जांच आवश्यक हैल
उन्होंने यह भी कहा कि किसानों को केवल खाद ही नहीं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण बीज की उपलब्धता भी सुनिश्चित की जानी चाहिए कई क्षेत्रों में किसानों द्वारा बीज उपलब्धता और गुणवत्ता को लेकर भी चिंता जताई जा रही है कृषि सीजन के दौरान बीज और खाद दोनों की पर्याप्त व्यवस्था होना बेहद आवश्यक है, ताकि किसानों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े
छत्तीसगढ़ विधानसभा उप नेता प्रतिपक्ष श्री लखेश्वर बघेल ने राज्य सरकार से मांग की कि प्रदेशभर में डीएपी एवं यूरिया खाद की पर्याप्त आपूर्ति तत्काल सुनिश्चित की जाए, वितरण व्यवस्था में सुधार लाया जाए तथा किसानों को राहत देने के लिए विशेष निगरानी तंत्र बनाया जाए
उन्होंने कहा कि किसान देश और प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं अन्नदाता की उपेक्षा किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं की जा सकती कांग्रेस पार्टी किसानों के मुद्दों को लगातार उठाती रही है और आगे भी किसानों के अधिकार, सम्मान एवं हितों की रक्षा के लिए हर स्तर पर संघर्ष करती रहेगी
नेशनल हाईवे-30 पर ट्रक से टकराया पिकअ,पपास सड़क हादसा, खालीll पिकअप ट्रक से टकराई, ड्राइवर गंभीर
फरसागुड़ा-जूनावाही के बीच हुई दुर्घटना
जगदलपुर नेशनल हाइवे-30 पर फरसागुड़ा जूनावाही के पास आज सुबह बड़ी सड़क दुर्घटना हो गई। जगदलपुर से केशकाल की ओर जा रहे खाली मुर्गा पिकअप आगे चल रहे ट्रक से साइड लेते समय अनियंत्रित होकर पीछे से टकरा गया। हादसे में पिकअप बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और चालक गंभीर रूप से घायल हो गया।
पिकअप में दो लोग सवार थे। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि पिकअप का अगला हिस्सा पूरी तरह चकनाचूर हो गया और ड्राइवर को गंभीर चोटें आई हैं। घायल ड्राइवर को 108 एंबुलेंस से मेकाज अस्पताल जगदलपुर ले लाया गया है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार पिकअप जगदलपुर में मुर्गा खाली करके वापस केशकाल जा रहा था। इसी दौरान ट्रक को ओवरटेक करने के प्रयास में पिकअप पीछे से जा टकराया। हादसे के बाद हाइवे पर कुछ देर आवागमन बाधित रहा। पुलिस ने क्रेन की मदद से क्षतिग्रस्त पिकअप को सड़क से हटवाकर यातायात बहाल कराया।
कोलचूर पंचायत में लाखों के भ्रष्टाचार का आरोप, बाउंड्रीवॉल निर्माण में गड़बड़ी
पूर्व सरपंच और वर्तमान सचिव पर सरकारी राशि डकारने का आरोप
नाराज ग्रामीण बोले- कागजों पर विकास, जमीन पर भ्रष्टाचार
जगदलपुर विकासखंड बस्तर अंतर्गत ग्राम पंचायत कोलचूर में पंचायत के कार्यों में भारी वित्तीय अनियमितता और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप सामने आए हैं। ग्रामीणों ने पूर्व सरपंच और वर्तमान सचिव पर मिलीभगत कर सरकारी राशि के दुरुपयोग का आरोप लगाया है। मामले को लेकर गांव में भारी नाराजगी का माहौल है और ग्रामीण लगातार जांच व कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार पंचायत में बाउंड्रीवॉल निर्माण कार्य के नाम पर लगभग 4 लाख 90 हजार रुपए की स्वीकृति हुई थी, लेकिन जमीन पर निर्माण कार्य बेहद घटिया और अधूरा दिखाई दे रहा है।
आरोप है कि करीब 4 लाख 50 हजार रुपए तक की राशि केवल कागजों में खर्च दिखाकर हड़प ली गई। गांव वालों का कहना है कि विकास कार्य सिर्फ फाइलों और दस्तावेजों में पूरे हो रहे हैं, जबकि हकीकत में पंचायत की स्थिति बदहाल है। ग्रामीणों ने बताया कि पंचायत में कई अन्य निर्माण कार्यों में भी इसी तरह की अनियमितताएं सामने आ रही हैं। कहीं आधा-अधूरा निर्माण किया गया, तो कहीं बिना काम किए ही भुगतान निकाल लिया गया। लोगों का आरोप है कि पंचायत सचिव की लापरवाही और मनमानी के कारण शासन की योजनाएं भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रही हैं। गांव के लोगों का कहना है कि अगर उच्च स्तरीय जांच कराई जाए तो पंचायत में लाखों रुपए के घोटाले उजागर हो सकते हैं। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी अब तक चुप्पी साधे बैठे हैं, जिससे लोगों में प्रशासन के प्रति आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और जनपद पंचायत से मांग की है कि कोलचूर पंचायत के सभी निर्माण कार्यों की निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा दोषियों पर सख्त कार्रवाई कर सरकारी राशि की वसूली की जाए। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गंभीर मामले में कार्रवाई करता है या फिर भ्रष्टाचार की फाइलों पर धूल जमती रहेगी।
वर्जन
कराएंगे जांच
पंचायत से लगातार शिकायतें मिल रही हैं और सचिव के कार्यों में गंभीर लापरवाही सामने आ रही है। जांच कराएंगे और जो लोग भी दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई होगी।
नगर पंचायत में करोड़ों की गड़बड़ी, सीएमओ और अकॉउंटेंट सस्पेंड
वित्तीय अनियमितता की जांच प्रक्रिया हुई तेज
जगदलपुर बस्तर संभाग के बीजापुर जिले की नगर पंचायत भोपालपटनम में हुई वित्तीय गड़बड़ी और नियमों की अनदेखी को लेकर छत्तीसगढ़ शासन ने बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग मंत्रालय, नया रायपुर द्वारा जारी आदेश के अनुसार नगर पंचायत भोपालपटनम के सीएमओ विकास पाटले एवं लेखापाल सूर्यकिरण चिडेम को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
जारी आदेश के अनुसार मुख्य नगर पालिका अधिकारी और लेखपाल पर टेंडर प्रक्रिया में गंभीर अनियमितता, बिना प्रशासनिक स्वीकृति के कार्य कराने तथा सरकारी राशि के दुरुपयोग जैसे गंभीर आरोप लगे हैं। शासन ने मामले को गंभीर मानते हुए प्रारंभिक जांच के आधार पर यह कार्रवाई की है। इस कार्रवाई के बाद नगर पंचायत भोपालपटनम में हड़कंप की स्थिति बनी हुई है। जानकारी के अनुसार नगर पंचायत भोपालपटनम में अटल चौक स्थापना कार्य के नाम पर किए गए कार्यों में नियमों को दरकिनार कर लगभग 15 लाख रुपए की राशि बिना सक्षम अनुमति के आहरित किए जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि कार्यों के निष्पादन में निर्धारित निविदा प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया तथा वित्तीय अनुशासन की खुली अवहेलना की गई। शासन के आदेश में उल्लेख किया गया है कि बिना सक्षम स्वीकृति के भुगतान किए जाने और सरकारी राशि के दुरुपयोग के प्रथम दृष्टया प्रमाण मिलने के बाद दोनों अधिकारियों के विरुद्ध प्रारंभिक जांच प्रारंभ की गई।
जांच में अनियमितता पाए जाने पर शासन ने तत्काल प्रभाव से निलंबन आदेश जारी कर दिया। जारी आदेश के अनुसार निलंबन अवधि में दोनों अधिकारियों का मुख्यालय नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के क्षेत्रीय कार्यालय जगदलपुर में निर्धारित किया गया है। इस दौरान उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता प्रदान किया जाएगा। शासन ने स्पष्ट किया है कि जांच पूरी होने तक दोनों अधिकारी किसी भी प्रकार के प्रशासनिक अथवा वित्तीय कार्यों में हस्तक्षेप नहीं करेंगे। वहीं संबंधित प्रकरण की विस्तृत जांच के लिए विभागीय स्तर पर आवश्यक दस्तावेज और अभिलेख तलब किए गए हैं। इस कार्रवाई के बाद भोपालपटनम नगर पंचायत सहित स्थानीय राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। लंबे समय से नगर पंचायत में विकास कार्यों और खर्चों को लेकर सवाल उठाए जा रहे थे। स्थानीय जनप्रतिनिधियों एवं सामाजिक संगठनों द्वारा भी कई बार निर्माण कार्यों में अनियमितता और पारदर्शिता की कमी को लेकर शिकायतें की गई थीं।शासन की इस कार्रवाई को भ्रष्टाचार और वित्तीय गड़बड़ियों पर सख्ती के रूप में देखा जा रहा है। लोगों का कहना है कि यदि जांच निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ती है तो नगर पंचायत के कई और मामलों का खुलासा हो सकता है। सूत्रों के अनुसार नगरीय प्रशासन विभाग ने मामले में विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश भी जारी किए हैं। जांच के दौरान यदि अन्य अधिकारियों या कर्मचारियों की भूमिका सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। भोपालपटनम नगर पंचायत में हुए इस बड़े प्रशासनिक एक्शन ने जिले भर में चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है। अब सबकी नजर शासन की आगामी जांच रिपोर्ट और संभावित आगे की कार्रवाई पर टिकी हुई है।
बारिश से भीगा ग्रामीणों का सुखाया हुआ मक्का
किसानों की सारी मेहनत पर एक झटके में फिर गया पानी
जगदलपुर बस्तर जिले की धुरगुड़ा पंचायत में किसानों की मेहनत पर अचानक बदले मौसम ने पानी फेर दिया। गांव के किसानों द्वारा कई दिनों की कड़ी मेहनत से खेतों से निकालकर सुखाया जा रहा मक्का अचानक हुई बारिश से पूरी तरह भीग गया। इस घटना के बाद किसानों की चिंता काफी बढ़ गई है, क्योंकि अब तैयार फसल खराब होने का खतरा मंडराने लगा है। ग्रामीणों ने बताया कि मक्का की फसल को सुरक्षित भंडारण के लिए खुले स्थानों पर सुखाया जा रहा था। किसान दिन-रात मेहनत कर अनाज को पलट पलटकर सुखाने में लगे थे, ताकि उसे बाजार में अच्छे दाम पर बेचा जा सके। लेकिन अचानक मौसम बदल गया और तेज बारिश के कारण पूरा मक्का भीग गया। कई किसानों के घरों और आंगनों में रखा अनाज भी पानी की चपेट में आ गया। किसानों का कहना है कि लगातार नमी बने रहने से मक्का में फफूंदी लगने और दाने सड़ने का खतरा बढ़ गया है। जिससे बाजार में उचित कीमत मिलना मुश्किल हो जाएगा। इससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
वन्यप्राणियों की सुरक्षा हमारी पहली प्राथमिकता: वन मंत्री केदार कश्यप
हाथियों की मौत रोकने छत्तीसगढ़ में पहली बार राष्ट्रीय स्तर का विशेष प्रशिक्षन
जून के पहले हफ्ते जुटेंगे देश के शीर्ष विशेषज्ञ
रायपुर छत्तीसगढ़ में वन्यप्राणियों, विशेष रूप से हाथियों और हाथी शावकों की सुरक्षा एवं संरक्षण को लेकर वन मंत्री केदार कश्यप लगातार गंभीर और संवेदनशील पहल कर रहे हैं। वन मंत्री श्री कश्यप की विशेष चिंता और स्पष्ट मंशा के अनुरूप अब राज्य में वन्यजीवों की असमय मृत्यु रोकने तथा उनके बेहतर स्वास्थ्य प्रबंधन के लिए वन विभाग द्वारा एक बड़ी और ऐतिहासिक पहल की जा रही है।
वन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन एवं प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) अरुण कुमार पांडेय के नेतृत्व में जून के प्रथम सप्ताह में राष्ट्रीय स्तर का उच्च स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इस विशेष प्रशिक्षण का विषय “मृत्यु से सीख: एशियाई हाथियों की मृत्यु जांच के आवश्यक तत्व” रखा गया है। वन मंत्री केदार कश्यप का मानना है कि वन्यजीव संरक्षण केवल जंगलों की निगरानी तक सीमित नहीं है, बल्कि वन्यप्राणियों के स्वास्थ्य, उपचार, वैज्ञानिक जांच और समय पर चिकित्सकीय हस्तक्षेप को भी उतनी ही प्राथमिकता देना आवश्यक है। इसी सोच के साथ यह विशेष प्रशिक्षण आयोजित किया जा रहा है, जिसमें वन विभाग के अधिकारियों और पशु चिकित्सकों को आधुनिक वैज्ञानिक पद्धतियों का व्यवहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा।
शीर्ष विशेषज्ञ देंगे प्रशिक्षण
इस प्रशिक्षण में भारतीय वन्यजीव संस्थान, देहरादून तथा भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान, बरेली के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं विशेषज्ञ शामिल होंगे। विशेषज्ञ अधिकारियों और डॉक्टरों को हाथियों तथा अन्य वन्यप्राणियों में होने वाली बीमारियों की पहचान, उपचार, पोस्टमार्टम की वैज्ञानिक प्रक्रिया, बिसरा परीक्षण और फॉरेंसिक जांच की आधुनिक तकनीकों की जानकारी देंगे। वन मंत्री केदार कश्यप चाहते हैं कि छत्तीसगढ़ का वन अमला राष्ट्रीय स्तर की वैज्ञानिक क्षमता से सुसज्जित हो, ताकि किसी भी वन्यजीव की बीमारी अथवा मृत्यु की स्थिति में त्वरित और सटीक कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
हाथी शावकों की मौतों का होगा विश्लेषण
विगत एक वर्ष में रायगढ़ एवं धरमजयगढ़ क्षेत्र में हाथी शावकों की हुई मौतों को वन मंत्री केदार कश्यप ने अत्यंत गंभीरता से लिया है। उनके निर्देश पर प्रशिक्षण के दौरान पिछले दो वर्षों में हुई वन्यजीव मौतों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट, बिसरा परीक्षण रिपोर्ट एवं विशेषज्ञ संस्थानों की रिपोर्ट का विस्तृत अध्ययन किया जाएगा। राष्ट्रीय विशेषज्ञों के साथ वास्तविक मामलों पर चर्चा कर भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने की प्रभावी रणनीति तैयार की जाएगी। इस प्रशिक्षण में राज्य के सभी चिड़ियाघरों, टाइगर रिजर्व, अभयारण्यों में पदस्थ पशु चिकित्सकों सहित हाथी प्रभावित वन मंडलों के डीएफओ, उप-वनमंडलाधिकारी, वन क्षेत्रपाल तथा पशुपालन विभाग के वरिष्ठ चिकित्सकों को शामिल किया जाएगा। वन मंत्री केदार कश्यप की प्राथमिकता है कि मैदानी स्तर पर कार्यरत अमला वैज्ञानिक रूप से इतना सक्षम हो कि वन्यजीवों के स्वास्थ्य संरक्षण में किसी प्रकार की कमी न रहे।
हो चुका है प्रारंभिक प्रशिक्षण
वन मंत्री केदार कश्यप के निर्देश पर इससे पूर्व 7 अप्रैल 2026 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से 150 से अधिक अधिकारियों एवं डॉक्टरों को प्रारंभिक प्रशिक्षण दिया जा चुका है। अब इसी पहल को और व्यापक एवं व्यवहारिक स्वरूप दिया जा रहा है। वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा है कि राज्य सरकार वन्यजीवों की सुरक्षा और संरक्षण के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। वैज्ञानिक प्रशिक्षण, आधुनिक जांच प्रणाली और प्रशिक्षित अमले के माध्यम से छत्तीसगढ़ में हाथियों एवं अन्य वन्यप्राणियों के लिए सुरक्षित वातावरण तैयार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि वन्यजीव संरक्षण केवल पर्यावरण का विषय नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य और प्राकृतिक संतुलन की रक्षा का दायित्व भी है।
शिक्षकों और कर्मचारियों के तबादले पर लगी रोक हटाने की मांग
छग शासकीय शिक्षक फेडरेशन ने मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन
मोहला छत्तीसगढ़ प्रदेश शासकीय शिक्षक फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष शंकर साहू व मोहला मानपुर अंबागढ़ चौकी के जिला सचिव मक्खन साहू के नेतृत्व में प्रतिनिधि मंडल ने अपर कलेक्टर को छत्तीसगढ़ के शिक्षकों व कर्मचारियों के ट्रांसफर पर लगी रोक हटाने की मांग को लेकर प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नाम ज्ञापन सौंपा।
छत्तीसगढ़ प्रदेश शासकीय शिक्षक फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष शंकर साहू व जिला सचिव मक्खन साहू ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया कि छत्तीसगढ़ के शिक्षकों व कर्मचारियों के ट्रांसफर पर रोक लगी रहने से प्रदेश के शिक्षकों, कर्मचारियों व अधिकारियों का स्थानांतरण नही हो पा रहा है। तबादलों पर पूर्ण प्रतिबंध के कारण कर्मचारियों व अधिकारियों द्वारा गंभीर पारिवारिक समस्याओं, माता-पिता की देखरेख, दिव्यांगता व स्वयं या परिवार की गंभीर बीमारियों और पत्नी पति-पत्नी के अलग-अलग जिलों में पदस्थ होने के कारण भारी मानसिक और आर्थिक परेशानियों का सामना कर रहे हैं। फेडरेशन ने मुख्यमंत्री से निवेदन किया है कि केबिनेट द्वारा वर्ष 2026 की नई तबादला नीति को मंजूरी देकर माह जून में सीमित अवधि के लिए तबादले पर से प्रतिबंध हटा दिया जाए। जिला अपर कलेक्टर से शिक्षकों व कर्मचारियों के स्थानांतरण हेतु चर्चा व ज्ञापन सौंपने के दौरान प्रमुख रूप से छत्तीसगढ़ प्रदेश शासकीय शिक्षक फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष शंकर साहू, जिला सचिव मक्खन साहू, दीनदयाल मौहान, वीरेंद्र कुमार ठावरे व जीवन साहू उपस्थित थे।
दीपक बैज की एंट्री से शिवनंदनपुर नगर पंचायत चुनाव बना हाई प्रोफाइल
ऐसा फैला दीपक का उजियारा कि चौंधिया गईं हैं दिग्गजों की आंखें
राजमहल की राजनीति को ढहते और मोहरे को पिटते देख दौड़े चले आए कांग्रेस के बड़े नेता
अर्जुन झा-
जगदलपुर जिस शिवनंदनपुर नगर को चार दिन पहले तक छत्तीसगढ़ के अन्य हिस्सों के लोग जानते तक नहीं थे, वही शिवनंदनपुर अब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज की एंट्री के बाद पूरे राज्य और कांग्रेस मुख्यालय दिल्ली तक में सुर्खियों में आ गया है। जो भाजपा शिवनंदनपुर नगर पंचायत के प्रथम चुनाव को बहुत ही हल्के में ले रही थी, उसके लिए यह चुनाव बड़ी चुनौती बन गया है। दरअसल रातोंरात सूरजपुर, सरगुजा तक “दीपक” का उजियारा इस कदर फैल गया है कि भाजपा के साथ ही कांग्रेस के भी कई दिग्गजों की आंखें चौंधिया गईं हैं, उनकी बेचैनी बढ़ गई है। राजमहल की राजनीति को ढहते और मोहरे को पिटते देख कांग्रेस के भी अन्य बड़े खिलाड़ी नेता दौड़े दौड़े विश्रामपुर पहुंच गए। विश्रामपुर ने कांग्रेस और भाजपा के आला नेताओं का चैनो- आराम छीन लिया है। तपती गर्मी में एसी के शीतल बयार से निकल कर उन्हें अब विश्रामपुर में डेरा डालना पड़ रहा है। ये है दीपक का करिश्मा। यह दीपक कोई अलादीन का चिराग नहीं, पर उससे कतई कमतर भी नहीं है। यह दीपक है प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज, जो मुश्किल वक्त में एक आम कार्यकर्ता के साथ भी कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हो जाते हैं। उनकी यही क्रियाशीलता ने समूचे सूरजपुर, सरगुजा का चमकता सितारा बना दिया है।
सरगुजा, सूरजपुर में कांग्रेस शून्य की स्थिति पर जा पहुंची थी। पार्टी की अंदरूनी राजनीति में भले ही तीन दिग्गज पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, पूर्व उप मुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव बाबा और पीसीसी चीफ दीपक बैज अपनी अलग अलग विचारधारा और रणनीति के तहत काम करते हैं और एक दूसरे के परस्पर विरोधी माने जाते हैं। पीसीसी अध्यक्ष दीपक बैज ने पिछले तीन दिनों में हम आपके साथ हैं के उद्देश्य के साथ कार्यकर्ताओं और जनता का दिल जीत लिया है। विश्रामपुर के कांग्रेस नेता पर हुई एफआईआर को लेकर दीपक बैज ने जो कड़े तेवर दिखाए हैं, उससे खासकर युवा उनसे बेहद प्रभावित हो उठे हैं। दिन हो या रात, धूप हो या छांव इसकी परवाह न करते हुए दीपक बैज जिस दमदारी के साथ कार्यकर्ताओं और आमजन के बीच उपस्थिति दर्ज कराते हैं, उनकी इसी शैली ने उन्हें जनप्रिय नेता के रूप में स्थापित कर दिया है।बिश्रामपुर में अपने शिष्टाचार से लबालब भरे उद्बोधन से उन्होंने सत्ता पक्ष को समझा दिया कि गलत ढंग से किसी को भी फंसा कर कुटिल राजनीति अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। चाहे खाकी हो या भगवा उन्हें उज्ज्वल रह कर ही जनहित में कार्य करना पड़ेगा। जिस सरगुजा में कांग्रेस शून्य की स्थिति में थी आज वहां पार्टी रातों रात अचानक शून्य से शिखर तक जा पहुंची है।
वहां कांग्रेस अब ताल ठोंक कर सरकार से सवाल पूछ रही है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और पूर्व डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव बाबा ने भी देर ही सही मौके पर पहुंच कर कार्यकर्ताओं में जोश भरा है। पीसीसी अध्यक्ष दीपक बैज की आमरण अनशन की घोषणा से नगर चुनाव में एक मोड़ ला दिया है। जिस चुनाव को सत्तापक्ष गंभीरता से नहीं ले रहा था, उस चुनाव में कांग्रेस अध्यक्ष ने जान फूंक दी है। बस्तर की धरा से धूमकेतु की तरह कांग्रेस की राजनीति में उभरने वाले दीपक बैज अब सरगुजा में भी कार्यकर्ताओं के बीच अपना जोशीला प्रकाश फैलाने में सफल हो गए हैं।पदयात्राओं, आमरण अनशन के जरिए प्रदेश में कांग्रेस को स्थापित करने वाले दीपक बैज अब सरगुजा में भी अपनी उपस्थिति से लोगों में अहसास कराया कि कांग्रेस जन जन के साथ है।छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, पूर्व उप मुख्यमंत्री सरगुजा महाराज टीएस सिंहदेव बाबा, छत्तीसगढ़ पीसीसी चीफ दीपक बैज, पूर्व मंत्री अमरजीत भगत,पूर्व मंत्री प्रेमसाय टेकाम, जिला कांग्रेस अध्यक्ष शशि सिंह के शिवनंदनपुर नगर पंचायत चुनाव के लिए कांग्रेस पार्टी के समर्थन में एकजुट होकर खड़े हो जाने से अब भाजपा चक्रव्यूह में फंस चुकी है।
कांग्रेस को आदिवासी हितों की चिंता नहीं, सिर्फ राजनीतिक भ्रम फैलाने की आदत – केदार कश्यप
डी-लिस्टिंग पर कांग्रेस का विरोध आदिवासी अधिकारों के खिलाफ, वर्षों तक आदिवासियों का शोषण करने वालों को अब जवाब देना चाहिए
रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन के वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज के डी-लिस्टिंग मामले में दिए गए बयान पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि कांग्रेस पार्टी और उसके नेता आदिवासी समाज को गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं। कांग्रेस को न आदिवासियों की चिंता है और न ही उनके अधिकारों की रक्षा से कोई लेना-देना। कांग्रेस ने दशकों तक आदिवासी समाज के नाम पर केवल राजनीति की, उनका शोषण किया और उन्हें विकास से दूर रखा।वन मंत्री कश्यप ने कहा कि आज जब देशभर का जनजातीय समाज अपने संवैधानिक अधिकारों और अस्मिता की रक्षा के लिए आवाज उठा रहा है, तब कांग्रेस को तकलीफ हो रही है। कांग्रेस यह स्पष्ट करे कि वह वास्तविक आदिवासी समाज के अधिकारों के साथ है या उन लोगों के साथ जो आदिवासी सुविधाओं का अनुचित लाभ लेकर मूल वनवासी समाज के हिस्से को कमजोर कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि डी-लिस्टिंग का मुद्दा किसी के खिलाफ नहीं, बल्कि वास्तविक जनजातीय समाज के हित और अधिकारों की रक्षा का विषय है। कांग्रेस इस गंभीर विषय को भी वोट बैंक की राजनीति और भ्रम फैलाने का माध्यम बना रही है। कांग्रेस को यह याद रखना चाहिए कि आदिवासी समाज अब जागरूक हो चुका है और वह राजनीतिक पाखंड को अच्छी तरह समझता है।वनमंत्री कश्यप ने कहा कि कांग्रेस के शासनकाल में आदिवासी क्षेत्रों में न शिक्षा पहुंची, न स्वास्थ्य सुविधाएं और न ही रोजगार के अवसर। वन अधिकार कानून और पेसा कानून के नाम पर कांग्रेस ने केवल झूठे वादे किए। कांग्रेस के समय आदिवासी इलाकों में भ्रष्टाचार, बिचौलिया तंत्र और शोषण चरम पर था। आज भाजपा सरकार आदिवासी समाज को सम्मान, अधिकार और विकास देने का काम कर रही है तो कांग्रेस को यह रास नहीं आ रहा।वन मंत्री ने कहा कि कांग्रेस को भाजपा से सवाल पूछने से पहले यह बताना चाहिए कि इतने वर्षों तक केंद्र और राज्यों में सत्ता में रहने के बावजूद उसने आदिवासी हितों की रक्षा के लिए कौन सा ठोस कदम उठाया? कांग्रेस ने आदिवासी समाज को केवल वोट बैंक समझा, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने आदिवासी गौरव, संस्कृति और अधिकारों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है।उन्होंने कहा कि दिल्ली में आयोजित जनजाति समाज समागम में उमड़ी भारी जनभागीदारी यह साबित करती है कि देश का आदिवासी समाज डी-लिस्टिंग जैसे मुद्दों पर गंभीर है और अपने अधिकारों की रक्षा के लिए संगठित हो रहा है। कांग्रेस इस जनभावना का अपमान कर रही है।मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि दीपक बैज और कांग्रेस पार्टी आदिवासी समाज को बांटने और भ्रमित करने की राजनीति बंद करें। आदिवासी समाज अब कांग्रेस के झूठ और बहकावे में आने वाला नहीं है। भाजपा सरकार जनजातीय अस्मिता, संस्कृति और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य करती रहेगी।


