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मुख्यमंत्री साय फरवरी में जाएंगे पाटेश्वर धाम

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डौण्डी लोहारा मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय फरवरी माह में पाटेश्वर धाम जामड़ी पहुंचने वाले हैं। वे वहां माघी पूर्णिमा महोत्सव में शामिल होंगे। जामडी पाटेश्वर धाम के पीठाधीश्वर संत रामबालक दास ने छाया विधायक एवं भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता देवलाल ठाकुर के साथ मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से रायपुर स्थित उनके निवास में मुलाकात की। संत रामबालक दास ने मुख्यमंत्री साय से आगामी 24 फरवरी को जामड़ी पाटेश्वर धाम में आयोजित माघी पूर्णिमा उत्सव में उपस्थिति के लिए आग्रह किया। मुख्यमंत्री ने निमत्रंण स्वीकार कर धाम में पहुंचने के लिए सहमति दे दी है। यह जानकारी प्रदान करने के पल। बालोद जिला भाजपा के मंत्री जयेश ठाकुर ने दी।

चित्रकोट में वसूली के लिए बंधक बना लिया गया स्टेट हाईवे को

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  •  प्रतिदिन हो रही है ढाई लाख रू. तक की बेजा वसूली
  •  सरपंच से लेकर जनपद सीईओ तक जाता है हिस्सा
    -अर्जुन झा-
    लोहंडीगुड़ा बस्तर जिले के लोहंडीगुड़ा विकासखंड में स्थित विश्वप्रसिद्ध चित्रकोट वाटरफॉल में सैलानियों से सरेआम लूट की जा रही है। पार्किंग के नाम पर बेजा वसूली के लिए स्टेट हाईवे को ब्लॉक कर दिया गया है। वसूली जा रही रकम का रत्तीभर हिस्सा भी इस पर्यटन स्थल के विकास और सुविधाएं उपलब्ध कराने पर खर्च नहीं किया जा रहा है। गांव के युवक, सरपंच और जनपद पंचायत के सीईओ तक वसूली की रकम का तयशुदा हिस्सा पहुंच रहा है।
    बस्तर देसी – विदेशी पर्यटकों के लिए जन्नत से कम नहीं है। बस्तर में अनगिनत सैरगाह हैं। इनमें सबसे ज्यादा लोकप्रिय और पर्यटकों का सबसे पसंदीदा है लोहंडीगुड़ा जनपद में स्थित चित्रकोट का वाटरफॉल। इंद्रावती नदी की जल धाराएं काफी ऊंचाई पर स्थित चट्टानों से कई भागों में बंटकर नीचे धरती पर गिरती हैं और विहंगम दृश्य पैदा करती हैं। इस जलप्रपात का दीदार करने हजारों पर्यटक रोजाना चित्रकोट पहुंचते हैं। विभिन्न वाहनों से पहुंचने वाले पर्यटकों से उनकी कार, बस व दीगर वाहनों की पार्किंग के नाम पर 50 रू. से लेकर 100 रू. तक का शुल्क वसूला जाता है। चित्रकोट में पार्किंग शुल्क वसूली का जिम्मा वहां के युवकों के समूह सम्हाल रहा है। ग्रुप में 25 युवक शामिल हैं, जो शुल्क वसूली और वाहनों की पार्किंग का काम देखते हैं। इन युवकों ने एक संगठन बना रखा है। इस संगठन के अध्यक्ष कश्यप के मुताबिक प्रतिदिन पार्किंग शुल्क के रूप में औसतन ढाई लाख रुपए तक की आवक होती है। रविवार व अन्य छुट्टी वाले दिनों में तथा सीजन में यह रकम चार से पांच लाख रुपए तक पहुंच जाती है।

    बंधा हुआ है सबका कमीशन
    पार्किंग शुल्क वसूली में लगे युवकों के मुखिया ने स्वीकार किया है कि आम दिनों में वाहन पार्किंग शुल्क के रुपए में ढाई लाख से लेकर 2 लाख 70 हजार रुपए तक मिल जाते हैं। वहीं सीजन में चार, साढ़े चार लाख रुपए तक की वसूली होती है। बीते रविवार को चार लाख रुपए मिले थे। मुखिया कश्यप ने कबूल किया है कि पार्किंग शुल्क से प्राप्त होने वाली राशि का पचास प्रतिशत हिस्सा उनका संगठन रखता है, ग्राम पंचायत को दस प्रतिशत राशि और जनपद सीईओ को पांच प्रतिशत तथा सुरक्षा में लगी महिलाओं को को भी तयशुदा रकम दी जाती है। उसने बताया कि कुछ दिनों पहले ही जनपद सीईओ को 1. 20 लाख का चेक दिया गया था। संगठन को मिलने वाली पचास प्रतिशत रकम को संगठन से जुड़े सभी 25 युवक आपस में बांट लेते हैं। मतलब साफ है कि इतनी मोटी रकम का एक फीसदी हिस्सा भी चित्रकोट पर्यटन स्थल के विकास और पर्यटकों को सुविधा उपलब्ध कराने पर खर्च नहीं किया जा रहा है। पार्किंग स्थल का न सीमेंटीकरण कराया गया है, न ही वहां टाइल्स लगाई गई है और न शेड बनवाया गया है।बारिश के मौसम में कीचड़ से भरी जमीन पर वाहनों को खड़ा करना पड़ता है।

    सड़क की सुध नहीं विभाग को
    चित्रकोट वाटरफॉल तक पर्यटकों की पहुंच को सुगम बनाने के लिए लोक निर्माण विभाग ने वाटर फॉल के करीब तक स्टेट हाईवे का निर्माण कराया है। पार्किंग शुल्क वसूलने वाले लोगों ने करोड़ों की लागत से बनी इस अच्छी खासी सड़क को अवरुद्ध कर दिया है। हाईवे के बिचोंबीच करीब दो फीट ऊंची और पांच मीटर लंबी सीमेंट कांक्रिट की दीवार खड़ी कर दी गई है। ऐसा इसलिए किया गया है, ताकि पर्यटक अपने वाहनों को दूसरी जगह खड़े न कर सकें। करोड़ों की लागत से निर्मित और बंधक बन चुकी इस सड़क की उपयोगिता खत्म कर दी गई है, लेकिन लोक निर्माण विभाग के जिम्मेदार अधिकारी बेपरवाह बने हुए हैं। अपनी बंधक बनी सड़क को कब्जा मुक्त कराने की दिशा में अधिकारी कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। नतीजतन पर्यटकों को इस सड़क का कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है। जबकि सड़क का निर्माण पर्यटकों की सुविधा के लिए ही कराया गया है।

जिला स्तरीय क्रीड़ा स्पर्धा के समापन में पंहुचे मंत्री केदार कश्यप

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बकावंड सरस्वती ग्राम शिक्षा समिति का जिला स्तरीय खेलकूद एवं संस्कृति महोत्सव का आयोजन 9 से 11 जनवरी तक बकावंड ब्लॉक के सरस्वती शिशु मंदिर जैतगिरी में किया गया।समापन अवसर पर मुख्य अतिथि वन मंत्री केदार कश्यप थे। अतिथि प्रदेश कार्यकारणी सदस्य डॉ. सुभाउ कश्यप, हेमंत पांडे, जिला पंचायत उपाध्यक्ष मनीराम कश्यप, प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य बनवासी मौर्य, जिला महामंत्री वेदप्रकाश पांडे, स्नेहलता वैश्य पूर्व जिला पंचायत सदस्य, पूर्व मंडल अध्यक्ष रोहित त्रिवेदी, मोहन जोशी, पुरूषोत्तम जोशी, मंडल महामंत्री दामोधर बघेल, सत्येन्द्र सिंह वैश्य,महेंद्र भोयर, खगेश्वर कर्मा व बंसत सिंह चंदेल थे। 400 छात्र छात्राओं ने इस खेलकूद प्रतियोगिता में हिस्सा लिया और डांस भी दिखाया। विभिन्न स्थानों के छात्र- छात्राएं उपस्थित थे।तोकापाल, शांतिनगर, जगदलपुर, लोहंडीगुड़ा, सोनारपाल, बस्तर, दरभा, केसरपाल, सालेमेटा, नगरनार, आड़ावाल, भानपुरी, जैबेल, करपावंड, तुरपुरा, बनियागांव, जैतगिरी आदि स्कूलों ने भाग लिया।

धर्मांतरण रोकने समाज को भी करनी होगी पहल : केदार कश्यप

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  • जनजातीय समाज की सद्भावना यात्रा पहुंची राजुर
  • लोहंडीगुड़ा, तोकापाल के गांवों में ग्रामीणों ने किया स्वागत, हुई जनसभाएं

लोहंडीगुड़ा धर्मांतरण के खिलाफ जन जागरण और आदिम संस्कृति व पूजा पद्धति के संरक्षण के प्रति जनजातीय वर्ग के लोगों को एकजुट करने गुरुवार को नारायणपुर के मावली मंदिर से निकली सामाजिक सद्भावना यात्रा तीसरे दिन लोहंडीगुड़ा विकासखंड के पारापुर से होकर रवाना हुई। पारापुर से यात्रा कुतर, कस्तूरपाल, यात्रा मिचनार, अलनार, पराकोट, तोकापाल, राजुर होती हुई दंतेवाड़ा के लिए आगे बढ़ी। तोकापाल के ग्राम राजुर पहुंची यात्रा का भव्य स्वागत हुआ। वहां जनसभा का भी आयोजन किया गया।

सभा को संबोधित करते हुए जनजाति सुरक्षा मंच के प्रांत संयोजक भोजराज नाग ने कहा कि जनजातीय समाज को विघटनकारी तत्वों की नजर लग गई है। आएदिन गांव -गांव में जनजातियों के बीच आपसी मतभेद बढ़ाया जा रहा है। इसके लिए जिम्मेदार अंधाधुंध धर्मांतरण है। जिसको रोकने के लिए सरकार से कानून बनाने की मांग करेंगे। यात्रा में उपस्थित रूपसाय सलाम ने कहा कि समाज और संस्कृति को बचाए रखना सभी जनजातीय समाजों के प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी है। हमारी देवगुड़ी और संस्कृति की रक्षा करने सभी को आगे आना होगा। पदयात्रा का उद्देश्य समाज के विघटनकारी तत्वों का पर्दाफाश करना और समाज को जगाना है। हम अभी नहीं जागे, तो फिर हमारी समृद्ध संस्कृति और परंपराएं लुप्त हो जाएंगी और हमारा अस्तित्व ही मिट जाएगा। सभा को मंत्री केदार कश्यप ने भी संबोधित किया। उन्होंने कहा सरकार अपने स्तर पर धर्मांतरण रोकने के लिए ठोस कार्य करेगी, लेकिन इसके लिए समाज के जागरूक और प्रबुद्ध नागरिकों के भी आगे आने की जरूरत है। हमारी संस्कृति के संरक्षक मांझी, मुखिया, गायता, सिरहा, गुनिया हैं। जिन्होंने आज तक पीढ़ी दर पीढ़ी हमारे आस्था केंद्रों को संरक्षित रखा है। आज उनकी जिम्मेदारी और भी बढ़ गई है। इस अवसर पर चित्रकोट के विधायक विनायक गोयल, महेश कश्यप, तुलुराम राम कशयप, मंगतू राम, रैतूराम समेत सामाजिक पदाधिकारी और बड़ी संख्या में जनजातीय समाज के लोग मोजूद थे।

धान खरीदी की स्थिति का जायजा लिया कलेक्टर ने

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  •  अचानक पहुंचे करणपुर धान उपार्जन केंद्र में
  • रामपाल के मंदिर में पूजा भी की कलेक्टर विजय ने

जगदलपुर बस्तर के कलेक्टर विजय दयाराम के. गुरुवार को अपने निरीक्षण दौरे के दरमियान जगदलपुर विकासखंड के करणपुर धान उपार्जन केंद्र का औचक निरीक्षण किया। उन्होंने धान की नमी मापक यंत्र के जरिए से धान की नमी का परीक्षण भी किया। खरीदी केंद्र प्रभारी से पंजीकृत किसानों की संख्या, किसानों द्वारा बेचे जा चुके धान की मात्रा की स्थिति, रकबा समर्पण की स्थिति, बारदाना की उपलब्धता और धान के उठाव एवं परिवहन की स्थिति की जानकारी ली। कलेक्टर ने ग्रामीणों से धान की उपज और धान में कालापन की स्थिति के संबंध में भी चर्चा की। उन्होंने बचे हुए दिनों में शेष किसानों के भी धान की खरीदी सुनिश्चित कर लेने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए।

रामपाल में रुके थे भगवान राम
उपार्जन केंद्र के निरीक्षण के दौरान वहां पहुंचे रामपाल गांव के ग्रामीणों ने कलेक्टर को बताया कि उनके गांव में प्राचीन मंदिर है, समय निकाल कर दर्शन करने चलिए। इस पर कलेक्टर विजय दयाराम के. वहां जाने के लिए सहर्ष तैयार हो गए। वे ग्रामीणों के साथ रामपाल स्थित लिंगेश्वर शिव मंदिर के दर्शन के लिए पहुंचे। उन्होंने मंदिर में पूजा अर्चना कर जिले की खुशहाली की कामना की। मंदिर के पुजारी ने मंदिर का इतिहास बताते हुए कहा कि वनवास के दौरान भगवान रामचंद्र, माता सीता और लक्ष्मण जी ने कुछ दिन इस गांव में व्यतीत किए थे। उन्होंने बताया कि ग्रामीणों द्वारा गांव में खनन के दौरान वर्ष 1806 की घंटी भी मिली है। वर्तमान में मंदिर का जीर्णोद्धार कार्य जन सहयोग से किया जा रहा है। इस अवसर पर जिला पंचायत सीईओ प्रकाश सर्वे, जनपद सीईओ अमित भाटिया व अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

 

भाजपा शासन में भी लगा है रिपा सेन्टर के मुख्य द्वार पर भूपेश बघेल की फोटो

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दल्लीराजहरा छत्तीसगढ़ में एक माह भाजपा शासन आने के बाद भी अधिकारियों में कांग्रेस शासन के प्रति मोह भंग नहीं हो रहा है कार्यालय में भूपेश बघेल की फोटो लगाकर कार्य कराया जा रहा है ऐसा ही एक मामला आज अरमुरकसा के रिपा सेंटर में देखने को मिला दल्ली राजहरा मंडल अध्यक्ष राकेश द्विवेदी  द्वारा बताया गया कि डौंडीलोहारा से बैठक के वापसी के दौरान रिपा सेंटर अरमुरकसा के मुख्य द्वार पर कांग्रेस शासन के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की फोटो को देखने के पश्चात रीपा सेंटर जानकारी ली एवं संचालक को पूछने पर उनके द्वारा बताया गया कि रिपा सेन्टर की देखरेख का कार्य को जनपद सीईओ द्वारा किया जाता है। इस मंडल अध्यक्ष द्वारा संचालक को बताया कि छत्तीसगढ़ में भाजपा की सरकार आ चुकी है आप तत्काल फोटो को सुधारवाइए। द्वार पर लगे भूपेश बघेल के फोटो को तत्काल हटाए। इस पर मंडल अध्यक्ष द्वारा को फोन लगाकर संपर्क करने का प्रयास किया गया किंतु उनके द्वारा फोन नहीं उठाया गया इस तरह अधिकारियों का अनुशासनहीनता एवं कांग्रेस सरकार के प्रति मोह देखकर कड़ी नाराजगी व्यक्त की एवं कलेक्टर से शिकायत की जाने की बात कही भाजपा मंडल अध्यक्ष के साथ मंडल महामंत्री मदन माईती महेंद्र पिपरे शंकर साहू आदि उपस्थित थे |

 

मसीह समाज के एरिकसन सोमाजी का निधन

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जगदलपुर मसीह समाज के आधार स्तंभ रहे एरिकसन सोमाजी का दुखद निधन 11 जनवरी दोपहर में हो गया।
स्व.सोमा कोसा सेंटर जगदलपुर मे असिस्टेंट मैनेजर के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। 83 वर्षीय स्व.सोमा पिछले कुछ दिनों से अस्वस्थ थे। स्वर्गीय सोम का अंतिम संस्कार शुक्रवार को शांतिनगर स्थित मसीही कब्रिस्तान में किया जाएगा।वे अपने पीछे दो पुत्र व दो पुत्री सहित नाती-पोतो से भरा पूरा परिवार छोड़ गए।

करपावंड क्षेत्र में जंगल के रखवाले करा रहे जंगलों का सफाया

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  •  करपावंड परिक्षेत्र से सागौन की ओड़िशा तक तस्करी
  •  जैबेल बीट में काटे जा चुके सैकड़ों हरे भरे सागौन पेड़
  •  गिरोह को विभाग के अधिकारियों का संरक्षण
    अर्जुन झा
    बकावंड बस्तर जिले के बकावंड अनुविभाग में स्थित करपावंड वन परिक्षेत्र के जंगलों का सफाया जंगल के रखवाले ही करवा रहे हैं। वन माफिया सक्रिय हैं विभागीय अधिकारियों के संरक्षण में सागौन, बीजा समेत अन्य कीमती प्रजातियों के पेड़ों की कटाई कर ईमारती लकड़ियों की तस्करी ओड़िशा राज्य में कर रहे हैं। वन परिक्षेत्र की जैबेल बीट के जंगल सैकड़ों से हरे भरे पेड़ काटकर बाहर भेजे जा चुके हैं।


बस्तर वन मंडल के जंगलों में वन माफिया लंबे समय से सक्रिय हैं। ओड़िशा राज्य की सीमा बस्तर से जुड़ी हुई है। इसका बेजा लाभ लकड़ी तस्कर उठा रहे हैं। वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों का संरक्षण पाकर जंगल माफिया के हौसले बुलंद हैं। वे इलाके के जंगलों को उजाड़ने में कोई कमी नहीं कर रहे हैं। लकड़ी तस्करों से मोटी कमाई मिलने के कारण विभागीय अधिकारी कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। करपावंड वन परिक्षेत्र की जैबेल बीट अंतर्गत कक्ष क्रमांक 1210 में सागौन तथा अन्य उत्कृष्ट प्रजातियों के सैकड़ों पेड़ काटे जा चुके हैं। वन माफिया हरे भरे पेड़ों को कटवा कर ओड़िशा ले जा रहे हैं। उन्हें कोई रोकने टोकने वाला नहीं है। विरोध करने वाले स्थानीय ग्रामीणों को डरा धमका कर चुप करा दिया जाता है। तस्कर रात गहराते ही ईमारती लकड़ियों को ट्रैक्टरों और मिनी ट्रकों के जरिए ओड़िशा भेज रहे हैं। जैबेल बीट में पेड़ों के ठूँठ अवैध कटाई की दास्तां सुना रहे हैं। वन विभाग के स्थानीय अधिकारियों और अंतर राज्यीय वन माफिया की सांठगांठ के कारण हर दिन करोड़ों की बेशकीमती लकड़ी पार हो रही है। वन परिक्षेत्र करपावंड के अंतर्गत जैबेल बीट के कक्ष क्रमांक 1210 में सागौन के अनगिनत विशालकाय पेड़ों की काटाई हो चुकी है और वन माफिया के लोग अभी भी धड़ल्ले से पेड़ों की कटाई कर रहे हैं। जानते बूझते हुए भी रेंज के वन अधिकारी आंखें बंद किए बैठे हैं। इससे साफ जाहिर होता है कि जंगलों का सफाया उनके ही संरक्षण में किया जा रहा है।

नाली निर्माण की आड़ में खेल
जंगल में नाली नुमा लंबा गड्ढा खोदा जा रहा है। इस गड्ढे की गहराई बमुश्किल आधा फुट होगी। कहा जा रहा है कि इस कथित नाली के रास्ते में आने वाले पेड़ पौधों को काटा जा रहा है। जबकि सच्चाई यह है कि नाली से दस से लेकर पचास फीट दूर स्थित विशालकाय पेड़ भी सैकड़ों की तादाद में काट दिए गए हैं। पेड़ों के लट्ठों से लदे ट्रेक्टर और मिनी ट्रक गांवों से गुजरी सड़कों का सत्यानाश कर रहे हैं। वाहनों की लगातार आवाजाही के कारण सड़कों की बुरी गत बन गई है। ग्रामीणों को आवागमन में असुविधा हो रही है। साथ ही दुर्घटना का भी खतरा बना रहता है। बीते दिनों ऐसे ही अवैध तरीके से काटे गए पेड़ों के लट्ठों को उलनार से जप्त कर एक ट्रेक्टर के जरिए वन विभाग के डिपो में ले जाया गया।

बैज ने किया पायलट का स्वागत

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रायपुर छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस के नए प्रभारी सचिन पायलट गुरुवार को नियमित विमान सेवा से रायपुर पहुंचे।पीसीसी चीफ दीपक बैज ने छत्तीसगढ़ कांग्रेस प्रभारी सचिन पायलट का रायपुर एयरपोर्ट पर आत्मीय स्वागत किया। इस दौरान अनेक वरिष्ठ कांग्रेस नेता मौजूद थे।

पानी के बिना मुरझा से गए हैं इस आंगनबाड़ी के मासूम फूल

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  •  आंगनबाड़ी केंद्र में बच्चों के लिए पानी की व्यवस्था नहीं
  •  आसपास के घरों से मांगकर काम चलाती हैं कार्यकर्ता

अर्जुन झा

बकावंड बिन पानी के तो बड़े -बड़े पेड़ भी मुरझा कर दम तोड़ने लग जाते हैं, तो फिर सुकोमल पौधों की क्या बिसात। पानी के बगैर आंगनबाड़ी के फूल भला कैसे खिले और मुस्कुराते रह सकते हैं। बकावंड ब्लॉक के अंतर्गत ग्राम पंचायत सोनपुर के आश्रित ग्राम बनियागांव के आंगनबाड़ी केंद्र के फूलों की भी यही हालत हो गई है।

आंगनबाड़ी केंद्र बनियागांव में बच्चों और कार्यकर्ता व सहायिका के पीने के पानी का कोई इंतजाम नहीं किया गया है। आंगनबाड़ी केंद्र के क, ख, ग घ, सीखने के लिए जो बच्चे आते हैं, उन्हें प से पानी का रट लगाते देखा जा सकता है। प्यास से तड़पते बच्चों को राहत पहुंचाने आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका आसपास स्थित घरों से पानी मांगकर लती हैं। पहले आंगनबाड़ी केंद्र के समने हैंडपंप था, जिससे बच्चों के लिए पानी का इंतजाम हो जाता था। हैंडपंप को निकाल कर बोर में मोटर पंप लगा दिया गया। कुछ दिनों बाद ही मोटर पंप खराब हो गया और बोर से पानी निकलना बंद हो गया है। बच्चों को पीने के पानी के लिए तरसना पड़ रहा है। जब बच्चे शौच कर देते हैं तब उनके अंग व गंदे हो चुके कपड़ों की सफाई करने के लिए कार्यकर्ता व सहायिका को कड़ी मशक्कत करनी पड़नी है। कार्यकर्ता बस्ती के घरों से पानी लाकर बच्चों के लिए खाना बनाती हैं, उन्हें के खिलाती हैं और बर्तन की सफाई करती हैं। मोटर पंप खराब हो जाने के बारे में गांव के सरपंच को कई बार कार्यकर्ता द्वारा अवगत कराया जा चुका है, लेकिन पंप सुधारा नहीं जा सका है। खेलत खेलते बच्चे बोर के पाइप से कई बार घायल भी हो चुके हैं। बोर के अंदर पाईप भी गिर चुका है। उसे भी निकाला नहीं जा सका है। आंगनबाड़ी केंद्र में बच्चों के बैठने के लिए टाटपट्टी, चटाई या दरी भी उपलब्ध नहीं है। बच्चों को जमीन पर बिठाया जाता है। आंगनबाड़ी केंद्र की बाउंड्री वॉल नहीं है।रोड किनारे आंगनबाड़ी के छोटे बच्चे खेलते रहते हैं। दुर्घटना का भय हमेशा बना रहता है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता कई साल पहले प्रस्ताव ग्राम पंचायत को दे चुकी है, लेकिन आज तक बाउंड्री वॉल व शौचालय निर्माण नहीं कराया जा सका है। ग्राम पंचायत के सरपंच सचिव सबकुछ जानते समझते हुएभी अनदेखी कर रहे हैं।

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