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विधिक सेवा प्राधिकरण के पैरालिगल वालिटियर्स के द्वारा मेला में आये नागरिकों को पांपलेट के माध्यम से कुल 30,000 हजार व्यक्तियों को विधिक जानकारी

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बालोद, राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा संचालित योजनाओं के क्रियान्वयन एवं प्रचार-प्रसार हेतु तथा छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा जारी स्टेट प्लॉन आफ एक्शन के अनुसार जिला न्यायाधीश बालोद डॉ० प्रज्ञा पचौरी, अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण बालोद के निर्देशानुसार एवं श्रीमती सुमन सिंह, सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण बालोद के मार्गदर्शन में राजाराव पठार ग्राम करेंझार में आयोजित यीर मेला के अवसर पर दिनांक 08 दिसंबर से 10 दिसंबर तक जिला विधिक सेवा प्राधिकरण बालोद द्वारा विधिक जागरूकता के प्रचार-प्रसार हेतु स्टॉल लगाया गया है। जिसमें राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) द्वारा संचालित योजनाएं नालसा की योजनाएं आदिवासियों के अधिकारों का संरक्षण और प्रवर्तन के लिए विधिक सेवाएं योजना 2016, पीडित क्षतिपूर्ति योजना 2011 एवं पीडित क्षतिपूर्ति योजना 2018, महिला हेल्पलाईन की जानकारी, घरेलू हिंसा से महिलाओं की सुरक्षा अधिनियम 2005, साइबर काईम से बचाव, निःशुल्क विधिक सहायता व सलाह, नालसा का टोल फ्री नंबर 15100, सालसा का यूट्यूब चैनल जनचेतना निःशुल्क विधिक सहायता प्राप्त करने आदि के संबंध में बैनर के माध्यम से विधिक जानकारी प्रदान किया गया एवं सरल कानूनी शिक्षा, मानसिक स्वास्थ्य देख-रेख अधिनियम 2017 अन्य पुस्तकों के माध्यम से भी विधिक जानकारी प्रदान किया गया तथा दिनांक 16.12.2023 को आयोजित होने वाले नेशनल लोक अदालत के बारे भी जानकारी दिया गया। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के पैरालिगल वालिटियर्स के द्वारा मेला में आये नागरिकों को पांपलेट के माध्यम से कुल 30,000 हजार व्यक्तियों को विधिक जानकारी दिया गया।

आदिवासी मुख्यमंत्री देकर कांग्रेस को चारों खाने चित्त कर दिया भाजपा ने

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  • आखिरकार वैसा ही हुआ, जैसा श्रमबिंदु ने बताया था
  • अपनों को हराने के खेल ने कांग्रेस का ही बिगाड़ा खेल

अर्जुन झा

जगदलपुर आखिरकार वैसे ही हुआ, जैसा कि श्रमबिंदु ने पहले ही बता दिया था। भाजपा ने छत्तीसगढ़ को विष्णुदेव साय के रूप में पहला आदिवासी मुख्यमंत्री देकर कांग्रेस को चारों खाने चित्त कर दिया है। बस्तर के वरिष्ठ आदिवासी नेता दीपक बैज और मुख्यमंत्री पद के प्रबल दावेदार टीएस सिंहदेव बाबा को हरवाकर कांग्रेस के कुछ बड़े नेताओं ने छत्तीसगढ़ में अपनी ही पार्टी की बड़ी फजीहत करा दी है, कांग्रेस को कहीं का नहीं छोड़ा है। अब तो बस्तर ही नहीं, बल्कि समूचे छत्तीसगढ़ के आदिवासी भी भाजपा की जय जयकार करने लगे हैं। आने वाले लोकसभा चुनाव में और संभवतः भविष्य में होने वाले तमाम चुनावों में भी कांग्रेस की भद्द पिट सकती है। कांग्रेस के पास वक्त अभी भी है भाजपा से सबक लेकर आत्मघाती कदम उठाने से बचने के लिए। वरना कांग्रेस को इतिहास की पार्टी बनने से कोई नहीं बचा सकता।

श्रमबिंदु ने अपने पिछले अंक में ‘न रहेगा बांस, न बजेगी बंसी के फेर में बजा कांग्रेस का बैंड’ शीर्षक से एक विस्तृत खबर प्रकाशित की थी। इसके अलावा एक अन्य खबर में श्रमबिंदु ने ही राज्य को आदिवासी मुख्यमंत्री मिलने की संभावना भी जताई थी। ये दोनों खबरें शत प्रतिशत सही साबित हुईं। पहली खबर में बताया गया था कि मुख्यमंत्री की रेस से हटाने के लिए दिग्गज नेता टीएस सिंहदेव और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज की राजनीतिक हत्या करा दी गई। न रहेगा बांस, न बजेगी बंसी के चक्कर में कांग्रेस का ही बैंड बजवा दिया गया। टीएस सिंहदेव पहले से ही मुख्यमंत्री पद के प्रबल दावेदार रहे हैं। वहीं आदिवासी मुख्यमंत्री की मांग उठने पर दीपक बैज सबसे बड़ा चेहरा होते। भविष्य की संभावनाओं को देखते हुए कांग्रेस के ही चंद नेताओं को अपने राजनैतिक अस्तित्व की चिंता सताने लगी थी। यही वजह है कि इन नेताओं टीएस सिंहदेव और दीपक बैज को हर हाल में विधानसभा का चुनाव न जीतने देने के लिए पूरी ताकत झोंक रखी थी। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष, कांग्रेस के आदिवासी विभाग के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, बस्तर लोकसभा क्षेत्र के सांसद एवं बस्तर के तेजतर्रार आदिवासी नेता दीपक बैज कांग्रेसी क्षितिज पर दैदीप्यमान सितारे बनकर चमकने लगे थे। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और ज्यादातर पदाधिकारी तथा बड़े नेता भी दीपक बैज को पसंद करने लगे थे। यही बात छत्तीसगढ़ के उन कांग्रेस नेताओं को खटकने लगी थी, जो सत्ता के शिखर पर बने रहने के लिए आकुल व्याकुल रहते हैं। दीपक बैज का राजनैतिक अस्तित्व खत्म करने के लिए साजिशें रची जाने लगीं। इसके तहत दीपक बैज को चंद दिनों पहले हुए विधानसभा चुनाव में उनकी पुरानी सीट बस्तर के चित्रकोट से मैदान पर उतरवा दिया गया। दो बार इस विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुके दीपक बैज मतदान के कुछ दिनों पहले तक आंधी की तरह छाए हुए थे। साजिशबाज नेताओं को जब लगने लगा कि दीपक बैज यह चुनाव भी जीत जाएंगे, तो उन्होंने साम, दाम, दंड, भेद की नीति अपना ली। बस्तर संभाग के ही एक बड़े नेता तथा निगम, प्राधिकरण में काबिज कुछ स्थानीय नेताओं को दीपक बैज का विजय रथ रोकने के काम में लगा दिया। अपने आका के फरमान पर अमल करते हुए इन पांच नेताओं ने रातों रात ऐसा चक्रव्यूह रच डाला कि दीपक बैज उसे भेद ही नहीं पाए। चित्रकोट क्षेत्र के गांव – गांव में जाकर इन कांग्रेस घाती नेताओं और उनके आदमियों ने कांग्रेस समर्थक मतदाताओं को बरगलाना शुरू कर दिया। मतदाताओं के बीच यह बात प्रचारित की गई कि एक व्यक्ति चार पांच पद सम्हाल नहीं पाएगा, क्षेत्र का वह विकास नहीं करा पाएगा, जनता को समय नहीं दे पाएगा। लोग बहकावे में आ गए और रातों रात बाजी पलट गई। दीपक बैज को हार का सामना करना पड़ा।

दीपक बैज से था अस्तित्व को खतरा

अगर दीपक बैज यह चुनाव जीत गए होते और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार बनने की स्थिति में आदिवासी मुख्यमंत्री की मांग उठती या फिर कांग्रेस आला कमान किसी आदिवासी विधायक को ही मुख्यमंत्री बनाने का फैसला कर लेता, तो निसंदेह दीपक बैज ही एकमात्र विकल्प होते। इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए सत्ता लोभी चंद कांग्रेस नेताओं ने दीपक बैज को निपटवा दिया। दीपक बैज उच्च शिक्षित राजनेता हैं। उनमें काम करने का वो जज्बा है, जो बहुत कम नेताओं में देखने को मिलता है। उनमें सामर्थ्य, सोचने समझने की क्षमता, बिना लाग लपेट के अपनी बात रखने की कला और विरोधी दलों के भी लोगों का दिल जीत लेने की अनूठी प्रतिभा है। अगर वे एक बार मुख्यमंत्री बन जाते, तो कम से कम दो दशक तक उनके मुकाबले कांग्रेस में कोई दूसरा नेता खड़ा नहीं हो पाता। कांग्रेस के जयचंदों को बांसुरी की यह धुन रास नहीं आई और उन्होंने बांस को ही जड़ से खत्म कर दिया। ऐसा करके वे यह समझ बैठे हैं कि बांस ही नहीं रहेगा, तो बांसुरी कैसे बनेगी और बजेगी। मगर यह उनकी बड़ी भूल है। शायद वे यह नहीं जानते कि दीपक बैज उस हस्ती का नाम है जो खाक से उठकर फलक तक पहुंचा है। बस्तर का यह दीपक एक दिन छत्तीसगढ़ की राजनीति में सितारा बनकर चमकेगा।

निपटा दिए गए सबके सब

कांग्रेस पार्टी के नेता अपनी सारी ऊर्जा एक दूसरे को निपटाने में ही जाया कर देते हैं। इस तुच्छ राजनीति के शिकार एक अकेले दीपक बैज ही नहीं हुए हैं, बल्कि उन तमाम नेता भी बने हैं, जो कांग्रेस के स्वार्थी नेताओं के लिए चुनौती साबित होते। क्षुद्र राजनीति के शिकार नेताओं में सरगुजा राज परिवार के टीएस सिंहदेव, साजा के अपराजेय योद्धा रविंद्र चौबे, दुर्ग ग्रामीण के सहज सरल नेता ताम्रध्वज साहू, कवर्धा सीट के अल्पसंख्यक नेता मोहम्मद अकबर समेत कुछ अन्य शामिल हैं। 2018 का विधानसभा चुनाव जीतने के बाद कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद को लेकर जो घमासान चला था, उसकी अनुगूंज कांग्रेस के दिल्ली दरबार तक पहुंची थी।उस समय टीएस सिंहदेव और भूपेश बघेल मुख्यमंत्री पद के दावेदार थे। कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने भूपेश बघेल को मुख्यमंत्री बनाकर टीएस सिंहदेव को यह कहकर तसल्ली दी थी कि ढाई साल तक भूपेश बघेल फिर अगले ढाई साल तक आप मुख्यमंत्री रहोगे। आखिर तक टीएस सिंहदेव बाबा को मुख्यमंत्री की कुर्सी नसीब नहीं हो पाई।

विधानसभा चुनाव के चंद माह पहले बाबा को उप मुख्यमंत्री बना दिया गया। इस बार अगर कांग्रेस की सरकार बनती, तो टीएस बाबा मुख्यमंत्री पद के सबसे प्रबल दावेदार होते। सिंहदेव को मुख्यमंत्री बनाना कांग्रेस हाईकमान के लिए मजबूरी बन जाती। बाबा को भी हराने के लिए साजिश वाला खेल खेला गया। यही नहीं बाबा की दुर्गति का नमूना कांग्रेस नेतृत्व के समक्ष पेश करने के लिए सरगुजा जिले के अन्य कांग्रेस प्रत्याशियों को भी हरवा दिया गया। वहीं सामान्य सीट जगदलपुर से कांग्रेस उम्मीदवार जतिन जायसवाल को महज इसलिए हरवाया गया कि वे टीएस सिंहदेव की पसंद के प्रत्याशी थे। इसी तरह सामान्य वर्ग के ब्राह्मण नेता रविंद्र चौबे, मुस्लिम समुदाय के वरिष्ठ नेता मोहम्मद अकबर, साहू समाज के वरिष्ठ विधायक ताम्रध्वज साहू को भी हराने के लिए कोई कसर बाकी नहीं रखी गई।

कांग्रेस के गाल पर तमाचा

छत्तीसगढ़ की सत्ता पर पूर्ण बहुमत के साथ वापसी कर चुकी भाजपा ने राज्य को पहला आदिवासी मुख्यमंत्री देकर कांग्रेस के गाल पर ऐसा तमाचा जड़ दिया है कि उसकी झन्नाहट से उबरने के लिए कांग्रेस छत्तीसगढ़ में अच्छी खासी सर्जरी करनी -करानी पड़ेगी। आदिवासी समुदाय के नेता विष्णुदेव साय को मुख्यमंत्री बनाकर भाजपा ने आदिवासियों के नाम पर राजनैतिक रोटी सेंकती आ रही कांग्रेस के आदिवासी वोट बैंक में बड़ी सेंध लगा दी है। कांग्रेस भले ही भाजपा पर दलित, आदिवासी, पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक विरोधी होने का आरोप लगाती रही है, मगर सच्चाई कुछ और है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं पिछड़ा वर्ग से आते हैं। उनके मंत्रिमंडल और भाजपा संगठन में दलित, अजा अजजा, ओबीसी, अल्पसंख्यक सभी वर्गों को महत्व दिया गया है। राज्य को प्रथम आदिवासी मुख्यमंत्री मिलने से प्रदेश का पूरा आदिवासी समुदाय आल्हादित हो उठा है। कांग्रेस से जुड़े आदिवासी नेता और मतदाता भी भाजपा के इस कदम की प्रशंसा करते नहीं थक रहे हैं। इस वर्ग को अब भाजपा में उम्मीद की किरण नजर आने लगी है। कहीं ऐसा न हो कि छत्तीसगढ़ का आदिवासी समुदाय कांग्रेस से पूरी तरह छिटक जाएं। तब 2024 के लोकसभा चुनाव और 2028 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की जो दुर्गति होगी, उसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती। आदिवासी, दलित, ओबीसी, अनुसूचित जाति व अल्पसंख्यक कार्ड खेलती आ रही कांग्रेस को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। वहीं भाजपा छत्तीसगढ़ में इस कदर मजबूत हो जाएगी कि उसे चुनौती दे पाना भी कांग्रेस के लिए मुश्किल हो जाएगा।

अपराध नियंत्रण ब्यूरो ने मनाया अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस

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जगदलपुर के दलपत सागर परिसर में क्राइस्ट कॉलेज जगदलपुर व राष्ट्रीय मानवाधिकार अपराध नियंत्रण ब्यूरो ने मनाया अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस ।”पहचान : मेरा सम्मान मेरा अधिकार ” थीम ले कर नुक्कड़ नाटक के माध्यम से मानवाधिकारों के बारे में जागरुकता कार्यक्रम का आयोजन क्राइस्ट कॉलेज जगदलपुर के छात्रों के द्वारा किया गया, ।

जिसका मुख्य आकर्षण का केंद्र ट्रांसजेंडर रहे, राष्ट्रीय मानवाधिकार अपराध नियंत्रण ब्यूरो के संभाग अध्यक्ष जगमोहन सोनी जी ने मानवाधिकार के मुख्य उद्देश्य सम्मान समानता और स्वतंत्रता के बारे में उपस्थित लोगों के अंदर जागरुकता लाई। आयोजन के दौरान क्राइस्ट कॉलेज जगदलपुर व राष्ट्रीय मानवाधिकार अपराध नियंत्रण ब्यूरो की पूरी टीम व शहर के कई गनमान्य नागरिक व छात्र छात्राएं भारी मात्रा में उपस्थित ‌‌हुए

मैदान में मिली नसीहत काम आती है आजीवन : लखेश्वर बघेल

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  • क्रिकेट प्रतियोगिता के समापन में पहुंचे विधायक

बस्तर ग्राम पंचायत बेड़ा उमरगांव में क्रिकेट प्रतियोगिता का समापन बस्तर के विधायक लखेश्वर बघेल के मुख्य आतिथ्य में हुआ। गांव पहुंचने पर विधायक लखेश्वर बघेल का ग्रामवासियों द्वारा ढ़ोल बाजे के साथ मुख्य चौक से लेकर मैदान तक स्वागत किया गया। महिलाओं ने उनकी आरती उतारी।

बेड़ा उमरगांव नवयुवक मंडल द्वारा क्रिकेट प्रतियोगिता का आयोजन किया गया था। फाइनल मैच बेड़ा उमरगांव एवं छोटे देवड़ा की टीमों के मध्य खेला गया। बेडा उमरगांव ने पहले बल्लेबाजी करने का निर्णय लिया। विजेता और उप विजेता टीमों तथा उत्कृष्ट खिलाड़ियों को पुरस्कार वितरित करते हुए विधायक श्री बघेल ने कहा कि मैदान पर मिलने वाली खेल भावना की सीख जीवन पर्यंत काम आती है। जीवन में कई बार जीत- हार के पल आते हैं, लेकिन मैदान में सीखी गई खेल भावना को जीवन में भी आत्मसात करने पर आप कभी निराश नहीं होंगे और आगे बढ़ने का उत्साह बना रहेगा। खेल प्रतियोगिताओं के आयोजन से परिचय का दायरा भी बढ़ता है और अलग-अलग क्षेत्र के साथियों से मिलकर नई बातें हमें सीखने को मिलती हैं। पराजय और असफलता से निराश न हों। बल्कि कुछ बेहतर कर दिखाने की कोशिश लगातार करते रहें। क्योंकि असफलता आगे बढ़ने की प्रेरणा भी देती है। इस दौरान प्रभाशंकर शुक्ला, समदु कश्यप, सरपंच जगबंधु, शंभू भारती, जितेंद्र तिवारी, राजेश कुमार, एवं बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता, ग्रामीण तथा खिलाड़ी उपस्थित थे।

लखेश्वर – विक्रम ने दी एक दूसरे को बधाई

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जगदलपुर विधायक बस्तर लखेश्वर बघेल के जगदलपुर स्थित निवास पर पहुंचकर बीजापुर विधायक विक्रम मंडावी ने बस्तर से तीसरी बार निर्वाचित होने पर विधायक लखेश्वर बघेल को बधाई दी। लखेश्वर बघेल ने भी दूसरी बार विधायक चुने गए विक्रम मंडावी को शुभकामनाएं दी। फिर से निर्वाचित दोनों विधायकों ने एक दूसरे का मुंह मीठाभी कराया।

पंच से मुख्यमंत्री बने का सफर, किस तरह तय किए छग के , कद्दावर आदिवासी नेता विष्णुदेव साय

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भाजपा पर्यवेक्षक केंद्रीय मंत्री तथा झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा, केंद्रीय मंत्री सर्वानंद सोनोवाल, राष्ट्रीय महामंत्री दुष्यंत कुमार गौतम की उपस्थिति में भाजपा विधायक दल की बैठक प्रदेश मुख्यालय कुशाभाऊ ठाकरे परिसर स्थित सभागार में आहूत की गई। जिसमें छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में भाजपा की ऐतिहासिक जीत के बाद भाजपा विधायक दल ने अपना नेता चुन लिया है. प्रदेश के आदिवासी नेता और पूर्व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष , पूर्व केंद्रीय मंत्री विष्णुदेव साय छत्तीसगढ़ के नए मुख्यमंत्री होंगे विष्णुदेव साय प्रदेश के चौथे मुख्यमंत्री होंगे।

 

 

विष्णुदेव राय छत्तीसगढ़ की कुनकुरी विधानसभा क्षेत्र के कांसाबेल से लगे बगिया गांव के रहने वाले मूलतः किसान हैं। इस क्षेत्र में आदिवासी समुदाय की आबादी सबसे अधिक है और वे इसी समुदाय का प्रतिनिधित्व करते हैं। उन्हें आर.एस.एस, व रमन सिंह के करीबी माना जाता है। 1989 में अपने गांव बगिया से पंच पद से राजनीतिक जीवन की शुरुआत करने वाले विष्णुदेव साय 1990 में निर्विरोध सरपंच निर्वाचित हुए थे। इसके बाद तपकरा से विधायक चुनकर 1990 से 1998 तक वे मध्यप्रदेश विधानसभा के सदस्य रहे। इसके बाद 1999 में वे 13 वीं लोकसभा के लिए रायगढ़ लोकसभा क्षेत्र से सांसद निर्वाचित हुए।इसके बाद भाजपा ने उन्हें 2006 में पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया। 2009 में 15 वीं लोकसभा के लिए हुए चुनाव में वे रायगढ़ लोकसभा क्षेत्र से फिर से सांसद बने। दूसरी बार 2014 में 16 वीं लोकसभा के लिए वे फिर से रायगढ़ से सांसद बने पर इन्हें केंद्र की मोदी सरकार में केंद्रीय राज्यमंत्री, इस्पात खान, श्रम, रोजगार मंत्रालय बनाया। 27 मई 2014 से 2019 तक इस पद पर रहे। 2020 उन्हें पुनः छत्तीसगढ़ भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया । 2 दिसंबर 2022 को उन्हें भाजपा का राष्ट्रीय कार्यसमिति सदस्य और विशेष आमंत्रित सदस्य बनाया। इसके बाद विष्णुदेव साय 8 जुलाई 2023 को भाजपा ने राष्ट्रीय कार्यसमिति का सदस्य बनाया। सांसद और केंद्रीय मंत्री भी रहे हैं। विष्णुदेव साय के सरल एवं मिलनसार व्यवहार सहज उपलब्धता वजह से उन्हें पार्टी ने बड़ा पद दिया है। छत्तीसगढ़ प्रदेश भाजपा विधायक दल की बैठक में नेता चुने जाने के बाद नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा सहित केंद्रीय नेतृत्व, प्रदेश भाजपा प्रभारी ओम माथुर, चुनाव सह प्रभारी केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. रमन सिंह,संगठन सह प्रभारी नितिन नबीन, प्रदेश अध्यक्ष अरुण साव सहित सभी विधायकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की जनता ने भाजपा को जो जिम्मेदारी सौंपी है, उसमें भाजपा की सरकार जनता की कसौटी पर खरी उतरेगी। 25 दिसंबर को किसानों को दो साल के बकाया बोनस का भुगतान कर दिया जाएगा। मोदी जी की सभी गारंटी पूरी होंगी। भाजपा को छत्तीसगढ़ की जनता ने विकास और खुशहाली का भरोसा व्यक्त किया है। भाजपा की सरकार अपने संकल्प को सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ पूरे करेगी। हम सभी अभी से जनता के सपनों को पूरा करने में जुटेंगे। छत्तीसगढ़ सुशासन, विकास और लोक समृद्धि की त्रिवेणी बनेगा। वनांचलों का तेज गति से विकास होगा। प्रधानमंत्री मोदी जी और भाजपा की मंशा के अनुसार छत्तीसगढ़ के वनांचलों का, वहां के निवासियों का विकास होगा। भाजपा की सरकार राज्य के हर हिस्से को विकास की नई दिशा देगी।

शहीद वीर नारायण सिंह को किया नमन

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जगदलपुर  छत्तीसगढ़ के प्रथम बलिदानी शहीद वीर नारायण सिंह के शहादत दिवस पर उन्हें गोंडवाना बिरादरी ने नमन किया। यहां स्थित समाज के गोंडवाना भवन में रविवार को सभा का आयोजन किया गया। शहीद वीर नारायण सिंह के जीवन दर्शन पर वक्ताओं ने प्रकाश डाला। समाज अध्यक्ष एन. सेवता, महिला विंग अध्यक्ष शीतला कोरम, दीपा मांझी, मोतीराम सोरी, डॉ. राज सोरी, जेआर ध्रुव, शयाम, बीएस नेताम, सुखलाल नेताम, रामगुलाल दुग्गा, भूपेंद्र उइके, प्रमोद मरावी, नरेश मरकाम व समाज के पुरुष, महिलाएं, युवा बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

होई है वही, जो विष्णु रचि राखा

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  • बस्तर एवं बीजापुर के पुनः निर्वाचित विधायकों के मिलन ने क्या गुल खिलाया ?

-अर्जुन झा-

जगदलपुर यहां स्थित बस्तर के विधायक लखेश्वर बघेल के निवास पर शनिवार को दिलचस्प नजारा देखने को मिला। फिर से जीतकर आए दो कांग्रेस विधायकों का जब मिलन हुआ, तो दोनों की बांछें खिली हुई थीं, मगर उनमें कुछ निराशा भी झलक रही थी। गम इस बात का था कि प्रदेश में कांग्रेस की सरकार नहीं बन सकी और बस्तर संभाग में 75 फीसदी विधानसभा सीटों से पार्टी को हाथ धोना पड़ा। ऐसे में लग रहा था मानो विधायक विक्रम मंडावी अपने अग्रज विधायक लखेश्वर बघेल से पूछ रहे हों कि अब क्या होगा लखी भैया? और जवाब में लखी भैया कह रहे हों क्या होना है विक्की, होई है, वही जो विष्णु रचि रखा। वहीं इन दोनों विधायकों के मिलन के बस्तर के सियासी गालियारे में कुछ और मायने निकाले जा रहे हैं। कोई कह रहा है कि विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष पद के लिए गोलबंदी का यह पहला चरण है। वहीं कुछ लोग तो यह भी कह रहे हैं कि अपने – अपने क्षेत्र के विकास के लिए दोनों विधायक भाजपा से समझौता कर सकते हैं। दूसरी ओर दोनों विधायकों ने इस मुलाकात को सौजन्य भेंट करार दिया है।

बस्तर के विधायक लखेश्वर बघेल के निवास में शनिवार को बीजापुर से दोबारा चुने गए विधायक विक्रम मंडावी अचानक पहुंच गए। श्री मंडावी ने बस्तर सीट से तीसरी बार निर्वाचित होने पर विधायक लखेश्वर बघेल को बधाई दी। श्री बघेल ने भी बीजापुर सीट से पुनः चुने जाने पर विक्रम मंडावी को शुभकामनाएं दी। इसके बाद दोनों नव निर्वाचित विधायकों ने एक दूसरे का मुंह मीठा कराया। दोनों हंसते – मुस्कुराते हुए इस मिलन की तस्वीर खिंचवाई और उसे मीडिया में शेयर भी किया। लखेश्वर बघेल और विक्रम मंडावी के बीच लंबी सियासी चर्चा भी हुई। कहा जा रहा है कि कांग्रेस को छत्तीसगढ़ में मिली हार को लेकर मंत्रणा और बस्तर संभाग में बारह में से फकत चार सीटें कांग्रेस को मिलने पर दोनों ने चिंता जताई। हार के कारणों पर भी मंथन हुआ। इस मिलन पर शहर के एक सज्जन ने ‘हम तो ठहरे परदेशी…. साथ क्या निभाओगे…’ गाना गाते हुए चुटकी भरे अंदाज में कहा- विक्रम मंडावी ने लखेश्वर बघेल से पूछा कि लखी भैया, छत्तीसगढ़ में भाजपा की सरकार आ रही है, हम तो ठहरे कांग्रेसी भाजपा क्या साथ निभाएगी? तो इसके जवाब में लखेश्वर बघेल ने श्री मंडावी से कहा कि क्या होना है विक्की, होना है वही जो विष्णु (विष्णुदेव साय) रचि राखा। हमें अपने अपने क्षेत्र के विकास की चिंता करनी है, बस। इस सज्जन ने अपनी बात पूरी करते हुए एक और गाने का तड़का लगा दिया – इस जंगल के हम दो शेर.. चल घर जल्दी, हो गई देर….। वहीं एक और शख्स ने अंदाजा लगाते हुए कहा कि दोनों विधायक अपने क्षेत्रों के विकास के लिए भाजपा से समझौता कर सकते हैं, यानि भाजपा सरकार के खिलाफ आक्रामक रुख दोनों विधायक नहीं अपनाएंगे। वहीं तीसरे सज्जन का अनुमान था कि विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष पद के लिए कांग्रेस में लॉबिंग शुरू हो गई है और इस मुलाकात का उद्देश्य भी यही था। लखेश्वर बघेल ने हैट्रिक लगाई है और विक्रम मंडावी ने डबल धमाल किया है। कांग्रेस की सरकार बनती, तो ये दोनों निश्चित रूप से मंत्री बन जाते। इस बात का मलाल दोनों विधायकों को हुआ होगा। इसीलिए गमगलत करने दोनों मिले थे।

नेता प्रतिपक्ष के प्रबल दावेदार हैं बघेल

बहुत हो गई बातें मजाक और दिल बहलाने की। अब इस मिलन के असल मुद्दे की बात करते हैं। छत्तीसगढ़ विधानसभा में कांग्रेस अब विपक्ष की भूमिका में आ गई है। निवर्तमान मुख्यमंत्री भूपेश बघेल समेत तमाम कांग्रेस विधायक विधानसभा की विपक्ष वाली गैलरी में बैठेंगे। विपक्ष का लीडर कौन हो, इसे लेकर कांग्रेस में गोलबंदी भी शुरू हो गई है। नेता प्रतिपक्ष के लिए पाटन दुर्ग के विधायक भूपेश बघेल, सक्ती के विधायक डॉ. चरणदास महंत और बस्तर के विधायक लखेश्वर बघेल के नाम प्रमुखता से सामने आ रहे हैं। कहा तो यह भी जा रहा कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष को भी बदला जा सकता है और अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी भूपेश बघेल को दी जा सकती है। ऐसे में नेता प्रतिपक्ष का पद किसी आदिवासी विधायक को दिया जा सकता है। ऐसे में बस्तर विधायक लखेश्वर बघेल का इस पद के लिए पहला हक बनता है। तीन बार चुनाव जीतना लखेश्वर बघेल की दावेदारी को और भी मजबूती प्रदान करता है। वहीं विक्रम मंडावी को उप नेता प्रतिपक्ष की जवाबदारी मिल सकती है। कहा जा रहा है कि लखेश्वर बघेल और विक्रम मंडावी की मुलाकात की असल वजह भी यही रही है।

बारदा में आठ माह से अटका पड़ा है शौचालय निर्माण

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  • राशि मिलने के बाद भी अधूरा छोड़ दिया गया काम

बकावंड विकासखंड बकावंड की ग्राम पंचायत बारदा में 8 माह से अधूरा पड़ा है सार्वजनिक शौचालय का निर्माण। निर्माण कार्य ग्राम पंचायत के जरिए शुरू हुआ था। लंबा समय गुजर जाने के बाद भी निर्माण कार्य आज तक अधूरा पड़ा है।

सरपंच कमल मौर्य और सचिव प्रेमलता नेगी ने निर्माण कार्य की पूरी राशि आहरित कर ली है और निर्माण कार्य अधूरा ही छोड़ दिया है। इसकी जानकारी मिलने पर इस संवाददाता ने गांव में जाकर निर्माण कार्य का हाल देखा। मौके पर पाया गया कि शौचालय निर्माण के नाम पर सिर्फ दीवारें खड़ी की गई हैं। दीवारों का प्लास्टर नहीं हुआ है, फ्लोरिंग का काम रत्ती भर भी नहीं हुआ है। वहीं छत की ढलाई भी अब तक नहीं कराई जा सकी है। शौचालय का निर्माण नरेगा और एसबीएम के तहत कराया जा रहा है। पंचायत सचिव हेमलता नेगी ने बताया कि एक बार 94 हजार रु. और दूसरी बार 84 हजार रु. शौचालय निर्माण के लिए मिले हैं। बाकी राशि ग्राम पंचायत के खाते में जमा नहीं हुई है। अधिकांश काम तो हो गया है। सिर्फ छत ढलाई कराना ही बचा है। वहीं मनरेगा के परियोजना अधिकारी कौस्तुभ वर्मा से संपर्क करने पर उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। लगाता है कि सरपंच, सचिवव अधिकारी ने राशि की बंदरबांट कर ली है। जनपद पंचायत के सीईओ श्री मंडावी ने भी कोई जवाब नहीं दिया।

वर्सन

जल्द होगी छत ढलाई

 शौचालय काम चल रहा है। कुछ दिनों में छत ढलाई का काम भी पूरा करा लिया जाएगा।

    कमल मौर्य  सरपंच, बारदा

जर्जर भवन में संचालित किया जा रहा है आंगनबाड़ी केंद्र

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  • बच्चों की जान से किया जा रहा है सरेआम खिलवाड़
  • आंगनबाड़ी के लिए राशि स्वीकृत, काम है अधूरा

बकावंड जनपद पंचायत क्षेत्र बकावंड के अंतिम छोर में स्थित ग्राम पंचायत राजनगर के बदागुड़ा पारा में छोटे- छोटे बच्चों की जान से खिलवाड़ किया जा रहा है। आंगनबाड़ी भवन के अभाव में नौनिहालों को एक ऐसे मकान में पढ़ाया जा रहा है, जो बुरी तरह जर्जर हो चला है। यह मकान कभी भी धराशायी हो सकता है। वहीं दूसरी ओर जो नया आंगनबाड़ी भवन बन रहा है, वह कई साल से अधूरा पड़ा है।

जिस मकान में आंगनबाड़ी केंद्र का संचालन किया जा रहा है, वह बेहद खतरनाक स्थिति में पहुंच चुका है। यह मकान सरकारी कार्यालय के लिए बनाया गया है। मकान की दीवारें हैं तो पक्की, लेकिन छत बेहद जर्जर हो चुकी है। छत को बल्लियों और म्याल के सहारे टिका कर रखा गया है। बारिश होने पर कमरे के अंदर पानी झरते रहता है। ऐसी स्थिति में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका रोज कमरे से पानी को बर्तनों की मदद से बाहर कर पूरे कमरे में पोंछा लगाती हैं। इसके बाद ही बच्चों को वहां बिठाकर पढ़ाई और उनकी देखरेख शुरू की जाती है। इस खस्ताहाल मकान में बिठाकर बच्चों की जान से खिलवाड़ किया जा रहा है। बल्लियों के सहारे टिकी छत कब भरभरा कर गिर जाए, कहा नहीं जा सकता। बच्चों की जान को पल पल खतरा बना रहता है। अगर कोई अनहोनी हो गई, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा ? आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका के मत्थे सारा दोष मढ़कर पंचायत प्रतिनिधि और अधिकारी अपना पल्ला झाड़ लेंगे। वस्तुतः ग्राम के सरपंच और सचिव इसके लिए जवाबदेह माने जाएंगे। क्योंकि उन्हीं की मनमानी और गैर जिम्मेदाराना रवैए के कारण सुरक्षित आंगनबाड़ी भवन का निर्माण पूरा नहीं हो पा रहा है। इस भवन की पोताई भी सालों से नहीं कराई गई है। इसके आसपास झाड़ियां हैं, जहां से निकलकर सांप, बिच्छू जैसे जहरीले जीव भवन के आसपास मंडराते रहते हैं

सालों से अधूरा पड़ा है भवन

बदागुडा में आंगनबाड़ी भवन निर्माण के लिए कई साल पहले लाखों रुपए स्वीकृत हुए हैं। आधा अधूरा काम करवाकर निर्माण कार्य बीच में ही छोड़ दिया गया है। महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना के परियोजना अधिकारी ने भवन निर्माण कार्य की जिम्मेदारी सरपंच और पंचायत सचिव को दे रखी है।सरपंच और सचिव ने आंगनबाड़ी केंद्र भवन निर्माण के नाम पर सरकारी धन का दुरूपयोग ही किया है। राशि प्राप्त कर लेने के बाद भी निर्माण कार्य पूरा कराने पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। कई दिनों से आंगनबाड़ी कार्यकर्ता गायब रहती है। कार्यकर्ता के उपस्थित नहीं रहने के कारण ज्यादातर बच्चे भी नहीं पहुंचते हैं। आंगनबाड़ी में सहायिका ही उपस्थित रहती है। इस संदर्भ में चर्चा करने पर महिला बाल विकास विभाग के अधिकारी राठिया ने कहा कि कहा कि मैं संज्ञान में लेकर जरूर कार्रवाई करूंगा। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता पटनायक से चर्चा करने पर उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।

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