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गांजा के साथ महिला गिरफ्तार

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जगदलपुर पुलिस अधीक्षक शलभ कुमार सिन्हा के नेतृत्व मेें बस्तर पुलिस के द्वारा नशे तथा अपराधिक तत्वों के विरूद्ध व्यापक रूप से लगातार कार्रवाई की जा रही है। इसी कड़ी में गांजा बिक्री करने वाली एक महिला को जगदलपुर कोतवाली पुलिस ने 49 हजार रुपए कीमत के 930 ग्राम गांजा के साथ पकड़ा है।

कोतवाली पुलिस को सूचना मिली थी कि एक महिला गांजा बिक्री करने हेतु ग्राहक के इंतजार में पनारापारा स्कूल के पीछे रानी के घर के पास खड़ी है। सूचना पर पुलिस अधीक्षक शलभ कुमार सिन्हा के दिशानिर्देशन में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक माहेश्वर नाग के मार्गदर्शन में एवं नगर पुलिस अधीक्षक सुमीत कुमार डी धोत्रे के पर्यवेक्षण में थाना प्रभारी कोतवाली लीलाधर राठौर के नेतृत्व में महिला पुलिस सहित टीम गठित कर टीम को कार्रवाई हेतु रवाना किया गया। पुलिस टीम ने पनारापारा स्कूल के पीछे घेराबंदी कर महिला निशा नाग पति सोनू को पकड़ा गया। उसके कब्जे से 930 ग्राम गांजा बरामद हुआ।

महिला के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत केस दर्ज कर उसे विशेष न्यायालय भेजा गया। आरोपिया को पकड़ने में निरीक्षक लीलाधर राठौर उप निरीक्षक अरुण मरकाम, प्रमोद ठाकुर,सहायक उप निरीक्षक सतीश यादव व मीना यादव, प्रधान आरक्षक विनोद चांदने, आरक्षक रीना अनंत, पुनीता ठाकुर, रंगलाल खरे, वरुण बघेल, सोमालू, तोमन बघेल आदि का योगदान रहा।

9000 शिक्षकों की सेवा पुस्तिका का ऑडिट होना

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विकासखंड में लगाएं विशेष कैंप – छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन

अनुसूचित क्षेत्र में कार्यरत शिक्षकों के लिए 10 दिवस का अतिरिक्त अर्जित अवकाश स्वीकृत किया जाना।

एसोसिएशन ने कमिश्नर बस्तर संभाग और कोष लेखा संचालक को सौंपा ज्ञापन

छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन के प्रदेश उपाध्यक्ष प्रवीण श्रीवास्तव ने संभाग के 9000 एल.बी. संवर्ग के शिक्षकों की सेवा पुस्तिका के ऑडिट से जुड़ी लंबित समस्याओं को लेकर अनुसूचित क्षेत्र में कार्यरत शिक्षकों के लिए 10 दिवस का अतिरिक्त अर्जित अवकाश स्वीकृत करने हेतु कमिश्नर बस्तर संभाग और कोष लेखा एवं पेंशन संचालक को ज्ञापन सौंपकर त्वरित कार्रवाई की मांग की है। एसोसिएशन ने मांग की है कि शिक्षकों को परेशान होने से बचाने के लिए प्रत्येक विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) कार्यालय में विशेष कैंप आयोजित किए जाएं। छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन के प्रवीण श्रीवास्तव(प्रदेश उपाध्यक्ष) लुदर सन कश्यप (जिला अध्यक्ष)अमित पॉल (जिला कोषाध्यक्ष)मंगल राम मौर्य(जिला उपाध्यक्ष) श्रीमती भूमिका निषाद , बुधराम कश्यप (ब्लॉक अध्यक्ष दरभा)अकबर खान, रविंद्र अजापाल, कमलेश रामटेके,हेमंत पाटनी ने संयुक्त रूप से बताया कि सेवा पुस्तिका का समय पर और त्रुटिरहित ऑडिट होना शिक्षकों के भविष्य के लिए बेहद अनिवार्य है। संविलियन पूर्व की सेवा की गणना, पदोन्नति, समयमान, समतुल्य वेतनमान, सातवां वेतनमान और आगामी समय में सेवानिवृत्ति के मामलों को देखते हुए यह प्रक्रिया जल्द पूरी की जानी चाहिए।अभी जो सिस्टम है उसमे डीडीओ द्वारा सेवा पुस्तिका को कोष लेखा एवं पेंशन के संभागीय कार्यालय ले जाकर, तथा कुछ जिलों में स्वयं शिक्षक द्वारा कोष लेखा एवं पेंशन के संभागीय कार्यालय ले जाकर आडिट कराया जाता है। “सेवा पुस्तिका” के समयबद्ध ऑडिट और सत्यापन के लिए शिक्षकों को अवांछित वित्तीय भार का सामना करना पड़ता है। अक्सर यह देखा गया है कि ऑडिट कार्य को गति देने के लिए शिक्षकों से आर्थिक सहयोग या अनुचित साधनों की अपेक्षा की जाती है।” “सेवा पुस्तिका के ऑडिट को पूर्णतः निःशुल्क और पारदर्शी बनाया जाए, ताकि शिक्षकों को किसी भी प्रकार का आर्थिक मानसिक तनाव न झेलना पड़े।

एसोसिएशन की प्रमुख मांगें:

BEO स्तर पर कैंप का आयोजन:

शिक्षकों को अपनी सेवा पुस्तिका के ऑडिट के लिए जिला मुख्यालय या कोष लेखा कार्यालय के चक्कर न काटने पड़ें। इसके लिए प्रत्येक विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) कार्यालय में विशेष कैंप लगाया जावे, जिससे शिक्षकों के समय की बचत हो और कार्य समय-सीमा में पूर्ण हो सके।

संविलियन पूर्व की सेवा का ऑडिट:

शिक्षकों की संविलियन से पूर्व की सेवा अवधि (शिक्षा कर्मी/पंचायत/नगरीय निकाय) का ऑडिट स्थानीय नियमों के तहत स्थानीय निधि संपरीक्षा (Local Fund Audit) के माध्यम से कराया जावे।

रजही डैम में डूबे युवक का शव 7 घंटे बाद मिला, छुट्टी में घर आया था छात्र

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दल्लीराजहरा के पथराटोला के पास स्थित रजही डैम में डूबे युवक का शव करीब 7 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद गोताखोरों द्वारा बाहर निकाला गया। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल व्याप्त है।मिली जानकारी के अनुसार मृतक युवक की पहचान अनीश कुमार कौशल, पिता झुमक लाल कौशल, निवासी मानपुर चौक के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि अनीश भिलाई में छात्रावास में रहकर पढ़ाई करता था और छुट्टियों में अपने घर आया हुआ था।

बताया जा रहा है कि रविवार को वह रजही डैम घूमने गया था। इसी दौरान वह गहरे पानी में चला गया और डूब गया। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस, ग्रामीण एवं गोताखोरों की टीम मौके पर पहुंची और युवक की तलाश शुरू की गई। करीब 7 घंटे तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद गोताखोरों ने युवक का शव डैम से बाहर निकाला।घटना के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। पूरे इलाके में मातम पसरा हुआ है। पुलिस द्वारा पंचनामा कार्रवाई कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है तथा मामले की जांच की जा रही है।

अंतागढ़ थाना प्रभारी जायसवाल फिर फंसे विवादों में, पत्रकारों से दुर्व्यवहार के बाद कड़ा विरोध

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सरपंच आंदोलन की हिमायती बने दरोगाजी

कांकेर जिले के अंतागढ़ थाना प्रभारी रमेश जायसवाल एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गए हैं। पत्रकारों के साथ कथित दुर्व्यवहार के मामले ने अब तूल पकड़ लिया है, जिसके विरोध में क्षेत्र के पत्रकार थाना परिसर के बाहर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए हैं। पत्रकारों का आरोप है कि थाना प्रभारी रमेश जायसवाल ने एक वरिष्ठ पत्रकार के साथ अभद्र व्यवहार करते हुए पद का रौब दिखाया और अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया।

बताया जा रहा है कि पत्रकार एक मामले के कवरेज के लिए थाना पहुंचे थे, जहां मामूली बात को लेकर थाना प्रभारी रमेश जायसवाल भड़क गए। घटना के बाद पत्रकारों में भारी नाराजगी देखने को मिली और उन्होंने थाना प्रभारी को हटाने की मांग को लेकर मोर्चा खोल दिया। आंदोलन को स्थानीय पत्रकारों के साथ-साथ कांकेर प्रेस क्लब के पदाधिकारियों का भी समर्थन मिल रहा है। इस पूरे विवाद के बीच एक दिन पहले सामने आई घटना ने भी थाना प्रभारी रमेश जायसवाल की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दरअसल, अंतागढ़ में सरपंच आंदोलन के दौरान मुख्य मार्ग घंटों जाम रहा और यात्री भीषण गर्मी में परेशान होते रहे। आरोप है कि उस दौरान भी थाना प्रभारी आम लोगों और पत्रकारों की मदद करने के बजाय एक दुकान में बैठकर कूलर की हवा खाते नजर आए थे। रास्ता बंद होने पर कुछ पत्रकारों ने वैकल्पिक मार्ग और सहयोग की जानकारी मांगी, लेकिन थाना प्रभारी ने संवेदनशीलता दिखाने के बजाय उन्हें वापस लौटने की सलाह दे दी थी। स्थानीय लोगों और पत्रकारों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब रमेश जायसवाल के व्यवहार को लेकर सवाल उठे हों। इससे पहले भी उन पर आम लोगों और पत्रकारों से रौबदार एवं असहयोगात्मक रवैया अपनाने के आरोप लग चुके हैं। अब लगातार सामने आ रही घटनाओं के बाद क्षेत्र में यह चर्चा तेज हो गई है कि आखिरकार पुलिस का रवैया जनता और मीडिया के प्रति इतना कठोर क्यों होता जा रहा है। हालांकि थाना प्रभारी रमेश जायसवाल ने वर्तमान विवाद में किसी भी तरह की अभद्रता से इंकार करते हुए कहा है कि उन्होंने केवल मर्यादित तरीके से बैठने की बात कही थी। लेकिन पत्रकारों का सवाल है कि यदि व्यवहार सामान्य था तो फिर विरोध और धरने की स्थिति क्यों बनी। फिलहाल मामला अब प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा का विषय बन चुका है तथा पत्रकारों ने स्पष्ट कर दिया है कि कार्रवाई नहीं होने तक आंदोलन जारी रहेगा।

कांग्रेस नेता से हैं मधुर संबंध

कल ही प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में सरपंचों द्वारा बीच सड़क पर तंबू लगाकर दिन भर सरकार और बीजेपी नेताओं को कोसा गया था, लेकिन जब इस मामले की जानकारी लेने स्थानीय पत्रकार थाने पहुंचे तो थानेदार रमेश जायसवाल ने पत्रकारों से भी दुर्व्यवहार किया और अपनी औकात में रहने की नसीहत पत्रकारों को दे डाली। इससे स्थानीय पत्रकारों ने थानेदार के खिलाफ मोर्चा खोल उन्हें हटाने और सस्पेंड करने की मांग जिला पुलिस अधीक्षक से की है। इधर विश्वस्त सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पूर्व कांग्रेसी नेता जो विधायक भी रह चुके हैंजे वे पहले पुलिस विभाग में अधिकारी रहे हैं। सूत्र बताते हैं इस नेता के साथ टीआई जायसवाल के मधुर संबंध हैं।

इसी मधुर संबंध को बनाए रखने और भाजपा सरकार को नीचा दिखाने दरोगाजी ने सरपंचों को सड़क पर कब्जा करने दिया और पत्रकारों से दुर्व्यवहार किया। इस मामले में एसडीएम रजक ने भी अपना मौन समर्थन दिया। लेकिन वह भूल गए कि तपती दोपहरी में बस, कार अन्य सैकड़ों वाहनों में सवार लोग कितने परेशान हुए। अंतागढ़ के पत्रकार साथियों के साथ हुए इस दुर्व्यवहार के मामले में भानुप्रतापपुर प्रेस क्लब द्वारा समर्थन देने की बात सामने आ रही है, वहीं छत्तीसगढ़ जर्नलिस्ट यूनियन द्वारा भी अंतागढ़ के पत्रकारों को आश्वस्त किया गया है कि अगर वे हमारे संगठन की जरूरत महसूस करेंगे, तब हम सभी साथी उनके आंदोलन में साथ रहेंगे

सुरक्षा के नाम पर डकार गए 10 लाख और बचा नहीं पाए बेशकीमती चंदन के पेड़ भी

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बस्तर का चंदन वन खत्म होने की कगार पर

2 हजार से घटकर रह गए सिर्फ 200 पेड़

यहां तो विभागीय कर्मी ही निभा रहे हैं चंदन तस्कर वीरप्पन की भूमिका

अर्जुन झा

जगदलपुर कर्नाटक के कुख्यात चंदन तस्कर वीरप्पन ने दशकों तक वन महकमे और पुलिस की नाक में दम किए रखा था। उसने बड़े पैमाने पर चंदन पेड़ों का सफाया कर दिया था। अब बस्तर में भी कोई वीरप्पन पैदा हो गया है, जो बस्तर जिले में चंदन के जंगलों का सफाया कर रहा है। जिस जंगल में कभी चंदन के दो हजार से भी ज्यादा पेड़ खुशबू बिखेर रहे थे, अब उस जंगल में 200 पेड़ भी नहीं बचे हैं। दरअसल यहां वीरप्पन कोई और नहीं बल्कि विभागीय अधिकारी कर्मचारी ही हैं। अधिकारी चंदन के जंगल की सुरक्षा के नाम पर दस लाख डकार गए, मगर पेड़ नहीं बचा पाए।

बस्तर जिले के बड़े आरापुर स्थित दुर्लभ प्राकृतिक सफेद चंदन वन पर अब अस्तित्व का संकट गहरा गया है। कभी अपनी प्राकृतिक समृद्धि और हजारों चंदन वृक्षों के लिए पहचाने जाने वाला यह क्षेत्र आज धीरे-धीरे इतिहास बनने की कगार पर पहुंच चुका है। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, यहां पहले 2 हजार से अधिक सफेद चंदन के पेड़ मौजूद थे, लेकिन अब मुश्किल से 200 वृक्ष ही बचे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि वर्षों से सक्रिय चंदन तस्करों ने जंगल और गांव के आसपास लगे अधिकांश पेड़ों को काट डाला है। तस्करों ने केवल जंगल क्षेत्र ही नहीं, बल्कि आरापुर बस्ती, डोंगरीपारा, शिव मंदिर परिसर और रेलवे लाइन किनारे लगे चंदन वृक्षों को भी नहीं छोड़ा है। लगातार हो रही अवैध कटाई के कारण अब यह प्राकृतिक धरोहर समाप्त होने के मुहाने पर खड़ी दिखाई दे रही है।

सुरक्षा पर शुरू नहीं हुआ काम

जानकारी के मुताबिक, करीब 15 वर्ष पहले वन विभाग ने चंदन वन की सुरक्षा के लिए लगभग 10 लाख रुपये की योजना तैयार की थी। इस योजना में तार की बाड़, सोलर लाइट और सुरक्षा व्यवस्था जैसी सुविधाएं शामिल थीं, ताकि चंदन पेड़ों की कटाई और तस्करी पर रोक लगाई जा सके। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि योजना केवल कागजों तक सीमित रह गई और जमीनी स्तर पर कोई काम शुरू नहीं हो पाया। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यदि समय रहते सुरक्षा व्यवस्था लागू कर दी जाती तो आज यह स्थिति पैदा नहीं होती। वन विभाग की कथित लापरवाही और निगरानी की कमी के कारण तस्करों का नेटवर्क लगातार सक्रिय बना रहा।

ग्रामीणों ने संभाली जिम्मेदारी

चंदन वन को बचाने के लिए ग्रामीणों ने अपने स्तर पर भी प्रयास किए। गांव के लोगों ने समिति बनाकर निगरानी शुरू की और कई बार तस्करों को पकड़कर पुलिस के हवाले भी किया। बावजूद इसके, स्थायी सुरक्षा व्यवस्था और सख्त कार्रवाई नहीं होने से अवैध कटाई रुक नहीं सकी।ग्रामीणों का कहना है कि तस्कर रात के अंधेरे में पेड़ों को काटकर आसानी से फरार हो जाते हैं। जंगल क्षेत्र में पर्याप्त गश्त और आधुनिक सुरक्षा व्यवस्था नहीं होने का फायदा लगातार उठाया जा रहा है। ग्रामीणों और पर्यावरण प्रेमियों ने प्रशासन से तत्काल ठोस कदम उठाने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जल्द प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई तो आने वाली पीढ़ियां केवल कहानियों में ही बस्तर के चंदन वन के बारे में सुन पाएंगी। ग्रामीणों ने चंदन वन क्षेत्र को संरक्षित क्षेत्र घोषित करने, नियमित सुरक्षा गश्त बढ़ाने और तस्करों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। फिलहाल पूरे मामले में जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

ढाई साल में बदले गए भाजपा सरकार के 8 मंत्रियों के ओएसडी

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सरकार की छवि पर पड़ रहा है खराब असर

अब बदली मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े की ओएसडी

रायपुर छत्तीसगढ़ में भाजपा सरकार के दौरान कई मंत्रियों के विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारियों (ओएसडी) और निजी सहायकों (पीए) को उनके पदों से हटाया गया है। प्रशासनिक व्यवस्था में कसावट, खराब तालमेल और अनैतिक कार्यों की शिकायतों के कारण यह कार्रवाई की गई है। कुछ जगहों पर भष्टाचार के मामलों के चलते उन पर गाज गिरी है। मगर इससे सरकार की ही छवि पर खराब असर पड़ने लगा है।

अब तक डिप्टी सीएम अरुण साव के ओएसडी विपुल कुमार गुप्ता को हटाकर उनकी जगह अजय कुमार त्रिपाठी को नया ओएसडी नियुक्त किया गया था। वन मंत्री केदार कश्यप के ओएसडी सुनील तिवारी और जितेंद्र गुप्ता को हटाकर मूल विभाग में वापस भेजा गया था। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन, खाद्य मंत्री दयालदास बघेल, राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा और कृषि मंत्री रामविचार नेताम के निजी स्टाफ को भी प्रशासनिक कारणों से बदला गया है। छत्तीसगढ़ में भाजपा सरकार के दो साल के कार्यकाल के दौरान मंत्रियों के निजी स्टाफ में बड़े पैमाने पर फेरबदल देखने को मिला है। पिछले 25 महीनों में करीब 8 मंत्रियों के एक दर्जन से ज्यादा ओएसडी और पीए पदों से हटाए जा चुके हैं। इस सामूहिक रवानगी ने प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है। विपक्ष इस मुद्दे को भ्रष्टाचार और ‘पैसे के बंटवारे के विवाद से जोड़ रहा है। वहीं सत्ता पक्ष इसे केवल प्रशासनिक सुधार और कामकाज की बेहतरी के लिए उठाया गया कदम बता रहा है। सरकार के विभिन्न विभागों में काम कर रहे अधिकारियों और सहायकों को हटाने का सिलसिला लगातार जारी है।

सामंजस्य की कमी और विभागीय सुस्ती बनी हटाने की मुख्य वजह। मंत्री केदार कश्यप के पीए सर्कषण सिंह को संविदा में गलत ढंग से नियुक्त किए जाने के कारण सामान्य प्रशासन विभाग ने इसी माह 5 मई को उनकी छुट्टी कर दी थी। तीन दिन पहले ही महिला बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े की ओएसडी रूही टेंभुलकर को हटा दिया गया। वे पंचायत विभाग मेें उपायुक्त पद पर थीं। उन्हें मूल विभााग में वापस भेजा गया है। बताया जा रहा है कि मंत्रियों और उनके ओएसडी के बीच तालमेल ठीक नहीं था। कई मामलों में ओएसडी मंत्रियों के क्षेत्र और विभागीय कामकाज में वैसी सक्रियता नहीं दिखा रहे थे जैसी उनसे उम्मीद की जा रही थी। इसके अलावा भाजपा संगठन को भी कई माध्यमों से इन निजी सहायकों के व्यवहार और कामकाज को लेकर शिकायतें मिल रही थीं। माना जा रहा है कि मंत्रियों के काम को और अधिक पारदर्शी और तेज बनाने के लिए इन चेहरों को बदला गया है ताकि सरकार की छवि पर कोई आंच न आए।स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के ओएसडी संजय मरकाम और अजय कन्नौजे को पद से हटाया गया। उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन के ओएसडी भागवत जायसवाल और पीए प्रवीण पांडेय की छुट्टी की गई। डिप्टी सीएम अरुण साव के ओएसडी विपुल गुप्ता को हटाया गया।राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा के ओएसडी दुर्गेश वर्मा, बी. रघु और पीए दुर्गेश धारे हटाए गए। खाद्य मंत्री दयालदास बघेल के ओएसडी संजय गजघाटे की सेवाएं समाप्त की गईं।कृषि मंत्री रामविचार नेताम के ओएसडी तारकेश्वर देवांगन को हटाया गया। वन मंत्री केदार कश्यप के ओएसडी सुनील तिवारी, जितेंद्र गुप्ता और तीर्थराज अग्रवाल को भी पद छोडऩा पड़ा। और अब महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े की ओएसडी रूही टेंभुलकर को हटा दिया गया है।

नीट पेपर लीक, युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं: लक्ष्मण बघेल

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आदिवासी युवा छात्र संगठन ने जताया कड़ा विरोध

जगदलपुर देशभर में आयोजित नीट परीक्षा में कथित पेपर लीक मामले को लेकर आदिवासी युवा छात्र संगठन (आयसु) ने कड़ा विरोध जताया है। आयसु के संभाग अध्यक्ष लक्ष्मण बघेल ने बयान जारी कर कहा है कि यह सिर्फ एक परीक्षा में गड़बड़ी नहीं, बल्कि देश के लगभग 24 लाख विद्यार्थियों के भविष्य के साथ सीधा अन्याय है।

उन्होंने कहा है कि लाखों छात्र-छात्राएँ दिन-रात मेहनत कर डॉक्टर बनने का सपना देखते हैं, लेकिन पेपर लीक जैसी घटनाएँ मेहनती विद्यार्थियों का मनोबल तोड़ने का काम करती हैं। यह शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। आयसु संभाग अध्यक्ष लक्ष्मण बघेल ने केंद्र सरकार एवं संबंधित एजेंसियों से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्च स्तरीय जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए मजबूत व्यवस्था लागू की जाए। नीट परीक्षा लीक पर आदिवासी युवा छात्र संगठन कड़ा निंदा करते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को स्तीफा की माँग करता है।

श्री बघेल ने कहा है कि यदि विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों पर कठोर कार्रवाई नहीं हुई, तो छात्र संगठन सड़क से सदन तक आंदोलन करने को मजबूर होगा। आयसु ने विद्यार्थियों और अभिभावकों की चिंता को जायज़ बताते हुए कहा कि देश का युवा न्याय चाहता है, न कि भ्रष्ट व्यवस्था का शिकार बनना। मेहनत करने वाले छात्रों के सपनों का सौदा बंद किया जाए, शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और न्याय सुनिश्चित किया जाए।

रजही डैम में युवक के डूबने की आशंका, तलाश जारी

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दल्ली राजहरा के पथराटोला के पास स्थित रजही डैम में रविवार को एक युवक के डूबने की खबर सामने आई है। घटना के बाद क्षेत्र में हड़कंप मच गया तथा मौके पर लोगों की भीड़ जुट गई।मिली जानकारी के अनुसार युवक की पहचान अनु कौशल, पिता झुमक लाल कौशल, निवासी मानपुर चौक के रूप में की जा रही है। बताया जा रहा है कि युवक भिलाई में छात्रावास में रहकर पढ़ाई करता था और छुट्टी में अपने घर आया हुआ था।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार युवक रजही डैम के पास गया हुआ था, इसी दौरान उसके पानी में डूबने की आशंका जताई जा रही है। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस एवं ग्रामीण मौके पर पहुंचे और युवक की तलाश शुरू कर दी गई है।समाचार लिखे जाने तक युवक का पता नहीं चल पाया था। पुलिस एवं स्थानीय गोताखोरों द्वारा खोजबीन जारी है। घटना को लेकर क्षेत्र में चिंता और दहशत का माहौल बना हुआ है।

रेत के खेल में मालामाल हो रहे हैं अधिकारी और रेत माफिया

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विभाग करता है दिखावे की कार्रवाई, टूटा ग्रामीणों का भरोसा

2 टिप्पर और 2 ट्रैक्टर जप्त, अवैध भंडारण पर प्रकरण दर्ज

अर्जुन झा-

जगदलपुर बस्तर जिले की नदियों को छलनी कर रेत के खेल में खनिज विभाग के अधिकारी- कर्मचारी और रेत माफिया मालामाल हो हो रहे हैं।विभाग समय समय पर कार्रवाई जरूर करता है, मगर यह कार्रवाई सिर्फ दिखावे की होती है। रेत के अवैध खनन, परिवहन और भंडारण के मामले पकड़े जाने पर लोग उसका मजाक बनाने लगते हैं।

दरअसल बस्तर जिले के बकावंड विकासखंड की ग्राम पंचायत बनियागांव व अन्य गांवों के आसपास भास्कली नदी व इंद्रावती नदी से तथा भानपुरी व बस्तर विकासखंडों के नदी नालों से बड़े पैमाने पर रेत का दोहन लंबे समय से होता आया है। बनियागांव में तो रेत के खनन व परिवहन में तो खनिज विभाग के ही अधिकारी की मशीनों और वाहनों के उपयोग के आरोप लगते रहे हैं। क्षेत्र के ग्रामीण लंबे समय से कलेक्टर व एसडीएम से शिकायत करते आए हैं। मगर कभी भी ठोस कार्रवाई नहीं हुई।. इसलिए लोगों का भरोसा खनिज विभाग पर से उठ गया है। अब फिर कलेक्टर आकाश छिकारा के निर्देशानुसार जिले में अवैध रेत उत्खनन, परिवहन और भंडारण के खिलाफ कार्रवाई खनिज विभाग द्वारा की गई है। 23 मई को खनिज अधिकारी शिखर चेरपा के मार्गदर्शन में खनिज विभाग की टीम ने बस्तर और बडांजी क्षेत्र में औचक निरीक्षण कर अवैध रेत परिवहन पर कार्रवाई की।

जांच के दौरान 2 टिप्पर और 2 ट्रैक्टर को अवैध रूप से रेत परिवहन करते पकड़ा गया। खनिज अमले ने वाहनों सहित रेत को जप्त कर पुलिस थाना बस्तर की अभिरक्षा में रखा है। वहीं ग्राम पालाबहार और बड़े आमाबाल क्षेत्र में अवैध रेत भंडारण का भी एक प्रकरण दर्ज किया गया है। कार्रवाई में जिला खनिज जांच दल के सदस्य सहायक खनिज अधिकारी जागृत गायकवाड़, खनिज निरीक्षक अंकित पुरी, खनिज सिपाही डिकेश्वर खरे और कृष्णा उपस्थित रहे। खनिज विभाग ने बताया कि संबंधित प्रकरणों में नियमानुसार दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। कलेक्टर आकाश छिकारा के निर्देशानुसार जिले में खनिज रेत के अवैध उत्खनन, भंडारण और परिवहन पर प्रभावी नियंत्रण के लिए लगातार जांच और सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। मगर सवाल अब भी कायम है कि चंद रुपए जुर्माने के रूप में अदा करने के बाद रेत माफिया फिर से कमाल दिखाने लग जाते हैं। जाहिर सी बात है खनिज विभाग के संरक्षण में ही रेत माफिया ऐसा दुस्साहस करते हैं।

सोशल मीडिया के जरिए बस्तर की आदिवासी संस्कृति को देश दुनिया तक पहुंचा रहे हैं जोजल गांव के युवा अस्तु नाग

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रहन सहन खानपान की विशिष्टता से अवगत करा रहे हैं दुनिया को

जगदलपुर बस्तर की धरती हमेशा से अपनी अनोखी आदिवासी संस्कृति, खान पान और रीति रिवाजों के लिए जानी जाती रही है। लेकिन बदलते समय के साथ आज की युवा पीढ़ी अपनी पारंपरिक जीवनशैली से दूर होती जा रही है। ऐसे समय में जगदलपुर विकासखंड के ग्राम पंचायत पुसपाल जोजल गांव के रहने वाले युवा अस्तु नाग ने अपनी संस्कृति को बचाने और उसे लोगों तक पहुंचाने का एक अनोखा बीड़ा उठाया है।

धुरवा आदिवासी समुदाय से ताल्लुक रखने वाले अस्तु नाग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम का बेहतरीन इस्तेमाल कर रहे हैं। वे अपने अकाउंट @astu_ghumakkad ( एट द रेट अस्तु घुमक्कड़) के जरिए बस्तर की संस्कृति, पारंपरिक खान पान, रीति रिवाजों और लोक जीवन से जुड़े खूबसूरत वीडियो बनाते हैं। आज इंस्टाग्राम पर उनके 48 हज़ार से अधिक फॉलोअर्स हैं, जो उनके काम को बेहद पसंद कर रहे हैं। अस्तु नाग का यह प्रयास केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं है, बल्कि वे अपने वीडियो के जरिये समाज को एक बड़ा संदेश भी दे रहे हैं। आज के समय में जहां युवा वर्ग तेजी से पश्चिमी सभ्यता और फास्ट फूड की ओर आकर्षित हो रहा है, वहीं अस्तु लोगों को बस्तर की पारंपरिक भोजन प्रणाली और जीवनशैली की ओर लौटने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।

वे बताते हैं कि हमारे पारंपरिक खान पान की आदतें न केवल हमारी विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान हैं, बल्कि सेहत और दीर्घायु के लिहाज से भी बेहद लाभकारी हैं। अस्तु नाग का मानना है कि यदि हम अपनी जड़ों, अपनी भाषा और अपनी संस्कृति को भूल गए, तो आने वाले समय में हमारी पहचान भी धीरे धीरे पूरी तरह खो जाएगी। इसलिए वे अपनी कला और सोशल मीडिया के माध्यम से युवाओं को जागरूक करने का निरंतर प्रयास कर रहे हैं। आज अस्तु नाग बस्तर ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश के युवाओं के लिए एक बड़े प्रेरणास्रोत बन चुके हैं। उन्होंने समाज के सामने यह साबित कर दिखाया है कि सोशल मीडिया सिर्फ रील बनाने या मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि अगर दृढ़ संकल्प हो तो इसे अपनी संस्कृति, सभ्यता और धरोहर को जीवित रखने का एक मजबूत माध्यम भी बनाया जा सकता है।

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