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स्काउट-गाइड की गतिविधियों की हुई समीक्षा

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  • राज्य मुख्य आयुक्त डॉ. सोमनाथ ने ली बैठक 

जगदलपुर नगर की ज्ञानगुड़ी में समस्त स्काउट्स एवं गाइडस की वार्षिक समीक्षा बैठक आयोजित की गई।

समीक्षा बैठक में स्काउट्स एवं गाइडस राज्य मुख्य आयुक्त डॉ. सोमनाथ यादव, महापौर व जिला मुख्य आयुक्त संजय पाण्डे, सहायक राज्य आयुक्त वाजिद खान, जिला शिक्षा अधिकारी बलिराम बघेल, जिला मिशन समन्वयक समग्र शिक्षा अखिलेश मिश्रा, विकासखंड शिक्षा अधिकारी अनिल दास, जगदीश पात्र, पूनम सलाम, शालिनी तिवारी, राकेश खापर्डे, जिला आयुक्त गाइड सुधा परमार, जिला संगठन आयुक्त गाईड मीरा हिरवानी, जिला संगठन आयुक्त दशरु राम याद

जिला सचिव लीलेश देवांगन, मनोज महापात्र उपस्थित रहे। अंत में गत वर्ष राज्यपाल पुरुस्कार प्राप्त स्काउट्स एवं गाइड्स को प्रमाण पत्र देकर प्रोत्साहित किया गया और अतिथियों को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।

राज्य मुख्य आयुक्त डॉ सोमनाथ यादव जी पहुंचे जगदलपुर सर्किट हाउस। महापौर व जिला मुख्य आयुक्त संजय पाण्डे सहित जनप्रतिनिधियों ने किया स्वागत

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मालूम हो कि कल शुक्रवार को ज्ञानगुड़ी में समस्त स्काउटर एवं गाइडर की वार्षिक समीक्षा बैठक आयोजित की गई है। बैठक में वार्षिक कार्य योजना, विद्यालयों का डिजिटल रजिस्ट्रेशन, वारंट, चार्टर एवं लेखा सम्बन्धी विषयों पर समीक्षा होगी। इसके साथ ही गत वर्ष राज्यपाल पुरुस्कार प्राप्त स्काउट्स एवं गाइडस् को प्रमाण पत्र देकर प्रोत्साहित किया जाएगा।

सर्किट हाउस में निगम स्पीकर खेमसिंह देवांगन, एमआईसी सदस्य निर्मल पानीग्राही, सुरेश गुप्ता, संजय विश्वकर्मा, त्रिवेणी रंधारी, कलावती कसेर, पार्षद हरीश पारेख, मण्डल अध्यक्ष अविनाश श्रीवास्तव, संजय चंद्राकर, राजपाल कसेर, पंकज आचार्य, रितेश सिन्हा, मनोज ठाकुर, सूर्यभूषण सिंह, ब्रजेश कपूर, ब्रिजेश शर्मा, योगेश मिश्रा, सुप्रीयो मुखर्जी, सूरज श्रीवास्तव, सहायक राज्य आयुक्त वाजिद खान, जिला सचिव लिलेश देवांगन, जिला संगठन आयुक्त दशरु राम यादव उपस्थित रहे।

विकसित भारत का अमृत काल: सेवा, सुशासन और गरीब कल्याण के 11 गौरवपूर्ण वर्ष पूर्ण

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बालोद, शिकारीपारा भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार के सेवा, सुशासन और गरीब कल्याण के 11 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में “विकसित भारत के संकल्प से सिद्धि तक” की संकल्पना को समर्पित प्रोफेशनल मीट कार्यक्रम का आयोजन राष्ट्रीय स्वाभिमान मंच द्वारा किया जायेगा

यह विशेष कार्यक्रम स्थानीय कबीर मंदिर, शिकारीपारा (बालोद) में कल 20 जून प्रातः 11:00 बजे से संपन्न होगा। आयोजन में बतौर मुख्य वक्ता पूर्व विधायक (धमतरी) श्रीमती रंजना साहू, राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग के पूर्व सदस्य श्री यशवंत जैन, तथा राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित वरिष्ठ साहित्यकार  जगदीश देशमुख विशेष रूप से उपस्थित रहेगे।

कार्यक्रम के आयोजनकर्ता के रूप में पेंशनधारी कल्याण संघ के अध्यक्ष डॉ. आर. एम. चावड़ा, सेवानिवृत्त खंड शिक्षा अधिकारी डॉ. आर. गजेंद्र, एवं सेवानिवृत्त प्राचार्य बी. आर. बेलसर के नेत्रित्व में सम्पन्न होगा

इस अवसर पर बालोद क्षेत्र के प्रोफेशनल्स, सामाजिक नेतृत्वकर्ता, जनप्रतिनिधिगण, पत्रकारगण, विशिष्ट नागरिक एवं बड़ी संख्या में प्रबुद्ध जन उपस्थित होकर कार्यक्रम की गरिमा को और ऊँचाई देंगे।

कार्यक्रम में वक्ता मोदी सरकार की 11 वर्षों की ऐतिहासिक उपलब्धियों, जनकल्याणकारी योजनाओं तथा “विकसित भारत” की दिशा में उठाए गए निर्णायक कदमों पर प्रकाश डालेंगे।

निशान भट्ट ने नीट परीक्षा में भारतवर्ष में 5818 रैंक

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निशान भट्ट ने नीट परीक्षा में पूरे भारतवर्ष में 5818 रैंक प्राप्त करके बस्तर का नाम रोशन किया। 11वीं और 12वीं की पढ़ाई दिल्ली पब्लिक स्कूल रिसाली भिलाई में प्राप्त की. उन्होंने नीट कोचिंग भिलाई से की। निशान भट्ट जगदलपुर के जाने-माने डेंटिस्ट डॉ. कृष्णमूर्ति एवं इनर व्हील क्लब से जुड़ी दिव्यश्री के पुत्र हैं। इन्होंने 720 स्कोर में 568 मार्क लाकर बस्तर सहित पूरे छत्तीसगढ़ का नाम रोशन किया है।

अब आदिवासी समाज के निशाने पर सरकार

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  •  बस्तर में आदिवासियों की आवाज दबाने का आरोप
  • कवासी लखमा, मनीष कुंजाम की गिरफ्तारी पर समाज ने उठाए सवाल

अर्जुन झा-

जगदलपुर वरिष्ठ आदिवासी नेता अरविंद नेताम के आरएसएस के कार्यक्रम में भाग लेने के बाद अब भाजपा सरकार कांग्रेस के साथ ही आदिवासी समुदाय के भी निशाने पर आ गई है। कांग्रेस नेता एवं पूर्व मंत्री कवासी लखमा और पूर्व विधायक मनीष कुंजाम की गिरफ्तारी के बहाने सर्व आदिवासी समाज ने सरकार को घेरने का काम शुरू कर दिया है। बस्तर संभाग के सभी सात जिलों में एकसाथ पत्रकार वार्ता कर सर्व आदिवासी समाज ने बस्तर में बिगड़ती परिस्थितियों पर गहरी चिंता व्यक्त की। प्रेसवार्ता में समाज के प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि आदिवासियों की आवाज को दबाने का व्यवस्थित प्रयास किया जा रहा है और कई ज्वलंत मुद्दों पर सरकार और प्रशासन की चुप्पी बनी हुई है। समाज ने स्पष्ट किया कि बस्तर अंचल में विभिन्न मुद्दों को प्रमुखता से उठाने वाले संगठनों और व्यक्तियों को निशाना बनाया जा रहा है। हाल ही में तेंदूपत्ता बोनस घोटाले को उजागर करने वाले पूर्व विधायक मनीष कुंजाम के घर पर छापे को इसी कड़ी में देखा जा रहा है। समाज का कहना है कि शिकायतकर्ता पर ही कार्रवाई करना यह दर्शाता है कि यह आवाज को दबाने की कोशिश है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में शिक्षा के गिरते स्तर पर भी चिंता व्यक्त की गई। प्रतिनिधियों ने कहा कि युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया के कारण स्कूलों में विषयवार शिक्षकों की पदस्थापना नहीं हो पा रही है। इससे आदिवासी अंचल में शिक्षा की गुणवत्ता पर बुरा असर पड़ रहा है। समाज ने मांग की कि बच्चों की संख्या के बजाय कक्षा और विषयवार शिक्षकों की नियुक्ति की जाए, विशेषकर बस्तर जैसे शिक्षा में पिछड़े क्षेत्र में। पूर्व मंत्री और वरिष्ठ आदिवासी नेता कवासी लखमा की गिरफ्तारी को भी समाज ने आदिवासी आवाज को दबाने का प्रयास बताया। समाज ने याद दिलाया कि लखमा ने अपने मंत्रित्वकाल में क्षेत्र के विकास, कैदियों की रिहाई, बंद पड़े स्कूलों को फिर से शुरू कराने और विशेष पिछड़ी जनजाति के बच्चों को एमबीबीएस में प्रवेश दिलाने जैसे महत्वपूर्ण काम किए थे। कवासी लखमा ने स्थानीय भर्ती और जल, जंगल, जमीन के मुद्दों पर भी मुखरता से अपनी बात रखी थी। ऐसे जनप्रतिनिधि को जेल में बंद करना समाज के लिए चिंता का विषय है।

पेसा, वन अधिकार कानून का उल्लंघन

समाज ने आरोप लगाया कि पेसा और वन अधिकार कानून के प्रावधानों का बस्तर में सही ढंग से क्रियान्वयन नहीं हो रहा है।नगरनार इस्पात संयंत्र के निजीकरण और बैलाडीला सहित अन्य खदानों को निजी हाथों में सौंपने पर कड़ी आपत्ति जताई गई। समाज का कहना है कि इससे 70 साल में निकाला जाने वाला लोहा 10 साल में ही निकाला जा रहा है।

आश्रम शालाओं में असुरक्षा

आश्रम शालाओं और छात्रावासों में लगातार आदिवासी लड़कियों के साथ बलात्कार और लैंगिक उत्पीड़न की घटनाओं पर समाज ने गहरी चिंता व्यक्त की। कहा गया कि बस्तर के जंगल और जमीन को बिना विधिवत अधिग्रहण के विकास परियोजनाओं के लिए लेने से जंगल में तेजी से कमी आई है, जिस पर तुरंत रोक लगाने की मांग की गई।

आदिवासी नेताओं ने राजस्व विभाग के कर्मचारियों की मिलीभगत से आदिवासियों और गैर आदिवासियों की जमीनों पर भूमाफियाओं के अवैध कब्ज़े को उजागर किया। समाज ने इस पर अंकुश लगाने के लिए भूमाफी नियंत्रण अधिनियम पारित करने की मांग की।

बांग्लादेशी घुसपैठियों की समस्या

समाज ने पिछले 5-6 सालों से लगातार बांग्लादेशी अवैध घुसपैठियों द्वारा प्राकृतिक और मानवीय संसाधनों पर अवैध हड़पांतरण का मुद्दा उठाया। इस मामले में समाज ने प्रशासन की निष्क्रियता पर सवाल उठाए। समाज ने घुसपैठियों की जांच कर उन्हें वापस भेजने की मांग की।

सर्व आदिवासी समाज ने स्पष्ट किया कि वे इन मुद्दों पर शासन-प्रशासन से साफ-साफ बात करना चाहते हैं और इन विषयों पर गहन चिंतन-मनन कर रहे हैं। इस दौरान सर्व आदिवासी समाज के जिला अध्यक्ष जग्गूराम तेलामी, कमलेश पैंकरा, सीताराम मांझी, पांडूराम तेलाम, विनीता बघेल, श्रवण सैंड्रा, मंगू लेकाम, सतीश मंडावी सहित अन्य समाज प्रमुख मौजूद थे।

धोखाधडी के फरार आरोपी को पकडने में मिली सफलता आरोपी को गिरफ्तार कर भेजा गया जेल

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थाना मंगचुवा में घनश्याम साहू ने रिपोर्ट दर्ज कराया की पत्नी ग्राम पंचायत करतू टोला में सरपंच के पद परथी उसी दौरान आरोपी खिलावन चंद्राकर द्वारा स्वयं को मीडिया वाला बता कर जान पहचान कर एवं प्रार्थी से मंत्रालय रायपुर में मेरी जान पहचान होने से प्रार्थी के पुत्र को मंत्रालय में नौकरी लगवा दूंगा कहने पर प्रार्थी के द्वारा अपने आई सी आई सी आई बैंक शाखा बालोद से 6.50,000 रुपए निकालकर नगद रकम 6.50,000 रुपए को दिया था आरोपी के द्वारा जॉइनिंग लेटर मंत्रालय से 2 दिन में प्राप्त हो जाएगा कहकर बोला गया था एक सप्ताह बीत जाने के बाद प्रार्थी के द्वारा आरोपी से संपर्क करने पर नौकरी नहीं लगा तो पैसा वापस कर दूंगा कह कर प्रार्थी को झूठा प्रलोभन दे रहा था । प्रार्थी के द्वारा अपने पुत्र के नौकरी नही लगाने से पैसा वापस नही कर प्रार्थी को मेरा मंत्रालय रायपुर में जान पहचान है तुम्हे झूठे मामले में फंसा दूंगा कहकर प्रार्थी के साथ छलकपट कर कुल 7.00,000 रुपए लेकर धोखाधड़ी करने पर थाना मंगचुवा में अपराध क्रमांक 02/2024 धारा 420 भा०द०वि० कायम कर विवेचना में लिया गया था । प्रकरण के आरोपी दिनांक घटना से लगातार फरार होने से पता तलाश करने का प्रयास किया जा रहा था ।

मामले की गंभीरता को देखते हुए श्रीमान पुलिस अधीक्षक श्री योगेश पटेल के निर्देश पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मोनिका ठाकुर जिला बालोद व नगर पुलिस अधीक्षक डॉ० चित्रा वर्मा के मार्गदर्शन में थाना मंगचुवा के सउनि बीजू डेनियल एवं थाना स्टाप के टीम गठित किया गया था प्रकरण के फरार आरोपी खिलावन चन्द्राकर के द्वारा घटना दिनांक समय से लगातार फरार होने से आरोपी का पता तलाश किया जा रहा था कि पतासाजी के दौरान मुखबीर से सूचना मिला कि फरार आरोपी अपने परचित के यहां बालोद में छुपे रहने की सूचना पर आरोपी को घेराबंदी कर पकडा गया। प्रकरण के फरार आरोपी खिलावन चंद्राकर पिता स्वं. उभय सिंह चंद्राकर उम्र 51 वर्ष साकिन ग्राम मुड़खुसरा थाना सुरेंगांव जिला बालोद (छ.ग.) को जिला जेल बालोद में दाखिल किया गया है।फरार आरोपी को पकडने मे थाना मंगचुवा के अधिकारी/कर्मचारियों की सराहनीय भूमिका रही।

यह कैसी युक्ति? नई पदास्थापना वाले स्कूल का नाम सुनते ही गश खाकर गिरे शिक्षक

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  •  शहरी स्कूल में नियुक्ति मिली है शिक्षक को, फिर भी गुरेज क्यों?

अर्जुन झा-

जगदलपुर एक ओर जहां शिक्षक शिक्षिकाएं और तमाम सरकारी विभागों के अधिकारी कर्मचारी शहरों में अपनी तैनाती के लिए तरसते हैं और इसके वास्ते तरह तरह के जतन भी करते हैं, वहीं दूसरी ओर एक मास्साब ऐसे भी हैं, जिन्हें शायद शहरी स्कूल से गुरेज है। ये युक्ति थी या कि खौफ, कि नई पदास्थापना वाले स्कूल का नाम सुनते ही मास्साब गश खाकर गिर पड़े। उन्हें तुरंत महारानी अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनकी हालत अब ठीक है। मास्साब के गश खाकर गिरने की वजह चाहे कुछ भी हो, मगर युक्तियुक्तकरण का विरोध कर रहे शिक्षक संगठनों और कांग्रेस को विरोध की धार तेज करने का एक और बहाना जरूर मिल गया है।

कहा जा रहा है कि शिक्षा विभाग में जारी युक्तियुक्तकरण के नाम से हो रही पदस्थापना से पूरे राज्य के शिक्षक मानसिक रूप से परेशान हैं। इसका पुरजोर विरोध भी कई शिक्षक संगठन साझा मंच बनाकर कर रहे हैं। उनकी और कांग्रेस की दलील है कि युक्तियुक्तकरण से छत्तीसगढ़ में हजारों स्कूल बंद हो जाएंगे, शिक्षकों के हजारों पद खत्म हो जाएंगे, सरकार शिक्षकों की नई भर्तियां नहीं करना चाहती इसलिए उसने युक्तियुक्तकरण की युक्ति अपनाई है। वहीं पर्दे के पीछेसे जो बातें सामने आ रही हैं उनके मुताबिक इस नई नीति का वही शिक्षक नेता कर रहे हैं, जो वर्षों से अपनी मनचाही शाला में जमे हुए हैं। उन्हें डर है कि युक्तियुक्तकरण के बहाने कहीं उन्हें भी दूर दराज की शालाओं में न भेज दिया जाए। ज्यादातर शिक्षक अपने गृहग्राम के आसपास की शालाओं में ही जमे रहनाचाहते हैं, मगर नई नीति में उनकी युक्ति काम नहीं आ रही है। ऐसा ही एक मामला बस्तर संभाग स्तरीय काउंसलिंग में देखने को मिला। बस्तर हायर सेकंडरी स्कूल कैंपस मेंचल रही काउंसलिंग के दौरान आज 19 जून को एक शिक्षक अपनी नई पदास्थापना वाले स्कूल का नाम सुनते ही बेहोश होकर गिर गए। उन्हें अन्य शिक्षकों द्वारा उठाकर महारानी अस्पताल में दाखिल कराया गया। जहां अब इन मास्साब की सेहत ठीक हो चली है। कैरगुड़ा माध्यमिक विद्यालय में पदस्थ रहे शिक्षक मुकुंद ठाकुर के साथ यह घटना हुई है। उच्च श्रेणी शिक्षक मुकुंद ठाकुर को जगदलपुर के प्रतिष्ठित जगतू माहरा हायर सेकंडरी स्कूल में नई तैनाती दी गई है। जगदलपुर जैसे बस्तर संभाग के सबसे और सुविधा संपन्न शहर से इन मास्साब को गुरेज आखिर क्यों है, इसे लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। कोई इसे “युक्ति” बता रहा है, तो कोई कुछ और। वहीं शिक्षकों के बीच चर्चा है कि मुकुंद ठाकुर को अपनी पुरानी शाला से बेदखल किया जाना रास नहीं आ रहा है। वहीं दूसरी ओर यह भी आरोप लग रहे हैं कि काउंसलिंग में किसी भी शिक्षक से न दावा आपत्ति मांगी जा रही है, न ही अधिकारी अपने कर्मचारियों की बात सुन रहे हैं। कर्मचारी विवश हैं नए स्कूलों में जाने के लिए। ऐसा ही एक मामला बस्तर जिले के बस्तर विकासखंड के कैरगुड़ा में पदस्थ शिक्षक मुकुंद ठाकुर के कथनानुसार वे अतिशेष ही नहीं हैं, फिर भी उन्हें जबरदस्ती अतिशेष कर दिया गया है। वे पूरे दस्तावेज लेकर भी आए थे। पर संयुक्त संचालक ने उनकी व्यथा नहीं सुनी। वे कर्मचारी संगठनों को भी अपनी परेशानी को बता रहे थे। और काफी परेशान थे। अधिकारी का ऐसे व्यवहार की शिकायत सभी शिक्षक कलेक्टर बस्तर के पास करने वाले हैं। शिक्षकों की कोई सुनवाई नहीं हो रही है।इससे शिक्षक बहुत नाराज हैं। युक्तियुक्तकरण का कोई विरोध नहीं कर रहा है। नाराजगी तो युक्तियुक्तकरण में शिक्षा विभाग के अधिकारियों की तानाशाही से है।

लाल आतंक और लाल पानी दोनों बस्तर के लिए परेशानी का सबब

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  • नक्सली आदिवासियों की जान के दुश्मन और लाल पानी उनकी फसलों एवं मवेशियों के
  • विधायक विक्रम मंडावी इस मसले पर गंभीर, 20 को जाएंगे प्रभावित क्षेत्रों में

अर्जुन झा-

जगदलपुर लाल आतंक और लाल पानी दोनों ही बस्तर के आदिवासियों के लिए बड़ी परेशानी का सबब बन गए हैं। नक्सली जहां आदिवासियों की जान के दुश्मन बन गए हैं, वहीं लाल पानी उनकी फसलों और मवेशियों के लिए बड़ा खतरा बन चुका है। बैलाडीला स्थित एनएमडीसी की लौह अयस्क खदानों से निकलने वाला लाल पानी नदी नालों को तो प्रदूषित कर ही रहा है, फसलों को भी नुकसान कर रहा है और मवेशियों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है।

बैलाडीला स्थित एनएमडीसी की आयरन ओर खदानों से निकलने वाला लाल पानी बस्तर संभाग के बीजापुर जिले के कई गांवों में कहर ढा रहा है। इस जिले के ग्राम पुसनार, हिरोली, करका, दुगाली और डुमीरपालनार इस लाल पानी से कुछ ज्यादा ही प्रभावित हैं। इन सभी गांवों के पंचायत प्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने बीजापुर के विधायक विक्रम मंडावी से मुलाकात कर एनएमडीसी के बैलाडीला स्थित आयरन ओर खदानों से निकलने वाली लाल मि‌ट्टी से ग्रामीणों को होने वाले नुक़सान की जानकारी देते हुए ज्ञापन सौंपा। ग्रामीणों का कहना कि गांवों से होकर बहने वाली बेरूदी नदी का पानी एनएमडीसी की आयरन ओर खदान के कारण दूषित हो गया है। इस नदी के पानी के उपयोग से मवेशियों की आकस्मिक मृत्यु हो रही है‌। खेतों की फसलें नष्ट हो रही हैं। इस पानी का उपयोग करने वाले ग्रामीण बीमार हो रहे हैं। इसलिए ग्रामीणों की मांग है कि ग्रामवासियों को रहे नुकसान की भरपाई करते हुए मुआवजा राशि प्रदान कराई जाए। साथ ही ग्रामीणों ने विधायक विक्रम मंडावी को ज्ञापन सौंपते हुए यह मांग उठाई कि एकबार लाल पानी प्रभावित क्षेत्र का सर्वे किया जाए। जो नुकसान हो रहा है मुआवजा मिलना चाहिए। एनएमडीसी बचेली में लाल पानी प्रभवित क्षेत्रो के बेरोजगार युवकों को रोजगार दिया जाए। लाल पानी प्रभावित क्षेत्र में एक सर्वसुविधा युक्त अस्पताल खोला जाए और गाय बैल की मृत्यु होने पर उसका भी मुआवजा दिलाया जाए। ग्रामीणों ने कदमपाल डेम जैसा एक डेम डुमरीपालनार में भी बानाने की मांग उठाई। विधायक विक्रम मंडावी ने लाल पानी प्रभावित क्षेत्र के ग्रामीणों के मांगों को सही ठहराते हुए कहा कि सरकार को जल्द से जल्द ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान करना चाहिए। इसके साथ ही विधायक ने कहा कि 20 जून को वे एनएमडीसी की खदानों से निकलने वाले लाल पानी से प्रभावित क्षेत्र का जायजा लेने स्वयं जाएंगे। विक्रम मंडावी ने कहा है कि एनएमडीसी बस्तर की खनिज संपदा का दोहन तो कर रहा है, मगर उसे बस्तर के लोगों के जनमाल की जरा भी परवाह नहीं है। यह बर्दाश्त करने लायक नहीं है। क्षेत्र की जनता के हित में वे हर संभव कदम उठाएंगे।

शहीद महेंद्र कर्मा विवि में अवैधानिक भर्ती का सिलसिला जारी; सरकार आखिर मौन क्यों?

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  •  कुलपति की मनमानी और भर्राशाही दौर जारी

-अर्जुन झा

जगदलपुर शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय का विवादों से पीछा नहीं छूट रहा है। यहां भर्ती घोटाला थमने का नाम ही नहीं ले रहा है। यूनवर्सिटी में नियुक्तियों में भारी भ्रष्टाचार की शिकायतों के बाद भी लगातार कुलपति की मनमानी जारी है।

अवैधानिक भर्ती में रूरल टेक्नोलॉजी में दुर्गेश डिकसेना का अवैधानिक चयन और मैनेजमेंट में अवैध भर्ती, केंद्रीय विश्वविद्यालय से पीएचडी डिग्रीधारी उच्च शिक्षित आदिवासी महिला अभयरथी को नाट फाउंड सुटेबल करना, जेआरएफ उत्तीर्ण विकलांग महिला को नाट फाउंड सुटेबल करने, ओबीसी सीट में जनरल का चयन करने, आरक्षण रोस्टर में गड़बड़झाला तथा अन्य मुद्दों पर बड़ी अनियमितता उजागर हुई थी। इसी बीच बड़ी जानकारी लगी है कि 15 जून को रविवार के अवकाश के दिन जनप्रतिनिधियों और कुलसचिव की अनुपस्थिति में मात्र अपने मातहत 6 प्रोफेसर सदस्यों को बुलाकर कार्य परिषद की बैठककर ली गई। इस बैठक में 7 असिस्टेंट प्रोफेसर, 1 एसोसिएट प्रोफेसर और 1 प्रोफेसर पद पर गुपचुप नियुक्ति कर दी गई।

 

जनप्रतिनिधियों, वरिष्ठ शिक्षाविद, विधायक, कुलसचिव समेत 16 कार्य परिषद सदस्य अनुपस्थित थे फिर भी लिफाफा खोल दिया गया। विदित हो कि शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद में कुलसचिव, विधायक सदस्यों, शिक्षाविद सदस्यों सहित कुल 22 सदस्य नामांकित हैं परंतु 15 जून को आयोजित कार्यपरिषद की बैठक में 22 में से 16 सदस्यों में विधायक, शिक्षाविद और कुलसचिव अनुपस्थित थे। इसके बावजूद कुलपति द्वारा मनमानी करते हुए अपने सहित अपने मातहत 5 सदस्यों डॉ. शरद नेमा, डॉ. सपन कोले (इन्हें पूर्व में कार्य परिषद द्वारा परीक्षा कार्य में गोपनीयता भंग करने के आरोप में दंडित किया गया था) डॉ. रानू मेश्राम (इनके पति विश्वविद्यालय के कर्मचारी हैं), डॉ. आरके हिरकने, डॉ. के इंदिरा, और ईश्वर तिवारी ( प्राइवेट कालेज प्रिंसपल) की उपस्थिति में ही लिफाफा खोल दिया गया, जो ये पांच सदस्य उपस्थित थे। उनमें से दो विश्वविद्यालय के ही प्रोफेसर हैं, और तीन सदस्य कालेज के प्रिंसिपल हैं। इस तरह मनमानी पूर्वक जनप्रतिनिधि सदस्यों की अनुपस्थिति में लिफाफा खोलने से कुलपति के मातहतों डॉ. शरद नेमा, डॉ. सपन कोले जिन्हें पूर्व में कार्य परिषद द्वारा परीक्षा कार्य में गोपनीयता भंग करने के आरोप में दंडित किया गया था, ईश्वर तिवारी, डॉ. रानू मेश्राम जिनके पति विश्वविद्यालय के कर्मचारी हैं मात्र की उपस्थिति पर भी संदेहास्पद भूमिका प्रतीत हो रहा है।

कुलसचिव रहे अनुपस्थित

आनन फानन में रविवार अवकाश के दिन बुलाई गई कार्य परिषद की बैठक में नियमित पीएससी चयनित कुलसचिव श्री लालवानी शामिल नहीं हुए। कुलपति द्वारा मनमानी पूर्वक इस बैठक में एक सहायक कुलसचिव देवचरण गावड़े को कुलसचिव का कार्यभार सौंप इस बैठक को अवैधानिक रूप से संपन्न किया गया। इस पर भी संदेहास्पद भूमिका कुलपति की रही है।

34 अभ्यर्थियों को किया अपात्र!

उल्लेखनीय है कि अंग्रेजी विषय में असिस्टेंट प्रोफेसर के 33 अभ्यर्थियों का इंटरव्यू 26 एवं 27 मई लगातार दो दिन लिया गया था, जिसमें सभी अभ्यर्थियों को मनमानी पूर्वक कुलपति द्वारा नाट फांउड सुटेबल करार दे दिया गया। इसी तरह ऐंथ्रोपोलाजी विषय में 34 अभ्यर्थियों का इंटरव्यू 30 एवं 31 मई को लगातार दो दिन हुआ था। इस इंटरव्यू में उच्च शिक्षित उपाधि प्राप्त अनेक आवेदक शामिल हुए परंतु सभी 34 उच्च शिक्षित आवेदकों को कुलपति मनोज श्रीवास्तव द्वारा भर्राशाही करते हुए सभी को नाट फांउड सुटेबल कर दिया गया। जो कि स्पष्ट रूप से पैसे देने वाले कैंडिडेट नहीं मिलने के कारण सभी 34 उच्च शिक्षित लोगों को नाट फांउड सुटेबल किया जाना प्रमाणित होता है। जिन पदों के लिए पैसा मिला उसमें मेरिट में बहुत पीछे के कैंडिडेट को ले लिया गया, और जिन पदों में पैसे नहीं मिले उसमें 34-34 उच्च शिक्षित उम्मीदवारों के होने के बाऊजूद नाट फांउड सुटेबल कर पोस्ट खाली रखना भारी भरष्टाचार और अनियमितता का सबूत है।

सूची में दो नाम वायरल

चयन सूची में राजनीति विज्ञान विषय में भुवनेश्वर साहू और बायोटेक्नोलॉजी विषय में नीरज वर्मा का नाम चयनित होने की खबर बहुत पहले ही फेसबुक सहित विभिन्न समाचारों और शिकायतों में साक्षात्कार पूर्व ही पैसों का लेनदेन कर चयन फिक्स वायरल हो चुकी थी। और इस चयन सूची में भुवनेश्वर साहू और नीरज वर्मा का नाम होने से भारी भ्रष्टाचार की पुष्टि भी हो रही है।

दावा निकला थोथा

कुलपति ने प्रेसवार्ता में दावा किया था कि 38 वर्ष से ऊपर वाले किसी अभ्यर्थी का चयन नहीं हुआ है,जबकि भुवनेश्वर साहू की आयु 49 वर्ष है। कुलपति मनोज श्रीवास्तव द्वारा बाकायदा प्रेस कॉन्फ्रेंस लेकर दावा किया गया था कि 38 वर्ष के ऊपर आयु के किसी भी उम्मीदवार का चयन नहीं हुआ है। जबकि सच्चाई यह है कि पॉलीटिकल साइंस विषय में असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर चयनित भुवनेश्वर साहू का जन्म 1977 का है और वर्तमान में इनकी आयु 49 साल की है। भुवनेश्वर साहू के चयन से बिना शुद्धि पत्र और बिना संशोधित विज्ञापन के आयु सीमा शिथिल कर अवैधानिक भर्ती के आरोप भी प्रमाणित हो गया है।

शिक्षाविद सदस्य की अनदेखी

विदित हो कि कार्य परिषद के सबसे वरिष्ठ और अनुभवी शिक्षाविद सदस्य प्रोफेसर एसके पाण्डेय, पूर्व कुलपति, पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय को पहले के बैठकों में कुलपति द्वारा आनलाइन जोड़ा जाता था, परंतु पिछली दो बैठकों में प्रोफेसर एसके पाण्डेय की आनलाइन बैठक में जुड़ने की ईच्छा के बावजूद उन्हें बैठक में नहीं जोड़ा गया। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार प्रोफेसर एसके पाण्डेय दवारा शैक्षणिक भर्ती में हो रही अनियमितता पर सवाल उठाया गया था और वे कार्यपरिषद बैठक में भी इस मुद्दे पर चर्चा करना चाह रहे थे, परंतु कुलपति मनोज श्रीवास्तव द्वारा मनमानी पूर्वक कार्यपरिषद के सबसे वरिष्ठ और अनुभवी सदस्य की अनदेखी की गई।

अनसुनी रह गई शिकायतें

भर्ती घोटाले के खिलाफ भाजपा कांग्रेस के नेताओं ने भी आवाज उठाई, जिसे अनसुना कर दिया गया।

इस सबंध में पूर्व भाजपा विधायक संतोष बाफना, पूर्व भाजपा विधायक राजाराम तोड़ेम, एनएसयूआई प्रदेश सचिव रंजनेश सिंह, वरिष्ठ कांग्रेस नेता उमाशंकर शुक्ला सहित अनेक आवेदकों और विभिन्न लोगों ने भी अप्रैल माह में राज्यपाल, उच्च शिक्षा विभाग छत्तीसगढ़ शासन को शिकायत करते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन को सूचित कर दिया था परंतु कुलपति द्वारा तमाम शिकायतों को दरकिनार कर मनमानी पूर्वक अवैधानिक भर्ती को जारी रखते हुए साक्षात्कार कर अवैध तरीके से कार्य परिषद की बैठक कर गुपचुप नियुक्ति कर रहे हैं। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार अब चूंकि अधिकांश विषयों में कुलपति मनमानी पूर्वक गलत आरक्षण रोस्टर पर भर्ती कर चुके हैं जिसके बचाव हेतु शिक्षा विभाग के पूर्व स्वीकृत व्याख्याता पदनाम के पदों को असिस्टेंट प्रोफेसर पदनाम और वेतनमान पर स्वीकृत कराने एड़ी चोटी का जोर लगा रहे हैं ताकि इस स्वीकृति की प्रत्याशा में भर्ती के आरक्षण रोस्टर को सही दिखाया जा सके, परंतु कभी भी किसी भर्ती विज्ञापन में भविष्य में स्वीकृत या संशोधन की प्रत्याशा में ना तो भर्ती विज्ञापन निकाला जाता है और न ही साक्षात्कार कर अवैधानिक भर्ती की जाती है। चूंकि बहुत सारे महिला, विकलांग, आदिवासी उम्मीदवारों और गोल्ड मेडलिस्ट उम्मीदवारों ने विभिन्न फोरममों अनूसूचित जनजाति आयोग, महिला आयोग, मानवाधिकार आयोग, कुलाधिपति और समाजिक अधिकारिता मंत्रालय में लिखित नामजद शिकायत की है और लगातार इस भर्ती के भरष्टाचार पर खबरें छप रही हैं। ऐसे में तत्काल प्रशासन और शासन को स्वत: संज्ञान लेकर इसकी उच्च स्तरीय जांच कमेटी का गठन कर जांच करवानी चाहिए। जो संदेही चयनित हुए हैं उन सभी के बैंक खातों सहित कुलपति और इस भर्ती में शामिल सभी चयन समिति के सदस्यों के मोबाइल नंबर के काल डिटेल निकाले जाने चाहिए। 15 जून को हुई कार्य परिषद बैठक में कुलपति के मातहत सदस्य डॉ. शरद नेमा, डॉ. सपन कोले भी मौजूद रहे, जबकि इन्हें पूर्व में कार्य परिषद द्वारा परीक्षा कार्य की गोपनीयता भंग करने के आरोप में दंडित किया गया था एवं अन्य की भूमिका की भी जांच की जानी चाहिए।

इलेट्रिक सामानों का अभाव, मोमबत्ती जलाकर किया नगर निगम पर प्रदर्शन

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  •  अब निराकरण नहीं हुआ तो कांग्रेस पार्टी करेगी निगम घेराव: राजेश चौधरी
  • जनता को सुविधाएं मुहैया कराने में निगम प्रशासन फेल: सुशील मौर्य

जगदलपुर उपकरणों की कमी के चलते स्ट्रीट लाइटें बंद रहने के विरोध में कांग्रेस पार्षदों और पार्टीजनों ने मोमबत्ती जलाकर नगर निगम पर प्रदर्शन किया गया। इस दौरान निगम प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई।

शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष सुशील मौर्य की उपस्थिति में नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष राजेश चौधरी के नेतृत्व में हुए प्रदर्शन में कांग्रेस पार्षद दल के साथ ही पार्टी के पदाधिकारी और कार्यकर्ता भी मौजूद रहे। कांग्रेस का कहना है कि विद्युत सामग्री की कमी के कारण पिछले कई दिनों से स्ट्रीट लाइटें बंद पड़ी हैं और जनता परेशान हो रही है। नगर निगम प्रशासन के खिलाफ भगत सिंह, वीर सावरकर वार्ड व शिव मंदिर वार्ड के नागरिकों के साथ लालटेन व मोमबत्ती जलाकर विरोध प्रदर्शन किया गया। नेता प्रतिपक्ष राजेश चौधरी ने बताया नगर निगम क्षेत्र के विभिन्न विद्युत सामग्री की कमी के कारण पिछले कई दिनों से वार्डों की स्ट्रीट लाइटें बंद पड़ी हैं। इसे लेकर पूर्व में नगर निगम आयुक्त एवं महापौर को ज्ञापन सौंपा गया था, किंतु आज तक जनता से जुड़ी इस समस्या का समाधान नहीं हुआ। नगर निगम प्रशासन यदि शीघ्र कदम नहीं उठाता है, तो आंदोलन को और व्यापक स्वरूप दिया जाएगा, नगर निगम सरकार अगर इसका निराकरण जल्द से जल्द नहीं करती है तो कांग्रेस पार्टी पूरे पार्षददल सहित कांग्रेस पदाधिकारी व कार्यकर्ताओं के साथ नगर निगम जगदलपुर का घेराव करेंगे।शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष सुशील मौर्य ने कहा जबसे नगर निगम में भाजपा की सरकार बनी है तबसे शहर की जनता मूलभूत सुविधाओं से वंचित हो गई है। नगर निगम की इस उदासीनता एवं जनहित की उपेक्षा के विरोध स्वरूप प्रवीर वार्ड, विजय वार्ड व शिव मंदिर वार्ड क्षेत्र में कांग्रेस कार्यकर्ताओं एवं स्थानीय नागरिकों के साथ मिलकर दीप एवं मोमबत्ती जलाकर महापौर एवं निगम प्रशासन का ध्यान इस गंभीर समस्या की ओर आकर्षित किया गया। इस दौरान उपनेता प्रतिपक्ष नगर निगम कोमल सेना, वरिष्ठ कांग्रेसी गौरनाथ नाग, अतिरिक्त शुक्ला, प्रकाश अग्रवाल, नन्हा दुबे, पार्षद ज़ाहिद हुसैन, गौतम पाणिग्रही, शुभम यदु, आभास महंती, जस्टिन भवानी, लोकेश चौधरी, सुषमा सुता, निकेत झा, असीम सुता, अजय बिसाई, अनुराग महतो, विजेंद्र ठाकुर, ईश्वर बघेल, ज्योति राव, एस नीला, मनीता राऊत, दुर्योधन कश्यप आदि मौजूद रहे।

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