पीएम राहत कोष से 500 करोड़ की विशेष सहायता, स्थायी बाढ़ नियंत्रण पैकेज की मांग
जगदलपुर बस्तर में अतिवृष्टि और इंद्रावती नदी के उफान से पैदा हुई बाढ़ की स्थिति को लेकर सांसद महेश कश्यप ने केंद्र सरकार के समक्ष बड़ा राहत पैकेज रखने की मांग की है। सांसद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भेजकर बस्तर, सुकमा और बीजापुर के प्रभावित क्षेत्रों के पुनर्वास व क्षतिग्रस्त अधोसंरचना की मरम्मत के लिए प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से 500 करोड़ रुपए की विशेष सहायता मांगी है। इसमें बस्तर के लिए 300 करोड़, सुकमा के लिए 100 करोड़ और बीजापुर के लिए 100 करोड़ रुपए शामिल हैं।सांसद ने बताया कि बाढ़ से सैकड़ों गांव प्रभावित हुए हैं। बस्तर जिले में करीब 700 कच्चे-पक्के मकानों को नुकसान पहुंचा है। इसके अलावा सड़क, पुल-पुलिया, खरीफ फसल, पशुधन और छोटे कारोबार भी प्रभावित हुए हैं। उन्होंने प्रभावित किसानों को प्रति एकड़ विशेष राहत, बेघर परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान और आजीविका सहायता तथा पशुधन व दुकानदारों के नुकसान का मुआवजा डीबीटी से देने की मांग की है।
अब राहत नहीं, स्थायी समाधान पर जोर
सांसद ने केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय और संबंधित केंद्रीय संस्थाओं को भेजे ज्ञापन में इंद्रावती नदी और जोरा नाला के जलभराव की स्थायी समस्या का समाधान करने की मांग की है। इसके लिए आधुनिक हाइड्रोलॉजिकल अध्ययन, नई डीपीआर, जोरा नाला पर गेटेड कंट्रोल स्ट्रक्चर, इंद्रावती में ड्रेजिंग, जलागम क्षेत्रों में पौधरोपण और मृदा संरक्षण का प्रस्ताव रखा गया है।जगदलपुर में एकीकृत स्टॉर्म वाटर ड्रेनेज सिस्टम और नदी किनारों पर पक्के गाइड बांध बनाने की मांग भी की गई है।
बांध से पानी छोड़ने पर 24-48 घंटे पहले मिले अलर्ट
ओडिशा के खातीगुड़ा बांध से पानी छोड़े जाने की स्थिति में निचले इलाकों को समय रहते सतर्क करने के लिए सांसद ने केंद्रीय जल आयोग की मध्यस्थता में रियल टाइम डेटा शेयरिंग और ऑटोमेटेड अर्ली वार्निंग सिस्टम बनाने का प्रस्ताव दिया है। उनका कहना है कि पानी छोड़े जाने की सूचना कम से कम 24 से 48 घंटे पहले मिलने पर संवेदनशील इलाकों को सुरक्षित खाली कराया जा सकेगा।सांसद ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के जमीनी सत्यापन के लिए अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय टीम बस्तर भेजने और पुनरुद्धार के लिए विशेष पैकेज को शीघ्र मंजूरी देने की मांग की है।






