दल्ली राजहरा में बंगाली समाज का 68 वां सार्वजनिक दुर्गा उत्सव धूमधाम से संपन्न

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दल्ली राजहरा बंगाली समाज के तत्वावधान में आयोजित सार्वजनिक दुर्गा उत्सव के 68वें वर्ष का भव्य समापन मां दुर्गा की प्रतिमा विसर्जन के साथ धूमधाम से संपन्न हुआ। 16 अक्टूबर से 21 अक्टूबर 2026 तक आयोजित इस महापर्व का केवल बंगाली समाज ही नहीं, बल्कि पूरे दल्ली राजहरा नगर को बेसब्री से इंतजार रहता है, क्योंकि यह आयोजन शहर की सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक पहचान बन चुका है।बंगाली समाज द्वारा वर्ष 1959 से लगातार आयोजित किए जा रहे इस ऐतिहासिक दुर्गा पूजा में पूरे नगर की सहभागिता देखने को मिलती है, जो आपसी भाईचारे और एकता का प्रतीक है।

भव्य शुभारंभ और पांच दिवसीय आयोजन

पांच दिवसीय आयोजन का शुभारंभ 16 अक्टूबर को देवी स्थापना के साथ हुआ। मूर्ति स्थापना का विमोचन मुख्य अतिथि श्रीमती रेणुका सिंह, अध्यक्ष राजहरा महिला समाज द्वारा परंपरानुसार मंदिर द्वार का फीता काटकर किया गया। इस अवसर पर विशेष रूप से राम अग्रवाल, संध्या सिंह श्रीवास्तव, डॉ. अशोक ठाकुर, सुकांतो मंडल, डॉ. सैलाब जाना, पुरोबी वर्मा, कनक बनर्जी, गौतम बेरा, गगन चंद्र पांडे, जी.वी. राजशेखर राव, तोरण लाल साहू सहित नगर के अनेक गणमान्य नागरिक तथा बंगाली समाज के सदस्य उपस्थित थे।कार्यक्रम के तहत 16 से 21 अक्टूबर तक कोलकाता से पधारे विद्वान पंडितों द्वारा विधि-विधान के साथ मां दुर्गा की पूजा संपन्न कराई गई। पांच दिनों तक मंत्रोच्चार और ढाक की आवाज से पूरा पंडाल प्रांगण गुंजायमान रहा।

धुनुची नृत्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां बनी आकर्षण का केंद्र

17 अक्टूबर को बंगाल के विशेष पारंपरिक धुनुची नृत्य ने सबका मन मोह लिया। यह विशेष नृत्य केवल दुर्गा पूजा के अवसर पर ही प्रस्तुत किया जाता है। महिलाओं, युवाओं और युवतियों द्वारा प्रस्तुत इस नृत्य ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। उसी दिन क्षेत्र के सांसद भोजराज नाग का आगमन हुआ, जिन्हें पूजा समिति द्वारा शाल और श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया गया।18 अक्टूबर सप्तमी पूजा के अवसर पर बंगाली महिला समिति एवं बच्चों द्वारा गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा लिखित ‘चांडालिका’ नृत्य नाट्य प्रस्तुत किया गया, जिसका संचालन डॉ. रूना दास ने किया।19 अक्टूबर को महा अष्टमी पूजा के साथ विशेष संधि पूजा संपन्न हुई। संधि पूजा एक अत्यंत विशेष पूजा विधि है, जिसमें देवी को चामुंडा के रूप में 108 कमल के फूल अर्पित कर 48 मिनट की निर्धारित अवधि में पूजा संपन्न की जाती है। इस कार्यक्रम में 108 कमल के साथ-साथ 108 दिए एवं 108 मोमबत्ती से ओम ॐ का आकृति भी बनाई गई थी । यह पूजा अष्टमी और नवमी तिथि के संधि काल में होती है, इसलिए इसे संधि पूजा कहा जाता है। उसी शाम रंगारंग आर्केस्ट्रा की प्रस्तुति हुई तथा विशेष अतिथि वीरेश ठाकुर, उपाध्यक्ष छत्तीसगढ़ कांग्रेस, राष्ट्रीय महासचिव युवा कांग्रेस कोको पाढ़ी, बंग समाज के पूर्व अध्यक्ष ए.के. नाथ, व्ही.बी. सिंह महाप्रबंधक नंदिनी माइंस, वर्तमान मुख्य महाप्रबंधक राजहरा खदान समूह आनंद कुमार सिंह एवं पूर्व विधायक डोमेन्द्र भेड़िया को शाल-श्रीफल देकर सम्मानित किया गया।20 अक्टूबर को नवमी पूजा संपन्न हुई और शाम को राजहरा आर्केस्ट्रा द्वारा भव्य संगीत कार्यक्रम का आयोजन किया गया।*सिंदूर खेला और भव्य विसर्जन के साथ समापन*21 अक्टूबर को महा दशमी पूजा के बाद सिंदूर खेला का भावुक कार्यक्रम आयोजित हुआ। इस कार्यक्रम में सर्वप्रथम हल्दी मिले पानी जिसे बड़ा थाल में रखा जाता है । पंडित जी के द्वारा मां दुर्गा की चरण एवं सिर को इसमें दर्शन करने के बाद अन्य सभी पदाधिकारी एवं दर्शकों के द्वारा इसी में मां का दर्शन किया गया। उसके बाद मां की मूर्ति को आसान से नीचे उतारा गया उसके बाद सिंदूर खेला का कार्यक्रम प्रारंभ हुआ । इस शुभ कार्य में राजहरा महिला समाज की अध्यक्ष रेणुका सिंह सहित अनेक महिलाओं ने भाग लिया। परंपरा के अनुसार माता के चरणों में सिंदूर अर्पित करने के बाद महिलाओं ने एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर सुख-समृद्धि की कामना की। इसके पश्चात शाम को धूमधाम और गाजे-बाजे के साथ मां दुर्गा की प्रतिमा का भव्य विसर्जन किया गया।समापन अवसर पर समाज प्रमुख गगन चंद्र पांडे ने 68वें दुर्गा पूजा को सफल बनाने में सहयोग करने वाले सभी सहयोगकर्ताओं, नगरवासियों और प्रशासन का हृदय से आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि आप सभी का सहयोग आगे भी बना रहे और भविष्य में भी हम सब मिलकर इसी कर्तव्यनिष्ठा के साथ इस परंपरा को आगे बढ़ाते रहें।

आगामी कार्यक्रम

बंगाली समाज द्वारा जानकारी दी गई है कि आगामी 25 अक्टूबर को श्री श्री कोजागिरी लक्ष्मी पूजा संध्या 8:00 बजे से रात्रि 9:00 बजे तक तथा 8 नवंबर को श्री काली पूजा रात्रि 9:00 बजे से अगले दिन 12:30 बजे तक संपन्न होगी। इस कार्यक्रम में सभी सामाजिक बंधुओं को आमंत्रित किया गया है।

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