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अज्ञात वाहन की टक्कर से बाइक सवार युवक की मौत, एक घायल

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डौंडी। थाना डौंडी क्षेत्र के अवारी नाला के पहले शनिवार शाम करीब 5 बजे अज्ञात वाहन की टक्कर से बाइक सवार युवक की मौत हो गई, जबकि एक व्यक्ति घायल हो गया। हादसे के बाद वाहन चालक मौके से फरार हो गया।मृतक की पहचान नरेंद्र नुरेटी पिता कोमल नुरेटी, उम्र 25 वर्ष, निवासी मरारामखेड़ा, बलोदा के रूप में हुई है। वहीं घायल उमेंद्र कुमार गायकवाड़, उम्र लगभग 57 वर्ष, निवासी अवारी बताए जा रहे हैं।घटना की सूचना मिलते ही 112 और 108 की टीम मौके पर पहुंची और घायल को उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया। सूचना पर डौंडी पुलिस भी मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी।पुलिस द्वारा अज्ञात वाहन की तलाश की जा रही है। वाहन चालक टक्कर मारने के बाद मौके से फरार हो गया। पुलिस मामले में आगे की कार्रवाई कर रही है।

नशीली गोलियों और गांजे की लत बना रही है बस्तर के युवाओं को मनोरोगी

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सिरफिरों ने कर रखा है शहरवासियो की नाक में दम

अर्जुन झा

जगदलपुर नशीली गोलियों, कैप्सूल्स और गांजे की लत बस्तर के युवाओं को मनोरोगी बना रही है। नशेड़ी युवा उल जलूल हरकतें करते रहते हैं। जगदलपुर शहर में आजकल मानसिक रूप से अस्वस्थ लोगों की तादाद काफी बढ़ गई है।ऐसे लोगों को कोतवाली थाना तथा नगर पुलिस अधीक्षक कार्यालय के आसपास लगने वाली चाय और फल दुकानों के नजदीक अजीबो गरीब हरकतें करते देखा जा सकता है। इन लोगों ने संभ्रांत शहरवासियों की नाक में दम कर रखा है।

दरअसल सल्फी, ताड़ी और महुआ शराब पीकर मस्त लेकिन संयमित रहने वाले बस्तर के लोग अपना घरेलू कामकाज, खेती बाड़ी तथा वनोपज संग्रह में लीन रहा करते थे। सल्फी और ताड़ी पाचक एवं शरीर को शीतलता प्रदान करने वाले पेय माने जाते हैं। मगर अब कई बस्तरिहा युवा इन परंपरागत पेय पदार्थों से इतर जाकर आधुनिक नशा करने लगे हैं। वे नाइट्रोवेट-10 जैसी नशीली गोलियों, कैप्सूल्स, कफ सिरप, गांजा आदि का जमकर इस्तेमाल कर रहे हैं। नाइट्रोवेट-10 और अन्य नशीली गोलियां, सिरप तथा कैप्सूल मनो मस्तिष्क पर बेहद प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं। इनका असर ऐसा होता है कि नशापान करने वाला व्यक्ति अपने हाथों और चेहरों को ब्लेड, चाकू आदि से काटने लग जाता है। साथ ही वह पागलों जैसी हरकतें भी करने लगता है। इन चीजों का लगातार सेवन करने से व्यक्ति अंततः मनोरोगी और पूर्णतः पागल बन जाता है। बस्तर में नशीली दवाएं उपलब्ध कराने और इनका सेवन करने वालों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है।

यहां तक कि पड़ोसी राज्य ओडिशा से लाकर नशीली दवाएं बस्तर में खापाई जाती हैं। पुलिस ने ऐसे कई मामले पकड़े भी हैं। जगदलपुर शहर मनो विकृति वाले युवकों की संख्या में आश्चर्यजनक ढंग से वृद्धि देखने में आई है। ये लोग सड़कों, चौराहों और भीड़भाड़ वाले स्थानों पर पहुंच कर ऎसी ऎसी हरकतें करने लग जाते हैं कि आम नागरिक शर्मसार हो उठते हैं। नौकरीपेशा लोग, अखबारी पेशे से जुड़े लोग, कामकाजी महिलाएं जो रोज चाय दुकान में चाय लेने अथवा फल दूध खरीदने आती है इनकी हरकतों से काफी परेशान हैं। ये लोग हल्ला करने और जबरदस्ती पैसे मांगने जैसी हरकत तो करते ही हैं, जबरन छीना झपटी भी करने पर भी आमादा हो जाते हैं। लोगों ने मांग की है ऐसे लोगों को यहां से दूर विस्थापित किया जाए, ताकि स्त्री पुरुष अपनी रोजमर्रा की दिनचर्या निर्विघ्न पूरी कर सकें।

अंतरजिला दोपहिया वाहन चोर गिरफ्तार, चोरी की 2 बाइक और एक्टिवा बरामद

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बालोद। मोटरसायकल चोरी के मामलों में बालोद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए एक अंतरजिला दोपहिया वाहन चोर को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से चोरी की दो मोटरसायकल और एक एक्टिवा सहित कुल तीन दोपहिया वाहन बरामद किए हैं। कार्रवाई में सायबर सेल बालोद के साथ थाना अर्जुन्दा और गुण्डरदेही पुलिस की महत्वपूर्ण भूमिका रही।


पुलिस के अनुसार, 24 अगस्त 2026 को अर्जुन्दा में एक मकान के सामने खड़ी मोटरसायकल क्रमांक CG 07 BP 7301 चोरी हो गई थी। इस मामले में थाना अर्जुन्दा में अपराध क्रमांक 135/2026 के तहत धारा 303(2) बीएनएस में मामला दर्ज किया गया था। इसी दिन बालोद जिला न्यायालय के पास से फैशन प्रो मोटरसायकल क्रमांक CG 24 F 5368 भी चोरी हुई थी, जिस पर थाना बालोद में अपराध क्रमांक 445/2026 के तहत मामला दर्ज किया गया।
मामलों को गंभीरता से लेते हुए पुलिस अधीक्षक बालोद किरण चव्हाण के निर्देशन में विशेष टीम गठित कर चोरी गए वाहनों और आरोपियों की पतासाजी शुरू की गई। टीम ने सीसीटीवी फुटेज का बारीकी से विश्लेषण कर संदेही की पहचान की।


पुलिस ने उमेश यादव उर्फ सन्नाटा (40 वर्ष), निवासी वार्ड क्रमांक 56, एसटीएफ बघेरा, हाई स्कूल के पास, थाना सिटी कोतवाली दुर्ग को पकड़ा। पूछताछ में आरोपी ने बताया कि 20 अगस्त को दुर्ग जेल से रिहा होने के बाद उसने 23-24 अगस्त की दरम्यानी रात अर्जुन्दा से एक मोटरसायकल चोरी की। इसके बाद 24 अगस्त को बालोद जिला न्यायालय के पास से दूसरी मोटरसायकल चोरी की। इसके बाद धमतरी से कुरूद जाकर एक एक्टिवा चोरी कर वह अर्जुन्दा क्षेत्र स्थित अपने ससुराल जा रहा था, तभी पुलिस ने उसे चोरी के वाहनों सहित पकड़ लिया।
आरोपी की निशानदेही पर पुलिस ने दो मोटरसायकल और एक एक्टिवा समेत तीन चोरी के दोपहिया वाहन जब्त किए हैं।
पुलिस के अनुसार आरोपी के विरुद्ध पूर्व में भी चोरी के कई मामले दर्ज हैं। इनमें राजनांदगांव, दुर्ग, बालोद और रनचिरई थाना क्षेत्रों में दर्ज आठ आपराधिक प्रकरण शामिल हैं।


इस कार्रवाई में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक चंद्रकांत गवर्ना, एसडीओपी बालोद विनय कुमार साहू, एसडीओपी गुण्डरदेही श्रुति सिंह के मार्गदर्शन में थाना अर्जुन्दा, थाना गुण्डरदेही एवं सायबर सेल बालोद की टीम का विशेष योगदान रहा।

रक्षाबंधन पर पर्यावरण की रक्षा का संकल्प, बहनों को उपहार में भेंट किए पौधे

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: दल्ली राजहरा, ब्लॉक – डौंडी, जिला – बालोद (छ.ग.)रक्षाबंधन भाई-बहन के अटूट प्रेम और विश्वास का पर्व है। इस पावन पर्व को पर्यावरण संरक्षण के संदेश के साथ मनाते हुए दल्ली राजहरा निवासी पर्यावरण प्रेमी प्रदीप साहू एवं साहू परिवार ने एक प्रेरणादायी पहल की।इस अवसर पर प्रदीप साहू, सतीश साहू, उमाशंकर साहू, आशीष साहू, बहन पूजा साहू, गोरीमा साहू सहित साहू परिवार के सभी सदस्यों ने एकत्रित होकर बहन की रक्षा के साथ-साथ पर्यावरण की रक्षा का भी संकल्प लिया।परिवार ने इस परंपरा को नया रूप देते हुए इस रक्षाबंधन पर बहनों को उपहार के रूप में फलदार एवं छायादार पौधे भेंट किए। बहनों ने इस अनोखे उपहार को हर्षपूर्वक स्वीकार किया और संकल्प लिया कि वे इन पौधों का विधिवत रोपण कर, उनकी देखभाल कर उन्हें वृक्ष बनने तक संरक्षित करेंगी।

इस अवसर पर पर्यावरण प्रेमी प्रदीप साहू ने कहा कि आज ग्लोबल वार्मिंग, क्लाइमेट चेंज और लगातार बढ़ रहा तापमान पूरी मानवता के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। ग्लेशियरों का तेजी से पिघलना, हाल ही में नेपाल में आया जल प्रलय इसी का परिणाम है। इसे रोकने का सबसे सरल और प्रभावी उपाय अधिक से अधिक वृक्षारोपण है।उन्होंने कहा, “जैसे एक भाई अपनी बहन की रक्षा का वचन देता है, वैसे ही हम सभी को एक पौधे को अपना कर उसकी रक्षा का वचन लेना चाहिए। यही सच्चे अर्थों में धरती माता की रक्षा होगी।”साहू परिवार की इस पहल की डौंडी ब्लॉक और दल्ली राजहरा क्षेत्र में सराहना हो रही है और यह संदेश दे रही है कि त्योहारों को यदि पर्यावरण से जोड़ा जाए तो उसका महत्व कई गुना बढ़ जाता है।प्रेषक:प्रदीप साहू, पर्यावरण प्रेमीदल्ली राजहरा, डौंडी, जिला – बालोद

रक्षाबंधन पर डीआरजी जवानों की कलाई पर सजा विश्वास का धागा, आत्मसमर्पित बहनों ने बांधी राखी

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नारायणपुर रक्षाबंधन का पावन पर्व शुक्रवार को नारायणपुर के डीआरजी परिसर में भावनात्मक और आत्मीय माहौल के बीच मनाया गया। इस अवसर पर हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौट चुकी आत्मसमर्पित महिला माओवादियों ने डीआरजी जवानों को राखी बांधकर भाई-बहन के रिश्ते को नया आयाम दिया। कार्यक्रम ने बदलते बस्तर में विश्वास, भाईचारे और सामाजिक समरसता का संदेश दिया।राखी बांधने के दौरान आत्मसमर्पित महिलाओं ने पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार पटेल, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अक्षय साबद्रा, अजय कुमार एवं ऐश्वर्य चंद्राकर, उप पुलिस अधीक्षक अजय सिंह, अविनाश कंवर, मनोज मंडावी एवं आशीष नेताम, रक्षित निरीक्षक मोहसिन खान तथा थाना प्रभारी नारायणपुर विनीत दुबे की कलाई पर भी रक्षा-सूत्र बांधकर अपना स्नेह और विश्वास व्यक्त किया।

कार्यक्रम के दौरान पुलिस अधिकारियों, जवानों और आत्मसमर्पित महिला नक्सलियों के बीच आत्मीय संवाद देखने को मिला। बहनों ने जवानों को मिठाई खिलाकर रक्षाबंधन की शुभकामनाएं दीं, वहीं पुलिस परिवार ने भी उनके सुरक्षित एवं सम्मानजनक भविष्य की कामना की।पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार पटेल ने कहा कि रक्षाबंधन केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि विश्वास, सम्मान और सुरक्षा के संकल्प का प्रतीक है। मुख्यधारा में लौटे लोगों को अपनत्व और सम्मान देना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि नारायणपुर पुलिस सुरक्षा के साथ-साथ समाज में विश्वास और भाईचारे का वातावरण मजबूत करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।डीआरजी परिसर में आयोजित यह कार्यक्रम बदलते बस्तर की नई तस्वीर बनकर उभरा, जहां कभी हिंसा और भय का माहौल था, वहीं अब विश्वास, शांति और विकास की भावना मजबूत हो रही है। आत्मसमर्पित महिला नक्सलियों द्वारा जवानों और अधिकारियों को राखी बांधने का यह दृश्य उपस्थित लोगों के लिए भावुक और प्रेरणादायक रहा।कार्यक्रम के अंत में सभी ने एक-दूसरे को रक्षाबंधन की शुभकामनाएं देते हुए शांति, सुरक्षा और उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

धारदार वस्तु से हमला करने वाला आरोपी गिरफ्तार, न्यायिक रिमांड पर जेल भेजा

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दल्लीराजहरा। आईटीआई दल्लीराजहरा के पास रास्ता खाली करने की बात कहने पर युवक से विवाद कर धारदार वस्तु से हमला करने के मामले में राजहरा पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है।पुलिस के अनुसार, वार्ड क्रमांक 20 गांधी चौक निवासी केतन चालकी (27) अपने भाई योगेश चालकी के साथ 26 अगस्त को शराब दुकान की ओर गया था। वापस लौटते समय आईटीआई राजहरा के पास लोकेश दास अपने कुछ साथियों के साथ सड़क पर खड़ा होकर विवाद कर रहा था। रास्ते में आवागमन में परेशानी होने पर केतन ने रास्ता खाली करने के लिए कहा। इसी बात पर लोकेश दास आक्रोशित हो गया और गाली-गलौज करते हुए जान से मारने की धमकी देने लगा। आरोप है कि इसके बाद उसने धारदार वस्तु से केतन की दाहिनी भुजा पर वार कर चोट पहुंचाई।घटना की रिपोर्ट पर थाना राजहरा में धारा 296, 351(3), 115(2) एवं 118(1) बीएनएस के तहत अपराध दर्ज किया गया।पुलिस अधीक्षक बालोद किरण चौहान एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक चंद्रकांत गवर्ना के निर्देशन तथा नगर पुलिस अधीक्षक राजहरा विकास पाटले के मार्गदर्शन में थाना राजहरा पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपी लोकेश दास मानिकपुरी (27), निवासी वार्ड क्रमांक 19, दल्लीराजहरा को अभिरक्षा में लिया। पुलिस ने घटना में प्रयुक्त धारदार वस्तु भी जप्त की है। आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल दाखिल किया गया।

अबूझमाड़ की लौटती धड़कन: घोटुलों में फिर गूंजने लगी मांदर की थाप

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नारायणपुर सुनील कथूरिया सूरज जैसे ही अबूझमाड़ की पहाड़ियों के पीछे ढलता है, जंगलों के बीच बसे गांवों में एक परिचित ध्वनि फिर सुनाई देने लगती है। यह किसी वाहन की आवाज नहीं, किसी सरकारी घोषणा का शोर नहीं और न ही किसी संघर्ष की आहट है। यह है मांदर की थाप—वह थाप जो पीढ़ियों से यहां के आदिवासी जीवन की धड़कन रही है।एक समय था जब शाम ढलते ही गांवों पर सन्नाटा उतर आता था। लोग जल्दी घर लौट आते थे, रास्ते सुनसान हो जाते थे और सार्वजनिक स्थानों पर जुटना जोखिम भरा माना जाता था। लेकिन आज तस्वीर बदल रही है। अबूझमाड़ के कई गांवों में घोटुल फिर आबाद हो रहे हैं। चेलिक और मोटियारिनों की टोलियां पारंपरिक वेशभूषा में गीत गाती हैं, मांदर की लय पर कदम थिरकते हैं और सामूहिक उल्लास का वातावरण बनता है।यह बदलाव केवल सांस्कृतिक गतिविधियों की वापसी नहीं है, बल्कि उस समाज के आत्मविश्वास की वापसी है जिसने वर्षों तक हिंसा, भय और अनिश्चितता का दौर देखा।*घोटुल: केवल एक भवन नहीं, संस्कृति की पाठशाला*बस्तर और अबूझमाड़ की आदिवासी संस्कृति में घोटुल का विशेष महत्व है। यह केवल युवाओं के मिलने-जुलने का स्थान नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक शिक्षा का केंद्र है। यहां नई पीढ़ी लोकगीत, नृत्य, रीति-रिवाज, अनुशासन, सामुदायिक जीवन और अपनी सांस्कृतिक पहचान को सीखती है।घोटुलों में गूंजने वाले गीत केवल मनोरंजन नहीं होते। उनमें जंगल, नदी, पहाड़, खेती, ऋतु परिवर्तन, प्रेम, संबंध और जीवन के अनुभवों की कथाएं समाहित रहती हैं। मांदर और पारंपरिक वाद्यों की धुन इन कथाओं को जीवंत बना देती है।इसीलिए जब घोटुलों की रौनक लौटती है तो उसका अर्थ केवल नृत्य और संगीत का लौटना नहीं होता, बल्कि पूरी सांस्कृतिक विरासत का पुनर्जीवन होता है।*भय से भरोसे तक का सफर*अबूझमाड़ लंबे समय तक नक्सल हिंसा और सुरक्षा चुनौतियों का केंद्र बना रहा। संघर्ष का प्रभाव केवल सुरक्षा व्यवस्था तक सीमित नहीं रहा, बल्कि गांवों के सामाजिक जीवन पर भी पड़ा।ग्रामीण बताते हैं कि एक दौर ऐसा था जब शाम होते ही लोग अपने घरों में सिमट जाते थे। सार्वजनिक आयोजनों, त्योहारों और सामूहिक कार्यक्रमों में भागीदारी कम हो गई थी। कई गांवों में घोटुलों की गतिविधियां लगभग थम गई थीं।लेकिन हाल के वर्षों में सुरक्षा अभियानों और नक्सल प्रभाव में कमी के बाद परिस्थितियां धीरे-धीरे बदलने लगी हैं। गांवों में आवाजाही बढ़ी है, सामाजिक गतिविधियां फिर शुरू हुई हैं और लोगों के भीतर भरोसा लौटा है। इसी भरोसे की सबसे सुंदर झलक घोटुलों में दिखाई दे रही है।*शाम का नया अर्थ*आज अबूझमाड़ के कई गांवों में शाम का मतलब सन्नाटा नहीं, बल्कि उत्सव है।जैसे ही दिन ढलता है, युवा घोटुल की ओर बढ़ते हैं। मांदर की पहली थाप के साथ वातावरण जीवंत हो उठता है। युवतियां और युवक पारंपरिक नृत्य में शामिल होते हैं। गीतों की स्वर लहरियां दूर तक फैलती हैं। बुजुर्ग बैठकर इस दृश्य को देखते हैं और उनके चेहरे पर संतोष झलकता है।उनके लिए यह केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि अपनी पहचान को फिर से जीवित होते देखने का सुख है।*संस्कृति की वापसी, सामान्य जीवन की वापसी*ग्रामीणों के लिए शांति का अर्थ केवल हिंसा का कम होना नहीं है। इसका अर्थ है खेतों तक निर्भय पहुंचना, बच्चों का स्कूल जाना, बाजारों में चहल-पहल बढ़ना, त्योहारों का खुले मन से आयोजन और सामुदायिक जीवन का फिर से सक्रिय होना।घोटुलों में लौटती भीड़ इसी सामान्य जीवन की वापसी का प्रतीक बन गई है।यहां जुटने वाले युवा केवल गीत और नृत्य नहीं सीख रहे, बल्कि अपनी जड़ों से जुड़ रहे हैं। वे उस सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी भी निभा रहे हैं, जो पीढ़ियों से उनके समाज की पहचान रही है।*केवल सुरक्षा नहीं, विकास भी जरूरी*हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि इस सांस्कृतिक पुनर्जागरण को स्थायी बनाने के लिए केवल सुरक्षा पर्याप्त नहीं होगी।शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, सड़क, संचार और युवाओं के लिए अवसरों का विस्तार भी उतना ही आवश्यक है। साथ ही आदिवासी समाज की परंपराओं और सांस्कृतिक संस्थाओं का सम्मान करते हुए उनके संरक्षण और संवर्धन पर विशेष ध्यान देना होगा।स्थानीय बुजुर्गों का अनुभव और युवाओं की भागीदारी मिलकर इस सांस्कृतिक पुनर्जीवन को और मजबूत बना सकती है।*मांदर की थाप में छिपा संदेश*अबूझमाड़ के घोटुलों में गूंजती मांदर की थाप केवल एक वाद्य की आवाज नहीं है। यह उस क्षेत्र की बदलती कहानी का संगीत है।यह उन गांवों की उम्मीद है जिन्होंने लंबे समय तक भय और संघर्ष का सामना किया। यह उन युवाओं का उत्साह है जो अपनी सांस्कृतिक पहचान को फिर से जी रहे हैं। यह उन बुजुर्गों की खुशी है जो अपनी परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचते देख रहे हैं।आज जब अबूझमाड़ की शामों में मांदर की थाप गूंजती है, तो वह केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं होता। वह एक संदेश भी होता है—कि जीवन अपनी स्वाभाविक लय में लौट रहा है, कि संस्कृति फिर सांस ले रही है और कि अबूझमाड़ अपनी पहचान के साथ एक नई सुबह की ओर बढ़ रहा है।घोटुलों की लौटती रौनक दरअसल अबूझमाड़ की लौटती मुस्कान है।

रक्षाबंधन से पहले महतारी वंदन की 31वीं किस्त से महिलाओं में खुशी

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नारायणपुर रक्षाबंधन पर्व से पहले मुख्यमंत्री विष्णु देव साय द्वारा महतारी वंदन योजना की 31वीं किस्त महिलाओं के खातों में जारी किए जाने से हितग्राहियों में खुशी का माहौल है। नारायणपुर की हितग्राही विनिशा उसेंडी ने मुख्यमंत्री का आभार जताते हुए कहा कि योजना से मिलने वाली राशि परिवार की दैनिक जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण सहयोग दे रही है।उन्होंने बताया कि हर माह मिलने वाली आर्थिक सहायता से घरेलू खर्च, आवश्यक सामान और अन्य छोटी-बड़ी जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलती है। उनके अनुसार यह योजना महिलाओं की आर्थिक निर्भरता कम करने के साथ-साथ आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता भी बढ़ा रही है।विनिशा उसेंडी ने कहा कि रक्षाबंधन जैसे पावन पर्व से पहले किस्त जारी होना महिलाओं के लिए खुशी और सम्मान का विषय है। उन्होंने महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए उम्मीद जताई कि ऐसी जनकल्याणकारी योजनाएं आगे भी जारी रहेंगी।

मासूम के लिए देवदूत बना आईटीबीपी जवान, रक्तदान कर बचाई जान

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नारायणपुर जिला अस्पताल में भर्ती 4 वर्षीय मासूम पंकज सलाम को तत्काल B+ रक्त की आवश्यकता थी। बच्चे की गंभीर स्थिति की जानकारी मिलने पर 45वीं वाहिनी आईटीबीपी के सेनानी राजीव गुप्ता के निर्देश पर आरक्षक एम. अरविंद ने आगे आकर स्वेच्छा से एक यूनिट रक्तदान किया।समय पर रक्त मिलने से मासूम के उपचार में सहायता मिली और परिजनों ने राहत की सांस ली। आईटीबीपी जवान की इस मानवीय पहल की क्षेत्र में सराहना हो रही है। परिजनों ने आरक्षक एम. अरविंद एवं 45वीं वाहिनी आईटीबीपी के प्रति आभार व्यक्त किया।

जर्जर पुलिया बनी हादसों का खतरा, प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल

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दल्ली राजहरा। श्रमवीर चौक के समीप स्थित जर्जर पुलिया अब हादसे को खुला न्योता देती नजर आ रही है। पुलिया की खस्ताहाल हालत, सुरक्षा इंतजामों की अनदेखी और भारी वाहनों की बेरोकटोक आवाजाही के बावजूद जिम्मेदार विभाग आंखें मूंदे बैठे हैं। हाल ही में तेज रफ्तार ट्रक की चपेट में आने से एक वृद्ध महिला की मौत की घटना ने प्रशासनिक लापरवाही की गंभीरता को उजागर कर दिया है। सवाल यह है कि किसी बड़े हादसे का इंतजार आखिर कब तक किया जाएगा?बताया जाता है कि स्थानीय जनप्रतिनिधियों की मांग पर पूर्व में बीएसपी प्रबंधन द्वारा पुलिया की मरम्मत कराई गई थी।

भारी वाहनों को रोकने के लिए संकेतक बोर्ड और बैरिकेड भी लगाए गए थे। रविवार के साप्ताहिक बाजार के दौरान भीड़ को देखते हुए कुछ समय के लिए मार्ग खोलने की व्यवस्था थी, लेकिन धीरे-धीरे यह अस्थायी व्यवस्था स्थायी लापरवाही में तब्दील हो गई।जिन स्थानों पर भारी वाहनों को रोकने के लिए बैरिकेड लगाए गए थे, वहां अब प्रभावी रोकथाम नजर नहीं आती। नतीजतन भारी वाहन लगातार पुलिया से गुजर रहे हैं। पुलिया का कमजोर होता ढांचा और उस पर दौड़ते भारी वाहन किसी बड़े हादसे की आशंका को और बढ़ा रहे हैं।सबसे गंभीर स्थिति यह है कि यह मार्ग टाउनशिप क्षेत्र में आता है और यहां से स्कूली बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों और स्थानीय नागरिकों की लगातार आवाजाही होती है। ऐसे में सुरक्षा व्यवस्था में थोड़ी सी भी चूक जानलेवा साबित हो सकती है।घटना के बाद नागरिकों और व्यापारियों में प्रशासन के प्रति नाराजगी है। नगर पालिका अध्यक्ष तोरण साहू एवं उपाध्यक्ष मनोज दुबे (पिंटू) ने मौके पर पहुंचकर पुलिया की स्थिति का निरीक्षण किया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि लोगों की सुरक्षा के साथ किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने बीएसपी प्रबंधन से तत्काल चर्चा कर स्थायी बैरिकेड लगाने तथा भारी वाहनों के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की बात कही।हादसे के बाद भी नहीं जागा प्रशासनस्थानीय लोगों का कहना है कि जब पुलिया की स्थिति पहले से जर्जर है और यहां दुर्घटना में एक महिला की जान जा चुकी है, तो फिर जिम्मेदार विभाग किसी और हादसे का इंतजार क्यों कर रहे हैं? लोगों की मांग है कि पुलिया का पूर्ण जीर्णोद्धार होने तक भारी वाहनों की आवाजाही तत्काल बंद की जाए और मजबूत स्थायी बैरिकेड लगाए जाएं।नागरिकों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते सुरक्षा के ठोस इंतजाम नहीं किए गए तो भविष्य में होने वाले किसी बड़े हादसे की जिम्मेदारी आखिर किसकी होगी? अब जरूरत सिर्फ आश्वासन की नहीं, बल्कि तत्काल कार्रवाई की है।

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