रायपुर। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा है कि मतांतरण व धर्मांतरण रोकने के लिए जन जागरण अभियान चलाये जाने की जरूरत है और इसके लिए स्वयं आदिवासी समाज को आगे आने की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री बघेल ने यह भी दोहराया है कि पेशा कानून का हो-हल्ला मचाया जाता है किंतु इसके लिए ड्राफ्ट तैयार नहीं किया जा रहा जिसके कारण वह अमलीजामा नहीं पहन रहा है यदि मसौदा सामने लाएं तो इस मुद्दे को सरकार तुरंत सुलझा लेगी।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बस्तर संभाग के आदिवासियों को भोजन हेतु अपने निवास में आमंत्रित किया था।उससे पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आदिवासी समाज के लोगों से उनके क्षेत्र की समस्यायों को सूना था जिसमें धर्मांतरण पूर्व मतांतरण की बातें सामने आई थी जिसके लिए कई तर्क दिया गया था जिस पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने स्पष्ट रूप से कहा कि मतांतरण व धर्मांतरण रोकने के लिए सभी सामाजिक संगठनों को अपने -अपने समाज की बैठकों में यह बात रखनी होगी और निर्धन लोगों की मदद के लिए हाथ बढ़ाना होगा जिससे वह राह नहीं भटके। इस दौरान कई मांगें भी सामने आई जिसे जल्द से जल्द पूरा करने का भरोसा दिलाया। आदिवासी समाज से आए प्रतिनिधि मंडल ने राज्य सरकार की की महत्त्वपूर्ण योजनाओं को सराहा।
सिलगेर के लोग नौकरी व पैसे नहीं चाहते हैं इंसाफ
सिलगेर , धर्मांतरण, पेशा कानून जैसे मुद्दों पर राजनीति करने वाले लोगों को बिना नाम लिए लताड़ लगाई है। उन्होंने कहा कि धर्मांतरण पर बेवजह गाल बजा रहा है जबकि भाजपा के पंद्रह वर्षों के कार्यकाल में जमकर धर्मांतरण हुआ। वहीं पेशा कानून तय करने की कमेटी वाले भी सोए हुए हैं जिससे अनावश्यक बखेड़ा खड़ा हुआ है। सिलगेर मुद्दे पर उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ ही नहीं वरन् यह पहली सरकार है जो सिलगेर तक अपनी जान जोखिम में डालकर गई। सरकार ने पहल कर उनके परिवार से चार बार बातें की। पीड़ित परिवार को नौकरी देने व मुआवजा देने की बात हुई किंतु वह लोग सिर्फ और सिर्फ मृतकों को इंसाफ मिले वह एक बात में कायम हैं। सिलगेर सहित इस मुद्दे पर राजनीति बर्दाश्त नहीं।
केशकाल । छत्तीसगढ़ राज्य की पिछली सरकार ने आनन फानन में ग्राम पंचायत – बिश्रामपुरी को नगरपंचायत -बिश्रामपुरी बना दिया और जब इसके खिलाफ स्थानिय लोगों ने जबरर्दस्त विरोध करते आंदोलन करना आरंभ कर दिया तो आनन फानन में नगरपंचायत को विघटित कर दिया। किसी नगरपंचायत को विघटित कर फिर से ग्राम पंचायत बना देने और उसके बाद उस ग्रामपंचायत-नगरपंचायत का विभाजन कर उसे 5 ग्राम पंचायत बना देने का यह अपने आप में अनूठा मामला रहा। पिछली सरकार के द्वारा राजनीतिक लाभ हानि के उद्देश्य से नगरपंचायत -ग्राम पंचायत बना देने के इस फैसले का दुष्प्रभाव पूरे क्षेत्रवासियों को आज भी भोगना पड़ रहा है। नवगठित ग्राम पंचायत के ग्रामवासियों और उनके द्वारा चुने गये पंच उपसरपंच सरपंच द्वारा शासन प्रशासन से अन्य ग्राम पंचायतों को मिलने वाले आबंटन एवं सुविधा की भांति आबंटन प्रदान करने की मांग लगातार लम्बे अरसे से किया जा रहा है पर अभी तक सुधि नहीं लिया गया । जिस उपेक्षा के चलते पंचायत भवन आंगन बाड़ी भवन विहीन नवगठित ग्राम पंचायत के लोगों को न आवास योजना का लाभ मिल पा रहा है और न जरूरतमंद वृद्ध -नि:शक्त-दिव्यांग- विधवा-परित्यक्ता को पात्रता होने के बावजूद पेंशन का लाभ ही मिल पा रहा है।मात्र मूलभूत मद की राशि के भरोसे अपने अस्तित्व को बचाये बनाये रखने वाले ग्राम पंचायतों के पंचायत पदाधिकारी और ग्रामवासी बहुत दुखी और आक्रोशित हैं। उल्लेखनीय है कि -बडेराजपुर ब्लाक के ग्राम पंचायत बिश्रामपुरी को डां रमनसिंह के नेतृत्व वाली पिछली भाजपाई सरकार ने नगरपंचायत बनवा दिया था और उसके खिलाफ आवाज आंदोलन उठने के चलते उसे विघटित कर फिर से ग्राम पंचायत बना दिया था। जिसके बाद ग्राम पंचायत बिश्रामपुरी को विभाजित करते हुए ग्राम पंचायत -बिश्रामपुरी (अ),ग्राम पंचायत-बिश्रामपुरी (ब),ग्राम पंचायत-बिरापारा,ग्राम -पंचायत-जिरा पारा,ग्राम पंचायत -खरगांव बना दिया गया। इस विभाजन पर नवगठित ग्राम पंचायत – बिश्रामपुरी के लोगों को सबसे कड़ी आपत्ति है जो आज भी कायम है। इनका कहना है की हमारे नवगठित पंचायत का ठिक से आजतक सीमांकन कर सरहद तक तय नहीं किया गया है। हमारे ग्राम पंचायत में नवीन शाला भवन बनाने तक के लिए जमीन तक नहीं बच गया है। ग्राम पंचायत -बिश्रामपुरी के लोग इतने खफा हैं की ग्राम पंचायत के आम चुनाव में कोई भी प्रत्याशी पंच पद हेतु अपना नामांकन तक नहीं भरा और उपचुनाव की घोषणा होने पर भी किसी ने नामांकन नहीं भरा फलस्वरूप पंचो का पद आज भी खाली पड़ा रह गया है।बड़े आश्चर्य की बात है की शासन प्रशासन के जवाबदेह पद पर बैठे किसी भी सक्षम अधिकारी द्वारा अभी तक नवगठित इन पांचों ग्रामपंचायतों के ग्रामवासियों और उनके पंचायत पदाधिकारियों द्वारा उठाये जाने वाले समस्या एवं मांग पर गौर करने एवं उसका निराकरण करने की पहल प्रयास तक नहीं किया गया जिससे उनकी नाराजगी कम होने की बजाय बढ़ते जा रही है।
ग्राम पंचायत खरगांव का है हाल बेहाल – नगरपंचायत -बिश्रामपुरी को विघटित कर बनाये गये 5 ग्राम पंचायत में से एक ग्राम पंचायत है खरगांव । जिसकी जनसंख्या -1363 मतदाता संख्या 883 है।
खैरात में चल रहा है पंचायत आंगनबाड़ी – नवगठित ग्राम पंचायत का आज तक खुद का भवन तक नहीं है इसलिए पंचायत सरपंच प्रभुलाल नेताम के ही घर पर लग रहा है और वो भी खैरात में ही। इस बारे में सरपंच प्रभुलाल नेताम का कहना है की क्या करूं पंचायत तो चलाना है हमारे यहां कोई शासकिय भवन नहीं है । आज तक कोई अधिकारी यह भी नहीं पूछे की पंचायत भवन कंहा कैसे चल रहा है ,भवन का किराया बिजली बिल कितना कैसे पटा रहे हो। सरपंच का कहना है की हमारे यहां ले देकर साल भर में मूलभूत मद का 35-40 हजार रूपया आता है उसमे स्टेशनरी लेते हैं और अन्य काम करते हैं पंचायत भवन का किराया और बिजली बिल जमा करने पैसा ही नहीं बचता जिसके चलते मुझे ही यह झेलना पड़ रहा है। पंचायत में दो आंगनबाड़ी संचालित है पर दोनों आंगनबाड़ी का खुद का भवन नहीं बना है ।दूसरों के घर में आंगनबाड़ी चलाया जा रहा है।
स्वीकृत आंगनबाड़ी भवन हुआ लापता – सरपंच प्रभुलाल नेताम का कहना है कि हम जब आंगनबाड़ी भवन के बारे में महिला बाल विकास अधिकारी से पूछे तो उनके द्वारा यह बताया गया की आपके यंहा के नहरपारा एवं खरगांव शीतलापारा में आंगनबाड़ी भवन बनाने धनराशि जब नगरपंचायत था तभी 2014मे पैसा स्वीकृत हो गया था । सरपंच का कहना है की नगरपंचायत के जमाने में 2004मे ही स्वीकृत आंगनबाड़ी भवन कंहा कैसे लापता हो गया और किसने लापता कर दिया यह खोज का विषय बना हुआ है।जिसके चलते लगभग 12-15वर्ष से आंगनबाड़ी दूसरे के घर में ही संचालित करना पड़ रहा है।
आवास योजना के लाभ से वंचित हैं ग्रामवासी – नवगठित पंचायत के सरपंच का पदभार 9जनवरी 2017को ग्रहंण करने वाले युवा सरपंच प्रभुलाल नेताम का कहना है कि हमारे पंचायत के पात्र आवासहिनों को केंद्र सरकार एवं राज्य सरकार के आवास योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। आवास योजना का आबंटन ही हमारे पंचायत को प्रदान नहीं किया जा रहा है। जिसके चलते आवासहीन गरीबों को हम आवास नहीं दिला पा रहे हैं |
पेंशन राहत से भी नसीब नहीं हो पा रहा है जरूरतमंदों को – ग्राम पंचायत खरगांव के सरपंच का कहना है की हम जरूरतमंद पात्र वृद्ध नि:शक्त दिव्यांग विधवा परित्यक्तता लोगों को हम पेंशन का लाभ नहीं दिला पा रहे हैं।जब भी पंचायत से पात्र पेंशनधारियों का पेंशन प्रकरंण स्वीकृत करने जनपद पंचायत भेजा जाता है तो हमसे 2011की गरीबी रेखा सर्वे सूची मांगा जाता है जिसमे जो वास्तविक में गरीब हैं जिसके कारंण पेंशन प्रकरंण स्वीकृत नहीं किया जाता जिसके चलते जरूरतमंद पात्रता रखने वालों को पेंशन नहीं मिल पा रहा है।विधवा मेहतरीन सेवा रामप्रसाद जाति राऊत उम्र-61वर्ष,गंगाबाई बेवा फूलसिंह जाति राऊत उम्र 63वर्ष फूलबासन बेवा बैसाखू जाति गोंड उम्र 45वर्ष मानकी बेवा पेकडो जाति गोंड उम्र50वर्ष सत्यवती बेवा रामचंद जाति गोंड उम्र 42वर्ष सुकनतीन बेवा बुद्धु जाति गोंड उम्र 52वर्ष जैसे अनेक लोग हैं जो पेंशन के लिए आवेदन दे देकर लंबे समय से पेंशन मिलने का इंतजार कर रहे हैं।पर हम उन्हें पेंशन नहीं दिला पा रहे हैं जिससे वो लोग हम पर अपना गुस्सा उतारते हमें श्रापते हैं की तूम लोग हमको पेंशन तक नहीं दिला सकते तो तूम लोग किस काम के। सरकारी तंत्र के उपेक्षा से आहत पंचायत वासी और पंचायत पदाधिकारी अपनी व्यथा कथा सूनाते अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाते हताश निराश हो चुके हैं अब उनके पास अब अंतिम रास्ता बच गया है सामने आकर सड़क पर उतरकर आंदोलन करने का और शायद इसी का इंतजार करते हांथ पर हांथ धरे मौन साधे बैठे तमाशबीन बनकर देख र तोहे हैं सरकार की योजनाओं के लाभ से मरहूम लोगों को हलाकान परेशान होते सब्र की परीक्षा लेते ।
अखिल भारतीय विधार्थी परिषद के तीन दिवसीय प्रदेश अभ्यास वर्ग रायगढ़ मे 17,18 व 19 सित. को संपन्न हुआ जिसमे उद्घाटन सत्र मे विधार्थी परिषद के प्रदेश अध्यक्ष अरुण गुप्ता ,प्रदेश मंत्री शुभम जायसवाल व प्रदेश संगठन मंत्री प्रदीप मेहता उपस्थित रहे वर्ग मे विधार्थी परिषद छ.ग. प्रांत की आगामी कार्य योजना तथा रूपरेखा बनायी गयी ,तीन दिवसीय प्रदेश स्तरीय वर्ग मे संगठन का विस्तार किया गया जिसमे अखिल भारतीय विधार्थी परिषद बालोद जिला के जिला संयोजक हेतु पुनः सुमित कौशिक को जिला संयोजक नियुक्त किया गया , बालोद जिला संयोजक के घोषणा होते ही जिले के अंतर्गत आने वाली सभी इकाई के अभाविप कार्यकर्ताओं मे हर्ष की लहर दौड़ गई , तथा जिला संयोजक सुमित कौशिक ने कहा कि कार्यकर्ताओं का सम्मान हमारी सबसे पहली प्राथमिकता है तथा छात्रहित व समाजहित के लिए हम सभी को मिलकर कार्य करना होगा..
जगदलपुर/बस्तर – विश्व प्रसिध्द बस्तर दशहरा की दूसरी महत्वपूर्ण रस्म डेहरी गड़ाई रस्म कि अदायगी आज सीरासार भवन में की गई. करीब 700 वर्षों से चली आ रही इस परम्परानुसार बिरिंगपाल से लाई गई सरई पेड़ की टहनियों को एक विशेष स्थान पर स्थापित किया गया. विधि विधान पूर्वक पूजा अर्चना कर इस रस्म कि अदायगी के साथ ही रथ निर्माण के लिए माई दंतेश्वरी से आज्ञा ली गई. इस मौके पर जनप्रतिनिधियों सहित स्थानीय लोग भी बडी संख्या मे मौजुद रहे इस रस्म के साथ ही विश्व प्रसिध्द दशहरा रथ के निर्माण कि प्रक्रिया आरम्भ करने के लिए लकड़ियों का लाना शुरू हो जाता है। वही बस्तर सांसद ने ये अपील की है कि पिछले 2 साल से कोविड की वजह से भीड़ को नियंत्रण कर के दशहरा संपन्न करवाया जा रहा है, उनका कहना है कि इस वर्ष भी खतरा टला नही है तीसरी लहर की आने की संभावना बनी हुई है, इस लिए इस वर्ष भी भीड़ को नियंत्रण करते हुए सभी रश्मो को निभाते हुए दशहरा सम्पन्न करवाया जाएगा।
जगदलपुर के सिरासार भवन मे आज दशहरा पर्व की दूसरी बड़ी रस्म डेरी गड़ाई की अदायगी कि गई. रियासत काल से चली आ रही इस रस्म में परम्परानुसार डेरी गड़ाई के लिए बिरिंगपाल गाँव से सरई पेड़ कि टहनियां लाई जाती हैं. इन टहनियों को पूजा कर पवित्र करने के पश्चात लकड़ियों को गाड़ने के लिए बनाये गए गड्ढों में अंडा व् जीवित मछलियाँ डाली जाती हैं. जिसके बाद टहनियों को गा़ड़ कर इस रस्म को पूरा किया जाता है इसके साथ ही माई दंतेश्वरी से विश्व प्रस्सिद्ध दशहरा रथ के निर्माण प्रक्रिया को आरम्भ करने कि इजाजत ली जाती है. मान्यताओ के अनुसार इस रस्म के बाद से ही बस्तर दशहरे के लिए रथ निर्माण का कार्य शुरू किया जाता है. करीब 700 वर्ष पुरानी इस परंपरा का निर्वाह आज भी पूर्ण विधि विधान के साथ किया जा रहा है।
रियासत काल से चली आ रही बस्तर दशहरा कि इन परम्पराओं का निर्वाह आज भी बखूभी किया जा रहा है. डेरी गड़ाई कि इस रस्म कि अदायगी के बाद परम्परानुसार माचकोट जंगलों से लाई गई लकड़ियों से रथ निर्माण का कार्य प्रारम्भ होगा। माई दंतेश्वरी के मुख्य पुजारी के अनुसार दशहरा पर्व 75 दिनों तक चलने वाला एक मात्र पर्व है और इसकी सभी रस्मे महत्वपूर्ण हैं। और अब डेरी गड़ाई के बाद काछनगादी की रस्म निभाई जाएगी जिसमे मिरगान जाती की नाबालिक बच्ची पर काछन देवी सवार होती हैं। बस्तर के राजा देवी से दशहरा पर्व मनाने की अनुमति लेते हैं जिससे बस्तर का यह पर्व निर्बाध्य रूप से मनाया जा सके।
जगदलपुर। बस्तर संभाग में आम लोगों के भावनाओं के अनुरूप मेडिकल कॉलेज अस्पताल के स्थापना के बावजूद संभाग के सबसे बड़े महारानी अस्पताल की कायाकल्प करने में छत्तीसगढ़ शासन द्वारा कोई कसर नहीं छोड़ी गई है। आम व्यक्ति एवं आदिवासी लोगों की स्वास्थ्य की रक्षा हेतु महारानी अस्पताल का वृहद कायाकल्प किया गया। इस जिला अस्पताल में स्वास्थ्य संबंधी तमाम रक्षा उपकरण का समावेश किया गया है। कई प्रकार के बीमारियों से संबंधित विशेषज्ञ डॉक्टरों का भी यहां नियुक्ति की गई है। आपात काल की 24 घंटे बेहतर सुविधा उपलब्धता के साथ ही प्रतिदिन इस अस्पताल से सैकड़ों व्यक्ति अपने स्वास्थ्य संबंधी समस्या से लाभान्वित होते हैं लेकिन शासन द्वारा कराये गए तमाम सुविधा के बावजूद इस अस्पताल की प्रशासनिक व्यवस्था इतनी बद से बदतर हो चली है कि नियमित रूप से डॉक्टरों के बैठने की व्यवस्था भी केवल सुनिश्चित ही की गई है किंतु उसका परिपालन सही ढंग से नहीं हो पा रहा है।
जानकारी के अनुसार जिला अस्पताल में सुबह आठ से लेकर दोपहर 1.00 बजे तक डॉक्टर एवं विशेषज्ञ की बैठने की व्यवस्था तय की गई थी किंतु कुछ ही डॉक्टर समय का पालन कर ओपीडी में अपना समय देते हैं। वहीं विशेषज्ञ डॉक्टर कई-कई घंटे लेट पहुंच कर केवल खानापूर्ति करने हेतु ओपीडी पहुंचते थे। चूंकि बस्तर संभाग का यह प्रमुख अस्पताल है जो शहर के बीचोबीच स्थित है। बस्तर जिले के अलावा अन्य जिलों के मरीज भी अपनी विभिन्न प्रकार की स्वास्थ्य समस्या से पीडि़त होकर यहां इलाज कराने पहुंचते हैं किंतु ओपीडी में डॉक्टरों की अनुपस्थिति अथवा लेटलतिफी के कारण वे अपना इलाज करा पाने में असमर्थ हो जाते हैं। सरकार बदलने के साथ ही वर्तमान कांग्रेस की सरकार के स्वास्थ्य विभाग द्वारा महारानी अस्पताल में कई परिवर्तन कर लोगों को स्वास्थ्य सुविधा सुचारू रूप से सुलभ कराने हेतु प्रयास किए गए हैं। 100 बिस्तर के अस्पताल को 200 बिस्तर अस्पताल में परितवर्तित करने की घोषणा भी की गई है। इसके लिए सही प्रकार के साजो-सामान की उपलब्धता भी करा दी गई है किंतु लचर प्रशासनिक व्यवस्था के कारण चिकित्सक मरीजों के लिए निर्धारित समय को निकाल नहीं पा रहे हैं। अक्सर यह देखा जा रहा है कि प्रशिच्छु़ चिकित्सक के सहारे इस अस्तपाल के ओपीडी व्यवस्था के साथ साथ ही आपातकालिन व्यवस्था को भी संभाला जा रहा है। स्त्री एवं पुरूष वार्ड में भर्ती होने वाले मरीजों को चिकित्सकों के द्वारा सही चिकित्सा न देकर उन्हें किसी न किसी बहाने मेडिकल कॉलेज भेजा जा रहा है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार महारानी अस्पताल से संबंधित विशेषज्ञ चिकित्सक अपने-अपने निजी प्रेक्टिस में इतने मशगूल रहते हैं कि उन्हें अस्तपाल के ओपीडी समय में पहुंचने का समय नहंी रहता है। जानकारी तो यह भी प्राप्त हुई है कि अस्पताल के सिविल सर्जन भी अपनी जिम्मेदारी निभा पाने में असमर्थ से दिख रहे हैं। अस्पताल सूत्रों के अनुसार ही वर्षों से जमे चिकित्सक वर्तमान अस्पताल के सिविल सर्जन की सुनते ही नहीं हैं। इसका खामियाजा अस्पताल में इलाज कराने आये मरीजों को भुगतना पड़ता है। जिला अस्पताल से संबंधित कई विभाग जैसे एमएलटी विभाग, फार्मेसी के साथ ही जुड़े हुए टेक्रिशियन एवं कर्मचारी किसी की भी नहीं सुनते हैं। बस्तरवासियों के स्वास्थ्य संबंधी समस्या का निराकरण करने हेतु प्रतिवर्ष कई करोड़ रूपए इस अस्पताल को दिए जा रहे हैं किंतु लचर प्रशासनिक व्यवस्था के कारण अस्पताल से संबंधित सिविल सर्जन विशेषज्ञ चिकित्सक एवं उनसे संबंधित विभाग के अन्य टेक्न्ििशयन एवं कर्मचारी स्वास्थ्य विभाग को धोखे में रखकर शासन द्वारा दिए जा रही राशि का दुरूपयोग कर रहे हैं। वहीं आम बस्तरवासी शासन द्वारा किए स्वास्थ्य संबंधित सुरक्षा के प्रयासों का लाभ नहीं ले पा रहे हैं।
जगदलपुर जिला बस्तर के बकावंड ब्लाक अंतर्गत मटनार गांव में लक्ष्मी माधव कुटुंब समीति द्वारा सामाजिक सरोकार के तहत् नवयुवक रामायण मण्डली मटनार को गणेश उत्सव के अवसर पर दो बड़े साईज का गैस चूल्हा और एक गैस टंकी भेंट प्रदाय किया। इस अवसर पर शत्रुघन प्रसाद जोशी, जोगेंद्र प्रसाद जोशी, मेघनाथ जोशी, नरेंद्र जोशी, तुलसी राम जोशी, गोपीनाथ जोशी व देवेश जोशी ने अपने कर कमलो से मण्डली अध्यक्ष तोबीलाल पांडे उपाध्यक्ष तेजनारायण पांडे व सदस्य ईश्वर पाण्डे को समर्पित किया।
लक्ष्मी माधव कुटुंब इससे पहले भी कोरोना संक्रमण के बचाव हेतु मुख्यमंत्री राहत कोष में पांच हजार रु.की नगद धनराशि व राम मंदिर निर्माण के लिए राम मंदिर निर्माण ट्रस्ट को 14 हजार रुपए नगद धनराशि का दान किये थे।
आज जनपद सदस्य संजय बैस के नेतृत्व में कुसुमकसा व्यापारी संघ और राम जानकी सेवा समिति के लोगो ने आज नेशनल हाइवे जो बुरी तरीके के खराब हो गया है उसे जल्द सुधारने के लिये सांकेतिक रोड के गड्ढे में बैठकर अपना धरना प्रदर्शन किये अगर जल्द इसमें कार्यवाही नही होने पर जनपद सदस्य संजय बैस ने चक्का जाम की चेतावनी दी जनपद सदस्य संजय बैस ने बताया कि पूरे बरसात के समय सड़के बदहाल है रोज दुर्घटनाये हो रही है फिर शासन प्रशासन इस ओर ध्यान नही है नेशनल हाइवे के अधिकारी आँख बंद कर तमाशा देख रही है आज तो सांकेतिक है मांग अगर जल्द नही पूरा हुवा तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा |
पिछले 10 साल से हमारे क्षेत्र में कांग्रेस का विधायक है और 5 वर्षो से मंत्री भी रहने के बाद आज कुसुमकसा दल्ली राजहरा के रोड़ की दशा ये है रोजाना हादसा होने के बाद भी शासन प्रशासन कुम्भकरण के जैसे सोई हुई है इसके विरोध में आज व्यपारी संघ कुसुमकसा का एक दिवसीय धरना दिया गया |
धरना प्रदर्शन के 24 घंटे के भीतर ही प्रशासन इसे गंभीरता से लेते हुए रोड की मरम्मत कराई गई
इस धरना प्रदर्शन में व्यापारी संघ के अधक्षय प्रकाश चंद कुचरिया राम जानकी सेवा सिमिति के अध्यक्ष वीरेंद्र सिन्हा डॉ भूपेंद्र मिश्रा संतोष जैन गांधी सिन्हा कमलकांत साहू पुष्पजीत बैस योगेश सिन्हा मोनू गुप्ता आशीष जैन दिनेश जैन पंकज जेठवानी मनीष जेठवानी गोविंदा विनोद सोनी रिंकू यादव के साथ युवा साथी उपस्तिथि रहे |
साँसद बैज ने आर्थिक मदद कर पेश की मानवता की मिसाल..
विकलांगो की मदद करना हमारी नैतिक जिम्मेदारी:-सांसद बैज..
जगदलपुर/बस्तर सांसद दीपक बैज ने एक बार फिर विकलांग युवक की मदद कर मानवता की मिसाल पेश की है… विदित हो कि श्रीकांत पाण्डे निवासी कुम्हरावन्ड् जो कि शिक्षा के क्षेत्र में डबल एम.ए. कर आगे की पढ़ाई के लिए PGDCA का कोर्स सी वी रमन यूनिवर्सिटी से करना चाहता है..जिसकी एडमिशन फीस 12.000 रुपये है,जिसे PGDCA का कोर्स करने के लिए 12.000 रुपये की जरूरत थी,जबकि 5.000 रुपये उसके पास पहले से थे,विकलांग श्रीकांत पाण्डे ने बस्तर सांसद दीपक बैज से मुलाकात कर अपनी पढ़ाई की जानकारी दी और PGDCA कोर्स में पैसों की कमी से आ रही परेशानी से अवगत कराया..जिस पर बस्तर सांसद दीपक बैज ने तत्काल 7.000 रुपये की आर्थिक सहायता राशि प्रदान की साथ ही सांसद बैज ने श्रीकांत पाण्डे को उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएं दी और आगे भी हर सम्भव मदद का आश्वासन भी दिया..
साँसद के द्वारा आर्थिक मदत मिलने के बाद पाण्डे ने कहा जिस उम्मीद से मैं यहाँ आया था वह पूरा हुआ इसके लिए श्रीकांत पाण्डे ने बस्तर सांसद दीपक बैज का धन्यवाद किया ।
विधायक जगदलपुर एवं संसदीय सचिव ( नगरीय प्रशासन एवं श्रम विभाग ) रेखचंद जैन के प्रयासों से शहर के कुम्हार पारा निवासी सुजित राय पिता नानी राय को मुख्यमंत्री स्वेच्छानुदान मद से पांच लाख रुपए की आर्थिक सहायता प्रदान की गई |
विदित हो की जगदलपुर शहर के कुम्हार पारा निवासी सुजित राय पिता नानी राय के पुत्र तुषार राय जो की ब्लड कैंसर के गंभीर बिमारी से पीड़ित थे उन्होंने विधायक जगदलपुर एवं संसदीय सचिव रेखचंद जैन के माध्यम से प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जी से इलाज हेतु आर्थिक सहायता प्रदान करने का निवेदन किया था पर इलाज के दौरान ही तुषार राय का दुखद निधन एम्स रायपुर में दिनांक 23/07/21 हो गया जिस पर परिवार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए प्रदेश के संवेदनशील मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जी ने 5 लाख रुपए की आर्थिक सहायता प्रदान करने के निर्देश दिए थे जिसका चेक आज विधायक कार्यालय में प्रदान किया गया |
आर्थिक सहायता प्राप्त होने पर सुजीत राय ने अपने परिवार सहित प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जी एवं विधायक जगदलपुर एवं संसदीय सचिव रेखचंद जैन का आभार व्यक्त करते हुए कहा की संवेदनशील मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जी ने जिस वीपरीत परिस्थितियों में उनके परिवार की आर्थिक सहायता की है उनका परिवार जीवन भर आभारी रहेगा बच्चे के इलाज कराने में उनका परिवार आर्थिक कठिनाईयों में आ गया था पर कांग्रेस की संवेदनशील सरकार की सहायता से उन्हें इस आर्थिक परेशानियों से निजात मिलेगी |
इस अवसर पर विधायक जगदलपुर एवं संसदीय सचिव रेखचंद जैन के साथ विधि विभाग के जिलाध्यक्ष अवधेश झा उपस्थित रहे |
संसदीय सचिव महापौर एवं जिलाध्यक्ष ने किया सरस्वती साईकिल वितरण योजना के तहत स्वामी आत्मानंद इंग्लिश स्कूल में 15 साईकिल का वितरण |
विधायक जगदलपुर एवं संसदीय सचिव ( नगरीय प्रशासन एवं श्रम विभाग ) रेखचंद जैन महापौर सफीरा साहू एवं शहर जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राजीव शर्मा ने शहर के स्वामी आत्मानंद इंग्लिश स्कूल में सरस्वती साईकिल वितरण योजना के तहत 15 छात्राओं को साइकिल वितरित किया |
इस अवसर पर उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए विधायक जगदलपुर एवं संसदीय सचिव रेखचंद जैन ने कहा की शिक्षा जीवन की महत्वपूर्ण पूंजी है हमारी सरकार के मुखिया यशस्वी मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जी ने छत्तीसगढ़ी के बच्चों को भी अखिल भारतीय स्तर पर शिक्षा के समान अवसर उपलब्ध कराने के लिए हर ब्लाक में स्वामी आत्मानंद इंग्लिश स्कूल आरंभ किया है इससे बस्तर जैसे आदिवासी क्षेत्रों के बच्चों को भी शिक्षा के समान अवसर उपलब्ध होंगे उन्होंने शिक्षा विभाग के अधिकारियों को बच्चों की रुचि अनुरूप सतत काउंसलिंग कर उन्हें मार्गदर्शन के निर्देश दिए उन्होंने बच्चों को प्रेरित करते हुए कहा की—
मेरे हौसलों में अभी जान बाकी है ये तो दौड़ थी अभी उड़ान बाकी है मेरी सादगी से मेरे बारे में अंदाजा मत लगाना ये तो शुरुआत भर है अभी अंजाम बाकी है ।
इस अवसर पर विधायक जगदलपुर एवं संसदीय सचिव रेखचंद जैन महापौर सफीरा साहू शहर जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राजीव शर्मा वरिष्ठ पार्षद एवं एम आई सी सदस्य कनिज फातिमा शाला विकास समिति के अध्यक्ष रामकृष्ण तिवारी नानगूर ब्लाक अध्यक्ष नीलू राम बघेल मिथिला समाज के बृजबिहारी झा,संपत झा,जीवछ झा एवं गांधी जी एवं खंड शिक्षा अधिकारी मानसिंह भारद्वाज उप खंड शिक्षा अधिकारी भारती देवांगन बीआरसी गरुड़ मिश्रा उपस्थित रहे |