ग्रामीणों ने लगाया अनियमितता का आरोप
निष्पक्ष जांच, दोषियों पर कार्रवाई की मांग –मुर्गेश कुमार शेट्ट
भोपालपटनम बीजापुर जिले की भोपालपटनम तहसील अंतर्गत वन परिक्षेत्र के बफर जोन में स्थित ग्राम उल्लूर के नेरला वागु के पास जंगल क्षेत्र में तालाब गहरीकरण एवं मेड़ मरम्मत के कार्य को लेकर ग्रामीणों ने गंभीर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि वर्ष 2026 में वन प्रबंधन समिति के माध्यम से लगभग 70 लाख रुपये की लागत से बाई चेरवु राजुला कुंठा तालाब के गहरीकरण एवं मेड़ मरम्मत का कार्य कराया गया, लेकिन कार्य में निर्धारित मापदंडों का पालन नहीं किया गया।
ग्रामीणों के अनुसार तालाब का निर्माण वर्ष 1990 के दशक में राजीव गांधी जल मिशन के अंतर्गत कराया गया था। इसके बाद भी समय-समय पर पंचायत निधि सहित अन्य मदों से तालाब के गहरीकरण एवं मरम्मत का कार्य कराया जाता रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि वर्ष 2026 में पुनः बफर जोन की वन प्रबंधन समिति द्वारा तालाब के गहरीकरण एवं मेड़ मरम्मत का कार्य कराया गया। ग्रामीणों के मुताबिक जून माह के अंतिम सप्ताह से जुलाई माह के दौरान करीब दो सप्ताह तक तालाब में काम किया गया। आरोप है कि तालाब के विभिन्न स्थानों पर जगह-जगह गड्ढे खोदकर गहरीकरण किया गया, जबकि तालाब की समुचित तकनीकी आवश्यकता एवं जल निकासी व्यवस्था को ध्यान में नहीं रखा गया। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि जिस मार्ग से पानी स्लूस गेट तक पहुंचता था, उस रास्ते को भी बंद कर दिया गया है। इसके स्थान पर किनारे से नाली खोदकर पानी की निकासी के लिए नया रास्ता बनाया गया है।ग्रामीणों का कहना है कि तालाब में स्लूस गेट के आसपास जिस तरह गहरीकरण किया गया है, उससे बारिश के बाद पानी की निकासी प्रभावित होने की आशंका है। ग्रामीणों के अनुसार यदि कार्य निर्धारित मापदंड के अनुसार किया जाता तो स्लूस गेट से पानी की निकासी सुचारू रूप से हो सकती थी। इसके अलावा तालाब से खेतों तक पानी पहुंचाने के लिए पूर्व में बनाई गई नहर, कैनाल की भी मरम्मत कराई जानी चाहिए थी। ग्रामीणों का कहना है कि यदि तालाब के साथ कैनाल की उचित मरम्मत की जाती, तो बरसात के बाद किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध होने की संभावना रहती।
गुणवत्ता और खर्च की जांच की मांग
ग्रामीणों ने तालाब गहरीकरण एवं मेड़ मरम्मत कार्य में अनियमितता का आरोप लगाते हुए कार्य की तकनीकी जांच, स्थल निरीक्षण, माप पुस्तिका एवं खर्च की गई राशि की जांच कराने की मांग की है। ग्रामीणों का आरोप है कि कार्य में वन प्रबंधन समिति से जुड़े लोगों एवं संबंधित विभाग के कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच की जानी चाहिए। ग्रामीणों का कहना है कि यदि कार्य में निर्धारित मापदंडों का पालन हुआ है तो संबंधित विभाग द्वारा मौके पर जांच कर स्थिति स्पष्ट की जाए। वहीं यदि कार्य में किसी प्रकार की अनियमितता या शासकीय राशि के दुरुपयोग की पुष्टि होती है, तो जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।ग्रामीण आत्रम नागैया, मेटा जोगाराम, मेटा जोगाराम वासम, धरमैया मेटा पेंटाराम तथा धरमैया कोरसा सहित अन्य ग्रामीणों ने संबंधित अधिकारियों से मामले की निष्पक्ष जांच कराने और जांच में दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध कार्रवाई करने की मांग की है। ग्रामीणों ने उम्मीद जताई है कि संबंधित विभाग मौके का निरीक्षण कर तालाब के गहरीकरण, मेड़ मरम्मत, स्लूस गेट तथा नहर की स्थिति की तकनीकी जांच करेगा, जिससे वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
वर्सन:
अभी आहरित नहीं हुई है राशि
तालाब मरम्मत कार्य वर्ष 2026 का है। इसकी लागत राशि मुझे नहीं मालूम है। अभी तक कोई राशि आहरण नहीं की गई है। कार्य बरसात के बाद किया जाना है।









