दल्ली राजहरा भाजपा में बंदूक कल्चर की जंग
अब आरपार की लड़ाई तक पहुंच गई है बात
अर्जुन झा
दल्ली राजहरा क्या बंदूक को लेकर कभी जंग होती देखी है आपने? बंदूक लेकर लोगों को लड़ते जरूर देखा होगा, मगर दल्ली राजहरा में बंदूक को लेकर लड़ाई हो रही है और आम लोग इस लड़ाई को मजे ले लेकर देख रहे हैं। दरअसल यहां बंदूक कल्चर को लेकर दुनिया के सबसे बड़े राजनैतिक दल भारतीय जनता पार्टी के स्थानीय नेताओं के बीच अजब सी जंग छिड़ी हुई है। भारतीय जनता पार्टी को अनुशासित सिपाहियों की बड़ी फौज माना जाता है, मगर अब इसी अनुशासित पार्टी में अनुशासन तार तार होता नजर आ रहा है। बीजेपी नेताओं के अनुशासन की तारीफ विरोधी दलों के नेता भी अक्सर करते रहते हैं, मगर अब यही विपक्षी नेता भाजपा की खिल्ली उड़ाने लगे हैं। दल्ली राजहरा में भाजपाई इस कदर निरंकुश हो चले हैं कि एक अदद “बंदूक” की खातिर लट्ठ लेकर एक दूसरे को मरने मारने पर उतारू हो गए हैं। यहां कोई किसी की नहीं सुन रहा है, सब अपनी मनमानी करने पर तुल गए हैं।
एक ही दल से होने के बावजूद कई दिनों से पालिका अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के बीच किसी मामले को लेकर शीतयुद्ध सी स्थिति बनी हुई थी, किंतु कल रात्रि घर घुस कर निर्मित की गई वाद विवाद की स्थिति ने सारे शहर में पार्टी की स्थिति को हास्यास्पद बना दिया है। राहुल गांधी की भाषा में कहें तो इसकी वजह….. है। जी नहीं जनाब इसकी वजह वो नहीं हैं। वजह है बंदूक कल्चर। दरअसल बंदूक कल्चर यानि सरकारी गनमैन लेकर चलने की रवायत सी यहां के भाजपा नेताओं में चल पड़ी है। प्रदेश के बड़े नेताओं का करीबी बनकर कुछ नेता अपने आका की कृपा से गनमैन की सुरक्षा हासिल कर चुके हैं। यह सुविधा पार्टी के अंदर ही विरोधियों को फूटी आंख नहीं सुहा रही है। ऐसे ही एक नेता ने नगर के एक नेता को मिली गनमैन सुरक्षा के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। इसके लिए बाकायदा पार्टी के अंदर हस्ताक्षर अभियान भी चलाया जा रहा है मगर इस बीच जानकारी आई कि नगर पालिका अध्यक्ष ने विरोधी नेताओं की मुहिम पर पानी फेरते हुए “खास नेताजी” की गनमैन सुरक्षा को बहाल रखने के लिए पत्र लिख दिया है। जैसे ही इसकी भनक मोर्चा खोले बैठे नेता को लगी, वे आग बबूला हो उठे। इस नेता ने आव देखा न ताव, सीधे ताव ताव में वे जा धमके नगर पालिका अध्यक्ष के निवास पर। भीतरखाने से मिली जानकारी के अनुसार इस दौरान वहां जमकर गाली गलौज हुई। सूत्र बताते हैं कि मोर्चा खोलने वाले नेता का साफ कहना है- उससे गनमैन वापस लिया जाए अन्यथा मुझे भी गनमैन उपलब्ध कराया जाए। वैसे बता दें कि गनमैन की सुविधा प्राप्त नेताजी और मोर्चा खोले बैठे नेताजी कभी लंगोटिया यार हुआ करते थे, मगर पैसे और सियासत ने अब दोनों के बीच गहरी खाई बना दी है। ऐसी स्थिति लेनदेन और कमीशनखोरी को लेकर बनी।
वहीं सूत्र बता रहे हैं कि कोई तीसरी अदृश्य शक्ति है, जो इन दोनों नेताओं को अपने कब्जे में लेकर इनको आपस में उलझा दिया है। अदृश्य शक्ति ने अपनी बंदूक के दम पर पहले अध्यक्ष को नीचा दिखाया, लेकिन अध्यक्ष ने उसकी बंदूक को उपाध्यक्ष की ओर घुमा दिया, अब वह बंदूकची उपाध्यक्ष को नाल दिखा कुरेदने का प्रयास कर रहा है। शुरू से ही उक्त बंदूकची की नाल से खेलने वाले ने मामले को समझते ही उपाध्यक्ष ने सीधे अध्यक्ष को ही उसके घर घुसकर उसको उसकी औकात दिखा दी। इधर शहर में दल की फजीहत होती देख पुराने दिग्गजों ने अपने आकाओं को इसकी सूचना दे दी है।अभी तक उपाध्यक्ष शांत है। उनका कहना है कि जब तक बंदूक वाले के पास बंदूक रहेगी तब तक मै चुप नहीं बैठूंगा, या तो उसकी बंदूक वापस ली जाए या उसे भी बंदूक दिलवाई जाए। संभवतः अब भाजपा जिला अध्यक्ष इन दोनों के बीच मान मनौव्वल करा सकते हैं।










