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कोंडागांव विधानसभा क्षेत्र में जीत को दोगुना करना है: निरंजन सिन्हा

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  •  प्रभारी और सह प्रभारी जुटे मिशन 400 पार में

जगदलपुर बस्तर लोकसभा क्षेत्र के लिए भाजपा द्वारा नियुक्त लोकसभा क्षेत्र प्रभारी महेश जैन एवं सह प्रभारी निरंजन सिन्हा व बृजमोहन देवांगन पार्टी प्रत्याशी की महेश कश्यप की जीत का अंतर बढ़ाने के लिए भरपूर मेहनत कर रहे हैं।

इन तीनों नेताओं ने कोंडागांव के अटल सदन में कोंडागांव विधानसभा क्षेत्र के सभी मंडलों के प्रभारियों, मंडल अध्यक्षो, महामंत्रियों बैठक ली। निरंजन सिन्हा ने कहा कि विधानसभा चुनाव में कोंडागांव में जो जीत मिली थी उसे लोकसभा चुनाव में दोगुना करना है और लोकसभा के प्रत्याशी महेश कश्यप को जिताकर कर दिल्ली भेजना है। महेश जैन ने कहा कि मोदी जी की गारंटी को मात्र 100 दिन में विष्णु देव साय सरकार ने पूरा कर बता दिया है कि जो भाजपा जो बोलती है, उसे वो पूरा करती है। यही मोदी जी कि गारंटी है। इस बैठक में प्रमुख रूप से हैं जितेंद्र सुराना, बालकुंवर प्रधान, चंदन कश्यप, प्रेमसिंग नाग, मीनू कोर्राम, जैनेंद्र ठाकुर, मंगतू नेताम, संजू पोयाम, मनोज साहू, महेंद्र पांडे, कृष्णा चौहान, संजू ग्वाल, दयाशंकर दीवान बसंती ठाकुर, रौनक पटेल आदि उपस्थित थे।

हार के डर से बौखला गए हैं कांग्रेस नेता: संजय पाण्डेय

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महंत व लखमा के बयान पर बिफरे भाजपा नेता संजय पाण्डेय
जगदलपुर नगर निगम जगदलपुर के नेता प्रतिपक्ष एवं वरिष्ठ भाजपा नेता संजय पाण्डेय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल करने वाले कांग्रेस नेता चरणदास महंत और पुलिस वालों को मारने पीटने की बात कहने वाले कांग्रेस नेता कवासी लखना की कड़ी निंदा की है। उन्होंने इन दोनों नेताओं की भाषाशैली को निहायत ही निचले स्तर की और अक्षम्य करार दिया है।
ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ विधानसभा के पूर्व सभापति एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता चरणदास महंत ने कुछ दिनों पहले राजनांदगांव की चुनावी सभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सिर लाठी से लाठी से फोड़ने की बात कही थी। इसके बाद डॉ. महंत ने सक्ती में आयोजित एक बैठक में प्रधानमंत्री मोदी के लिए डिफाल्टर शब्द का इस्तेमाल किया था।

वहीं पूर्व मंत्री एवं सुकमा जिले से कोंटा के विधायक एवं बस्तर लोकसभा सीट से कांग्रेस प्रत्याशी कवासी लखमा ने बीजापुर जिले के कुटरू गांव की चुनावी सभा में भाषण देते हुए ग्रामीणों को पुलिस वालों पर तीर धनुष से हमला करने के लिए उकसाया था।इन नेताओं के ऐसे बयानों पर जगदलपुर के वरिष्ठ भाजपा नेता एवं नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष संजय पाण्डेय ने कड़ी नाराजगी और आपत्ति जताई है। पाण्डेय ने कहा है कि हार के भय से अनर्गल बातें कर रहे हैं कांग्रेसी। पहले नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के सिर फोड़ने की बात कही, उसके बाद महंत ने मोदी जी के लिए बेहद ही अशोभनीय और आपत्तिजनक शब्द का उपयोग किया है। अब गुंडे मवालियों जैसी भाषा का उपयोग कवासी लखमा द्वारा किया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के प्रति अपमानजनक टिप्पणी करने वाले कांग्रेसी नेता कवासी लखमा को बस्तर की जनता कभी माफ नहीं करेगी और आने वाले लोकसभा चुनाव में बस्तर से भाजपा प्रत्याशी को विजयी बनाकर मोदी जी के अपमान का बदला लेगी। वहीं चरणदास महंत को भी सक्ती और छत्तीसगढ़ की जनता कभी माफ नहीं करेगी। संजय पाण्डेय ने कहा है कि भयभीत कांग्रेस नेता अपनी खीझ मोदी जी पर व्यक्तिगत टिप्पणी करके उतार रहे हैं। वे कितना भी सिर पीट लें, इस बार भाजपा 400 पार करके ही रहेगी।

21 साल बाद खुला प्रभु श्रीराम के मंदिर का ताला, तो खुशी से झूम उठे ग्रामीण

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  • नक्सलियों ने ताला जड़ दिया था इस मंदिर में
  •  सीआरपीएफ के जवानों ने तोड़ा ताला, सफाई भी की
    अर्जुन झा-
    जगदलपुर भगवान राम को अपनी जन्मभूमि अयोध्या से लेकर अपने ननिहाल छत्तीसगढ़ तक यंत्रणाओं से जूझना पड़ा। अयोध्या स्थित उनके प्राचीन मंदिर को जहां आक्रांता मुगल बादशाह बाबर ने ढहवा दिया था, वहीं दूसरी ओर ननिहाल छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में स्थित उनके दशकों पुराने एक मंदिर पर नक्सलियों ने ताला जड़ दिया था। ढाई दशक बाद अब जाकर इस मंदिर के पट खुल पाए हैं। जैसे ही मंदिर का ताला टूटा और दरवाजा खुला, ग्रामीण खुशी से झूम उठे।
    छत्तीसगढ़ और इस राज्य के दंडकारण्य यानि बस्तर से भगवान श्रीराम का काफी गहरा नाता रहा है। यह राज्य जहां मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु रामचंद्र का ननिहाल है, वहीं उन्होंने दंडकरण्य बस्तर में अपने वनवास के कुछ वर्ष व्यतीत किए थे। कहा जाता है कि बस्तर संभाग के सुकमा जिले के रामाराम अंचल में प्रभु श्रीराम ने वनवास के दिन गुजारे थे। रामाराम में भी भगवान राम का प्राचीन मंदिर है। इसके अलावा बस्तर संभाग में कई ऐसे स्थान हैं, जहां श्रीराम के चरण रज पड़े थे। सुकमा जिले के नक्सल प्रभावित गांव केरलापेंदा में सन 1970 में भव्य राम मंदिर बनाया गया था। इस मंदिर को सन 2003 में नक्सलियों ने फरमान जारी कर बंद करवा दिया था। मंदिर में पूजा पाठ पर रोक लगाते हुए ताला जड़ दिया गया था। लेकिन अब सीआरपीएफ के जवानों ने फिर से मंदिर की साफ- सफाई कर दरवाजे खोल दिए हैं।

गत रविवार को केरलापेंदा में सीआरपीएफ कैंप लगाकर मंदिर का ताला खोला। भगवान राम की जन्मभूमि अयोध्या में 500 वर्ष के इंतजार के बाद मंदिर में भगवान राम की प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा इसी वर्ष 22 को हुई है। कुछ ऐसा ही उत्सवी वातावरण सुकमा जिले के चिंतलनार थाना क्षेत्र के केरलापेंदा गांव में देखने को मिल रहा है। गांव कुछ लोगों ने बताया भगवान रामजी के मंदिर दशकों पहले बनाया गया था। मंदिर कब और किसने बनवाया था, इस संबंध में ग्रामीणों के पास कोई ठोस जानकारी उपलब्ध नहीं है, लेकिन गांव के बड़े बुजुर्ग बताते हैं कि उनके कई पुरखे इस मंदिर में पूजा करते आए हैं। सन 2003 में नक्सलियों ने इस मंदिर को बंद करने का फरमान सुना दिया था। कुछ ग्रामीणों ने नाम ना छापने की शर्त पर बताया कि नक्सलियों के कहने के बाद से तकरीबन 21 वर्षों से मंदिर को बंद रखा गया। पर गांव के ही एक परिवार के सदस्य रोजाना नक्सलियों से छिपते छिपाते आकर मंदिर के बाहर से ही पूजा अर्चना करते रहे। हाल ही में सीआरपीएफ और सुकमा पुलिस ने केरलापेंदा से लगे लखापाल गांव में नया कैंप खोला है। सुरक्षा बलों का कैंप खुलने के बाद जवान ग्रामीणों से उनका हाल-चाल जानने केरलापेंदा पहुंचे थे। इसी दौरान ग्रामीणों ने सीआरपीएफ जवानों को मंदिर के बारे में बताया और मंदिर को फिर से खोलने का आग्रह किया। उसके बाद सीआरपीएफ की 74वीं बटालियन के जवानों ने मंदिर परिसर में ही ग्रामीणों के लिए स्वास्थ्य जांच एवं उपचार शिविर लगाया। शिविर में दर्जनों ग्रामीणों का ईलाज कर उन्हें दवाइयां दी गईं। स्वास्थ्य शिविर के दौरान ही सीआरपीएफ के अन्य जवान मंदिर की साफ सफाई करने लगे। जवानों के साथ गांव के ग्रामीणों ने भी मंदिर की सफाई में बढ़ चढ़कर और उत्साह के साथ योगदान दिया। मंदिर परिसर और मंदिर की बाहरी दीवारों की सफाई कर मंदिर के कपाट खोले गए। जिसके बाद ग्रामीणों ने मंदिर में सामूहिक रूप से पूजा अर्चना भी की।

शिखर पर हैं हनुमान जी
केरलपेंदा गांव के भगवान राम के इस मंदिर में हनुमान जी की छवि मंदिर के शिखर पर बनाई गई है। मंदिर काफी पुराना नजर आ रहा है और मंदिर के अंदर भगवान राम, लक्ष्मण और सीता जी की संगमरमर से निर्मित प्रतिमाएं विराजमान हैं। ये प्रतिमाएं अति मनोहारी हैं। वहीं ग्रामीणों के आग्रह पर 21 वर्षों बाद मंदिर में जवानों की मौजूदगी में ग्रामीणों ने पूजा अर्चना भी की। ग्रामीणों ने सीआरपीएफ जवानों से इस मंदिर के जीर्णोद्धार कराने का आग्रह भी किया। जिस पर सीआरपीएफ अफसरों ने जल्द ही मंदिर का जीर्णोद्धार कार्य प्रारंभ कराने का आश्वासन दिया है। इस दौरान मंदिर के कपाट खुलने पर कुछ ग्रामीण ख़ुशी से झूमते नाचते हुए भी दिखाई पड़े।

500 बनाम 21 बरस
आयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए भक्तों को जहां पांच सौ वर्षो का इंतजार करना पड़ा वहीं नक्सली दंश झेल रहे सुकमा जिले के केरलापेंदा के ग्रामीणों को अपने गांव के राम मंदिर के दरवाजे खुलने के लिए 21 बरस का लंबा इंतजार करना पड़ा। ग्रामीणों ने बताया कि 1970 में मंदिर की स्थापना बिहारी महाराज द्वारा की गई थी। पूरे गांव के लोग मंदिर के लिए सीमेंट, पत्थर, बजरी, सरिया अपने सिर पर रखकर सुकमा से लगभग 80 किलोमीटर का सफर पैदल तय करके लाते थे।

संदिग्ध वाहनों एवं होटल लॉज की गई आकस्मिक चेकिंग

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बालोद एसडीओपी के नेतृत्व में थाना बालोद द्वारा रात्रि में किया गया कांबिंग गस्त लोकसभा निर्वाचन एवं बेसिक पुलिसिंग के तहत वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशानुसार रात्रि में बालोद थाना क्षेत्र के होटल एवं लॉज की आकस्मिक चेकिंग की गई l इस दौरान सड़क किनारे खड़ी अन्य जिलों एवं राज्यों के पासिंग गाड़ियों की भी चेकिंग की गई l जवाहर पारा, कुंदरूपारा ,शिकारीपापारा में कांबिंग गश्त किया गया l नगर क्षेत्र के होटल एवं लॉज का चेकिंग कर उनके एंट्री रजिस्टर आगंतुक के आधार कार्ड चेक किए गए l सभी को अनिवार्य रूप से सीसीटीवी कैमरे लगाने के संबंध में निर्देशित किया गया l होटल एवं लॉज के रजिस्टर संधारण में कमियां पाए जाने से सभी संचालकों को थाने बुलाकर मीटिंग लेकर आवश्यक दिशा निर्देश दिए गए l इस दौरान एसडीओपी बालोद देवांश सिंह राठौर, निरीक्षक बालोद रविशंकर पांडे एवं थाना बालोद के स्टाफ उपस्थित रहे l

 

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का कल जगदलपुर में रोड शो, तैयारी में जुटी भाजपा

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  • भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण देव ने कार्यकर्ताओं की ली बैठक, रूपरेखा तय
  • पीएम मोदी की सफलतम ऐतिहासिक जनसभा के लिए कार्यकर्ताओं को दी बधाई 
    जगदलपुर लोकसभा चुनाव के पहले चरण में छत्तीसगढ़ में सर्वप्रथम बस्तर लोकसभा सीट में हो रहे चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी प्रचार प्रसार में जरा सी भी कसर नहीं छोड़ना चाहती। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोमवार को बस्तर क्षेत्र छोटे आमाबाल में हुई सफलतम ऐतिहासिक जनसभा के तुरंत बाद प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय 12 अप्रैल को संभाग मुख्यालय जगदलपुर में रोड शो करेंगे। इसकी तैयारियों में भाजपा जुट गई है।
    मंगलवार को भाजपा जिला कार्यालय में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण देव ने मुख्यमंत्री  साय के प्रस्तावित रोड शो की कार्ययोजना व तमाम तैयारी को लेकर भाजपा पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं की महत्वपूर्ण बैठक ली। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष देव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बस्तर अंचल में सफलतम जनसभा के लिए कार्यकर्ताओं को बधाई देते हुए कहा कि सभी देवतुल्य कार्यकर्ताओं के अथक परिश्रम व एकजुट प्रयास से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीजी की सभा ऐतिहासिक रही। आगामी 12 अप्रैल को प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का बस्तर आगमन हो रहा है। मुख्यमंत्री जगदलपुर नगर में रोड शो करेंगे व जनता के बीच पहुंचेंगे। देव ने कहा कि बस्तर से समूचे छत्तीसगढ़ में चुनावी फिजा और वातावरण बनता है। लोकसभा चुनाव में भाजपा के प्रत्याशी महेश कश्यप भारी मतों से विजयी हो इसके लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के रोड शो में हम सभी कार्यकर्ता संपूर्ण शक्ति लगाएं। उसी अनुसार तैयारी की रूपरेखा तय करें।


लोकसभा चुनाव संयोजक श्रीनिवास राव मद्दी व भाजपा जिला अध्यक्ष रुपसिंह मंडावी ने कहा कि मुख्यमंत्री के रोड शो से शहर जनता और सभी सम्मानीय समाजों को जोड़ना है। प्रत्येक कार्यकर्ता व पदाधिकारी कार्ययोजना अनुरूप संपूर्ण ताकत लगाएं। बैठक में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नगर आगमन व रोड शो को भव्यतम बनाने चर्चा कर कार्ययोजना को अंतिम रूप दिया गया। बैठक में प्रमुख रूप से शिवनारायण पाण्डेय, विद्याशरण तिवारी, महापौर सफीरा साहू, संजय पाण्डेय, वेदप्रकाश पाण्डेय, नरसिंह राव, आलोक अवस्थी, सुरेश गुप्ता, सुधा मिश्रा, अविनाश श्रीवास्तव, अश्विन सरडे, आर्येन्द्र आर्य, मनोहर तिवारी, संग्राम सिंह राणा, दीप्ति पाण्डेय, दयावती देवांगन, त्रिवेणी रंधारी,नीलम यादव, राजेंद्र वाजपेयी, राजपाल कसेर, निर्मल देवांगन, राणा घोष, खेमसिंह देवांगन, दिगंबर राव, मोतीराम बघेल, यशवर्धन राव, शंभू नाग, महेन्द्र पटेल, नरेंद्र पाणिग्रही, बबलू दुबे, संतोष वाजपेयी, ललिता बघेल, लक्ष्मी कश्यप, माहेश्वरी ठाकुर, कुसुम परिहार, शशिनाथ पाठक, प्रकाश झा, अतुल सिम्हा सहित बडी़ संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित थे।

नगर में आम जगह पर चाकू लेकर घुमने वाले 02 आरोपी को किया गिरफ्तार

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  • आरोपियों के कब्जे से दो नग लोहे का चाकू जप्त
  • पुलिस अधीक्षक  एस. आर. भगत, के निर्देश पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अशोक कुमार जोशी जिला बालोद व नगर पुलिस अधीक्षक डॉ० चित्रा वर्मा के मार्गदर्शन में आगामी लोकसभा चुनाव के मद्देनजर नगर में शांति एवं कानून व्यवस्था ड्युटी के दौरान दिनांक 09.04.2024 को आरोपी 01. हरीश कुमार साहू पिता मनोज कुमार साहू उम्र 20 वर्ष निवासी वार्ड क्रमांक 05, 256 चौंक राजहरा द्वारा घटना स्थल 256 चौंक राजहरा में तथा आरोपी 02. परमेश्वर देवदास पिता कृष्ण कुमार देवदास उम्र 22 वर्ष साकिन वार्ड क्रमांक 23 उड़िया पारा दल्लीराजहरा द्वारा घटना स्थलं वार्ड क्रमांक 09 दास पान ठेला के पास आम जगह पर चाकू लेकर घुम रहा था जिसकी सूचना पर घटना स्थल पहुंचकर तत्काल आरोपियों के कब्जे से एक-एक नग लोहे का चाकू जप्त कर आरोपियों के विरूध्द धारा 25 आर्म्स एक्ट की कार्यवाही किया गया है, साथ ही नगर में लोकसभा चुनाव को दृष्टिगत रखते शांति व्यवस्था बनाये रखने हेतु असामाजिक तत्वों के विरूध्द लगातार कार्यवाही की जा रही है।

उक्त प्रकरणों की कार्यवाही में थाना राजहरा से सउनि विजय जगत, प्रधान आरक्षक प्रेमसिंह राजपूत, आरक्षक मनोज साहू, शेरअली की सराहनीय भूमिका रही।

नववर्ष की पूर्व संध्या दल्ली राजहरा और चिखलाकसा में 100 जगहों पर भारत माता की आरती

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  • सवा लाख दीपों से किया गया मां भरती का वंदन

दल्लीराजहरा नववर्ष की पूर्व संध्या लौह नगरी दल्ली राजहरा में 100 जगहों पर हुई भारत माता की आरती। सोमवार संध्या 7 बजे दल्ली राजहरा और चिखलाकसा शहर में 100 जगहों पर सवा लाख दीपों के साथ मां भारती की सामूहिक आरती का आयोजन सर्व समाज समरसता समिति दल्ली राजहरा द्वारा किया गया।

इस कड़ी में वार्ड नंबर 2 में तीन जगहों पर भारत माता की आरती हुई। शिव तलाब शांति नगर, गणेश चौक तथा रामनगर चौक में आरती का आयोजन किया गया।रामनगर चौक में राधेलाल निर्मलकर, भोजराम साहू, इस्तु निर्मलकर और ममता नेताम के नेतृत्व में भारत माता की आरती की गई।मातृभूमि की आरती संपन्न होने के बाद महिलाओं द्वारा ढोल मंजीरा के साथ भक्ति गीत भी गाए गए। आरती में वार्ड की मातृशक्ति सम्मिलित हुई जिनमें रंजना निर्मलकर, वेदू साहू, कमला बाई विश्वकर्मा, भगवती निर्मलकर, प्रेमबाई रावटे, सोनी, कृपाल, दिलीप कुमार, शिवराम पटेल, मंशाराम साहू, केसरी चंद्रवंशी, उर्मिला साहू, रीना शिवाने, रामबाई साहू, कविता जायसवाल तथा अन्य वार्डवासी उपस्थित थे।

देश को जोड़ने का काम करती हैं एनएसयूआई की विचारधारा : दीपक बैज

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  • संगठन के स्थापना दिवस पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने किया ध्वजारोहण 
    जगदलपुर भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन के स्थापना दिवस पर 9 अप्रैल को जगदलपुर के राजीव भवन में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज नें ध्वजारोहण किया। उपस्थित कांग्रेसजनों ने राष्ट्र गीत का गायन किया। एनएसयूआई कार्यकर्ताओं ने मिठाई का वितरण किया। समारोह को सबधित करते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि एनएसयूआई संगठन भारत का ही नहीं बल्कि दुनिया का सबसे बड़ा छात्र संगठन है, जो समय- समय पर छात्रों के अधिकारों की मांग, समस्याओं को लेकर आवाज बुलंद करता आया है। 9 अप्रैल 1971 को भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन की नींव भारत की पूर्व सशक्त महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने रखी थी। उनका इस संगठन को बनाने का उद्देश्य देश को युवा नेतृत्व प्रदान करना था।

उनकी इस दूरदर्शी सोच के कारण आज भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन से इस देश को बड़े-बड़े नेता मिले हैं। भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन तिरंगे को अपना आदर्श मानता है तथा यह एकमात्र ऐसा संगठन है, जिसकी विचारधारा इस देश को जोड़ने का काम करती है। भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन अपनी विचारधारा को घर-घर तक पहुंचा रहा है तथा देश में कट्टरपंथी सोच वाले सत्ताधारियों को उखाड़ फेंकने संकल्पित होकर काम कर रहा है। दीपक बैज ने कहा कि एनएसयूआई कार्यकर्ताओं को राजनीति के साथ साथ सामाजिक कार्यक्रमों में भी बढ़चढ़कर हिस्सा लेना चाहिए। क्योंकि युवाओं के बिना राहुल गांधी का मिशन पूरा नहीं हो सकता। उन्होंने कहा युवा ही देश का भविष्य होते हैं। आज का युवा ही कल का राजनेता है। यह संगठन छात्र सामाजिक हितों के लिए हमेशा तत्परता से काम करता रहेगा। इस दौरान शहर जिला अध्यक्ष सुशील मौर्य, पूर्व विधायक रेखचंद जैन, महिला कांग्रेस अध्यक्ष लता निषाद, युकां अध्यक्ष अजय बिसाई, एनएसयूआई शहर अध्यक्ष विशाल खंबारी, ग्रामीण अध्यक्ष नीलम कश्यप, महिला कांग्रेस, सेवादल, शहर कांग्रेस के समस्त पदाधिकारी सहित समस्त मोर्चा प्रकोष्ठ के कार्यकर्ता मौजूद थे।

नक्सलियों ने पत्रकारों से मांगा लड़ाई में सहयोग

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  •  कुछ पत्रकारों पर लगाया ठेके लेने का आरोप
  •  जनविरोधी कार्यों के खिलाफ आवाज उठाने की अपील भी की
    जगदलपुर नक्सलियों ने जंगलों के औद्योगिकीकरण और आदिवासियों के विस्थापन के खिलाफ लड़ाई में पत्रकारों से सहयोग की अपील की है। नक्सली संगठन ने आरोप लगाया है कि कुछ लोग पत्रकारिता की आड़ में औद्योगिक घरानों की मदद और ठेकेदारी कर रहे हैं। सीपीआई (माओवादी) के दक्षिण सब जोनल ब्यूरो प्रवक्ता समता के हस्ताक्षर से बस्तर संभाग के पत्रकार संगठनों के नाम जारी अपील में उक्त बातें कही गई हैं। समता ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकास मॉडल के नाम पर जल, जंगल, जमीन को कॉर्पोरेट घरानों के हवाले कर वहां रहने वालों को बेदखल किया जा रहा है। खदानों, बांध, पुल प्रधानमंत्री सड़क, उद्योगों के नाम पर किसानों और आदिवासियों की जमीन छीनी जा रही है। हसदेव के जंगल हों या बस्तर के जंगल सभी जगह यह कृत्य चल रहा है। थाना, कैंप की स्थापना औद्योगिक घरानों की सुरक्षा के लिए की जा रही है।कुछ उद्योगपति और ठेकेदार पत्रकारों की आड़ में अपनी रोटी सेंक रहे हैं था कुछ पत्रकार भी ठेकेदारी कर रहे हैं। समता ने कहा है कि हमारा आंदोलन जंगलों के असली मालिक आदिवासियों के हितों की रक्षा के लिए है। इसलिए पत्रकारों से भी इसमें सहयोग अपेक्षित है।

कांग्रेस प्रत्याशी कवासी लखमा के बिगड़े बोल; कहा- तीर धनुष लेकर मारो साले पुलिस वालों को

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  • भरी सभा में ग्रामीणों को उकसाते नजर आए
  •  संवैधानिक पद पर बैठे नेता दादी ने लांघी मर्यादा
    -अर्जुन झा-
    जगदलपुर कुछ साल पहले तक कश्मीर में जो होता आया है, शायद वैसा ही कुछ मंजर बस्तर में भी पैदा करना चाहते हैं पूर्व मंत्री कवासी लखमा। सुकमा जिले की कोंटा विधानसभा सीट से विधायक हैं कवासी लखमा को इस लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने बस्तर लोकसभा सीट से उम्मीदवार बनाया है। विधायक के संवैधानिक पर रहते हुए भी कवासी लखमा सारी मर्यादाएं लांघते हुए भरी चुनावी सभा में आदिवासियों को पुलिस के खिलाफ हिंसा के लिए उकसाते नजर आए हैं। उनके ऐसे बिगड़े बोल वाला वीडियो जमकर वायरल हो रहा है।
    कवासी लखमा छत्तीसगढ़ की पिछली कांग्रेस सरकार में आबकारी एवं उद्योग मंत्री रहे हैं। बस्तर संभाग के सुकमा जिले की एकमात्र विधानसभा सीट कोंटा से वे लगातार छठवीं बार विधायक चुनकर आए हैं। छत्तीसगढ़ के सबसे सीनियर विधायकों में उनकी गिनती होती है। बस्तर संभाग की अधिकतर विधानसभा सीटों पर जब कांग्रेस हार गई, तब भी कवासी लखमा के कोंटा का किला ढह नहीं पाया।

इस लोकसभा चुनाव में कवासी लखमा ने एक प्रदेश स्तर के कुछेक बड़े कांग्रेस नेताओं द्वारा चलाए गए विशेष अभियान के तहत अपने सुपुत्र हरीश कवासी को बस्तर सीट से टिकट दिलाने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा दिया था। परिवार वाद के दाग से बचने के लिए कांग्रेस ने हरीश कवासी के बजाय उनके मौजूदा विधायक पिता कवासी लखमा को टिकट दे दिया। लखमा इन दिनों अपने चुनाव प्रचार में पूरी ताकत से जुटे हुए हैं। इसी सिलसिले में वे सोमवार को बस्तर लोकसभा क्षेत्र अंतर्गत बीजापुर जिले के ग्राम कुटरू पहुंचे थे। वहां मौजूद 50- 60 ग्रामीणों के बीच अपने संबोधन में कवासी लखमा ने कहा – तोंगपाल में टीना है टीना, वहां पुलिस वाले आए थे, नाप रहे थे, मैने लोगों से कहा कि तीर धनुष निकालकर मारो साले पुलिस वालों को, अगर हमारा जंगल नहीं बचेगा, तो हम आदिवासी कहां बचेंगे, इसलिए सब आगे आओ। इस तरह संवैधानिक पद पर बैठे कवासी लखमा आदिवासियों को हिंसा के लिए खुलेआम उकसाते रहे। इस दौरान कवासी लखमा के साथ बीजापुर के कांग्रेस विधायक विक्रम मंडावी भी मौजूद थे। श्री मंडावी लगातार दूसरी बार विधायक चुने गए हैं, लेकिन उन्होंने भड़काऊ बातें कहने पर कवासी लखमा को टोकने की जहमत नहीं उठाई। इससे जाहिर होता है कि संवैधानिक मर्यादा से न तो कवासी लखमा को वास्ता है और न ही विधायक विक्रम मंडावी को। बस्तर के सुकमा जिले के तोंगपाल की पहाड़ियों में बाक्साईट की उपलब्धता है। इसी को कवासी लखमा टीना कह रहे थे।
बस्तर को कश्मीर बनाने की मंशा?
कवासी लखमा ठीक उसी अंदाज में आदिवासियों को भड़का रहे थे, जैसा कि जम्मू कश्मीर में अलगाववादी नेता कश्मीरी युवाओं और वहां की अवाम को भड़काते रहे हैं। कश्मीर में ऐसे भड़काऊ भाषणों की वजह से कैसे हालात बन गए थे, पूरी दुनिया को मालूम है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या कवासी लखमा बस्तर को भी कश्मीर की तरह सुलगाना चाहते हैं ? इस बात में कोई दो राय नहीं कि आदिवासियों को अपना जंगल, जमीन, जल बचाने का हक है और इन पर उनका पहला अधिकार भी है। मगर हिंसा की राह पर चलकर ऐसा हक पाने की इजाजत किसी को नहीं दी जा सकती। दूसरा सवाल कांग्रेस पर भी उठता है क्योंकि कांग्रेस खुद को अहिंसा के अग्रदूत राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के पदचिन्हो पर चलने वाली पार्टी होने का दम भरती है। क्या कवासी लखमा बस्तर को भी कश्मीर जैसी हिंसा की आग में झोंकना चाहते हैं? कवासी लखमा के इस बिगड़े बोल ने भाजपा को बड़ा मौका दे दिया है। निश्चय ही भाजपा इसे लोकसभा चुनाव में बड़ा मुद्दा बनाएगी। यह भी हो सकता है कि इस मामले को लेकर निर्वाचन आयोग में भी शिकायत की जाएगी। ऐसे में बस्तर और कांकेर लोकसभा सीटों पर कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

ये जाएंगे लोकतंत्र के मंदिर में ?
कवासी लखमा सांसद का चुनाव लड़ रहे हैं। देश के सबसे बड़े लोकतंत्र के मंदिर में जाना चाहाते हैं। जगह जगह आमसभाओं में जनता से अपनी जीत के लिए वोट मांग रहे हैं। अब जनता को तय करना चाहिए कि कवासी लखमा ने कुटरू में जो कुछ भी कहा है, क्या वह जायज है? इनके बोल क्या है कानून सम्मत हैं? लोकतंत्र में कानून है, लेकिन कवासी लखमा जनता को उकसा रहे हैं, तीर धनुष लेकर पुलिस को मारने की बात जनता से कर रहे हैं।अब जनता को ही यह तय करना होगा कि कानून के विपरीत जाकर कदम उठाने की बस्तर में अशांति फैलाने की कोशिश कर भाईचारे को समाप्त कर मारने और हत्या करने के लिए जनता को उकसाने वाले नेता को लोकतंत्र के सबसे बड़े मंदिर संसद में भेजना पसंद करेगी या नहीं?

बहुत रक्तपात झेल चुका है बस्तर
कवासी लखमा वैसे तो हास परिहास और मसखरेपन के लिए जाने जाते हैं। लोगों के बीच बैठकर उन्हीं के रंग में रंग जाना, राह चलते व्यक्ति से बीड़ी मांगकर पीना कवासी लखमा की अलग छवि प्रस्तुत करते रहे हैं। अब तक हम कवासी लखमा को तीज त्यौहारों में आदिवासियों के संग जमकर नाचते कूदते, ढोल -मांदर बजाते, देवी सवार होने पर खुद को कंटीली सांकल से मार मारकर लहूलुहान करते देखते आए हैं। आज वही कवासी लखमा बस्तर की धरती को लहूलुहान करने की बात कैसे करने लगे हैं? यह सब दरअसल सियासी चाल है, खुद को जनहितैषी बताने की, मगर नेताओं और जनप्रतिनिधियों को इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि उनकी बातों पर जनता विश्वास कर लेती है। कवासी लखमा के कहे मुताबिक अगर बस्तर के लोगों ने पुलिस और प्रशासन के खिलाफ हथियार उठाना शुरू कर दिया कर दिया, तो बस्तर का हश्र क्या होगा? यह सोचकर रूह कांप उठती है। वैसे भी नक्सलवाद से जूझ रहा बस्तर बहुत ज्यादा रक्तपात सह चुका है। सैकड़ों माताओं – बहनों की गोद और मांग सूनी हो चुकी है, सैकड़ों बच्चे अनाथ हो चुके है, अनगिनत बुजुर्ग अपने बुढ़ापे का सहारा खो चुके हैं। अब जाकर स्थिति थोड़ी संभली है। क्या कवासी लखमा बस्तर में फिर से वही दौर देखना चाहते हैं? इस बात का जवाब उन्हें देना ही पड़ेगा।

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