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खड्डों से लेकर आबकारी विभाग के गड्ढों की क्या है सच्चाई… अदना सा सिपाही बना विभाग का सुपरमैन…

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सुपरमैन सिपाही ने किया है चाटूकारिता में पीएचडी, इसके हस्तक्षेप के बगैर नहीं हिलता विभाग का एक भी पत्ता

सबसे ज्यादा हिस्सा सुपरमैन सिपाही का, शासकीय दुकान का किराया भी इसी के हाथ

सुपरमैन सिपाही के तेवर, कभी नहीं दिखा वर्दी में… त्यौहारों में सबसे ज्यादा ब्लैक…

सुपरवाइजर की नौकरी चाहिए तो सालाना दो 50 हज़ार

इच्छानुरूप ब्रांड का नहीं मिलना, डीओ का खेल…भ्रष्टाचार इतना की खड्डे भी नहीं छोड़े…

जगदलपुर – शासकीय मदिरा दुकानों में चल रहे बंदरबांट के कारोबार में जैसे-जैसे प्याज के छिलकों की तरह परतें खुलने लगी हैं वैसे-वैसे इन दुकानों से लेकर विभाग के अधिकारी/कर्मचारी तक के आँखों से आंसू निकलने लगे हैं. इस बार कुछ ऐसी जानकारियां मिली हैं जिससे दुकानों और विभाग में हो रही ऊपरी कमाई से लेकर कई खुलासे हुए हैं. इन खुलासों में चाटूकारिता से लेकर डीओ और दरोगा की संदेहास्पद भूमिका भी शामिल है. ताज्जुब की बात तो यह है कि जिले के दुकानों सहित विभाग के अधिकारियों, शराब कंपनी और प्लेसमेंट एजेंसी तक को विभाग का एक अदना सा सिपाही अपनी उँगलियों में नचा रहा है और आला-अधिकारियों के कान में जूं तक नहीं रेंग रही है.

सुपरमैन सिपाही ने किया है चाटूकारिता में पीएचडी, इसके हस्तक्षेप के बगैर नहीं हिलता विभाग का एक भी पत्ता

शराब दुकानों और इनके पूर्व-कर्मचारियों से प्राप्त जानकारी के मुताबिक, विभाग के एक सिपाही की अन्य कर्मचारियों और दुकानों में इतनी पैठ है कि उससे उलझने की हिमाकत न तो ये करते हैं और न ही अधिकारी करते हैं. दरअसल, इस सिपाही ने चाटूकारिता में पीएचडी तो किया ही है साथ ही इसके गुट के अन्य दो लोग समूचे विभाग को चला रहे हैं. इस सिपाही द्वारा किसी भी आतंरिक सेटिंग फिर चाहे वो शराब कंपनी हो या फिर दुकानों से उपरी कमाई की उगाही या फिर अधिकारियों तक हिस्सा पहुंचाने की बात; को करना मामूली बात है. कई वर्षों से एक ही जिले में पदस्थ होने का भरपूर फायदा उठाते हुए इसने राजनितिक पकड़ भी बना ली है, जिसके चलते सीधे तौर पर इसके विरुद्ध कार्यवाई का किया जाना लगभग असंभव सा हो गया है.

सबसे ज्यादा हिस्सा सुपरमैन सिपाही का, शासकीय दुकान का किराया भी इसी के हाथ

सूत्र बताते हैं कि नया बस स्टैंड स्थित शराब दूकान इसी सिपाही की संपत्ति है जिसका किराया भी इसी के हाथ है. अब विभागीय नियमों की अनदेखी क्यों हो रही है यह तो विभाग के ही लोग बता सकते हैं. पूर्व-कर्मचारियों ने बताया कि डीओ और दरोगा का दुकानों से महिना बंधा हुआ है, जिसकी पूरी सेटिंग इस सिपाही द्वारा ही की जाती है. सिपाही के साथ इसके गुट के अन्य दो लोग सुपरवाइजर के पास जाते हैं और हिस्से की चर्चा करते हैं फिर डीओ तक बात पहुंचाई जाती है. चूँकि दुकान में कार्यरत सभी कर्मचारी निचले स्तर और प्लेसमेंट एजेंसी के अधीन होते हैं, इनके द्वारा की जाने वाले बंदरबांट की जानकारी कई दफा डीओ को भी नहीं होती है और न ही ये सीधे डीओ से संपर्क साधते हैं. यही नहीं, सबसे ज्यादा ऊपरी कमाई का हिस्सा इसी सुपरमैन सिपाही को ही जाता है. पूर्व की दुकानों में आहता से इस सिपाही द्वारा प्रति माह एक-डेढ़ लाख रुपये की ऊपरी कमाई बंधी हुई थी. यूँ मान लें कि समूचे विभाग में नक़ल के लिए अकल की आवश्यकता होने की कहावत अपने शबाब पर है.

सुपरमैन सिपाही के तेवर, कभी नहीं दिखा वर्दी में… त्यौहारों में सबसे ज्यादा ब्लैक…

इस सिपाही के तेवर इतने हैं कि इसे कभी भी शासकीय वर्दी में नहीं देखा गया है. अपने दो वर्दीधारी चमचों के साथ हमेशा यह शहर की शराब दुकानों में पहुँच जाते हैं, सुपरवाइजरों से हिस्से की बात करते हैं, कमाई कम होने की बात कहने पर गंदे लहजे में बात करते हैं. कई दफा तो सुपरवाइजरों को इसके सामने गिडगिडाते हुए भी देखा गया है. बावजूद, सिपाही द्वारा कोई रहम नहीं किया जाता है. पूर्व-कर्मचारियों का कहना है कि त्यौहारी और स्थानीय दियारी इत्यादि पर्वों में सबसे ज्यादा ब्लैक में शराब की बिक्री की जाती है. मैनेजर ही स्थानीय और ग्रामीण अंचल के कोचियों को खुलेआम शय देते हुए निर्धारित मात्रा से अधिक की सप्लाई करते हैं. इसके लिए भी सिस्टम तय है. कोचियों को स्पष्ट निर्देश दिया जाता है कि एक बार आकर निर्धारित मात्रा में शराब क्रय कर लें, फिर दो मिनट बाद आकर और ले जाएँ. जितना जरुरत उतना शराब आसानी से इन कोचियों को मिल जाता है. इसका प्रमाण एक हफ्ते के सीसीटीवी की जांच किये जाने से मिल सकेगा. यही नहीं, नियमानुसार विभाग के दरोगा को प्रतिदिन दुकानों का भ्रमण करना और सीसीटीवी की जांच करनी होती है लेकिन कभी-कभी ही वे शिरकत करते हैं. इसी क्रम में डीओ को भी प्रत्येक हफ्ते इन दुकानों में जाना है, लेकिन वे कभी नहीं जाते. जब डीओ द्वारा दरोगा को फटकार लगाया जाता है तभी ये दुकानों में अपनी टीम के साथ पहुँचते हैं.

सुपरवाइजर की नौकरी चाहिए तो सालाना दो 50 हज़ार

पूर्व-कर्मचारियों ने आरोप लगाते हुए बताया कि विभाग में इस कदर भ्रष्टाचार हावी है कि एक सुपरवाइजर को नौकरी में रखने के लिए प्लेसमेंट कंपनी द्वारा 50 हज़ार रुपये की घूस ली जाती है. यही नहीं सेल्समैन के लिए 30 हज़ार और खड्डा फेकने/जमाने वाले के लिए 20 हज़ार की दर तय है. और तो और यह रकम इन कर्मचारियों को सालाना देनी होती है और विभागीय लोगों द्वारा यह कथन दिया जाता है कि इस राशि से विभाग को हो रहे नुकसान की भरपाई की जाती है. ताज्जुब की बात तो यह है कि इस पूरे खेल में जब प्लेसमेंट कंपनी का जिम्मेदार शहर पहुँचता है तो इसकी पूरी सेटिंग सुपरमैन सिपाही द्वारा की जाती है और इसके लिए सिपाही द्वारा मोटी रकम भी डकार ली जाती है.

इच्छानुरूप ब्रांड का नहीं मिलना, डीओ का खेल…

पूर्व-कर्मचारियों ने बताया कि अकसर ऐसा देखने को मिलता है कि कुछ ब्रांड की शराब अन्य जिलों या राज्यों में आसानी से मिल जाती है लेकिन वही ब्रांड शहर में उपलब्ध नहीं होती है. इसके पीछे भी बहुत बड़ा भ्रष्टाचार छुपा हुआ है. ऐसा इसलिए होता है क्यूंकि जिले में कौन सी ब्रांड की बिक्री होगी इसका अंतिम फैसला या यूँ कहें की अंतिम सूची, विभाग के डीओ बनाते हैं. कंपनी से आये लोग सीधे डीओ से संपर्क करते हैं जिसके बाद एक मोटी रकम का आदान-प्रदान होता है या फिर प्रति नग दर तय होती है, जिसके बाद ही उस ब्रांड को दुकानों में रखने की अनुमति मिलती है. यही नहीं, अधिकारी ही इसके बाद प्रति बोतल ऊपरी दर तय करते हैं. सुपरवाइजर द्वारा रिस्क होने या मना करने पर सुपरमैन सिपाही अपनी विशेष भूमिका निभाते हुए इनसे मिलते हैं और उदहारण स्वरुप 20 रुपये की ऊपरी दर पर 15 रुपये उन्हें देने और 5 स्वयं रखने की बात कहते हैं. सबसे कम आरएसपी के ब्रांड से लेकर हाई ब्रांड तक में भी ऊपरी कमाई की राशि पहले से तय होती है.

भ्रष्टाचार इतना की खड्डे भी नहीं छोड़े…

पूर्व-कर्मचारियों के मुताबिक, विभाग द्वारा भ्रष्टाचार की सीमा तो तब लांघ ली जाती है कैर्रेट के साथ आने वाले खड्डे पर भी प्लेसमेंट कंपनी और अधिकारी अपना हिस्सा लेना नहीं छोड़ते. प्रति दुकान, औसतन प्रति माह 75-80 हज़ार रुपयों की बिक्री होती है, जिसमें से आधा प्लेसमेंट कंपनी रखती है और आधा डीओ/दरोगा के पास चला जाता है, इसका अमूमन कोई रिकॉर्ड या पुष्ट जानकारी नहीं रखता.

नगर पालिका परिषद दल्ली राजहरा द्वारा नगर के नागरिको से घर के टैक्स के नाम पर अतिरिक्त राशि की वसूली को ख़त्म करने कलेक्टर से की मांग – संतोष देवांगन

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दल्ली राजहरा नगर पालिका मे नगर के नागरिको से घर टैक्स तय समय पर नही पटा पाने वाले से टैक्स की राशि व लेट फीस का 6.25 प्रतिशत अधिक अधिभार जोड़ने के बावजूद 1000/- रुपये की और अतिरिक्त वसूली किया जा रहा है यह वसूली पिछले 7 सालो से (वर्ष 2015) से जारी है जो आज तक चल रहा है जिसे पटा पाने मे नगर के नागरिक सक्षम नही है वैसे भी पिछले 2 सालो से कोविड 19 के चलते लाक डाउन के कारण लोगों की आर्थिक स्थिति काफी कमजोर हो गई है फिर भी ऐसे समय मे भी यह वसूली करना बिल्कुल गलत है नगर के नागरिको के साथ अन्याय है और तो और इस तरह की वसूली बालोद नगर पालिका मे नही हो रही है जबकि बालोद जिले मे सिर्फ़ 2 ही नगर पालिका है जिसमें बालोद और दल्ली राजहरा नगर पालिका है फिर भी एक ही जिले में होने के बावजूद दो अलग अलग नियमों के तहत वसूली की जा रही है ।

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कलेक्टर से मांग की है कि इस वसूली को बंद करने नगर पालिका परिषद के मुख्य नगर पालिका अधिकारी को आदेश कर नगर के नागरिक साथ न्याय करे।

नगर पालिका अध्यक्ष, CMO, व परिषद के समान्य सभा के बैठक मे हमारे द्वारा इस वसूली को ख़त्म करने अनेक बार बात उठाये है लेकिन यह वसूली ख़त्म नही किया गया जिसे लेकर कलेक्टर से हस्तक्षेप करने की मांग कर अब तक जितनी भी अतिरिक्त राशि वसूली गई है उसे वापस करने कहा गया |

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साथ ही कहा कि यदि आगामी एक माह तक यह वसूली को बंद नही किया गया तो हमारे द्वारा नगर पालिका के सामने विरोध प्रदर्शन कर सडक की लडाई लडेंगे जिसमे प्रदेश सरकार व पालिका प्रबंधन के खिलाफ हल्ला बोला जायेगा।

जुआ एक्ट के खिलाफ पुलिस की कार्यवाही में 3 जुआरी पकडाए

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3 जुआरियों से कुल नकदी रकम ₹17900 वह मौके पर 6 नग मोटर साइकिल वह मोबाइल जप्त, जुआरियों के विरूद्ध आगे भी जारी रहेगा कार्यवाही

पुलिस अधीक्षक राजनांदगांव संतोष सिंह के निर्देशन में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक राजनांदगांव संजय महादेवा एवं अनुविभागीय अधिकारी खैरागढ़ दिनेश सिन्हा की मार्गदर्शन पर साइबर सेल तथा पुलिस चौकी जालबांधा स्टाफ के संयुक्त टीम के साथ जुआ सट्टा के खिलाफ रोकथाम हेतु चलाये जा रहे अभियान के दौरान दिनांक 20.02.2022 को पुलिस चौकी जालबांधा क्षेत्रन्तर्गत आरोपी रंजीत साहू पिता स्वर्गीय खोर बहारा साहू उम्र 55 वर्ष शौकीन कुकुरमरा थाना खेरागढ़ , वह दिनेश वर्मा पिता शिव चरण वर्मा उम्र 30 साल साकिन पवन तेरा जालबांधा तथा त्रिलोक जैन पिता प्रीतम चंद जैन उम्र 35 वर्ष साकिन पवन तेरा चौकी जालबांधा को जुआ खेलते जिसके पास से नगदी रकम 17900/-रूपये, एवं मौके से 06 नग मोटरसाइकिल वह दो मोबाइल जब तक किया गया है आरोपीगणों के विरूद्ध 13 जुआ एक्ट के तहत अपराध पंजीबद्ध कर तीनों जुआरियों को धारा 151 जा.फौ के तहत कार्यवाही कर इस्तागाशा अनुविभागीय दण्डाधिकारी खैरागढ़ के समक्ष पेश किया गया।

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उपरोक्त कार्यवाही में , उप निरीक्षक पवन पटवा सउनि मुन्नालाल भांडेकर, प्र.आर. बलराम सिंह वाह साइबर टीम अनिल शुक्ला मनीष मानिकपुरी मनीष वर्मा अवध किशोर साहू की सराहनीय भूमिका रही।

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निजी कंपनी में कार्यरत मैनेजर द्वारा करोड़ों रुपये का फर्जीवाड़ा करने वाला शातिर आरोपी पुलिस की गिरफ्त में

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लालबाग पुलिस के गिरफ्त में आया 01 करोड़ 44 लाख 56 हजार रूपये का फर्जीवाड़ा करने वाला शातिर आरोपी

एबिस फैक्ट्री में ट्रेव्हल्स डेस्क विभाग में मैनेजर के पद पर कार्यरत है, शातिर आरोपी

एयर टिकट, बुकिंग, होटल बुकिंग आदि के नाम से किया 01 करोड़, 44 लाख, 56 हजार, 01 सौ नब्बे रूपये का घोटाला

राजनांदगांव। प्रार्थी अभिषेक त्रिपाठी द्वारा लिखित आवेदन पेश कर रिपोर्ट दर्ज कराई गई कि एबीस एक्सपोर्टस इंडिया प्राईवेट लिमिटेड कार्पोरेट इंदामरा मे कार्यरत सचिन वानवे ने कंपनी द्वारा प्रदाय एचडीएफएसी बैंक के क्रेडिट कार्ड एवं ईमेल आई-डी के माध्यम से बेईमानी पूर्वक आश्य रखते हुये कंपनी को आर्थिक नुकसान पहुंचाने एवं स्वयं को अवैध रूप से लाभ पहुंचाने के उददेश्य से फर्जी दस्तावेज तैयार कर उसका उपयोग कर एयर टिकट, बुकिंग, होटल बुकिंग आदि के नाम से रेजर पे गेटवे/ पेयुमनी गेटवे के माध्यम से दिनांक 08.01.21 से 17.02.22 तक अपने भारतीय स्टेट बैंक शाखा लाखनी जिला भण्डारा महाराष्ट्र के एकाउंट नंबर 37990059779 में 1,44,56,190 रूपये (एक करोड़ चौवालिस लाख छप्पन हजार एक सौ नब्बे रूपये) ऑनलाईन ट्रान्जेक्शन कर कपंनी को आर्थिक नुकसान पहुंचाया। जिसकी रिपोर्ट पर अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया।

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सूत्रों के आधार पर आरोपी सचिन वानवे पिता दीपक वानवे उम्र 31 वर्ष निवासी ग्राम लाखनी जिला भण्डारा (महाराष्ट्र) का पता तलाश कर दिनांक 21/02/2022 को देवरी-भण्डार के मध्य हिरासत में लेकर पुलिस थाना लालबाग लाकर आरोपी से गठित टीम द्वारा सूक्ष्मता से पूछताछ किया गया, जो अपना जुर्म स्वीकार करते हुये उक्त कृत्य में उपयोग किया गया दस्तावेज, कंप्युटर व अन्य उपकरण प्रस्तुत किया जिसे विधिवत गिरफ्तारी कर ज्युडिशियल रिमाण्ड पर भेजा गया है।

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शहर में अवैध प्लाटिंग करने वाले भू-माफियाओं को जेल भेजे – नवीन अग्रवाल

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अवैध प्लाटिंग की शिकार जनता का पैसा वापस दिलवाए जाए

राजनांदगांव – नगर में बीते वर्षों में अवैध प्लाटिंग की बाढ़ आ गई है प्रशासन की कार्यवाही नाम मात्र की चल रही है इस अवैध प्लाटिंग को लेकर जनता कांग्रेस के प्रदेश महासचिव व कोर कमेटी के सदस्य नवीन अग्रवाल ने कलेक्टर को ज्ञापनमय शिकायत सौप कर कहा है कि शहर के मोतीपुर, ढाबा, रेवाड़ीह, पेंड्री मेडिकल कॉलेज के आस पास, नंदई, मोहारा, रायपुर नाका जीई रोड,फरहद, पनेका, अनुपम नगर में भूमाफियाओं द्वारा बेतहाशा अवैध प्लाटिंग की गई है जिसमें नगर निगम, राजस्व एवं नगर एवं निवेश के अधिकारियों की मिलीभगत की वजह से बड़े रकबे पर कार्यवाही नहीं हो रही है, छोटी मोटी नाममात्र कार्यवाही कर अधिकारी अपनी पीठ थपथपा रहे हैं। बिना डेवलपिंग अवैध प्लाटिंग की अनुमति देने वाले जिम्मेदार अधिकारियों एवं भू-माफियाओं पर एफआईआर कर जेल भेजे जाने के बाद ही यह समस्या खत्म हो सकती है लेकिन आज अपने घर का सपना देखने वाले आम नागरिक को इसका खामियाजा भुगतना पड़ता है अवैध प्लाट लेने के बाद आम नागरिक को मूलभूत सुविधाओं के लिए भटकना पड़ता है।

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दैनिक समाचार पत्रों में लगातार अवैध प्लाटिंग से संबंधित खबरों के प्रकासित होने के बाद भी प्रशासन द्वारा केवल नाम मात्र की कार्यवाही की जा रही है नवीन अग्रवाल ने कलेक्टर को ज्ञापन देने के साथ विभिन्न समाचार पत्रों की कटिंग भी सौंपी है और कहा है ठोस कार्यवाही नहीं होने पर जनता कांग्रेस को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा यापन सौपने वाले में शहर ज़िलाध्यक्ष शमशूल आलम युवा लोकसभा अध्यक्ष अमर गोस्वामी युवा शहर अध्यक्ष दीपक सोनी युवा लोकसभा उपाध्यक्ष टिंकु देवांगन कुलेश्वर साहू सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित थे।

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“जल ही जीवन है, जल है तो कल है” स्लोगन दिखावा बनकर रह गया, हो रही पानी की बर्बादी किन्तु प्रशासन बेखबर

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बोईरडीही डेम से दल्ली राजहरा इंडस्ट्रियल में पानी सप्लाई के लिए बना 4 फीट मोटा पाइप लाइन जो कि राजहरा बंकर से दल्ली माइंस से जाने वाली रोड के पास एक बड़ का पेड़ है ।वहाँ पर असामाजिक तत्वों ने 1 इंच बड़ा और एक छोटा छेद कर दिया है । जिसके कारण वहां पर पानी 10 फीट से भी ज्यादा ऊंचाई पर फ़ौहारे की तरह निरंतर बहते जा रहा है । यह करीब दो माह से भी अधिक समय हो रहा है। एक तरफ बी एस पी मैनेजमेंट पानी बचाने के लिए ” जल ही जीवन है। ” “जल है तो कल है । ” ” जल है तो हम हैं ।” “एक एक बूंद पानी बचाइए।” जैसे नाना प्रकार के स्लोगन पानी बचाने के लिए अपने कर्मचारी को दे रहे हैं। लेकिन यह सब कागज में ही दिखावा बनकर रह गया है।

आप इस वीडियो को देखकर अनुमान लगा सकते हैं कि जिस हिसाब से पानी इतने प्रेशर में बह रहा है वहाँ पर 24 घंटा में कितना पानी बर्बाद हो सकता है। यह घटना 2 महीने से अधिक हो गया है। कितनो कर्मचारी और अधिकारी उस रास्ते से आना-जाना करते हैं लेकिन पानी की बर्बादी को कैसे रोके इसके बारे में कोई भी नहीं सोच रहा है। प्राकृतिक स्रोत बर्बाद हो रहे हैं जिम्मेदार व्यक्ति लापरवाह हो रहे हैं और ना ही असामाजिक तत्वों के ऊपर कोई कार्यवाही नही हो रही है ।

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कमिश्नर ने की शिक्षा विभाग में पदोन्नति में अनियमितता की शिकायत की जांच के लिए की समिति गठित
तीन सदस्यीय जांच समिति आठ बिंदुओं पर करेगी जांच

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जगदलपुर, 21 फरवरी 2022 – कमिश्नर श्याम धावड़े ने बस्तर संभाग में शिक्षा विभाग में हुई पदोन्नति में हुए अनियमितता की शिकायत पर तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की है। यह जांच समिति आठ बिंदुओं पर जांच करेगी। उल्लेखनीय है कि वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री कवासी लखमा द्वारा शिक्षा विभाग के संयुक्त संचालक कार्यालय से बस्तर संभाग में हुए पदोन्नति की शिकायतों पर जांच के आदेश दिए गए थे। इसके तहत संयुक्त संचालक कार्यालय से 28 जनवरी को जारी आदेश क्रमांक 262, 272, 268, 270 और 274 के तहत शिक्षक एलबी (टी. संवर्ग) से प्रधान अध्यापक (पूर्व माध्यमिक शाला) के पद पर किए गए पदोन्नति आदेश के विरुद्ध प्राप्त शिकायतों की सुक्ष्म एवं विस्तृत जांच के लिए संयुक्त जांच समिति का गठन किया गया है। इस जांच समिति में डिप्टी कमिश्नर माधुरी सोम, शिक्षा विभाग के संयुक्त संचालक आरएस चौहान और वरिष्ठ लेखा अधिकारी श्रीनिवास रथ शामिल हैं।

जांच समिति द्वारा शासन से प्राप्त पदोन्नति तथा सीधी भर्ती के तहत पदास्थापना संबंधी निर्देश, पदोन्नति ओदश के संदर्भ में शिक्षक विहीन एवं एकल शिक्षकीय शालाओं की स्थिति, पदास्थापना के संबंध में शाला निर्देश के विपरीत पदास्थापना से संबंधित, पदोन्नति आदेश उपरांत पदास्थापना आदेश में संशोधन के प्रकरण, संशोधन करने के कारण, शासकीय पूर्व माध्यमिक शालाओं में शिक्षकों और प्रधान पाठकों के रिक्त पदों की स्थिति, शालाओं में विषयवार शिक्षकों की पदस्थापना की स्थिति, शालाओं में छात्र अनुपात के अनुरुप शिक्षकों की पदस्थापना और अन्य विषयों पर जांच की जाएगी।

सांसद बैज उतरे मैदान में प्रत्याशी नदीम जावेद के पक्ष में किया धुआंधार प्रचार…

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बस्तर सांसद दीपक बैज अपनी टीम के साथ जौनपुर सदर विधानसभा के प्रत्याशी नदीम जावेद के पक्ष में साथी कार्यकर्ताओं के साथ डोर टू डोर जनसंपर्क कर कांग्रेस प्रत्याशी नदीम जावेद के पक्ष में वोट मांग कर प्रचण्ड मतों से विजय बनाने की अपील की।

आयकर सलाहकार अंडरग्राउंड सैकड़ों लोगों की सांसें साशंत में, मार्च के महिने में जमा कराने है दस्तावेज, पत्नी और बेटे की मौत के बाद फरार

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जगदलपुर। नगर के हाउसिंग बोर्ड निवासी आयकर सलाहकार राय अपनी पत्नी चमेली और उसके बेटे के संदेहास्पद मौत के बाद फरार हो गया है जिसके कारण सैकड़ों लोगों की अटकी हुई है क्योंकि मार्च माह में आयकर रिटर्न फाइल करना पड़ता है जबकि वह पत्नी-बच्चे की मौत के बाद अंडरग्राउंड हो गया है।

नगर में इन दिनों हाऊसिंग बोर्ड का मामला सुर्खियों में हैं और दोनों लोगों की संदेहास्पद मौत मामले में पुलिस को कुछ हाथ नहीं लगा है और उसके विपरीत कई व्यापारी व कर्मचारियों के दस्तावेज आयकर सलाहकार राय के पास जमा है। फ़रवरी माह की चला- चली बेला है तो मार्च माह में आयकर रिटर्न फाइल करना है इसीलिए जनता हलाकान है।

क्या है मामला

इस चर्चित प्रकरण में एक बात सामने आई है कि पत्नी और बेटे को घर में बंद कर आयकर सलाहकार राय चला गया था और इस मकान में सड़ांध उठने के बाद मामले का खुलासा हुआ कि मां और बच्चे मृत पाए गए हैं जिसका विवेचना पुलिस कर रही है। आयकर सलाहकार उसके बाद से नदारद है।

राजहरा खदान समूह के अंतर्गत ठेके में कार्यरत सुरक्षा गार्ड्स को केंद्र सरकार के द्वारा तय किये गए वेतनमान के तहत भुगतान किया जाये – लखनलाल चौधरी

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राजहरा खदान समूह में वाच एंड वार्ड (अन आर्म्ड गार्ड्स) के ठेके में कार्यरत कर्मियों के द्वारा संघ को यह लिखित शिकायत मिली कि जब से यह ठेका संचालित हो रहा है तब से लेकर आजतक ठेकेदार द्वारा उन्हें केन्द्र सरकार के द्वारा तय न्यूनतम वेतन के जगह राज्य सरकार के द्वारा तय न्यूनतम वेतन दिया जा रहा है जबकि वे खदान में कार्यरत हैं। अतः उन्हें केंद्र सरकार के द्वारा तय किये गए न्यूनतम वेतन दिलवाया जावे। कर्मियों की शिकायत प्राप्त होने के बाद संघ ने मामले का अध्ययन किया और पाया कि वर्तमान प्रकरण में ठेकेदारों की नहीं बल्कि बीएसपी प्रबंधन की ही गलती है और बीएसपी प्रबंधन द्वारा गलत निविदा बनाई जाती रही है जिसके वजह से इस ठेके में कार्यरत कर्मियों का लगातार शोषण हो रहा है। इस मुद्दे पर जब संघ ने स्थानीय अधिकारीयों से चर्चा की तो उन्होंने मामले से अपने आपको अलग करते हुए कहा कि चूँकि उक्त ठेका भिलाई से संचालित होता है अतः वे इस बाबत कुछ नहीं कह और कर सकते हैं। तब संघ ने प्रबंधन के कई अधिकारीयों से चर्चा की लेकिन अंततः समस्या का समाधान नहीं होने पर संघ ने औद्योगिक विवाद के तहत उप मुख्य श्रमायुक्त (केंद्रीय) रायपुर के समक्ष मामले को दयार किया जिसपर दिनांक 18.02.2022 को सुनवाई हुई।

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इस सम्बन्ध में जानकारी देते हुए संघ के उपमहासचिव लखनलाल चौधरी ने बताया कि सुनवाई के दौरान प्रबंधन की तरफ से पक्ष रखते हुए महाप्रबंधक कार्मिक (खदान मुख्यालय) सूरज कुमार सोनी ने कहा कि चूँकि सुरक्षा कर्मी खदान के बाहर कार्य करते हैं अतः वे माइंस एक्ट में परिभासित खदान के दायरे में नहीं आते हैं और ऐसे में उन्हें खदान श्रमिकों के लिए केंद्र सरकार द्वारा तय न्यूनतम वेतन नहीं दिया जा सकता है और चूँकि उक्त ठेका भिलाई से संचालित होता है अतः इन श्रमिकों पर राज्य सरकार के द्वारा तय न्यूनतम वेतन लागू किया जा रहा है जो कि प्रबंधन के नजर में कानूनी तौर पर सही है।

प्रबंधन के इस तर्क का विरोध करते हुए संघ के प्रतिनिधि, एम.पी.सिंह, अध्यक्ष (केंद्रीय) खदान मजदूर संघ भिलाई, ने कहा कि प्रबंधन का उक्त तर्क पूर्णतः गलत है। चूँकि वाच एंड वार्ड (अन आर्म्ड गार्ड) के कार्य को केंद्र सरकार द्वारा अनुसूचित कार्य की श्रेणी में रखा गया है और भिलाई इस्पात संयंत्र एक केंद्रीय सार्वजानिक उपक्रम होने के नाते केंद्र सरकार के अधीनस्थ कार्यरत है अतः प्रबंधन का तर्क अव्यवहारिक एवं अवैधानिक है। जहांतक भिलाई इस्पात संयंत्र की बात है तो सम्पूर्ण भिलाई इस्पात संयंत्र सेल की एक इकाई है और सेल एक केंद्रीय सार्वजानिक उपक्रम है अतएव कानूनी तौर पर सेल अथवा उसके किसी भी इकाई के लिए समुचित सरकार केंद्र सरकार ही है और ऐसे में वाच एंड वार्ड कार्य में लगे श्रमिकों को केंद्र सरकार के द्वारा तय किये गए न्यूनतम वेतन मिलना चाहिए। दोनों पक्ष की बात सुनने के उपरान्त उप मुख्य श्रमायुक्त (केंद्रीय) रायपुर ने संघ के प्रतिनिधि को अगले सुनवाई के तारीख पर आवेदक कर्मियों का क्लेम फॉर्म लाने हेतु कहते हुए अगले सुनवाई की तारीख दिनांक 02.03.2022 को तय की। संघ को इस बात का पूर्ण भरोसा है कि उप मुख्य श्रमायुक्त (केंद्रीय) रायपुर द्वारा कर्मियों के पक्ष में फैसला आवेगा और उन्हें केंद्र सरकार द्वारा तय न्यूनतम वेतन रूपए 617/- प्रतिदिन + 88.46 (AWA) के रूप में मिलना शुरू होगा जो कि उनका वैधानिक हक़ है। वर्तमान में कानून की गलत व्याख्या करते हुए गलत निविदा बनाकर बीएसपी प्रबंधन द्वारा प्रत्येक कर्मियों का प्रतिदिन रुपये 240/- का नुकसान किया जा रहा है जिसका संघ पुरजोर विरोध करता है।

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