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मलेरिया ग्रस्त बच्चे की जान नहीं बचा सके सरकारी डॉक्टर

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  •  जिला अस्पताल नारायणपुर में नहीं मिल सका इलाज
  • परिजनों का आरोप -एंबुलेंस भी उपलब्ध नहीं कराई अर्जुन झा

जगदलपुर मच्छर रहेगा, मलेरिया नहीं’ स्लोगन कई दशक पुराना है। देश में अनेक दशकों से मच्छर और मलेरिया उन्मूलन के लिए अभियान चलाया जा रहा है। इस पर अब तक शासन अरबों रुपए खर्च कर चुका है। करोड़ों रू. खर्च कर सरकारी अस्पतालों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं और संसाधन उपलब्ध कराए गए हैं। इतना सब कुछ जतन करने के बावजूद मलेरिया भी है और मच्छरों की आबादी घटने के बजाय बढ़ती ही जा रही है। मलेरिया से मौतों का आंकड़ा साल दर साल बढ़ता जा रहा है। मलेरिया के मामले में बेहद संवेदनशील बस्तर संभाग के सरकारी जिला चिकित्सालयों में भी मलेरिया का ढंग से ईलाज नहीं हो पाता। मलेरिया के मरीजों के लिए जिला अस्पताल महज रेफरल सेंटर बनकर रह गए हैं। इसका एक ताजा उदाहरण बस्तर संभाग के नारायणपुर के जिला चिकित्सालय में देखने को मिला, जहां एक शिशु की मौत मलेरिया के चलते हो गई। जिला अस्पताल के डॉक्टर बच्चे को जगदलपुर मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में रेफर करने पर आमादा थे। इसी फेर में बच्चे की जान चली गई।

नारायणपुर जिला मुख्यालय से लगभग 45 किलोमीटर दूर ग्राम बाहकेर निवासी आज्ञाराम सलाम व उसकी पत्नी अपने 9 माह के बीमार बच्चे को उप स्वास्थ्य केंद्र छोटेडोंगर लेकर गए थे। बच्चे के पिता ने बताया उप स्वास्थ्य केंद्र के डॉक्टर ने बच्चे को जिला अस्पताल नारायणपुर रेफर कर दिया। परिजन बच्चे को लेकर शाम करीब 4.30 बजे जिला अस्पताल नारायणपुर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने बच्चे की स्थिति सामान्य और खतरे से बाहर बताई। उसके बाद लगभग रात 8 बजे अचानक डॉक्टर ने बच्चे को जगदलपुर रेफर करने की बात कही। इससे बच्चे का पिता घबरा गया और उसने निजी अस्पताल ले जाने हेतु एंबुलेंस उपलब्ध कराने की मांग डॉक्टरों से की। अस्पताल प्रबंधन ने एंबुलेंस देने से साफ इंकार कर दिया और कुछ दस्तावेजों पर बच्चे के पिता से हस्ताक्षर कराने के बाद अस्पताल से जाने को कह दिया। परिजन अपने बच्चे की जान बचाने उसे मोटर साइकिल से दूसरे अस्पताल जाने वाले ही थे, तभी बच्चे ने अस्पताल के दरवाजे पर ही दम तोड़ दिया। बच्चे के शरीर मे हलचल थम जाने के बाद माता समझ गई अब उसका लाल नही रहा। महिला अपने 9 माह के लाल के शव को गोद में लेकर अस्पताल में रोती बिलखती रही, लेकिन अस्पताल प्रबंधन का दिल नहीं पसीजा। आसपास मौजूद लोगों से सूचना मिलने पर मीडिया कर्मी वहां पहुंच गए। मीडिया के लोगों ने प्रभारी कलेक्टर को मामले की जानकारी दी। प्रभारी कलेक्टर जितेंद्र कुर्रे ने मामले पर संज्ञान लेते हुए तहसीलदार को मौके पर भेजा। तहसीलदार ने महिला को अस्पताल के अंदर चलने का निवेदन करते हुए मरीज के सामानों को स्वयं लेकर अस्पताल के अंदर लेकर गए। इसके बाद अस्पताल प्रबंधन नींद से जाग व स्वास्थ्य विभाग के बड़े अधिकारी व डाक्टर अस्पताल पहुंचे। उन्होंने एंबुलेंस की व्यवस्था कर बच्चे के शव और परिजनों को उनके गृह ग्राम भेजा।

नाजुक थी बच्चे की हालत डॉ. केकती

पूरे मामले पर जिला अस्पताल के सर्जन डॉ. आदित्य केकती ने कहा कि मरीज को मलेरिया था और परिजनों को बताया गया कि स्स्थिति नाजुक है, रेफर करना पड़ेगा। लेकिन परिजनों ने इंकार करते हुए दूसरे अस्पताल में ले जाने की बात कही। दूसरे अस्पताल ले जाते वक्त मरीज की मृत्यु हो गई। पश्चात एम्बुलेंस उपलब्ध कराकर उन्हे गृहग्राम रवाना कर दिया गया। ज्ञात हो कि जिला अस्पताल में दो शिशुरोग विशेषज्ञ सहित बीस से अधिक चिकित्सक पदस्थ हैं, फिर भी मरीजों की जान से खिलवाड़ हो रहा है।

सीएमएचओ डॉ. कुंवर का कथन

घटना के संबंध में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी नारायणपुर डॉ. टीआर कुंवर ने जानकारी दी कि 9 माह के शिशु उत्तम सलाम पिता आज्ञाराम सलाम को कंपकंपी, बुखार, उल्टी, पेट फूलने, झटके आने की शिकायत थी। उसे मल एवं पेशाब भी नहीं हो रहा था। बच्चे को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र छोटेडोंगर में दोपहर 12. 30 बजे भर्ती कराया गया, जहां जांच में मलेरिया से ग्रसित होना पाया गया। उसका उपचार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र छोटेडोंगर में किया जा रहा था दोपहर 2:30 बजे तक मरीज को पेशाब न होने पर जिला अस्पताल नारायणपुर के लिए रेफर किया गया। जिला अस्पताल में बच्चे को लेकर परिजन शाम 6. 30 बजे पहुंचें। डॉ. एकता निर्मलकर रंगारी ने परीक्षण के बाद उसे अस्पताल में भर्ती कर लिया।भर्ती के वक्त उसे पेशाब नहीं हो रही थी और सांस लेने में भी दिक्कत हो रही थी।मरीज उसे ऑक्सीजन में रखा गया था। बच्चे के माता- पिता को मरीज की गंभीर स्थिति के बारे में बताकर इलाज हेतु सरकारी एंबुलेंस से जगदलपुर ले जाने की सलाह दी गई थी। मरीज के परिजन द्वारा जगदलपुर नहीं जाने की बात लिखित में कही। नतीजतन उसका इलाज जिला अस्पताल नारायणपुर में चल रहा था। रात 9 बजे परिजन बच्चे को किसी प्राइवेट अस्पताल ले जाने के लिए जिला अस्पताल से बाहर जा रहे थे तभी रात्रि 9.10 बजे बच्चे की मृत्यु हो गई। इसके बाद तत्काल सरकारी एंबुलेंस से उन्हें उनके घर तक छोड़ा गया। जिला अस्पताल नारायणपुर में हमेशा शासकीय एंबुलेंस तथा 108 एंबुलेंस की सुविधा उपलब्ध रहती है।

नाबालिक लड़की को बहला फुसलाकर भगाकर ले जाने वाले आरोपी को 2 घंटे में राजहरा पुलिस ने पकड़ा

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  • आपरेशन मुस्कान के तहत् • कार्यवाही कर गुमशुदा की पतातलाश कर परिवार को किया
  • सुपूर्द 02. पुलिस द्वारा अपनकर्ता को 02घण्टे मे लिया हिरासत मे। 03. नाबालिक लड़की को बहलाफुसालकर भगाकर ले जाने वाले आरोपी को गिरफ्तार कर भेजा गया जेल।

 

विवरण :- मामले का संक्षिप्त विवरण इस प्रकार है कि वार्ड नं. 15 भंगोली पारा का रहने वाला प्रार्थी द्वारा अपने पत्नी के साथ थाना उपस्थित आकर रिपोर्ट दर्ज कराया कि इनकी नाबालिक लड़की डॉस क्लास जाने के नाम से घटना दिनांक 06.01.2024 के शाम 03:00 बजे घर से निकली थी, जो वापस नहीं आने पर प्रार्थी द्वारा आसपास एवं रिश्तेदारो मे पतातलाश किया जिसका कोई पता नही चलने पर प्रार्थी द्वारा अपने नाबालिक लड़की को अज्ञात आरोपी द्वारा बहलाफुसालकर वैध संरक्षण से भगाकर ले जाने की रिपोर्ट पर अपराध क्रमांक 05/2024 धारा 363 भादवि पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए श्रीमान पुलिस अधीक्षक जितेन्द्र कुमार यादव के निर्देश पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुशील कुमार नायक जिला बालोद एवं श्रीमान राजेश बागड़े नगर पुलिस अधीक्षक राजहरा मार्गदर्शन में थाना प्रभारी राजहरा निरीक्षक सुनील तिर्की एवं उनके टीम द्वारा अपहूत एवं अज्ञात अपनकर्ता की पतातलाश हेतु थाना राजहरा की टीम गठित कर रवाना किया गया था, टीम के द्वारा काफी लगन एवं मेहनत से अपहूत एवं अपहूनकर्ता की पतासाजी के दौरान राजहरा के वार्ड नं. 15 भगोली पारा मे ही अपहूनकर्ता के निवास स्थान पर ही मिले। अपहूत को मौके पर ही दस्तयाबी कर बरामद किया गया तथा अपहूत नाबालिक लड़की से पूछताछ करने पर बताया कि अपनकर्ता द्वारा बहलाफुसलाकर भगाकर अपने घर ले जाकर नाबालिक है, जानते हुए जोर जबदरस्ती कर शारीरिक संबंध स्थापित करना बताने पर आरोपी विद्यासागर पिता केवल राम साहू उम्र 20 साल साकिन वार्ड नं. 15 भंगोली पारा राजहरा को हिरासत में लेकर अपराध घटित करना कबूल करने पर आरोपी विद्यासागर के खिलाफ धारा 363, 366ए, 376 भादवि पाक्सो एक्ट की धारा 4 के तहत् कार्यवाही कर दिनांक 07.01.2024 को गिरफ्तार कर ज्यूडिशियल रिमाण्ड पर भेजा गया ।

उक्त अभियान कार्यवाही में थाना राजहरा से निरीक्षक सुनील तिर्की, उप निरीक्षक उमा ठाकुर, सउनि कांता राम घिलेन्द्र, आरक्षक 894 सुरेन्द्र देशमुख, आर. 128 रवि यादव, की सराहनीय भूमिका रही।

नाम आरोपी :

विद्यासागर साहू पिता केवल राम साहू उम्र 20 साल साकिन वार्ड नं. 15 भंगोली पारा राजहरा थाना राजहरा जिला बालोद

राममय होने लगा है जगदलपुर शहर का वतावरण

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  • अयोध्या में होने वाली प्राण प्रतिष्ठा को लेकर उत्साह

जगदलपुर अयोध्या में रामलला की प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा से पहले ही जगदलपुर नगर का वातावरण राममय हो गया है। लोगों में अभूतपूर्व उत्साह देखा जा रहा है। नगर के वार्डों में प्रभु श्रीराम के जयकारे, हनुमान चालीसा पाठ, शंखनाद, भजन गूंज रहे हैं। 22 जनवरी को शहर में दिवाली मनाने की तैयारी चल रही है।

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी वार्ड के रामभक्त दो दिनों से बाजे गाजे और जयकारों के बीच अक्षत, श्रीराम जन्मभूमि मंदिर अयोध्या की तस्वीर के साथ घर घर जाकर पौष शुक्ल द्वादशी विक्रम संवत् 2080 सोमवार 22 जनवरी को प्रभु श्रीराम की प्रतिमा को मंदिर के गर्भगृह में विराजित करने और उनके प्राण प्रतिष्ठा के संबंध में जानकारी दे रहे हैं। वार्ड पार्षद संजय पांडे भक्तों के साथ वार्ड के प्रत्येक घर में 22 तारीख़ के अभूतपूर्व दिवस को धूमधाम और उत्साह से मनाने का निवेदन कर रहे हैं। प्रत्येक घर में श्रीराम का जयकारा पाठ, हनुमान चालीसा सुंदरकांड, राम रक्षा स्रोत का पाठ करने की अपील कर रहे हैं। प्रत्येक घर में रात के समय दीप जलाने, घरों को तोरण, पुष्प और लाइटों से सजाने का भी आग्रह किया जा रहा है। संजय पांडे ने कहा है कि भगवान राम की प्रतिमा की 5 सौ वर्षों बाद मूल स्थान पर फिर से प्राण प्रतिष्ठा होने को लेकर हर घर में अभूतपूर्व उत्साह है ।सभी लोग इस प्राण प्रतिष्ठा में अपना योगदान देना चाहते हैं। 22 जनवरी को सभी लोग घंटी, शंख बजाकर अपने घरों को सजाकर इस कार्यक्रम में शामिल होंगे। प्रत्येक परिवार को 22 जनवरी के बाद श्री रामलला के दर्शन करने हेतु अयोध्या पहुंचने का निमंत्रण भी अक्षत, रामलला और मंदिर की भव्य फोटो भेंटकर दिया जा रहा है। नगर के सभी वार्डों में रामभक्त घर घर जाकर न्योता दे रहे हैं। इस कार्य में वार्ड के दृशान चक्रवर्ती, नरेश मुन्ना कोरी, मृणाल मलिक, गोविंद सिंह वर्मा पप्पू, अनिल जैन, जय विश्वास, अश्वनी पटेल, संपत रावत, अजय राय, जितेंद्र खत्री, ओमप्रकाश मौर्य , नम्रता जैन, मंजू शुक्ला, अनीता नाग, हीना सिंह, विभा सिंह, दर्पण राय, नंदनी सिंह, निशा गुप्ता, लक्ष्मी पांडे, रेनू राय आदि भक्त योगदान दे रहे हैं।

राजनांदगांव हाफ मैराथन में अशोक गुप्ता को मिला दूसरा स्थान

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  • राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में लगातार पदक जीतकर बढ़ाते है राजहरा का नाम

दल्लीराजहरा:–छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले में 7 जनवरी को विशाल हाफ मैराथन का आयोजन किया गया जिसमे प्रदेश भर से हजारों धावको ने हिस्सा लिया।51 से 60 वर्ग आयु में चिखलाकसा वार्ड क्रमांक 60 इंदिरा कॉलोनी निवासी अशोक गुप्ता ने दूसरा स्थान प्राप्त कर पूरे प्रदेश में दल्लीराजहरा का नाम रोशन किया।

अशोक गुप्ता इससे पूर्व में भी अनेकों राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेकर लौह नगरी दल्लीराजहरा का मान बढ़ाया है।सामान्य परिवार से जुड़े ,बिना किसी बाहरी सहायता मिले अशोक गुप्ता रोजाना समय निकालकर अभ्यास करते है।वर्तमान में अशोक गुप्ता राजहरा माइंस में ठेका श्रमिक है लेकिन फिर वो निरंतर राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेते हैं और लोगों को खेल के प्रति जागरूक और इसके फायदे बताते हैं।

अशोक गुप्ता इससे पूर्व में भी हाफ मैराथन और मास्टर एथलेटिक्स प्रतियोगिता में पदक जीत चुके है और उनका लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में भारत के लिए खेल कर पदक जीतना है।

केन्द्रीय राज्य शिक्षा मंत्री अन्नपूर्णा देवी को शिक्षकों की समस्याओं के समाधान हेतु सौंपा ज्ञापन, मुश्ताक अहमद

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अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य मुश्ताक अहमद ने प्रेस विज्ञप्ति जारी बताया कि केन्द्रीय राज्य शिक्षा मंत्री अन्नपूर्णा देवी के कार्यलय दिल्ली पहुंच कर सांसद मोहन मंडावी के नेतृत्व में प्रतिनिधि मंडल ने उन्हें छत्तीसगढ़ राज्य के दुर्ग जिले और बालोद जिले में स्थित निजी स्कूलों के प्रबंधन द्वारा किये जा रहे शिक्षकों के शोषण को रोकने एवं उनके स्थिति को सुधारने बाबत ज्ञापन सौंपा।
मुश्ताक अहमद ने बताया कि उन्होंने अपने ज्ञापन में छत्तीसगढ़ प्रांत के दुर्ग और बालोद जिले में स्थित सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन नई दिल्ली (सीबीएसई) से सम्बद्धता प्राप्त, कई निजी स्कूलों में स्कूल
प्रबंधन द्वारा शिक्षकों / शिक्षिकाओं का शोषण किया जा रहा है और विरोध करने पर सीधे सीधे नौकरी से निकाल दिए जाने की धमकी देते हुए उनका मुँह बंद कराया जा रहा है। और बहुत ही कम वेतन शिक्षकों को दिया जा रहा है।इस विषय में दुर्ग और बालोद जिले के बहुत से शिक्षकों से ये शिकायत मिली थी कि स्कूल प्रबंधन द्वारा न केवल शिक्षकों / शिक्षिकाओं के साथ दुर्व्यवहार किया जाता है बल्कि विरोध करने पर नौकरी से निकाल देने की धमकी भी दी जाती है। इस सन्दर्भ में जानकारी लेने पर पता चला कि –
(1) 07-08 वर्षों से एडहॉक के रूप में नियुक्त शिक्षक/ शिक्षिकाओं को नियमित नहीं किया जा रहा है और पूछने पर प्रबंधन द्वारा यही कहा जाता है कि नौकरी करनी है तो एडहॉक में करो वार्ना कहीं और देख लो।
(2) कोरोना काल के बाद स्कूल प्रबंधन द्वारा शिक्षकों को महँगाई भत्ता में होने वाले बढ़ोत्तरी
का लाभ देना बंद कर दिया गया है।
(3) कोरोना काल के बाद बहुत से स्कूल प्रबंधन द्वारा शिक्षकों को मिल रहे अर्जित अवकाश, मेडिकल लीव एवं मेडिकल भत्ता को बंद कर दिया।
(4) स्कूल प्रबंधन दवरा समय पर शिक्षकों को वेतन नहीं दिया जाता है और पूछने या विरोध करने पर नौकरी से निकाल देने की धमकी दी जाती है।
उक्त मामले को दुर्ग जिले के जिला शिक्षा अधिकारी के समक्ष दिनांक 17.08.2023 को
रखते हुए शिक्षकों को न्याय दिलाने की अपील की गयी थी जिसपर जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा ज्ञापन क्रमांक / 11567, दिनांक 23.08.2023 को जांच हेतु कमिटी गठन करने का आदेश पारित किया गया और इसकी सूचना भी मुझे दी गयी। किन्तु अचानक दिनांक 15.09.2023 को जिला शिक्षा अधिकारी दुर्ग के द्वारा एक और आदेश निकाला गया जिसमें दिनांक 23.08.2023 को निकाले गए आदेश को निरस्त करते हुए शाला संचालन समिति के अध्यक्ष / सचिव को शिकायत का निवारण करते हुए कार्यालय को सूचित करने का दिशा-निर्देश दिया गया था। किन्तु आज तक स्कूल संचालन समिति का कोई जवाब नहीं आया है। इस बीच सीबीएसई से सम्बद्ध जिले के अन्य निजी स्कूलों में शिक्षकों की स्थिति की जानकारी लेने पर जो बातें सामने आयीं हैं वह स्कूल प्रबंधन द्वारा न केवल सीबीएसई / माननीय उच्चतम न्यायलय द्वारा समय समय पर दिए गए दिशा-निर्देश / आदेशों की अवहेलना करना दर्शाता है बल्कि स्कूल प्रबंधन द्वारा शिक्षकों का खुलेआम शोषण करना भी स्थापित करता है।
हमारे पास इन तथ्यों के समर्थन में निम्न जानकारियां हैं।
1, बालोद जिले के दल्ली राजहरा में बीएसपी के प्रोजेक्ट के स्कूल डीएवी में बीएसपी प्रबंधन द्वारा निजी पालकों से सीबीएसई के मापदंडों से अधिक फीस लिया जा रहा है और बीएसपी द्वारा जो नान बीएसपी बच्चों के लिए अनुबंध के अलावा सालाना करोड़ों रुपए दिए जा रहे हैं उसे कहा खर्च किया जा रहा है इसका हिसाब बीएसपी प्रबंधन नहीं दे रहीं हैं जिससे लगता है कि इन करोड़ों रुपए का बंदरबांट कर लिया गया है।
(2) जिले के लगभग सभी निजी स्कूल द्वारा बच्चों को लाने जाने हेतु बस उपलब्ध कराया
जाता है। किन्तु सीबीएसई के गाईड लाइन एवं माननीय उच्चतम न्यायलय के निर्देशानुसार
किसी भी बस में बच्चों के सुरक्षित आवागमन हेतु बस में प्रशिक्षित महिला अटेंडेंट का होना
आवश्यक है किन्तु स्कूल प्रबंधन द्वारा ऐसा न करते हुए शिक्षकों शिक्षकाओं से ही अटेंडेंट का
भी कार्य कराया जा रहा जो कि न केवल सीबीएसई के गाईड लाइन की स्पष्ट अवहेलना है। बल्कि शिक्षकों का शोषण भी है।
(3) इस बीच यह भी जानकारी मिली है कि जिले के लगभग सभी निजी स्कूलों में शिक्षकों को
क्लास में बैठने के लिए कुर्सी भी नहीं दी जाती है और उन्हें पूरे समय खड़े खड़े ही पढ़ना और
अपना टिफिन खाना पड़ता है। विरोध करने पर नौकरी से निकालने की धमकी भी दी जाती है।
(4) किसी भी संस्थान में कार्यरत व्यक्ति के लिए अर्जित अवकाश, मेडिकल लीव और मेडिकल भत्ता एक संवैधानिक हक है और उसे दबाने का किसी भी स्कूल प्रबंधन को अधिकार नहीं है।
उक्त शिकायतें लगभग दुर्ग और बालोद जिले के सभी निजी स्कूल संस्थानों में व्याप्त है जिससे इन
स्कूलों के शिक्षकों के अंदर कुंठा, भय एवं आक्रोश व्याप्त है और अगर इन ज्वलंत समस्याओं
का निराकरण जल्द से जल्द नहीं किया जाता है तो निश्चित तौर पर शिक्षकों को मानसिक / आर्थिक / शारीरिक वेदना से गुजरना पड़ेगा जिसके कारण उनके कार्य क्षमता पर भी
विपरीत प्रभाव पड़ेगा।
मुश्ताक अहमद ने आगे बताया कि केन्द्रीय राज्य शिक्षा मंत्री के सामने उपरोक्त तथ्यों के प्रकाश में लाकर आग्रह किया गया है कि उपरोक्त शिकायतों के जांच हेतु
सीबीएसई को निर्देशित करें और उक्त जांच के दौरान शिकायतकर्ता को भी अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने की अनुमति देवें ताकि जांच में पारदर्शिता बनी रहे और शिक्षकों को मानसिक / आर्थिक / शारीरिक यातना से मुक्ति मिले।
ज्ञापन सके। प्रतिनिधि मंडल में मुख्य रूप सांसद मोहन मंडावी, अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य मुश्ताक अहमद, खदान मजदूर संघ भिलाई संबद्ध भारतीय मजदूर संघ के अध्यक्ष एम पी सिंग उपस्थित थे।

धन्यवाद ।
भवदीयु
मुस्ताक अहमद अंसारी
मोबाइल – 9406087222

mustak.ahmad003@gmail.com

बस्तर की हसीन वादियों में हो रहा पर्यटकों की सेहत से खिलवाड़…!

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  •  वसूला जा रहा है मोटा शुल्क, नहीं होती सफाई
  •  तीरथगढ़ टूरिस्ट स्पॉट में उगाही व बदहली का खेल
    अर्जुन झा
    जगदलपुर बस्तर की हसीन वादियां अपने आप में खूबसूरत नजारे, कुदरत की बेमिसाल नेमतें और पर्यावरण की अनुपम छटा समेटी हुई हैं। अब इन सभी प्रकृति प्रदत्त उपहारों पर ग्रहण लगता जा रहा है। सेहत की बेहतरी और दिलो दिमाग को तरोताजा रखने की ख्वाहिश लिए बस्तर आने वाले सैलानियों को अब मायूसी हाथ लगने लगी है। उनकी सेहत पर उल्टा असर पड़ रहा है। वजह है बस्तर के टूरिस्ट स्पॉट्स में उगाही करने वाले लोगों की गैर जिम्मेदाराना हरकत।
    प्रकृति ने बस्तर संभाग पर अपना पूरा खजाना लुटा दिया है। हरी भरी हसीन वादियां, ऊंचे ऊंचे दरख्त, कलरव करते रंग बिरंगे पक्षी, कुलांचे मारते हिरणों के झुंड, कलकल बहती नदियां आसमान को चूमते पहाड़ और हाथियों जैसे चिंघाड़ते जलप्रपात क्या कुछ नहीं है बस्तर में। कुदरत ने अपने सबसे खूबसूरत नजारों का तोहफा दे रखा है बस्तर को। यही वजह है कि भारत के हर राज्य के और दूसरे देशों के लाखों सैलानी हर साल बस्तर पहुंचते हैं। यहां की खूबसूरत वादियों में तनाव और थकान भरी जिंदगी के कुछ हसीन पल सुकून से गुजारने की चाहत लिए बस्तर आने वाले घरेलू और विदेशी पर्यटकों की सेहत से अब खुलेआम खिलवाड़ किया जाने लगा है। बस्तर के अमूमन सभी टूरिस्ट स्पॉट्स में पर्यटकों से भारी भरकम शुल्क लिया जाता है, मगर इन पर्यटन स्थलों की सफाई व्यवस्था पर जरा भी ध्यान नहीं दिया जा रहा है। पर्यटन स्थल बजबजाती गंदगी और कूड़े के ढेरों की वजह से बीमारियों का घर बनते जा रहे हैं। सुप्रसिद्ध पर्यटन स्थल तीरथगढ़ का भी बड़ा बुरा हाल हो गया है। तीरथगढ़ वाटर फॉल का दीदार करने रोजाना सैकड़ों की तादाद में पर्यटक पहुंचते हैं। पर्यटक अपने साथ खाने – पीने का सामान, पानी की बोतलें आदि लेकर आते हैं। खाने पीने के बाद झिल्ली पन्नी, रेपर, कागज, पानी की बोतलों को वहीं छोड़ जाते हैं। इसी तरह तीरथगढ़ वाटर फॉल के आसपास पिकनिक मनाने वाले पर्यटक भोजन पकाने और खाने के बाद अंगीठी, कोयला, जूठन आदि को वहीं पर छोड़ जाते हैं। आज आलम यह है कि तीरथगढ़ वाटर फॉल टूरिस्ट स्पॉट कचरे और गंदगी से भरता जा रहा है। जूठन सड़कर बदबू फैला रही है। जहां – तहां बिखरे कचरे, पसरी गंदगी और उठती बदबू से वाटर फॉल के आसपास का हिस्सा प्रदूषण की चपेट में आ गया है। सेहत की बेहतरी की उम्मीद लिए तीरथगढ़ पहुंचने वाले पर्यटक वहां से बीमारियां साथ लेकर लौटते हैं। तीरथगढ़ पहुंचने वाले पर्यटकों से प्रति व्यक्ति 100 रू. की वसूली वहां तैनात ग्रामीणों, महिलाओं और युवाओं द्वारा की जाती है। मगर वहां फैलने वाली गंदगी की सफाई बिल्कुल भी नहीं की जाती। शुल्क कचरे और गंदगी की सफाई के नाम पर लिया जाता है। देश विदेश के पर्यटक यहां के खूबसूरत नजारे को कैमरे में कैद करते हैं, लेकिन अब वहां बिखरी गंदगी और कचरे की झलक उनके कैमरों के साथ विदेशों तक पहुंचने लगी है।

    जब सफाई नहीं तो वसूली क्यों?
    बताते हैं कि तीरथगढ़ और आसपास के गांवों के युवाओं एवं महिलाओं के समूह को स्थानीय पंचायत ने शुल्क वसूली की जिम्मेदारी दे रखी है। इसके एवज में समूह को वहां सफाई व्यवस्था बनाए रखनी होती है। मगर वसूली के बावजूद साफ सफाई पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। वहां बिखरी गंदगी ओर कचरे बस्तर की खूबसूरती पर दाग दिखा रहे हैं। समूह के लोगों को बिनता घाटी स्थित पर्यटन स्थल कोरली के मुरिया आदिवासियों से सबक लेना चाहिए। इंद्रावती नदी के तट पर बसा गांव कोरली भी एक दिलकश टूरिस्ट स्पॉट है, जहां सैलानियों की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़तीजा रही है। कोरली के आदिवासी पर्यावरण संरक्षण के प्रति इतने सजग हैं कि वे न खुद कचरा व गंदगी फैलाते हैं और न ही पर्यटकों को ऐसा करने देते हैं। कोरली के मुरिया आदिवासी पर्यटकों से विनम्र आग्रह करते हैं कि झिल्ली पन्नी, कागज के टुकड़े, कैरीबैग, डिस्पोजल गिलास, बोतलें आदि को यहां वहां न फेंककर एक जगह जमा करें। बाद में ग्रामीण इन सारी चीजों को दूर ले जाकर उन्हें नष्ट कर देते हैं। यदि तीरथगढ़ में भी ऐसी ही जन जागृति आ जाए, तो यह इस पर्यटन स्थल के हित में होगा।

घट रही है पर्यटकों की संख्या
बस्तर संभाग में चित्रकोट वाटर फॉल के बाद देसी विदेशी पर्यटकों के आकर्षण का दूसरा सबसे बड़ा केंद्र तीरथगढ़ वाटरफॉल ही है। जो सैलानी बस्तर आते हैं, वे चित्रकोट और तीरथगढ़ के खूबसूरत नजारों का दीदार किए बिना नहीं रहते। इन दोनों जगहों पर जाए बिना बस्तर की यात्रा अधूरी मानी जाती है। ठंड व गर्मी के मौसम और बारिश के आखिरी दिनों में रोज हजारों पर्यटक तीरथगढ़ पहुंचते रहे हैं, लेकिन अब पर्यटकों की संख्या तेजी से घटने लगी है। रोज बमुश्किल सौ सवा सौ पर्यटक वहां पहुंच रहे हैं। इसकी एकमात्र वजह तीरथगढ़ में फैल रही गंदगी है। वैसे तो गंदगी के लिए पर्यटक भी जिम्मेदार हैं, मगर शुल्क वसूलने वाले लोगों की जवाबदेही ज्यादा है। अगर समय रहते शुल्क वसूलने वाले लोग, स्थानीय पंचायत और प्रशासन ने इस ओर ध्यान नहीं दिया तो वह दिन दूर नहीं जब वाटर फॉल का दीदार करने आने वाले पर्यटकों के दीदार के लिए तीरथगढ़ ही तरसने लग जाएगा।

कोरली की हसीन वादियों में उमड़ने लगी है सैलानियों की भीड़

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  • आकर्षक नजारे की खबर छपने के बाद उमड़ी भीड़
  •  बिनता घाटी की गोद में और इंद्रावती के तट पर बसा है अनछुआ पर्यटन स्थल
    -अर्जुन झा-
    लोहंडीगुड़ा कोरली के नदी तट पर और बिनता घाटी की गोद में बसे कोरली गांव के खूबसूरत नजारे अब पर्यटकों को अपनी ओर खींचने लगे हैं। बिनता घाटी की वादियों का चुंबकीय आकर्षण सैलानियों को बरबस अपनी ओर खींचने लगा है। कोरली के गुमनाम अनछुए प्राकृतिक सौंदर्य की ओर इस समाचार पत्र ने प्रकृति प्रेमियों का ध्यान आकर्षित कराया था। अखबार में खबर छपते ही कोरली चर्चा में आ गया और अब वहां सैलानियों की भारी भीड़ उमड़ने लगी है।
    बस्तर संभाग पर कुदरत बहुत ज्यादा मेहरबान और कुदरत ने बस्तर को ढेरों नेमतों से नवाजा है। बस्तर का हर कण प्रकृति की अनुपम गाथा सुनाता है। दर्जनों प्रजातियों के पेड़ों से आच्छादित जंगल, कलकल बहती नदियां, विहंगम जलप्रपात, प्राचीन गुफाएं, शैलचित्र एवं भित्तिचित्र, प्राचीन प्रतिमाएं, आसमान से गलबाहियां करते पहाड़ और पहाड़ों को चूमते बादल.. क्या कुछ नहीं दिया है प्रकृति ने बस्तर को।

ऐसा लगता है कि कुदरत ने बस्तर को दिल खोलकर नेमतों से नवाजा है। बस्तर में विश्व प्रसिद्ध चित्रकोट जल प्रपात, तीरथगढ़ वाटरफॉल, कुटुमसर की गुफा, केशकाल घाटी का विहंगम दृश्य, बैलाडीला की पहाड़ियों पर विचरण करते कपसीले और स्याह बादलों के झुंड, प्राचीन और विशालकाय भगवान गणेश की अलौकिक प्रतिमा, दंतेवाड़ा स्थित मां दंतेश्वरी का पावन धाम, कांकेर स्थित मां कंकालिन के दिव्य दरबार के साथ ही अनगिनत दर्शनीय, रमणीय और पूज्यनीय स्थल हैं। इन जगहों पर आकर लोग अपना अतीत भूल जाते हैं, वर्तमान में खो जाते हैं और सुनहरे भविष्य का तानाबाना बुनते हैं। बस्तर की हसीन वादियों में बारहों माह सैलानियों की आमदरफ्त लगी रहती है। देशभर के और विदेशी सैलानीबड़ी संख्या में बस्तर आते हैं। बस्तर के पर्यटन मानचित्र में अब एक नया नाम जुड़ गया है। वह है बिनता घाटी की वादियों में इंद्रावती नदी के तट पर बसा और विशाल पहाड़ों से घिरा गांव कोरली। यह अनचिन्हा पर्यटन स्थल सैलानियों को अपनी ओर धीरे धीरे ही सही आकर्षित जरूर करने लगा है। बस्तर जिला मुख्यालय जगदलपुर से लगभग 80 किमी दूर स्थित बिनता घाटी की छटा तो देखते ही बनती है, इंद्रावती नदी के तट पर बसे लोहंडीगुड़ा विकासखंड की ग्राम पंचायत भेजा के आश्रित गांव कोरली का भी नजारा दिल की गहराइयों में उतर जाता है। कोरली प्रकृति के उपहारों से समृद्ध गांव है। कलकल करती इंद्रावती नदी इस गांव की धरा का आचमन करती हुई सुकमा जिले की ओर आगे बढ़ जाती है। कोरली के पास नदी का नजारा बड़ा ही मनभावन है। पहाड़ों से घिरे कोरली में आकर इंद्रावती नदी ठहर सी जाती है, मानो उसे भी कोरली से लगाव हो गया हो। गर्मी के दिनों में झुलसाती गर्म हवाएं नदी के जल का स्पर्श पाकर शीतल बयार में तब्दील हो जाती हैं। गर्मी से बेचैन तन मन इस शीतल बयार से प्रफुल्लित हो उठता है। नदी किनारे से हटने का मन ही नहीं करता। रेतीले तट पर नदी में स्नान करते ग्रामीण और बच्चे बरबस ध्यान खींच लेते हैं। यहां मगरमच्छ भी देखे जा सकते हैं। चट्टानें नदी और कोरली गांव की सुंदरता में चार चांद लगा देती हैं। नदी में नौकयान की भी व्यवस्था है। डोंगियों से नौकयान का लूत्फ पुरसुकून और यादगार बन जाता है।

जितना सुना, उससे ज्यादा पाया
इस समाचार पत्र में बिनता घाटी और कोरली के खूबसूरत नजारों की खबर प्रकाशित होते ही कोरली तो जैसे छा गया। यहां अचानक पर्यटकों की भीड़ उमड़ने लगी है। आज रविवार को ऐसी भीड़ रही कि कोरली गांव के लोगों के चेहरे खिल उठे। मेहमाननवाजी और पर्यावरण संरक्षण में अग्रणी भूमिका निभाने वाले कोरली के मुरिया आदिवासी सारा कामकाज छोड़कर मेहमान पर्यटकों की तिमारदारी में जुट गए थे। जगदलपुर और राज्य के विभिन्न शहरों से आज सैकड़ों सैलानी कोरली पहुंचे थे। इन पर्यटकों ने कोरली की सुंदरता के बारे में अपने अनुभव इस संवाददाता को सुनाए। जगदलपुर और आसपास के गांव कस्बों के निवासी धीरज कुमार, विश्वमोहन मिश्र शिक्षक, व्यवसायी पुष्पेंद्र मार्को, उपेंद्र कुमार ने बताया कि कोरली के बारे में अखबार में प्रकाशित आपकी स्टोरी पढ़ने के बाद हम खुद को रोक नहीं पाए और ढूंढ़ते हुए कोरली गांव तक आ ही गए। वास्तव में अद्भूत नजारे हैं यहां। आपने जितना लिखा था, उससे भी कहीं ज्यादा सुंदर दृश्य देखने को मिले हैं हैं यहां। इस नई जगह को पहचान दिलाने के लिए आपको और आपके समाचार पत्र को बहुत बहुत धन्यवाद। कोरली के ही एक ग्रामीण साहू कुमार कश्यप ने कहा कि अगर पर्यटन विभाग बारसूर, चित्रकोट की तरह कोरली को भी छत्तीसगढ़ के पर्यटन मानचित्र से जोड़ देता है, तो ग्राम कोरली की तस्वीर ओर तकदीर दोनों बदल जाएगी। ग्रामीणों को रोजगार मिलेगा, व्यवसायिक गतिविधियां बढ़ेंगी और गांव का समुचित विकास हो पाएगा।

तकनीकी विवि में फीस वृद्धि के खिलाफ कुलपति का फूंका पुतला

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  •  स्वामी विवेकानंद तकनीकी विवि ने की परीक्षा शुल्क में 50 फीसदी वृद्धि
    जगदलपुर अभाविप बस्तर जिला इकाई के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय प्रशासन भिलाई द्वारा परीक्षा फीस में की गई बेतहाशा वृद्धि के खिलाफ यूनिवर्सिटी के कुलपति का पुतला दहन किया।
    अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद बस्तर के कार्यकर्ताओं ने शासकीय इंजीनियरिंग महाविद्यालय जगदलपुर में छत्तीसगढ़ स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय भिलाई के कुलपति एमके वर्मा का पुतला जलाया। इस दौरान अभाविप के प्रदेश सहमंत्री एवं बस्तर जिला संयोजक शैलेष ध्रुव ने बताया कि स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा परीक्षा शुल्क जो में सीधे पचास प्रतिशत तक बढ़ोत्तरी करते अब परीक्षा शुल्क को 1376 रुपए कर दिया गया है। पहले यह शुल्क मात्र 800 रू. था। यूनिवर्सिटी प्रशासन का यह कदम छात्र- छात्राओं के हित में नहीं है। स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय के अधीन इंजीनियरिंग कॉलेजों, फार्मेसी कॉलेजों व पॉलिटेक्निक कॉलेजों में अध्ययनरत 50 प्रतिशत से अधिक विद्यार्थी मध्यम वर्गीय परिवारों से आते हैं। ऐसे में परीक्षा फीस में 500 से 600 रुपए तक की बढ़ोत्तरी किसी भी सूरत में न्याय संगत नहीं है। इसके अलावा छात्रों को परीक्षा शुल्क भरने में भी अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। परीक्षा शुल्क भरने के लिए बहुत ही कम समय सीमा निर्धारित की गई है और इसके बाद लेट फीस के नाम से वसूली अलग की जाती है।

एक में जीरो, बाकी में 90 फीसदी अंक
शैलेष ध्रुव ने बताया कि इस विश्वविद्यालय के बहुत सारे होनहार विद्यार्थियों के एक ही विषय में शून्य अंक आया है। जबकि बाकी सभी विषयों में उन्होंने 90 प्रतिशत तक अंक प्राप्त किए हैं। ऐसा पहली बार नहीं हुआ है। पहले भी ऐसी गड़बड़ी होती रही है। साथ ही इंजीनियरिंग कॉलेजों के छात्र – छात्राओं को मेस राशि का भी आवंटन नहीं किया जाता। मेस के लिए विद्यार्थियों से रकम वसूल की जाती है और कुक के पारिश्रमिक के लिए भी विद्यार्थियों से अतिरिक्त राशि ली जाती है। शैलेष ध्रुव ने कहा कि विवि प्रशासन को जल्द से जल्द इन सभी विषयों पर त्वरित कार्यवाही करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि बढ़ाए गए परीक्षा शुल्क को वापस लिया जाए या कम किया जाए। इस दौरान संजय मुखर्जी, ईश्वर, परिवेद, विवेक, अचिंत्य, सौरभ, समेत अभाविप के अन्य कार्यकर्ता उपस्थित थे।

हसदेव अरण्य का जायजा लेने जा रहे कांग्रेस नेताओं को रोका

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रायपुर हसदेव अरण्य क्षेत्र के प्रभावितों से मिलने जा रहे कांग्रेस नेताओं के काफिले को प्रशासन ने रोक दिया।

बिलासपुर के लिमहा टोल प्लाजा के पास पुलिस के अधिकारियों ने कांग्रेस नेताओं के काफिले को रोका। इस दौरान कांग्रेस नेताओं और अधिकारियों के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज के नेतृत्व में कांग्रेस के कई बड़े नेता सड़क मार्ग से हसदेव अरण्य क्षेत्र के प्रभावितों से मिलने और जंगलों की कटाई व कोल ब्लॉक आवंटन का मुआयना करने जा रहे थे।

मोंगरापाल ने जीता क्रिकेट स्पर्धा का पहला मैच

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जगदलपुर बस्तर के टर्फ ग्राउंड में चल रही सुभाषचंद्र बोस 20-20 कप क्रिकेट प्रतियोगिता का पहला मुकाबला आज तीतिरगांव और मोंगरापाल के मध्य हुआ। मैच मोंगरापाल ने जीता।

टॉस जीतकर तीतिरगांव के कप्तान गौरव जोशी ने पहले फील्डिंग का फैसला किया।हिमांशु सेठिया और वेदप्रकाश ने सलामी बल्लेबाजी की जिम्मेदारी संभाली। दोनों ने पावर प्ले में जमकर तीतिरगांव के बॉलरो की पिटाई की और 4 ओवर में 40 रन जोड़े। मोंगरापाल का पहला विकेट हिमांशु को हितु ने आउट किया। 16 गेंदों पर एक चौका और एक छक्का लगाकर 18 रन बनाए। इसके बाद देवनाथ और वेदप्रकाश ने ताबड़तोड़ बल्लेबाजी करते हुए 17 ओवर तक टीम का स्कोर 137 रनों तक पहुंचाया। वेद ने 69 रन और देवनाथ ने 39 रनों की शानदार पारी खेली। मोंगरापाल की टीम ने 6 विकेट खोकर 20 ओवर में 158 रन बनाए। तीतिरगांव के बॉलर हितु ठाकुर ने 4 ओवर में 28 रन दिए और 2 विकेट चटकाए। 159 रन के जवाब में 18 ओवर में 116 रन बनाकर तीतिरगांव की टीम ऑल आउट हो गई। तीतिरगांव के सलामी बल्लेबाज राजकुमार और विकेट कीपर जिमेश जोशी मैदान पर उतरे। पहले ओवर में राजकुमार को हिमांशु ने जीरो रन पर बोल्ड किया।

दूसरे छोर से जिमेश जोशी ने धीमी पारी खेलते हुए 49 गेंदों में 5 चौकों की मदद से 39 रन बनाए। राहुल की गेंद पर जिमेश पगबाधा आउट हुए। कप्तान गौरव ने शानदार शॉट लगाकर टीम को जीत दिलाने का प्रयास किया। अच्छी बल्लेबाजी कर रहे गौरव को दुलभ ने बोल्ड कर तीतिरगांव की पूरी टीम को बैकफुट में धकेल दिया। गौरव ने केवल 15 गेंदों में 28 रनों की पारी खेली। इसमे 3 छक्के और 1 चौके शामिल हैं। दूसरे मैच में भोपालपट्टनम ने टॉस जीतकर बल्लेबाजी का फैसला किया।विल्सन डेविड और इरफान खान मैदान पर उतरे। लालू की पहली गेंद में विल्सन बिना खाता खोले बोल्ड होकर पवेलियन लौट गए।ओवर की दूसरी गेंद में केपीआर राजू भी शून्य पर आउट हुए। इसके बाद सेंडी और इरफान ने टीम के स्कोर को आगे बढ़ाते हुए 44 रनों तक पहुंचाया। इरफ़ान ने 24 गेंदों में 24 रन बनाए। 4 चौके और एक छक्का लगाकर सेंडी ने 37 रनों की पारी खेली। निचले क्रम में सचिन और अरुण ने ताबड़तोड़ पारी खेलते हुए टीम का स्कोर 152 रनों तक पहुंचाया। अरुण 11 गेंद में 21 रन व सचिन ने 29 रनों की पारी खेली।153 रनों के जवाब में बचेली की टीम 19 ओवर में 115 रनों पर ऑल आउट हो गई।

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