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बस्तर को फिर से सुलगाने की “जिद”, टाकरागुड़ा में धर्मांतरित व्यक्ति के शव दफनाने पर विवाद

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हिंदुओं के श्मशान घाट में शव दफनाने की जिद

अर्जुन झा

जगदलपुर बस्तर में मतांतरित व्यक्तियों के शवों को दफनाने को लेकर विवादों का सिलसिला लगातार जारी है। खुद का कब्रिस्तान रहते हुए भी गांव के सार्वजनिक श्मशान में शव दफनाने की जिद इस बार भी विवाद की वजह बनी है। इस जिद को बस्तर में सामाजिक सदभाव बिगाड़ने की साजिश का हिस्सा और “जिद” माना जा रहा है।

ताजा मामला जिला मुख्यालय जगदलपुर से करीब 30 किलोमीटर दूर मुख्य मार्ग पर स्थित बड़ाजी थाना क्षेत्र की ग्राम पंचायत टाकरागुड़ा के झिटकापारा का है। इस गांव के एक ईसाई मतांतरित व्यक्ति की मृत्यु के बाद अंतिम संस्कार को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया। स्थिति तनावपूर्ण होने पर विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के पदाधिकारी भी मौके पर पहुंचे। झिटकापारा निवासी माड़िया जनजाति के पंडरी नाग की मृत्यु के बाद उसके शव दफनाने को लेकर हंगामा हुआ। ग्रामीणों के अनुसार पंडरी नाग ने कई वर्ष पूर्व धर्म परिवर्तन कर ईसाई धर्म अपना लिया था और तभी से वह उस धर्म का पालन करते आ रह था। पंडरी नाग की मृत्यु के बाद ईसाई समुदाय के कुछ लोगों ने उनका शव गांव के पारंपरिक हिंदू मरघट में दफनाने की मांग रखी। जैसे ही इसकी सूचना गांव में फैली, बड़ी संख्या में ग्रामीण एकजुट होकर मरघट स्थल पर पहुंच गए और विरोध शुरू कर दिया। ग्रामीणों का कहना था कि शव को जगदलपुर के करकापाल स्थित ईसाई कब्रिस्तान में ही दफनाया जाए, जो इस प्रयोजन के लिए चिन्हित है।

पुजारी ने बताई परंपरा

मौके पर मौजूद ग्राम पुजारी ने कहा कि हमारा गांव आदिकाल से सत्य सनातन धर्म और प्रकृति पूजा को मानने वाला है। हमारे पूर्वज पीढ़ियों से देवी देवताओं और धरती की पूजा करते आ रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों से कुछ लोग अपनी मूल संस्कृति और रूढ़ी परंपरा को छोड़कर विदेशी पाश्चात्य संस्कृति अपना रहे हैं। ये लोग गांव के गुड़ी जतरा जैसे पारंपरिक पूजा आयोजनों में शामिल नहीं होते, बल्कि उनका विरोध करते हैं। इससे गांव में आपसी टकराव की स्थिति बनती है। वहीं ग्राम पंचायत के सरपंच बंगाराम बघेल ने कहा कि गांव में इस तरह के मामलों के लिए ग्रामसभा में नियम पारित हैं। साथ ही सुप्रीम कोर्ट का भी स्पष्ट आदेश है कि प्रत्येक धर्म के अनुयायियों के अंतिम संस्कार के लिए सरकार द्वारा अलग स्थान आवंटित किए गए हैं। हम उसी आदेश का पालन कर रहे हैं। ईसाई समुदाय के लिए करकापाल में कब्रिस्तान आवंटित है, इसलिए शव वहीं दफनाया जाना चाहिए।

विहिप-बजरंग दल का विरोध

घटना की सूचना पर विश्व हिंदू परिषद बजरंग दल के विभाग संयोजक सिकंदर कश्यप मौके पर पहुंचे। उन्होंने मिशनरियों पर आरोप लगाते हुए कहा कि हम ईसाई मिशनरियों के मंसूबों को किसी भी हाल में सफल नहीं होने देंगे। ये लोग शिक्षा और चिकित्सा के नाम पर हमारे भोले भाले आदिवासी भाई बहनों को बरगलाते हैं और उनका धर्मांतरण करा लेते हैं। इसके बाद उनकी ही जमीन पर चर्च बनाते हैं। उनके पट्टे पर लोन निकलवाकर उन्हें कर्ज में फंसा देते हैं। यह अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जिस भाषा में समझेंगे, बजरंग दल उसी भाषा में समझाएगा। वहीं विश्व हिंदू परिषद के जिला सह मंत्री घनश्याम नाग ने कहा कि बस्तर जैसा शांतिप्रिय क्षेत्र अब आए दिन विवादों में घिर रहा है। आदिवासी बेटियों को लव जिहाद में फंसाने, लैंड जिहाद करने, गांव गांव में अवैध चर्च बनाकर सामाजिक रीति नीति को तोड़ने का काम हो रहा है। मानव तस्करी भी बड़ी चालाकी से की जाती है। कुछ माह पहले नारायणपुर से दिल्ली ले जाई जा रही बच्चियों को हमारे संगठन के कार्यकर्ताओं ने रेलवे स्टेशन पर पकड़कर पुलिस के हवाले किया था। जिला सह संयोजक योगेश रैली ने ग्रामीणों से अपील की कि सभी एकजुट रहें और सतर्क रहें। उन्होंने कहा कि यदि कोई भी बाहरी व्यक्ति गांव में आता है तो उसकी सूचना तुरंत नजदीकी पुलिस थाने में दें। इससे किसी भी अप्रिय घटना को समय रहते रोका जा सकेगा। इस दौरान सरपंच बंगाराम बघेल, कमला बघेल, मिकेश्वर, जनपद सदस्य हिड़मा राम मंडावी, बदरू राम, रैयतू राम, लच्छिन राम, अनिल बघेल, सुंदर लाल समेत सैकड़ों की संख्या में ग्रामवासी उपस्थित थे।

नई नहीं है यह “जिद

बस्तर संभाग में मतांतरित हो चुके लोगों के शवों को हिंदुओं के मुक्तिधामों में दफनाने की जिद का यह मामला नया नहीं है। इससे पहले भी संभाग के पचासों गांवों में एक समुदाय विशेष की “जिद” के मामले आते रहे हैं। तीन दिन पहले ही बस्तर जिले के भानपुरी थाना क्षेत्र के ग्राम करंदोला में इसी तरह की घटना हुई थी। यहां धर्म परिवर्तन कर चुकी सेवानिवृत शिक्षिका रुक्मणि कुर्रे के शव को वन विभाग की भूमि पर दफनाने की कोशिश की जा रही थी। आरोप है कि वन विभाग की तार फेंसिंग और बाड़ को तोड़ कर करीब 5 डिसमिल जमीन को कब्रगाह में तब्दील करने की कोशिश की जा रही थी। बता दें कि करकापाल में मसीही कब्रिस्तान रहते हुए भी सरकारी जमीन और हिंदुओं के श्मशान घाटों में मतांतरित लोगों के शवों को दफनाने की ऎसी जिद से जाहिर होता है कि बस्तर को फिर से सुलगाने की साजिश रची जा रही है।

वन मंत्री केदार कश्यप ने तेंदूपत्ता संग्राहक परिवारों के 8,631 प्रतिभावान विद्यार्थियों को वितरित की 12.26 करोड़ की छात्रवृत्ति

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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में शिक्षा मजबूती की बड़ी पहल: कश्यप

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ सरकार वनांचल एवं तेंदूपत्ता संग्राहक परिवारों के सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक सशक्तिकरण की दिशा में निरंतर प्रभावी कार्य कर रही है। इसी क्रम में आज नवा रायपुर में आयोजित कार्यक्रम में वन मंत्री केदार कश्यप ने छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज सहकारी संघ मर्यादित द्वारा संचालित छात्रवृत्ति योजना के तहत 8,631 प्रतिभावान विद्यार्थियों को ऑनलाइन माध्यम से 12 करोड़ 26 लाख से अधिक की छात्रवृत्ति राशि वितरित की।

इस अवसर पर वन मंत्री केदार कश्यप ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके दिशा-निर्देश में राज्य सरकार समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास और शिक्षा का लाभ पहुंचाने के संकल्प के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि वनांचल के बच्चों को शिक्षा से जोड़ना और उन्हें आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि राज्य शासन का उद्देश्य केवल लघु वनोपज संग्रहण तक सीमित नहीं है, बल्कि वनाश्रित परिवारों के सामाजिक, आर्थिक एवं शैक्षणिक सशक्तिकरण को सुनिश्चित करना भी है। छात्रवृत्ति योजनाएं तेंदूपत्ता संग्राहक परिवारों के बच्चों को आत्मविश्वास, अवसर और नई दिशा प्रदान कर रही हैं। वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि जब तेंदूपत्ता संग्राहक परिवार का एक युवा भारतीय वन सेवा जैसी प्रतिष्ठित सेवा में चयनित होता है, तो यह शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं की सार्थकता एवं प्रभावशीलता को भी प्रदर्शित करता है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार शिक्षा, रोजगार और सामाजिक सशक्तिकरण के क्षेत्र में गंभीरता से कार्य कर रही है, जिसका सीधा लाभ वनवासी एवं श्रमिक परिवारों को मिल रहा है।

अजय गुप्ता बने रोल मॉडल

तेंदूपत्ता संग्रहण से भारतीय वन सेवा तक का सफर तय करने वाले अजय गुप्ता आज हजारों विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुके हैं। छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज सहकारी संघ द्वारा संचालित छात्रवृत्ति योजना से मिली आर्थिक सहायता ने उनकी शिक्षा यात्रा को निरंतर बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सीमित संसाधनों और आर्थिक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने स्कूल एवं कॉलेज की शिक्षा पूरी की और आगे चलकर भारतीय वन सेवा जैसी प्रतिष्ठित सेवा में चयनित होकर प्रदेश का गौरव बढ़ाया।यह योजनाएं केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वनाश्रित एवं संग्राहक परिवारों के बच्चों के सपनों को साकार करने का प्रभावी माध्यम बन रही हैं।

चार श्रेणियों में छात्रवृत्ति

छात्रवृत्ति योजना तहत विद्यार्थियों को विभिन्न श्रेणियों में लाभान्वित किया गया, जिनमें मेधावी छात्र पुरस्कार योजना, प्रतिभाशाली छात्रों हेतु शिक्षा प्रोत्साहन योजना, व्यावसायिक शिक्षा हेतु छात्रवृत्ति योजना और गैर व्यावसायिक शिक्षा हेतु छात्रवृत्ति योजना शामिल हैं। इन योजनाओं के माध्यम से कक्षा 10वीं एवं 12वीं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों के साथ-साथ व्यावसायिक एवं गैर-व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में अध्ययनरत छात्रों को आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है।

श्रेणीवार लाभार्थियों एवं राशि का विवरण मेधावी योजना के 1,639 लाभार्थियों को 44.85 लाख रुपए, प्रतिभाशाली योजना में 6,133 लाभार्थियों को 11.39 करोड़ रुपए, व्यावसायिक शिक्षा छात्रवृत्ति योजना में 71 लाभार्थियों को 6.15 लाख रुपए और गैर व्यावसायिक शिक्षा छात्रवृत्ति योजना में 788 लाभार्थियों को 35.72 लाख रुपए की छात्रवृत्ति दी गई। इस प्रकार कुल 8,631 विद्यार्थियों को 12 करोड़ 26 लाख 7 हजार 500 रुपए की राशि वितरित की गई।कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज सहकारी संघ मर्यादित के अध्यक्ष रुपसाय सलाम, उपाध्यक्ष यज्ञदत्त शर्मा, प्रबंध संचालक अनिल कुमार साहू, विभागीय अधिकारी, सहकारी संघ के प्रतिनिधि एवं जनप्रतिनिधिगण उपस्थित रहे। अध्यक्ष रूपसाय सलाम ने कहा कि छात्रवृत्ति योजनाएं वनाश्रित एवं तेंदूपत्ता संग्राहक परिवारों के बच्चों को शिक्षा के माध्यम से आत्मनिर्भर एवं सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। वहीं उपाध्यक्ष यज्ञदत्त शर्मा ने कहा कि संघ द्वारा संचालित ये योजनाएं विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करने के साथ-साथ उनके सपनों को साकार करने का प्रभावी माध्यम बन रही हैं।

डीबी ग्रुप को रेड क्रॉस सोसाइटी जिला बालोद द्वारा उत्कृष्ट समाज सेवा हेतु सम्मान

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बालोद, दिनांक: 11 मई 2026 रेड क्रॉस सोसाइटी जिला बालोद द्वारा समाज सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए डीबी ग्रुप को आज स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम बालाजी रिसॉर्ट, बालोद में संपन्न हुआ।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रेड क्रॉस सोसाइटी के राज्य चेयरमैन श्री तोमन साहू* रहे। अध्यक्षता जिला अध्यक्ष डॉ. प्रदीप जैन ने की। विशिष्ट अतिथि के रूप में जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती तारिणी चंद्राकर, नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती प्रतिभा चौधरी एवं नगर पालिका उपाध्यक्ष श्री कमलेश सोनी सहित अन्य गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। डीबी ग्रुप की उपलब्धि:डीबी ग्रुप द्वारा विगत 11 वर्षों में 7000 से अधिक यूनिट रक्तदान कर समाज सेवा का अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया गया है। समूह द्वारा समय-समय पर रक्तदान शिविर, स्वास्थ्य जागरूकता अभियान एवं आपदा राहत कार्यों में सक्रिय भागीदारी निभाई जाती रही है।मुख्य अतिथि श्री तोमन साहू ने अपने उद्बोधन में कहा कि “डीबी ग्रुप का कार्य युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणादायक है। 7000 यूनिट रक्तदान का अर्थ है हजारों जिंदगियों को बचाना।” जिला अध्यक्ष डॉ. प्रदीप जैन ने डीबी ग्रुप के समस्त सदस्यों को बधाई देते हुए भविष्य में भी इसी तरह समाज सेवा करते रहने का आह्वान किया।कार्यक्रम में डीबी ग्रुप के प्रतिनिधियों को अतिथियों द्वारा स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर रेड क्रॉस सोसाइटी के सदस्य, समाजसेवी एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।

धान नहीं बेच पाए ढाई लाख किसानों का धान सुशासन तिहार में खरीदे साय सरकार: जावेद खान

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जगदलपुर प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता जावेद खान ने छत्तीसगढ़ सरकार से सुशासन तिहार में प्रदेश के 2 लाख 41 हजार 6 सौ 57 धान बेचने से वंचित किसानों की समस्याओं के निराकरण की मांग की है। उन्होंने कहा है कि प्रदेश में कुल 27 लाख 53 हजार पंजिकृत किसान हैं वहीं इस बार छत्तीसगढ़ प्रदेश में धान खरीदी के दौरान 25 लाख 11 हजार ही पंजीकृत किसानों ने धान बेच पाया और लगभग 2 लाख 41 हजार 6 सौ 57 किसान धान बेचने से वंचित रह गए। सरकार ने धान खरीदी का लक्ष्य 160 लाख मीट्रिक टन रखा था परंतु संपूर्ण पंजीकृत किसानों के धान न बेच पाने के चलते छत्तीसगढ़ सरकार 140 लाख मीट्रिक टन धान ही खरीद पाई और छत्तीसगढ़ सरकार इस बार भी धान खरीदी के अपने लक्ष्य को पूरा नहीं कर पाई।

जावेद खान ने कहा है कि छत्तीसगढ़ सरकार और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय अपना वादा निभाएं और अपने कहे मुताबिक किसानों का एक-एक दाना धान को खरीदें। प्रदेश में इतनी बड़ी संख्या में किसानों का धान न खरीदना किसानों के साथ विश्वासघात, वादाखिलाफी है और छत्तीसगढ़ सरकार प्रदेश के ढ़ाई लाख किसानों को कर्ज के बोझ में डालने का कार्य कर रही है। जहां किसान धान की पैदावार के लिए सोसायटी से ऋण लेता है, सोसायटी से उधार में खाद-बीज क्रय करता है वो किसान धान न बिक पाने के चलते कर्ज के बोझ में दबता चला जाता है और आज कहीं ना कहीं छत्तीसगढ़ के 2 लाख 41 हजार 6 सौ 57 किसान भी धान नहीं बिक पाने के चलते कर्ज के बोझ तले दब चुके हैं। एक तरफ सरकार सुशासन तिहार मना कर प्रदेश की जनता की समस्याओं का निवारण करने का दिखावा कर रही है वहीं दूसरी ओर प्रदेश की सबसे बड़ी समस्या ढ़ाई लाख किसानों की धान बिक्री और ऋण की समस्या को इस सुशासन तिहार से दूर रख किसानों के साथ कुठाराघात कर रही है। इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसलिए प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से हम मांग करते हैं कि सुशासन तिहार के अंतर्गत धान बेचने से चूक गए किसानों की समस्याओं को प्रदेश की वर्तमान की सबसे बड़ी समस्या के रूप में स्वीकारते हुए सुशासन तिहार में जोड़ें और सभी किसानों का धान खरीदी करें या फिर उक्त किसानों के सोसायटी के ऋण को तत्काल माफ करने की व्यवस्था बनाएं।

जनता और प्रशासन के बीच सीधे संवाद से समाधान- संजय पाण्डेय

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सुशासन तिहार के अंतर्गत महेश्वरी भवन में समाधान शिविर आयोजित

9 वार्डों के लोग हुए शामिल, मौके पर हुआ त्वरित निराकरण

जगदलपुर:- छत्तीसगढ़ शासन द्वारा आयोजित सुशासन तिहार के अंतर्गत सोमवार को शहर के महेश्वरी भवन में समाधान शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में नगर निगम क्षेत्र के 9 वार्डों के बड़ी संख्या में नागरिक शामिल हुए और अपनी समस्याओं एवं मांगों को प्रशासन के समक्ष रखा। शिविर में पहुंचे लोगों की समस्याओं का मौके पर ही त्वरित निराकरण किया गया, जिससे आमजन में संतोष और उत्साह देखने को मिला।समाधान शिविर में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी वार्ड, गुरु घासीदास वार्ड, अब्दुल कलाम वार्ड, माता संतोषी वार्ड, महेंद्र कर्मा वार्ड, अंबेडकर वार्ड, बलिराम कश्यप वार्ड, अनुकूल देव वार्ड एवं स्वामी विवेकानंद वार्ड के नागरिकों ने भाग लिया। शिविर में विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे और नागरिकों की समस्याओं को गंभीरता से सुनते हुए उनका तत्काल समाधान किया।शिविर में राशन कार्ड, श्रम कार्ड, आयुष्मान कार्ड, बिजली, पानी, साफ-सफाई, आवास योजना सहित विभिन्न जनसमस्याओं से संबंधित आवेदन प्राप्त हुए। कई मामलों का निराकरण मौके पर ही कर दिया गया वहीं अन्य समस्याओं के शीघ्र समाधान के लिए संबंधित विभागों को निर्देशित किया गया।गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ शासन द्वारा 1 मई से 15 जून तक पूरे प्रदेश में सुशासन तिहार मनाया जा रहा है।

इस अभियान के अंतर्गत शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में समाधान शिविर आयोजित कर आमजन की समस्याओं का निराकरण किया जा रहा है। शासन की मंशा है कि नागरिकों को सरकारी कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें और उन्हें एक ही स्थान पर विभिन्न योजनाओं एवं सेवाओं का लाभ उपलब्ध हो सके।शिविर के दौरान पात्र हितग्राहियों को शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं से भी जोड़ा गया। आयुष्मान कार्ड, राशन कार्ड एवं श्रम कार्ड बनाने की प्रक्रिया भी शिविर स्थल पर पूरी की गई, जिससे नागरिकों को त्वरित सुविधा प्राप्त हुई। प्रशासन द्वारा शिविर को जनसहभागिता और जनसुविधा का प्रभावी माध्यम बताया गया।महापौर संजय पांडेय ने कहा कि समाधान शिविर प्रशासन और जनता के बीच सीधा संवाद स्थापित करने का प्रभावी मंच है। उन्होंने बताया कि इन शिविरों में विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी एक साथ उपस्थित रहते हैं, जिससे नागरिकों की शिकायतों और आवेदनों का तत्काल निराकरण संभव हो पाता है। उन्होंने कहा कि राशन कार्ड, आयुष्मान कार्ड, बिजली और पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं से संबंधित समस्याओं का मौके पर समाधान करना प्रशासन की प्राथमिकता है। साथ ही पात्र हितग्राहियों को शासन की विभिन्न योजनाओं से जोड़ने का कार्य भी लगातार किया जा रहा।शिविर में नगर निगम अध्यक्ष खेमसिंह देवांगन, एमआईसी सदस्य सुरेश गुप्ता, लक्ष्मण झा, त्रिवेणी रंधारी, निगम आयुक प्रवीण कुमार वर्मा, पार्षद उर्मिला यादव, आशा साहू, गायत्री बघेल, गिरिजा गुप्ता, खगेन्द्र सिंह ठाकुर, रोशन सिसोदिया, दिलीप दास, राकेश मौर, सुशीला बघेल, अफरोज बेगम, परीसराम बेसरा अन्य मौजूद रहे।

गंगा मुंडा तालाब का निखरेगा सौंदर्य: किरण सिंह देव

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हमने बनाया है हम ही संवारेंगे: संजय पाण्डेय

गंगामुंडा तालाब के विकास कार्यों का हुआ भूमिपूजन, 3.45 करोड़ से होंगे निर्माण कार्य

जगदलपुर मुख्यमंत्री नगरोत्थान योजना के तहत जगदलपुर के ऐतिहासिक गंगामुंडा तालाब के विकास एवं सौंदर्यीकरण के लिए 3 करोड़ 45 लाख 96 हजार की लागत वाले विभिन्न निर्माण कार्यों का भूमिपूजन सोमवार को गंगा मुंडा तालाब स्थित विश्वकर्मा मंदिर के समीप किया गया। कार्यक्रम में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं विधायक जगदलपुर किरण सिंह देव तथा महापौर जगदलपुर संजय पांडे मुख्य रूप से उपस्थित रहे।

इस परियोजना के अंतर्गत तालाब परिसर में पाथवे निर्माण, डामरीकरण तथा टो वॉल निर्माण जैसे कार्य किए जाएंगे। इनमे 1 करोड़ 97 लाख 84 हजार की लागत से पाथवे एवं डामरीकरण तथा 1 करोड़ 48 लाख 12 हजार की लागत से टो वॉल का निर्माण कराया जाएगा।करीब 175 एकड़ क्षेत्र में फैला गंगा मुंडा तालाब जगदलपुर शहर की सांस्कृतिक और प्राकृतिक पहचान माना जाता है। नगर निगम द्वारा समय-समय पर तालाब की सफाई और संरक्षण कार्य किए जाते रहे हैं। विशेष रूप से छठ पर्व के दौरान यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु सूर्य उपासना के लिए पहुंचते हैं, जिससे तालाब का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व और बढ़ जाता है। कार्यक्रम में विधायक किरण सिंह देव ने कहा कि गंगा मुंडा तालाब केवल एक जलाशय नहीं बल्कि जगदलपुर की आत्मा और सांस्कृतिक पहचान है। उन्होंने बताया कि पूर्व में गंगा मुंडा तालाब गहरीकरण कराया गया, पगडंडी पर सीसी रोड बनाई गई, पेड़ पौधे लगाए गए और टो वाल बनाया गया था। वार्डवासियों की मांग पर छठ पूजा को ध्यान में रखते हुए घाटों का निर्माण भी किया गया था। अब निगम की सरकार इस कार्य को आगे बढ़ाते हुए इसका पूर्ण सौंदर्य करण करा रही है। अब गंगामुंडा तालाब को पुनः नया स्वरूप दिया जा रहा है। महापौर संजय पांडे ने कहा कि हमने इसे बनाया था हम ही इसे संवारेंगे। नगर निगम तालाब के संरक्षण और सौंदर्यीकरण के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा कि तालाब क्षेत्र में अवैध निर्माण पर रोक लगाने के साथ-साथ इसे शहर का सबसे सुंदर और स्वच्छ तालाब बनाने का लक्ष्य है। भगवान भोलेनाथ विराजित इस जलाशय मे तालाब के पूरी परिधि में पाथ वे बनाकर चारों तरफ़ लाइटिंग कर स्ट्रीट लाइट लगाई जाएगी। उन्होंने कहा कि इसमें गंदे पानी के प्रवाह को पूरी तरह से रोका जाएगा और तालाब को बरसात के स्वच्छ पानी से भरा जायेगा। आगे चलकर इसमें वाटर एडवेंचर और मोटर बोट का संचालन भी किया जाएगा।

भूमिपूजन कार्यक्रम में निगम अध्यक्ष खेमसिंह देवांगन एवं स्वच्छता सभापति लक्ष्मण झा ने भी अपनी बातें रखी। कार्यक्रम का संचालन राजस्व सभापति संग्राम सिंह राणा ने एवं आभार प्रदर्शन नगर निगम के कार्यपालन अभियंता गोपाल भारद्वाज ने किया। इस अवसर पर परिस बेसरा, आर्येंद्र सिंह आर्य, नरसिंह राव, ललिता बघेल, एमआईसी सदस्य सुरेश गुप्ता, योगेंद्र पांडे, राणा घोष, कलावती कशेर, त्रिवेणी रंधारी, आलोक अवस्थी, पश्चिम मंडल अध्यक्ष प्रकाश झा, पूर्वी मंडल अध्यक्ष अविनाश श्रीवास्तव, मनोहर दत्त तिवारी, अनिल लुक्कड़, दिगंबर राव, पार्षद यशवंत ध्रुव, हरीश पारेख, आशा साहू, खगेंद्र सिंह ठाकुर, श्याम सुंदर बघेल, संतोष गौर, बंसती समरथ, उर्मिला यादव, रोशन सिसोदिया, गिरिजा गुप्ता, गायत्री बघेल, गजेंद्र ठाकुर, मनप्रीत कौर डांगी, अभिलाष यादव, शशिनाथ पाठक, राजपाल कसेर, योगेश मिश्रा, ममता राणा, गीता नाग, माधवी मंडल, बटोई झा, योगेश ठाकुर, विभा सिंह, रंजीता पाणिग्रही, नीलम यादव, कौशल्या क्षत्रिय, रुक्मणी, दिलीप सुंदरानी, विक्रम डांगी, प्रेम यादव, सुरेश कश्यप, मनीष कर्महे, राजा यादव, अखिलेश शुक्ला, मनी विक्रम नायडू, अभिषेक तिवारी, योगेश शुक्ला, मनोज ठाकुर, राधेश्याम पेंद्रे, हरिशंकर झा, रूपेश झा, आनंद झा, मयंक दीवान, मनीष सकलेचा, सुलोचना मांडवी, आशीष करमचंदानी, प्रेम कुमार यादव, बसंत, राजेश श्रीवास, नगर निगम आयुक्त प्रवीण वर्मा, इंजीनियर अशोक कोर्राम, विमल सिंह गोयल सहित भाजपा पदाधिकारी व निगम के अधिकारी, कर्मचारी उपस्थित रहे।

सुशासन तिहार में शिक्षा व्यवस्था बेनकाब, खैरगुड़ा के बच्चों का भविष्य अधूरी छत के नीचे दफ्न

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शिक्षा के अधिकार की यहां उड़ रही हैं धज्जियां

अर्जुन झा-

जगदलपुर बस्तर जिले में जहां एक ओर पूरा प्रशासनिक अमला सुशासन तिहार के जरिए सरकार की योजनाओं का बखान कर रहा है, वहीं दूसरी ओर जिले के खैरगुड़ा से आई एक तस्वीर ने सुशासन के सारे दावों की पोल खोल कर रख दी है। ग्राम पंचायत कुंडगुड़ा मधोता-2 का प्राथमिक शाला भवन इस बात का जीता-जागता सबूत बन गया है कि कागजों पर दौड़ने वाली विकास की गाड़ी जमीन पर कैसे दम तोड़ देती है। जिला खनिज न्यास निधि मद के लाखों रुपये इस स्कूल भवन के लिए स्वीकृत हुए थे, ताकि खनिज प्रभावित क्षेत्र के बच्चों को पढ़ाई के लिए बेहतर माहौल मिल सके। लेकिन आज सालों बीत जाने के बाद भी यहां सिर्फ आधी-अधूरी दीवारें खड़ी हैं। छत का नामोनिशान नहीं है और जो सरिया कभी मजबूत भविष्य की नींव बनने वाला था, वह अब बारिश और धूप में जंग खाकर टूटने के कगार पर है। भवन के चारों तरफ उग आए झाड़-झंखाड़ खुद गवाही दे रहे हैं कि यहां निर्माण कार्य महीनों से नहीं, बल्कि शायद साल भर से ठप पड़ा है।

सबसे दर्दनाक पहलू यह है कि अब जबकि 16 जून से नया शिक्षा सत्र शुरू होने में महज 30 दिन बचे हैं, तब 60 से अधिक मासूम बच्चों के स्वागत के लिए फिर वही एक जर्जर कमरा खड़ा है। उसी एक कमरे में पांचों कक्षाओं के बच्चे एक साथ बैठेंगे, एक ही ब्लैकबोर्ड पर पहली से पांचवीं तक की पढ़ाई होगी। शोर में न कोई सुन पाएगा, न कोई समझा पाएगा। शिक्षा का अधिकार कानून साफ कहता है कि हर बच्चे को उचित भवन, शिक्षक और माहौल मिलना उसका मौलिक अधिकार है, मगर खैरगुड़ा में इस कानून का हर अक्षर उसी कमरे की तरह रोज दरक रहा है। जब बुनियाद ही नहीं होगी तो गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की इमारत कैसे खड़ी होगी। ये बच्चे किस अपराध की सजा भुगत रहे हैं कि सरकार के पास भवन बनाने के लिए डीएमएफ का पैसा तो है, कार्य एजेंसी के रूप में ग्राम पंचायत भी तय है, लेकिन स्कूल उद्घाटन लायक भी नहीं बन पाया है। सवाल यह भी है कि स्वीकृत सारी रकम आखिर कहां गई, किसकी जेब की थाती बन गई? इस पूरी बदहाली पर प्रशासनिक रवैया और भी चौंकाने वाला है। जब इस बदहाल भवन की वस्तुस्थिति जानने के लिए कुंडगुड़ा के सरपंच से संपर्क साधने की कोशिश की गई तो कॉल अनुत्तरित रही। ग्राम पंचायत सचिव ने भी फोन उठाना जरूरी नहीं समझा। शिक्षा विभाग का पक्ष जानने के लिए जब बस्तर के विकासखंड शिक्षा अधिकारी को फोन लगाया गया तो वहां से भी कोई जवाब नहीं आया। सवाल यह है कि जब कार्य एजेंसी और शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अधिकारी ही जनता और मीडिया के सवालों से बच रहे हैं, तो फिर सुशासन तिहार मनाने का औचित्य क्या है?सुशासन का पहला सिद्धांत ही जवाबदेही है, और यहां जवाब देने वाला ही गायब है।

शाबास मंडावी गुरुजी

इस अंधेरे के बीच उम्मीद की एकमात्र किरण प्रधान अध्यापक छन्नू राम मंडावी और गांव का समुदाय है। संसाधनों के अभाव के बावजूद छन्नूराम मंडावी के अथक प्रयासों से इस स्कूल के बच्चे हर साल जवाहर नवोदय विद्यालय और एकलव्य आवासीय विद्यालय जैसी प्रतिष्ठित संस्थाओं में चयनित हो रहे हैं। स्कूल परिसर में पोषण वाटिका लहलहा रही है, बच्चों के लिए खुद का पुस्तकालय भी चलाया जा रहा है। गांव के लोग खुद श्रमदान करके स्कूल को किसी तरह चला रहे हैं। सोचिए, अगर इन बच्चों को एक अदद छत और चार दीवारें मिल जाएं तो ये कहां से कहां पहुंच जाएंगे। यहां कमी हौसले की नहीं है, कमी सिस्टम की नीयत की है। डीएमएफ का पैसा खनिज से प्रभावित इन बच्चों के भविष्य के लिए ही है। अब देखना यह है कि सुशासन तिहार की भीड़ में क्या किसी की नजर खैरगुड़ा के इन बच्चों पर पड़ती है या फिर अगले सत्र में भी ये मासूम उसी एक कमरे के छत के नीचे अपने भविष्य के ताने बाने बुनते रहेंगे?वर्सन

ठीक कर लेंगे व्यवस्था

शाला भवन निर्माण करा रहे ठेकेदार की लापरवाही सामने आई है, लेकिन आगामी शिक्षा सत्र शुरू से पूर्व ही व्यवस्था ठीक करा ली जाएगी।

बालोद पुलिस को बड़ी सफलता, चोरी के मामले में 3 आरोपी गिरफ्तार

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बालोद, 11 मई 2026। जिले के थाना देवरी क्षेत्र अंतर्गत ग्राम परसुली में हुए चोरी के मामले में बालोद पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने सूने मकान में घुसकर सोने-चांदी के जेवरात एवं नगदी चोरी करने वाले तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपियों के कब्जे से लाखों रुपए के जेवरात एवं नगदी बरामद किए गए हैं।

पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, प्रार्थी कमलेश कुमार केशरिया निवासी ग्राम परसुली ने थाना देवरी में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि 26 अप्रैल 2026 की शाम वह अपने परिवार एवं रिश्तेदारों के साथ सगाई कार्यक्रम में शामिल होने अर्जुनी डोंगरगांव गया हुआ था। रात करीब 12:30 बजे घर लौटने पर मुख्य दरवाजे की सिटकनी टूटी मिली तथा आलमारी का लॉकर खुला हुआ था। अज्ञात चोर सोने-चांदी के जेवरात एवं 51 हजार रुपए नगद चोरी कर ले गए थे।मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक योगेश पटेल के निर्देशन में थाना प्रभारी उप निरीक्षक मनीष शेण्डे के नेतृत्व में टीम गठित की गई। जांच के दौरान मुखबिर से सूचना मिली कि गांव के ही तीन युवक घटना के दिन संदिग्ध रूप से घर के आसपास घूम रहे थे।पुलिस ने संदेह के आधार पर भीखम लाल सिन्हा, रामेश्वर उर्फ झम्मन सोनकर और जितेश उर्फ जीतु सोनकर को हिरासत में लेकर पूछताछ की। कड़ाई से पूछताछ करने पर आरोपियों ने चोरी करना स्वीकार कर लिया तथा चोरी किए गए जेवरात को खरखरा नंदी के पास श्मशान घाट में गड्ढा खोदकर छिपाना बताया

पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर सोने का रानी हार, मंगलसूत्र, चांदी की पायल, करधन, बिछिया एवं नगदी रकम बरामद की। आरोपियों के कब्जे से कुल 1 किलो 650 ग्राम चांदी के जेवरात, 27.600 ग्राम सोने के गहने तथा 34,209 रुपए नगद सहित कुल 6 लाख 2 हजार 709 रुपए का मशरूका जप्त किया गया है।गिरफ्तार आरोपियों में —1. भीखम लाल सिन्हा (28 वर्ष)2. रामेश्वर उर्फ झम्मन सोनकर (20 वर्ष)3. जितेश उर्फ जीतु सोनकर (19 वर्ष) सभी निवासी ग्राम परसुली, थाना देवरी, जिला बालोद शामिल हैं।तीनों आरोपियों को न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है।इस कार्रवाई में थाना प्रभारी मनीष शेण्डे, सउनि रामप्रसाद गजबिहे, आरक्षक दिलीप बर्मन, संतोष खुटेल, अवतार महिलांगे सहित साइबर सेल बालोद की टीम की सराहनीय भूमिका रही।

टलनार में सरपंच-सचिव की ऎसी तानाशाही

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पंचायत की तालिका से एक पंच का नाम गायब

कहा सरपंच ने-ज्यादा सवाल करते हो इसलिए बिरादरी से बाहर

बकावंड विकासखंड बकावंड में एक सरपंच और सचिव की तानाशाही का ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पंचायती राज व्यवस्था और साय सरकार के सुशासन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सरपंच और सचिव ने एक निर्वाचित पंच को ग्राम पंचायत की बिरादरी से महज इसलिए बाहर कर दिया है क्योंकि उक्त पंच ग्राम पंचायत की बैठकों में ज्यादा मुखर रहते हैं और हर कार्य का हिसाब मांगते हैं।

मामला बकावंड विकासखंड की ग्राम पंचायत टलनार का है। इस पंचायत में पंचायत पदाधिकारियों की नाम तालिका बनवाई गई है। तालिका में 17 पंचायत पदाधिकारियों के नाम हैं, मगर एक पंच का नाम नहीं लिखवाया गया है। सुशासन तिहार के बीच सरपंच और सचिव की तानाशाही से पंच के आत्म सम्मान पर ठेस पहुंची है। उक्त पंच ने जब तालिका में नाम न लिखवाने का कारण पूछा तो सरपंच का जवाब बड़ा ही चौंकाने वाला आया। सरपंच ने पंच से कहा- तुम सवाल बहुत करते हो, सभी लेन देन पर जवाब मांगते हो अतः ऐसे लोग का नाम नहीं रहेगा, जो मेरी मर्जी से चलेगा,उसका ही नाम यहां लिखा जाएगा। अब देखने वाली बात यह है कि ऐसे तानाशाह सरपंच और सचिव पर जिला पंचायत सीईओ और जनपद पंचायत सीईओ क्या एक्शन लेते हैं?

डॉ. शिरोमणि माथुर की कविता में जिंदगी का सार

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दल्लीराजहरा देश और छत्तीसगढ़ की ख्यातिलब्ध कवियित्री, वरिष्ठ साहित्य साधिका एवं समाजसेविका दल्ली राजहरा निवासी डॉ. शिरोमणि माथुर की नई कविता आई है। “ठूंठ सा जीवन” शीर्षक वाली इस कविता की पंक्तियों में डॉ. माथुर ने हर आदमी के जीवन के सार को पिरोया है। जन मानस को झकझोर देने वाली यह कविता बेहद लोकप्रिय हो रही है। हम अपने पाठकों के लिए डॉ. शिरोमणि माथुर की नई कविता यहां प्रस्तुत कर रहे हैं –

ठूंठ सा जीवन

ठूंठ सा जीवन हुआ है,अब बहारे रूठती है,देख अपनी शक्ल को, अब दरारें दिखती है ।थी कभी बिल्डिंग सुघड़, वो अभी खंडहर हुयी हैपर अभी भी जान बाकी, हिम्मत नहीं कमतर हुयी हैं।काम अब होता नहीं हैं, अनुभव अभी कुछ बड़ गये हैकोई अब सुनता नहीं, सब बड़े अब हो गये है।अब जमाना है बदलता, लोग और परिवेश बदले,बात का लहजा बदलता, अब सभी के वेश बदले।है भलाई चुप रहो अब, भाव के अनुवाद बदले,सब मोबाइल में मगन है, दर्द के संवाद बदले।नाते ऐसे तोड़ते है, जैसे धागा तोड़ते है।फिर अकेले तड़फते है, मन को अपने तोड़ते है।चार पैसे आ गए तो, घर से नाता तोड़ते हैं आ गया संकट कोई तो, जान अपनी छोड़ते हैं।ठूंठ सा जीवन हुआ है, पर न हिम्मत टूटती हैअनुभव हमारे साथ रहता, पर न कश्ती डूबती है।हर उमर आनंद देती, मुस्कुराना आ गया है,हंस कर जीये हैं जिंदगी, मरना हमें अब आ गया है ।

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