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नाइट कर्फ्यू का हो कड़ाई से पालन इस लिए पुलिस अधिकारी उतरे सड़को पर

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जगदलपुर। शहर में नाइट कर्फ्यू लगा है इसका सख्ती से पालन करवाने पुलिस के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक दीपक झा के निर्देशन में पुलिस अधिकारीयो ने शहर में मुख्य चौक चौराहों का निरीक्षण किया एडिश्नल एसपी ओपी शर्मा सीएसपी हेमसागर सिदार, कोतवाली टीआई एमन साहू, बोधघाट टीआई धनंजय सिन्हा, परपा टीआई बी आर नाग, ट्रैफिक टीआई कौशलेश देवांगन समेत अन्य थानों और चौकियों के प्रभारी शामिल रहे।

पुलिस अधिकारियों ने शहर के चांदनी चौक, संजय मार्केट चौक, गोलबाजार चौक, महावीर चौक समेत अन्य जगहों पर निरीक्षण किया आपको बता दे कोरोना संक्रमण पर अंकुश लगाने के लिए जिला प्रशासन की ओर से नाइट क‌र्फ्यू लागू किया गया है। इसके तहत रात आठ बजे से सुबह छः बजे तक अत्यावश्यक सेवा एवं मेडिकल इमरजेंसी को छोड़कर अन्य गतिविधियों पर रोक है पुलिस जे द्वारा शहरों में चौकसी बढ़ाने के साथ साथ रात आठ बजे से पहले ही सभी दुकान बाजार बंद कराये जा रहे हैं एवं लोगों को समय से पहले ही घर जाने को कहा जा रहा है। रात के समय आने जाने वालों पर नजर रखी जा रही है।

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भ्रष्टाचार: आसना पंचायत सरपंच की दास्तान… बिना अनुमति के ही गांव के तालाब की मिट्टी को बेच डाला…

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जगदलपुर… पंचायतों में भ्रष्टाचार की बात कोई नई बात नहीं है शासन द्वारा उपलब्ध कराए गए शासकीय राशि के दुरुपयोग की बातें तो अक्सर चर्चा में होती ही हैं साथ ही पंचायत की संपत्तियों को भी पंचायत के जनप्रतिनिधि और पंचायत सचिव सेंधमारी कर जेब गर्म करने में लगे रहते हैं ऐसा ही एक मामला इन दिनों जगदलपुर जनपद पंचायत के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत आसना में देखने को मिल रहा है दरअसल बस्तर जिला प्रशासन के द्वारा राष्ट्रीय राजमार्ग से लगे बकावंड मार्ग में स्थित आसना मोटल में बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य कराया जा रहा है जिसके अंतर्गत पूर्व से निर्मित बिल्डिंग का मरम्मत कार्य के अलावा पार्क का भी निर्माण किया जाना है इन निर्माण कार्यों के लिए जिला प्रशासन ने ग्राम पंचायत आसना को निर्माण एजेंसी नियुक्त किया है जिसका भरपूर फायदा इन दिनों पंचायत के सरपंच और पंचायत सचिव उठा रहे हैं मोटल में निर्माण कार्य के लिए मिट्टी की आवश्यकता को देखते हुए जिला कलेक्टर महोदय द्वारा पंचायत के जनप्रतिनिधियों से चर्चा उपरांत आसना पार्क से लगे बाघमुंडा तालाब की मिट्टी लाने की सहमति बनी थी इस तालाब का उपयोग ग्रामीण विगत कई वर्षों से समूह के माध्यम से मछली पालन कर आजीविका चलाने के लिए भी कर रहे हैं जिससे पंचायत की संपत्ति बाघमुंडा तालाब का गहरीकरण भी हो जाता और मिट्टी की आपूर्ति भी आसना मोटल को आसानी से हो जाती… गहरीकरण होने से तालाब में मछली पालन करने वाले समूह के सदस्य भी खुश नजर आ रहे थे लेकिन ग्राम पंचायत के जनप्रतिनिधि और पंचायत सचिव ने मिलकर तालाब की मिट्टी को आसना पेट्रोल पंप के बाजू में बन रहे एक बड़े होटल के निर्माण के लिए निर्माण एजेंसी से सांठगांठ कर लाखों की मिट्टी बेच डाली…

ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत ने तालाब की मिट्टी को बिना जनप्रतिनिधियों से चर्चा किए तथा बिना अनुमति के ही लाखों रुपए की मिट्टी व्यवसायिक उपयोग के लिए बेच डाली जिसमें टिप्पर के माध्यम से कई ट्रक मिट्टी का परिवहन एनएच किनारे बन रहे एक बड़े होटल निर्माण के लिए दिया गया… इस मामले को लेकर जब पंचायत सचिव से चर्चा की गई तो उन्होंने कलेक्टर साहब से अनुमति उपरांत ही तालाब से मिट्टी खोदने की बात कही लेकिन सवाल यह उठता है कि बगैर पंचायत के जनप्रतिनिधियों से चर्चा किए ही पंचायत ने कैसे पंचायत के एक बड़े तालाब की मिट्टी को व्यावसायिक उपयोग के लिए बेच डाला… पंचायत प्रतिनिधियों की इस प्रकार

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की मनमानी से ग्रामीणों में रोष व्याप्त है साथ ही साथ ऐसी हरकतों से जिला प्रशासन की छवि धूमिल हो रही है अब देखना यह है कि किसके संरक्षण में पंचायत ने तालाब की मिट्टी बेचने का खेल खेला है और कितनी मिट्टी को व्यवसायिक उपयोग के लिए बेच डाला है खैर यह सब तो जांच का विषय है लेकिन सवाल यह उठता है कि जिला प्रशासन के नाक के नीचे शहर सीमा से लगे पंचायत के एक बड़े तालाब की मिट्टी को बेच डालना और प्रशासनिक अधिकारियों को खबर तक ना होना यह दुर्भाग्यजनक है आसना में निर्माणाधीन मोटल बस्तर जिला प्रशासन का ड्रीम प्रोजेक्ट है जिसमें समय-समय पर बस्तर कलेक्टर द्वारा लगातार दौरा कर निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया जाता रहा है इसके बाद भी बिना किसी अनुमति के इतने बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार को अंजाम देना एक साथ कई सवालों को जन्म दे रहा है |

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Breaking कोरोना के दुसरे चरण में लगातार तीसरे दिन दल्लीराजहरा में हुआ कोरोना ब्लास्ट

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कोरोना की दूसरी लहर में कम्युनिटी स्प्रेड एवं लोगों की लापरवाही से संक्रमितों की संख्या में निरंतर वृद्धि हो रही है बालोद जिले के कुछ क्षेत्र कंटेंटमेंट जोन की श्रेणी में आ चुके है जहाँ जल्दी ही जागरूकता का परिचय नहीं दिया अथवा प्रशासनिक कड़ाई नहीं की गई तो जल्द ही दुर्ग व रायपुर के जैसे बालोद के कई क्षेत्र भी कंटेंटमेंट जोन को घोषित करना पड़ सकता है | कोरोना की दूसरी लहर बालोद जिले के लिए भयावह साबित हो रहा है |

आज डौंडी ब्लाक से कोरोना संक्रमितों की संख्या 87 रही जिसमे दल्ली से 65,  चिखलकसा से 6 और डोंडी ग्रामीण साल्हे कामता खेरवाही से 16

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एंटीजन – 84, आरटीपीसीआर – 03  = 87

दल्ली राजहरा में मिले 65 में से 45 संक्रमितों की वार्डवार जानकारी इस प्रकार है –

वर्तमान कोविड 19 की स्थिति को देखते हुए जिला कलेक्टर द्वारा व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के सम्बन्ध में नया आदेश जारी किया गया है जिसमे समस्त व्यावसायिक प्रतिष्ठान प्रातः 06 बजे से संध्या 06 बजे तक ही खुलेंगे |

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दल्लीराजहरा में इस प्रकार कोरोना संक्रमण को देखते हुए कोविड केयर सेंटर का पुनः संचालन किया गया है और साथ ही 45 वर्ष या उससे अधिक लोगों को कोरोना टीकाकरण के लिए जागरूक किया जा रहा है |

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|| विशेष अनुरोध – सिटी मीडिया नगर के समस्त नागरिकों एवं पाठकों से अनुरोध है कि सोशल डिस्टेसिंग एवं मास्क का सदैव उपयोग करें और फिर से कोविड को महामारी का रूप न लेने दे ||

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जिला कलेक्टर द्वारा आदेशित कोविड 19 के नियंत्रण हेतु धारा 144 के मद्देनजर प्रशासन द्वारा फ्लैग मार्च कर व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को बंद करवाया गया

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दल्लीराजहरा – जिला कलेक्टर द्वारा कोविड-19 नियंत्रण हेतु व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के कार्य अवधि संबंध में आदेश जारी किया गया था | उक्त आदेश के पालन हेतु एसडीएम ऋषिकेश तिवारी तहसीलदार अभिषेक प्रतिमा झा नायब तहसीलदार विनय देवांगन नगरपालिका टीम पुलिस प्रशासन सउनि धरम भुआर्य एवम टीम के द्वारा फ्लैग मार्च कर दुकानों को बंद करवाया गया | संपूर्ण बालोद जिला अंतर्गत दण्ड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा 144 प्रभावशील की गई है।

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हिड़मा तर्रेम से फरार, सुरक्षा बलों ने डाला डेरा, अपहृत जवान को छोड़ने के बहाने लगाये जा सकतें हैं एंबुश, शासन-प्रशासन की सहमति बगैर कई बने बिचौलिया

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बीजापुर जिले के बियाबान जंगलों से एक बड़ी खबर आ रही है कि हिड़मा तर्रेम से फरार हो गया है जबकि उसको पकड़ने के लिए सुरक्षाबलों ने अभी भी तर्रेम में डेरा डाले हुए हैं। दूसरी तरफ यह बात भी सामने आ रही है कि सुरक्षा बलों को फंसाने के लिए अपहृत जवान को मोहरा बनाया जा रहा है जिसको लेकर तरह-तरह की चर्चाओं का बाजार गर्म है।एक बात यह भी सामने आई है कि कुछ लोग राजनीतिक रोटी सेंकने के लिए पत्रकारों के साथ अपहृत जवान की तलाशी में निकलें हैं जिसमें दंतेवाड़ा जिले की महिला व दंतेवाड़ा तथा बीजापुर जिले के कुछ पत्रकार भी शामिल हैं।

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जिले में पूर्ण लाकडॉउन लगाने के लिए युवा कांग्रेस ने कलेक्टर महोदय को लिखा पत्र

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प्रशासन द्वारा सम्पूर्ण बालोद जिला में 7 अप्रेल से 14 अप्रेल 2021 तक लोकडॉउन घोषित किया गया है किंतु सुबह 6 से 6 बजे तक दुकानों को खोलने की अनुमति दी गयी है जिससे बाजार एवम अन्य स्थानों पर काफी भीड़ उमड़ रहा है जो की चिंता का विषय है सोसल डिस्टेंस का भी पालन नही हो रहा है इसलिए हम मांग करते है कि जिले में पूर्ण लोकडॉउन किया जाए या उसे शाम तक कि बजाय 2 बजे तक छूट देकर कड़े रूप से लोकडॉउन लगाया जाए – प्रशांत बोकड़े( यूका सचिव )

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22 जवानों की शहादत के बाद वीरान हुआ जीरा गांव फिर आबाद, ग्रामीणों ने कहा- पहाड़ियों पर गोलियां चलने की आवाज सुन गांव छोड़ पूवर्ती में रहें दो दिन

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मुठभेड़ से पहले जीरा गांव से ही आगे बढ़े थे जवान

अब हालात: इधर कुंआ, उधर खाई जैसे

बीजापुर/जगदलपुर। शनिवार 3 अप्रैल को तर्रेम इलाके के जौनागुड़ा और जीरा गांव में पुलिस और नक्सलियों के मध्य बड़ी मुठभेड़ हुई थी, जिसमें 22 जवानों की शहादत हुई। घटना के तीन दिन बाद संवाददाता ने घटना स्थल पहुंचकर हालात का जायजा लिया तो देखा मुठभेड़ के बाद जो जीरा गांव वीराना पड़ा हुआ था। जहां इंसान तो दूर जानवर भी नजर नहीं आ रहे थे, साल के सबसे बड़े नक्सली हमले के गवाह उसी जीरा गांव में लोग नजर आए।

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गांव में हालात सामान्य दिखे मानो यहां कुछ हुआ ही नहीं। ग्रामीण अपनी दिनचर्या में व्यस्त दिखे तो दर्जनों ग्रामीण तेलंगाना से मजदूरी कर टैक्टरों में लदकर लौटते दिखे। गांव में मुर्गों की बाग सुनाई पड़ रही थी, खेतों में मवेशियों को चरा रहे चरवाहे और महुआ बिनते लोग मानो घटना से बेखबर हो।

संवाददाता ने यहां ग्रामीणों से चर्चा का प्रयास किया तो , कईयों ने बात करने से इंकार कर दिया मगर एक शख्स ने किसी तरह हिम्मत जुटाते बात की। उसका कहना था कि शनिवार की सुबह गांव के लोग गांव में ही थे। फोर्स जीरा गांव से ही आगे बढ़ी थी। जवान जौनागुड़ा की तरफ बढ़े थे। कुछ देर बाद जौनागुड़ा के आगे पहाड़ियों से गोलियां चलने की आवाज सुनाई पड़ी। यह सुन गांव वाले डर गए। डर के चलते गांव वाले अपने साथ खाने पीने के सामान की गठरियां बांध 20 किमी दूर पूवर्ती गांव भाग गए। उसका कहना था कि डर के चलते दो दिनों तक वे पूवर्ती गांव में ही डेरा डाले हुए थे। तीसरे दिन किसी तरह हिम्मत जुटाते सभी ग्रामीण गांव को लौटे।

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यह जरूर पता चला कि गांव में गोलियां चली थी। जवान-नक्सली मारे गए थे। हालांकि अब भी उन्हें दोनों तरफ से डर है। दबी जुबां से कुछ ग्रामीणों का कहना था कि घटना के बाद उनके हालात इधर कुंआ-उधर खाई जैस हो गई हैं।

बीजापुर का जीरा गांव सुकमा की सरहद से लगा हुआ है, यह गांव शनिवार को हुए मुठभेड़ के बाद सुर्खियों में आया। गांव में वैसे तो बुनियादी सुविधाएं नहीं हैं। तर्रेम को जगरगुंडा से जोड़ रही सड़क से महज 10 किमी के दायरे में जीरा गांव समेत तमाम बसे गांवों पर नक्सलियों का दबदबा है। यही वजह रही कि इलाके में नक्सलियों की पुख्ता सूचना पर शुक्रवार-शनिवार की दरम्यानी फोर्स को उतारा गया था। जिसकी सूचना नक्सलियों को मिल गई थी। जिसके बाद नक्सलियों ने बड़ा एम्बुश प्लान करते टीसीओसी के दौरान बड़ी वारदात को अंजाम देकर प्रदेश ही नहीं बल्कि पूरे देश को दहला दिया।

लापता जवान नक्सलियों के कब्जे में, फोटो जारी कर नक्सलियों ने कहा- जल्द किया जाएगा रिहा

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बीजापुर। शनिवार 3 अप्रैल को तर्रेम थाना इलाके के जौनागुड़ा में नक्सलियों से मुठभेड़ में लापता कोबरा जवान राकेश्वर सिंह मन्हास के जीवित होने और उसके अपने कब्जे में होने का दावा नक्सलियों ने किया है। बुधवार को नक्सलियों ने लापता जवान राकेश्वर सिंह की फोटो मीडिया को जारी की। जिसके बाद परेशान राकेश्वर के परिजनों ने थोड़ी राहत की सांस जरूर ली है। नक्सलियों की तरफ से जवान को रिहा करने की बात कही गई है। हालांकि जवान को कब छोड़ा जाएगा नक्सलियों ने यह स्पष्ट नहीं किया है।

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जवान की रिहाई के लिए नक्सलियों की तरफ से प्रतिनिधि मंडल भेजने को कहा गया है। जिसके बाद पुलिस महकमा और सरकार की ओर से इस पर मंथन भी शुरू हो गया है। बहरहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि प्रतिनिधि मंडल में कौन-कौन शामिल रहेंगे। पुलिस व सरकार किसे अपने प्रतिनिधि के रूप में नक्सलियों से संवाद और जवान की रिहाई में योगदान देने किसे भेजेगी, यह स्पष्ट नहीं हो पाया है।

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बहरहाल उम्मीद जताई जा रही है कि अगले दो से तीन दिनों के भीतर जवान की रिहाई हो सकती है। अब इस पर उच्च स्तर पर बैठक का दौर भी जारी है।

कोविड 19 को लेकर छत्तीसगढ़ सरकार का बड़ा फैसला – लग सकता है छत्तीसगढ़ में लॉकडाउन

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रायपुर। छत्तीसगढ़ में कोरोना का दूसरा चरण जिस प्रकार से अपना पैर पसार रहा है स्थिति पर यदि अभी नियंत्रण नहीं रखा गया तो बहुत ही भयंकर परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है | छत्तीसगढ़ के राजधानी रायपुर के आलावा अन्य शहरों में कोरोना संक्रमण के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं. दुर्ग जिले में तो आज से पूर्ण लॉकडाउन लग गया है | कोरोना संक्रमण के साथ ही साथ मौतों का सिलसिला भी बढ़ते जा रहा है | बढ़ते संक्रमण के खतरे को देखते हुए सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. शुक्रवार से राजधानी में लॉकडाउन लगेगा. इस संबंध में आदेश कलेक्टर कुछ ही देर में जारी कर सकते हैं और बाकि अन्य जिलों में लॉकडाउन के सम्बन्ध में जिला कलेक्टर को आदेश दे दिया गया है वे स्वयं लॉकडाउन के सम्बन्ध में निर्णय ले सकते है |

रायपुर जिले में अकेले 2821 कोरोना मरीज सामने आए हैं वहीं 26 लोगों की मौत हुई है.  बालोद जिले में कल 200 से अधिक मरीज मिले हैं और दल्ली में तो 83 मरीज मिले |

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार कोरोना से अब तक 3 लाख 29 हजार 408 लोग ठीक हो चुके है. अभी तक 4,416 लोगों की मौत हुई है. राज्य में एक्टिव मरीजों की संख्या 52,445 है |

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मुख्यमंत्री निवास में चली बैठक के बाद मंत्री रविंद्र चौबे ने बताया कि मुख्यमंत्री ने गृहमंत्री को सख़्ती बरतने के निर्देश दिए हैं. कोरोना चेन तोड़ने के लिए पहले से ज़्यादा सख़्ती बरती जाएगी.

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मृत नक्सलियों को ढोने में उपयोग करने वाला ट्रैक्टर किसका

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जगदलपुर । बीजापुर जिले के तर्रेम इलाके में हुई पुलिस नक्सली मुठभेड़ के दौरान नक्सलियों द्वारा ट्रैक्टर का उपयोग मारे गये एवं घायल नक्सलियों को ले जाने के लिए किया गया है। यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि जिस ट्रैक्टर का नक्सलियों द्वारा उपयोग किया गया था आखिरकार वह ट्रैक्टर किसका था। पुलिस उस ट्रैक्टर मालिक की पतासाजी कर कई रहस्य से पर्दा उठा सकती है और पुलिस को कई सबूत के साथ शहरी मददगारों के नामों का भी खुलासा हो सकता है। ज्ञातव्य हो कि बीजापुर के तर्रेंम इलाके में हुई मुठभेड़ में 22 जवान शहीद हुए है। पुलिस द्वारा दर्जनभर नसलियों के मारे जाने एवं घायल होने का दावा किया गया है। नक्सलियों द्वारा ट्रैक्टर की सहायता से शव एवं घायल नक्सलियों को सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया है।

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ट्रैक्टर से खुल सकता है कई राज

जिस ट्रैक्टर का नक्सलियों द्वारा उपयोग किया गया है उस ट्रैक्टर के मालिक तक पहुंचने में पुलिस अब तक कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रही है। पुलिस उस ट्रैक्टर के मालिक तक पहुंचकर मामले की पड़ताल करे तो कई महत्वपूर्ण सुराग भी पुलिस के हाथ लग सकते है। उस नक्सल प्रभावित इलाके में गिनती के ट्रैक्टर है इसलिए पुलिस को पतासाजी करने में भी कोई परेशानी नहीं होगी। ऐसी खबर है कि उन ट्रैक्टर के पीछे कई राज छिपे है जो पुलिस को नक्सलियों के मददगारों तक पहुंचने में भी मदद मिल सकती है। घटना के चार दिन बाद भी पुलिस उस ट्रैक्टर मालिक की पतासाजी करने में रूचि नहीं दिखा रही है।

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