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जिले में नव पदस्थ डीएसपी गीता वाधवानी द्वारा महिला सेल का विजिटिंग कर आवेदकों के शिकायत का जायजा लेकर निराकरण हेतू दिशा निर्देश दिए गए

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दिनांक 29.09.2022 आज दिनांक 29.09.2022 को पुलिस अधीक्षक महोदय यादव के निर्देशन में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक हरीश राठौर के मार्गदर्शन में डीएसपी श्रीमती गीता वाधवानी द्वारा स्वयं महिला सेल बालोद उपस्थित होकर पारिवारिक मामलों के शिकायत आवेदन का निरीक्षण कर उनके काउंसलिंग निराकरण हेतू उचित दिशा निर्देश दिए गए।

इस दौरान महिला सेल में उपस्थित शिकायतकर्ताओं को महिला संबंधी अपराध, घरेलू हिंसा, उत्पीड़न, दहेज अधिनयम और महिलाओं के अधिकारों के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी साझा की गई, व जिले में महिलाओं को जागरूक करने आगे लगातार अभियान चलाया जाएगा।

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गांवों में होगा खेल मेले का आयोजन

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संसदीय सचिव रेखचंद जैन ने उपनपाल एवं करनपुर पंचायत को सौंपे एक-एक लाख रुपए के चेक
राष्ट्रीय खनिज विकास निगम ने सीएसआर मद से दी है यह रकम
जगदलपुर. राष्ट्रीय खनिज विकास निगम ( एनएमडीसी ) के सीएसआर स्थानीय क्षेत्र विकास निधि मद से खेल मेला के आयोजन हेतु दो ग्राम पंचायतों को एक- एक लाख रुपए के चेक जारी किए गए हैं. ये चेक सरपंच करनपुर तिरुपति नागेश एवं सरपंच उपनपाल कामिनी नागेश को क्षेत्रीय विधायक एवं संसदीय सचिव रेखचंद जैन ने सौंपे.
इस अवसर पर संसदीय सचिव रेखचंद जैन ने कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल आदिवासी संस्कृति और मान्यताओं को सुदृढ़ करने के लिए लगातार कार्य कर रहे हैं. उनके निर्देश पर ही नगरनार स्टील प्लांट का निर्माण करने वाली कंपनी एनएमडीसी अपने सीएसआर मद से सभी प्रभावित ग्राम पंचायतों को मेला, मंडई तथा खेलकूद प्रतियोगिता के आयोजन के लिए राशि उपलब्ध करवा रहा है. उन्होंने कहा कि बस्तर में ग्राम देवी देवताओं एवं मेला मंडई का अपना विशेष महत्व है. हमारी सरकार आदिवासी संस्कृति, सभ्यता एवं मान्यताओं को सुदृढ़ करने के लिए लगातार कार्य कर रही है तथा इस हेतु राशि भी उपलब्ध करवा रही है. युवाओं के शारीरिक एवं मानसिक विकास के लिए खेल मेले का आयोजन भी सभी प्रभावित पंचायतों में किया जाना है. जिसके लिए एक लाख रुपए का चेक प्रदान किया गया है. इस दौरान संसदीय सचिव रेखचंद जैन के साथ जनपद सदस्य जिशान कुरैशी, सरपंच करनपुर तिरुपति नागेश सरपंच, उपनपाल कामिनी नागेश, करनपुर से समधु बघेल, कमल सिंह ठाकुर, फूलसिंह, समलदास, दामोदर नागेश, देवदास नाग, बुधुसिंग नाग एवं उपनपाल से संजय नाग,सत्या कश्यप, जगन दास, हरिबंधु कश्यप, आशाराम गोयल, अर्जुन कश्यप, चरण गोयल, पदम गोयल एवं पंचायत सचिव रघुराज सिंह उपस्थित थे.

उल्टी- दस्त से तीन ग्रामीणों की मौत

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  • नारायणपुर क्षेत्र के राजपुर में फैला रोग, 113 लोग पीड़ित, 9 की हालत गंभीर

जगदलपुर. बीजापुर व नारायणपुर जिले में तथाकथित अज्ञात बीमारी फैलने की खबर के बाद अब नारायणपुर विधानसभा क्षेत्र के ग्राम राजपुर में उल्टी दस्त के प्रकोप की वजह से 3 लोगों की मौत का मामला सामने आया है. जबकि 113 से अधिक लोग बीमार बताए गए हैं, जिनमें से 9 गंभीर लोगों को मेडिकल कॉलेज जगदलपुर रेफर किया गया है. स्वास्थ विभाग के डॉक्टर्स और अन्य कर्मी गांव में कैम्प लगाकर ग्रामीणों का उपचार कर रहे हैं.

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि 3 दिनों के अंदर 113 लोगों का इलाज किया जा चुका है. गांव के लोगों का कहना है कि इस रोग के चलते एक माह के भीतर 3 लोगों की मौत हो चुकी है. मुख्य रूप से डायरिया के ही संक्रमण की बात सामने आ रही है. फिलहाल अधिकारियों ने मौत और बीमारी की वजह को लेकर जांच के बाद ही कुछ कहने की बात कही है. इधर इस मामले में भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने इलाज में लापरवाही बरतने के आरोप लगाए हैं. जानकारी के मुताबिक गांव में गंदे पानी का उपयोग पीने और भोजन पकाने के लिए किए जाने की वजह से यह बीमारी ग्रामीणों में फैली है. गांव में जिस टंकी से पेयजल की आपूर्ति की जाती है, उसकी सफाई ही नहीं कराई जाती. ग्रामीणों का कहना है कि पानी टंकी की सफाई कब हुई थी यह भी ग्रामीणों को नहीं पता. साथी ही गांव में सूअर पालन को भी इस बीमारी से जोड़ा जा रहा है. संभाग मुख्यालय से लगे गांव राजपुर की जब यह स्थिति है तो समझिए कि जहां अधिकारी नहीं पहुंच पाते उन गांवों के लोगों की स्थिति कैसी होगी.

कांग्रेस वर्सेज आरएसएस चुनाव होगा

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अर्जुन झा

जगदलपुर. छत्तीसगढ़ विधानसभा का अगला चुनाव राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ वर्सेज कांग्रेस होगा. राज्य में लगातार दस साल तक शासन कर चुकी भाजपा को पिछले चुनाव में मिली करारी हार की भरपाई इस दफ़े के विधानसभा चुनावों में आरएसएस के दम पर करने की तैयारी चल रही है. यह कदम कांग्रेस के लिए बड़ी मुसीबत का सबब बन सकता है.
छत्तीसगढ़ में आरएसएस काफ़ी गहरी जड़ें जमा चुका है. हाल ही में हुए आरएसएस के बड़े नेताओं के छ्ग प्रवास के बाद इस संगठन की सभी ईकाइयों के मैदानी कार्यकर्ताओं की सक्रियता काफ़ी बढ़ गई है. ख़ासकर आदिवासी बहुल क्षेत्रों में स्वयं सेवकों की सक्रियता देखी जा सकती है. छत्तीसगढ़ वनवासी और आदिवासी बहुल राज्य है. छ्ग के बस्तर, सुकमा, कांकेर, नारायणपुर, बीजापुर, दंतेवाड़ा, बालोद, कवर्धा, राजनांदगांव, कोरिया, जशपुर, सरगुजा, मोहला-मानपुर-अम्बागढ़ चौकी, सरगुजा व कुछ अन्य जिले आदिवासी बहुल हैं. यही जिले इस सूबे की सत्ता की दशा और दिशा तय करते हैं. इस राज्य की सत्ता की चाबी वनवासियों और आदिवासियों के हाथों में ही रहती है. सत्ता – शीर्ष तक पहुंचने के लिए इन दोनों वर्गों के मतदाताओं को साधना जरुरी होता है. इसी को केंद्र में रखते हुए भाजपा ने आगामी चुनावों में आरएसएस के कंधे पर सवार होकर सत्ता शीर्ष तक पहुंचने की मंशा पाल रखी है. जानकारों का कहना है कि ऐसे हालात में छत्तीसगढ़ की सत्ता सम्हाल रही कांग्रेस को चुनौतियों से जूझना पड़ सकता है. भाजपा हमेशा चुनावी मोड पे रहने वाली पार्टी मानी जाती है. यही वजह है कि इस पार्टी के नेता और कार्यकर्त्ता हरदम मतदाताओं के संपर्क में रहते हैं. प्रदेश भाजपा अध्यक्ष अरुण साव के बस्तर व अन्य जिलों के दौरे को इसी परिप्रेक्ष्य में देखा जा रहा है. बताया गया है कि निकट भविष्य में भाजपा के कई शीर्ष नेताओं का छत्तीसगढ़ दौरा प्रस्तावित है.
आदिवासी क्षेत्रों में संघ की पैठ
वनांचलों और आदिवासी बाहुल्य इलाकों में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की गहरी पैठ बन चुकी है. पूरे देश में संघ के 50 लाख से भी अधिक सदस्य हैं, देशभर में प्रतिदिन संघ की 61 हजार शाखाएं लगती हैं. संघ ने वनवासियो और आदिवासियों के उत्थान की दिशा में अपना ध्यान विशेष रूप से केंद्रित कर रखा है. देश के 12 हजार गांवों में विद्या भारती शिक्षण संस्थान संघ द्वारा संचालित किए जा रहे हैं, जहां 32 लाख विद्यार्थी ज्ञानार्जन कर रहे हैं. 52 हजार गांवों में संचालित वनवासी कल्याण आश्रमों के माध्यम से राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ वनवासियों और आदिवासियों के हित में काम कर रहा है. इसके अलावा देशभर में आदिवासी बच्चों के लिए 10 हजार 400 स्कूल चलाए जा रहे हैं. इन स्कूलों में 18 लाख से भी ज्यादा बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं. आरएसएस देश के 27 राज्यों में गरीब विद्यार्थियों के लिए छह हजार एकल विद्यालय तथा गरीबों और आदिवासियों को चिकित्सकीय सुविधा उपलब्ध कराने के लिए पांच हजार सेवा भारती हेल्थ केयर सेंटर भी संचालित कर रहा है. छत्तीसगढ़ में भी आरएसएस के ऐसे कई प्रकल्प संचालित हैं. जिसका लाभ चुनावों में भाजपा को मिल सकता है.
कांग्रेस भी हुई मजबूत
ऐसा नहीं है कि छत्तीसगढ़ में सिर्फ आरएसएस और भाजपा का ही ग्राफ बढ़ा है, बल्कि कांग्रेस की स्थिति भी अपेक्षाकृत काफ़ी मजबूत हुई है. अन्य पिछड़ा वर्ग से ताल्लुक भूपेश बघेल के मुख्यमंत्री बनने तथा आदिवासी नेता मोहन मरकाम के प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद कांग्रेस की साख बढ़ी है. आदिवासी महिला फूलोदेवी नेताम को प्रदेश महिला कांग्रेस अध्यक्ष बनाए जाने से भी कांग्रेस के पक्ष में सकारात्मक असर दिख रहा है. श्री मरकाम बस्तर संभाग की कोंडागांव सीट से विधायक हैं. वहीं फूलोदेवी नेताम भी बस्तर से ही हैं. लिहाजा पार्टी को इसका दोहरा लाभ बस्तर में मिल सकता है. सीएम भूपेश बघेल ने वनवासियों, आदिवासियों, महिलाओं और किसानों के हितार्थ जो योजनाएं चला रखी हैं वे भी बेहद असरकारी सिद्ध हो सकती हैं. भूपेश बघेल केबिनेट में बस्तर को पर्याप्त जगह मिली है. सुकमा के आदिवासी नेता एवं विधायक कवासी लखमा को आबकारी व उद्योग मंत्री बनाया गया है. पड़ोसी बालोद जिले की आदिवासी नेत्री अनिला भेड़िया को महिला एवं बाल विकास मंत्री, जगदलपुर के विधायक रेखचंद जैन को संसदीय सचिव बनाकर सीएम श्री बघेल ने एक तीर से कई निशाने साध लिए हैं. कुल मिलाकर यही कहा जा सकता है कि आसन्न विधानसभा चुनावों में दोनों दलों के बीच मुकाबला बेहद रोमांचक होगा

कांग्रेस वर्सेज आरएसएस होगा चुनाव

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  • छत्तीसगढ़ में बड़ी ही मजबूत पैठ बना चुका है राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ
  • संघ के बड़े नेताओं के छ्ग प्रवास के बाद जुट गए मैदानी कार्यकर्त्ता
  • भाजपा की खोई हुई साख को लौटाने के लिए कवायद हुई तेज

अर्जुन झा

जगदलपुर : छत्तीसगढ़ विधानसभा का अगला चुनाव राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ वर्सेज कांग्रेस होगा. राज्य में लगातार दस साल तक शासन कर चुकी भाजपा को पिछले चुनाव में मिली करारी हार की भरपाई इस दफ़े के विधानसभा चुनावों में आरएसएस के दम पर करने की तैयारी चल रही है. यह कदम कांग्रेस के लिए बड़ी मुसीबत का सबब बन सकता है.छत्तीसगढ़ में आरएसएस काफ़ी गहरी जड़ें जमा चुका है. हाल ही में हुए आरएसएस के बड़े नेताओं के छ्ग प्रवास के बाद इस संगठन की सभी ईकाइयों के मैदानी कार्यकर्ताओं की सक्रियता काफ़ी बढ़ गई है. ख़ासकर आदिवासी बहुल क्षेत्रों में स्वयं सेवकों की सक्रियता देखी जा सकती है. छत्तीसगढ़ वनवासी और आदिवासी बहुल राज्य है. छ्ग के बस्तर, सुकमा, कांकेर, नारायणपुर, बीजापुर, दंतेवाड़ा, बालोद, कवर्धा, राजनांदगांव, कोरिया, जशपुर, सरगुजा, मोहला-मानपुर-अम्बागढ़ चौकी, सरगुजा व कुछ अन्य जिले आदिवासी बहुल हैं. यही जिले इस सूबे की सत्ता की दशा और दिशा तय करते हैं. इस राज्य की सत्ता की चाबी वनवासियों और आदिवासियों के हाथों में ही रहती है. सत्ता – शीर्ष तक पहुंचने के लिए इन दोनों वर्गों के मतदाताओं को साधना जरुरी होता है. इसी को केंद्र में रखते हुए भाजपा ने आगामी चुनावों में आरएसएस के कंधे पर सवार होकर सत्ता शीर्ष तक पहुंचने की मंशा पाल रखी है. जानकारों का कहना है कि ऐसे हालात में छत्तीसगढ़ की सत्ता सम्हाल रही कांग्रेस को चुनौतियों से जूझना पड़ सकता है. भाजपा हमेशा चुनावी मोड पे रहने वाली पार्टी मानी जाती है. यही वजह है कि इस पार्टी के नेता और कार्यकर्त्ता हरदम मतदाताओं के संपर्क में रहते हैं. प्रदेश भाजपा अध्यक्ष अरुण साव के बस्तर व अन्य जिलों के दौरे को इसी परिप्रेक्ष्य में देखा जा रहा है. बताया गया है कि निकट भविष्य में भाजपा के कई शीर्ष नेताओं का छत्तीसगढ़ दौरा प्रस्तावित है.
आदिवासी क्षेत्रों में संघ की पैठ वनांचलों और आदिवासी बाहुल्य इलाकों में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की गहरी पैठ बन चुकी है. पूरे देश में संघ के 50 लाख से भी अधिक सदस्य हैं, देशभर में प्रतिदिन संघ की 61 हजार शाखाएं लगती हैं. संघ ने वनवासियो और आदिवासियों के उत्थान की दिशा में अपना ध्यान विशेष रूप से केंद्रित कर रखा है. देश के 12 हजार गांवों में विद्या भारती शिक्षण संस्थान संघ द्वारा संचालित किए जा रहे हैं, जहां 32 लाख विद्यार्थी ज्ञानार्जन कर रहे हैं. 52 हजार गांवों में संचालित वनवासी कल्याण आश्रमों के माध्यम से राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ वनवासियों और आदिवासियों के हित में काम कर रहा है. इसके अलावा देशभर में आदिवासी बच्चों के लिए 10 हजार 400 स्कूल चलाए जा रहे हैं. इन स्कूलों में 18 लाख से भी ज्यादा बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं. आरएसएस देश के 27 राज्यों में गरीब विद्यार्थियों के लिए छह हजार एकल विद्यालय तथा गरीबों और आदिवासियों को चिकित्सकीय सुविधा उपलब्ध कराने के लिए पांच हजार सेवा भारती हेल्थ केयर सेंटर भी संचालित कर रहा है. छत्तीसगढ़ में भी आरएसएस के ऐसे कई प्रकल्प संचालित हैं. जिसका लाभ चुनावों में भाजपा को मिल सकता है. कांग्रेस भी हुई मजबूत
ऐसा नहीं है कि छत्तीसगढ़ में सिर्फ आरएसएस और भाजपा का ही ग्राफ बढ़ा है, बल्कि कांग्रेस की स्थिति भी अपेक्षाकृत काफ़ी मजबूत हुई है. अन्य पिछड़ा वर्ग से ताल्लुक भूपेश बघेल के मुख्यमंत्री बनने तथा आदिवासी नेता मोहन मरकाम के प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद कांग्रेस की साख बढ़ी है. आदिवासी महिला फूलोदेवी नेताम को प्रदेश महिला कांग्रेस अध्यक्ष बनाए जाने से भी कांग्रेस के पक्ष में सकारात्मक असर दिख रहा है. मरकाम बस्तर संभाग की कोंडागांव सीट से विधायक हैं. वहीं फूलोदेवी नेताम भी बस्तर से ही हैं. लिहाजा पार्टी को इसका दोहरा लाभ बस्तर में मिल सकता है. सीएम भूपेश बघेल ने वनवासियों, आदिवासियों, महिलाओं और किसानों के हितार्थ जो योजनाएं चला रखी हैं वे भी बेहद असरकारी सिद्ध हो सकती हैं. भूपेश बघेल केबिनेट में बस्तर को पर्याप्त जगह मिली है. सुकमा के आदिवासी नेता एवं विधायक कवासी लखमा को आबकारी व उद्योग मंत्री बनाया गया है. पड़ोसी बालोद जिले की आदिवासी नेत्री अनिला भेड़िया को महिला एवं बाल विकास मंत्री, जगदलपुर के विधायक रेखचंद जैन को संसदीय सचिव बनाकर सीएम श्री बघेल ने एक तीर से कई निशाने साध लिए हैं. कुल मिलाकर यही कहा जा सकता है कि आसन्न विधानसभा चुनावों में दोनों दलों के बीच मुकाबला बेहद रोमांचक होगा |

खदान में हो रहें भ्रष्टाचार से नियमित कर्मचारियों का हो रहा नुक़सान, एम पी सिंग

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इन दिनों पूरे सेल में कर्मचारियों के बोनस को लेकर गहमागहमी बनी हुई है। प्रबंधन एक तरफ अपने कर्मचारी विरोधी रवैया को लेकर अडिग है और विगत वर्ष कंपनी के कर पूर्व रूपए 16,039 करोड़ एवं कर पश्चात रूपए 12,015 करोड़ के लाभ होने के बावजूद केवल रूपए 26,000/- बोनस अथवा एक्स ग्रेशिया के नाम पर कर्मियों को देने की बात कर रहा है। वहीँ दूसरी तरफ NJCS में शामिल विभिन्न श्रम संगठनों द्वारा जो मांगें रखी गयीं है वो इस प्रकार से हैं – (1) भा.म.सं. द्वारा S-01 और S-11 के एक महीने का औसत वेतन अर्थात लगभग रूपए 70,000/- (2) एटक द्वारा लाभ का 5%कर्मियों के बीच बांटने की मांग की गयी। (3) इंटुक द्वारा पिछले वर्ष से चार गुना अर्थात रूपए 84,000/-। (4) सीटू द्वारा पिछले वर्ष का तीन गुना अर्थात रूपए 63,000/ (5) एचएमएस द्वारा इंटुक की तरह मांग की गयी है। विगत दो बैठकों में NJCS में शामिल सभी श्रम संगठनों के केंद्रीय नेताओं ने आपस में बैठकर सहमति जताते हुए दिनांक 24.09.2022 को हुए बैठक में रूपए 45,000/- की आखरी मांग की जिसपर असहमति जताते हुए प्रबंधन ने दिनांक 10.10.2022 को पुनः बैठक रखने की बात की।


उक्त बैठक के उपरान्त प्रबंधन के इस कर्मी विरोधी रवैये एवं परम्परानुसार दुर्गा पूजा के पूर्व बोनस अथवा एक्स-ग्रेशिया राशि न मिलने से प्रत्येक इकाई में कर्मियों के बीच सेल प्रबंधन एवं अधिकारीयों को लेकर आक्रोश है और कहीं कहीं तो धरना प्रदर्शन एवं काम बंद करने की भी बात सामने आ रही है। इस तारतम्य में आज दिनांक 28.09.2022 को राजहरा खदान समूह में भी एटक, सीटू और सीएमएसएस द्वारा कुछ समय के लिए काम बंद करते हुए विरोध प्रकट किया गया। इस सम्बन्ध में भा.म.सं. की तरफ से बात रखते हुए खदान मजदूर संघ भिलाई के अध्यक्ष (केंद्रीय) एम.पी.सिंह ने स्पष्ट कहा कि जब किसी भी मुद्दे पर कोई चर्चा चल रही है तो ऐसे में उक्त मुद्दे को लेकर धरना-प्रदर्शन, हड़ताल करना या फिर काम बंद करना पूर्णतः गलत है और मात्र दिखावा के सिवाय और कुछ नहीं है। इससे पहले भी एक दो बार पूजा के बाद ही बोनस का भुगतान हुआ है ऐसे में इस बार अगर देर हो रही है और वार्ता जारी है तो फिर हड़ताल या काम बंद करने का क्या औचित्य है? वैसे भी स्थानीय स्तर पर सीटू/एटक आदि के नेतागण कर्मियों को सिवाय बरगलाने के और कुछ नहीं करते हैं। स्थानीय स्तर पर इनके द्वारा जो राशि मांगी जाती है उससे कहीं बहुत कम पर इनके ही केंद्रीय नेतागण NJCS में प्रबंधन के सामने घुटने टेक देते हैं। वेतन समझौता के समय भी जब सर्वसम्मति से 28% पर्क्स पर सभी नेताओं ने सहमति जताई थी तब बाहर आकर एटक और इंटुक ने 26.5% पर्क्स पर सहमति जताते हुए MOU पर हस्ताक्षर कर दिए और तर्क ये दिया कि पहले ही बहुत देर हो गयी थी इसलिए 26.5% पर तैयार हो गए। लेकिन इस बात का जवाब इन नेताओं के पास नहीं था कि जब कर्मी 05 साल तक एक बेहतर वेतन समझौते के लिए इन्तजार कर सकता है तो फिर क्या 28% पर्क्स के लिए कुछ समय और इन्तजार नहीं कर सकता था?

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इस पूरे प्रक्रिया में सबसे दोहरा चरित्र का परिचय सीटू ने दिया। उसने एक तरफ तो MOU पर हस्ताक्षर नहीं करते हुए विरोध करने का ढोंग किया तो दूसरी तरफ सब-समिति में प्रतिनिधि भेजकर MOU को स्वीकार कर लिया। जवाब मांगने पर सीटू के नेताओं ने कहा कि वार्ता में भाग लेकर ही अपनी बात रखी जा सकती है। ऐसे में हस्ताक्षर न करने का ढोंग क्यों किया गया इसका कोई जवाब आज तक सीटू के नेताओं ने नहीं दिया। अगर सीटू के नेताओं की बात मान ली जावे तो इन्ही के नेताओं और प्रबंधन ने अगली चर्चा के लिए पहले ही 10.10.2022 का तारीख तय कर दिया है। ऐसे में आज काम रोक कर इनके द्वारा जो किया गया है वो दरअसल में देश, कंपनी और कर्मियों के हितों के विपरीत है। अगर ये प्रबंधन पर अपने इस कार्य से कोई दवाब बनाना चाहते हैं तो इसके लिए पहले वे अपने उन शीर्ष नेताओं से बात कर उनपर दवाब बनाएं कि अगर सचमुच में उनके संगठन और उनके नेतागण NJCS में कर्मियों का हित चाहते हैं तो अपने द्वारा किये गए मांग पर पहले अडिग रहना सीखें। स्थानीय स्तर पर दिखावे और आने वाले चुनाव में वोट हासिल करने के लिए अनाप शनाप मांगें रखकर कर्मियों को बरगलाना छोड़ें या फिर अपने केंद्रीय शीर्ष नेताओं से स्पष्ट कहें कि जो मांगें उनके द्वारा प्रबंधन से की जा रही हैं उससे पीछे हटने के लिए वे तैयार नहीं हैं। पिछले वेतन समझौते में भी एक तरफ इनके नेताओं ने बायो मीट्रिक सिस्टम से हाजिरी के लिए लिखित सहमति दे दी तो स्थानीय स्तर पर दिखावा करते हुए इन्ही श्रम संगठनों ने इसका विरोध करना शुरू किया लेकिन अपने नेताओं से ये नहीं पुछा कि ऐसा समझौता इन्होने क्यों किया?

जहाँ तक भा.म.सं. की मांग का प्रश्न है तो भा.म.सं की मांग स्पष्ट है किन्तु NJCS में अपने सहयोगी श्रम संगठनों के प्रबंधनपरस्त नेताओं के द्वारा वेतन समझौते के दौरान कर्मियों के साथ किये गए विश्वासघात से आहत होकर भा.म.सं. इस बार ज्यादा मुखर नहीं हो रहा है किन्तु उसका एक मत स्पष्ट है कि कर्मियों के हितों के साथ अगर इस बार भी ये नेतागण अपने प्रबंधनपरस्ती का परिचय देने का प्रयास करेंगे तो संघ चुप नहीं बैठेगा। वैसे भी इन श्रम संगठनों द्वारा किये गए विश्वासघात से कर्मियों को हुए नुकसान के भारपाई हेतु संघ माननीय ओडिशा उच्च न्यायलय में वाद दाखिल कर चुका है साथ ही प्रबंधन द्वारा कर्मियों के लिए किये गए ग्रेचुइटी सीलिंग के विरुद्ध भी माननीय ओडिशा उच्च न्यायलय में वाद दायर कर चुका है जिसपर सुनवाई की प्रक्रिया जारी है। ऐसे में सीटू द्वारा स्थानीय स्तर पर माननीय उप-मुख्य श्रमायुक्त (केंद्रीय) रायपुर के कार्यालय में औद्योगिक विवाद दायर करने की बात कहना और उसे अखबार के माध्यम से प्रचारित करना कर्मचारियों को सिवाय बरगलाने के और कुछ नहीं है। पूर्व में भी इसी सीटू ने यह प्रचारित किया था कि उसके द्वारा ग्रेचुइटी सीलिंग के विरुद्ध कोलकत्ता हाई कोर्ट में वाद दायर की गयी है जो कि आज तक नहीं की गयी। ऐसे में यह सोंचने की बात है कि जब कोई प्रकरण माननीय उच्च न्यायलय में लंबित है तो उसी प्रकरण को उससे नीचे के किसी भी अदालत में कैसे दायर की जा सकती है?


भारतीय मजदूर संघ का स्पष्ट मानना है कि आज सेल में कर्मियों के हितों पर जो लगातार कुठाराघात हो रहा है उसके पीछे केवल दो मुख्य वजह हैं – (1) अधिकारीयों द्वारा खुलेआम किया जा रहा भ्रष्टाचार (2) श्रम संगठनों के पदाधिकारियों द्वारा इसकी जानकारी होने के बावजूद चुप रहना। एम.पी.सिंह ने कहा कि अगर भा.म.सं ये आरोप लगा रहा है तो उसके पास इन आरोपों के समर्थन में पर्याप्त सबूत हैं। आये दिन समाचार पत्र में देखने को मिलते रहता है कि सेल के किसी इकाई के डायरेक्टर इंचार्ज तो कभी अधिशासी निदेशक तो कभी महाप्रबंधक स्तर के अधिकारीयों को CBI या CVC द्वारा भ्रष्टाचार के लिए गिरफ्तार कर लिया गया है। राजहरा खदान समूह में भी भा.म.सं. ने भ्रष्टाचार का एक ऐसा प्रकरण उजागर किया जिसमें अट्ठारह महीने में रुपये 57,54,836.38 के ठेके में प्रबंधन के सहायक महाप्रबंधक स्तर से लेकर महाप्रबंधक स्तर के अधिकारीयों ने ठेकेदार के साथ मिलकर कंपनी के रुपये 11,83,976.55 का गबन किया। गबन की गयी उक्त राशि ठेके की कुल लागत का 20.5% है। संघ द्वारा लगाए गए उक्त आरोप सिर्फ आरोप ही नहीं हैं बल्कि गबन और भ्रष्टाचार के इस मामले के विरुद्ध संघ ने माननीय बिलासपुर उच्च न्यायलय में जनहित याचिका और रिट पेटिशन के माध्यम से वाद भी दायर की है। उक्त जनहित याचिका के जवाब में प्रबंधन के वकील ने भी यह स्वीकार किया कि सम्बंधित अधिकारी द्वारा उक्त गबन किया गया और संघ की शिकायत के उपरान्त प्रबंधन ने सम्बंधित अधिकारीयों के विरुद्ध कारवाई करते हुए किसी का एक इन्क्रीमेंट रोका है तो किसी को एडवाइजरी पत्र दिया गया है। किन्तु प्रबंधन के इस दलील से संघ सहमत नहीं है और उसके द्वारा माननीय उच्च न्यायलय से यह अपील की गयी है कि न केवल इस भ्रष्टाचार में शामिल अधिकारीयों के विरुद्ध IPC की विभिन्न धाराओं के तहत FIR दर्ज की जावे बल्कि विगत पांच वर्षों में खदान में हुए समस्त मैन-पावर के ठेकों की भी एक स्वतंत्र समिति बनाकर जांच की जावे क्योंकि वर्तमान प्रकरण में बीएसपी के विजिलेंस विभाग के अधिकारीयों की भूमिका भी संदिग्ध रही है।

संघ का यह स्पष्ट मानना है कि आज सिर्फ राजहरा के खदानों में ही एक साल में एक से दो अरब या इससे अधिक का ठेका होता है। इन सभी ठेकों को ठेकेदार द्वारा विभागीय रेट से 15%-25% कम दर पर लिया जाता है और सफलता पूर्वक पूर्ण भी कर लिया जाता है। ऐसे में यह सवाल उठता है कि अगर 15%-25% कम दर पर ठेका लिया जाता है तो फिर ठेकेदार लाभ कैसे कमाता है? इस प्रश्न का जवाब है गबन और भ्रष्टाचार का वह खेल जो यहाँ के अधिकारीगण ठेकेदार के साथ मिलकर खेल रहे हैं जिसका जीता जागता उदाहरण है माननीय उच्च न्यायलय में चल रहा प्रकरण और प्रबंधन की स्वीकारोक्ति। ऐसे में अब कर्मीगण और आम जनता खुद तय कर ले कि अगर सिर्फ राजहरा में ही एक साल में विभिन्न ठेकों के माध्यम से 300-400 करोड़ का गबन और भ्रष्टाचार हो रहा है तो पूरे सेल में क्या हो रहा होगा? सभी श्रम संगठन के नेताओं को इन बातों की जानकारी है लेकिन उनकी चुप्पी यही साबित करती है कि संभवतः इन श्रम संगठनों के स्थानीय स्तर से लेकर केंद्रीय स्तर तक के नेताओं को उनका समुचित हिस्सा मिल जाता है और इसीलिए यह चुप रहते हैं। भ्रष्टाचार के माध्यम से गबन किये गए ये पैसे आखिर किसके हैं? ये पैसा भी कर्मचारियों और श्रमिकों का है जो कि गबन किया जा रहा है। इन बातों से यह स्पष्ट होता है कि वर्ष 2015-2017 तक भी सेल अगर घाटे में था तो उसका मुख्य वजह केवल और केवल यही भ्रष्टाचार था जिसका खामियाजा आम कर्मियों को भुगतना पड़ा लेकिन वेतन समझौते के समय NJCS में अन्य श्रम संगठनों के नेताओं ने प्रबंधनपरस्ती का परिचय देते हुए कर्मियों को उनके वाजिब हक से वंचित रखने का काम किया और आज भी काम बंद करके, हड़ताल करने की बात करके कर्मियों को केवल बरगलाने का काम कर रहे हैं और यह दिखाने का प्रयास कर रहे हैं कि वे ही कर्मियों के सच्चे हितैषी हैं। अंत में उन्होंने सभी कर्मियों से ऐसे प्रबंधनपरस्त और भ्रष्टाचार में सहयोगी श्रम संगठनों से कर्मियों को आगाह करते हुए कहा कि वे ऐसे नेताओं के बहकावे में आकर काम बंद करने, हड़ताल करने आदि जैसे कार्य में संलिप्त न हों। और नेताओं से ये जरूर पूछें कि पिछली जितनी भी हड़तालें ईनके द्वारा की गई है उसमें से नियमित कर्मचारियों की कितनी मांगें पूरी हुई है? आप सभी को पता है जब भी ईस तरह की हड़ताल हुई है खदान के भ्रष्ट ठेकेदार को ही लाभ हुआ है न कि किसी नियमित कर्मचारी को? अब आपको तय करना है कि राजनीति से प्रेरित हड़ताल में शामिल होना है कि नहीं।

यातायात बालोद पुलिस सभी छोटे एवं बडे़ वाहनों में फायर स्टॉप रखने की अपील

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दिनांक 28.09.2022 अपातकाल के समय फायर स्टॉप का प्रयोग कर जान माल के नुकसान से बचा जा सकता है। पुलिस अधीक्षक बालोद जितेन्द्र कुमार यादव के निर्देशन में, श्रीमान् अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक हरीश राठौर एवं उप पुलिस अधीक्षक राजेश बांगडे के मार्गदर्शन एवं यातायात प्रभारी दिलेश्वर चंद्रवंशी के नेतृत्व में दिनांक 28.09.2022 को छोटे मालवाहन वाहन, कार, जीप टैक्सी, मेटाडोर एवं बड़ी मालवाहक वाहनों के मलिकों/चालकों से अपील करते है

कि अपने वाहन में फायर स्टॉप आवश्यक रूप से रखे ताकि आपातकाल के समय आग लगने से होने वाले नुकसान से बचा जा सके , साथ ही यातायात बालोद पुलिस आम नागरिकों से अपील करता है कि ओव्हरलोड़ माल भरकर परिवहन नहीं करे , नाबलिक वाहन चालको को वाहन चलाने न देवे, शराब सेवन कर वाहन नहीं चलायें, रेड़ सिग्नल जंप नहीं करेे, एवं दुपहिया वाहन में तीन सवारी बैठाकर वाहन नहीं चलायें एवं हेलमेट सीट बेल्ट का प्रयोग अवश्य करें।

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सीट बेल्ट प्रयोग करने के 08 फायदेः-

  • सीट बेल्ट हमारी प्राथमिक सुरक्षा के लिए होता हैं। एयरबैग हमे दूसरी सुरक्षा प्रदान करती है। यदि आप सीट बेल्ट नहीं पहनते है तो एयरबैग भी आपकी सुरक्षा नहीं कर पाएगा।
  • सीट बेल्ट केवल लंबी दूरी के लिए ही नहीं है, बल्कि छोटी दूरी के लिए भी है।
  • स्टीयरिंग व्हील से शरीर कम से कम 300 मि.मी. दूर होना चाहिए। सीट पर आराम से बैठें, आगे न झुके।
  • कभी भी अपने गाड़ी में क्रैष या साइड बार न लगवाएं। एससे एक्सीडेंट के दौरान आपकी गाड़ी भले ही सुरक्षित रहे, लेकिन अंदर बैठने वाले यात्री की जान जा सकती है। एयरबैग खुलने में भी समय लग सकता है।
  • एक बार एयरबैग, स्टीयरिंग व्हील, एयरबैग, वायरिंग हार्नेस का इस्तेमाल होने के बाद इन्हे जरूर बदलें।
  • ड्राइवर और यात्री के लिए हेडरेस्ट बहुत जरूरी है। सही जगह पर हेडरेस्ट नहीं होने से एक्सीडेंट के दौरान गर्दन टूट सकती है।
  • सभी यात्री (आगे और पीछे) सीट बेल्ट पहनने के लिए अपने बच्चों को भी प्रेरित करें।
  • कार में ऐसी वस्तुएं ना रखें जो आसानी से लुढ़क सकती हैं और आप पर गिर सकती है।

शिरोमणि माथुर की नई पुस्तक मेरा दल्ली राजहरा विमोचित

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दल्ली राजहरा लौह शक्ति, श्रम, साहित्य, संस्कृति और सदाचार का प्रतीक – अनिला भेंडिया

दल्लीराजहरा। छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में स्थित अनुपम प्राकृतिक वादियों, झरनों के साथ साथ खनिज संसाधनों से परिपूर्ण विश्वविख्यात लौह अयस्क नगरी दल्ली राजहरा की धरा की गौरवगाथा को नए सिरे से रेखांकित करती वरिष्ठ लेखिका श्रीमती शिरोमणि माथुर की पुस्तक ‘मेरा दल्ली राजहरा’ का विमोचन आज यहां माथुर सिनेप्लेक्स में महिला बाल विकास मंत्री श्रीमती अनिला भेंडिया ने किया। इस अवसर पर मंत्री अनिला भेंडिया ने लेखिका श्रीमती शिरोमणि माथुर के प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि दल्ली राजहरा कर्मवीरों की वह भूमि है, जिसे प्रकृति ने सौंदर्य के साथ साथ खनिज संपदा से नवाजा है। यह धरती लोहा पैदा करती है और यहां के लोग लौहशक्ति के प्रतीक हैं। दल्ली राजहरा श्रम, साहित्य, संस्कृति और सदाचार का प्रतीक है।कार्यक्रम में विधानसभा उपाध्यक्ष मनोज मंडावी, बालोद विधायक संगीता सिन्हा, पद्मश्री जेएम नेल्सन, मुख्य महाप्रबंधक माइंस समीर स्वरूप विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित थे। अतिथियों ने पुस्तक को दल्ली राजहरा पर श्रीमती माथुर की अनुपम अभिव्यक्ति निरूपित किया।कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए हस्ताक्षर साहित्य समिति के अध्यक्ष ज्ञानेंद्र सिंह ने कहा कि श्रीमती शिरोमणि माथुर की यह पुस्तक दल्ली राजहरा का जीवंत चित्रण है।

अतिथि वक्ताओं ने कहा कि सामाजिक, साहित्यिक क्षेत्र में सक्रियता के साथ ही राजनीति के माध्यम से जनसेवा के दायरे को विस्तार देने वाली शिरोमणि माथुर ने वर्षों तक कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष के रूप में कार्य किया है। क्षेत्रीय विधायक तथा कैबिनेट मंत्री श्रीमती अनिला भेंडिया के साथ वे क्षेत्र की सेवा में सहयोगी की भूमिका निभा रही हैं। मंत्री भेंडिया और उनके परिवार का दल्ली की धरती से गहरा संबंध है। वे दल्ली के विकास को खास अहमियत देती हैं। दल्ली उनके लिए परिवार है। इसी तरह शिरोमणि माथुर ने राजनीति को कभी जनसरोकार के आड़े नहीं आने दिया। वे राजनीति को सेवा के मंच के रूप में देखती हैं और उनका हमेशा यही सिद्धांत रहा है कि राजनीतिक प्रतिबद्धता केवल राजनीतिक विषयों तक होनी चाहिए। जनसेवा के काम में राजनीति का ध्येय सिर्फ जनसेवा है। इसलिए शिरोमणि माथुर एक राजनीतिक दल की समर्पित नेता होने के बावजूद राजनीति से परे हैं और उनका सभी विचारधारा के लोगों के बीच आत्मीय सम्मान है।

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दल्ली राजहरा के हरदिल अजीज समाजसेवी आलोक माथुर के असमय अवसान से व्यथित मां शिरोमणि माथुर ने ‘अर्पण’ पुस्तक लिखकर पुत्र आलोक की स्मृति को वात्सल्य दिया था। अब उन्होंने अपनी छोटी बहू अनामिका की स्मृति में ‘मेरा दल्ली राजहरा’ पुस्तक दल्ली के उन सभी कर्मवीरों को समर्पित की है, जिनके खून पसीने से दल्ली की धरती दुनिया को लोहा दे रही है और सारी दुनिया दल्लीराजहरा का लोहा मान रही है।

एकलव्य आदर्श विद्यालयों के संभागीय सांस्कृतिक प्रतियोगिता का उद्घाटन किया संसदीय सचिव रेखचंद जैन ने

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एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों के संभाग स्तरीय सांस्कृतिक एवं साहित्यिक प्रतियोगिता के उद्घाटन समारोह में शामिल हुए विधायक जगदलपुर एवं संसदीय सचिव (नगरीय प्रशासन एवं श्रम विभाग) रेखचंद जैन

प्रतिभागी छात्र छात्राओं का उत्साहवर्धन कर लिया सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आनंद

इस अवसर पर विधायक जगदलपुर एवं संसदीय सचिव रेखचंद जैन ने एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों के संभाग स्तरीय सांस्कृतिक एवं साहित्यिक प्रतियोगिता के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि हमारे प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जी की मंशा अनुरूप उत्कृष्ट विद्यालय की स्थापना की गई है एकलव्य आदर्श आवासीय आज शिक्षा के क्षेत्र में नये आयाम स्थापित कर रहा है बस्तर अंचल जैसे विषम भौगोलिक परिस्थितियों जैसे क्षेत्र में यह विधालय छात्र छात्राओं को नये अवसर प्रदान कर रहा है उन्होंने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा की जैसे पढ़ाई जीवन में आवश्यक है उसी तरह सांस्कृतिक एवं साहित्यिक गतिविधियां भी मानसिक विकास के लिए आवश्यक है उन्होंने कहा की….
एकता मिट्टी ने की तो ईंट बनी
ईंट ने की तो दिवार बनी
दीवार ने की तो घर बना
ये सब बेजान चीजें हैं
ये जब एक हो सकते हैं तो हम तो इंसान हैं

इस अवसर पर विधायक जगदलपुर एवं संसदीय सचिव रेखचंद जैन के साथ शहर जिला कांग्रेस कमेटी के महामंत्री गौरनाथ नाग, विधि विभाग के जिलाध्यक्ष अवधेश झा पार्षद सूर्या पाणी, युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता जावेद खान सहायक संचालक डी जी पटेल , डॉ उषा शुक्ला ,बी आर ठाकुर जे ओ ट्रायबल, जोगेंद्र पानीग्राही,निलय ठाकुर,श्रीशिवा रेड्डी,राजेश गुप्ता, लक्ष्मी नाथ गदनिया,पोटाई जी, समेत शिक्षक शिक्षिकाए उपस्थित रहे

जाति प्रमाण पत्र बनवाने ग्रामीणों में उत्साह

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खोटलापाल ग्रामीण सचिवालय के नियमित खुलने से लोगो मे राहत

जनपद सीईओ बस्तर ने किया ग्रामीण सचिवालय की व्यवस्था पर जताया संतोष

जिला कलेक्टर बस्तर के निर्देश पर चल रहे ग्रामीण सचिवालयों का लाभ ग्रामीणों को मिलना आरम्भ हो गया है।जाति प्रमाण पत्र बनवाने के लिए ग्रामीणों को काफी भटकना पड़ता था ।लेकिन नियमित रूप से सचिवालयों में अधिकारियों के आने से लोगो का काम स्थल में ही हो रहा है। जनपद पंचायत बस्तर के ग्राम पंचायत खोटलापाल ग्रामीण सचिवालय में मुख्य कार्यपालन अधिकारी जयभान सिंह राठौर के द्वारा औचक निरीक्षण में ग्रामीण सचिवालय की व्यवस्था पर खुशी जाहिर की ज्ञात हो कि सचिवालय के नोडल अधिकारी बीआरसी बस्तर राजेन्द्र सिंह ठाकुर के द्वारा नियमित रूप से सरपँच सचिव व ग्रामीणों की बैठक लेकर इसके उद्देश्यों की न केवल जानकारी देते है

इसके लाभ की बात भी बताई जाती थी।यही कारण है कि जाति प्रमाण पत्र को लेकर लोगो मे उत्साह देखने को मिल रहा है ।पटवारी,सरपँच, सचिव स्थल में ही आवेदनों को पूर्ण करने में सहयोग कर रहे हैं। इस अवसर पर नोडल अधिकारी राजेन्द्र सिंह ठाकुर,शैलेन्द्र तिवारी, सीएसी योगेश बघेल,कृष्ण ठाकुर,सचिव दिलीप कश्यप, पटवारी नितीश देवांगन,लच्छनी कहन्ती,शियाराम कौशल्या कश्यप,भारतराम , शान्ति,सोमारु पटेल,पंडा राम,धनुर्जय ठाकुर सहित काफी सँख्या में पालक उपस्थित थे।

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