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झलमला से मानपुर की ओर जानेवाली राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 930 के निर्माण कार्य में हुआ जमकर भ्रष्टाचार, अधिकारियों ने आंख मूंदी पहली बारिश सड़क फटी , नालियों से सही पानी निकासी नहीं होने से कई जगह पानी भरा

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कुसुमकसा __ झलमला से कुसुमकसा होकर मानपुर की ओर जाने वाली राष्ट्रीय राजमार्ग 930के तहत सड़क चौड़ीकरण व उन्नयन कार्य में बरती गई अनियमताओ की कलई विगत तीन दिनो से हो रही बारिश ने खोल दी ,कही डामरीकृत सड़को में दरार तो कही सड़क दबने लगी है तो की किसानों के खेतो में बोआई की गई धान की फसल में निर्मित सड़क की मिट्टी,मुरूम बह कर आ रही है ,ग्राम करियाटोला में निर्मित पूल के पास जिस ओर वाल का निर्माण किया गया है उसी और डामरीकृत सड़क में लम्बी दरारें आ गई है तो उक्त सड़क दबने भी लगी है जिसको देखकर दुर्घटना की संभावना को देखते हुए राजहरा पुलिस द्वारा बरसते पानी में बेरीकेट्स लगाया गया किंतु इस और राष्ट्रीय राज मार्ग 930 के अधिकारियों ने और ना ही निर्माण एजेंसी ने सुध ली ,राष्ट्रीय राजमार्ग 930 में आवागमन में हो रही ग्रामीणों की परेशानियों पर शासन प्रशासन की चुप्पी भी चर्चा का विषय बना हुआ है

करियाटोला पूल के पास मुख्य मार्ग से ग्राम करियाटोला आने जाने के लिए बनाई गई एप्रोच डामरीकृत सड़क में दरारे आ गई है तथा सड़क दब गई है व पूल के किनारे डाला गया मिट्टी मुरूम धसने लगी है ,पूल के आगे डामरीकृत सड़क के किनारे की गई सिमेंटीकृत सड़क में लम्बी दरार आ गई है जो निर्माण कार्य के दरम्यान की गई लापरवाही का परिणाम है

उक्त सड़क निर्माण को शासकीय मापदंड के अनुरूप गुणवत्तायुक्त बनवाने के लिए नियुक्त राष्ट्रीय राजमार्ग 930 के अधिकारियों का नियमित निरीक्षण नही करने या निर्माण एजेंसी को खुली छूट दिए जाने के कारण ही गुणवत्ताहीन निर्माण कार्य होता प्रतीत हो रहा है , करियाटोला के ग्रामीणों ने उक्त सड़क निर्माण के दरम्यान राष्ट्रीय राजमार्ग 930 के अधिकारियों के अनदेखी का आरोप लगाते हुए उन पर कार्यवाही करने की मांग की है

संसद में रेलमंत्री से सांसद महेश कश्यप ने बस्तर के लिए मांगी रेल सुविधाएं

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  •  धमतरी से केशकाल, कोंडागांव होते जगदलपुर तक रेल लाइन की मांग
  • बैलाडीला से बीजापुर, गीदम होते गढ़चिरौली को जोड़ने का रखा प्रस्ताव

अर्जुन झा-

जगदलपुर बस्तर लोकसभा क्षेत्र के सांसद महेश कश्यप ने लोकसभा के मानसून सत्र की अपनी पहली पारी में बस्तर के हितों के लिए शानदार बैटिंग की।उन्होंने बस्तर में रेल सेवाओं के विस्तार के लिए बड़े ही सधे हुए अंदाज में मांग रखी।

लोकसभा के मानसून सत्र में भाग लेते हुए बस्तर सांसद महेश कश्यप ने सदन में रेलवे से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दे रखे। पहली बार बड़े सदन में पहुंचे सांसद महेश कश्यप हालांकि अपनी बात रखने के दौरान जरा घबराहट में नजर आए, लेकिन कुछ ही पल में उन्होंने खुद को सम्हाल लिया और बड़े ही सधे हुए अंदाज में एक के बाद एक तीन मांगों के प्रस्ताव सदन में रख दिए। तीनों ही प्रस्ताव रेलवे से जुड़े हैं। सदन में बोलते हुए महेश कश्यप ने कहा – मैं बस्तर लोकसभा क्षेत्र से हूं, जो केरल राज्य और इजराइल व बेल्ज़ियम से भी बड़ा क्षेत्रफल वाला क्षेत्र है। उन्होंने दल्ली राजहरा – रावघाट रेल लाइन का उल्लेख करते हुए कहा कि इस रेल लाइन को जगदलपुर तक विस्तारित करने की जरूरत है। क्योंकि लौह अयस्क भंडार वाला बस्तर रेल सेवाओं के मामले में पिछड़ा हुआ है। सांसद महेश कश्यप ने सदन में बताया कि दल्ली राजहरा रेल लाइन का काम केवटी भानुप्रतापपुर तक ही पहुंच पाया है। जिस फर्म को इस प्रोजेक्ट का ठेका मिला था, उसने काम से हाथ खींच लिया है और अब नया डीपीआर हुआ है। कश्यप ने रेलमंत्री से आग्रह किया कि इस रेल लाइन के कार्य को जल्द और तेज गति से शुरू कराया जाए तथा दल्ली राजहरा -रावघाट रेल लाइन को जगदलपुर तक विस्तारित किया जाए। ताकि यहां के लोगों रेल सुविधा का लाभ मिल सके। सांसद महेश कश्यप ने रायपुर – धमतरी बड़ी रेल लाइन का जिक्र करते हुए कहा कि इस रेल लाइन को धमतरी से केशकाल, कोंडागांव होते हुए जगदलपुर तक विस्तारित करने की मंजूरी दी जाए। इसके साथ ही सांसद महेश कश्यप ने बस्तर संभाग को रेल मार्ग के जरिए महाराष्ट्र से जोड़ने के लिए बैलाडीला से गीदम व बीजापुर होते महाराष्ट्र के गढ़चिरौली तक नई रेल लाइन की स्वीकृति की मांग भी दमदारी के साथ उठाई। उनकी इन मांगों के बीच अन्य सदस्यों ने मेजें थपथपा कर उनकी मांगों का समर्थन किया।

सरकारी कर्मचारी भी अब आरएसएस के कार्यक्रमों में हो सकेंगे शामिल

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जगदलपुर सरकारी कर्मचारी भी अब राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) के कार्यक्रमों में शामिल हो सकेंगे। केंद्र सरकार ने 58 साल पुराने आदेश को रद्द करते हुए इस संबंध में नया सर्कुलर जारी किया है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की गतिविधियों में अब सरकारी कर्मचारी भी भाग ले सकेंगे। केंद्र सरकार ने 58 साल लागू प्रतिबंध को हटा लिया है। संघ ने इस निर्णय का स्वागत किया है। गौरतलब है कि संघ ने देश में कई आपदाओं में जिस तरह से मानव सेवा की है वो भी काफी महत्वपूर्ण है।भूकंप आपदा, बाढ के समय संघ के स्वयंसेवक अपनी परवाह न करते हुए बेहद विपरीत स्थिति में लोगों की जान बचाने व नुकसान की भरपाई में कई बार स्थानीय प्रशासन से भी आगे निकल कर काम करते दिखाई दिए हैं।

शहर में 550 बार पावर कट और 498 घंटे बिजली रही बाधित!

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  •  15 सब स्टेशनों के 46 फीडर्स में आई समस्या

अर्जुन झा

जगदलपुर बस्तर जिले के शहरी क्षेत्र के अलावा जगदलपुर विधानसभा क्षेत्र में विद्युत व्यवस्था के लिए 33/11 केव्ही के 15 सब स्टेशन हैं। जून 2023 से जून 2024 तक कुल 15 सब स्टेशनों के 46 फीडरों में 550 बार पावर कट की समस्या आई। इस अवधि में कुल 498 घंटे बिजली बाधित रही जिसमें से 261 बार विद्युत व्यावधान पैदा हुआ। यह जानकारी प्रदेश भाजपा अध्यक्ष व जगदलपुर विधायक किरण देव को ऊर्जा विभाग द्वारा लिखित में दी गई है। इस वर्ष विद्युत व्यवस्था में जमकर व्यावधान उत्पन्न हुआ जिसके कारण भारतीय जनता पार्टी की बड़ी किरकिरी हुई। विद्युत व्यवस्था लड़खड़ाने में प्रमुख रूप से प्राकृतिक आपदा पेड़ों का गिरना, आकाशीय बिजली, तेज बारिश एवं आंधी-तूफान कारण रहे। इस दौरान बिजली 281 घंटे बाधित रही तथा 289 बार विद्युत व्यावधान तकनीकी खराबी जंपर कटने, पिन इंसुलेटर ब्रस्ट होने, डिस्क इंसुलेटर फूटने, डीओ यूनिट फूटने, पेड़ की टहनियां गिरने के कारण हुआ। इन वजहों से 217 घंटे बिजली बाधित रही।

मिली सिर्फ 3 शिकायतें!

विद्युत व्यवस्था लड़खड़ाने के कारण जहां हजारों उपभोक्ताओं को परेशानी उठानी पड़ी, तो जगदलपुर विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत केवल तीन उपभोक्ताओं ने इसकी शिकायत की। यह दावा विद्युत कंपनी का है। यह किसी के गले नहीं उतर रहा है लेकिन जगदलपुर विधायक किरण देव को जो जानकारी दी गई है उसके अनुसार बस्तर चेम्बर ऑफ कामर्स के अध्यक्ष मनीष शर्मा, कांग्रेस पार्टी के सुशील मौर्य व धरमपुरा क्रं-1 के एस चक्रवर्ती ने शिकायत दर्ज कराई थी। विद्युत वितरण कंपनी के उपभोक्ताओं द्वारा बिजली की अघोषित कटौती संबंधित शिकायतें एवं उनका निराकरण किए जाने का दावा किया गया है।

गलत रीडिंग के 169 मामले

विद्युत वितरण कंपनी ने विधायक को बताया है कि अधिक बिजली बिल आने की शिकायतें एवं प्राप्त शिकायतों पर 169 लोगों की शिकायतों की जांच की गई और उनका निराकरण किया गया। बिजली बिल में गलत रीडिंग, एकमुश्त रीडिंग जैसे मामले सामने आए थे जिसे निराकृत करने की बात विभाग ने स्वयं स्वीकार की है। नेतानार, पंडरीपानी एवं ईतवारी बाजार में नए उपकेंद्र

जगदलपुर विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत वर्ष 2023-24 में किसी भी नवीन विद्युत उप केंद्र का प्रस्ताव नहीं था, किन्तु पूर्व के वित्तीय वर्ष में प्रस्तावित 03 नग नवीन विद्युत उप केन्द्र नेतानार, पंडरीपानी एवं ईतवारी बाजार जगदलपुर का कार्य वित्तीय वर्ष 2023-24 में पूर्ण किया गया है। कुम्हारपारा जगदलपुर में 1 तथा 2 उप केन्द्र धुरगुड़ा एवं नियानार में वर्ष 2024-25 के लिए प्रस्तावित हैं। योजना वित्तीय स्वीकृति न मिलने से ठंडे बस्ते में चली गई है।

ग्रामीणों को गूंगा, बहरा और बीमार बना रहा है नगरनार इस्पात संयंत्र, परिवहन समिति की हड़ताल जारी

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  • आंदोलन को समर्थन देने पहुंचे श्रमिक नेता मिश्रा

अर्जुन झा-

जगदलपुर अपनी मांगों को लेकर नगरनार में जय झाड़ेश्वर परिवहन संघ की हड़ताल लगातार जारी है। संघ के पदाधिकारी सदस्य धरने पर बैठे हैं। उनकी मांगों का समर्थन करने हिंद मजदूर सभा के प्रदेश अध्यक्ष हरि शंकर मिश्रा और महासचिव आरके गिरी धरना स्थल पर पहुंचे।

उल्लेखनीय है कि जय झाड़ेश्वर सहकारी परिवहन समिति के पदाधिकारी व सदस्य नगरनार में एनएमडीसी द्वारा स्थापित इस्पात संयंत्र में स्थानीय परिवहन व्यवसायियों को परिवहन का कार्य देने, स्थानीय बेरोजगारों को नौकरी पर रखने, अस्पताल एवं स्कूल की सुविधा उपलब्ध कराने, प्रदूषण पर नियंत्रण रखने आदि मांगों को लेकर लगभग सालभर से आंदोलन करते आ रहे हैं। बावजूद एनएमडीसी प्रबंधन कोई पहल नहीं कर रहा है। समिति के पदाधिकारियों का कहना है कि नगरनार इस्पात संयंत्र के स्थानीय अधिकारी संयंत्र से निकलने वाले मटेरियल्स में गड़बड़ी करने के लिए ही बाहरी परिवहन व्यवसायियों को अहमियत देते आ रहे हैं। फर्जी नंबर प्लेटों के सहारे व एक ही नंबर वाले दो वाहनों से माल की निकासी में गड़बड़ी का खेल यहां चल रहा है। इस तरह का एक बड़ा मामला सीआईएसएफ ने कुछ माह पहले पकड़ा भी था और केस पुलिस तक भी पहुंचा था। इसी वजह से स्थानीय परिवहन व्यवसायियों को काम नहीं दिया जा रहा है। जबकि इस्पात संयंत्र स्थापना के लिए भूमि अधिग्रहण के दौरान प्रभावित 11 ग्राम पंचायतों को वचन दिया गया था कि परिवहन, नौकरी, स्कूल शिक्षा, चिकित्सा आदि में स्थानीय लोगों का पूरा ध्यान रखा जाएगा। इस करार से पीछे हटते हुए स्थानीय प्रबंधन बाहरी ट्रांसपोर्टर्स को लगातार परिवहन का काम देता आ रहा है, स्थानीय बेरोजगार युवाओं की उपेक्षा करते हुए छत्तीसगढ़ के अन्य भागों तथा दीगर राज्यों के लोगों को नौकरियां दी जा रही हैं। प्रबंधन ने सर्व सुविधाओं से युक्त हॉस्पिटल खोलने की बात कही थी, जिसका अब तक कोई अता पता नहीं है। स्कूल खोला भी गया है, तो वहां स्थानीय ग्रामीणों के बच्चों के बच्चों को दाखिला नहीं दिया जा रहा है। जल प्रदूषण, ध्वनि प्रदूषण और वायु प्रदूषण का दंश स्थानीय ग्रामीणों को झेलना पड़ रहा है। संयंत्र से निकलने वाले जहरीले केमिकल युक्त पानी से किसानों के खेत बंजर हो रहे हैं, तालाब के पानी में जहर घुल रहा है, जिसे पीकर मवेशी और पक्षी मर रहे हैं, तालाब में ग्रामीण निस्तार नहीं कर पा रहे हैं। वहीं संयंत्र से उठने वाली डस्ट से लोग लगातार बीमार पड़ रहे हैं। संयंत्र की मशीनों की तेज आवाज से बच्चे पढ़ाई नहीं कर पा रहे हैं, लोगों के कानों के पर्दे फट रहे हैं और लोग बहरे होते जा रहे हैं। इंसाफ के लिए आवाज उठाते उठाते अब ग्रामीण गूंगे बन चुके हैं। कुल मिलाकर नगरनार इस्पात संयंत्र नगरनार समेत आसपास के गांवों के लिए अभिशाप बन गया है। परिवहन समिति के आंदोलन को समर्थन देने पहुंचे हिंद मजदूर सभा के प्रदेश अध्यक्ष एचएस मिश्रा और महासचिव आरके गिरी ने आंदोलन को और भी मुखर करने के लिए पूर्ण सहयोग देने की बात कही। इस अवसर पर नगरनार मंडल भाजपा महिला मोर्चा की अध्यक्ष गीता मिश्रा भी उपस्थित थीं।

ग्रामीणों को गूंगा, बहरा और बीमार बना रहा है नगरनार इस्पात संयंत्र, परिवहन समिति की हड़ताल जारी

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  •  आंदोलन को समर्थन देने पहुंचे श्रमिक नेता मिश्रा

अर्जुन झा-

जगदलपुर अपनी मांगों को लेकर नगरनार में जय झाड़ेश्वर परिवहन संघ की हड़ताल लगातार जारी है। संघ के पदाधिकारी सदस्य धरने पर बैठे हैं। उनकी मांगों का समर्थन करने हिंद मजदूर सभा के प्रदेश अध्यक्ष हरि शंकर मिश्रा और महासचिव आरके गिरी धरना स्थल पर पहुंचे।

उल्लेखनीय है कि जय झाड़ेश्वर सहकारी परिवहन समिति के पदाधिकारी व सदस्य नगरनार में एनएमडीसी द्वारा स्थापित इस्पात संयंत्र में स्थानीय परिवहन व्यवसायियों को परिवहन का कार्य देने, स्थानीय बेरोजगारों को नौकरी पर रखने, अस्पताल एवं स्कूल की सुविधा उपलब्ध कराने, प्रदूषण पर नियंत्रण रखने आदि मांगों को लेकर लगभग सालभर से आंदोलन करते आ रहे हैं। बावजूद एनएमडीसी प्रबंधन कोई पहल नहीं कर रहा है। समिति के पदाधिकारियों का कहना है कि नगरनार इस्पात संयंत्र के स्थानीय अधिकारी संयंत्र से निकलने वाले मटेरियल्स में गड़बड़ी करने के लिए ही बाहरी परिवहन व्यवसायियों को अहमियत देते आ रहे हैं। फर्जी नंबर प्लेटों के सहारे व एक ही नंबर वाले दो वाहनों से माल की निकासी में गड़बड़ी का खेल यहां चल रहा है। इस तरह का एक बड़ा मामला सीआईएसएफ ने कुछ माह पहले पकड़ा भी था और केस पुलिस तक भी पहुंचा था। इसी वजह से स्थानीय परिवहन व्यवसायियों को काम नहीं दिया जा रहा है। जबकि इस्पात संयंत्र स्थापना के लिए भूमि अधिग्रहण के दौरान प्रभावित 11 ग्राम पंचायतों को वचन दिया गया था कि परिवहन, नौकरी, स्कूल शिक्षा, चिकित्सा आदि में स्थानीय लोगों का पूरा ध्यान रखा जाएगा। इस करार से पीछे हटते हुए स्थानीय प्रबंधन बाहरी ट्रांसपोर्टर्स को लगातार परिवहन का काम देता आ रहा है, स्थानीय बेरोजगार युवाओं की उपेक्षा करते हुए छत्तीसगढ़ के अन्य भागों तथा दीगर राज्यों के लोगों को नौकरियां दी जा रही हैं। प्रबंधन ने सर्व सुविधाओं से युक्त हॉस्पिटल खोलने की बात कही थी, जिसका अब तक कोई अता पता नहीं है। स्कूल खोला भी गया है, तो वहां स्थानीय ग्रामीणों के बच्चों के बच्चों को दाखिला नहीं दिया जा रहा है। जल प्रदूषण, ध्वनि प्रदूषण और वायु प्रदूषण का दंश स्थानीय ग्रामीणों को झेलना पड़ रहा है। संयंत्र से निकलने वाले जहरीले केमिकल युक्त पानी से किसानों के खेत बंजर हो रहे हैं, तालाब के पानी में जहर घुल रहा है, जिसे पीकर मवेशी और पक्षी मर रहे हैं, तालाब में ग्रामीण निस्तार नहीं कर पा रहे हैं। वहीं संयंत्र से उठने वाली डस्ट से लोग लगातार बीमार पड़ रहे हैं। संयंत्र की मशीनों की तेज आवाज से बच्चे पढ़ाई नहीं कर पा रहे हैं, लोगों के कानों के पर्दे फट रहे हैं और लोग बहरे होते जा रहे हैं। इंसाफ के लिए आवाज उठाते उठाते अब ग्रामीण गूंगे बन चुके हैं। कुल मिलाकर नगरनार इस्पात संयंत्र नगरनार समेत आसपास के गांवों के लिए अभिशाप बन गया है। परिवहन समिति के आंदोलन को समर्थन देने पहुंचे हिंद मजदूर सभा के प्रदेश अध्यक्ष एचएस मिश्रा और महासचिव आरके गिरी ने आंदोलन को और भी मुखर करने के लिए पूर्ण सहयोग देने की बात कही। इस अवसर पर नगरनार मंडल भाजपा महिला मोर्चा की अध्यक्ष गीता मिश्रा भी उपस्थित थीं।

वन भूमि पट्टेदार के निधन पर भूमि का हक अब वारिसों को मिलेगा, उठेगी फौती, पट्टे पर मिलेगा बैंक लोन भी : साय

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  • पाटेश्वर धाम को मुख्यमंत्री साय ने दी सौगातें, गुरु पूर्णिमा में हुए शामिल
  • बड़े जुंगेरा में 100 सीटर छात्रावास का होगा निर्माण

डौंडीलोहारा मुख्यमंत्री विष्णु देव साय पाटेश्वर धाम में आयोजित गुरू पूर्णिमा महोत्सव में शामिल हुए। उन्होंने प्रदेशवासियों को गुरू पूर्णिमा की बधाई एवं शुभकामनाएं दी। मुख्यमंत्री ने पाटेश्वर धाम में ब्रम्हलीन गुरुदेव रामजानकी

दास की समाधि निर्माण कराने की घोषणा की। मंदिर परिसर में हाई मास्ट लाईट लगाने एवं मंदिर परिसर की सीता रसोई में श्रद्धालुओं के लिए शेड निर्माण कराने की भी घोषणा मुख्यमंत्री ने की।प्री मैट्रिक बालक छात्रावास बड़े जुगेंरा में स्वीकृत 50 सीट को बढ़ाकर 100 सीट करने की घोषणा की।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय गुरू पूर्णिमा के अवसर पर बालोद जिले के डौंडी लोहारा विकासखंड स्थित जामड़ी पाटेश्वर धाम आश्रम पहुंचे। मुख्यमंत्री ने वहां सत्संग स्थल कौशल्या धाम में संत योगी राम बालकदास से मुलाकात की और उनका आशीर्वाद लिया। मुख्यमंत्री साय ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों को गूरूपूर्णिमा की बधाई एवं शुभकामनाएं दी। मुख्यमंत्री  साय ने पाटेश्वर धाम आश्रम के लिए अनेक सौगात भी दी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने मंदिर परिसर में ब्रम्हलीन गुरूदेव रामजानकी दास की समाधि निर्माण कराने तथा मंदिर परिसर में हाई मास्ट लाईट लगाने एवं मंदिर परिसर के सीता रसोई में श्रद्धालुओं के लिए शेड निर्माण कराने की घोषणा की। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने ग्राम बड़े जुंगेरा स्थित प्री मैट्रिक बालक छात्रावास की स्वीकृत सीटें 50 से बढ़ाकर 100 सीट करने की घोषणा भी की। इस अवसर पर कांकेर के सांसद भोजराज नाग, साजा विधानसभा क्षेत्र के विधायक ईश्वर साहू, राज्य बाल संरक्षण आयोग के पूर्व अध्यक्ष यशवंत जैन, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष देवलाल ठाकुर, जिला भाजपा अध्यक्ष पवन साहू , राकेश यादव, दुर्ग रेंज के आईजी रामगोपाल गर्ग, कलेक्टर इंद्रजीत सिंह चंद्रवाल, प्रभारी एसपी जेआर ठाकुर तथा अन्य जनप्रतिनिधि एवं वरिष्ठ अधिकारियों के अलावा बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे। पाटेश्वर धाम में पहुंचने के पश्चात सर्वप्रथम मुख्यमंत्री ने कौशल्या धाम सत्संग परिसर में पाटेश्वर धाम के संचाल रामबालक दास से भेंट कर उनका आशीर्वाद लिया। इस दौरान उन्होंने पाटेश्वर धाम मंदिर परिसर में चल रहे विभिन्न विकास कार्यों की जानकारी ली। मुख्यमंत्री श्री साय मंदिर परिसर में स्थित ब्रम्हलीन संत राम जानकी दास के समाधि स्थल में पहुंचकर उन्हें पुष्पांजलि अर्पित की। उन्होंने सत्संग स्थल परिसर में रुद्राक्ष के पौधे का रोपण भी किया। मुख्यमंत्री ने वहां शिव मंदिर में पूजा अर्चना में शामिल होकर प्रदेश की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि मेरे लिए परम सौभाग्य का विषय है कि मुझे गुरू पूर्णिमा के पावन अवसर पर पाटेश्वर धाम आने का मौका मिला है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पाटेश्वर धाम से उनका बहुत पुराना नाता है। वे विधायक, सांसद, केंद्रीय मंत्री के अपने कार्यकाल के दौरान से ही वे लगातार पाटेश्वर धाम आते रहे हैं। उन्होंने कहा कि पाटेश्वर धाम मंदिर परिसर में पंचमुखी हनुमान मंदिर, पूज्य गुरू रामजानकी दास जी के समाधि स्थल आदि विभिन्न विकास कार्यों के वे साक्षी रहे हैं।  साय ने कहा कि हमारे लिए सौभाग्य की बात है कि छत्तीसगढ़ माता कौशल्या की जन्मभूमि है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार बनने के बाद आयोध्या में भव्य रामलला के मंदिर का निर्माण कर विगत 22 जनवरी उनका प्राण प्रतिष्ठा किया गया है। ये सब हमारे लगभग 5 सौ वर्षों के अथक परिश्रम और संघर्ष के फलस्वरूप संभव हो सका है। राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा के दौरान श्रद्धालुओं के लिए खाद्यान्न, डाॅक्टरों की टीम आदि हमने अयोध्या भेजा है। इसके अलावा हमने इस दौरान लगातार 2 माह तक अयोध्या में श्रद्धालुओं के लिए लंगर भी कराया है। श्री साय ने कहा कि आज से कुछ दिन पूर्व हमारे मंत्रिमंडल के सभी सदस्यों ने अयोध्या जाकर भगवान रामलला के दर्शन किए है। इसके साथ ही हमारी सरकार ने श्रद्धालुओं को अयोध्या में भव्य राम मंदिर एवं भगवान राम के दर्शन हेतु छत्तीसगढ़ में  रामलला दर्शन योजना भी लागू की है। इस योजना के माध्यम से राज्य के श्रद्धालुओं को निःशुल्क अयोध्या भेजकर भगवान श्री रामलला का दर्शन कराया जा रहा है। मुख्यमंत्री साय ने अपने कार्यकाल के दौरान छत्तीसगढ़ राज्य में हुए विकास कार्यों की जानकारी देते हुए कहा कि 7 माह के अल्प कार्यकाल में ही छत्तीसगढ़ सरकार ने विकास के अनेक सोपान तय किए हैं। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के अंतर्गत विगत खरीफ विपणन वर्ष में 145 मीट्रिक टन धान की खरीदी की है। जो कि राज्य में अब तक सर्वाधिक धान खरीदी है। इसके अलावा राज्य के किसानों को उनकी मेहनत का वाजिब दाम दिलाने हेतु 2100 रूपए क्विंटल की दर से धान की खरीदी कर रहे हैं। इसके अलावा राज्य की 70 लाख महिलाओं के खातों में महतारी वंदन योजना के अंतर्गत प्रत्येक माह 1 हजार रूपए की राशि अंतरित की जा रही है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने आम जनता के हित में वनभूमि का फौती काटने का निर्णय लिया है। इसके माध्यम से वनभूमि के पट्टेदार की मृत्यु हो जाने पर उस जमीन पर उनके उत्तराधिकारी का नाम जुड़ सकेगा। इसके अलावा उन्हें बैंको से लोन आदि की सुविधा भी मिल सकेगी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री  साय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील पर प्रदेशवासियों को एक पेड़ मां के नाम पर लगाकर पर्यावरण सुरक्षा में अपनी बहुमूल्य भागीदारी सुनिश्चित करने की अपील की। साय ने पर्यावरण तथा संपूर्ण जीव जगत की रक्षा हेतु पेड़ पौधों के महत्व की जानकारी देते हुए कहा कि यदि हम सभी 140 करोड़ देशवासी एक- एक पौधा भी लगाते हैं तो पर्यावरण सुरक्षा की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम साबित होगा। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पाटेश्वर धाम के संचालक संत रामबालक दास ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि उनके पूज्य गुरूदेव राम जानकीदास की तपोभूमि यह पाटेश्वर धाम आज कौशल्या धाम के रूप में परिवर्तित हो रहा है। इस अवसर पर उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का पाटेश्वर धाम के साथ पिछले 20-25 वर्षों के अटूट संबंध का भी उल्लेख किया। श्री राम बालकदास ने पाटेश्वर धाम मंदिर परिसर के मांगों की ओर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का ध्यान भी आकृष्ट कराया। समारोह में स्वच्छता के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले रमन गावरे एवं गौरक्षकों का भी सम्मान किया गया। इस अवसर पर कांकेर सांसद भोजराज नाग ने कार्यक्रम में उपस्थिति के लिए अतिथियों एवं श्रद्धालुओं के साथ-साथ आम नागरिकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए उन्हें धन्यवाद दिया।

दंतेवाड़ा जिले में अधिक वर्षा से किरंदुल पहाड़ी में निर्मित डेम हुआ क्षतिग्रस्त

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  • निचली बस्तियों में हुआ जल भराव
  • प्रशासन द्वारा लोगों को तत्काल पहुंचाया गया सुरक्षित स्थान पर

दंतेवाड़ा 2024/ दंतेवाड़ा जिले के किरंदुल पहाड़ी में एनएमडीसी द्वारा निर्मित एन-1 बी डेम जिले में अत्यधिक बारिश होने के कारण क्षतिग्रस्त हो गया है, जिसके कारण अनेक घर बाढ़ की चपेट में क्षतिग्रस्त हो गए हैं। इस संबंध में जिला प्रशासन द्वारा तत्काल लोगों को सुरक्षित स्थान ले जाया गया है। इसके अलावा किरंदुल के गाटर पुलिया एवं सीएससी सेंटर के पास भी बारिश से जल जमाव होने से जेसीबी मशीन के द्वारा रोड की साफ सफाई भी किया गया है। यहां भी जिला प्रशासन के द्वारा निचले स्तर पर बसी बस्तियों में जलभराव स्थिति को देखते हुए लोगों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया जा रहा है। इसके साथ ही जिला प्रशासन मौके पर तैनात होकर रेस्क्यू कर रहा है तथा प्रभावित परिवारों को मंगल भवन में ठहराया जा रहा है। इस दौरान ट्यूशन पढ़ाने जा रहे बच्चे, जो बाढ़ की चपेट में आ गए थे, उन्हें भी रेस्क्यू कर बचाया गया है और उनको अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। वर्तमान में उनकी स्थिति सामान्य है। जिला प्रशासन द्वारा लगातार भारी बारिश के कारण बाढ़ग्रस्त क्षेत्र के समीप रहने वाले लोगों को अन्य जगह शिफ्ट होने की हिदायत दी जा रही है और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।

कृषि भूमि पर अवैध प्लाटिंग का चल रहा खेल, एनएच 30 के पुलिया को ही पाट दिया प्लाटिंग कर बेचने की फिराक में

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  • प्रशासनिक ढिलाई से भू माफिया के हौसले बुलंद 
    -अमरेश झा-
    कोंडागांव जिला मुख्यालय कोंडागांव सहित आसपास के क्षेत्रों में कृषि भूमि व शासकीय भूमि पर अवैध प्लाटिंग कर बिना डायवर्सन के खरीद बिक्री करने का काला कारोबार धड़ल्ले से जारी है। अवैध प्लाटिंग कर जमीन को ऊंचे दामों में बिक्री करने वाले भू माफियाओं पर प्रशासनिक शिकंजा नहीं कसे जाने से भू उनके हौसले बुलंद हैं।
    बता दें कि जिला मुख्यालय कोंडागांव व आसपास के क्षेत्र में कालोनाइजर एक्ट की धज्जियां उड़ाते हुए भू माफियाओं द्वारा बड़े पैमाने पर कृषि भूमि व नजूल शासकीय भूमि को बिना डायवर्सन कराए प्लाटिंग कर बेच दिया जा रहा है।
    जमीन खरीदी बिक्री में लगे लोगों के हौसले इतने बुलंद हैं कि कृषि भूमि को प्लाटिंग करने के लिए हाईवे के नाले को ही पाट दिया गया है। ताजा मामला कोंडागांव से लगे नारंगी मुक्तिधाम के पास एनएच 30 में निर्माणाधीन बाईपास मार्ग के समीप कृषि भूमि को प्लाटिंग कर बेचने की फिराक में जमीन के कार्य में लगे कारोबारियों ने उक्त कृषि भूमि से होकर गुजरने वाले नाले के पुलिया को ही हाईवे के दोनों ओर से बंद करके मिट्टी पाट दिया है।मामले का खुलासा तब हुआ जब लगातार के बारिश में पानी अपने प्राकृतिक नाले के दिशा में न बहकर पानी का भारी जमाव होने लगा। इसके बाद आनन फानन में जेसीबी लगाकर उक्त खेतो में डाली गई मिट्टी को हटाकर नाले को क्लीयर करते हाइवे के रपटे को भी क्लीयर किया गया। जिससे नेशनल हाईवे की सड़क भी क्षतिग्रस्त होने से बच गई। उक्त मिट्टी पटाव के चलते अगर हाईवे क्षतिग्रस्त होता तो उक्त सड़क में किसी दुर्घटना की संभावना से से भी इनकार नहीं किया जा सकता था।

कृषि भूमि पर भी नजर

खेती की जमीन सिर्फ खेती किसानी के लिए ही होती है, लेकिन नियमों को ताक पर रख कर खेतों मेँ भी प्लाट के टुकड़े काट दिए गए हैं। जमीन कारोबार से जुड़े लोग व राजस्व विभाग के कुछ कर्मचारियों के सहयोग से शासन को आर्थिक क्षति पहुंचाई जा रही है। आपसी सांठगांठ से खेतों को प्लॉट में तब्दील किया जा रहा है। खेती की जमीन को कोई भी खरीद तो सकता है, लेकिन इसका उपयोग सिर्फ खेती के लिए ही किया जा सकता है।कृषि की जमीन का उपयोग कॉलोनी विकास या अन्य कार्यों के लिए नहीं किया जा सकता। जमीन की खरीद बिक्री में अवैध प्लाटिंग कर भू माफिया मालामाल हो रहे है। कम पढ़े लिखे किसानों को झांसे में लेकर कम दाम में जमीन का सौदा कर बगैर प्रशासनिक अनुमति के अवैध प्लाटिंग की जा रही है। इन प्लाटों के लिए कोई रास्ता निर्धारित नहीं है। इसके चलते भू माफिया खुद ही मुरुम की सड़क बनाकर इसे बेहतर प्लाट दिखाकर खरीददारों को झांसा देने में लगे हुए हैं। इसकी प्रशासन को जानकारी होने के बावजूद भू माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई नहीं होना कई संदेह को जन्म देता है।

नप जाएंगे कई अधिकारी अगर मामले की अगर निष्पक्ष जांच की गई तो कई पटवारी व अधिकारियों पर गाज गिर सकती है। दैनिक श्रमबिंदु की पड़ताल में जानकारी मिली कि कोंडागांव से लगे नेशनल हाइवे 30 से सटे खसरा नबर 197 /6 व आसपास की खेती भूमि को जमीन के व्यापारियों के द्वारा मिट्टी डाल कर ऊंचा कर दिया गया है साथ ही हाइवे सड़क के नाले और पुलिया को भी पाट दिया गया गया है। पूछने पर राजस्व विभाग के पटवारी ने बताया कि उक्त भूमि जागेश्वर देवांगन व समीप की भूमि खसरा न.197/1 राधाबाई के नाम से राजस्व रिकार्ड में दर्ज है। वहीं आसपास के किसानों ने बताया कि हाईवे सड़क से लगी दोनों ओर की खेती जमीन को किसी जमीन व्यापारी ने खरीद लिया है व खेत पर मिट्टी फीलिंग कर हाइवे के पुलिया को भी पाट दिया है। लगातार बारिश के चलते जब नाले का पानी पास नहीं हो सका तो हो खेतो में भारी मात्रा मे पानी के जमाव के चलते आनन-फानन में नाला को क्लियर कर पुलिया से जेसीबी लगाकर मिट्टी हटवाई गई।

आज से संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी दो दिनी हड़ताल पर, सरकार से नहीं मिला कोई रिस्पांस

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  • आज से हड़ताल पर रहेंगे संविदा स्वास्थ्य कर्मी 
    जगदलपुर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन एंव एड्स नियंत्रण कर्मचारियों को नहीं मिल पाई 27 प्रतिशत संविदा वेतन वृद्धि और न पूरी हुई 18 सूत्रीय मांगें। इसे लेकर 22 और 23 जुलाई को राज्यभर के संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी हड़ताल पर रहेंगे।  उच्च अधिकारियों से वार्ता विफल हो गई। किसी भी मांग पर सहमति नहीं बनी और लिखित में कोई अश्वासन भी नहीं मिला।कर्मचारियों की समस्याएं जस-की-तस बनी हुई हैं।
    संविदा कर्मचारियों का कहना है कि हमें है जन मानस की चिंता, इसलिए सिर्फ दो-2 दिवसीय ध्यानाकर्षण प्रदर्शन करेंगे। पिछले एक साल से हम छले जा रहे हैं, मांगे नहीं माने जाने पर आंदोलन का विस्तार किया जाएगा।
    राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने से स्वास्थ्य व्यवस्था बिगड़ने का अंदेशा है। बीते एक साल से घोषित संविदा वेतन वृद्धि अप्राप्त है, 18 सूत्रीय मांगो पर कोई पहल नहीं हो रही है। वादों की बौछार हो रही है। कोरोना योद्धा लाचार हैं। 22 और 23 जुलाई को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन कर्मचारी एवं एड्स नियंत्रण के कर्मचारी अपनी दो दिवसीय ध्यानाकर्षण प्रदर्शन पर जा रहे हैं। जिससे बस्तर जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था बुरी तरह चरमरा सकती है। जिला अस्पताल, शहरी स्वास्थ्य केंद्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, उप स्वास्थ्य केंद्र एवं आयुष्मान आरोग्य मंदिरों पर इसका सीधा प्रभाव देखने को मिलेगा। कई संस्थाएं लगभग बंद मिलेंगे। यह एनएचएम कर्मचारियों के लिए दोहरी चिंता का विषय है|
  • कि वह पहले सरकार से 27 प्रतिशत वेतन वृद्धि की मांग करें जो उन्हें 1 साल पहले ही मिल जानी चाहिए थी या नियमितीकरण की जो डबल इंजन सरकार ने मोदी की गारंटी में कहा था। छत्तीसगढ़ प्रदेश एनएचएम एवं एड्स नियंत्रण कर्मचारी संघ के संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी लंबित 27 प्रतिशत वेतन वृद्धि एवं नियमितीकरण सहित 18 बिंदुओं की मांग के संबंध में प्रदेश स्तरीय दो दिवसीय ध्यान आकर्षण प्रदर्शन करेंगे। एनएचएम के संविदा स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा विगत 6 माह में वर्तमान सरकार को 24 बार से अधिक ज्ञापन एवं आवेदन दिया जा चुका है। इसके बाद भी कोई कार्रवाई नहीं होने के कारण कर्मचारीयों में भारी रोष व्याप्त है। ज्ञात हो कि जुलाई 2023 में बजट सत्र के दौरान अनुपूरक बजट में 37000 संविदा कर्मचारियों के लिए 27 प्रतिशत वेतन वृद्धि प्रदान किया गया था। कर्मचारियों ने बताया कि वेतन वृद्धि लाभ स्वच्छता मिशन, मनरेगा, समग्र शिक्षा विभाग को मिल गया है जबकि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन एवं एड्स नियंत्रण कार्यक्रम के 16000 संविदा कर्मचारियों को वेतन वृद्धि अब तक आप्राप्त है। जिसके कारण विवश होकर एनएचएम एवं एड्स नियंत्रण संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी बड़ी संख्या में रायपुर में ध्यान आकर्षण प्रदर्शन मेँ शामिल होंगे। विधानसभा चुनाव पश्चात प्रदेश में नई सरकार गठन के बाद से राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन एवं एड्स नियंत्रण कार्यक्रम के कर्मचारियों द्वारा अपनी मांगों को लेकर मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, विधानसभा अध्यक्ष, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष, स्वास्थ्य मंत्री, वित्त-मंत्री सहित तमाम सांसदों एवं विधायकों से मिलकर 24 से अधिक बार ज्ञापन दिया गया है, और जब मांग पूरी नहीं हुई तो अब हताश होकर दो दिन के ध्यान आकर्षण प्रदर्शन के लिए 22 और 23 जुलाई को रायपुर में इकट्ठा होंगे।

    चरमरा जाएगी व्यवस्था
    कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने से प्रदेश में स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा सकती है और आम जनता की तकलीफ बढ़ेगी। लगभग 16000 की संख्या वाले इस संगठन में डॉक्टर, नर्स, एएनएम, सीएचओ, आरएमए, पैरामेडिकल स्टाफ, एमपीडब्ल्यू, चतुर्थ वर्ग, काउंसलर, फार्मासिस्ट टीबी वेक्टर बोर्न सुपरवाइजर, डाटा एंट्री ऑपरेटर, लेखा प्रबंधक, लैब टेक्नीशियन, प्रबंधकीय संवर्ग के कर्मचारी शामिल हैं।संघ के प्रांताध्यक्ष डॉ.अमित कुमार मिरी ने बताया कि कर्मचारियों के लिए अनुपूरक बजट 19 जुलाई 2023 में 27 प्रतिशत संविदा वेतन वृद्धि की घोषणा विधानसभा में की गई थी, जिसके लिए 350 करोड़ का प्रतिवर्ष बजट भी रखा गया था। कई अन्य विभागों, योजनाओं में यह प्राप्त भी हो चुका है, किंतु 1 साल बीत जाने पर भी इसका लाभ एनएचएम कर्मचारियों को नहीं मिला है। अल्प वेतन पर काम कर रहे कर्मचारियों को घोषित वेतन वृद्धि का लाभ न देना सरकार अधिकारियों की नियत पर संदेह पैदा करता है। कोरोना काल मे इन्ही संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों ने पूरा जिम्मा संभाले रखा था। कोरोना टेस्टिंग, आइसोलेशन वार्ड, कोरोना टीकाकरण सहित अन्य सभी कार्य अपनी जान में जोखिम डालकर कार्य करते रहे हैं। हड़ताल से संस्थागत प्रसव, टीकाकरण कार्य, गर्भवती माता जांच, दवाई वितरण सभी जांच, उच्च संस्थानों में रेफर, काउंसलिंग कार्य, आयुष्मान भारत कार्ड निर्माण, सिकल सेल स्क्रीनिंग, हेल्थ मेला, शिशु संरक्षण कार्यक्रम, ओपीडी, आईपीडी, जन्म एवं मृत्यु प्रमाण पत्र, राष्ट्रीय कार्यक्रम टीबी टेस्ट, डेंगू नियंत्रण, चिरायु कार्यक्रम, यू-विन पोर्टल में एंट्री, समस्त ऑनलाइन एंट्री, एनीमिया जांच, बीपी, शुगर जांच एवं दवा वितरण, मलेरिया, गर्भवती महिलाओं का रूटीन टेस्ट, एचआईवी ऐड्स टेस्ट-जांच एवं काउंसलिंग, डायरिया नियंत्रण पखवाड़ा कार्यक्रम प्रभावित हो सकते हैं। वर्तमान में जिले में डेंगू, डायरिया नियंत्रण एवं मलेरिया के संभावित मरीजों का सर्वे चल रहा है।
    कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने से राष्ट्रीय कार्यक्रम प्रभावित होंगे एवं आम जनता को परेशानी का सामना करना पड़ेगा।

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