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भेजापदर के वार्षिक देवी जात्रा मेला में शामिल हुए पूर्व विधायक रेखचंद जैन

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  •  आस्था के अग्रदूत को अपने बीच पाकर खुश हो उठे अंचल के ग्रामीण

जगदलपुर गुरुवार को जगदलपुर विकासखंड के भेजपदर में भंडारिन माता, तेलंगनी माता, हिंगलाजिन माता के वार्षिक जात्रा मेले में पूर्व विधायक रेखचंद जैन ने ग्रामीणों के साथ शिरकत की। आस्था के अग्रदूत रेखचंद जैन को अपने बीच पाकर अंचल के ग्रामीण बेहद खुश नजर आ रहे थे।

ग्रामीणों के आग्रह पर पूर्व संसदीय सचिव रेखचंद जैन ने वार्षिक जात्रा मेला की पूजा- अर्चना में शामिल होकर सुख शांति समृद्धि की कामना की। इस दौरान भेजापदर के लोगों से भेंट कर श्री जैन ने उनका कुशलक्षेम भी पूछा। उल्लेखनीय है कि रेखचंद जैन शुरू से ही आदिवासियों के धार्मिक, सामाजिक एवं पारिवारिक कार्यक्रमों में भागीदारी निभाते आ रहे हैं। विधायक रहते रेखचंद जैन ने जगदलपुर के गांव गांव में सैकड़ों मातागुड़ियों और देवगुड़ियों का निर्माण और पचासों देव स्थलों का जीर्णोद्धार कराया था। यही वजह है कि क्षेत्र के ग्रामीण और आदिवासी रेखचंद जैन को अपना सच्चा हमदर्द मानते हैं, उन्हें सम्मान भरी नजरों से देखते हैं। श्री जैन को क्षेत्र में आस्था के अग्रदूत के रूप में जाना पहचाना जाता है। भेजापदर के कार्यक्रम में रेखचंद जैन के साथ इस परमजीत जसवाल, हेमू उपाध्याय, बुधसन कश्यप, लच्छीम, फरसुराम, संपत, सुखदेव, दीपचंद, गोरा, लोकनाथ, मन्नू पुजारी, कार्तिक पुजारी, पदलाम पुजारी, राजेंद्र पटेल, नरसिंग कामदेव, दूरजो, तुलाराम, कमलोचन, धनीराम, जुगधर बघेल, सिरहा गदाधर, हरि, रायमती पदमनी, चंदा, कुसुमवती, गिलान, हस्ती, दयमती, मगवती पदमनी आदि मौजूद रहे।

 

कोंडागांव में खनिज विभाग की नाक के नीचे चल रहा गौण खनिज का अवैध खनन और परिवहन

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  •  सरकारी निर्माण कार्य के लिए भी अवैध मुरुम खनन

अमरेश झा

कोंडागांव शासन द्वारा गौण खनिज के अवैध खनन, परिवहन और भंडारण के मामले में नए नियम तो लागू कर दिए गए हैं एवं इस पर अभियान चलाने का निर्देश भी जारी कर दिया है।कोंडागांव जिला प्रशासन ने इस आदेश के पालन के लिए खनिज विभाग को निर्देश तक जारी किया है, मगर खनिज विभाग के अधिकारी जिम्मेदारी से ड्यूटी नहीं निभा रहे हैं।

रेत, मुरम, गिट्टी जैसे गौण खनिज के अवैध भंडारण, परिवहन और उत्खनन के मामले में पहले केवल चालानी और जुर्माना की कार्रवाई होती थी, परंतु अब नए नियम के मुताबिक इस मामले में अभियोजन चलाने, सीधे पुलिस में एफआईआर दर्ज कराने का प्रावधान है। इस नियम के तहत जिला मुख्यालय में खनिज विभाग द्वारा यदाकदा छोटे वाहनों पर कार्रवाई की खानापूर्ति की जाती है, परंतु बड़े रसूखदार ठेकेदारों की गिरेबान तक उनके हाथ पहुंच नहीं पाते। या शायद विभाग उनके पास जाने तक से डरता है। यही कारण है कि बड़े ठेकेदार रेत एवं मुरुम का अवैध परिवहन धड़ल्ले से कर रहे हैं। ऐसा ही नजारा जिला मुख्यालय में बन रहे बाईपास में देखने को मिल रहा है, जहां ठेकेदार ने स्थानीय जेसीबी संचालकों से सांठगांठ कर अपने मिक्सर प्लांट में रेत का पहाड़ खड़ा कर दिया है। वहीं ठेकेदार लगातार सैकड़ों ट्रक अवैध मुरुम परिवहन भी करते आ रहा है। खनिज विभाग के अधिकारियों की नजर इन पर नहीं पड़ रही है या जानबूझकर उन्होंने अपनी नज़रें फिरा ली हैं। इतना सब कुछ जानकर भी जिम्मेदार अधिकारी आंख मूंदकर बैठे हुए हैं। अधिकारियों की लापरवाही का अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है कि जिला मुख्यालय से लगे राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे चल रहे बायपास निर्माण के लिए अवैध खनन को रोकने के लिए खनिज अधिकारी समय नहीं निकाल पर रहें हैं। और न ही इस सड़क से होकर गुजरने वाले अधिकारियों को शासन को हो रहे राजस्व नुकसान की चिंता है, न ही पर्यावरण की। जबकि मुरूम खनन चरम पर पहुंच चुका है। सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार स्थानीय टिप्पर मालिक भोमा चौधरी व सड़क ठेकेदार मिलकर अवैध मुरूम परिवहन को निरंतर गति प्रदान कर रहे हैं। ठेकेदार द्वारा नियम कायदों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। गौरतलब है कि पिछले कुछ माह से लगातार अवैध गौण खनिज उत्खनन और परिवहन शासन -प्रशासन की नाक के नीचे तेजी से चल रहा है। जहां मुरूम वाली जमीन दिखी नहीं कि खोदना चालू।ग्रामीणों का कहना है कि अब तक सैकड़ों ट्रक मुरुम शहर से होते हुए निर्माण कार्यों में पहुंचाया जा चुका है। बावजूद भी खनिज विभाग द्वारा किसी भी डंपर या ट्रक को नहीं पकड़ा गया है। इससे साफ जाहिर होता है कि खनिज विभाग की सांठगांठ से यह कार्य चल रहा है। खनिज विभाग की मिलीभगत से अवैध कारोबार जमकर फल फूल रहा है। क्षेत्र में लगातार मुरूम खनन को लेकर शिकायतें आती रहती हैं, मगर उसके बाद भी शासन प्रशासन द्वारा कार्रवाई न करना प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है। इस विषय पर जब संबंधित ठेकेदार से बात करनी चाही गई तो उन्होंने अपना टिप्पर किराए पर देने की बात कही और इस पर किसी भी प्रकार की जानकारी नही होना बताया। खबर लिखे जाने तक अवैध खनन बदस्तूर जारी है।

नशीली गोलीयों के दो तस्करों को, बालोद पुलिस ने किया गिरफ्तार

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आरोपीयों के कब्जे से 10.718 किलो ग्राम नशीली दवाई कीमती 144300 रू व मोटर सायकल क्रमांक सी.जी. 24 एफ 7028 कीमती 20000 रू कुल जुमला रकम 164300 रू को किया जप्त। पूर्व में भी आरोपी विश्वपति गोराई वर्ष 2019 में नशीली गोली की तस्करी में जा चुका है जेल।

पुलिस पुलिस महानिरीक्षक दुर्ग रेंज रामगोपाल गर्ग के निर्देशन पर पुलिस अधीक्षक बालोद एस.आर. भगत के मार्गदर्शन में, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक बालोद अशोक कुमार जोशी एवं पुलिस अनुविभागीय अधिकारी बालोद श्री देवांश सिंह राठौर के पर्यवेक्षण में थाना प्रभारी बालोद निरीक्षक रविशंकर पाण्डेय को क्षेत्र में युवाओं के द्वारा लगातार नशीली दवाईयों की सेवन करने की शिकायत लगातार मिलने से वरिष्ठ अधिकारीयों के द्वारा कार्यवाही करने हेतु मार्गदर्शन देकर निर्देशित किया गया।

जिसके परिपालन में लगातार टीम बनाकर अवैध नशीली दवाई का बिक्री करने वाले तस्करो के लिये मुखबीर तैनात किया गया था कि दिनांक 29.05.2024 को सूचना मिला कि ग्राम पडकीभाठ बायपास रोड की ओर 02 व्यक्ति एक मोटर सायकल क्रमांक CG24F7028 में अधिक मात्रा में नशीली दवाई रखे है तथा उसे बेंचने खपाने के लिए ग्राहक का तलाश कर रहे है कि सूचना पर ग्राम पडकीभाठ बायपास रोड में तांदुला नदी पुल के ऊपर 02 व्यक्ति खड़े दिखे जिन्हे संदेह के आधार पर उनके पास जाकर उनका नाम पता पूछने पर अपना अपना नाम विश्वपति गोराई तथा धर्मेन्द्र यादव बालोद निवासी होना बताया तथा मोटर सायकल में रखे दो सफेद रंग की प्लास्टिक बोरी में भरे हुए वस्तु के संबंध में तथा खड़े होने के सबंध में पूछने पर गोल मटोल कर जवाब देने लगा जो संदेह उत्पन्न होने पर दोनो व्यक्ति के पास रखे (खुद के) मोटर सायकल क्रमांक CG24F7028 में रखे 02 सफेद रंग की प्लास्टिक बोरी को बारी बारी खोलकर तलाशी लिया गया जो एक बोरी में काला ब्राउन रंग के कार्टून में भरा हुआ (1) ALPRAZOLAM TABLETS 12 पैकेट (2) ALPRAZOLAM TABLETS -07 पैकेट (3) TRAMADOL CAPSULS- 21 पैकेट मिला तथा दूसरे सफेद रंग की बोरी को खोलने पर उसके अंदर काला भूरा नीला रंग के दो कार्टून में भरा हुआ TRAMADOL CAPSULS- 72 पैकेट मिला जिसे मौके पर तौल कराने पर मादक पदार्थ नशीली टेबलेट एवं कैप्सूल का जुमला वजन 10.718 किलो ग्राम होना जिसकी कीमती 144300 रू एवं मोटर सायकल क्रमांक CG24F7028 की कीमती 20000 रू कुल जुमला रकम 164300 रू को जप्त कर कब्जा पुलिस लेकर आरोपी विश्वपति गोराई एवं धर्मेन्द्र यादव के विरूद्ध थाना बालोद में अपराध क्रमांक 290/2024 धारा 22 (सी) एन.डी. पी.एस एक्ट के तहत अपराध पंजीबद्ध कर को विधिवत गिरफतार कर न्यायिक रिमाण्ड पर भेजा जा रहा है।

उक्त अवैध मनःप्रभावी पदार्थ की रेड कार्यवाही में थाना बालोद के निरीक्षक रविशंकर पाण्डेय, सउनि धरम भुआर्य, प्र.आर. संदीप बंजारे, हरीशचंद्र सिन्हा, आरक्षक भोपसिंह साहू, मोहन कोकिला, धनेश्वर साहू, सायबर सेल से मिथलेश यादव एवं औषधी निरीक्षक दीपीका चुरेन्द्र का महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

::- जप्त समाग्री :

(1)ALPRAZOLAM TABLET-कुल 12 पैकेट में 5400 नग टेबलेट कीमत 11520 रू (2)ALPRAZOLAM TABLET कुल 07 पैकेट में 4200 नग टेबलेट कीमती 15330 रूपये (3)TRAMADOL CAPSULES- कुल 21 पैकेट में 3024 नग कैप्सूल कीमती 27594 रूपये (4) TRAMADOL CAPSULES कुल 72 पैकेट में 13824 नग कैप्सूल कीमती 89856

5) एक मोटर सायकल क्रमांक CG24F7028 की कीमती 20,000 रूपये (

आरोपी का नाम पता :-

01. विश्वपति गोराई पिता जीरूमल गोराई उम्र 31 साल साकिन 19 बुढ़ापारा बालोद थाना व जिला बालोद (छ.ग.) 02. धर्मेन्द्र यादव पिता श्री होरी लाल यादव उम्र 35 साल साकिन 10 कुर्मीपारा बालोद थाना व जिला बालोद (छ.ग.)

कोरंजेड़- बंदेपारा के जंगल में हुई मुठभेड़ में मारे गए 8 लाख एवं 1 लाख के दो ईनामी नक्सली

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  •  हथियार, विस्फोटक, वायरलेस सेट, 30 हजार रू. वर्दी, दवाईयां बरामद

जगदलपुर बीजापुर जिले के मद्देड़ थाना क्षेत्रान्तर्गत कोरंजेड के जंगलों में हुई मुठभेड़ में मारे गए दोनों नक्सलियों के शव, हथियार, विस्फोटक और 30 हजार रुपए कैश बरामद किए गए हैं।

.मद्देड़ एरिया कमेटी एसीएम बुचन्ना, विश्वनाथ, बामन एवं अन्य 15- 20 सशस्त्र नक्सलियों की उपस्थिति की सूचना पर डीआरजी बीजापुर टीम 27 मई को अभियान पर निकली थी। 28 मई को सुबह 7 -8 बजे के बीच कोरंजेड़- बंदेपारा के बीच जंगल में मुठभेड़ हुई । मुठभेड़ के बाद कार्डन एवं सर्च कार्यवाही के दौरान घटनास्थल से एक महिला एवं एक पुरूष माओवादी के शव के साथ एक नग 7.66 एमएम पिस्टल, एक नग 12 बोर सिंगल शॉट बंदूक, 2 नग टिफिन बम,12 नग जिलेटीन स्टीक, 8 मीटर कार्डेक्स वायर, सेफ्टी फ्यूज 5 मीटर 500- 500 रुपए के 60 नोट कुल 30 हजारू रूपये नगद, एक वायरलेस सेट, माओवादी वर्दी, पिटठू, दवाईया, प्रतिबंधित माओवादी संगठन की प्रचार प्रसार सामग्री, माओवादी साहित्य एवं अन्य दैनिक उपयोग की सामग्री बरामद की गई। मारे गए नक्सलियों की पहचान 8 लाख की ईनामी 36 वर्षीय मनीला पूनेम ऊर्फ मनीला पदम पति नागेश पदम ऊर्फ प्रकाश निवासी बुरजी थाना गंगालूर, पमद्देड़ एरिया कमेटी सदस्य (डीव्हीसीएम) के रूप में हुई। वह 2006 से माओवादी संगठन में सक्रिय रूप से कार्यरत थी । हत्या, हत्या का प्रयास, लूट, आजगनी, अपहरण, बलवा, आर्म्स एक्ट एवं विस्फोटक पदार्थ अधिनियम की धाराओं में एक दर्जन से ज्यादा अपराध उसके खिलाफ पंजीबद्ध हैं।

दूसरे नक्सली की पहचान 1 लाख के ईनामी मंगलू कुड़ियम पिता देवा उम्र 40 वर्ष जाति मुरिया निवासी मांझीपारा स्कूलपारा कुज्जाकोंटा थाना फरसेगढ़, मद्देड़ एरिया कमेटी मिलिशिया प्लाटून कमांडर पार्टी सदस्य के रूप मे हुई। मंगलू 1999 से माओवादी संगठन में सक्रिय रूप से कार्यरत था। 2007 में दंतेवाड़ा जेल ब्रेक की घटना में शामिल था । उसके खिलाफ हत्या, हत्या का प्रयास, लूट, आजगनी, अपहरण, बलवा, आर्म्स एक्ट एवं विस्फोटक पदार्थ अधिनियम की धाराओं में कई अपराध पंजीबद्ध हैं।

बिजली आपूर्ति व्यवस्था सुधारें, अन्यथा कंपनी की बत्ती गुल कर देगी कांग्रेस: राजा तिवारी

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  •  कांग्रेस प्रतिनिधि मंडल ने उप यंत्री को सौंपा ज्ञापन

जगदलपुर शहर जिला कांग्रेस कमेटी के सचिव और बालाजी वार्ड के प्रभारी राजा तिवारी के नेतृत्व में कांग्रेस के दर्जनों कार्यकर्ता ने आज विद्युत कंपनी के उपयंत्री को बार बार बिजली कटौती के संबंध में ज्ञापन सौपकर समस्या के निदान की मांग की।

तिवारी ने बाद में मीडिया से चर्चा में कहा कि भारी गर्मी के बीच विद्युत कंपनी द्वारा बार बार बिजली कटौती करना समझ के बाहर है। उनहोने कहा की केरला होटल के लाइन में बार बार विद्युत गुल होती है। आखिर इसका क्या कारण है उन्होंने कहा की विभाग इस पर त्वरित कार्यवाही कर वार्ड वासियों को इस समस्या से निजात दिलाए, अन्यथा शहर जिला कांग्रेस बिजली विभाग की बत्ती गुल करने में जरा भी कोताही नहीं बरतेगी

आज ज्ञापन सौंपने वाले प्रतिनिधि मंडल में राजा तिवारी के साथ कांग्रेस के आकाश दुल्हानी, हमीद अली, अमीर खान, विजय, शुभम सोनी, सुनील, दुसाल काले, सहित कई वार्डवासी उपस्थित थे।

बस्तर जिले जिन उच्चतर स्कूलों में कम हैं शिक्षक, वहां वीडियो से होगी विद्यार्थियों की पढ़ाई

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  •  कमजोर नतीजे वाले स्कूलों के प्रचार्यों और बीईओ पर होगी कार्रवाई
  • आगामी सत्र में सौ फीसद रिजल्ट लाने के निर्देश दिए कलेक्टर विजय ने

जगदलपुर कलेक्टर विजय दयाराम के. ने कहा है कि आगामी शिक्षा सत्र में हाईस्कूल बोर्ड परीक्षाओं में शत- प्रतिशत रिजल्ट लाने के लिए पूरी मेहनत करें। दसवीं कक्षा के कमजोर बच्चों को फोकस कर परीक्षा परिणाम को बेहतर करने लिए प्रत्येक माह टेस्ट लेने की कार्ययोजना के अनुसार कार्य किया जाए। जहां विषय से संबंधित शिक्षकों की कमी है ऐसे स्कूलों में ऑनलाइन कक्षाओं के माध्यम से पढ़ाई अनिवार्य रूप से करवाया जाए।

कलेक्टर ने विगत शनिवार को शिक्षा विभाग की जिला स्तरीय बैठक में परीक्षा परिणामों की समीक्षा के दौरान 10वीं कक्षा में कमजोर परीक्षा परिणाम वाले स्कूलों के प्राचार्यों एवं शिक्षकों से स्पष्टीकरण मांगा था। उसी संबंध में बुधवार को जिला कार्यालय के प्रेरणा सभाकक्ष में विकास खंडवार स्कूलों के प्राचार्यों और शिक्षकों से चर्चा की। कलेक्टर ने कक्षा 10 वीं के परीक्षा परिणाम की सातों विकासखंड के शालावार समीक्षा करते हुए बहुत कम परीक्षा परिणाम प्रदर्शित करने वाले स्कूलों के प्राचार्यों और शिक्षकों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के निर्देश दिए। वहीं संबंधित बीईओ को स्पष्टीकरण जारी करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कमजोर रिजल्ट वाले स्कूलों में बीईओ एवं बीआरसी लगातार जाकर प्रगति लाएं। शिक्षकों द्वारा नियमित तौर पर पाठ्यक्रम के अनुसार अध्यापन कार्य सुनिश्चित करवाया जाए। जिन स्कूलों में शिक्षकों की कमी है या शिक्षकों के अवकाश वाले दिनों में वीडियो के माध्यम से विषयों की पढ़ाई करवाई जाए। कलेक्टर ने कहा कि एजुकेशनल वीडियो का निर्माण विशेषज्ञ शिक्षकों के द्वारा कराया जाए, जिसका यू-ट्यूब के माध्यम से सभी को उपलब्ध करवाने हेतु जल्द कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए। बैठक में सीईओ जिला पंचायत प्रकाश सर्वे, जिला शिक्षा अधिकारी भारती प्रधान और जिले के सभी बीईओ एवं बीआरसी मौजूद थे।

कंगोली के कोटगुड़ीन जलनी माता मंदिर में भव्य मेले के आयोजन के साथ हुई वार्षिक देवी जात्रा

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  •  कंगोली में अनेक गांवों की देवियों का हुआ आगमन
  • प्रदेश भाजपा अध्यक्ष किरण सिंह देव भी पहुंचे

जगदलपुर बस्तर संभाग के सभी गांवों कस्बों में वार्षिक मेला, जात्रा का आयोजन बीते कुछ माह से जारी है। बस्तर जिले के कंगोली स्थित कोटगुड़ीन जलनी माता मंदिर में भी मेले के आयोजन के साथ वार्षिक जात्रा पर्व मनाया गया।

आदिवासी संस्कृति और परंपरा के अनुरूप सभी विधि विधान किए गए। इस जात्रा पर्व में ग्राम के देवी देवताओं, सिरहा के अतिरिक्त जिले के विभिन्न शहरों व गांवों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने ग्राम देवी और अन्य गांवों से आई देवियों का आशीर्वाद लिया। दो दिनों तक चले इस जात्रा पर्व में लाखों की संख्या मे श्रद्धालुओं ने देवी देवताओं के दर्शन किए। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष व जगदलपुर विधायक किरण सिंह देव, बस्तर लोकसभा क्षेत्र के भाजपा सांसद प्रत्याशी महेश कश्यप, पूर्व विधायक लच्छूराम कश्यप, भाजपा नेता विद्याशरण तिवारी, नगर मंडल अध्यक्ष सुरेश गुप्ता, संग्राम सिंह राणा आदि भी जात्रा में शामिल हुए। इन सभी नेताओं ने देवी देवताओं की पूजा अर्चना कर बस्तर की सुख समृद्धि, खुशहाली और शांति स्थापना के लिए आशीर्वाद मांगा।

देवी को दी गई पशु बलि

मनोकामना पूर्ण होने पर तथा ग्राम रक्षा की खातिर और विपत्तियों से बचाने के लिए गांवों में बलि देने की प्रथा है।कंगोली की देवी जात्रा में भी बकरों, मुर्गों, बतखों आदि की बलि दी गई। दरअसल यह आदिवासियों की आस्था और परंपरा से जुड़ा हुआ मसला है। बस्तर के ग्रामीण देवगुड़ी में रोज बलि देते हैं। चाहे वह मुर्गी और अंडे की ही क्यों न हो। देवी को मनाने और उसकी उपासना की प्रथा को आदिवासी प्रमुखता से निभाते आ रहे हैं। विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा मे भी विभिन्न रस्मों मे पशु बलि दी जाती है। बलि प्रथा मानव जाति में वंशानुगत चली आ रही एक सामाजिक प्रथा और सामाजिक व्यवस्था है। इस आयोजन में ग्राम प्रमुख पटेल बलीराम, मंदिर पुजारी रामदास, कोटगुड़ीन जलनी माता समिति अध्यक्ष सोनी गौर, उपाध्यक्ष अनिता, चंपी, गंगा, कोषाध्यक्ष कमलबती, इंदु, सचिव चंपा नाग, सह सचिव रत्ना, सोनी, कुंबती, तुलसा, पार्षद दयाराम कश्यप, राजू बघेल, संतोष गौर, रोहन घोष, भुवनेश्वर ध्रूव, सुरेश कश्यप, मोहन, छोटू, अस्तू, चिंगड़ू, रामधर, सिद्धू, खोगेराम, सोनसाय, कोटू सहित ग्राम के वरिष्ठ जन, मंदिर सेवक इत्यादि उपस्तिथ थे।

ऐसे लापरवाह जनपद सीईओ के भरोसे आयुष्मान बस्तर कैसे बना पाएंगे कलेक्टर साहब

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  • महाअभियान में कलेक्टर के फरमान की धज्जियां
  • नोडल अधिकारी जनपद सीईओ भी नहीं थे गंभीर

अर्जुन झा

बकावंड प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी योजना आयुष्मान भारत को फलीभूत करने के लिए बस्तर कलेक्टर विजय दयाराम के अपनी ओर से कोई कसर बाकी नहीं रख रहे हैं। कलेक्टर विजय आयुष्मान बस्तर की राह पर अग्रसर हैं, मगर उनके अपने मातहत ही उनकी राह का रोड़ा बन गए हैं। बकावंड जनपद पंचायत के सीईओ एसएस मंडावी कलेक्टर के सपने को चकनाचूर करते नजर आ रहे हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के लोगों को निरोगी रखने के लिए आयुष्मान भारत योजना लागू कर रखी है। इसके तहत लोगों के ईलाज पर पांच लाख रुपए तक के खर्च का वहन सरकार करती है। योजना का लाभ उठाने के लिए हर व्यक्ति के पास आयुष्मान कार्ड होना जरूरी है। बस्तर जिले में अभी 1 लाख 83 हजार 676 व्यक्तियों का पंजीयन आयुष्मान कार्ड के लिए नहीं हो पाया है। कलेक्टर विजय दयाराम के. की मंशा है कि बस्तर के शत प्रतिशत व्यक्तियों के पास आयुष्मान कार्ड हो। इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए कलेक्टर ने जिले की सभी ग्राम पंचायतों और नगरीय निकायों में 29 एवं 30 मई को आयुष्मान महा अभियान शिविरों का आयोजन करने के निर्देश जारी किए थे। इसके लिए सभी जनपदों में जनपद पंचायतों के सीईओ को नोडल अधिकारी और खंड चिकित्सा अधिकारियों को सहायक नोडल अधिकारी नियुक्त किया था। मगर बकावंड जनपद पंचायत क्षेत्र में कलेक्टर के इस फरमान की सीईओ से लेकर कई पंचायत सचिवों तक ने खुलकर धज्जियां उड़ाई हैं। महा अभियान की अवधि निकल गई और जनपद क्षेत्र में अब भी सैकड़ों लोगों का पंजीयन नहीं हो पाया है। इसका एक बड़ा उदाहरण बकावंड जनपद पंचायत की ग्राम पंचायत टलनार में देखने को मिला है। इस ग्राम पंचायत के सहायक सचिव लखबंधु कश्यप दोनों दिन शिविर से नदारद रहे। शिविर में पंजीयन कराने पहुंचे ग्रामीणों को दोनों दिन निराश होकर लौटना पड़ा।

इसकी शिकायत उप सरपंच तेनसिंह सेठिया ने बकावंड जनपद पंचायत के सीईओ एसएस मंडावी से की थी, मगर उन्होंने कोई ध्यान नहीं दिया। बताते हैं कि सहायक लखबंधु कश्यप की रोजगार मूलक कार्यों सहित पंचायत से संबंधित तमाम कार्यों मनमानी को लेकर सीईओ से कई बार शिकायतें की जा चुकी हैं, मगर सीईओ न जाने क्यों सहायक सचिव कश्यप पर इतने मेहरबान हैं? ऐसी ही शिकायतें कई अन्य ग्राम पंचायतों से भी आई हैं। इन पंचायतों में भी सैकड़ों लोगों का पंजीयन नहीं होगा पाया है।

खुन्नस तो नहीं निकाल रहे सीईओ

बताया गया है कि सीईओ महा अभियान के दौरान मॉनिटरिंग के लिए कई ग्राम पंचायतों में नहीं पहुंचे। कहा जा रहा है कि महा अभियान को विफल करने की सोची समझी रणनीति के तहत सीईओ ने ऐसा किया है। ताकि योजना फ्लॉप हो जाए और सरकार के सामने कलेक्टर की फजीहत हो। चर्चा है कि कुछ दिनों पहले कलेक्टर ने बकावंड जनपद पंचायत में समीक्षा बैठक के दौरान जनपद सीईओ की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताते हुए उन्हें जमकर फटकार लगाई थी।इसे सीईओ एसएस मंडावी ने अपनी तौहीन के रूप में ले लिया। उसी की खुन्नस निकालने के लिए आयुष्मान महा अभियान को सफल नहीं होने दिया है। अब कलेक्टर को दिखाने के लिए कागजी खानापूर्ति और फर्जी नामों के पंजीयन की रिपोर्ट कलेक्टर तक भेजने की तैयारी की जा रही है।

बस्तर के आदिवासी तरसते हैं पाई -पाई के लिए और मारे जा रहे नक्सलियों से मिलने लगा है नोटों का अंबार

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  • आखिर नक्सलियों के आ कहां से रही है इतनी रकम
  • दो मुठभेड़ों के बाद मिल चुके हैं 50 हजार रुपए

अर्जुन झा

जगदलपुर बस्तर के आदिवासी जहां पाई पाई के लिए तरसते रहते हैं, वहीं नक्सली नोटों की गड्डियां लेकर जंगलों में घूमते हैं। आदिवासियों की आड़ में सरकार के खिलाफ खुली जंग लड़ रहे नक्सलियों के पास आखिर नोटों का अंबार पहुंच कहां से रहा है? उन्हें अत्याधुनिक हथियार और गोला बारूद मुहैया कौन करा रहा है? यह गंभीर चिंतन एवं जांच का विषय है और बस्तर के आदिसियों के लिए विचारणीय मसला भी। हालिया हुई दो मुठभेड़ों में मारे गए महज चार नक्सलियों के शवों के पास से 50 हजार रुपए बरामद किए जा चुके हैं।

बस्तर संभाग में सक्रिय नक्सलियों में ज्यादातर बाहरी हैं और उन्हें बाहरी एवं विदेशी मदद मिलने की खबरें गाहे बगाहे सामने आती ही रहती हैं। मुठभेड़ों के बाद मारे जाने वाले नक्सलियों और उनके अस्थायी कैंपों से बरामद हथियार भी इस बात की तस्दीक करते हैं। पुलिस और सुरक्षा बल चीन और अन्य देशों में निर्मित माऊजर, रायफल, गन आदि बड़ी संख्या में बरामद कर चुके हैं। अब नोटों की गड्डियों की बरामदगी का सिलसिला शुरू हो गया है। पिछली दो मुठभेड़ों के बाद पुलिस मारे गए नक्सलियों की वर्दी की जेबों और बैग से 50 हजार रुपए बरामद कर चुकी है। ये 500- 500 के करारे नोट हैं। कुछ दिनों पहले बीजापुर जिले के जप्पेमरका और कमकानार के जंगलों में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में दो ईनामी महिला नक्सली विज्जे ताती उर्फ सुक्का और नीला फरसा के पास से 500 -500 के 40 नोट यानि कुल 20 हजार रुपए मिले थे। 28 मई को बीजापुर जिले के ही मद्देड़ थाना क्षेत्र अंतर्गत कोरंजेड़ – बंदेपारा में हुई मुठभेड़ में मारी गई 8 लाख की ईनामी महिला नक्सली मनीला पुनेम उर्फ मनीला पदम और 1 लाख के ईनामी पुरुष नक्सली मंगलू कुड़ियम के पास से भी 500- 500 के 60 नोट यानि 30 हजार रुपए मिले हैं। इस तरह दोनों मुठभेड़ों के बाद नक्सलियों के पास से कुल 50 हजार रुपए मिल चुके हैं। वह भी जंगल में घूम रहे नक्सलियों से। अंदाजा लगाया जा सकता है कि जो नक्सली गुफाओं, कंदराओं और सुरक्षित ठिकानों में छुपे बैठे बड़े नक्सली लीडर्स के पास तो करोड़ों अरबों खजाना होगा। आखिर इन नक्सलियों के पास रकम कहां से आ रही है? उनकी आर्थिक मदद कौन कर रहा है? उनकी आमदनी का जरिया आखिर क्या है? ये तमाम सवाल जहां पुलिस के लिए जांच के बिंदु हो सकते हैं, वहीं बस्तर के आदिवासियों के लिए विचारणीय मुद्दे भी हैं। बस्तर के आदिवासियों और नक्सलियों के समर्थन में बार बार उठ खड़े होने वाले सियासतदानों को इस मसले पर गहन मंथन करना होगा। उन्हें इस बात पर गौर करना होगा कि जो नक्सली गरीब आदिवासियों के हक की और जल, जंगल, जमीन बचाने की लड़ाई लड़ने का दंभ भरते हैं, वे धनपति कुबेर कैसे बनते जा जा रहे हैं? जबकि बस्तर का आम आदिवासी आज भी पाई पाई का मोहताज है।

तालिबानी सजा आखिर क्यों?

बस्तर संभाग लंबे समय से लाल आतंक का दंश झेलता आ रहा है। पहले पहल यहां के बाशिंदे दो पाटों के बीच पिस रहे थे। पुलिस की मदद करते थे, तो नक्सली उन पर कहर ढाते थे और नक्सलियों की मदद करने पर पुलिस टार्चर करती और जेल में बंद कर देती थी। पुलिस और सुरक्षा बलों के रवैए में अब काफी बदलाव आ चुका है। ये अब आदिवासियों का दिल जीतकर नक्सली मांद तक पहुंच रहे हैं। केंद्रीय सुरक्षा एजेंसी सीआरपीएफ और पुलिस द्वारा बीहड़ों और दूरस्थ नक्सल प्रभावित गांवों में कैंप स्थापित कर वहां के आदिवासियों को चिकित्सा, पेयजल, उनके बच्चों की शिक्षा आदि में योगदान दिया जा रहा है। इसके सार्थक परिणाम भी मिलने लगे हैं। एक तरफ पुलिस और सुरक्षा बल प्यार से आदिवासियों का दिल जीत रहे हैं। वहीं दूसरी ओर नक्सली आज भी आदिवासियों को तालिबानी अंदाज में सजा देने से बाज नहीं आ रहे हैं। पुलिस मुखबिरी के शक में आदिवासी युवाओं को घर से निकालकर उनके बुजुर्ग मां बाप और पत्नी बच्चों के सामने कभी कुल्हाड़ी से काटकर तो कभी गोलियों से छलनी कर मौत के घाट उतार दिया जाता है। ऐसे में सवाल यह भी उठता है कि आदिवासियों की मौत पर छाती पीटने वाले लोग तब क्यों आवाज नहीं उठाते? उन्हें बुजुर्ग मां बाप, असमय विधवा हुई पत्नी और बेसहारा हो चुके बच्चों का दर्द आखिर क्यों उद्वेलित, आंदोलित नहीं करता?

आदिवासी भतरा समाज में आने वाली है बड़े बदलाव की बयार, फिजूलखर्ची और आडंबर से दूर रहेगा समाज

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  •  गोटीगुड़ा में हुई भतरा समाज की अहम बैठक
  • युवाओं और बेटियों की उच्च शिक्षा पर दिया जाएगा जोर, दूर होंगे कई चलन

अर्जुन झा

बकावंड आदिवासी भतरा समाज में अब बड़े बदलाव की बयार बहने वाली है। आडंबर, फिजूलखर्ची, रूढ़िवाद, शादी ब्याह और मृत्यु कर्म के अव्यवहारिक लेनदेन तथा मांस मदिरा के चलन से यह समाज अब उबरने वाला है। समाज में शिक्षा की नई क्रांति आने वाली है। बेटियों की शिक्षा को समाज में प्राथमिकता दी जाएगी।

विकासखंड बकावंड की ग्राम पंचायत गोटीगुड़ा में आदिवासी भतरा समाज की बड़ी महत्वपूर्ण बैठक समाज के संभागीय अध्यक्ष शंभूनाथ कश्यप, संभागीय कोषाध्यक्ष लीलाधर कश्यप, ब्लॉक अध्यक्ष अनंत राम कश्यप, अस्तू राम कश्यप, धनेश्वर नेताम, रुपधर कर्मा, दशमत कश्यप, रतन भारती, मदन राम व अन्य समाज प्रमुखों की उपस्थिति में हुई। बैठक में विभिन्न ग्रामों के नाईक, पाईक एवं समाज प्रमुख उपस्थित थे। समाज के रीति रिवाजों के संबंध में चर्चा की गई। शादी विवाह से लेकर शिक्षा स्तर तक पर गहन मंथन किया गया। चर्चा में कहा गया की शादी विवाह में कपडों की लेनदेन, टीकावन (उपहार) में बर्तन भेंट का जिक्र हुआ। इस संबंध में कहा गया कि हमारे समाज के लोग अधिकतर शादी विवाह के दौरान टीकावन में बर्तन भेंट करते हैं। जो कि ठीक नहीं है। क्योंकि आज हर घर में सभी तरह के बर्तन, इलेक्ट्रिक एवं इलेक्ट्रॉनिक उपकरण मौजूद रहते हैं। ऐसा करके हम दुकानदारों का धंधा चला रहे हैं। वहीं जिन्हें हम यह चीजें टीकावन में देते हैं, वह उनके लिए अनुपयोगी हो जाते हैं। इस प्रचलन को बंद कर देना चाहिए। शादी विवाह के टीकावन में बर्तन के स्थान पर नगद रुपए देना चाहिए। इससे शादी करने वाले परिवार की आर्थिक मदद हो जाएगी। वह परिवार उस रकम का उपयोग अपनी जरूरत के हिसाब से कर सकेगा। समाज प्रमुखों ने उदाहरण सामने रखते हुए कहा कि एक पीतल का गुंडी 1700 रुपए मे आती है। उसके बदले में इतनी ही राशि टीकावन रूप में दी जाए, तो शादी करने वाले परिवार को यह बड़ी मदद होगी। शादी मे कपड़ा लेनदेन, मांस मदिरा के चलन को भी प्रतिबंधित करने पर चर्चा की गई। कहा गया कि शादी विवाह अपनी हैसियत के अनुसार करना चाहिए। किसी भी प्रकार का दिखावा नहीं करना चाहिए। कर्ज लेकर या पैतृक जमीन जायदाद को बेचकर शादी विवाह दिखावा के लिए नहीं होना चाहिए।

पगड़ी रस्म में नगद रकम दें

इसी प्रकार अंतिम क्रियाकर्म में भी पगड़ी रस्म के दौरान पैसा का चलन होना चाहिए। कपड़े देने की जगह दुखी परिवार को नगद रकम देनी चाहिए। अगर आप 100 रूपए का कपड़ा पगड़ी रस्म के लिए खरीदते हैं, तो कपड़ा न देकर उतने ही रुपए हम यदि पगड़ी रस्म में दे दें तो यह शोक संतप्त परिवार के लिए बहुत ही आर्थिक मदद होगी। हमें अपनी मानसिकता को बदलना होगा। सामाजिक लेनदेन विवाह पर भी चर्चा की गई। शिक्षा के क्षेत्र में अधिक से अधिक कन्या साक्षरता पर विशेष जोर दिया गया। समाज के जागरूक और शिक्षित जनों ने कहा कि हमारे समाज के बच्चे 12वीं पास होने के बाद आगे की शिक्षा ग्रहण नहीं करते हैं। इस पर गहनता से विचार कर हमें ध्यान देना चाहिए। आगे की पढ़ाई करना चाहिए।उच्च शिक्षित होकर ही हम अपने अधिकारों के लिए बेहतर पहल कर पाएंगे और समाज को प्रगतिशील बना सकेंगे।हमारे समाज के लिए आरक्षण लागू है। आरक्षण से हमें बहुत सारी सुविधाएं मिलती हैं। उन सुविधाओं का हमें लाभ उठाना चाहिए। सांस्कृतिक कार्यक्रम खानपान पर भी चर्चा की गई। कहा गया कि क्रियाकर्म में सांस्कृतिक कार्यक्रम उड़िया नाटक को बंद कर देना चाहिए। इस अवसर पर भतरा समाज के संभागीय अध्यक्ष शंभूनाथ कश्यप, संभागीय कोषाध्यक्ष लीलाधर कश्यप, ब्लॉक अध्यक्ष अनंत राम कश्यप, अस्तूराम कश्यप, धनेश्वर नेताम, रूपधर कर्मा, दशमत कश्यप, रतन भारती, मदन राम समेत विभिन्न ग्रामों के सरपंच, सिरहा, पुजारी, ग्रामीणों महिलाओं और माता बहनों की जबरदस्त उपस्थिति रही।

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