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ऑपरेशन जलशक्ति में मारे गए आठ नलसली, सभी मृत नक्सलियों के शव बरामद

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  •  नक्सली कैंप को ध्वस्त किया सुरक्षा बलों ने
  • भारी मात्रा में हथियार और गोला बारूद भी बरामद

अर्जुन झा-

जगदलपुर बस्तर संभाग में चलाए जा रहे नक्सल विरोधी अभियान ऑपरेशन जलशक्ति में पुलिस और सुरक्षा बलों को फिर एकबार बड़ी कामयाबी मिली है। संभाग के नारायणपुर और बीजापुर जिलों की सीमा पर हुई मुठभेड़ में फोर्स ने आठ नक्सली मार गिराए हैं। फोर्स ने एक नक्सली कैंप को ध्वस्त कर दिया है और भारी मात्रा में हथियार एवं विस्फोटक बरामद किए हैं। मारे गए सभी आठ नक्सलियों के शव बरामद कर लिए गए हैं। मुठभेड़ में कई नक्सलियों के घायल होने की भी खबर है।

दंतेवाड़ा, बीजापुर और नारायणपुर जिलों के सीमावर्ती क्षेत्र में स्थित हांदावाड़ा रेकावाया के घने जंगलों एवं पहाड़ियों के बीच पुलिस और माओवादियों के बीच हुई मुठभेड़ में 8 माओवादी ढेर कर दिए गए हैं।

ऑपरेशन जलशक्ति के तहत दंतेवाड़ा डीआरजी, नारायणपुर डीआरजी, बस्तर डीआरजी एवं बस्तर फाइटर तथा एसटीएफ़ के सुरक्षा बलों का संयुक्त दल गुरुवार को ऑपरेशन के लिए निकला था। जहां बुधवार से आज सुबह नक्सलियों के साथ फोर्स की मुठभेड़ होती रही। फोर्स ने आज मौके से 8 वर्दीधारी माओवादियों के शव के साथ 1 नग थ्री नॉट थ्री गन, 315 बोर की एक बंदूक, 2 नग 12 बोर की दो बंदूक, 4 नग एसबीएमएल, भारी मात्रा में विस्फोटक, दवाइयां, माओवादी वर्दी, माओवादी साहित्य एवं अन्य दैनिक उपयोग की सामग्री बरामद की है। तकरीबन 72 घंटे चले ऑपरेशन के बाद बड़ी सफलता हासिल हुई है। बुधवार से शुक्रवार तक सुबह 9 बजे तक लगभग 7-8 बार रुक रुककर फायरिंग चलती रही।

नक्सल नेताओं की थी मौजूदगी

रेकावाया के जंगल में प्रतिबंधित भाकपा माओवादियों के माड़ डिवीजन एवं पूर्वी बस्तर डिवीज़न के अंतर्गत इंद्रावती एरिया कमिटी के डिवीजनल कमांडर दीपक, कमलाकर, सपना उर्फ सपनक्का, प्लाटून नंबर 16 के कमांडर मल्लेश के साथ 50- 60 सशस्त्र माओवादियो की उपस्थिति की सूचना पर दंतेवाड़ा के उप पुलिस अधीक्षक राहुल उइके, आशीष नेताम एवं नारायणपुर के उप पुलिस अधीक्षक प्रशांत देवांगन के नेतृत्व में दंतेवाड़ा, नारायणपुर व बस्तर जिले के डीआरजी और बस्तर फाइटर्स के साथ एसटीएफ की संयुक्त टीम नक्सल उन्मूलन अभियान पर निकली थी। ग्राम रेकावाया के जंगल में माओवादियों द्वारा स्थापित अस्थाई ट्रेनिंग कैंप को ध्वस्त किया गया।

चार महिला नक्सली भी हलाक

गश्त के दौरान सुरक्षा बलों पर नक्सलियों ने गोलीबारी शुरू कर दी। जवानों ने भी मुस्तैदी से मोर्चा सम्भाला और नक्सलियों को मुंहतोड़ जवाब दिया। मुठभेड़ के बाद कार्डन एवं सर्चिंग की कार्रवाई के दौरान घटना स्थल से 8 वर्दीधारी माओवादियों के शव बरामद किए गए हैं। मृतकों में 4 महिला और पुरुष माओवादी शामिल हैं। शवों के साथ, 1 नग 303, 1 नग 315 बंदूक, 2 नग 12 बोर की बंदूकें, 4 एसबीएमएल, 7 बीजीएल सेल, तीर बम, 2 कुकर आईईडी, वायरलेस सेट, बैटरी, माओवादी वर्दी, इलेक्ट्रिक वायर, प्रतिबंधित माओवादी संगठन की प्रचार सामग्री, पिट्ठू, 400 जोड़ी चप्पलें, सिलाई मशीन, अन्य दैनिक उपयोग की सामग्री बरामद की गई। भारी मात्रा में डंप का सामान वही सुरक्षा बल द्वारा नष्ट किया गया। इस मुठभेड़ में कई माओवादी घायल भी हुए हैं जिन्हे उनके साथी माओवादी घने जंगल और पहाड़ों का फायदा उठाकर ले जाने में सफल हुए। पुलिस टीम की वापसी के दौरान सुरक्षा बल को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से माओवादियों ने 15 किलो का आईईडी प्लांट किया था, जिसे सुरक्षा बलों द्वारा सुरक्षित रूप से मौके पर सुरक्षित ढंग से नष्ट कर दिया गया। घेराबंदी में स्वयं को फंसता देखकर बचने के लिए माओवादियो ने वर्दी बदलकर सिविल कपड़े पहन लिए। घेराबंदी के समय कुछ संदेहियों को पकड़ कर पूछताछ करने एवं अग्रिम कार्रवाई के लिए जिला मुख्यालय दंतेवाड़ा लाया जा रहा है।

तीन माह से पानी की भारी किल्लत का सामना कर रहे हैं कई गांवों के ग्रामीण

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  •  भाजपा नेता बनवासी मौर्य ने लोगों का दर्द दूर करने के लिए उठाया बीड़ा

अर्जुन झा

बकावंड गर्मी का मौसम शुरू होने से पहले ही अंचल के ग्रामीण जल संकट से जूझते आ रहे हैं। मौजूदा दौर की भीषण गर्मी ने हालात और भी बिगाड़ दिए हैं। कई गांवों में पानी की भारी किल्लत हो गई है।

ग्राम पंचायत जीराखाल के टुंडरी आमापारा के ग्रामीण बूंद बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं।

जीराखल में व्याप्त जल संकट की जानकारी मिलने पर क्षेत्र के वरिष्ठ भाजपा नेता और प्रदेश भाजपा के कार्यकारिणी सदस्य बनवासी मौर्य ने मौके में पंहुच कर हालात का जायजा लिया। उन्होंने तुरंत अधिकारी से चर्चा कर जल्द पानी की व्यवस्था करने के लिए कहा। बकावंड ब्लाक कi ग्राम पंचायत जीराखाल के टुंडरी आमापारा में इन दिनों पीने की पानी के लिए ग्रामीणों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जीराखाल के टुंडरी आमा पारा की जनसंख्या लगभग तीन सौ है। गांव का ग्राउंड वॉटर लेवल काफी नीचे चला गया है। हैंडपंप और ट्यूबवेल काम नही कर रहे हैं। बीते तीन माह से ग्रामीणों को पानी के लिए भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस समस्या को लेकर कई दफे ग्राम पंचायत में ग्रामीण गुहार लगा चुके हैं, मगर ग्राम पंचायत के कान में जूँ तक नही रेंग रही है। अभी तक समस्या का समाधान नही हो पाया है। जिससे ग्रामीण आंदोलित होते दिख रहे हैं।वहीं इस समस्या का पता चलते ही तुरंत मौके पर जाकर भाजपा प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य बनवासी मौर्य ने जायजा लिया और समस्या को तत्काल संज्ञान में लेते हुये पीएचई विभाग के अधिकारी से फोन पर बात कर तुरंत पानी की व्यवस्था करने को कहा। इसी तरह बकावंड विकासखंड मुख्यालय से लगी पंचायत में निस्तारी पानी और पेयजल की किल्लत झेल रहे हैं। नल जल योजना पूरी तरह फेल हो चुकी है। इस इलाके में फ्लोराईड युक्त पानी मिलने से लोग पेयजल के लिए काफी परेशान हैं। बीजेपी नेता बनवासी मौर्य ने इस मामले में जिला कलेक्टर और जिला पंचायत सीईओ समेत कई अफसरों और मंत्री को पत्र लिखकर समस्या का समाधान करने की मांग की है। वे पिछले कई दिनों से पेयजल से प्रभावित ग्रामों का लगातार दौरा भी कर रहे हैंl

ग्रामीणों के लिए देवदूत हैं मौर्य

भाजपा नेता बनवासी मौर्य अंचल के पीड़ित और समस्याग्रस्त ग्रामीणों के लिए देवदूत की भूमिका निभाते नजर आ रहे हैं। चुनाव निपटने के बाद अक्सर सारे दलों नेता जहां घरों में आराम फरमाते रहते हैं, वहीं भाजपा नेता बनवासी मौर्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष किरण देव की राह पर चलते हुए पीड़ितों की सेवा में हमेशा तत्पर दिखाई देते हैं। दो दिन पहले श्री मौर्य ने ग्राम पंचायत डिमरापाल की बेसहारा बुजुर्ग महिला चेरो बाई के लिए गांव के सामुदायिक भवन में रहने की व्यवस्था करवाई है। मौर्य चेरो बाई के लिए एक मकान बनवाने की भी पहल कर रहे हैं। इसी तरह बनवासी मौर्य गांवों का निरंतर दौरा कर वहां की समस्याओं खासकर जल संकट के हालात का जायजा ले रहे हैं। वे ग्रामीणों को सरकारी स्तर पर पेयजल उपलब्ध कराने की भी ठोस पहल कर रहे हैं। बनवासी मौर्य की कोशिशों के चलते अनेक गांवों को पेयजल संकट से राहत भी मिल चुकी है। ग्रामीण अब बनवासी मौर्य को देवदूत मानने लगे हैं।

बिखरने न पाए हादसे में गंभीर घायल शिक्षिका किरण दुबे की उम्मीद की किरण

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  •  वेंटीलेटर पर जिंदगी की जंग लड़ रही है शिक्षिका
  • शिक्षक संगठनों ने नहीं बढ़ाए मदद के लिए हाथ

अर्जुन झा-

जगदलपुर सरकारी स्कूल की एक शिक्षिका अपने स्कूल के सामने ही सड़क दुर्घटना का शिकार होकर आज जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रही है। मगर दुख की बात है कि शिक्षक शिक्षिकाओं की मदद के लिए अग्रणी रहने वाले शिक्षक संगठन और शिक्षक पीड़ित शिक्षिका की मदद के लिए अब तक आगे नहीं आए हैं। वहीं शिक्षा विभाग के बड़े अफसरों ने भी शिक्षिका किरण दुबे की सुध ली है। ऐसे मे शिक्षक संगठनों से किरण दुबे की उम्मीद की किरण बिखरने लगी है।

शिक्षिका किरण दुबे को न तो विभाग से कोई मदद मिल पाई है, न शिक्षक संगठनों और न ही विभागीय साथियों से। जबकि किरण दुबे के साथ हादसा स्कूल के गेट के पास ही हुआ था।सामान्यतया देखा गया है कि ज़ब भी किसी कर्मचारी के साथ इस तरह की कोई दुर्घटना होती है, तो उसके विभाग, संघ व कर्मचारियों का सहयोग जरूर मिलता है। परंतु अभी तक किरण दुबे को अपने विभाग, शिक्षक संघ और सहयोगियों से किसी प्रकार का कोई सहयोग नहीं मिल पाया है। बास्तानार ब्लाक में देखा गया है कि किसी शिक्षक या कर्मचारी के पर अगर कोई विपत्ति आती है तब सभी शिक्षक साथ खड़े दिखाई देते हैं। परंतु अभी तक किरण दुबे का हालचाल जानने भी कोई नहीं पहुंचा है। किरण दुबे जिंदगी और मौत की लड़ाई महीनों से वेंटिलेटर पर लड़ रहीं है।

वेंटीलेटर पर हैं किरण दुबे

घटना 27 अप्रैल शनिवार की है। रोज की तरह श्रीमती किरण दुबे अपने स्कूल किलेपाल से किलेपाल नम्बर3 निजी वाहन से जा रही थीं। स्कूल के गेट की तरफ उनकी गाड़ी मुड़ ही रही थी कि अचानक सामने से आ रहे पिकअप वाहन ने चालक ने स्कूल के पास सडक पर लगे छत्तीसगढ पुलिस के बेरिकेट को तोड़ते हुए किरण दुबे के वाहन को जोरदार टक्कर मार दी। घटना सुबह स्कूल समय की है। तेज आवाज सुनकर स्कूल स्टाफ ओर सीएसी उस्मान खान दौड़कर बाहर आए। उन्होंने गाडी मे फसी किरण दुबे को बार निकाला ओर स्कूल के प़धान पाठक  कुरुद अपने निजी वाहन से उन्हें किलेपाल अस्पताल लेकर गए। वहां से प़ाथमिक उपचार के बाद जगदलपुर रेफर कर दिया गया। हालत गंभीर देखते हुए किरण दुबे को रात 11.30 बजे एमपीएम अस्पताल से रायपुर रेफर कर दिया गया।वर्तमान मे रायपुर के निजी अस्पताल में किरण दुबे का उपचार चल रहा है। एक्सीडेंट मे किरण दुबे के लेफ्ट हाथ मे ओर कूल्हे की दो हड्डियां टूट गई हैं और माथे पर व सीने मे चोट आई है। वर्तमान में हाथ एवं कमर के कूल्हे की हड्डियों का आपरेशन हो चुका है और 15 दिन तक वे आईसीयू मे रही। अब भी उनका इलाज चल रहा है और उन्हें वेंटिलेटर में रखा गया है।

टूट गया बास्तनार का मिथक?

जब भी बास्तनार ब्लाक में किसी प्रकार की ऐसी घटना होती है, खासकर शिक्षकों के साथ तो सभी शिक्षक साथी एकजुटता के साथ आर्थिक सहयोग में आगे रहते हैं। कई बार परिवार के सदस्यों के साथ कुछ घटना होने पर भी सहयोग करते देखा गया है। परंतु इस बार किरण दुबे के मामले में महीने भर बाद भी कोई सहयोग की सुगबुगाहट तक नहीं दिखाई दे रही है। इस संबंध में जब विभाग के कुछ शिक्षकों से पूछा गया तो नाम न छापने की शर्त पर उन्होंने बताया कि उनका संघ इस प्रकार के सहयोग में आगे रहता है परंतु दुर्घटना के बाद तुरन्त छुट्टी लग जाने के कारण सभी का ध्यान किरण दुबे मैडम की तरफ नहीं जा सका था। अब जानकारी हुई है आपके माध्यम से तो जरूर भरपूर मदद की पहल करेंगें।

बालोद जिला शतरंज संघ का गठन

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  • शेखर गुप्ता बने जिला शतरंज संघ के अध्यक्ष।
  • एस के भगत को सचिव पद की जिम्मेदारी।
  • संघ के प्रयास से बीएसपी के समर कैंप में शामिल हुआ शतरंज खेल

दल्लीराजहरा – छत्तीसगढ़ प्रदेश शतरंज संघ के अध्यक्ष राघवेन्द्र सिंघानिया के निर्देशानुसार महासचिव विनोद राठी व सचिव एस के भगत के मार्गदर्शन में बालोद जिला शतरंज संघ अध्यक्ष पद पर सर्व सम्मति से शेखर गुप्ता को नियुक्त किया गया।

नवनियुक्त अध्यक्ष शेखर गुप्ता द्वारा आगामी जिला की कार्यकारिणी का गठन किया जाएगा। इनकी नियुक्ति पर जयंता दास, अशोक बाम्बेश्वर, सतीश काम्बले, नीलेश श्रीवास्तव, विजय शर्मा,संतोष सहारे,वी पी अनिल कुमार,दिनेश देवांगन, भोज राम साहू,ज्ञानेंद्र सिंह,जे गुरुल्लु,राजेश पटेल,शेखर रेड्डी,दामोदर राव,जयदीप गुप्ता,सुमित जैन सहित अन्य शतरंज खेल प्रमियों ने हर्ष जाहिर कर बधाई व शुभकामनाएं प्रेषित की है।

छत्तीसगढ़ प्रदेश शतरंज संघ (सीजीएससीए) द्वारा नवगठित बालोद जिला शतरंज संघ के प्रयास से बीएसपी द्वारा 22 मई से 14 जून तक चलने वाले समर कैम्प में इस वर्ष से शतरंज के खेल प्रशिक्षण खिलाड़ी कोच द्वारा राजहरा क्लब में ले सकेंगे। बालोद जिला शतरंज संघ अध्यक्ष शेखर गुप्ता एवं सचिव एस.के.भगत ने संघ के अनुरोध पर समर कैंप में शतरंज खेल को शामिल करने पर आईओसी महाप्रबंधक आर.बी.गहरवाल व बीएसपी प्रबंध का आभार व्यक्त किया।शतरंज संघ अध्यक्ष शेखर गुप्ता ने कहा की इस कैंप में ट्रेनर द्वारा खिलाड़ियों को चेस की बारीकियां सिखाने, फिडे नियमों, चेस क्लॉक के उपयोग के साथ ओपनिंग, मिडिल व एंड गेम, पजल्स के बारे में सिखाया जाएगा। चेस खेल से लगाव रखने वाले इस समर कैंप का लाभ ले सकते है।

लोन वर्राटू मुहिम से फिर एक महिला सहित तीन माओवादियों ने किया आत्मसमर्पण

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  •  दंतेवाड़ा जिले मे अब 805 नक्सली कर चुके सरेंडर

अर्जुन झा

जगदलपुर दंतेवाड़ा जिले में फिर एक महिला नक्सली सहित तीन नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर दिया है। दंतेवाड़ा जिले मे अब तक 805 नक्सली आत्मसमर्पण कर चुके हैं और इनमें 180 ईनामी नक्सली भी शामिल हैं।

बस्तर संभाग के दंतेवाड़ा जिले में चलाए जा रहे लोन वर्राटू अभियान (घर वापस आईए) तथा छत्तीसगढ़ शासन की पुनर्वास नीति के तहत विगत कुछ माह में जिला पुलिस बल और सीआरपीएफ के द्वारा भटके हुए माओवादियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए लगातार संपर्क एवं संवाद किया जा रहा है। इसके साथ ही प्रशासन की नक्सल पुनर्वास नीति का व्यापक प्रचार- प्रसार गांव गांव में किया जा रहा है। जिसके परिणाम स्वरूप व्यापक बदलाव माओवादी कैडर में दिखाई दे रहा है और बड़ी संख्या में नक्सलियों का आत्मसमर्पण हो रहा है। नक्सलियों के अमानवीय, आधारहीन विचारधारा एवं उनके शोषण, अत्याचार तथा स्थानीय आदिवासियों पर उनके द्वारा की जाने वाली हिंसा से तंग आकर नक्सलवाद की ओर भटके युवा अब समाज की मुख्यधारा से जुड़ने का संकल्प के साथ घर लौट रहे हैं। इसी कड़ी में मलांगेर एरिया कमेटी के प्रतिबंधित संगठन में नीलावाया पंचायत जनताना सरकार सदस्य एवं मेडिकल टीम कमांडर हांदा मंडावी, बुरगुम पंचायत मिलिशिया सदस्य शशि मड़काम, बुरगुम पंचायत सीएनएम सदस्य बंडी पोड़ियाम निवासी बुरगुम पेरमापारा थाना अरनपुर जिला दंतेवाड़ा ने 24 मई को डीआरजी कार्यालय दंतेवाड़ा में आत्मसमर्पण किया। इन माआवादियों को आत्मसमर्पण कराने में डीआरजी दंतेवाड़ा एवं 111वीं वाहिनी सीआरपीएफ दंतेवाड़ा का विषेष योगदान रहा। जिला पुलिस बल और सीआरपीएफ ने सभी भटके हुए माओवादियों से अपील की है कि हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा से जुड़ने के लिए निकटतम थाना अथवा कैंप में सम्पर्क करें और क्षेत्र के विकास में अपना अमूल्य योगदान दें। पुलिस अधीक्षक दंतेवाड़ा ने आत्मसमर्पित माओवादियों को छत्तीसगढ़ शासन की पुनर्वास योजना के तहत 25-25 हजार रूपए प्रोत्साहन राशि एवं पुनर्वास योजना के तहत मिलने वाले सभी प्रकार के लाभ प्रदान करने का वचन दिया। लोन वर्राटू अभियान के तहत् अब तक 180 ईनामी माओवादी सहित कुल 805 माओवादी आत्मसमर्पण कर समाज की मुख्यधारा से जुड़ चुके हैं।

नक्सलियों के पुनर्वास के लिए साय सरकार ने उठाया ऐतिहासिक कदम

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  • उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने नक्सलियों से भी पुनर्वास नीति के लिए मांगे सुझाव
  • नक्सलियों से वार्ता की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम : विजय शर्मा
  • अच्छी पहल का प्रायोजित विरोध आखिर क्यों

अर्जुन झा-

जगदलपुर नक्सली समस्या के निराकरण और नक्सलियों के पुनर्वास की दिशा में छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मगर जब भी सरकार कुछ अच्छा करने की कोशिश करती है कुछ संगठन प्रायोजित तरीके से विरोध में खड़े हो जाते हैं। ऐसा ही कुछ इन दिनों बस्तर में देखने को मिल रहा है।

छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री विजय शर्मा ने नक्सल प्रभावित लोगों और नक्सलियों के लिए बनने वाली पुनर्वास नीति पर सुझाव के लिए जगदलपुर में मेल आईडी, गूगल फॉर्म जारी किए। उप मुख्यमंत्री और गृह मंत्री विजय शर्मा ने जगदलपुर में नक्सलियों से वार्ता की दिशा में एक कदम और आगे बढ़ाते हुए पुनर्वास नीति पर सुझाव के लिए ईमेल आईडी और गूगल फॉर्म जारी कर माओवादियों से आग्रह किया है कि वे स्वयं बताएं कि उनके लिए पुनर्वास नीति कैसी होनी चाहिए? गृहमंत्री श्री शर्मा ने कहा कि मैं हमेशा से कहता आया हूं कि वार्ता के सारे रास्ते खुले हैं और इसके लिए हमारी भाजपा की विष्णुदेव सरकार ने नियद नेल्लानार नाम से योजना लाकर गांव में सड़क, पानी, स्वास्थ्य, चिकित्सा सुविधा आरंभ कर समानता और विकास का एक वातावरण तैयार कर दिया है और यह बात भटके हुए युवा अच्छे से समझ रहे हैं। इसीलिए हम उन्हीं से पूछ रहे हैं कि उनकी पुनर्वास नीति क्या होनी चाहिए। ताकि मुख्यधारा से जुड़कर वे भी प्रदेश और देश के विकास में भागीदारी निभा सके।

पत्रकारों से चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि आप और समाज नक्सलवाद की समस्या के निराकरण के लिए सबसे ज्यादा समर्थ हैं। सरकार स्वयं मानती है कि एंटी नक्सल आपरेशन ही समस्या का समाधान नहीं है। यह तो सरकार के प्रयास का बहुत छोटा सा हिस्सा मात्र है। सरकार का मुख्य प्रयास प्रभावित क्षेत्र में विकास करना, आदिवासी क्षेत्र की सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक विकास के कार्य करना है। साथ ही साथ जो युवा नक्सलवादी विचारधारा छोड़कर पुनर्वासित हुए हैं, उनके लिए हमारी सरकार कार्य कर रही है और उनके सर्वांगीण विकास की योजना आगे बढ़ा रही है। उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने युवाओं को भड़काने वाले नक्सली नेताओं से पूछा है कि चीन जैसे देशों में भी माओवाद है, लेकिन वहां सामाजिक, धार्मिक, आर्थिक और व्यक्तिगत स्वतंत्रता शून्य है।क्या वे ऐसा राज्य चाहते हैं? उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़ की पुनर्वास नीति बहुत ही अच्छी है लेकिन उसे और बेहतर बनाने के लिए किसी भी राज्य में जाकर अध्ययन करने के लिए हम तैयार हैं, परंतु मुख्य विषय यह है कि न अधिकारियों को समर्पण करना है, न पत्रकारों को, न शासन में बैठे लोगों को और ना आमजनों को। समर्पण तो माओवादियों को करना है और यह पहल उन्हीं के लिए है कि वह स्वयं बताएं कि उनके लिए पुनर्वास नीति कैसी होनी चाहिए? इस दौरान भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव, बस्तर जिला भाजपा अध्यक्ष रूपसिंह मंडावी, चित्रकोट विधायक विनायक गोयल, सुभाऊ कश्यप और नगर के सभी वरिष्ठ पत्रकार उपस्थित थे।

तब क्यों नहीं उठाते आवाज?

सरकार किसी भी पार्टी की हो, वह नक्सल समस्या दूर करने की दिशा में जरूर काम करती है। लेकिन सर्व आदिवासी समाज जैसे कुछ संगठन जो आदिवासियों के हितों की रक्षा करने का दावा करते हैं और हर मुद्दे पर सरकार के खिलाफ खड़े हो जाते हैं। उप मुख्यमंत्री और गृहमंत्री विजय शर्मा ने नक्सल प्रभावित लोगों और नक्सलियों पुनर्वास के लिए नक्सली नेताओं के साथ ही सभी से सुझाव भी मांगे हैं। प्रदेश की भाजपा सरकार में विजय शर्मा के गृह विभाग सम्हालते ही नक्सलियों पर चौतरफा हमले हुए, सैकड़ों नक्सली मारे गए और नक्सल प्रभावित गांवों में विकास की रौशनी पहुंचने लगी है। अब जब सरकार नक्सलियों के लिए पुनर्वास नीति पर कार्य कर रही है, तब यह सर्व आदिवासी समाज सरकार के विरोध में आकर बंद जैसे आयोजन कर सरकार की मंशा को डिगाने का कार्य करने लगा है। विजय शर्मा पहले गृहमंत्री हैं जिन्होंने नक्सली वारदात के बीच नक्सल गढ़ के गांवों में कदम रखे, पीड़ितों का दर्द साझा किया, उनके लिए जरूरी इंतजाम किए। अब सर्व आदिवासी समाज प्रायोजित तरीके से बीजापुर मुठभेड़ के बहाने सरकार के कदम को रोकने का प्रयास कर रहा है। ये तथाकथित आदिवासी नेता तब क्यों मौन साधे रहते हैं, ज़ब नक्सली बेकसूर आदिवासियों की हत्या उनके परिजनों के सामने कर देते हैं? आदिवासियों का अपहरण कर ले जाते हैं? बाहरी नक्सली स्थानीय आदिवासियों को ढाल की तरह इस्तेमाल करते हैं। यह बात हर सरकार कर दौर में सामने आ चुकी है। तब नक्सलियों के खिलाफ सर्व आदिवासी समाज के स्वयंभू नेता आवाज क्यों नहीं उठाते? वहीं बस्तर में आदिवासियों का धर्मान्तरण एक बड़ी समस्या बन गई है। इसकी वजह से आदिवासी संस्कृति, परंपराएं नष्ट होती जा रही हैं। आदिवासियों का अस्तित्व संकट में आ गया है। इसके खिलाफ सर्व आदिवासी समाज आखिर क्यों खड़ा नहीं होता? यह सवाल लाजिमी है। उप मुख्यमंत्री और गृहमंत्री विजय शर्मा जो कदम उठा रहे हैं, वह स्वागत योग्य है। इसमें आदिवासियों का भी हित जुड़ा हुआ है।

डीबी ग्रुप के द्वारा कल होगा जिले का सबसे बड़ा रक्तदान शिविर दल्ली राजहरा में

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दल्लीराजहरा रक्तदान महादान,इंसानियत ही हमारा धर्म है मानव सेवा माधव सेवा की तर्ज पर डोनेट ब्लड वेलफेयर फाउंडेशन डीबी ग्रुप दल्ली राजहरा द्वारा एक दिवसीय विशाल रक्तदान शिविर 25 मई 2024 को नगर के साहू सदन, बस स्टैण्ड के पीछे,सुबह 09:30 बजे से शाम 05:30 बजे तक आयोजित किया जाएगा।

संस्था के अध्यक्ष दीपक साहू ने बताया कि इस दिन रक्तविरों का सम्मान हेलमेट और प्रमाण पत्र दे कर किया जायेगा। नगर के ब्लड बैंक में रक्त की कमी को पूरा करने के लिए समय समय पर शिविर का आयोजन किया जाता है। जिसमें रक्तविरो का महत्वपूर्ण योगदान रहता है,जो कि किसी भी समय जरूरत मंदो को रक्त दान करते है।

दल्ली राजहरा माइंस में चल रहे बीएसपी के प्रोजेक्ट में मजदूरों का हो रहा शोषण

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  • सालों से काम कर रहे श्रमिकों का बनाया जाता है प्रबंधन पर प्रोडक्सन का दबाव बना ठेकेदार द्वारा बनवाया जाता हैं टेंपररी गेटपास

दल्ली राजहरा भिलाई इस्पात संयंत्र की दल्ली राजहरा माईस में बीएसपी के प्रोजेक्ट में कार्यरत बी.एस.बी.के.कंपनी मजदूरों का शोषण कर रही हैं। इन कंपनी द्वारा मजदूरों के जीवन से खुलेआम खिलवाड़ किया जा रहा है। इस मामले में माइंस प्रबंधन एवं ठेकेदार की भी भूमिका संदिग्ध प्रतीत होने लगी है।
प्रोजेक्ट में कार्यरत कर्मियों का भुगतान भी शासन द्वारा तय दर पर नहीं किया जा रहा है। न ही वेतन का भुगतान समय पर किया जाता हैं। वर्षो से कार्यरत श्रमिकों का टेंपररी गेट पास बनाया जाता है। जोकि मात्र 15 दिनों के लिए वैध होता है। लगातार तीन बार टेंपररी गेटपास बनाने के पश्चात नियमानुसार मजदूरों का नियमित पास बनाने हेतु उन्हें सेफ्टी ट्रेनिंग एवं , सरफेस वर्कर ट्रेनिंग देकर परमानेंट पास बनाया जाना चाहिए। किन्तु प्रोडक्सन का हवाला देकर माइंस क्षेत्र में ठेकेदार द्वारा लगातार लंबे समय से टेंपररी गेट पास ही बनवाया जा रहा है। ऐसा कृत्य किसी श्रमिक की दुर्घटना होने पर कंपनी की जवाबदेही से बचने के लिए किया जा रहा है। क्योंकि टेंपरेरी पासधारी श्रमिक की पर दुर्घटना पर कंपनी अपनी जवाबदेही से बच जाती है जहां रोजगार लगाने के नाम पर माइंस में प्रोजेक्ट में कार्य कर रही कंपनियों के अधिकारियों द्वारा काम पर लगाने के लिए स्थानीय बेरोजगार युवकों से लाखों रुपए वसूल बैक डोर से एंट्री कराई जा रही है वही उनके जीवन से भी खिडवाड़ किया जा रहा है। जबकि गेट पास बनाने जैसे महत्वपूर्ण कार्य के लिए प्रबंधन के दबाव डलवा कर ठेकेदार द्वारा गेट पास बनवाया जाता है। इस प्रक्रिया में इस तरह की त्रुटि की केवल प्रोजेक्ट में कार्य कर रही कंपनियों एवं ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने के लिए श्रमिको के जीवन से खिडवाड किया जा रहा है। जिसकी उक्त स्तरीय जांच कराई जानी चाहिए। जिससे इस कार्य के लिप्त लोगों को रोका जा सके एवं स्थानीय बेरोजगार युवकों को शोषण से बचाया जा सके एवं उन्हें नियमित कार्य पर रखा जाए। भाजपा मंडल अध्यक्ष राकेश द्विवेदी ने इस तरह हो रहे शोषण एवं बेरोजगारों के साथ खिलवाड़ को तत्काल बंद करने की मांग की।

दल्ली राजहरा के खिलाड़ियों का भाजपा नेताओं ने बढ़ाया उत्साह

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दल्ली राजहरा नेशनल पावर लिफ्टिंग 7 से 10 जून तक दिल्ली में आयोजित होने जा रही है। इस राष्ट्रीय प्रतियोगिता में दल्ली राजहरा के 11 खिलाड़ी भी भाग ले रहे हैं।

नेशनल पॉवर लिफ्टिंग में भाग लेने वालों में दल्ली राजहरा से प्रिया, सृष्टि, ललिता, वेनुका, तामेश्वरी, दुर्गा, मोनिका, अंजना, रामअवतार साहू, सुरेंद्र मौर्य, रवींद्र मौर्य आदि शामिल हैं।भाजपा जिला अध्यक्ष पवन साहू ने बच्चों को आशीर्वाद देकर उनके उज्ज्वल भविष्य की कमाना की। इस दौरान राजहरा भाजपा मंडल अध्यक्ष राकेश द्विवेदी, पत्रकार संतोष कोसी एवं महेन्द्र सिंग गुड्डू, प्रकाश, दीपक साहू, मदन माईती, ऋतु साहू ने भी इन बच्चों को बधाई दी।

बस्तर के नारायणपुर में फिर सात नक्सली किए गए हलाक

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  •  सुबह से लगातार जारी है मुठभेड़, 7 शव बरामद

जगदलपुर बस्तर संभाग के नारायणपुर और बीजापुर जिलों के सीमावर्ती क्षेत्र में गुरुवार सुबह से फोर्स और नक्सलियों के बीच लगातार मुठभेड़ चल रही है। अधिकृत जानकारी के अनुसार मुठभेड़ में अब तक सात नक्सली मारे जा चुके हैं तथा सातों के शव भी बरामद कर लिए गए हैं।

प्लाटून नंबर 16 और इंद्रावती एरिया कमेटी के नक्सलियों की उपस्थिति की सूचना के आधार पर नारायणपुर, दंतेवाड़ा और बस्तर जिले के डीआरजी और बस्तर फाइटर्स के साथ एसटीएफ की टीमें संयुक्त नक्सल सर्च अभियान पर निकली थीं। आज 23 मई को सुबह 11 बजे नक्सलियों ने सुरक्षा बलों पर गोलीबारी शुरू कर दी। जवानों ने भी मुस्तैदी से मोर्चा सम्भाला और जवाबी फायरिंग शुरू कर दी। दोनों ओर से दिन भर रुक रुक कर गोलीबारी चलती रही। रुक रुक कर मुठभेड़ अभी भी जारी है।जवान नक्सलियों को मुंहतोड़ जवाब दे रहे हैं।

सर्च में अब तक सात वर्दीधारी नक्सलियों के शव तथा सात हथियार बरामद हुए हैं और कई नक्सलियों के घायल होने की प्रबल संभावना है।

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