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बस्तरिया कमल, दिखा रहे हलचल

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  • नीलकंठ – केदार बन सकते हैं गद्दीदार
  • कहीं न कहीं दिखेगा लता-विक्रम का पराक्रम

(अर्जुन झा)

जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के चुनाव में बस्तर से कांग्रेस का बोरिया बिस्तर सिमट गया है। भाजपा के सूखे सरोवर में एक साथ 8 कमल खिल उठे हैं। चुनाव के पहले बस्तर में कांग्रेस का मखमली बिस्तर बिछा हुआ था। उसके पांव जमीं पर नहीं पड़ रहे थे। बस्तर की सभी 12 सीटों पर एकछत्र राज कर रही थी। कल चमन था, आज इक सेहरा हुआ, देखते ही देखते ये क्या हुआ? जो हुआ, वह कांग्रेस की करनी का फल है। जिस पेड़ पर बैठे, उसी को काट रहे थे, यह तो अनुभव किया जा रहा था। इसके अलावा कांग्रेस यह हकीकत भूल बैठी थी कि शोहरत की बुलंदी पल भर का तमाशा है, जिस शाख में बैठे हो, वह टूट भी सकती है! 5 साल की सत्ता में कांग्रेसी बौरा गए थे। सब मिलकर कांग्रेस को ही काटने में लगे थे। ऐसे में नतीजा वही निकला, जो निकलना था। सत्ता से 5 साल के वनवास में उन नकचढ़े भाजपाइयों का अहंकार टूट गया, जो 15 साल की सत्ता में यह सुध बिसरा गए थे कि जहाज का पंछी कितना भी उड़ ले, लौटकर जहाज पर ही आना पड़ता है। जनता जहाज है और राजनेता पंछी। यह बात जब वे भूल जाते हैं और पंख जवाब दे देते हैं तो फिर जनता की शरण में आना पड़ता है। गनीमत है कि भाजपा के पंछियों को यह हकीकत पांच साल में समझ आ गई। कांग्रेस में इसके विपरीत प्रभाव दिखा। खैर, हो होना था, सो हो गया। जो पहले बस्तर में 15 साल तक धूम मचा रहे थे, वे भी हमारे अपने बस्तरिया ही थे। 5 साल में जिनके पर कुछ ज्यादा ही निकल आए, वे भी बस्तर के लख्ते जिगर थे। अब फिर जिन्हें बस्तर की जनता ने जिम्मेदारी सौंपी है, वे सभी बस्तर की संतान हैं। सभी का स्वागत, सभी का सम्मान। अब बात करें कि कांग्रेस के समय सत्ता में बस्तर की स्थिति की तो सभी सीटें कांग्रेस को सौंप देने वाले बस्तर को सिर्फ एक मंत्री मिला। कार्यकाल पूरा होते होते आखिर में यह संख्या 2 पर पहुंची। मगर उल्टा नुकसान हुआ। 15 साल तक भाजपा की सरकार में बस्तर का जलवा रहा है। लगभग सभी बड़े चेहरे मंत्री बने। इनमें केदार कश्यप, विक्रम उसेंडी, लता उसेंडी, महेश गागड़ा के नाम शामिल हैं। इस बार चुनाव जीतने वाले पूर्व मंत्रियों में केदार कश्यप, विक्रम उसेंडी, लता उसेंडी जैसे बड़े नाम के साथ ही नौकरशाह से राजनेता बने नीलकंठ टेकाम भी शामिल हैं। नीलकंठ को अचानक भाजपा की टिकट मिली और उन्होंने केशकाल में विधानसभा उपाध्यक्ष रहते संतराम नेताम को परास्त कर दिया। पूर्व मंत्री लता उसेंडी कांग्रेस के मोहन मरकाम से लगातार हार के बाद इस बार जीत गईं। मोहन ने लता को मंत्री रहते हुए हराकर शुरुआत की थी तो लता ने मोहन का सत्ता का सफर तब रोक दिया, जब वे मंत्री थे। विक्रम उसेंडी रमन सिंह की सरकार में मंत्री रहे, कांकेर के सांसद रहे, प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। वे वरिष्ठ आदिवासी नेता हैं और केदार कश्यप तो पिछली बार हार के शिकार होकर भी भाजपा संगठन के प्रदेश महामंत्री रहे हैं। भाजपा के तीनों महामंत्री चुनाव जीते हैं। इनमें से एक प्रखर हिंदुत्व के प्रतिनिधि विजय शर्मा उप मुख्यमंत्री बन चुके हैं। एक महामंत्री ओपी चौधरी को भी सम्मान मिल सकता है लेकिन एक अन्य महामंत्री केदार कश्यप सत्ता की राजनीति के पुराने खिलाड़ी हैं। वे बस्तर के विजेताओं में भाजपा के सबसे अनुभवी नेता हैं। 15 साल सरकार में बस्तर का चेहरा रहे हैं। अब खबर यह भी है कि विष्णुदेव मंत्रिमंडल में ज्यादातर नए चेहरे हो सकते हैं लेकिन क्षेत्रीय संतुलन के लिहाज से वरिष्ठ को भी अहमियत दी जा सकती है। नए नेतृत्व की बात है तो नीलकंठ फ्रेश फेस हैं। राजनीति में ताजा हवा के झोंके हैं। नवीनता लानी है तो वे विष्णु सरकार में मंत्री हो सकते हैं। केदार और नीलकंठ की संभावना अधिक चर्चित हो रही है। यदि बस्तर को दो मंत्री मिले तो यह दोनों स्थान पा सकते हैं। लता के साथ उलझन फिलहाल यह है कि केंद्रीय राज्यमंत्री के पद से इस्तीफा देने वाली रेणुका सिंह की वजनदारी ज्यादा है। वे लता से पहले महिला बाल विकास मंत्री रह चुकी हैं। इस बार महिला मंत्री की संख्या बढ़ी तो सांसद से विधायक बनीं गोमती साय को भी नजरअंदाज करना मुश्किल होगा। ऐसे में यदि लता मंत्री नहीं बनीं तो वे भविष्य में महिला आयोग की सिरमौर बन सकती हैं। वैसे भी वे भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं और आने वाले लोकसभा चुनाव में उन्हें बस्तर सीट से उतारने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। विक्रम उसेंडी को कहीं समायोजित किया जा सकता है। भाजपा ने आदिवासी मुख्यमंत्री दे दिया है। इसलिए अब संगठन पर आदिवासी नहीं बैठ सकता, ऐसा कोई बंधन नहीं है लेकिन आम तौर पर ऐसा नहीं होता है। तब भी भाजपा प्रयोगधर्मी राजनीतिक दल है। जब यह आदिवासी दिवस पर आदिवासी अध्यक्ष हटाकर उसे ही सरकार में आते ही मुख्यमंत्री बना सकती है तो कुछ भी कर सकती है।

नगरनार स्टील प्लांट से लोहा परिवहन में स्थानीय वाहन मालिक को प्राथमिकता देने की मांग – गीता मिश्रा भू-प्रभावितों की उपेक्षा अब ग्रामीण बर्दाश्त नहीं करेंगे

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जगदलपुर बस्तर जिले के एच एम एस एवं नगरनार मण्डल के महिला मोर्चा अध्यक्ष गीता मिश्रा ने एनएमडीसी के अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा। स्थानीय वाहन मालिक को प्लांट से लोहा परिवहन की प्राथमिकता देने की मांग की है ताकि प्लांट से होने

वाली चोरियों को रोका जा सके । उन्होनें कहा कि एनएमडीसी इसे गंभीरता से नही लेती है तो स्थानीय टुक कारोबारियों के उपेक्षा के विरोध उग्र आन्दोलन किया जायेगा जिसकी जिम्मेदारी एनएमडीसी प्रबंधन की होगी।

एचएमएस जिला अध्यक्ष एवं नगरनार मण्डल के महिला

मोर्चा अध्यक्ष गीता मिश्रा ने भी आरोप लगाया है कि राजधानी के लोहा कारोबारी एवं बाहरी ट्रांसपोर्टस एवं वाहन मालिक के सांठ-गांठ में प्लांट से लोहा की चोरी काफी समय से चलता आ रहा है जिससे बस्तर जिले का बदनामीहो रही है। उन्होने कहा कि नगरनार आन्दोलन

 

प्लांट से लोहा की परिवहन का कार्य जिले के ट्रक कारोबारियों को प्राथमिकता के आधार पर दिया जाये। जिले से बाहर के वाहनों को प्लांट से लोडिंग का कार्य पूरी तरह प्रतिबंधित करने की मांग की है। उन्होने कहा कि प्रबंधन के इस लापरवाी से भू- प्रभावित भी उपेक्षि हो रहे हैं। उन्होने कहा कि प्रबंधन परिवहन कार्य को लेकर सप्ताह दिनों में ठोस रणनीति नहीं बनाई और स्थानीय ट्रक मालिकों को प्राथमिकता नहीं दिए जाने पर उग्र की चेतावनी दी है।

ग्रामीणों का दिल जीत रहे हैं सीआरपीएफ के जवान

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  • सिविक एक्शन कार्यक्रम के जरिए कर रहे हैं मदद
  • एफ 188वीं बटालियन पुसपाल घाट ने गांवों में वितरित की सोलर लाईट

जगदलपुर बस्तर में नक्सली समस्या के उन्मूलन के लिए तैनात केंद्रीय रक्षित बल (सीआरपीएफ) के जवान न सिर्फ अमन कायम करने का काम कर रहे हैं, बल्कि जनसेवा के कार्यों से ग्रामीणों का दिल भी जीत रहे हैं। सीआरपीएफ द्वारा समय -समय पर चलाए जाने वाले सिविक एक्शन कार्यक्रम से लोगों का भरोसा सुरक्षा बलों के प्रति बढ़ता जा रहा है। सीआरपीएफ की 188वीं बटालियन पुसपाल घाट बस्तर भी अपने परिचालनिक क्षेत्र के गांवों में नक्सल पीड़ित ग्रामीणों के जीवन में बदलाव की बयार बहाने का काम कर रही है।

सीआरपीएफ की 188वीं बटालियन द्वारा अपने ऑपरेशनल एरिया में स्थित

बस्तर के सुदूरवर्ती एवं नक्सल प्रभावित गांव छोटे बदरंगा, रतेंगा व परोदा में सिविक एक्शन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। सिविक एक्शन कार्यक्रम भवेश चौधरी कमांडेंट 188वीं बटालियन के कमांडेंट भवेश चौधरी निर्देशन में उप कमांडेंट युद्धवीर सिंह व सहायक कमांडेंट बन्नाराम एवं अन्य अधीनस्थ अधिकारियों व जवानों तथा ग्रामीणो की उपस्थिति में संपन्न हुआ। सिविक एक्शन कार्यक्रम के तहत 188वीं बटालियन सीआरपीएफ द्वारा अपने परिचालनिक क्षेत्र छोटे बदरंगा, रतेंगा, परोदा में सोलर स्ट्रीट लाईट लगाई गई। इस अवसर पर सीआरपीएफ 188वीं बटालियन के सहायक कमांडेंट बन्नाराम ने बताया कि सिविक एक्शन कार्यक्रम से ग्रामीणों व सुरक्षा बलों के बीच बेहतर व मधुर संबंधों को बढ़ावा मिल रहा है। देश के विकास व इलाके में शांति व्यवस्था बनाए रखने हेतु ग्रामीणों व सुरक्षा बलों के बीच मधुर संबंध होना आवश्यक है। इस अवसर पर मौजूद पचासों ग्रामीणों ने सीआरपीएफ के इस कार्य की भूरि भूरि प्रशंसा की। ग्रामीणों का कहना था कि सीआरपीएफ द्वारा इस प्रकार के कार्यक्रम का आयोजन समय- समय पर किया जाता है, जिससे हम ग्रामवासियों को बेहतर लाभ मिल रहा है तथा सभी स्थानीय नागरिक सीआरपीएफ की कार्यप्रणाली से बहुत खुश हैं। सोलर स्ट्रीट लाईट वितरण पर ग्रामीणों ने सीआरपीएफ का आभार भी व्यक्त किया।

नेगानार के ग्रामीणों को झटके पे झटके दे रही है बिजली

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  •  बिजली के अप डाउन से खराब हो रहे हैं उपकरण
  • शिकायत के बाद भी हफ्तों फाल्ट दूर नहीं करते कर्मी

अर्जुन झा

बकावंड बस्तर संभाग के गांवों में विद्युत वितरण कंपनी के अधिकारी – कर्मचारियों की स्वेच्छाचारिता का खामियाजा ग्रामीणों को भोगना पड़ रहा है। बिजली संबंधी समस्याओं को दूर करने में इस कदर कोताही बरतने की सारी हद पार कर जाते हैं कर्मचारी। कुछ ऐसा ही नेगानार में देखने को मिल रहा है। यहां के ग्रामीणों को बिजली झटके पे झटके दे रही है। हाई – लो वोल्टेज के कारण ग्रामीणों के विद्युत उपकरण बर्बाद हो रहे हैं। शिकायत पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

बकावंड विकासखंड के ग्राम नेगानार के ग्रामीणों के लिए बिजली की सुविधा परेशानी का सबब बन गई है।यहां के उपभोक्ताओं के घरों, दुकानों, हालर मिल आटा चक्की, सिंचाई पंपों में बिजली आपूर्ति कभी भारी हाई वोल्टेज के साथ होने लगती है, तो कभी वोल्टेज इस कदर डाउन हो जाता है कि बल्ब भी ढंग से नहीं जलते और टिमटिमाते से प्रतीत होते हैं। अत्यधिक वोल्टेज में बिजली सप्लाई होने पर टीवी, फ्रिज, पंखे, कूलर, इलेक्ट्रिक आयरन, ट्यूब लाईट, बल्ब, मिक्सर ग्राईंडर व अन्य विद्युत चलित उपकरण जल जाते हैं। कई ग्रामीणों के चार्जिंग में रखे मोबाईल फोन व चार्जर तथा अनेक किसानों के मोटर पंप जल चुके हैं। गांव के दर्जनों घरों से इस तरह की शिकायतें प्रायः रोज आती रहती हैं। रोज हजारों रुपए के उपकरण खराब हो रहे हैं। नेगानार व आसपास के गांवों के लिए नियुक्त विद्युत विभाग के एरिया मिस्त्री को सूचित किए पंद्रह दिनों से ज्यादा समय गुजर जाने के बाद भी विद्युत आपूर्ति को सामान्य बनाने की दिशा में कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। ग्राम नेगानार में इस तरह के हालात बीस दिनों से बने हुए हैं। अब तक दर्जनों पंखे, टीवी सेट्स, बल्ब, ट्यूब लाईट, इलेक्ट्रिक प्रेस आयरन, मोबाईल फोन, चार्जर, मोटर पंप आदि खराब हो चुके हैं। बिजली की इस तबाही से ग्रामीण त्रस्त हो चले हैं। फिर भी बिजली विभाग के अधिकारी कर्मचारी मौन बने हुए हैं। ज्ञात हो कि सालभर पहले भी विभाग को नेगानार की इस समस्या से अवगत कराया गया था। तब स्थायी समाधान न कर काम चलाऊ मरम्मत का काम कर दिया गया था। नतीजतन अब फिर से वैसी ही समस्या आ खड़ी हुई है।विद्युत कंपनी के अधिकारी कर्मचारी गांवों का कभी दौरा ही नहीं करते। वे ब्लॉक मुख्यालय स्थित दफ्तर में ही सारा समय गुजार देते हैं।

और भी हैं कई समस्याएं

वोल्टेज अप – डाउन के अलावा विद्युत संबंधी और भी कई परेशानियां नेगानार के ग्रामीणों के समक्ष मुंहबाये खड़ी हैं। गांव में कहीं बीच रोड पर बिजली पोल खड़े कर दिए गए हैं, तो कहीं किसी ग्रामीण के घर की चारदीवारी के अंदर स्टे तार (पोल सपोर्टर) लगा दिए गए हैं। कुछ स्थानों पर सड़क किनारे लगे पोलों के तार काफी नीचे हैं। सामान लदे ट्रक, मिनी ट्रक, पिकअप आदि वाहन गुजरते हैं तब बिजली के झूलते तार वाहनों पर लदे सामान से टकराने लगते हैं। तारों के टकराने से जबरदस्त स्पार्किंग होती है और आग लगने का खतरा पैदा हो जाता है।दरअसल सड़क की ऊंचाई थोड़ी ज्यादा है और पोल बौने होते जा रहे हैं। ऐसे बिजली खंभों खम्भे को ऊंचा करना निहायत ही जरूरी है। अन्यथा गांव में कभी भी बड़ी दुर्घटना हो सकती है। इस तरह विभाग की घोर लापरवाही के कारण ग्रामीणों की जान जोखिम में पड़ गई है।

पूरे ब्लॉक में अव्यवस्था का आलम

ऐसे हालात अकेले नेगानार गांव में ही नहीं हैं, बल्कि बकावंड विकासखंड के अधिकतर गांवों के ग्रामीणों को भी ऐसी ही त्रासदी के दौर से गुजरना पड़ रहा है। विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों की लापरवाही का खामियाजा विकासखंड के दूरस्थ गांवों के ग्रामीणों को कुछ ज्यादा ही भोगना पड़ रहा है। विद्युत कंपनी के स्थानीय प्रभारी अधिकारी दूर दराज के गांवों का दौरा करने नहीं जाते और वहां की परेशानियां उनके संज्ञान में नहीं आ पाती। बरसात के मौसम में तो दूर दराज के गांवों में तो हफ्ते पंद्रह दिनों तक बिजली गुल रहती है। ग्रामीण हलकान और परेशान होते रहते हैं। फिर भी फाल्ट दूर कर बिजली बहाल करने में तत्परता नहीं दिखाई जाती। इस बदइंतजामी को लेकर ग्रामीणों में भारी नाराजगी है।

भाजपा के झूठ के खिलाफ जारी रखेंगे लड़ाई : लखेश्वर बघेल

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  • विधानसभा स्तरीय कार्यकर्ता सम्मेलन में नतीजों पर किया गया मंथन

बकावंड बस्तर विधायक लखेश्वर बघेल ने विधानसभा स्तरीय कार्यकर्ता सम्मेलन में कहा कि कार्यकर्ता चिंतन मनन कर आत्मावलोकन करें। भाजपा झूठ के दम पर चुनाव जीत गई है, लेकिन हमें हार नहीं मानना है। भाजपा के झूठ को जनता के सामने हमें लाना है।

विधानसभा चुनाव के बाद पूरे छत्तीसगढ़ में पहली बार कांग्रेस के विधानसभा स्तरीय समीक्षा बैठक का आयोजन बस्तर विधानसभा में विधायक लखेश्वर के गृह ग्राम गिरोला में किया गया।

को संबोधित करते बस्तर विधानसभा में जीत की शानदार हैट्रिक लगाने वाले विधायक लखेश्वर बघेल ने कहा कि भाजपा झूठ की बुनियाद पर खड़ी है। नरेंद्र मोदी ने हर व्यक्ति के खाते में 15 लाख रु. डालने का जुमला फेंककर प्रधानमंत्री बने हैं। वहीं छत्तीसगढ़ के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने किसानों व महिला स्व सहायता समूहों से झूठा वादा कर जनता के साथ धोखाधड़ी की है। विधायक लखेश्वर बघेल ने कहा कि कांग्रेस ने लोगों को सीधे राहत देने का कार्य किया है। प्रत्येक तीज त्यौहार के लिए अनुदान, राजीव गांधी किसान न्याय योजना के तहत किसानों को बोनस देने का काम किया है। इसकी लोगों ने बहुत ही सराहना की है। भाजपा ने झूठ का पुलिंदा थमाकर लोगों को गुमराह करने व बरगलाने का काम किया है। इसी झूठ के दम पर उसने छत्तीसगढ़ में सरकार बनाई है। कांग्रेस के समस्त कार्यकर्ता राज्य के हर एक परिवार के साथ खड़ा है। किसी को कोई चिंता करने की जरूरत नहीं है। हम प्रत्येक परिवार के हक के लिए लड़ेंगे। लोगों को न्याय दिलाना ही हमारा पहला धर्म है। श्री बघेल कहा कि आगामी लोकसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी भाजपा के हर झूठ को लेकर जनता के बीच जाएगी। सच्चाई के लिए हम लड़ेंगे और मोहब्बत के साथ जीतेंगे। छत्तीसगढ़ मॉडल क्यों फेल हुआ यह चिंतन का विषय है। प्रदेश में बस्तर जिले की सारी सीटें कांग्रेस के लिए सबसे सुरक्षित सीट मानी जाती हैं, लेकिन ऐसा क्या हुआ कि लोगों की सहानुभूति कांग्रेस के प्रति कम हो गई, यह चिंतन मनन का विषय है। लखेश्वर बघेल ने कहा कि इस बार के चुनाव में कांग्रेस के परंपरागत वर्चस्व वाले गांवों में भी हमें मुंह की खानी पड़ी है। जबकि भाजपा के गढ़ में हमने परचम लहराया है। इस बारे में भी चिंतन मनन करने की जरूरत है।  बघेल ने कहा कि छत्तीसगढ़ में कांग्रेस सरकार ने जिन योजनाओं का क्रियान्वयन किया था, उनकी पूरे देश मे सराहना हुई थी। कांग्रेस का घोषणा पत्र भी भाजपा से बेहतर था। हमारी योजनाओं और कामों को हम लोगों तक नहीं पहुंचा पाए और भाजपा का झूठ लोगों पर हावी हो गया। यह चिंता का विषय है।

आदिवासी मुख्यमंत्री बनाए जाने पर भाजपाइयों ने मनाया जश्न

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  •  कांग्रेस के भ्रष्टाचार के खिलाफ लोगों ने लगाई मुहर

बकावंड छत्तीसगढ़ में आदिवासी मुख्यमंत्री बनने पर बस्तर विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत करपावंड मंडल के मुख्य बाजार चौक पर भाजपा कार्यकर्ताओं ने आतिशबाजी और मिठाई बांटकर जश्न मनाया। भाजपा नेताओं ने कांग्रेस शासनकाल की योजनाओं को को भ्रष्टाचार का जरिया निरुपित किया। छत्तीसगढ़ में भाजपा की जीत की खुशी में बाजार चौक पर भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा जमकर पटाखे फोड़े गए और एक दूसरे का मुंह मीठा कराया गया। आमजनों को भी मिठाई बांटी गई। पार्टी के आदिवासी नेता विष्णुदेव साय को मुख्यमंत्री बनाए जाने पर भाजपा नेताओं ने कहा कि भाजपा सभी समुदायों का सम्मान करती है और सबका साथ, सबका विश्वास, सबका विकास की भावना के साथ काम करती है। भाजपा ने ही देश को प्रथम महिला आदिवासी राष्ट्रपति दिया और अब छत्तीसगढ़ को आदिवासी मुख्यमंत्री दिया है। कांग्रेस के नेता भाजपा पर आदिवासी विरोधी होने का झूठा आरोप लगाते रहे हैं। जबकि छत्तीसगढ़ विधानसभा के चुनावों में ही राज्य के ही कुछ बड़े कांग्रेस नेताओं ने बस्तर संभाग में अपने प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज, मोहन मरकाम, चंदन कश्यप व अन्य आदिवासी प्रत्याशियों को हरवाने का काम किया है। भाजपा नेताओं ने कहा कि प्रदेश की जनता ने कांग्रेस के भ्रष्टाचार के खिलाफ मतदान कर भाजपा को साफ सुथरी सरकार बनाने का मौका दिया है। कांग्रेस द्वारा किए गए सारे भ्रष्टाचार की अब जांच होगी और भ्रष्टाचारी कांग्रेस नेता जेल जाएंगे। इस अवसर पर द्रोपती देवांगन, मंडल अध्यक्ष परीश बेसरा, फुलकेश्वर मंडल अध्यक्ष, शोभाराम वरिष्ठ कार्यकर्ता,अशोक ठाकुर उपाध्यक्ष, लखीराम मिश्रा, सीताराम यादव, संतूराम कश्यप, ओमप्रकाश गुप्ता, बंशीधर कश्यप, मंगलूराम कश्यप, कमलोचन भारती, खगेश्वर भारती, सुदर्शन बेसरा, फूलचंद कश्यप, धनसिंह बघेल, गोवर्धन बघेल, रामदयाल बघेल, राजकुमार समेत बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता मौजूद थे।

सचिव संघ बकावंड के निर्विरोध अध्यक्ष बने रमेश चंद्र ठाकुर

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  • सरगीपाल पंचायत के सचिव पर सभी सचिवों ने जताया भरोसा

बकावंड पंचायत सचिव संघ ब्लाक इकाई बकावंड के ब्लाक अध्यक्ष का चुनाव प्रदेश पंचायत सचिव संघ छग के निर्देश पर कराया गया। सरगीपाल के पंचायत सचिव रमेशचंद्र ठाकुर निर्विरोध ब्लॉक अध्यक्ष चुन लिए गए।ब्लॉक के सभी पंचायत सचिवों की मौजूदगी में ठाकुर को अध्यक्ष घोषित किया गया।

11दिसंबर को प्रातः11 बजे से शाम 4 बजे तक निर्वाचन प्रक्रिया संपन्न हुई।ब्लाक अध्यक्ष हेतु एक मात्र नाम निर्देशन पत्र रमेशचंद्र ठाकुर सचिव ग्राम पंचायत सरगीपाल का प्राप्त हुआ। अध्यक्ष पद के लिए किसी और सचिव ने दावेदारी नहीं की। फलतः ठाकुर को निर्विरोध अध्यक्ष पंचायत सचिव संघ ब्लॉक बकावंड घोषित करते हुए निर्वाचन प्रमाण पत्र प्रदान किया गया। इस अवसर पर संघ के संरक्षक एवं प्रभारी पंचायत इंस्पेक्टर प्रहलाद चंद्राकर द्वारा अध्यक्ष एवं कार्यकारिणी सदस्यों को फूल माला पहनाकर एवं तिलक लगाकर बधाई दी गई। इस अवसर पर जनपद पंचायत क्षेत्र बकावंड की सभी ग्राम पंचायतों के सचिव उपस्थित थे।

उलनार के ग्रामीणों की आस्था पर भारी पड़ रहा है भ्रष्टाचार

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  • आठ माह बाद भी पूरा नहीं हो पाया मातागुड़ी निर्माण

अर्जुन झा

बकावंड बस्तर के आदिवासियों को गांवों में स्थापित मातागुड़ी एवं डेवगुड़ियों के प्रति अटूट आस्था रहती है। वे इन देव स्थानों में पूजा अर्चना करके ही अपने हर शुभ कार्यों की शुरुआत करते हैं। मगर ग्राम पंचायत के कारिंदे ग्रामीणों की आस्था पर आघात पहुंचाने से भी बाज नहीं आ रहे हैं। ऐसा ही कुछ ग्राम उलनार में भी हो रहा है, जहां आठ माह से मातागुड़ी का निर्माण पूरा नहीं हो पाया है। इसे लेकर ग्रामीणों में आक्रोश है।

जनपद पंचायत बकावंड की ग्राम पंचायत उलनार की पुरानी मातागुड़ी जीर्ण शीर्ण हो चली थी। ग्रामीण नई मातागुड़ी बनवाने की मांग लंबे समय से करते आ रहे थे। ग्रामीणों की आस्था और भावनाओं को देखते हुए 8- 9 माह पूर्व जिला खनिज निधि न्यास ट्रस्ट (डीएमएफटी) से उलनार में नई मातागुड़ी के निर्माण के लिए पांच लाख रुपए स्वीकृत किए गए थे। ग्राम सरपंच और पंचायत सचिव ने निर्माण कार्य शुरू करा भी दिया, लेकिन अधूरा काम कराकर निर्माण बीच में ही रोक दिया गया। आठ माह बीत जाने के बाद भी निर्माण अधूरा पड़ा है। निर्माण के नाम पर अब तक ढाई फीट ऊंची प्लींथ के साथ पिलरों और ऊपर छत के लिए दीवार भर खड़ी कर दी गई है। मातागुड़ी भवन के चारों ओर दीवार निर्माण और छत ढलाई का काम अब तक नहीं कराया गया है। नतीजतन ग्रामीण वहां धर्मलाभ नहीं ले पा रहे हैं।पंचायत सचिव और सरपंच ग्रामीणों की आस्था से खिलवाड़ करने पर तुल गए हैं। उलनार के आदिवासी समुदाय तथा माता पर आस्था रखने वाले अन्य जाति समुदायों के लोगों में पंचायत सचिव की मनमानी को लेकर भारी नाराजगी देखी जा रही है। उलनार के सारे नागरिक मातागुड़ी को दशकों से पूजते आ रहे हैं। इस ग्राम देवी पर यहां के लोगों में गहरी आस्था है। साल 2022 के अंत में मातागुड़ी निर्माण की मांग ग्रामीणों द्वारा की गई थी। तब जाकर राशि स्वीकृत हुई थी।

तो दो माह में ही गुड़ी बन जाती

स्वीकृत पूरी राशि खाते से निकाल लेने के बाद भी थोड़ा बहुत काम कराया गया। इसके बाद काम को अधूरा छोड़ दिया गया है। आठ माह बीत जाने के बाद भी मातागुड़ी का निर्माण पूरा नहीं हो पाया है। वहीं पंचायत आचार संहिता का रोना रोते हुए बहाना बना रहे हैं कि आदर्श आचार संहिता लागू हो जाने के कारण काम बीच में रोकना पड़ा है।दूसरी ओर ग्रामीण मातागुड़ी के लिए स्वीकृत 5 लाख रु. की अफरा तफरी की आशंका जता रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि मातागुड़ी निर्माण के लिए स्वीकृत राशि अगर स्थानीय निवासियों की सार्वजनिक समिति बनाकर समिति को दी गई होती, तो इतनी बड़ी रकम से भव्य मातागुड़ी का निर्माण दो माह के भीतर ही पूर्ण कर लिया गया होता। उल्लेखनीय है कि उलनार में आदिवासी समुदाय और दीगर समुदायों के लोग हर सार्वजनिक एवं पारिवारिक कार्यों की शुरुआत मातागुड़ी में पूजा अर्चना कर व उनसे आशीर्वाद लेकर ही करते हैं। ऐसे में मातागुड़ी का निर्माण अधूरा रहने से यहां के लोगों की आस्था आहत हो रही है।

वर्सन

आचार संहिता से रुका काम

निर्माण जारी रहने के दौरान चुनाव आचार संहिता लग गई थी। इस कारण मातागुड़ी का काम रोकना पड़ गया था। कार्य अब जल्द शुरू करा देंगे।

राजेश कश्यप,   सचिव, ग्राम पंचायत उलनार

रात्रिकालीन सफाई होने से बदल रही है संजय मार्केट की सूरत

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  •  बाजार की व्यवस्था को और बेहतर बनाने आयुक्त मंडावी ने की सहयोग की अपील

जगदलपुर नगर निगम द्वारा रात में की जाने वाली साफ सफाई से संजय मार्केट व सड़कों की सूरत बदल रही है। अभियान का असर दिखने भी लगा है।

शहर को स्वच्छ व सुंदर बनाने के लिए नगर निगम प्रशासन एक कार्ययोजना के साथ शहर की सफाई में लगातार कार्य कर रहा है । निगम आयुक्त हरेश मंडावी शहर को स्वच्छ एवं सुंदर बनाने के लिए प्लानिंग कर स्वच्छता विभाग की टीम के साथ शहर के वार्डों, मुख्य मर्गों,सार्वजनिक स्थलों, बाजारों वअन्य स्थानों में लगातार सफाई अभियान चला रहे हैं। इसमें शहरवासियों को जोड़कर शहर को स्वच्छ व सुंदर बनाने वे प्रयासरत हैं। इसी कड़ी में शहर के मुख्य बाजार संजय मार्केट में नगर निगम द्वारा रात्रिकालीन सफाई का कार्य किया जा रहा है। निगम द्वारा रात को ही बाजार परिसर के कचरे व सब्जियों के अवशेष को जेसीबी मशीन के जरिए एकत्रित कर बाहर ले जा रहा है। साथ ही स्वच्छता कंमाडोज द्वारा भी बाजार में रात के समय झाड़ू लगाकर बाजार परिसर के कचरे को कचरा वाहन में डालकर उसका निपटाने किया जा रहा है। रात में बाजार बंद रहने से नाइट स्वीपिंग में आसानी हो रही है। इस अभिनव पहल के चलते सुबह जब व्यापारी और खरीदार मार्केट में पहुंचते हैं, तो मार्केट को पूरी तरह चकाचक देख खुशी से झूम उठते हैं। दिन के समय निगम स्वचछता विभाग के कर्मचारी संजय बाजार के सब्जी विक्रेताओं एवं दुकानदारों को अपने दुकानों के कचरे को जहां तहां न फेंकने की समझाईश देते हुए नगर निगम का सहयोग करने की अपील भी उनसे करते हैं। संजय बाजार के व्यापारी और नागरिक निगम के इस प्रयोग की सराहना कर रहे हैं।

अबकी बार छत्तीसगढ़ में चलेगा आदिवासियों का ही राज

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  • बस्तर से केदार कश्यप, लता उसेंडी और विक्रम उसेंडी बनाए जा सकते हैं मंत्री
  • हटेगा भाजपा के आदिवासी विरोधी होने का लेबल

अर्जुन झा

जगदलपुर अपने आदिवासी नेता विष्णुदेव साय को छत्तीसगढ़ का मुख्यमंत्री बनाकर भारतीय जनता पार्टी ने छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि तेलंगाना, ओड़िशा, महाराष्ट्र समेत अन्य राज्यों के आदिवासियों का भी दिल जीत लिया है। अब आदिवासी मुख्यमंत्री विष्णुदेव के मंत्रिमंडल में बस्तर के भी कम से कम तीन आदिवासी विधायकों को जगह मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। ये विधायक हैं केदार कश्यप, विक्रम उसेंडी और लता उसेंडी। ये तीनों ही पहले भी मंत्री रह चुके हैं तथा उन्हें राजकाज का खासा अनुभव है। इन्हें मंत्री बनाकर भाजपा आदिवासी समुदाय के बीच फैलाई गई गलतफहमी को न सिर्फ दूर कर लेगी बल्कि लोकसभा चुनावों में देश के आदिवासी बहुल राज्यों में अच्छी जीत दर्ज भी करा सकती है। बस्तर के आदिवासी तो भाजपा के इस फैसले से आल्हादित होकर कहने भी लगे हैं कि अबकी बार छत्तीसगढ़ में चलेगा आदिवासियों का राज और 2024 में फिर आएगा मोदी का राज।

वोट और तुष्टिकरण की राजनीति के वशीभूत कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, जेडीयू, तृणमूल कांग्रेस, राष्ट्रीय जनता दल, आम आदमी पार्टी और अन्य तमाम विपक्षी दलों ने भाजपा के खिलाफ तरह -तरह की थ्योरियां गढ़ डाली हैं। ये सभी दल भाजपा पर आदिवासी, ओबीसी व मुस्लिम ईसाई विरोधी होने की तोहमत लगाते नहीं थकते। हर मंच पर इन दलों के नेता भाजपा को पानी पी पीकर कोसते रहते हैं कि भाजपा सिर्फ ऊंची जातियों और धन्ना सेठों का भला करने वाली पार्टी है, उसे आदिवासियों, अल्पसंख्यकों, ओबीसी की कोई चिंता नहीं है। जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुरू से सबका साथ, सबका विश्वास, सबका विकास का मंत्र देते आए हैं और उस पर अच्छा काम भी कर रहे हैं। बावजूद मोदी सरकार के खिलाफ नरेटिव खड़ा करने में विपक्षी दल पीछे नहीं रहते। इस नरेटिव को भाजपा ने सबसे पहले दलित समुदाय से आने वाले रामनाथ कोविंद को राष्ट्रपति बनाकर तोड़ा, फिर आदिवासी समुदाय की द्रौपदी मुर्मू को राष्ट्रपति बनाकर विपक्षी दलों का मुंह बंद करने का शानदार प्रयास किया। बावजूद विपक्ष अपनी हरकतों से बाज नहीं आया और नए संसद भवन का उद्घाटन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से न कराए जाने को आदिवासी विरोधी होने का मुद्दा बनाकर खूब हो हल्ला मचाने लगा। मणिपुर हिंसा की घटनाओं में भी आदिवासी तड़का लगाकर भाजपा पर तीर छोड़ने में कोई कमी नहीं की गई। छत्तीसगढ़ विधानसभा के चुनावों में भी आदिवासी विरोध वाला मुद्दा हावी रहा, मगर छत्तीसगढ़ को विष्णुदेव साय के रूप में पहला आदिवासी मुख्यमंत्री देकर भाजपा ने विपक्ष की बोलती ही बंद कर दी है। हालांकि छत्तीसगढ़ के प्रथम मुख्यमंत्री अजीत जोगी भी खुद को आदिवासी समुदाय का बताते रहे हैं, लेकिन उनकी जाति को लेकर विवाद रहा है और विष्णुदेव साय विशुद्ध रूप से आदिवासी हैं। श्री साय को मुख्यमंत्री बनाए जाने से बस्तर के आदिवासियों के बीच खुशी की लहर दौड़ गई है। यही नहीं बस्तर संभाग की सीमाओं से जुड़े तेलंगाना, ओड़िशा, आंध्रप्रदेश एवं महाराष्ट्र के साथ ही आदिवासी बहुल पड़ोसी राज्य झारखंड के आदिवासी भी स्वयं को गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं। बस्तर के सबसे वरिष्ठ आदिवासी नेता, सर्व आदिवासी समाज के अध्यक्ष एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री अरविंद नेताम भी भाजपा के इस कदम के मुरीद बन गए हैं। कांग्रेस के शीर्ष नेताओं में शुमार रहे अरविंद नेताम ने तो विष्णुदेव साय को मुख्यमंत्री बनाए जाने का स्वागत करते हुए भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व की तारीफ करने में जरा भी गुरेज नहीं किया है। यह इस बात का प्रमाण है कि भाजपा ने ऐसा कदम उठाकर आदिवासियों का दिल जीत लिया है। बस्तर के आदिवासी यह कहते नहीं अघा रहे हैं कि अबकी बार छत्तीसगढ़ में आदिवासी सरकार और 2024 में फिर से मोदी सरकार। साथ ही बस्तर के आदिवासियों की चाहत है कि बस्तर संभाग से चुने गए ज्यादा से ज्यादा आदिवासी विधायकों को साय मंत्रिमंडल में जगह दी जाए।

बस्तर का हक तो बनता है

छत्तीसगढ़ में गठित होने जा रही भाजपा सरकार में सम्मानजनक स्थान पाने का हक तो बस्तर का बनता ही है। बस्तर संभाग से चुने गए वरिष्ठ भाजपा विधायकों में केदार कश्यप नारायणपुर सीट, लता उसेंडी कोंडागांव सीट और विक्रम उसेंडी अंतागढ़ सीट मंत्री पद पाने के वाजिब हकदार हैं। ये तीनों पहले भी भाजपा की सरकारों में मंत्री रह चुके हैं तथा उन्हें राजकाज और प्रशासन चलाने का व्यापक अनुभव है। बस्तर का आदिवासी समाज चाहता है कि केदार कश्यप, लता उसेंडी और विक्रम उसेंडी की वरिष्ठता और अनुभव का सम्मान करते हुए उन्हें मंत्री पद दिया ही जाना चाहिए। यहां यह बताना जरुरी है कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार में बस्तर के आदिवासी नेताओं को पर्याप्त महत्व दिया गया था। सुकमा जिले के कोंटा सीट के विधायक कवासी लखमा को आबकारी एवं उद्योग मंत्री बनाया गया था। कोंडागांव के निवर्तमान विधायक मोहन मरकाम को केबिनेट मंत्री व इसके पहले प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष, बस्तर लोकसभा क्षेत्र के सांसद दीपक बैज को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष, नारायणपुर के निवर्तमान विधायक चंदन कश्यप को हस्तशिल्प विकास बोर्ड का अध्यक्ष, बस्तर के विधायक लखेश्वर बघेल को बस्तर क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण का अध्यक्ष एवं बीजापुर के विधायक विक्रम मंडावी को सदस्य बनाया गया था। इस लिहाज से सत्तारूढ़ होने जा रही भाजपा को भी ऐसा ही कदम उठाना होगा।

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