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नौकरी भले ही पक्की नहीं, पर कर्तव्य की ललक तो पक्की है

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  • संविदा शिक्षक पेश कर रहे हैं गुरु के कर्तव्य की शानदार मिसाल
  • बाढ़, बारिश ने हिला दी चूलें, फिर भी अडिग हैं कर्तव्य पथ पर 

 -अर्जुन झा-

जगदलपुर बाढ़, बारिश ने बस्तर में सब कुछ तहस नहस कर दिया है। बच्चों की पुस्तक, कॉपियां तक बह गईं और उनके साथ ही बह गए पढ़ने लिखने के सपने। जब घर में अनाज का एक दाना भी न बचा हो, वैसे हालात में गरीब मां बाप के लिए अपने बच्चों की पढ़ाई दोबारा शुरू कराना नामुमकिन ही था। घरों में चूल्हे नहीं जल पा रहे हों तो शिक्षा का उजियारा बिखरने की उम्मीद भी बेमानी सी लगती है। ऐसे में संविदा शिक्षकों ने इंसानियत और सच्चे गुरु की गुरुता की जो मिसाल पेश की है, वह निसंदेह अनुकरणीय है।

मामला बस्तर जिले के लोहंडीगुड़ा विकासखंड के ग्राम मांदर से सामने आया है। मांदर में वर्षा और इंद्रावती नदी की बाढ़ ने जमकर कहर ढाया है। पूरे गांव के घरों में बाढ़ का पानी घुस गया था, अनाज, राशन, कपड़े, लत्ते, बच्चोँ की किताब कॉपियां, रुपए पैसेसब बह गए। घरों में चूल्हा जलना बंद हो गया। बिना पुस्तक कॉपियों के बच्चों का स्कूल जाना मुहाल हो गया था। बच्चों की पढ़ाई छूट गई। ऎसी विषम परिस्थियों के बीच

बाढ़ पीड़ित बच्चों के साथ खड़े हुए अलनार स्वामी आत्मानंद विद्यालय अलनार के संविदा शिक्षक खड़े हो गए। जिन संविदा शिक्षकों की नौकरी भी पक्की नहीं है, उन गरुजनों ने पक्की गुरुता और दृढ़ कर्तव्यपरायणता का पक्का सबूत पेश किया है। बाढ़ की विभीषिका ने मांदर गांव के कई बच्चों से उनकी किताबें, कॉपियां और बैग तक छीन लिए। परंतु शिक्षा की लौ बुझने न पाए, इसी संकल्प के साथ स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय अलनार के संविदा शिक्षकों ने एक बड़ी मिसाल पेश की है। विद्यालय के प्राचार्य अजय कोर्राम के नेतृत्व में शिक्षकों ने बाढ़ प्रभावित बच्चों को कॉपियां, किताबें और स्कूल बैग उपलब्ध कराए। इतना ही नहीं, उन्होंने बच्चों का हौसला बढ़ाते हुए कहा–

“पढ़ाई की राह कभी किसी आपदा से रुकती नहीं, तुम फिर से कक्षा में लौटोगे और आगे बढ़ोगे। हम तुम्हें पढ़ाने में कोई कसर बाकी नहीं रखेंगे।” शिक्षकों का यह कदम केवल शिक्षण सामग्री देने भर का नहीं था, बल्कि बच्चों के टूटे मनोबल को संभालने का बड़ा प्रयास भी है। शिक्षकों ने अपने छोटे-छोटे प्रयासों से यह संदेश दिया है कि शिक्षा की शक्ति किसी भी कठिनाई से बड़ी होती है। इस पुनीत कार्य में विद्यालय परिवार के सभी शिक्षकों और कर्मचारियों ने भी सहयोग देकर यह साबित किया है कि जब समाज का हर वर्ग मदद के लिए आगे बढ़ रहा है, तो संविदा शिक्षक भी अछूते नहीं रहे। आज अलनार के संविदा शिक्षकों ने यह दिखा दिया कि गुरु सिर्फ ज्ञान नहीं बांटते, बल्कि संकट की घड़ी में अपने शिष्यों के लिए ढाल भी बन जाते हैं।

पढ़ने की ललक को छीन लिया इंद्रावती नदी ने, नदी में 6 दिन बाद मिले छात्राओं के शव‌‌

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  •  नाव पलटने से नदी में बह गई थीं दोनों छात्राएं
  • चिंगेर गांव में पसरा मातम, सदमे में परिजन

जगदलपुर बस्तर संभाग में अतिवृष्टि और भीषण बाढ़ ने बड़ी तबाही मचाई है। जन धन का भारी नुकसान हुआ है। दो मासूम छात्राओं की पढ़ने की ललक इंद्रावती नदी की भेंट चढ़ गई, नदी में बह गई दोनों छात्राओं के शव छह दिन बाद बरामद हुए।

जमकर कहर बरपा कर थमी बारिश अपने पीछे बर्बादी की ऎसी निशानियां और जख्म छोड़ गई है, जिसकी भरपाई शायद ही हो पाए। इस प्राकृतिक आपदा ने दो मासूम जिंदगियों को भी लील लिया। बीजापुर जिले के भैरमगढ़ ब्लॉक अंतर्गत चिंगेर गांव की दो छात्राओं के शव शनिवार को इंद्रावती नदी से बरामद हुए। बीते सोमवार को पांचवी कक्षा में पढ़ने वाली चिंगेर गांव की दो छात्राएं नेलागोंडा घाट को नाव से पार कर रही थीं। अचानक नाव पलटने से दोनों बच्चियां तेज बहाव में बह गईं। घटना की जानकारी मिलने पर नगर सेना की टीम ने तत्काल रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया था। लेकिन पांच दिनों तक कोई सुराग नहीं मिला। छठवें दिन शनिवार को ग्रामीणों ने नदी के अलग-अलग घाटों पर झाड़ियों में फंसे दोनों बच्चों के शवों को देखा और सूचना नगर सेना को दी। मौके पर पहुंची टीम ने दोनों शवों को रेस्क्यू कर बाहर निकाला। दोनों छात्राओं के शव देख परिजन में रोने बिलखने लगे। चिंगेर गांव में मातम पसर गया। पोस्टमार्टम बाद परिजनों को सौंप कर अंतिम संस्कार ग्रामीणों ने गांव में किया। भैरमगढ़ के तहसीलदार सूर्यकांत घरत ने बताया कि पिछले पांच दिनों से लगातार रेस्क्यू अभियान चल रहा था। नदी का बहाव कम होने के बाद दोनों बच्चियों के शव लगभग दो किलोमीटर दूर झाड़ियों में फंसे मिले। डॉक्टरों की टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच की। जिसके बाद पोस्टमार्टम करा कर शव परिजनों को सौंप दिए गए।

फरार डिप्टी कलेक्टर पर शारीरिक शोषण केश जमानत याचिका खारिज

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बालोद। छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में एक डिप्टी कलेक्टर के डौंडी थाने में दर्ज रेप और आर्थिक शोषण के गंभीर मामले में आरोपी बीजापुर के डिप्टी कलेक्टर दिलीप उइके को जिला न्यायालय से बड़ा झटका लगा है। डिप्टी कलेक्टर के खिलाफ शिकायत दर्ज होने के बाद माना जा रहा है कि कभी भी गिरफ्तारी हो सकती है। महिला आरक्षक की शिकायत के बाद डौंडी पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

अदालत ने उनकी जमानत याचिका को सख्ती से खारिज कर दिया।

पीड़िता, जो सीएएफ की महिला आरक्षक है, ने अदालत के सामने खड़े होकर अपना दर्द बयान किया और बैंक स्टेटमेंट सहित ठोस सबूत भी पेश किए। उसने आरोप लगाया कि आरोपी ने शादी का झांसा देकर शारीरिक शोषण किया, तीन बार जबरन गर्भपात कराया और आर्थिक रूप से भी शोषण किया।

वकील ने यह दलील दी कि पीड़िता ब्लैकमेल कर रही है और झूठा आरोप लगाया गया है। लेकिन महिला आरक्षक ने कहा कि डिप्टी कलेक्टर ने शादी करने का वादा किया और एक साल तक उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। उसके बाद जब महिला आरक्षक ने शादी के लिए कहा तो वह अपने वादे से मुकर गया पीड़िता ने अदालत के सामने स्पष्ट और विस्तृत रूप से अपनी पीड़ा बताई। न्यायाधीश ताजुद्दीन आसिफ ने पीड़िता की दलीलों और पेश किए गए सबूतों को पर्याप्त मानते हुए जमानत याचिका को खारिज कर दिया।

अब भी फरार डिप्टी कलेक्टर डौंडी थाने में आरोपी के खिलाफ

बीएनएस की धारा 69 के तहत मामला दर्ज है। टीआई उमा ठाकुर के अनुसार, आरोपी की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की कई टीमें लगाई गई हैं। विभिन्न स्थानों पर दबिश दी जा रही है, लेकिन डिप्टी कलेक्टर अब तक फरार है। पुलिस का दावा है कि उसे जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा। पीडिता की शिकायत पर पूरा मामले की जांच की जा रही है।

 

छत्तीसगढ़ प्रदेश शासकीय शिक्षक फेडरेशन ने स्वर्गीय  अनिल यादव जी को पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धासुमन अर्पित किया व उनके कार्यों को याद किया

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  • स्व. यादव जी के धर्मपत्नी, बच्चों व परिजनों से भेंटकर यथासंभव मदद का दिलाया विश्वास।

मोहला छत्तीसगढ़ प्रदेश शासकीय शिक्षक फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष- शंकर साहू के साथ संगठन के साथियों ने स्वर्गीय श्री अनिल कुमार यादव (प्रधान पाठक- शासकीय प्राथमिक शाला बोगाटोला, संकुल केंद्र- कुम्हली, विकासखंड- मोहला, जिला- मोहला मानपुर अंबागढ़ चौकी छ. ग. की आकस्मिक निधन होने पर आज उनके तीजनहावन व संपूर्ण कार्यक्रम में उनके गृह ग्राम- बटेरा, विकासखंड- डौंडीलोहारा में शामिल होकर उनके तैलचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धासुमन अर्पित किया व परिजनों से भेंटकर यथासंभव मदद का दिलाया विश्वास।

छत्तीसगढ़ प्रदेश शासकीय शिक्षक फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष- शंकर साहू, प्रदेश महासचिव- भूपेंद्र साहू, प्रदेश संगठन मंत्री-अश्वनी देशलहरे, जिला महामंत्री-लीलाधर कोलियारे ने कहा कि स्वर्गीय अनिल यादव जी के आकस्मिक निधन से हम सब ने शिक्षा जगत की एक बहुमूल्य हीरा को खो दिया है। वे चरित्रवान, गुणवान, कर्मयोगी, कर्तव्यनिष्ठ एवं समझदार शिक्षक थे। वे अपने शिक्षकीय व संगठन की काम को पूरी निष्ठा के साथ करते रहे, उनका विरासत आने वाले पीढ़ियों के शिक्षकों एवं छात्रों को प्रेरित करते रहेगी। उनके बताएं मार्गों पर चलना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

देवेंद्र कुमार हुपेंडी, उमेश कुमार राणा, सनित कुमार कोलामे व कमलेश रंगारी ने कहा कि स्वर्गीय श्री अनिल यादव जी हमारे जीवन को इस तरह प्रभावित किया है कि जिसे शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता। पूरा शिक्षक समाज उन्हें सदियों तक याद करेंगे।

हलधर साहू, विजय कुमार यामले, नारद सिंह नेताम, शिवप्रसाद कोरेटी ने कहा कि स्वर्गीय यादव जी अपने शिक्षकीय पेशे और अपने छात्रों के प्रति समर्पण वास्तव में उल्लेखनीय था। शिक्षण के प्रति उनका सराहनीय एवं संघर्षशील जुनून था। वे सादा जीवन उच्च विचार वाले व्यक्तित्व के धनी शिक्षक थे।

बाबूलाल गावड़े, शिवचरण गावड़े, ओमप्रकाश साहू व सुरेंद्र कुमार ने कहा कि स्वर्गीय यादव जी का व्यवहार बेहद सौम्य था, जिसके चलते उन्हें शिक्षकों के साथ-साथ अभिभावकों द्वारा भी बहुत सम्मान दिया जाता था उनके आकस्मिक निधन से पूरा शिक्षा जगत स्तब्ध है, उनकी कमी कभी पूरी नहीं हो सकती है, वे सदैव हम सबको याद आयेंगे।

स्वर्गीय  अनिल यादव जी को पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धासुमन अर्पित करने वालों में प्रमुख रूप से छत्तीसगढ़ प्रदेश शासकीय शिक्षक फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष- शंकर साहू, प्रदेश महासचिव- भूपेंद्र कुमार साहू, प्रदेश संगठन मंत्री- अश्वनी कुमार देशलहरे, जिला महामंत्री- लीलाधर कोलियारे, विजय कुमार यामले,देवेंद्र कुमार हुपेंडी, उमेश कुमार राणा, कन्हैया लाल पिस्दा, नारद सिंह नेताम, सनित कुमार कोलामे, कमलेश कुमार रंगारी, हलधर प्रसाद साहू, शिवप्रसाद कोरेटी, बाबूलाल गावडे, शिवचरण गावड़े, ओम प्रकाश साहू, सुरेंद्र कुमार आदि प्रमुख रूप से शामिल थे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात में ” गर्व से कहो, हम स्वदेशी है ” का नारा दिया

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  • भाजपा कार्यकर्ताओं ने बूथों में सामूहिक रूप से सुनी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मन की बात
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मन की बात कार्यक्रम का 125 वां संस्करण

जगदलपुर। बस्तर जिले के प्रत्येक बूथ में आज रविवार को भाजपा कार्यकर्ताओं ने सामूहिक रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मन की बात कार्यक्रम का 125 वां संस्करण सुना। भारतीय जनता पार्टी ने बकायदा मन की बात सुनने के लिये मुख्य अतिथि एवं प्रभारी भी बनाये थे।

जिले के ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर शहरी क्षेत्र तक भाजपा कार्यकर्ताओं ने बूथों में गणमान्य नागरिकों के साथ प्रधानमंत्री  मोदी की मन की बात कार्यक्रम का श्रवण किया। प्रधानमंत्री  मोदी ने मन की बात में वोकल फाॅर लोकल को बढ़ावा देने की बात कहते हुये “गर्व से कहो, हम स्वदेशी है” का नारा दिया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देशवासियों से स्वदेशी सामानों का अधिकाधिक उपयोग करने का आह्वान करते हुये कहा कि त्यौहारों में अपनों को स्वदेशी सामान उपहार में दें। आत्मनिर्भर भारत, विकसित भारत का स्वप्न मिलजुल कर एकजुटता से साकार करें। प्रधानमंत्री मोदी ने मन की बात में खेलो इंडिया वाटर स्पोर्ट्स का ज़िक्र किया एवं यूपीएससी परीक्षा की तैयारियों में जुटे परीक्षार्थियों के लिये प्रतिभा एप की भी जानकारी दी। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने गणेशोत्सव की शुभकामनायें देते हुये मन की बात में विभिन्न विषयों को देशवासियों से साझा किया।

भाजपा जिला अध्यक्ष वेदप्रकाश पाण्डेय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मन की बात कार्यक्रम के ज़रिये देशवासियों से मुख़ातिब होते हैं। भारत सशक्त हो, आत्मनिर्भर बनें, राष्ट्र के प्रति प्रत्येक देशवासी समर्पित भाव से कार्य करें, इसकी प्रेरणा प्रधानमंत्री  मोदी की मन की बात कार्यक्रम से मिलती है।

शहर के बलीराम कश्यप वार्ड में महापौर संजय पाण्डेय, शिवमंदिर वार्ड में निगम अध्यक्ष खेम सिंह देवांगन, भैरमदेव वार्ड में पश्चिमी नगर मण्डल अध्यक्ष प्रकाश झा, श्यामा प्रसाद मुखर्जी वार्ड में पूर्वी नगर मण्डल अध्यक्ष अविनाश श्रीवास्तव, मोतीलाल नेहरू वार्ड में सुधीर पाण्डेय, सुन्दर लाल शर्मा वार्ड में योगेन्द्र पाण्डेय, अब्दुल कलाम वार्ड में श्रीनिवास मिश्रा सहित भाजपा के सभी बडे़ नेता व पदाधिकारियों ने अलग अलग बूथों में सामूहिक रूप से मन की बात कार्यक्रम का श्रवण किया। जिसमें आनंद मोहन मिश्रा,रजनीश पाणिग्रही, नरसिंह राव, आर्येन्द्र आर्य, मनोहर तिवारी, आलोक अवस्थी, सुरेश गुप्ता, संजय चंद्राकर, अतुल सिम्हा, शशिनाथ पाठक, योगेश शुक्ला, सुधा मिश्रा,दशरथ गुप्ता,बृजेश सिंह भदौरिया, ब्रिजेश शर्मा, विक्रम सिंह यादव, रमन चौहान, विनय राजू, दिनेश पाणिग्रही, अविनाश सिंह, सूर्य भूषण सिंह आदि प्रमुख रूप से शामिल रहे।

फिर रोका ठेकेदारों का भुगतान; प्रतिष्ठा का प्रश्न बना लिया ईएनसी ने

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  •  नक्सल क्षेत्रों के विकास की राह में रोड़ा बने पीडब्ल्यूडी के ईएनसी 
  • बस्तर को फिर गर्त में ले जाने का काम कर रहे हैं इंजीनियर इन चीफ 

जगदलपुर केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना रूरल रोड प्रोजेक्ट-2 (आर आर पी-2) लोक निर्माण विभाग के इंजीनियर इन चीफ (ईएनसी)की हठधार्मिता की भेंट चढ़ गई है। इस प्रोजेक्ट को जमीन पर साकार करने वाले ठेकेदारों को परेशान करने और उन्हें आर्थिक तंगी में उलझाए रखने की जिद ईएनसी ने पाल रखी है। उन्होंने इसे अपनी निजी प्रतिष्ठा का प्रश्न बना लिया है। उनके इस हठ के चलते बस्तर जैसे नक्सल प्रभावित संभाग में प्रोजेक्ट के कार्य प्रभावित होने लगे हैं। बस्तर संभाग में प्रोजेक्ट को साकार करने में लगे ठेकेदारों को विशेष तौर पर निशाना बनाया जा रहा है। उनके इस कदम से विकास की ओर अग्रसर बस्तर फिर गर्त में जाता दिख रहा है।

 

पहले हम अपने पाठकों को आरआरपी-2 के बारे में बताते हैं। देश के गृहमंत्री अमित शाह ने 31 मार्च 2026 तक बस्तर को नक्सल मुक्त बनाने का संकल्प ले रखा है। इस संकल्प की पूर्ति के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, उप मुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री विजय शर्मा और बस्तर के आदिवासी पुत्र एवं वन मंत्री केदार कश्यप जी जान से जुटे हुए हैं। दरअसल विकास के जरिए नक्सलवाद के विनाश के ध्येय से केंद्र और राज्य की सरकारें काम कर रही हैं। आरआरपी-2 भी इसी ध्येय का एक बड़ा हिस्सा है। केंद्र सरकार की इस परियोजना के तहत नक्सल प्रभावित इलाकों के गांवों तक पक्की सड़कें और पुल पुलिया बनाने का प्रावधान है। सड़कों का जाल बिछने से जहां अति नक्सल प्रभावित क्षेत्रों तक सुरक्षा बलों की पहुंच बढ़ जाएगी, वही विकास और जन सुविधाओं का विस्तार भी सुगमता पूर्वक होगा। मगर लोक निर्माण विभाग के ईएनसी श्री भतपहरी को शायद नक्सल प्रभावित इलाकों का विकास नागवार गुजर रहा है। यही वजह है कि वे बार बार ठेकेदारों का भुगतान रोक कर बस्तर के विकास की राह में रोड़े अटकाते आ रहे हैं। बस्तर संभाग में कार्यरत ठेकेदारों को भुगतान देने में विभाग द्वारा वर्तमान में फिर आनाकानी की जा रही है। ठेकेदार को परेशान करने की योजना में शामिल ईएनसी श्री भतपहरी और उनके कांकेर ओर जगदलपुर के प्रभारी अधीक्षण यंत्री श्री सूर्यवंशी की भूमिका को अहम माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार बस्तर के अधिक्षण यंत्री श्री टेकाम को जानबूझ कर यहां से हटा दिया गया है ताकि सड़क निर्माण में अपना तन मन धन लगाने वाले ठेकेदारों को परेशान किया जा सके। केंद्र सरकार की आरआरपी-2 योजना की छत्तीसगढ़ में क्रियान्वयन एजेंसी लोक निर्माण विभाग है। इस प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य नक्सल प्रभावित इलाके को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना है, मगर इस कड़ी में ईएनसी श्री भतपहरी बड़ी गांठ साबित हो रहे हैं।

 

सुशासन को बदनाम करने की साजिश

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की सुशासन सरकार को ऐसे प्रशासनिक अधिकारी जानबूझ कर बदनाम करने में जुटे हुए हैं। भुगतान में विलंब से कार्य ठप पड़ जाते हैं, इससे केंद्र सरकार की नजरों में राज्य सरकार की साख गिर जाती है। सूत्र बताते हैं कि साय सरकार को बदनाम करने की नीयत से ईएनसी ने फिर ठेकेदारों के कई करोड़ का भुगतान अटका दिया है। भुगतान में विलंब के पीछे कभी सॉफ्टवेयर में दिक्कत तो कभी तकनीकी परेशानी बहाना बना कर दर्जनों ठेकेदारों को कई करोड़ रुपए के भुगतान से वंचित रखा जा रहा है। बताते हैं कि पूर्व में भी इसी प्रकार का रवैया ईएनसी श्री भतप्रहरी द्वारा अपनाया गया था। तब कुछ चुनिंदा ठेकेदारों को भुगतान किया गया था।

ईगो पाले बैठे हैं साहब

मीडिया में मामला उजागर होने के बाद ही चुनिंदा ठेकेदारों को भुगतान किया गया था। मीडिया के इसी दबाव को अब श्री भतपहरी ने अपनी प्रतिष्ठा से जोड़ लिया है। इसी कुंठा के चलते अब उन्होंने दूसरे ढंग से ठेकेदारों को परेशान करना शुरू किया है। ईएनसी के कुछ विश्वस्त अधिकारी ही आरआरपी-2 योजना योजना को लीड करते हैं। एसएनएस स्पर्श पोर्टल के माध्यम से भुगतान होता है। इस पोर्टल में कई माह से खराबी बताकर भुगतान लंबित रखा गया है। सूत्र तो यह भी दावा करते है कि ईएनसी भतप्रहरी द्वारा इस बार दावा किया गया है कि देखते हैं, बिना मेरी मर्जी के कैसे भुगतान होता है? यानि उन्होंने ईगो पाल लिया है। ठेकेदार भले चाहे आर्थिक तंगी से जूझते रहें, आरआरपी-2 प्रोजेक्ट का भले ही भट्ठा बैठ जाए, मगर साहब का ईगो हर्ट नहीं होना चाहिए।  भतपहरी द्वारा अपनाए जा रहे इस रवैये से सुशासन सरकार की छवि धूमिल हो रही है।

प्रमुख सचिव बनाम SEIAA चेयरमैन :साख बचाने सुप्रीम कोर्ट पहुँचे IAS कोठारी, पर्सनल कैपेसिटी में दाखिल की अर्जी , खनन माफिया कनेक्शन या अफसरशाही की नाकामी

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राजेश भाटिया

नई दिल्ली मध्यप्रदेश में पर्यावरण स्वीकृतियों का विवाद अब सुप्रीम कोर्ट की चौखट पर है। Writ Petition (Civil) No. 689/2025 के तहत दाखिल इस जनहित याचिका में आरोप है कि 237 पर्यावरणीय मंजूरियाँ गैरकानूनी तरीके से जारी की गईं। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान इस पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि “इतनी बड़ी संख्या में स्वीकृतियां यदि नियमों के विपरीत दी गई हैं तो यह गंभीर मामला है और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करनी होगी।”

क्या है मामला

 

यह याचिका वरिष्ठ पत्रकार विजय कुमार दास ने दाखिल की थी, जिसमें मांग की गई कि सभी 237 मंजूरियों को अवैध घोषित किया जाए और जिम्मेदार अधिकारियों पर सीबीआई जैसी स्वतंत्र एजेंसी से जांच करवाई जाए। आरोप यह भी है कि पर्यावरणीय मूल्यांकन प्रक्रिया को दरकिनार कर खनन माफिया और उद्योग समूहों को फायदा पहुँचाया गया। मामले में सुप्रीम कोर्ट पहले ही मध्यप्रदेश के मुख्य सचिव और केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय से जवाब मांग चुका है। याचिका में कहा गया कि SEIAA (State Environment Impact Assessment Authority) की बैठकें महीनों तक टाल दी गईं और तकनीकी मूल्यांकन रिपोर्ट्स दबा दी गईं।

टकराव की पृष्ठभूमि

सूत्रों के मुताबिक, यह विवाद मुख्य रूप से SEIAA चेयरमैन एस.एन.एस. चौहान और राज्य के पर्यावरण विभाग के शीर्ष अफसरों (प्रमुख सचिव और सदस्य सचिव) के बीच खिंचाव से पैदा हुआ। चेयरमैन चौहान का दावा है कि उन्होंने अवैध मंजूरियों का विरोध किया और 50 से ज्यादा बार सरकार व मुख्य सचिव को लिखित शिकायत भेजी, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। दूसरी ओर, अफसरों पर आरोप है कि उन्होंने जानबूझकर SEIAA को पंगु बना दिया और खनन माफिया को फायदा पहुँचाने के लिए फाइलें आगे बढ़ा दीं।

अपनी साख बचाने सुप्रीम कोर्ट पहुँचे पूर्व प्रमुख सचिव

मध्यप्रदेश के पूर्व प्रमुख सचिव (पर्यावरण) डॉ. नवीन कोठारी, आईएएस ने अपनी साख बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में Intervention Application दाखिल की है। डॉ. कोठारी ने कहा कि याचिका में उनके कार्यकाल पर लगे आरोप निराधार हैं। उनका कहना है कि उन्होंने हमेशा कानून और EIA Notification, 2006 के तहत ही काम किया और SEIAA की आंतरिक खींचतान के कारण स्वीकृतियों में गड़बड़ी हुई। उनकी ओर से सुप्रीम कोर्ट में यह अर्जी विष्णु शर्मा, एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड, सुप्रीम कोर्ट ने पेश की।

सुप्रीम कोर्ट की सख्ती

अदालत ने अब तक की सुनवाई में कहा है कि ” यदि इतने बड़े पैमाने पर स्वीकृतियां नियमों को दरकिनार कर दी गईं, तो यह सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही नहीं बल्कि संस्थागत विफलता है। जिम्मेदार अफसरों को व्यक्तिगत तौर पर जवाबदेह ठहराया जाएगा।”

यक्ष प्रश्न यह है कि क्या कोई प्रमुख सचिव नियमानुसार अनुमति दे सकता है ? और दे सकता है तो फिर सिया जैसी संस्था की प्रासंगिता क्या ?

EIA Notification 2006 (पर्यावरण प्रभाव आकलन अधिसूचना) और Environment Protection Act, 1986 स अधिसूचना के अनुसार – किसी भी नए प्रोजेक्ट, गतिविधि, विस्तार या आधुनिकीकरण को शुरू करने से पहले अनिवार्य रूप से पूर्व पर्यावरणीय अनुमति (Prior Environmental Clearance-EC) लेना आवश्यक है। यह अनुमति या तो केंद्र सरकार (Category A प्रोजेक्ट्स के लिए) या SEIAA (State Environment Impact Assessment Authority) ( Category B प्रोजेक्ट्स के लिए) द्वारा दी जाती है।

प्रमुख सचिव (Principal Secretary) या कोई अन्य अधिकारी व्यक्तिगत रूप से अपने स्तर पर इस अनुमति को न तो प्रदान कर सकते हैं और न ही इसे दरकिनार कर सकते हैं।

प्रक्रिया स्पष्ट है: Screening → Scoping → Public Consultation → Appraisal → Clearance. यदि इसे तोड़ा जाए तो यह EIA Notification 2006 और Environment Protection Act 1986 का सीधा उल्लंघन होगा। इसीलिए प्रमुख सचिव द्वारा स्वयं अनुमति देना कानून के दायरे में संभव नहीं है।

यह केवल नियामक प्राधिकरण (MoEFCC / SEIAA) ही कर सकते हैं।

सुप्रीम कोर्ट में आगे क्या?

मामला अब सोमवार को दोबारा सूचीबद्ध है। सबकी निगाहें इस बात पर हैं कि सुप्रीम कोर्ट अगला कदम क्या उठाएगा। क्या कोर्ट सीधे जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई का आदेश देगा ? या फिर यह मामला स्वतंत्र एजेंसी को जांच के लिए सौंपा जाएगा? यह सुनवाई सिर्फ मध्यप्रदेश तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पूरे देश में पर्यावरणीय मंजूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर मिसाल कायम कर सकती है। *देखना दिलचस्प होगा अनुमतियों को वैध माना जाता है या उल्लंघन ?*

छत्तीसगढ़ रजत महोत्सव: बालोद जिले में विभिन्न गतिविधियों का हो रहा निरंतर आयोजन

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  • स्कूलों में खेल प्रतियोगिता में बड़ी संख्या में शामिल हुए विद्यार्थी

बालोद, 30 अगस्त 2025छत्तीसगढ़ रजत महोत्सव 2025 के अवसर पर जिला प्रशासन बालोद द्वारा विभिन्न गतिविधियों का निरंतर आयोजन किया जा रहा है। आज जिले के विभिन्न स्कूलों में खेल प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। डिप्टी कलेक्टर श्रीमी प्राची ठाकुर ने बताया कि फिट इंडिया मिशन के तहत आज स्वामी आत्मानंद विद्यालय झलमला में विभिन्न खेल प्रतियोगिता का आयोजन हुआ, जिसमें विद्यार्थियों ने उत्साह के साथ अपनी खेल प्रतिभा का प्रदर्शन किया। जिसमें खो-खो, शतरंज, रस्सी कुद, गोला फेंक, मार्शल आर्ट आदि शामिल है।

नगर पंचायत पलारी के मुख्य नगर पालिका अधिकारी गिरीश कुमार साहू ने बताया कि रजत महोत्सव अंतर्गत शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय पलारी में विभिन्न खेल कार्यक्रम सहित स्कूली छात्र छात्राओं द्वारा गतिविधियों का आयोजन किया गया। इसी प्रकार छत्तीसगढ़ शासन के रजत जयंती वर्ष के अवसर पर नगर पंचायत गुंडरदेही के सौजन्य से आत्मानंद स्कूल में आज छात्र छात्राओं द्वारा विभिन्न खेल गतिविधियों का आयोजन किया गया।”

 

नक्सलियों को पसंद नहीं है बस्तर के बच्चों का राष्ट्रप्रेम पढना लिखना

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  •  नक्सलियों का राष्ट्रविरोधी और शिक्षा विरोधी चेहरा हो गया है अब बेनकाब
  • सहन नहीं करते शिक्षा और तिरंगे का सम्मान

अर्जुन झा

जगदलपुर नक्सली जो कारगुजारियां दिखा रहे हैं, उससे साबित हो गया है कि वे आदिवासी हितैषी होने का सिर्फ ढोंग करते हैं। जल जंगल, जमीन और खनिज संपदा पर बस्तर के आदिवासियों के हक की दुहाई देने वाले नक्सली दरअसल नहीं चाहते कि बस्तर के बच्चे पढ़ लिखकर देश की सेवा में योगदान दें, देशभक्त बन जाएं। उन्हें तो राष्ट्र ध्वज तिरंगे से भी नफरत है। नक्सलियों की यही सोच बस्तर में नक्सलवाद के अंत का एक बड़ा कारण बन रही है।

बस्तर संभाग में एक के बाद एक कुल 9 शिक्षादूतों की हत्या और नक्सली स्मारक पर स्वतंत्रता दिवस के दौरान तिरंगा फहराने का शानदार साहस दिखाने वाले युवक की हत्या इन तथ्यों को पुख्ता करते हैं। नक्सली पहले शाला भवनों सरकारी बिल्डिंगों में आगजनी, सड़कों, पुल पुलियों को बम से उड़ाने का काम किया करते थे। यह घटनाएं उनकी शिक्षा और विकास विरोधी सोच को दर्शाती रही हैं। नक्सलगढ़ के गांवों में सुरक्षा बलों के कैंप स्थापित होने और फोर्स की पहुंच बढ़ जाने के बाद इस तरह की घटनाएं थम गईं हैं। मगर अब अपनी शिक्षा विरोधी सोच को आगे बढ़ाते हुए नक्सलियों ने अपना पैतरा बदल लिया है। अब वे बस्तर के बच्चों को सुपोषित बनाने, उनके बीच ज्ञान का उजियारा फैलाने वाले आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और शिक्षदूतों को खत्म कर बस्तर संभाग के बच्चों को कुपोषित और अशिक्षित बनाए रखने का अभियान चला रहे हैं। अपने इस मिशन के तहत नक्सली बस्तर संभाग में नौ शिक्षादूतों और दो आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को मौत के घाट उतार चुके हैं। सुकमा जिले में चार शिक्षादूतों और बीजापुर

जिलों में पांच शिक्षादूतों के साथ ही दो आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की हत्या नक्सली कर चुके हैं। नक्सलियों का राष्ट्र विरोधी चेहरा तब सामने आया, जब उन्होंने सुकमा जिले के सिलगेर में नक्सली स्मारक पर 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस की खुशी में तिरंगा फहराने वाले एक आदिवासी युवक की जान नक्सलियों ने ले ली थी। ये घटनाएं नक्सलियों के चाल, चरित्र और चेहरे को उजागर करती हैं। बता दें कि शिक्षादूत की भूमिका वे युवक निभाते हैं, जो पढ़े लिखे होते हैं और गांवों के बच्चों को शिक्षित बनाने का जिनमें जुनून होता है। उन्हें एवज में महज दस हजार रुपए का मानदेय मिलता है। ये युवा उन स्कूलों को पुनः खोलकर शिक्षा की रौशनी बिखेरते हैं, जिन्हें नक्सलियों ने ही बंद करा दिया था।

फिर एक शिक्षा दूत की हत्या

नक्सलियों बस्तर संभाग के बीजापुर जिले में फिर एक शिक्षा दूत की हत्या कर दी है। जिले के गंगालूर थाना क्षेत्र के तोड़का गांव में नक्सलियों ने 25 वर्षीय शिक्षादूत कल्लू ताती पिता मंगल ताती निवासी तोड़का की बेरहमी से हत्या कर दी। कल्लू ताती गंगालूर क्षेत्र के नेंड्रा स्कूल में बच्चों को पढ़ाता था। जानकारी के मुताबिक सोमवार शाम स्कूल से लौटते समय नक्सलियों ने कल्लू ताती का अपहरण कर लिया था और देर रात उन्हें मौत के घाट उतार दिया। घटना से पूरे इलाके में दहशत का माहौल है। पुलिस घटना की जांच में जुट गई है। बस्तर संभाग के दुर्गम और नक्सल प्रभावित इलाकों में लंबे समय तक स्कूल बंद रहे हैं। ऐसे में शासन ने स्थानीय युवाओं को शिक्षादूत के रूप में नियुक्त कर स्कूलों को पुनः संचालित करने का प्रयास किया है। उनकी वजह से कई गांवों में शिक्षा की लौ फिर से जल उठी है और बच्चे स्कूल लौटने लगे हैं। बंद पड़े स्कूलों के पुनः संचालन के बाद से अब तक नक्सली बीजापुर जिले में कुल शिक्षादूतों की हत्या कर चुके हैं।

बड़े घर परिवार में बड़ी धूमधाम से मनाया गया प्रमुख पारंपरिक लोक त्योहार नवा खानी

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बस्तर बस्तर जिले के मधोता खैरगुड़ा के बड़े घर परिवार में नवा खानी पर्व बड़े धूमधाम से मनाया गया। यह पर्व बस्तर वासियों का प्रमुख पारंपरिक लोक त्योहार है, जो नए धान की फसल के आगमन की खुशी में मनाया जाता है।

इस पर्व के दौरान, धाकड़ समुदाय के लोग अपने खेतों में नए धान की बालियों को तोड़ते हैं और फिर पूजा अर्चना कर उन्हें अपने इष्ट देवताओं को अर्पित करते हैं। इसके बाद, वे नए धान को कुटकर मिश्रण तैयार कर पूरे परिवार के सदस्यों को टीका लगा कर नवा खानी पर्व मनाते हैं चावल से बने खीर पुड़ी दाल बड़ा और अन्य पारंपरिक व्यंजनों का भोग देवताओं को लगाते हैं और फिर परिवार के साथ मिलकर प्रसाद के रूप में भोजन करते हैं। परिवार के सदस्य एक दूसरे को प्रणाम (जुहार भेंट) कर आशीर्वाद लेते हैं।

नवाखाई पर्व का महत्व बस्तर वासियों के लिए बहुत अधिक है, क्योंकि यह उनके इष्ट देवी देवताओं को सम्मानित करने और नए अनाज की फसल का जश्न मनाने का अवसर है। यह पर्व धाकड़ समुदाय की संस्कृति, परंपरा और इष्ट देवी देवताओं के प्रति श्रद्धा का प्रतीक है।

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