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द कश्मीर फाईल्स फिल्म को टैक्स फ्री करने भाजपा सदस्यों ने की मांग

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रायपुर,16 मार्च । विधानसभा में आज भाजपा सदस्यों ने द कश्मीर फाईल्स फिल्म को छत्तीसगढ़ में भी टैक्स फ्री करने की मांग की।

शून्यकाल में आज नेताप्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने द कश्मीर फाईल्स फिल्म का जिक्र करते हुए कहा कि देश के कई राज्यों में इस फिल्म को टैक्स फ्री कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि इस फिल्म को छत्तीसगढ़ की जनता भी देख सके इसके लिए राज्य सरकार को भी टैक्स में छूट देना चाहिए।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस पर नेताप्रतिपक्ष से कहा कि हम टैक्स में छूट देने के लिए तैयार है और हम सभी एक साथ फिल्म को देखने भी जाएंगे लेकिन उससे उन्हें भारत सरकार से आग्रह करना चाहिए कि पूरे देश में छूट प्रदान करें ताकि पूरे देश की जनता इस फिल्म को देख सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि चूंकि जीएसटी लागू है, टैक्स फ्री में आधा पैसा राज्य का और आधा भारत सरकार का होता है इसलिए पहले भारत सरकार को पूरे देश में इस फिल्म पर टैक्स में छूट देना चाहिए।

बस्तर स्टेडियम एवं खेल मैदान संचालन व संवर्धन समिति की हुई बैठक, स्टेडियम परिसर में नहीं संचालित की जाएंगी गैर खेल गतिविधियां

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उचित देखरेख के लिए किया गया छः उप समितियों का गठन

जगदलपुर , 16 मार्च 2022/कलेक्टर एवं बस्तर स्टेडियम समिति के अध्यक्ष रजत बंसल की अध्यक्षता में आज बस्तर स्टेडियम एवं खेल मैदान संचालन और संवर्धन समिति की बैठक इंदिरा प्रियदर्शिनी स्टेडियम में आयोजित की गई। बैठक में स्टेडियम समिति के सलाहकार सदस्य पद्मश्री धर्मपाल सैनी, महापौर सफीरा साहू एवं नगर निगम की सभापति श्रीमती कविता साहू सहित अपर कलेक्टर अरविंद एक्का, नगर निगम आयुक्त प्रेम पटेल, जगदलपुर एसडीएम एवं स्टेडियम समिति के पदेन सचिव दिनेश नाग, खेल एवं युवा कल्याण विभाग के सहायक संचालक राजेन्द्र डेकाटें सहित संबंधित विभागों के अधिकारी, विभिन्न खेल संघों के पदाधिकारी एवं खिलाड़ी उपस्थित थे।

इस दौरान सभी खेल परिसरों के उचित रखरखाव पर जोर देते हुए इसके लिए आवश्यक शुल्क के निर्धारण पर सहमति व्यक्त की गई। इसके साथ ही खेल परिसरों में किसी भी प्रकार के गैर खेल गतिविधियों के संचालन नहीं करने का निर्णय लिया गया। खेल मैदानों के बेहतर रखरखाव के लिए इस समिति के अधीन उप समितियों के गठन का निर्णय भी लिया गया। इनमें हाता ग्राउण्ड उप समिति, बैडमिंटन हाॅल उपसमिति, सिटी ग्राउण्ड उप समिति, हैण्डबाल ग्राउण्ड उप समिति, टेनिस हाॅल उप समति, बाॅस्केटबाल ग्राउण्ड उप समिति का गठन किया जाएगा।

कलेक्टर ने कहा कि यहां विश्वस्तरीय खेल सुविधाएं स्थापित की जा रही हैं, ताकि अंचल के प्रतिभावान खिलाड़ियों को अवसर प्राप्त हो सके। उन्होंने इन अधोसंरचनाओं के निर्माण को निर्धारित समय सीमा मंे पूरा करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने सभी पदाधिकारियों से भी पूरी निष्ठा के साथ परिणाममूलक कार्य करने की अपील की।

महापौर सफीरा साहू ने बस्तर अंचल में तेजी से खेल सुविधाओं के विकास पर प्रसन्नता जताते हुए कहा कि शीघ्र ही खेल प्रेमियों को इंदिरा प्रियदर्शिनी स्टेडियम के रुप में एक विश्वस्तरीय खेल सुविधाओं से युक्त परिसर की सौगात मिलेगी। उन्होंने कहा कि इस परिसर के रखरखाव की जिम्मेदारी सभी की है।

कचरा मुक्त शहर बनाने की ली गई शपथ

इस अवसर पर उपस्थित खिलाड़ियों और खेल पदाधिकारियों व बस्तर स्टेडियम एवं खेल मैदान संचालन व संवर्धन समिति के सदस्यों को नगर निगम आयुक्त प्रेम पटेल ने जगदलपुर शहर को कचरामुक्त शहर बनाने की शपथ दिलाई।

करोड़ों की शासकीय जमीन को कोडिय़ों के दाम पर बेचे जाने का मुद्दा सदन में गूंजा

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भाजपा सदस्यों ने इस मुद्दे पर ध्यानाकर्षण सूचना देकर आसंदी से ग्राह्य करने की मांग की

रायपुर,16 मार्च । विधानसभा में आज करोड़ों कीमत की शासकीय जमीनों को कोडिय़ों के दाम बेचे जाने के मुद्दे पर भाजपा सदस्यों ने ध्यानाकर्षण सूचना दी। भाजपा सदस्यों ने आसंदी से ध्यानाकर्षण सूचना को ग्राह्य करने की मांग करते हुए आरोप लगाया कि भिलाई सहित पूरे प्रदेश में शासकीय जमीनों का बंदरबांट चल रहा है।

शून्यकाल में सबसे पहले नेताप्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने यह मामला उठाते हुए कहा कि सरकार को आखिर क्या हो गया है शासकीय जमीनों की बिक्री होते जा रही है। उन्होंने कहा कि भिलाई में 7-8 करोड़ की जमीन को हाउसिंग बोर्ड ने सिर्फ ढाई करोड़ में बेच दिया। इस मामले में उन्होंने आसंदी से मांग की इस पर ध्यानाकर्षण सूचना दी गई है जिसे ग्राह्य किया जाए।

भाजपा सदस्य बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि भिलाई में 15 करोड़ की जमीन को ढाई करोड़ में बचे दी गई। इसमें सिंगल ऑफर में जमीन अलॉट कर दिया गया। यह बहुत दुर्भाग्यजनक है। उन्होंने कहा कि भिलाई औद्योगिक नगर है। नियम प्रक्रिया में सिंगल ऑफर टेण्डर स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि इस पर ध्यानाकर्षण सूचना दी गई है जिसे स्वीकार कर चर्चा कराई जाए। भाजपा सदस्य नारायण चंदेल ने भी कहा कि पूरे प्रदेश में खेल मैदान, मुक्तिधाम आदि की भूमि नहीं है। सरकारी जमीनों पर कब्जा किया जा रहा है। कीमती जमीनों को कोडिय़ों के दाम बेचा गया। इस मुद्दे पर भाजपा सदस्य अजय चंद्राकर, शिवरतन शर्मा, सौरभ सिंह सहित अन्य सदस्यों ने भी ध्यानाकर्षण की सूचना देते हुए आसंदी से इसे ग्राह्य करने की मांग की।

मदनवाड़ा कांड की न्‍यायिक जांच रिपोर्ट विधानसभा में पेश, आईपीएस मुकेश गुप्ता की भूमिका पर उठाए सवाल

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कांग्रेस सरकार ने इस मामले की न्‍यायिक जांच कराने का लिया था फैसला

12 जुलाई 2009 की घटना, कई गवाहों के बयान के बाद खुलासा

रायपुर छत्तीसगढ़ के चर्चित मदनवाड़ा कांड में न्‍यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट सरकार ने बुधवार को विधानसभा में पेश की गई। मुख्‍यमंत्री भूपेश बघेल ने रिपोर्ट पर सरकार की तरफ से की गई कार्रवाई से सदन को अवगत कराया। आयोग की जांच रिपोर्ट में निलंबित आईपीएस मुकेश गुप्ता की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। आयोग रिपोर्ट के मुताबिक आईपीएस मुकेश गुप्ता ने घटना के दौरान अगर बुद्धिमता दिखाई होती तो शायद ही नतीजा कुछ और ही होता। इतना ही नहीं, आयोग ने जांच रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया है कि आईपीएस मुकेश गुप्ता ने नक्सलियों से मुकाबले के लिए एसपी विनोद चौबे को आगे भेज दिया और खुद अपनी बुलेटप्रूफ कार में बैठे रहे। जांच आयोग की रिपोर्ट में तत्कालीन आईजी मुकेश गुप्ता को दोषी ठहराया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि नक्सली हमले के दौरान तत्कालीन दुर्ग आईजी मुकेश गुप्ता की लापरवाही एवं असावधानी दिखती है।

उल्लेखनीय है कि कांग्रेस ने सत्ता में आने के बाद करीब दो वर्ष पहले इस मामले की न्‍यायिक जांच के आदेश दिए थे। जांच की जिम्‍मेदारी इलाहाबाद हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति शंभूनाथ श्रीवास्तव को सौंपी गई थी। राजनांदगांव जिले के मदनवाड़ा में यह घटना 12 जुलाई 2009 को हुई। तत्‍कालीन एसपी वीके चौबे सहित 29 जवान नक्‍सली मुठभेड़ में बलिदान हो गए थे। जांच आयोग ने पिछले महीने ही अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपी है। राजनांदगांव के नक्‍सल प्रभावित मदनवाड़ा स्थित पुलिस के कैंप के दो जवानों की नक्‍सलियों ने गोली मारकर हत्‍या कर दी थी। घटना के बाद तत्‍कालीन एसपी वीके चौबे फोर्स के साथ घटनास्‍थल के लिए रवाना हुए तो नक्‍सलियों ने घात लगाकर पूरी टीम पर हमला कर दिया। इस घटना को लेकर काफी विवाद हुआ। पुलिस के ही आला अफसरों पर आरोप लगे, लेकिन मामला शांत हो गया। 2018 में सत्ता में आने के बाद कांग्रेस ने इस मामले की न्‍यायिक जांच कराने का फैसला किया।

तत्कालीन आईजी को घटना के लिए ठहराया जिम्मेदार

मदनवाड़ा नक्सल मुठभेड़ पर विशेष जांच आयोग की रिपोर्ट में तत्कालीन आईजी मुकेश गुप्ता को घटना के लिए जिम्मेदार ठहराया है। यह माना गया कि गुप्ता ने लड़ाई के मैदान में अपनाई जाने वाली गाइडलाइन तथा नियमों के विरुद्ध काम किया। यही नहीं, शहीद एसपी वीके चौबे को बगैर किसी सुरक्षा कवच के उन्हें आगे बढ़ने का आदेश दिया। खुद एंटी लैंडमाइन व्हीकल में बंद रहे या अपनी खुद की कार में बैठे रहे।

सीआरपीएफ और एसटीएफ की लेनी चाहिए थी मदद

जांच रिपोर्ट में घटनास्थल पर मौजूद रहे पुलिसकर्मियों के बयानों का सूक्ष्मता से आकलन करते हुए उन्होंने पाया कि आईजी मुकेश गुप्ता को यह स्पष्ट रूप से पता था कि भारी संख्या में नक्सली अपनी पोजीशन ले चुके हैं। वे जंगल में छिपे हुए हैं। रोड के दोनों साइड से नक्सली फायर कर रहे हैं। ऐसी परिस्थितियों में फोर्स को पीछे से ताकत देने के बजाय उन्हें सीआरपीएफ और एसटीएफ की मदद लेनी चाहिए थी। ड्यूटी पर रहने वाले कमांडर तथा उच्चाधिकारी को यह सुनिश्चित करना आवश्यक होता है कि वे इस तरह की कार्रवाई न करें जो कि उनके मातहतों को खतरनाक परिस्थितियों में डाल दे।

बिना उचित प्रक्रिया के स्थापित किया गया था कैंप

रिपोर्ट में कहा गया है कि मदनवाड़ा में बिना उचित प्रक्रियाओं के, बगैर राज्य सरकार के अनुमोदन तथा एसआईबी की खुफिया रिपोर्टों के बावजूद पुलिस कैंप स्थापित किया गया। उस कैंप में कोई भी वॉच टावर नहीं था। वहां पर पुलिसवालों के रहने का प्रबंध और कोई व्यवस्था नहीं थी। सीएएफ कर्मचारियों के लिए कोई टॉयलेट भी नहीं था। गवाह के साक्ष्य में यह बात सामने आई कि इस कैंप का उद्घाटन भी बेतरतीब तरीके से आईजी जोन ने सिर्फ एक नारियल फोड़कर किया था।

घटनास्थल से दूर नाका बैरियर के पास मौजूद थे तत्कालीन आईजी

आयोग ने आईजी जोन मुकेश गुप्ता के घटनास्थल पर मौजूद रहने को संदेहास्पद माना। वहीं एसआई किरीतराम सिन्हा तथा एंटी लैंडमाइन व्हीकल के ड्राइवर केदारनाथ के हवाले से माना कि वे मुठभेड़ के दिन घटनास्थल से कुछ दूरी पर नाका बैरियर के पास मौजूद थे। अगर वे घटनास्थल पर आए भी होंगे तो काफी देर से आए होंगे, जब सीआरपीएफ वहां पहुंच चुकी थी। घटनास्थल पर बने रहने की कहानी तथा नक्सलियों पर फायरिंग करने की कहानी यह उन्होंने खुद के द्वारा रची। यहां यह भी नोट करना आवश्यक है कि पूरी कहानी बनाई गई थी। इसी कारण यह मामला कोर्ट में सभी को बरी करने के बाद खत्म हो गया था।

तत्कालीन एडीजी का जांच रिपोर्ट पर अहम बयान

जांच रिपोर्ट में तत्कालीन एडीजी नक्सल ऑपरेशन गिरधारी नायक के बयान का भी जिक्र है। इस बयान में गिरधारी नायक ने कहा है कि तत्कालीन आईजी मुकेश गुप्ता ने युद्ध क्षेत्र के नियमों का पालन नहीं किया। इसकी वजह से 25 पुलिसकर्मियों की घटनास्थल पर शहादत हो गई। श्री नायक ने अपने बयान में यह भी स्पष्ट किया है कि उन्होंने अपनी जांच रिपोर्ट में आईजी मुकेश गुप्ता को आउट ऑफ टर्न प्रमोशन की अनुशंसा नहीं की थी। जबकि उन्होंने सलाह दी थी कि जब एक भी नक्सली नहीं मारा गया, एक भी शस्त्र ढूंढा नहीं गया तो ऐसे में पुलिसकर्मियों को पुरस्कार नहीं दिया जाना चाहिए।

भानपुरी में कर्मचारियों द्वारा विधायक का जोरदार स्वागत किया गया

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भानपुरी। पुराना पेंशन ऐतिहासिक फैसला से खुश होकर कर्मचारियों ने रायपुर से नारायणपुर विधायक चंदन कश्यप के आगमन पर बाजे गाजे एवं पटाखा फोड़ कर मिठाई बांटकर जोशीला स्वागत किया।

पुरानी पेंशन ऐतिहासिक फैसला के बाद नारायणपुर विधायक चंदन कश्यप रायपुर से अपने निवास गृह ग्राम भानपुरी आने पर की सैकड़ों की तादात पर कर्मचारियों इकट्ठा होकर स्वागत की तैयारी में लगे रहे। हाल ही में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कर्मचारियों को होली का तोहफा देते हुए विधानसभा में पुरानी पेंशन योजना लागू करने की घोषणा की है जिससे खुश होकर कर्मचारियों ने ऐतिहासिक फैसला बताकर नारायणपुर विधायक हस्तशिल्प विकास बोर्ड के अध्यक्ष चंदन कश्यप का जोरदार स्वागत किया एवं कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल व नारायणपुर विधायक छ.ग. हस्तशिल्प विकास बोर्ड के अध्यक्ष चंदन कश्यप का आभार व्यक्त किया।

नारायणपुर के विधायक एवं हस्तशिल्प विकास बोर्ड के अध्यक्ष चंदन कश्यप ने कहा कि छत्तीसगढ़ में पीड़ित तकरीबन 3 लाख कर्मचारी एवं उनके परिवार का भविष्य सुरक्षित हुआ शासकीय सेवक एवं उनके परिवार के हित में छत्तीसगढ़ में पुरानी पेंशन योजना को लागू करने का निर्णय सराहनीय और स्वागतयोग्य है। भाजपा सरकार में वित्तीय अनुशासन की धज्जियां उड़ाकर बजट का आकार बढ़ता गया, पूर्ववर्ती सरकार का पूरा ध्यान इमारतें बनाने पर था अब जबसे कांग्रेस की नई सरकार आई है, तबसे दिशा बदली है।राज्य के संवेदनशील यशस्वी मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने वर्ष 2022-23 के लिए बजट पेश करते हुए एनपीएस के स्थान पर फिर से पुरानी पेंशन स्कीम बहाल करने की घोषणा की है. घोषणा से राज्य सरकार के कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नागरिक अभिनंदन की घोषणा की है ।

कश्यप ने कहा है कि कर्मचारियों की सबसे बड़ी व पुरानी मांग एनपीएस के स्थान पर पुरानी पेंशन योजना की बहाली करके भूपेश बघेल सरकार ने प्रमाणित किया है कि सरकारी योजना के क्रियान्वयन में अहम भूमिका निभाने वाले राज्य के कर्मचारियों के प्रति सरकार पूरी तरह संवेदनशील है।

जल जीवन मिशन के ठेकेदार 3 महीने से पेमेंट के लिए भटक रहे, तकनीकी गड़बड़ी बताकर करोड़ों का भुगतान रोका

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जगदलपुर । घर-घर शुद्ध पानी पहुंचाने की पीएचई विभाग की मुहिम जल जीवन मिशन से अधिकारी ही पलीता लगा रहे हैं।

ठेकेदारों पर दबाव बनाकर 6 महीने के भीतर काम पूरा करने को कहां जाता है जिसके चलते पेनाल्टी से बचने के लिए ठेकेदार समय पर काम पूरा कर रहे हैं। लेकिन पिछले 3 महीने से लगभग दर्जन भर ठेकेदार को पीएचई विभाग पेमेंट नहीं कर रहा है करोड़ों का बकाया होने से ठेकेदारों को काम पूरा करने में परेशानी हो रही है। अधिकारी सीधा सा जवाब देते हैं तकनीकी फाल्ट है इस संबंध में कुछ ठेकेदारों ने बताया कि मिशन हेड में राशि होने के बावजूद दिसंबर 2021 से जमा बिल का भुगतान आज तक नहीं किया गया है वैसे भी जनप्रतिनिधियों द्वारा कार्यों का भूमि पूजन में देरी हुई वही ठेकेदारों को 6 महीने में काम पूरा करने का अल्टीमेट दिया गया है। ऐसे में भुगतान नहीं होने से काम ठप पड़ा है जगदलपुर डिवीजन की सभी ब्लॉकों में यही हाल है ठेकेदारों पर समय सीमा में काम नहीं पूरा करने पर 5% पेनाल्टी लगाने का आदेश दिया जा रहा है यह कहा जा रहा है कि कलेक्टोरेट में होने वाली बैठकों में भी पीएचई के अधिकारियों द्वारा ठेकेदारों को सूचना नहीं दी जाती है। बैठक से गैर मौजूद रहने का आरोप लगाया जा रहा है। ठेकेदारों ने पेमेंट पूरा होने पर ही काम समय पर पूरा करने की बात कही है।

गौरतलब है कि गर्मी का सीजन शुरू हो चुका है और शहर से लेकर गांव गांव तक जल संकट गहराने लगा है ऐसे में जल जीवन मिशन का काम बंद होने से जल समस्या के घर आने की संभावना बढ़ गई है।

सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित ग्रामीण आर्थिक रूप से हो रहे कमजोर, वन विभाग का मामला

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वन विभाग के अधिकारी ठेकेदारों और नेताओं से सांठगांठ कर छीन रहे गरीबों का हक

बकावंड…। करपावंड रेंज बकावंड ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत लावागाव मोहलई में वन विभाग के द्वारा कैम्पा मद से तालाब खुदाई का कार्य कराया जा रहा है। जिसमें वन विभाग के अधिकारियों एवं इलाके के नेताओं के सांठगांठ से स्थानीय ग्रामीणों काम नहीं मिलने से रोजगार के लिए भटकते नजर आ रहे हैं। प्रदेश सरकार के द्वारा ग्रामीण अंचलों में विकास के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही है, इन योजनाओं के माध्यम से स्थानीय ग्रामीणों को रोजगार देकर उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत करना और कमाने के लिए अन्य प्रदेशों में पलायन को रोकना ही सरकार का मुख्य उद्देश्य है। लेकिन वन विभाग में ऐसे कई बार देखने को मिला है कि जिस काम को स्थानीय ग्रामीण मजदूरों के द्वारा कराया जाना होता है उसे नेताओ ठेकेदारों के माध्यम से ट्रैक्टर एवं जेसीबी के द्वारा कराया जा रहा है।

ऐसा ही एक तालाब निर्माण का कार्य वन विभाग करपावंड रेजर के द्वारा जेसीबी एवं ट्रैक्टर के माध्यम सेकराया जा रहा है। इस विषय को लेकर वन परिक्षेत्र अधिकारीश्री राम दत्त नागर से पुछे जाने पर उन्होंने बताया कि राजधानी रायपुर से टेंडर हो गया है, जिस तालाब की खुदाई जेडीबी के द्वारा कराई जानी है।

उक्त तालाब खुदाई से ग्रामीणों को मजदूरी के रूप में आर्थिक लाभ मिल सकता था, लेकिन विभाग के वन परीक्षेत्र अधिकारी राम दत्त नागर स्वयं के लाभ हेतु इलाके के नेताओं से सांठगांठ कर ग्रामीणों को उनके अधिकार से वंचित कर रहे है।

इस कार्य के संबंध में पूरी जानकारी मांगे जाने पर वन परीक्षेत्र अधिकारी साफ साफ कहते हुए नजर आते हैं कि यह कार्य कांग्रेसी नेताओ और ठेकेदारों द्वारा ही किया जाना निश्चित किया गया है। इससे साफ जाहिर होता हैं की गरीबों का हक छिनकर उनको सरकारी योजनाओं के मिलने वाले लाभ से वंचित किया जा रहा है।

उल्लेखनीय है कि वन परिक्षेत्र अधिकारी राम दत्त नागर के विभागीय कार्य शैली पर पहले भी कई सवाल उठ चुके हैं, उनके विभगीय कारनामों का खुलासा समाचार पत्रों के माध्यम से भी कई बार प्रकासित किया जा चुका है, लेकिन अब तक इस अधिकारी पर विभाग के उच्चाधिकारियों ने कोई कार्यवाही नहीं कि है। अब देखने वाली बात यह होगी की क्या इस बार भी समाचार प्रकाशित होने के बाद भी कोई कार्यवाही होती है या नहीं?

एसडीएम ने जाति प्रमाण पत्र को लेकर शिक्षा विभाग एवं राजस्व विभाग के लिए समीक्षा बैठक

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बस्तर ….जनपद कार्यालय बस्तर में बुधवार को एसडीएम ओमप्रकाश वर्मा के द्वारा बस्तर ब्लॉक में संचालित स्कूलों में छात्र-छात्राओं के जाति प्रमाण पत्र को लेकर शिक्षा विभाग व राजस्व विभाग के कर्मचारियों की बैठक लेकर समीक्षा की गई। बस्तर ब्लॉक के हाई स्कूल जिन्हें आईडी जारी किया गया है उन्हे शतप्रतिशत प्राप्त आवेदनों को अपलोड करने निर्देशित किया गया। उन्होंने समय सीमा में जाति प्रमाण पत्र सभी पात्र विद्यार्थियों का बनाना सुनिश्चित किया जाए इसको लेकर स्पष्ट दिशा निर्देश दिया गया। उक्त बैठक में तहसीलदार कमल किशोर साहू सहायक खंड शिक्षा अधिकारी सुशील तिवारी सहित राजस्व व शिक्षा विभाग के कर्मचारी मौजूद थे।

बस्तर सांसद दीपक बैज दिल्ली लोकसभा सत्र से वापसी के बाद विधानसभा सत्र के बीच की मुख्यमंत्री व मंत्रियों से मुलाकात…

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सांसद बैज ने विधानसभा सत्र के दरमियान मुख्यमंत्री से मुलाकात कर पुरानी पेंशन बहाली एवं होली के त्यौहार की दी शुभकामनाएं..

आज बस्तर सांसद दीपक बैज दिल्ली लोकसभा सत्र से होली की छुट्टियों में वापसी के तुरंत बाद विधानसभा सत्र के बीच में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जी से मुलाकात कर पुरानी पेंशन बहाली व होली के त्यौहार की शुभकामनाएं दी इस दरमियान सांसद बैज ने विधानसभा सत्र की कार्यवाही भी देखी।

टाडमेटला कांड़ और अग्निवेश पर हमले में कल्लूरी को जांच आयोग ने दी क्लीन चिट

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स्वामी अग्निवेश का विरोध करने कल्लूरी ने किसी को नहीं उकसाया – जांच आयोग

मुख्यमंत्री ने विधानसभा में पेश की रिपोर्ट

रायपुर। विधानसभा में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने दोरनापाल में स्वामी अग्निवेश के साथ घटित घटना की जांच रिपोर्ट भी पेश की गई। रिपोर्ट के मुताबिक ताड़मेटला में 160 घर जलाए गए थे। जांच रिपोर्ट न्यायमूर्ति टीपी शर्मा की अध्यक्षता में बनी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि आगज़नी के लिए किसी को भी जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। रिपोर्ट में तत्कालीन एसएसपी शिवराम प्रसाद कल्लुरी को क्लीन चिट दी गई है। जांच आयोग के मुताबिक स्वामी अग्निवेश के विरोध के लिए एसआरपी कल्लूरी ने किसी को नहीं उकसाया था।

दंतेवाड़ा के चिंतलनार क्षेत्र में 11 मार्च 2011 के दौरान पांच दिन के अंदर ग्राम मोरपल्ली में 31, और तिस्मापुर में 59 और टालमेटला में 160 मकानों को जलाए जाने की घटना कैसे हुई, यहां पर नक्सली मुठभेड़ की घटनाओं और ग्राम में मकानों में आग लगने के कारण क्या थे, इसके लिए कौन जिम्मेदार था। स्वामी अग्निवेश के साथ 26 मार्च 2011 को घटित घटना की जांच का जिम्मा विशेष जांच आयोग को सौंपा गया था। आयोग ने अपनी रिपोर्ट तैयार करने 277 साक्षियों का बयान 100 बिन्दुओं के प्रश्नावली के आधार पर लिया। बताया गया है कि दंतेवाड़ा क्षेत्र के कुछ ग्रामीणों के साथ ज्यादती को लेकर मानवाधिकार आयोग में 10 से अधिक शिकायतें की गई थी। शिकायतों की जांच के लिए गई पुलिस बल के साथ नक्सली मुठभेड़ के बाद इन ग्रामों में मकानों का आग लगाई गई।

पुलिस बल पर नक्सलियों का हमला

जांच आयोग को अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक डीएस मरावी ने अपने बयान में कहा कि मानवाधिकार आयोग में की गई 9 शिकायतों की जांच के लिए भारी दबाव था। पुलिस 11 मार्च 2011 को ग्राम मोरपल्ली में जांच करने जा रही थी तभी नक्सलियों से अटैक किया। पुलिस ने अपनी ओर से गोलीबारी और यूजीबीए ग्रनेड दागे गए। इससे 4-5 मकानों को क्षति पहुंची। लेकिन यहां पर 31 लोगों के घर जलाए गए। इसी तरह 13 और 14 मार्च को तिस्मापुरम ग्राम में मनवाधिकार आयोग की जांच करने पुलिस बल जा रहा था उन पर भी नक्सलियों ने हमला किया। हमले में 3 पुलिस जवान और 1 नक्सली मारा गया। 8 पुलिस जवा घायल हुए। इस गांव में घटना के बाद 59 मकानों आगजनी की घटना हुई। तालमेटला में 16 मार्च को 160 मकानों के जलाए जाने की घटना प्रकाश में आई। आग किसने लगाई इसके संबंध कोई जानकारी नहीं मिल पाई। साक्ष्य में कोई विशेष जानकारी सामने नहीं आई।

नक्सली समर्थक मानकर ग्रामीणों ने किया हमला

जांच आयोग ने कहा है कि पूरी घटना को देखा जाए तो स्वामी अग्निवेश के बस्तर दौरे के दौरान वे ग्रामीणों से मिलकर उनकी सहायता करना चाहते थे। ग्रामीण स्वामी अग्निवेश को नक्सलियों का समर्थक बताकर उनका विरोध कर रहे थे। 26 मार्च को पुलिस को सूचना दिए बगैर स्वामी अग्निवेश ताड़मेटला और दोरनापाल रवाना हुए। उनकी सुरक्षा तारकेश्वर पटेल के द्वारा की जा रही थी। वहां पर 1000 से ज्यादा ग्रामीण उनके विरोध के लिए एकत्रित हुए थे। भीड़ ने अचानक उन पर हमला कर दिया। भारी सुरक्षा के चलते उन्हें वहां से बचाकर सुकमा ले जाया गया। जांच में यह पाया गया कि घटना एसआरपी कल्लूरी व अन्य किसी के द्वारा प्रायोजित नहीं थी।

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