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छग शासकीय शिक्षक फेडरेशन ने सहायक शिक्षक, समग्र शिक्षक फेडरेशन की मांगों को बताया जायज

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17 जनवरी की हड़ताल को फेडरेशन का समर्थन: प्रदेश अध्यक्ष शंकर साहू

जगदलपुर छत्तीसगढ़ प्रदेश शासकीय शिक्षक फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष शंकर साहू, प्रदेश सचिव अशोक कुमार तेता, प्रदेश कोषाध्यक्ष तेजराम कामाड़िया, प्रदेश संयोजक महिला प्रकोष्ठ हीना कश्यप, कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष नरेंद्र लाल देवदास, संजय कुमार मेहर, दीपक प्रकाश, संरक्षक अनिल कुमार रामटेके, रेखराज साहू, प्रभारी महामंत्री संगठन जितेंद्र कुमार साहू, प्रदेश महासचिव रत्नाकर खूंटिया, भूपेंद्र कुमार साहू, प्रदेश महामंत्री मितेंद्र कुमार बघेल, रामाधार नायक ने सहायक शिक्षक समग्र शिक्षक फेडरेशन छग की मांगों को जायज बताते हुए 17 जनवरी के एक दिवसीय आंदोलन का समर्थन किया है। छत्तीसगढ़ शासकीय शिक्षक फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष शंकर साहू ने कहा कि माेदी जी की गारंटी एवं एलबी संवर्ग के शिक्षकों काे प्रथम नियुक्ति तिथि से सेवा की गणना करके समस्त लाभ देने की बात हम कर रहे हैं। शंकर साहू ने कहा कि फेडरेशन ने इन मांगों का समर्थन किया है- एलबी संवर्ग के शिक्षकों की प्रथम नियुक्ति तिथि से सेवा की गणना कर क्रमाेन्नत वेतनमान प्रदान करते हुए सरकार समस्त लाभ प्रदान किया जाए, वर्षाे से लंबित सहायक शिक्षकों की वेतन विसंगति दूर की जाए, प्रदेश में कार्यरत एलबी संवर्ग के शिक्षकों के उपस्थिति के लिए वीएसके एप की अनिवार्यता बंद की जाए, सरकार काे उपस्थिति लेनी है ताे बायाेमेट्रीक मशीन से उपस्थिति ले, टीईटी की अनिवार्यता समाप्त करके सरकार आवश्यक पहल निकाले। छत्तीसगढ़ प्रदेश शासकीय शिक्षक फेडरेशन के प्रदेश संरक्षक रेखराज साहू, अनिल कुमार रामटेके, कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष नरेंद्र लाल देवदास, संजय कुमार मेहर, दीपक प्रकाश, महिला प्रकोष्ठ प्रदेश संयोजक हीना कश्यप, प्रदेश प्रवक्ता हेमलता बढ़ाई, प्रदेश मीडिया प्रभारी रमेश कुमार साहू, प्रदेश उपाध्यक्ष प्रेमचंद सोनवानी, आनंद कुमार साहू, भुनेश्वरी सहारे, सूर्य लाल साहू, लीलाधर कोलियारे, प्रदेश महासचिव भूपेंद्र कुमार साहू, रत्नाकर खूंटिया, अनुपमा सोनी, प्रदेश संगठन मंत्री अश्वनी कुमार देशलहरे, कमलकांत नेताम, दुर्ग संभाग प्रभारी नरेंद्र कुमार साहू, सरगुजा संभाग प्रभारी व जशपुर जिला अध्यक्ष महेश कुमार यादव, मुंगेली जिला अध्यक्ष राजकुमार धृतलहरे, मोहला मानपुर अंबागढ़ चौकी जिला अध्यक्ष राजकुमार सरजारे, बस्तर जिला अध्यक्ष नीरज कुमार गौर, कोंडागांव जिला अध्यक्ष सुरेश कुमार बेर की टीम ने 4 सूत्रीय मांगों को पूरा कराने हेतु आंदोलन पर रहने हेतु अपनी सहमति दी है।

बिचौलियों पर प्रशासन का शिकंजा, तीन वाहनों से 228 कट्टा धान जप्त

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कोंटा में आधी रात को भी जारी रही कार्रवाई, पकड़े गए ट्रैक्टर और पिकअप

जगदलपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में संपूर्ण राज्य में समर्थन मूल्य में धान खरीदी की जा रही है। बस्तर संभाग के सुकमा जिले में धान के अवैध व्यापार और परिवहन को रोकने के लिए प्रशासन ने चौकसी बढ़ा दी है। कलेक्टर अमित कुमार के निर्देशन तथा मार्गदर्शन में कोंटा अनुभाग के अधिकारियों ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पिछले चार दिनों के भीतर अलग-अलग स्थानों से कुल 228 कट्टा अवैध धान और परिवहन में प्रयुक्त तीन वाहन जप्त किए हैं। प्रशासन की इस कार्रवाई से अवैध धान का परिवहन और भंडारण करने वाले लोगों में हड़कंप मचा हुआ है।

पहली कार्रवाई 11 जनवरी को पुसगुफा रोड पर की गई। यहां गोरखा गांव निवासी उइका भीमा को बिना नंबर प्लेट के ट्रैक्टर से 33 कट्टा मोटा धान परिवहन करते हुए पकड़ा गया। मंडी अधिनियम 1972 के प्रावधानों का उल्लंघन पाए जाने पर प्रशासन ने तत्काल धान और वाहन को कस्टडी में ले लिया। 11 जनवरी को ही प्रशासन की एक अन्य टीम ने एर्राबोर रास्ते पर घेराबंदी कर एर्राबोर निवासी सोयम संजू के पिकअप को रोका। बिना नंबर प्लेट वाले इस वाहन में 70 कट्टा धान लोड था, जिसके संबंध में वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए जाने पर जप्ती की कार्रवाई की गई। प्रशासन की सतर्कता 15 जनवरी की रात को भी जारी रही। यहां बंडा रोड पर चिंतूर निवासी मुचाकी गोपी द्वारा बिना नंबर प्लेट के ट्रैक्टर में ले जाया जा रहा 125 कट्टा धान पकड़ा गया। मंडी अधिनियम के तहत अवैध पाए जाने पर इस खेप को भी जप्त कर लिया गया

मौके पर डटे रहे अधिकारीअवैध परिवहन के खिलाफ इस पूरी मुहिम का नेतृत्व एसडीएम कोंटा सुभाष शुक्ला ने किया। कार्रवाई के दौरान तहसीलदार कोंटा गिरीश निंबालकर, टीआई सलीम खाखा, फूड इंस्पेक्टर और अन्य विभागीय कर्मचारी मौके पर तैनात रहे।अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि मंडी अधिनियम 1972 का उल्लंघन कर अवैध रूप से धान का परिवहन करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। जिले की सीमाओं और मुख्य मार्गों पर निगरानी बढ़ा दी गई है ताकि किसानों के हक पर डाका डालने वाले बिचौलियों पर लगाम लगाई जा सके। जिला प्रशासन के द्वारा आगे भी इस प्रकार की कार्रवाई लगातार की जाएगी।

बस्तर पंडुम में पहुंचे संतोष कुमार

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बकावंड स्थानीय हाई स्कूल मैदान पर बस्तर पंडूम कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में सरपंच संघ के सचिव संतोष कुमार कुमार, पाकलू कश्यप रुसब बघेल, रतन भारती विशेष रूप से शामिल हुए।ब्लॉक सरपंच संघ बकावंड के सचिव संतोष कुमार ने कहा कि आदिवासी बहुल बस्तर में जनजातीय संस्कृति को जीवित रखने के लिए उत्सव मनाया जाता है। यह भी एक उत्सव है जहां लोककला संस्कृति रीति रिवाज और पारंपरिक जीवन शैली देखने को मिली। आयोजन बड़ा ही हर्षोल्लास का वातावरण था। बस्तर की पारंपरिक वेशभूषा, प्राकृतिक उत्पादन एवं साग सब्जी देखने और खाने को मिली। संतोष कुमार ने अपने साथियों के साथ महिलाओं द्वारा लगाए गए स्टॉलों में जाकर बस्तरिहा व्यंजनों का स्वाद चखा। उन्होंने महिलाओं का उत्साहवर्धन करते हुए उन्हें बस्तर का गौरव बताया।

मेला-मंडाई के दिन से लापता युवक का शव तीन दिन बाद स्टॉप डैम में मिला

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बालोद छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में मेला-मंडाई के दिन से लापता युवक का शव करीब तीन दिन बाद गांव से लगभग तीन किलोमीटर दूर एक स्टॉप डैम में तैरता हुआ मिला। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और पंचनामा कार्रवाई के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।मामला दल्लीराजहरा थाना क्षेत्र के ग्राम कुसुमकसा का है। गुरुवार दोपहर ग्रामीणों ने स्टॉप डैम के पानी में एक शव तैरता देखा, जिसके बाद दल्लीराजहरा पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस ने शव को बाहर निकलवाया, जहां उसकी पहचान चिपरा निवासी 27 वर्षीय प्रेमचंद ठाकुर के रूप में हुई।परिजनों ने बताया कि प्रेमचंद सोमवार दोपहर करीब 3 बजे से लापता था।

परिजन और ग्रामीण उसकी लगातार तलाश कर रहे थे, लेकिन उसका कोई सुराग नहीं मिला था। तीन दिन बाद उसका शव स्टॉप डैम में मिलने से पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल है।दल्लीराजहरा थाना प्रभारी संतोष कुमार भुआर्य ने बताया कि प्रथम दृष्टया युवक की मौत डूबने से होना प्रतीत हो रही है। शव पर किसी भी प्रकार की बाहरी चोट के निशान नहीं मिले हैं। हालांकि शव तीन दिन पुराना होने के कारण मौत के सही कारणों का खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगा। डैम की सीढ़ी के पास एक शराब की बोतल भी मिली है, जिसकी जांच की जा रही है।ग्रामीण तामेश्वर सिन्हा ने बताया कि मृतक मूल रूप से डौंडी का रहने वाला था, लेकिन बचपन से ही चिपरा में अपने नाना-नानी के घर रह रहा था। वह बिजली पोल लगाने का काम करता था। उसके पिता स्वर्गीय नवल सिंह ठाकुर का पहले ही निधन हो चुका है। एक बहन की शादी हो चुकी है और प्रेमचंद अपनी मां और परिवार का इकलौता सहारा था।ग्रामीणों के अनुसार पिछले दो वर्षों से उसके विवाह के लिए रिश्ते तलाशे जा रहे थे। त्योहार के बीच हुई इस दुखद घटना से गांव में मातम पसरा हुआ है।

पंडुम” शब्द के प्रयोग पर आदिवासी समाज ने जताई आपत्ति

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यह आदिवासियों की आस्था से जुड़ा शब्द है यह: प्रकाश ठाकुर

जगदलपुर सर्व आदिवासी समाज ने अनुसूचित क्षेत्र बस्तर में प्रस्तावित एवं आयोजित कार्यक्रमों में “पंडूम” शब्द के प्रयोग पर आपत्ति दर्ज कराते हुए उक्त शब्द को तत्काल हटाने एवं आदिवासी धार्मिक परंपराओं की संवैधानिक रक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। सर्व आदिवासी समाज के बस्तर संभाग अध्यक्ष प्रकाश ठाकुर ने इस संबंध में राजयपाल, मुख्यमंत्री, आदिम जाति कल्याण मंत्री एवं शीर्ष अधिकारियों को पत्र प्रेषित किया है।

पत्र में प्रकाश ठाकुर ने कहा है कि वर्तमान में “बस्तर पंडूम” नाम से जिस प्रकार के शासकीय अर्ध-शासकीय अथवा सार्वजनिक आयोजन आयोजित किए जा रहे हैं, वह आदिवासी समाज की धार्मिक आस्था, परंपरा और जीवन-दर्शन के मूल स्वरूप के विपरीत हैं। “पंडूम” कोई उत्सव, प्रदर्शन, कार्यक्रम या प्रचारात्मक शब्द नहीं है। “पण्डुम आदिवासियों की पेन (देव) बुढ़ाल पेन, सजोर पेन, जिम्मेदारीन याया, डांड राव पेन, गांव गोसिन के सहयोगी पेन अर्थात देवों को गांव, परिवार के वडे, पुजारी, सिरहा, गायता के हाथों से सामुदायिक या पारिवारिक रूप से नए प्राकृतिक फल, फूल, अनाज, वनोपज की धार्मिक सेवा अर्जी पूजा पस्ट करने की विधिमय देव धामी तिहार को पंडुम कहते हैं। यह आदिवासी समाज की प्राचीन धार्मिक आस्था, सामूहिक चेतना, पारंपरिक अनुष्ठान और जीवन-प्रक्रिया से जुड़ा हुआ शब्द है। पंडूम के लिए परंपरागत रूप से निश्चित स्थान, समय, तिथि व दिन, मौसम, निर्धारित व्यक्ति (परंपरागत भूमिका-धारी), निर्धारित समुदाय, निर्धारित भाषा, निर्धारित सेवा-अर्जी अनुष्ठान का होना अनिवार्य है। ठाकुर ने कहा है कि इनके बिना किसी भी आयोजन को पंडूम कहना परंपरा का सीधा सीधा विकृतिकरण है एवं असंगत है। संविधान का अनुच्छेद 244 अनुसूचित क्षेत्रों में प्रशासन को आदिवासी परंपरा, रीति-रिवाज एवं संस्थाओं के संरक्षण के अनुरूप संचालित करने का दायित्व राज्य पर डालता है।पेसा अधिनियम, 1996 ग्राम सभा को परंपरागत प्रथाओं एवं सांस्कृतिक पहचान की रक्षा का सर्वोच्च अधिकार देता है। बिना ग्रामसभा की सहमति के किसी भी परंपरागत शब्द या प्रक्रिया का शासकीय उपयोग पेसा की भावना के विपरीत है।संविधान का अनुच्छेद 29 आदिवासी समाज को अपनी विशिष्ट भाषा और संस्कृति के संरक्षण का मौलिक अधिकार प्रदान करता है।संविधान का अनुच्छेद 13 किसी भी राज्य कार्रवाई को मौलिक अधिकारों के प्रतिकूल होने से रोकता है।इन प्रावधानों के आलोक में “पंडूम” शब्द का इस प्रकार उपयोग हमारी संधार्मिक आस्था विश्वास, संवैधानिक रूप से आपत्तिजनक है।

आदिवासी समाज की मांग

प्रकाश ठाकुर ने आदिवासी समाज की ओर से मांग की हैं कि “बस्तर पंडूम” अथवा किसी भी शासकीय सार्वजनिक आयोजन में ‘पंडूम’ शब्द का प्रयोग तत्काल रोका जाए, इस शब्द को सभी शासकीय दस्तावेजों, प्रचार सामग्री एवं आयोजनों से हमेशा के लिए हटाया जाए, भविष्य में किसी भी आदिवासी परंपरागत शब्द, प्रक्रिया के उपयोग से पूर्व ग्रामसभा एवं आदिवासी समुदाय के धार्मिक कार्य करने वाले व्यक्तियों की स्वीकृति अनिवार्य की जाए एवं अनुसूचित क्षेत्र में सांस्कृतिक आयोजनों हेतु पेसा के अनुरूप स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं।

सिंचाई, सड़क और सशक्त पंचायत से बदलेगी बस्तर की तस्वीर: मंत्री केदार कश्यप

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कश्यप ने बस्तर ब्लॉक को दी 3.46 करोड़ के विकास कार्यों की सौगात तुरपुरा जलाशय के जीर्णोद्धार से अंतिम छोर के खेतों तक पहुंचेगा पानी

जगदलपुर नारायणपुर विधानसभा क्षेत्र में विकास की अविरल धारा को निरंतर प्रवाहमान बनाए रखते हुए क्षेत्रीय विधायक और वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने गुरुवार को बस्तर विकासखंड के सघन भ्रमण के दौरान तुरपुरा और कोटगढ़ में आयोजित कार्यक्रमों में कुल 3 करोड़ 46 लाख 28 हजार रुपए के विकास कार्यों का भूमिपूजन और लोकार्पण किया। इन कार्यों का सीधा लाभ ग्रामीण जनता और किसानों को मिलेगा।

मंत्री केदार कश्यप का यह दौरा किसानों के लिए सिंचाई सुविधा के विस्तार पर फोकस रहा। वन मंत्री कश्यप ने जल संसाधन विभाग के अंतर्गत तुरपुरा जलाशय के व्यापक जीर्णोद्धार कार्य का भूमिपूजन किया। लगभग 2 करोड़ 95 लाख 28 हजार रुपये की लागत से होने वाले इस कार्य में जलाशय बांध के ऊपर गिट्टी कार्य, नवीन स्लूस, वेस्ट वियर कार्य और नहर लाइनिंग व स्ट्रक्चर निर्माण शामिल हैं। इस परियोजना के पूरा होने से क्षेत्र की सिंचाई क्षमता में वृद्धि होगी।

इसके अतिरिक्त ग्रामीण अधोसंरचना को मजबूत करने के लिए कोटगढ़ में 20 लाख रुपए की लागत से बनने वाले नवीन पंचायत भवन, मुंडागुड़ा में 5 लाख रुपए के रंगमंच निर्माण और केशरपाल में उसरीगुड़ा से नहरनी पहुंच मार्ग पर 5 लाख रुपये की लागत से बनने वाली पुलिया का भी भूमिपूजन किया गया। वन मंत्री केदार कश्यप ने क्षेत्र के भ्रमण के दौरान नए कार्यों की आधारशिला रखने के साथ ही ग्रामीणों के आवागमन को सुगम बनाने के लिए 21 लाख रुपये की लागत से निर्मित पक्की सड़कों का लोकार्पण भी किया। इसमें कुम्हली में मंगियापारा से मुख्यमार्ग तक, केशरपाल (सोरगांव) में हीरा घर से भागमन घर तक और सोलेमेटा में अक्षय घर से पंचू घर तक बनी तीन अलग-अलग सीसी सड़कें शामिल हैं, जिनमें से प्रत्येक की लागत 7 लाख रुपये है। इस प्रकार मंत्री ने कुल 3 करोड़ 25 लाख 28 हजार रुपए लागत के नए कार्यों का भूमिपूजन और 21 लाख रुपये के पूर्ण हो चुके कार्यों का लोकार्पण कर क्षेत्र के विकास के प्रति अपनी कटिबद्धता दोहराई। इस अवसर पर जनसभा को संबोधित करते हुए वन मंत्री श्री कश्यप ने क्षेत्र के सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर सार्थक प्रयास करने भरोसा दिलाया और इन योजनाओं के दूरगामी लाभों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार का लक्ष्य केवल आधारशिला रखना नहीं, बल्कि समय सीमा के भीतर गुणवत्तापूर्ण कार्य पूर्ण कर जनता को समर्पित करना है।

बस्तर की आत्मा है कृषि: कश्यप

जल संसाधन मंत्री केदार कश्यप ने क्षेत्र की सबसे बड़ी परियोजना 2.95 करोड़ रुपये की लागत वाले तुरपुरा जलाशय जीर्णोद्धार पर विस्तार से चर्चा करते हुए कहा बस्तर की आत्मा यहां की खेती-किसानी में बसती है। तुरपुरा जलाशय में नई स्लूस गेट, वेस्ट वियर और नहरों की लाइनिंग का कार्य केवल कंक्रिट का निर्माण नहीं है, बल्कि यह इस क्षेत्र के सैकड़ों किसानों के लिए जीवनदायिनी है। जब नहरें पक्की होंगी और अंतिम छोर के खेत तक भी पानी पहुंचेगा। इससे न केवल सिंचाई का रकबा बढ़ेगा, बल्कि किसान साल में एक से अधिक फसल लेने में सक्षम होंगे, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। वहीं कुम्हली, केशरपाल और सोलेमेटा में 21 लाख रुपये की लागत से बनी सीसी सड़कों के लोकार्पण पर उन्होंने कहा कि कुम्हली के मंगियापारा, सोलेमेटा के अक्षय घर और केशरपाल के अंदरूनी इलाकों तक पक्की सीसी सड़कें बनकर तैयार हैं। ये सड़कें न केवल आवागमन को आसान बनाएंगी, बल्कि मरीजों को अस्पताल पहुंचाने और बच्चों को स्कूल जाने में सहूलियत भी होगी। कोटगढ़ में 20 लाख रुपये की लागत से बनने वाले नवीन पंचायत भवन के भूमिपूजन के दौरान उन्होंने कहा कोटगढ़ में नवीन पंचायत भवन बनने से गांव के विकास की योजनाएं अब और बेहतर ढंग से बन सकेंगी। इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष वेदवती कश्यप, जनपद पंचायत अध्यक्ष संतोष बघेल, जिला पंचायत सदस्य निर्देश दीवान सहित अन्य जनप्रतिनिधि,अधिकारी, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।

तोमन साहू की एक और बड़ी जीत हाई कोर्ट ने खारिज की केस

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भारतीय रेड क्रॉस सोसाइटी छत्तीसगढ़ राज्य के चुनाव को रद्द करने की याचिका पर न्यायालय के निर्णय के बाद श्री तोमन साहू ने जताया आभार

बालोद भारतीय रेड क्रॉस सोसाइटी छत्तीसगढ़ राज्य के चुनाव को रद्द करने की याचिका पर छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के निर्णय के बाद तोमन साहू, उपाध्यक्ष जिला पंचायत बालोद और चेयरमेन भारतीय रेड क्रॉस सोसाइटी ने न्यायालय के प्रति आभार व्यक्त किया है। तोमन साहू के समर्थकों ने इस निर्णय पर खुशी जाहिर की है और कहा है कि यह न्याय की जीत है। उन्होंने कहा कि तोमन साहू ने हमेशा समाज के हित में काम किया है और इस निर्णय से उनकी प्रतिष्ठा और बढ़ी है।

तोमन साहू ने कहा कि वे न्यायालय के निर्णय का सम्मान करते हैं और आगे भी समाज के हित में काम करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि वे भारतीय रेड क्रॉस सोसाइटी के चेयर मैन के रूप में अपनी जिम्मेदारियों को पूरी तरह से निभाएंगे और समाज के लोगों के लिए काम करेंगे।इस अवसर पर तोमन साहू के समर्थकों ने उनके नेतृत्व में जश्न मनाया और उन्हें बधाई दी। उन्होंने कहा कि तोमन साहू का नेतृत्व समाज के लिए हमेशा फायदेमंद रहेगा और वे उनके साथ हमेशा खड़े रहेंगे।

नक्सल गढ़ में दिखने लगा मार्च का बासंती बयार

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अति नक्सल प्रभावित पिल्लूर में पहली दफे बनने जा रहा है स्कूल भवन

मार्च-2026 की शाह वाली डेड लाइन और साय के सुशासन का बड़ा असर

अर्जुन-

जगदलपुर बस्तर संभाग के अति नक्सल प्रभावित इलाकों में दो माह पहले ही बासंती बयार बहने लगी है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की 31 मार्च 2026 वाली डेड लाइन और साय के सुशासन का बड़ा असर नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में नजर आने लगा है। बस्तर के पूरी तरह नक्सल मुक्त होने के उत्साह वर्धक लक्षण दिखने लगे हैं। नक्सल आतंक के चलते बुझ चुका शिक्षा का दीपक अब फिर से प्रदीप्त हो उठा है, सड़कें बनने से विकास के रास्ते खुल गए हैं। सहमी सी रहने वाली इंद्रावती की लहरें फिर से हिलोरें मारने लगी हैं।

बस्तर संभाग का बीजापुर जिला दशकों से नक्सलवाद का दंश झेलते आया है। इस जिले के ज्यादातर अंदरूनी गांवों में नक्सलियों का कब्जा रहा है। नतीजतन इन गांवों में शुद्ध पेयजल, बिजली, सड़क, शिक्षा, चिकित्सा जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं पहुंच पा रही थीं। नक्सलियों ने अपने स्वार्थ के लिए ग्रामीणों को इन जरूरतों और बच्चों को शिक्षा से वंचित कर रखा था। देश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार आने, संकल्प शक्ति के धनी अमित शाह के केंद्रीय गृहमंत्री बनने और छत्तीसगढ़ में सुशासन वाली विष्णु देव साय सरकार बनने के बाद बस्तर की आबो हवा में भारी बदलाव आया है। हिंसक कारनामों से दहशत फैलाने नक्सली अब खुद दहशत में आ गए हैं। उच्च मनोबल के साथ सुरक्षा बलों और पुलिस के जवान तेजी से नक्सली गढ़ ढहाते जा रहे हैं। गांवों में सुरक्षा कैंपों की स्थापना के साथ ही सुविधाएं भी पहुंचने लगी हैं। बीजापुर जिले के भोपालपटनम क्षेत्र के अति नक्सल प्रभावित ग्राम पिल्लूर इसका एक बड़ा उदाहरण है, जहां दशकों बाद शिक्षा के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक पहल हुई है। यहां पहली बार स्थायी स्कूल भवन के निर्माण का रास्ता खुल गया है। पिल्लूर में स्कूल भवन हेतु भूमिपूजन कार्यक्रम आयोजित किया गया। भूमिपूजन जिला पंचायत उपाध्यक्ष पेरे पुलैया ने किया। अब तक ग्राम पिल्लूर में स्कूल का संचालन अस्थायी शेड में किया जा रहा था, जिससे विद्यार्थियों को पढ़ाई में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। नए स्कूल भवन के निर्माण से बच्चों को सुरक्षित और बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिलेगा।

नए युग की शुरुआत

गौरतलब है कि हाल ही में क्षेत्र में सुरक्षा कैंप खुलने के बाद विकास कार्यों को गति मिली है। इसी का परिणाम है कि अब शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधा गांव तक पहुंच रही है। भूमिपूजन के बाद गांव के लोगों में खुशी और उत्साह का माहौल देखा गया। ग्रामीणों ने इस पहल को क्षेत्र के लिए नए विकास युग की शुरुआत बताते हुए प्रशासन एवं जनप्रतिनिधियों के प्रति आभार व्यक्त किया है। लोगों को उम्मीद है कि आने वाले समय में शिक्षा, सड़क, स्वास्थ्य जैसी सुविधाओं का भी विस्तार होगा। पिल्लूर सरपंच कुम्मा समैया, टी. गोवर्धन राव, शिक्षक इंजीनियर एवं ग्रामीण मौजूद रहे।

जैतगिरी धान खरीदी केंद्र में किसानों से खुलेआम, ज्यादा धान कटौती का आरोप

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विरोध करने पर धान न तौलने की देते हैं धमकी

अर्जुन झा-

बकावंड बस्तर जिले केबकावंड विकासखंड की ग्राम पंचायत जैतगिरी स्थित धान खरीदी केंद्र में किसानों के साथ खुलेआम लूट की जा रही है। खरीदी केंद्र में पदस्थ मैनेजर सतीश कुमार पांडे पर किसानों से नियमों को ताक पर रखकर 41.220 ग्राम प्रति बोरी धान जबरन काटे जाने का गंभीर आरोप लगा है। यह कटौती न तो किसी शासकीय आदेश के अंतर्गत है और न ही इसका कोई वैधानिक आधार बताया जा रहा है, जिससे किसानों में भारी आक्रोश व्याप्त है। किसानों का कहना है कि पहले ही वे प्राकृतिक आपदाओं, बढ़ती लागत, खाद-बीज की महंगाई और मजदूरी संकट से जूझ रहे हैं, ऊपर से धान खरीदी केंद्र में इस तरह की अवैध कटौती उनके साथ आर्थिक शोषण और सीधी लूट के है।किसानों ने आरोप लगाया कि जब वे इस कटौती का विरोध करते हैं तो उन्हें धमकी दी जाती है कि धान नहीं तौलेंगे, वापस ले जाओ। जिससे मजबूर होकर किसान कटौती सहने को विवश हैं।

स्थानीय किसानों ने यह भी बताया कि यह गड़बड़ी कोई एक-दो दिन की नहीं, बल्कि लंबे समय से लगातार जारी है। हर बोरी में 41.220 ग्राम धान की कटौती करने से सैकड़ों क्विंटल धान का अवैध फायदा उठाया जा रहा है, जिसकी सीधी मार गरीब और छोटे किसानों पर पड़ रही है। किसानों का सवाल है कि यह कटा हुआ धान आखिर जा कहां रहा है और किसके संरक्षण में यह लूट चल रही है?ग्रामीणों और किसान संगठनों ने इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है तथा दोषी मैनेजर सतीश कुमार पांडे पर तत्काल निलंबन एवं कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है। साथ ही किसानों से अब तक की गई अवैध कटौती की पूरी भरपाई किए जाने की भी मांग उठ रही है।किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही इस मामले में प्रशासन द्वारा सख्त कदम नहीं उठाया गया, तो वे मजबूर होकर ब्लॉक एवं जिला स्तर पर उग्र आंदोलन करेंगे, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। यह मामला न सिर्फ किसानों के हक का है, बल्कि सरकार की धान खरीदी व्यवस्था की पारदर्शिता पर भी बड़ा सवाल खड़ा करता है।

जगदलपुर के लामनी एवियरी में आए नए मेहमान

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ब्लू गोल्ड मकाऊ और अफ्रीकन ग्रे पैरेट के आने से गुलजार हुआ बर्ड पार्क

जगदलपुर शहर के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल लामनी बर्ड पार्क में बुधवार का दिन प्रकृति प्रेमियों और पर्यटकों के लिए बेहद खास रहा। पार्क के प्राकृतिक सौंदर्य और जैव विविधता में चार चांद लगाने के लिए नए मेहमानों के रूप में विदेशी पक्षियों का आगमन हुआ है। बुधवार को एवियरी में बेहद आकर्षक ब्लू एंड गोल्ड मकाऊ और अफ्रीकन ग्रे पैरेट लाए गए। ये पक्षी पार्क में आकर्षण का केंद्र बने गए हैं। इन नए मेहमानों के आने से पार्क का पक्षी संग्रह अब और भी समृद्ध हो गया है। इस दौरान प्रकृति प्रेमियों, पर्यटकों सहित नागरिकों ने इन नए मेहमानों का उत्साह के साथ स्वागत किया।

लामनी बर्ड पार्क में पहुंचे इन नए मेहमानों में ब्लू एंड गोल्ड मकाऊ जिसे आरा अराराौना भी कहा जाता है, मूल रूप से मध्य और दक्षिण अमेरिका के जंगलों और सवाना का निवासी है। अपनी बुद्धिमत्ता और चटख रंगों के लिए मशहूर इस तोते का ऊपरी हिस्सा गहरा नीला और निचला हिस्सा पेट और छाती चमकदार सुनहरा पीली होती है, जो इसे अद्भुत सौंदर्य प्रदान करता है। इसके सिर पर हरा रंग और चोंच के पास काले पंखों से सजी सफेद त्वचा इसकी विशिष्ट पहचान है। लगभग 34 से 36 इंच की लंबाई और 41 से 45 इंच के पंखों के फैलाव वाले ये विशाल तोते न केवल देखने में सुंदर हैं, बल्कि इंसानों की तरह बातचीत करने में भी सक्षम हैं। इनके साथ ही आया अफ्रीकन ग्रे पैरेट अपनी सटीक नकल करने की क्षमता के लिए दुनिया भर में जाना जाता है, जो पर्यटकों विशेषकर बच्चों के लिए मनोरंजन का एक नया जरिया बनेगा।

बड़े बातूनी होते हैं ये परिंदे

बस्तर डीएफओ उत्तम कुमार गुप्ता ने बताया कि मकाऊ और अफ्रीकन ग्रे पैरेट पालतू पक्षी के रूप में बहुत लोकप्रिय हैं क्योंकि ये बहुत सामाजिक, बुद्धिमान और चंचल होते हैं। उन्होंने बताया कि ये पक्षी शब्दों और वाक्यांशों को दोहरा सकते हैं और अपने मालिकों के साथ गहरा भावनात्मक जुड़ाव बना लेते हैं। हालांकि इन्हें बहुत अधिक ध्यान, उचित पोषण और देखभाल की आवश्यकता होती है, क्योंकि इनकी चोंच बहुत मजबूत होती है और ये मेवे तोड़ने में सक्षम होते हैं। सबसे खास बात यह है कि ये पक्षी लंबे समय तक जीवित रहते हैं और इनकी आयु 80 साल तक हो सकती है, इसलिए इनका पालन-पोषण एक बड़ी जिम्मेदारी का काम है। लामनी पार्क में इन विदेशी पक्षियों के आगमन से उम्मीद है कि शहरवासी और पर्यटक, विशेषकर बच्चे, इन रंग-बिरंगे और बातूनी पक्षियों को करीब से देखने के लिए बड़ी संख्या में यहां पहुंचेंगे।

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