कभी नक्सल भय का गढ़ रहे हांडेवाडा जलप्रपात पर लहराया तिरंगा, पर्यावरण प्रेमियों ने चलाया स्वच्छता अभियान – बदलते बस्तर की नई तस्वीरस्थान: हांडेवाडा जलप्रपात, ओरछा ब्लॉक,

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नारायणपुर (छ.ग.)दिनांक: 15 अगस्त 2026एक समय था जब ओरछा ब्लॉक का घना जंगल और यहाँ स्थित मनोरम हांडेवाडा जलप्रपात अत्यंत नक्सल प्रभावित क्षेत्र के रूप में जाना जाता था। नक्सलियों के भय के कारण आम लोगों का यहाँ पहुँचना भी मुश्किल था।आज तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। शासन-प्रशासन के प्रयासों और सुरक्षा बलों की सजगता से इस क्षेत्र से नक्सलवाद का भय समाप्त हो गया है। अब छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि देश के दूर-दराज से पर्यटक यहाँ की प्राकृतिक सुंदरता का अवलोकन करने पहुँच रहे हैं। बस्तर अब भय और हिंसा नहीं, बल्कि शांति, पर्यटन और विकास की नई पहचान बन रहा है।स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर इसी बदलते बस्तर का संदेश देने के लिए दल्ली राजहरा के पर्यावरण प्रेमियों की एक टोली ने विशेष आयोजन किया।टोली में प्रदीप साहू, टिकेश्वर साहू, लोकेंद्र देवांगन, ताराचंद रावेट, कौशल साहू और चेला राम निर्मलकर शामिल थे।

टीम ने स्वतंत्रता दिवस पर हांडेवाडा जलप्रपात परिसर में ध्वजारोहण कर राष्ट्रगान के साथ शहीदों को नमन किया और उपस्थित लोगों को शांति, एकता एवं भाईचारे का संदेश दिया।इसके साथ ही प्राकृतिक पर्यटन स्थलों में बढ़ती गंदगी और प्रदूषण को रोकने के उद्देश्य से स्वच्छता अभियान चलाया गया। स्वतंत्रता दिवस पर पर्यटकों की अधिक भीड़ को देखते हुए टीम ने हांडेवाडा जलप्रपात, चित्रकोट जलप्रपात एवं ताम्र घूमर जलप्रपात में साफ-सफाई की और वहां मौजूद पर्यटकों को स्वच्छता के प्रति जागरूक किया।इस अवसर पर पर्यावरण प्रेमी प्रदीप साहू ने कहा -“लोग एक तरफ सुकून और शांति के लिए प्राकृतिक स्थलों पर जाना पसंद करते हैं और उम्मीद करते हैं कि वह स्थान साफ और सुरक्षित हो।

वहीं दूसरी तरफ कुछ लोग खाने-पीने की चीजें, प्लास्टिक के डिब्बे और पॉलिथीन वहीं फेंक देते हैं, जिससे वह प्राकृतिक स्थान गंदा हो जाता है और उसकी खूबसूरती धूमिल पड़ती जा रही है। हमने सिर्फ सफाई ही नहीं की, बल्कि वहां मौजूद लोगों से पर्यटन क्षेत्रों को साफ-सुथरा रखने की अपील भी की।”टीम के इस प्रयास की वहां मौजूद पर्यटकों और स्थानीय लोगों ने सराहना की। कई लोगों ने स्वेच्छा से सफाई में हाथ बंटाया और भविष्य में भी पर्यटन स्थलों को स्वच्छ रखने की शपथ ली।टीम का मानना है कि ऐसे छोटे-छोटे अभियानों से ही लोगों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता आएगी और आने वाली पीढ़ी को एक स्वच्छ वातावरण मिल सकेगा।हम सभी क्षेत्रवासियों और पर्यटकों से अपील करते हैं कि वे इस प्राकृतिक धरोहर को देखने आएं, इसकी स्वच्छता बनाए रखें और बस्तर के बदलते स्वरूप के साक्षी बनें।

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