राष्ट्रीय महिला किसान दिवस पर महिला किसानों के योगदान को किया नमन

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आधुनिक तकनीक और जैविक खेती अपनाकर आत्मनिर्भर बनने का आह्वान

बालोद :- कृषि विकास एवं किसान कल्याण तथा जैव प्रौद्योगिकी विभाग, व कृषि विज्ञान केन्द्र, जिला बालोद के संयुक्त तत्वावधान में राष्ट्रीय महिला किसान दिवस के अवसर पर महिला किसान सम्मान कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में महिला किसानों के कृषि क्षेत्र में अतुलनीय योगदान, उनकी मेहनत, संघर्ष, नवाचार और आत्मनिर्भरता की भावना को सम्मानपूर्वक रेखांकित किया गया। कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों ने महिला किसानों को कृषि विकास की महत्वपूर्ण भागीदार बताते हुए उन्हें आधुनिक कृषि तकनीक, प्राकृतिक एवं जैविक खेती तथा कृषि आधारित स्वरोजगार के अवसरों से जुड़ने का आह्वान कियाकार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में ’ पवन साहू, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भाजपा किसान मोर्चा, छत्तीसगढ़’ उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में ’श्री राकेश छोटू यादव, महामंत्री भाजपा जिला बालोद, ’’ प्रेम साहू, जिला मंत्री भाजपा छत्तीसगढ़, एवं ’’श्रीमती भगवती उइके, जनपद सदस्य, जनपद पंचायत बालोद’ शामिल हुए। कार्यक्रम में वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. के आर साहू, वैज्ञानिक गण डाॅ. बलदेव अग्रवाल, डाॅ. ए.आर. गौर, सचिन वर्मा, श्री गितेश सिन्हा, डाॅ नीतू सोनकर, डाॅ दीपशिखा मनु चंद्राकर, विनोद पैकरा, एवं कृषि विभाग से श्री महेश मार्गेय, अनुविभागीय कृषि अधिकारी, के आर पिद्दा व.कृ.वि.अधिकारी, सुश्री माया ठाकुर कृ.वि.अधिकारी एवं अन्य अधिकारी कर्मचारीगण ड्रोन दीदी, कृषि सखियां एवं उन्नत जैविक महिला किसान बड़ी संख्या में उपस्थित रहीं।मुख्य अतिथि पवन साहू ने अपने उद्बोधन में कहा कि महिला किसान देश की कृषि व्यवस्था की मजबूत आधारशिला हैं।

खेती-किसानी में महिलाओं का योगदान केवल बीज बोने, रोपाई, निराई-गुड़ाई और फसल कटाई तक सीमित नहीं है, बल्कि बीज संरक्षण, पशुपालन, सब्जी उत्पादन, जैविक खाद निर्माण और कृषि उत्पादों के प्रसंस्करण तक उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है। महिलाओं के परिश्रम और समर्पण से ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है।उन्होंने कहा कि महिला किसानों को सम्मान देने का अर्थ उनके श्रम, कौशल और अनुभव को पहचान देना है। आज आवश्यकता है कि महिला किसानों को आधुनिक कृषि तकनीक, वैज्ञानिक मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और बाजार की बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हों, ताकि वे खेती को लाभकारी व्यवसाय के रूप में विकसित कर सकें। उन्होंने महिला किसानों से पारंपरिक ज्ञान के साथ नई तकनीक अपनाकर कृषि क्षेत्र में नए आयाम स्थापित करने का आह्वान किया।भाजपा जिला बालोद के महामंत्री श्री राकेश छोटू यादव ने अपने उद्बोधन में कहा कि सफलता का अर्थ केवल कलेक्टर, अधिकारी या किसी बड़े पद तक पहुंचना ही नहीं है। सफलता का वास्तविक अर्थ है अपने ज्ञान, मेहनत, कौशल और संकल्प से समाज के सामने प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत करना।

आज महिलाएं खेती-किसानी को अपनाकर न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और महिला सशक्तीकरण की नई कहानी भी लिख रही हैं।श्री यादव ने कहा कि छत्तीसगढ़ जैसे कृषि प्रधान राज्य में महिला किसानों की भूमिका विशेष महत्व रखती है। हमारी माताएं और बहनें खेतों में केवल फसल नहीं उगातीं, बल्कि परिवार के सपने, बच्चों का भविष्य और गांव की खुशहाली भी संवारती हैं। महिला किसानों को कृषि योजनाओं की जानकारी, प्रशिक्षण, कृषि उपकरणों, बाजार और आर्थिक निर्णयों में उचित भागीदारी दिलाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।उन्होंने महिला किसानों से स्व-सहायता समूहों के माध्यम से संगठित होकर जैविक खेती, सब्जी उत्पादन, मशरूम उत्पादन, पशुपालन और खाद्य प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों में आगे बढ़ने की अपील की।कार्यक्रम में उपस्थित भाजपा छत्तीसगढ़ के जिला मंत्री श्री प्रेम साहू ने महिला किसानों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि कृषि क्षेत्र में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी ग्रामीण विकास की महत्वपूर्ण शक्ति है। उन्होंने महिला किसानों को नवीन कृषि पद्धतियों, वैज्ञानिक मार्गदर्शन और कृषि आधारित रोजगार के अवसरों से जुड़ने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि महिलाओं के अनुभव और आधुनिक तकनीक का समन्वय कृषि उत्पादन, परिवार की आय और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में सहायक हो सकता है।

कार्यक्रम में जनपद सदस्य श्रीमती भगवती उइके सहित उपस्थित अतिथियों ने महिला किसानों के परिश्रम और समर्पण की सराहना की। डॉ. के. आर. साहू ने विकसित भारत के निर्माण में महिला किसानों की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कृषि उत्पादन, खाद्य एवं पोषण सुरक्षा तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में महिलाओं का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है। महिला किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों, प्रशिक्षण एवं संसाधनों से जोड़ना विकसित कृषि और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में आवश्यक है।डॉ. दीपशिखा मनु चंद्राकर ने अपने संबोधन में बताया कि महिलाएं खेती-किसानी की धुरी हैं। बुवाई, रोपाई, निराई-गुड़ाई, कटाई, फसल प्रबंधन, पशुपालन एवं कृषि उत्पादों के प्रसंस्करण जैसे अनेक कार्यों में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। उन्होंने महिला किसानों को धान के साथ-साथ दलहन एवं तिलहन फसलों की खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम का सफल संचालन श्री सचिन कुमार वर्मा द्वारा किया गया।इस कार्यक्रम में छः प्रगतिशील महिला कृषिकों का सम्मान अतिथियों द्वारा प्रशस्ति पत्र प्रदान कर किया गया। केन्द्र के वैज्ञानिकों ने महिला कृषकों के समसामयिक कृषि समस्याओ का परिचर्चा के माध्यम से समाधान दिया तथा कृषि विभाग के विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी गई।सफल महिला कृषकों ने अपने-अपने उन्नत कृषि के बारे में बताया।

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