जगदलपुर। बीते दिनों बस्तर में हुई भारी बारिश के चलते नदी नालों का जल स्तर बढ़ने व बाढ़ के कहर से इंसानी जिंदगी तो प्रभावित हुई ही, वही धान तथा सब्जियों की फसल को व्यापक नुकसान पहुंचा है। खेतों में पानी भर जाने से किसानों की फसलें पूरी तरह बर्बाद हो गए हैं। इसका सीधा असर बाजार पर देखा जा रहा है। रविवार को संभाग की सबसे बड़ी सब्जी मंडी संजय बाजार में पखवाड़े भर पूर्व की तुलना में करीब 25% अधिक दाम पर सब्जियां बेची गई। सब्जी के थोक विक्रेता मोहन राव ने बताया कि बस्तर में रायपुर समेत ओड़िशा से काफी मात्रा में सब्जियों की आवक होती है। ओड़िशा में भारी बारिश व इंद्रावती नदी में बाढ़ के चलते काफी कम मात्रा में ही सब्जियों की आवक हो रही है। वही स्थानीय स्तर पर बकावंड, बस्तर लौंहंडीगुडा व तोकापाल जनपद में भी फसल नष्ट होने से आवक पर भारी फर्क पड़ा है।इसलिए 20 से करीब 25% कीमत बढ़ी है। उन्होंने बताया कि पखवाड़े भर बाद लोकल आवक होने से कीमतों में कुछ फर्क पड़ने की उम्मीद है.रविवार को गोभी 100 रूपये प्रति किलो पत्ता गोभी ₹40 हरी मिर्च ₹70 गाजर 40 चुकंदर 50 शिमला मिर्च 80 खीर सो भट 40 ऊंचाई 60 कद्दू 30 व कुंदरु ₹60 प्रति किलो की दर से बेची गई.
बाढ़ प्रभावित 58 विद्यार्थियों को मिली नई शिक्षण सामग्री कोहकापाल में आर्थिक प्रकोष्ठ ने चलाया सेवा अभियान, बैग-कॉपी सहित स्टेशनरी और बिस्किट का किया वितरण
जगदलपुर। बाढ़ से प्रभावित विद्यार्थियों की पढ़ाई को पटरी पर लाने के उद्देश्य से भाजपा आर्थिक प्रकोष्ठ बस्तर द्वारा शिक्षण सामग्री वितरण अभियान लगातार जारी है। इसी क्रम में आर्थिक प्रकोष्ठ की टीम ने प्रवीण वार्ड स्थित कोहकापाल बस्ती के जगतु महारा में पहुंचकर 58 बाढ़ प्रभावित विद्यार्थियों को स्कूल बैग, नोटबुक, रजिस्टर, कंपास, पेन-पेंसिल सहित अन्य शिक्षण सामग्री का वितरण किया। इस दौरान बच्चों को बिस्किट भी वितरित किए गए।गौरतलब है कि हाल ही में बस्तर में आई बाढ़ से जिले के कई ग्रामों के साथ जगदलपुर शहर की निचली बस्तियां और अनेक वार्ड भी प्रभावित हुए थे। बाढ़ के पानी में कई विद्यार्थियों की किताबें, कॉपियां, स्कूल बैग और अन्य शिक्षण सामग्री बह गई अथवा पानी में खराब हो गई। आर्थिक प्रकोष्ठ द्वारा ऐसे प्रभावित क्षेत्रों को चिन्हांकित कर विद्यार्थियों की सूची तैयार की जा रही है और आवश्यकता के अनुसार उन्हें शिक्षण सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है।
इससे पूर्व आर्थिक प्रकोष्ठ द्वारा डोंगा घाट बस्ती में भी पहुंचकर 60 से अधिक बाढ़ प्रभावित विद्यार्थियों को शिक्षण सामग्री वितरित की गई थी।शिक्षा को पटरी पर लाने का प्रयासकार्यक्रम को संबोधित करते हुए भाजपा जिला अध्यक्ष वेद प्रकाश पांडे ने कहा कि आर्थिक प्रकोष्ठ द्वारा बाढ़ प्रभावित विद्यार्थियों के बीच शिक्षण सामग्री पहुंचाने का कार्य सराहनीय पहल है। बाढ़ के कारण बच्चों की पढ़ाई से जुड़ी सामग्री नष्ट हुई है, ऐसे में उन्हें दोबारा आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराना उनकी शिक्षा को जारी रखने में महत्वपूर्ण सहयोग है। उन्होंने कहा कि अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक पहुंचकर उसकी सेवा करना ही अंत्योदय की मूल भावना है।आर्थिक प्रकोष्ठ के प्रदेश सह-संयोजक मनीष पारख ने कहा कि आर्थिक प्रकोष्ठ कमजोर, गरीब एवं वंचित वर्ग के लोगों को संबल प्रदान करने के लिए सदैव प्रयासरत रहता है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में विभिन्न संस्थाओं और प्रशासन द्वारा राहत कार्य किए जा रहे हैं। इसी क्रम में आर्थिक प्रकोष्ठ ने विशेष रूप से प्रभावित विद्यार्थियों की सहायता करने का निर्णय लिया, ताकि शिक्षण सामग्री के अभाव में उनकी पढ़ाई प्रभावित न हो।जिला संयोजक अविनाश जैन ने कहा कि बाढ़ में जिन बच्चों की शिक्षण सामग्री नष्ट हुई है, उन्हें दोबारा स्कूल सामग्री उपलब्ध कराना आत्मसंतोष देने वाला कार्य है। इससे बच्चे फिर से स्कूल जाकर अपनी पढ़ाई जारी रख सकेंगे और अपने भविष्य के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ सकेंगे।कार्यक्रम का संचालन एवं आभार प्रदर्शन आर्थिक प्रकोष्ठ के जिला सह-संयोजक परमेश राजा ने किया।ये रहे मौजूदकार्यक्रम में जिला महामंत्री परिषद बेसरा, जिला कार्यालय मंत्री एवं एल्डरमैन रोहित त्रिवेदी, शहर पश्चिम मंडल अध्यक्ष प्रकाश झा, प्रदेश सह-संयोजक आर्थिक प्रकोष्ठ मनीष पारख, प्रदेश कार्यसमिति सदस्य राजू कुमार बोथरा, कार्यसमिति सदस्य शिरीष मिश्रा, किसान मोर्चा जिला अध्यक्ष योगेश सिंह, अनुसूचित जाति मोर्चा जिला अध्यक्ष विनय सोना, स्वच्छता प्रकोष्ठ जिला संयोजक राजा यादव, जिनेन्द्र टाटिया, महावीर बाफना, श्रीमती धनिता ठाकुर, श्रीमती किरण चौरसिया सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण एवं स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।
विस्थापितों का दर्द साझा किया विधायक विक्रम मंडावी ने
तेलंगाना में रह रहे हैं बस्तर के लगभग 60 हजार आदिवासी
वर्षों बाद अपने नेता से मिलकर भावुक हो उठे विस्थापित ग्रामीण
जगदलपुर अपनी जमीन से वर्षों की दूरी, अनकही पीड़ा और अधूरी राह के बीच बीजापुर के विधायक विक्रम मंडावी शनिवार और रविवार को तेलंगाना के दो दिवसीय दौरे पर रहे। वे उन बस्तियों में पहुंचे, जहां छत्तीसगढ़ के बीजापुर, दंतेवाड़ा और सुकमा जिलों से विस्थापित होकर बसे आदिवासी परिवार आज भी अनेक समस्याओं को झेल रहे और समस्याओं के समाधान के लिए सहारा की राह देख रहे हैं? इन लोगों के लिए बीजापुर के विधायक उनके लिए नई उम्मीद बनकर तेलंगाना पहुंचे। दौरे के समापन पर विधायक ने कहा- “कई वर्षों बाद अपनों के बीच आया हूं। अपनों से मिलना भावुक पल था।

” यह एक वाक्य पूरे प्रवास की तस्वीर बन गया।विधायक विक्रम मंडावी तेलंगाना राज्य के वेंकटचेरुवू, कंदीपडू, चिन्नासमुद्रम, चेरला, क्रांतिपुरम, रामचंद्रपुरम, मांगवाया, वेंकटपुरम, योगिता नागरम, येटुरनगरम, भूपतपुरम, मांगपेटा, सलवा, मदुलगुडम, सुंदरनगर, उमेशचंद्र नागरम, मीरलापुरम, सरापका और भद्रचलम सहित उन गांवों और बस्तियों में गए, जहां बीजापुर, दंतेवाड़ा और सुकमा जिले से निकले 50-60 हजार आदिवासी परिवार 20 से 25 वर्षों से संघर्षमय जीवन यापन कर रहे हैं। विस्थापित हुए लोग जिन जगह पर रह रहे है वे वहां का स्थायी पट्टा और सरकार की समस्त योजनाओं और सुविधाओं का लाभ चाहते हैं, जो अब तक उन्हें नहीं मिल रहा है। अपने बच्चों के भविष्य की बात लेकर आए कई चेहरे नम हो गए। कईयों ने पहली बार खुलकर कहा कि उनकी आवाज अब तक किसी ने सुनी ही नहीं। विस्थापित आदिवासियीं ने विधायक विक्रम मंडावी को बताया कि वे तेलंगाना सरकार से पिछले 20 से 25 वर्षों से लगातार जमीन का पट्टा और सरकारी सुविधाएं मांग रहे हैं, लेकिन सरकार उन्हें अब तक कोई सहायता नहीं दे रही है। यही स्थिति पैतृक गांवों की है वहां रह रहे परिवारों को छत्तीसगढ़ की सरकार कोई भी सहायता नहीं दे रही है। इस अनिश्चितता का नतीजा यह हो रहा है कि परिवार बीच रास्ते में अटका हुआ है, एक ओर रोजी-रोटी की चिंता है, दूसरी ओर बच्चों की पढ़ाई और आने वाले कल की चिंता, पेट पालने और पैतृक जड़ों से जुड़ने के बीच यह द्वंद्व उनकी रोजमर्रा की जिंदगी बन चुका है।

उनकी इस स्थिति को समझने व समाधान की दिशा में पहल करने पहुंचे विधायक विक्रम मंडावी का गर्मजोशी से हुए स्वागत के बीच विस्थापित लोगों ने कहा कि विधायक विक्रम मंडावी से हुई मुलाकात से पहली बार लगा कि उनकी पीड़ा सुनी जा रही है। विधायक मंडावी की मौजूदगी को उन्होंने एक उम्मीद की नई किरण बताया। चर्चा में यह सहमति बनी कि समस्या व्यक्तिगत नहीं, सामूहिक है, इसलिए उसका हल भी सामूहिक रास्ते से निकलना चाहिए। विस्थापित आदिवासी अपना एक प्रतिनिधि मंडल गठित करेंगे। यह प्रतिनिधि मंडल तेलंगाना सरकार और छत्तीसगढ़ सरकार दोनों से बात करेगा, ताकि वे जमीन के पट्टा सहित अपने अन्य मांगों को तेलंगाना सरकार और छत्तीसगढ़ सरकार तक पहुंच सकें। विधायक विक्रम मंडावी ने कहा कि बीजापुर, दंतेवाड़ा और सुकमा ज़िलों के अंतर्गत आने वाले गांवों से लगभग 50 से 60 हजार आदिवासी तेलंगाना में विस्थापित हैं। इनकी तेलंगाना सरकार से मांग है कि उन्हें जमीन का स्थायी पट्टा और अन्य सरकारी सुविधाओं और योजनाओं का लाभ मिले। दौरा समाप्ति के बाद विस्थापित बस्तियों में एक बात बार-बार दोहराई जा रही है कि वर्षों बाद कोई अपना उनके बीच पहुंचा, उनकी बात सुनी, और उनकी मांगों को सरकारों के दरवाजे तक ले जाने का भरोसा दिलाया। अब नजर प्रतिनिधि मंडल के गठन और दोनों सरकारों से होने वाली चर्चा पर है।

आस्था, परंपरा और सेवा के सशक्त स्तंभ हैं श्री रोहित शर्मानयापारा युवा दुर्गा उत्सव समिति की 13 वर्षों की गौरवशाली यात्रा में नेतृत्व, समर्पण और संस्कार की अहम भूमिका
जगदलपुर। नयापारा युवा दुर्गा उत्सव समिति आज अपनी गौरवशाली यात्रा के 13वें वर्ष की ओर अग्रसर है। वर्षों से आस्था, परंपरा, संस्कार और सामाजिक एकता का संदेश देने वाली इस समिति की सफलता के पीछे अध्यक्ष एवं प्रमुख स्तंभ रोहित शर्मा का निरंतर समर्पण, अथक प्रयास और मां भगवती के प्रति अटूट आस्था महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रही है।श्री रोहित शर्मा के कुशल नेतृत्व में समिति ने दुर्गा उत्सव को केवल भव्य आयोजन तक सीमित नहीं रखा, बल्कि पूजा-पाठ की परंपरा, धार्मिक विधि-विधान और आध्यात्मिक वातावरण की शुद्धता को भी हमेशा प्राथमिकता दी। मां दुर्गा की आराधना को विशेष और भव्य स्वरूप देने के उद्देश्य से काशी एवं वृंदावन से विद्वान पंडितों को आमंत्रित कर विधिवत पूजा-अर्चना कराई जाती है।
उपलब्धियों से बढ़ा समिति का गौरवनयापारा युवा दुर्गा उत्सव समिति की धार्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान को वर्ष 2015 में उस समय और मजबूती मिली, जब रोटरी क्लब एवं बस्तर चेंबर ऑफ कॉमर्स द्वारा आयोजित पूजा-पाठ एवं झांकी प्रतियोगिता में समिति को प्रथम स्थान से सम्मानित किया गया। यह सम्मान समिति की उत्कृष्ट धार्मिक परंपरा, भव्य आयोजन और समर्पित कार्यशैली का प्रमाण बना।सेवा और सामाजिक सरोकार में भी अग्रणीश्री रोहित शर्मा का योगदान केवल दुर्गा उत्सव तक सीमित नहीं रहा है। वे निरंतर विभिन्न सामाजिक, धार्मिक एवं जनसेवा से जुड़े कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाते आ रहे हैं। जरूरतमंदों की सहायता हो या सामाजिक आयोजनों में सहभागिता, उनका प्रयास हमेशा समाज में सहयोग, एकता और सेवा की भावना को मजबूत करने का रहा है।उनके नेतृत्व और मार्गदर्शन में नयापारा युवा दुर्गा उत्सव समिति के आयोजन आज भी व्यवस्थित, अनुशासित और धार्मिक परंपराओं के अनुरूप संपन्न होते आ रहे हैं। समिति के सदस्यों को एकजुट रखते हुए आयोजन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है।
13 वर्षों की यात्रा, आस्था और संस्कार की पहचाननयापारा युवा दुर्गा उत्सव समिति की 13 वर्षों की यह यात्रा महज एक धार्मिक आयोजन की कहानी नहीं, बल्कि आस्था, सेवा, संस्कार, परंपरा और सामाजिक एकता का प्रेरणादायी उदाहरण है।श्री रोहित शर्मा के नेतृत्व में समिति ने वर्षों से जिस समर्पण के साथ मां दुर्गा की आराधना और समाजसेवा का संकल्प निभाया है, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत है।मां भगवती की कृपा से आस्था और सेवा का यह कारवां इसी तरह निरंतर आगे बढ़ता रहे और नयापारा में धर्म, संस्कार एवं सामाजिक एकता की यह ज्योति सदैव प्रज्वलित रहे ।
जनता पर महंगाई का बड़ा बोझ लाद दिया है मोदी सरकार ने: दीपक बैज
कामर्शियल गैस के दामों में बढ़ोत्तरी से आम आदमी होगा परेशान
मोदी राज में महंगाई चरम पर : दीपक बैज
मुख्यमंत्री साय का बस्तर दौरा संवेदनहीन, बाढ़ से हुए नुकसान और परेशानी को नहीं लिया गंभीरता से
जगदलपुर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज लगातार बढ़ती महंगाई को लेकर मोदी सरकार पर जमकर बरसे। उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय पर भी जमकर निशाना साधा। दीपक बैज ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री साय का बस्तर दौरा सिर्फ दिखावे का रहा। बाढ़ पीड़ितों के प्रति उनमें जरा भी संवेदनशीलता नजर आई। मुख्यमंत्री केवल औपचारिकता निभा कर चले गए। जगदलपुर स्थित जिला कांग्रेस कार्यालय में पत्रकार वार्ता के दौरान छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज मोदी और साय सरकार पर बेहद आक्रामक तेवर में नजर आए। उन्होंने कहा कि कामर्शियल गैस के दामों में बढ़ोत्तरी मोदी सरकार का जनता पर महंगाई और बोझ है। मोदी राज में महंगाई बेतहाशा बढ़ रही है। गरीब और मध्यम वर्ग परेशान है। मोदी सरकार ने कामर्शियल सिलेंडर को 62.50 रू. से लेकर 71.50 रू. तक महंगा कर दिया। पिछले 9 माह में कामर्शियल सिलेंडर के दाम में 1270 रू. की बढ़ोत्तरी मोदी सरकार ने की है। मतलब हर माह 141 रू. दाम बढ़ाया गया है। कामर्शियल सिलेंडर के दाम बढ़ाने से बाजार में मिलने वाली खाद्य सामग्री, रेस्टोरेंट, होटलों में मिलने वाले कुक्ड फूड नाश्ता आदि के दाम स्वाभाविक रूप से और बढ़ जाएंगे। इंडस्ट्रीयल उत्पादों के दाम भी बढ़ जाएंगे। सुई से लेकर लौह उत्पादों के दाम भी बढ़ेंगे।छत्तीसगढ़ के आयरन उद्योगों पर भी इसका असर पड़ेगा, भाव बढ़ेगा और महंगाई भी बढ़ेगी।थोक महंगाई की सूचकांक आजादी के बाद सबसे ऊंचे पायदान 9.78 पर है। मोदी सरकार जब से सत्ता में आई है, महंगाई से देश के नागरिकों की कमर टूटती जा रही है। 2014 में जो गैस का सिलेंडर 410 रू. का था, आज वह 1000 रू. के पार है वह भी मिल नहीं रहा है। पेट्रोल के दाम 70 रू. प्रति लीटर से बढ़कर 108 रु. प्रति लीटर के पार हो गए है, जबकि डीजल के दाम 55 रू. प्रति लीटर से बढ़कर 104 रू. प्रति लीटर के करीब पहुंच गए है। मोदी सरकार ने खाद्य तेलों के आयात शुल्क में 22 प्रतिशत की भारी भरकम वृद्धि की, जिसके चलते बाजार में सभी तरह के खाद्य तेलों के दाम लगभग डेढ़ गुना बढ़ गए।पॉम ऑयल, सोयाबीन और सूरजमुखी तेल पर इंपोर्ट ड्यूटी 5.5 के स्तर से बढ़कर 27.5 प्रतिशत कर दिया गया है,
अर्थात सीधे तौर पर 22 फीसदी की बढ़ोत्तरी मोदी सरकार की मुनाफाखोरी का प्रमाण है। जिन खाद्य तेलों का उत्पादन स्थानीय स्तर पर होते हैं, उनमें सेंट्रल एक्साइज की दरों में वृद्धि का प्रभाव नहीं होना चाहिए था, लेकिन भारतीय जनता पार्टी की सरकार का संरक्षण जमाखोरों और मुनाफाखोरों को है। जिसके चलते राइस ब्रान आयल, सरसों तेल जैसे सभी तरह के खाद्य तेलों का दाम डेढ़ गुना बढ़ा दिया गया है। दाल, चावल, सब्जियां, साबुन, कपड़ा, दवाईयां सभी वस्तुओं के दाम बेतहाशा बढ़ गए हैं।
फोटोशूट कराने आए थे साय
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि लगभग पूरा बस्तर संभाग लगातार दूसरे वर्ष भीषण बाढ़ की चपेट में आया है। इस वर्ष भी बाढ़ ने आम आदमी को बर्बाद कर दिया। उनके मकान, सामान, पशुधन, फसल सब बर्बाद हो गये। अनेकों मार्ग का संपर्क टूट गया, पुल-पुलिये, सड़क सभी कुछ टूट कर बर्बाद हो गए हैं। जन-जीवन ठप हो गया है। वहीं मुख्यमंत्री साय का बस्तर दौरे ने जनता को सिर्फ निराश किया। मुख्यमंत्री बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने के नाम पर बस्तर आए थे, लेकिन वे केवल औपचारिकता निभाते हुए पुल पर खड़े होकर फोटो खिंचवाकर, रील बनवाकर चले गए। मुख्यमंत्री का दौरा बेहद ही संवेदनहीन और बेहद दुर्भाग्यजनक रहा। मुख्यमंत्री ने बाढ़ से हुए नुकसान और परेशानी को गंभीरता से नहीं लिया। ऐसा लगा कि मुख्यमंत्री नहीं कोई पर्यटक आया था जो फोटो फोटोशूट कराने आया और चला गया। यहां से जाने के बाद उन्हें सिंगापुर जाने की जल्दी थी। वे इन्वेस्टर कनेक्ट के बहाने सिंगापुर घूमने की तैयारी करने चले गए। बस्तर का आम आदमी परेशान है, न मुख्यमंत्री को फ्रिक है और न ही मंत्रियों को। बाढ़ से आठ लोगों की मौत हुई, उनके लिए भी मुख्यमंत्री ने कोई विशेष सहायता की घोषणा नहीं की। उड़ीसा द्वारा बांध से पानी छोड़ने के कारण बस्तर में बाढ़ से हालात बिगड़े, मुख्यमंत्री दिल्ली में उड़ीसा के मुख्यमंत्री के साथ बैठक की, मगर बिना पूर्व सूचना और चेतावनी के उड़ीसा सरकार द्वारा बांध से पानी छोड़े जाने पर मुख्यमंत्री साय ने आपत्ति दर्ज नहीं कराई। यह उनकी संवेदनहीनता का प्रमाण है।
राहत के नाम पर खानापूर्ति
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने आगे कहा बाढ़ से हजारों घर प्रभावित हुए। हजारों मकान गिर गये। बड़ी संख्यों में लोग बेघर हो गए। लोगों के सामान बारिश में बर्बाद हो गया है। लाखों एकड़ तैयार फसल बर्बाद हो गईं । अनेकों सड़क, पुल-पुलिया टूट गये, बह गये।हजारों पालतू पशु गाय, बैल, मुर्गी, बकरी, बकरा सब बह गये।दो माह का राशन एक साथ मिला था पूरा राशन खराब हो गया। घर में पहले से रखी सामग्री और अन्य जरूरी सामान खराब हो गया। सरकार द्वारा चलाया गया राहत कार्य केवल खानापूर्ति वाला था। अब तो राहत शिविर भी बंद कर दिए गए हैं।सरकार ने मदद के नाम पर केवल जले पर नमक छिड़का, सरकारी सहायता अपर्याप्त थी।राहत शिविर बंद होने के बाद जो लोग वापस घर गए हैं, उनके घरों में खाना बनाने के राशन, गैस, लकड़ी कुछ नहीं है। लोग शिविर से वापस आने के बाद भूखे थे, सामाजिक संगठनों के लोगों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने उनके लिए भोजन की व्यवस्था की।
बैज ने उठाई दमदार मांगें
पीसीसी चीफ दीपक बैज ने कहा कि सरकार मकानों की पूर्तिक्षति में 1.20 लाख रुपए और आंशिक क्षति में 4000 दे रही है, जो अपर्याप्त है। अतः सभी की हानि का मूल्यांकन कर घर बनाने के लिए कम से कम पूर्ण क्षति पर 5 लाख आंशिक क्षति पर 1 लाख दिए जाएं। फसल के लिए सरकार प्रति हेक्टेयर 8000 का मुआवजा दे रही है जबकि सरकार 1 एकड़ में 21 क्विंटल धान खरीदती है तो इस लिहाज से नुकसान का मुआवजा हिसाब से 65 हजार 100 रुपए प्रति एकड़ के हिसाब से दिया जाए। प्रभावित क्षेत्रों के किसानों का पूरा कर्जा माफ किया जाए। पशुओं की हानि का आंकलन कर बाजार रेट के अनुसार मुआवजा दिया जाए। घर में रखे सामान टीवी, फ्रिज, बेड आदि का आंकलन कर मुआवजा, दो माह के राशन एकमुश्त फिर से दिया जाए। बच्चों को कापी-किताब, स्कूल बैग मुफ्त दिए जाएं। प्रभावित क्षेत्र के लोगों के आवश्यक दस्तावेज बनाने के लिए शिविर लगाया जाए। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में बाढ़ जनित संक्रमण रोकने विशेषज्ञ डॉक्टरों के शिविर लगाया जाए। पूरे बस्तर संभाग के पुल-पुलियों और इन्फ्रास्ट्रक्चर निर्माण के लिए विशेष राहत पैकेज की घोषणा की जाए।प्रेसवार्ता में प्रदेश कांग्रेस प्रभारी महामंत्री मलकीत सिंह गैदू, पूर्व विधायक रेखचंद जैन, बस्तर जिला कांग्रेस कमेटी शहर अध्यक्ष सुशील मौर्य, ग्रामीण अध्यक्ष प्रेमशंकर शुक्ला, नेता प्रतिपक्ष राजेश चौधरी, प्रवक्त जावेद खान,महामंत्री अभिषेक नायडू,अनुराग महतो, रविशंकर तिवारी, नीतीश शर्मा आदि मौजूद रहे।
कचना की जमीन के बदले कचना में ही प्लॉट, सड्डू में आवंटन के दावे पर उठे सवाल
मंत्री कश्यप की छवि धूमिल करने की कोशिशों की निकली हवा
रायपुर कचना, लाभांडी, सड्डू नगर विकास योजना में जमीन आवंटन को लेकर मंत्री केदार कश्यप और उनकी धर्मपत्नी पर लगाए जा रहे आरोपों के बीच सामने आए तथ्यों से स्थिति स्पष्ट कर दी है। जानकारी के अनुसार ग्राम कचना की मूल भूमि के बदले प्रस्तावित भूखंड कचना में ही दिया गया है, सड्डू में नहीं। योजना में केवल एक भूमि स्वामी नहीं, बल्कि सभी प्रभावित भूमि स्वामियों के लिए समान नीति और निर्धारित प्लानिंग मानकों के आधार पर भूखंड प्रस्तावित किए गए हैं। इससे विरोधी दलों और नेताओं के सारे दावे एवं आरोप स्वतः ध्वस्त हो गए हैं।
नगर विकास योजना का प्रारंभिक नोटिफिकेशन 5 दिसंबर 2025 को हुआ था। इसके बाद 11 सितंबर 2026 को योजना का प्रारूप नक्शा प्रकाशित किया गया। इस प्रारूप में मूल भूमि के बदले दिए जाने वाले भूखंडों को संबंधित ग्राम में ही रखा गया है। यानी कचना की जमीन के बदले कचना में ही भूखंड आवंटन प्रस्तावित है और ग्राम परिवर्तन कर सड्डू में जमीन दिए जाने की बात उपलब्ध योजना से मेल नहीं खाती। जिस भूखंड को चौड़ी सड़क से जोड़कर विशेष लाभ देने का आरोप लगाया जा रहा है, उस संबंध में भी महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार 45 मीटर चौड़े मार्ग पर कुल 37 भूखंड प्रस्तावित या आवंटित हैं। बड़े भूखंडों को प्लानिंग के निर्धारित मानकों के अनुसार चौड़े मार्ग से जोड़ा गया है। इसी आधार पर संबंधित प्लॉट नंबर 25 को भी 45 मीटर मार्ग दिया गया है। इसलिए केवल एक भूखंड की सड़क की चौड़ाई को अलग करके देखने के बजाय उसी मार्ग पर स्थित अन्य भूखंडों, उनके क्षेत्रफल, मूल भूमि की स्थिति और प्लानिंग मानकों की तुलनात्मक जांच आवश्यक है।
सभी भूखंडों के लिए समान मानक
इस मामले का एक और महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि खसरा नंबर 658/2 जैसी स्थिति केवल एक भूखंड तक सीमित नहीं है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक खसरा नंबर 684/1, 684/5 और 681/1 की मूल भूमि के बदले भी क्रमशः प्लॉट नंबर 26 और 37 प्रस्तावित किए गए हैं। इन मामलों में मूल भूमि से प्रस्तावित भूखंड की दूरी और भी अधिक बताई गई है। ऐसे में किसी एक भूखंड की मूल भूमि और प्रस्तावित प्लॉट के बीच की दूरी को विशेष लाभ का आधार बताने से पहले अन्य समान मामलों की तुलनात्मक जांच जरूरी हो जाती है।
मूल जमीन भी योजना का हिस्सा
नगर विकास योजना में जमीनों का पुनर्गठन केवल प्लॉट देने तक सीमित नहीं है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार संबंधित क्षेत्रों में मूल जमीनों के हिस्सों का उपयोग अमेनिटी, सड़क और एसटीपी जैसी सार्वजनिक सुविधाओं के लिए भी किया गया है।उदाहरण के तौर पर, प्लॉट नंबर 26 से संबंधित मूल भूखंड पर एसटीपी प्रस्तावित है, जबकि प्लॉट नंबर 30 से संबंधित मूल भूखंड पर सड़क एवं अमेनिटी का प्रावधान किया गया है। इसी तरह अन्य मूल भूखंडों पर भी योजना की आवश्यकता के अनुसार सार्वजनिक उपयोग निर्धारित किए गए हैं।
सभी किसानों के लिए एक नीति
सामने आई जानकारी का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि योजना में भूखंड निर्धारण किसी एक व्यक्ति के लिए अलग नियम बनाकर नहीं, बल्कि सभी किसानों और भूमि स्वामियों के लिए एक ही नीति तथा प्लानिंग मानकों के आधार पर किए जाने की बात कही गई है। इसका वस्तुनिष्ठ परीक्षण भी संभव है। संबंधित भूखंड की तुलना उसी योजना के अन्य भूखंडों से की जा सकती है। मूल खसरे का क्षेत्रफल, प्रस्तावित भूखंड का क्षेत्रफल, मूल जमीन से दूरी, सड़क की चौड़ाई, भूमि का सार्वजनिक उपयोग और ग्राम की स्थिति जैसे बिंदुओं की तुलनात्मक सारिणी बनाकर यह जांचा जा सकता है कि किसी को नियमों से हटकर विशेष लाभ मिला या सभी पर समान मापदंड लागू हुए।
गौर करने लायक तथ्य
कचना की भूमि के बदले कचना में ही भूखंड प्रस्तावित है, सड्डू में नहीं। 45 मीटर सड़क पर अकेला तथाकथित विवादित भूखंड नहीं बल्कि कुल 37 भूखंड हैं। खसरा 658/2 की तरह 684/1, 684/5 और 681/1 के मामलों में भी मूल भूमि से अलग स्थान पर प्लॉट प्रस्तावित किए गए हैं और उनकी दूरी अधिक बताई गई है। ऐसे में पूरे प्लान और समान प्रकृति के अन्य आवंटनों की तुलनात्मक जांच के बिना किसी एक भूखंड को अलग कर विशेष लाभ या घोटाले के रूप में प्रस्तुत करना अधूरी तस्वीर पेश कर सकता है।
कस्तूरबा गांधी विद्यालय की छात्रा से जुड़ी घटना पर सर्व आदिवासी समाज ने जताई चिंता
निष्पक्ष जांच, दोषियों पर कार्रवाई की मांग
भोपालपटनम बीजापुर जिले के भोपालपटनमम स्थित कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय की छात्राओं से जुड़ी घटना को लेकर सर्व आदिवासी समाज ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। इसी संबंध में रविवार को भोपालपटनम स्थित गोंडवाना भवन में सर्व आदिवासी समाज द्वारा प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित किया गया। प्रेस कॉन्फ्रेंस में समाज के पदाधिकारियों एवं प्रमुख सदस्यों ने घटना को गंभीर बताते हुए प्रशासन से निष्पक्ष जांच तथा दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की। सर्व आदिवासी समाज ने कहा कि छात्राओं की सुरक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है। छात्राओं से संबंधित किसी भी घटना की निष्पक्ष एवं उच्च स्तरीय जांच कर वास्तविक तथ्यों को सामने लाया जाना चाहिए।

समाज ने प्रशासन से मांग की कि मामले की गंभीरता को देखते हुए आवश्यक कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए तथा यदि किसी की लापरवाही या संलिप्तता सामने आती है तो उसके विरुद्ध भी नियमानुसार कार्रवाई की जाए। समाज की ओर से प्रशासन के समक्ष घटना की तत्काल एवं निष्पक्ष जांच, संबंधित मामले में आवश्यक कानूनी कार्रवाई तथा पीड़ित पक्ष को न्याय दिलाने की मांग रखी गई। समाज प्रमुखों ने कहा कि आदिवासी समाज अपनी बेटियों और बच्चों की सुरक्षा को लेकर किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं करेगा। प्रेस कॉन्फ्रेंस में सर्व आदिवासी समाज के जिला अध्यक्ष अशोक कुमार तलांडी, समाज के प्रमुख कामेश्वर राव गौतम, वलवा मदनैया, अनिल पामभोई, शंकर लाल सड़मेक, सालिक राम नागवंशी मरपल्ली, किस्तैया सवलम, संटी तालांडी ईसत्तारी सहित अन्य समाज प्रमुख एवं सदस्य उपस्थित रहे।समाज प्रमुखों ने कहा कि यदि प्रशासन द्वारा मामले में उचित कार्रवाई नहीं की जाती है तो सर्व आदिवासी समाज आगे आवश्यक कदम उठाने के लिए मजबूर होगा। उन्होंने प्रशासन से मामले को गंभीरता से लेते हुए पीड़ित पक्ष को न्याय दिलाने और छात्राओं की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की मांग की है।
जनसहयोग नहीं होती तो हालात श्रीलंका जैसी निर्मित होती, साधुवाद है शहर की आवाम जिन्होंने एकता, अखण्डता और भाईचारे का पैगाम दिया-अनवर खान
सभी समाज व समुदाय,विभिन्न संघ संगठन,व्यापारी संस्थाएं,गणमान्यजन सहित मीडिया जिन्होंने मानवता व जनसरोकार की मिसाल कायम की
भाजपा की ट्रिपल इंजन सरकार इस त्रासदी से निपटने में असहाय साबित हुई, हमारी मांग है नुकसान की भरपाई के लिए शासन द्वारा निर्धारित राशि का वितरण जल्द हो और बस्तर को विशेष पैकेज दी जाए।
जगदलपुर बाढ़ की विपदा में संबल प्रदान करने के लिए विभिन्न समाज के समाजसेवियों,संघ संगठनों,व्यापारी बन्धुओं,जनसेवकों सहित मीडिया के साथियों को जिला कांग्रेस कमेटी के पूर्व प्रशासनिक महामंत्री अनवर खान ने साधुवाद दिया है तथा भाजपा की ट्रिपल इंजन सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए इस विपदा में पूरी तरह असफल बताया है।**वरिष्ठ कांग्रेसी अनवर खान ने कहा कि बाढ़ प्राकृतिक आपदा है इससे इंकार नहीं किया जा सकता लेकिन शासन प्रशासन की तैयारियां सिर्फ कागजों तक रहती है। तुफान अर्नब और पड़ोसी प्रदेश ओडिशा से छोड़े गए इंद्रावती नदी के कारण आई बाढ़ की विभीषिका ने ट्रीपल इंजन सरकार के दावों की पोल खोल दी। बाढ़ आपदा प्रबंधन के लिए शासन-प्रशासन के पास साजों-सामान ना होना तथा बाढ़ पीड़ितों के लिए पर्याप्त संसाधन ना होना प्रशासनिक लापरवाही उजागर करती है।
वरिष्ठ कांग्रेसी अनवर खान ने कहा कि बाढ़ आपदा में यदि सामाजिक संगठनों ने सामने आकर हाथ नहीं बढ़ाएं होते तो पीड़ितों के सामने भुखों मरने की स्थिति थी जो कि प्रशासन द्वारा बनाए गए राहत शिविरों में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही थी। इस बाढ़ग्रस्त क्षेत्र में सरकार के द्वारा जिस मुस्तैदी से राहत और बचाव कार्य किया जाना चाहिए था उसमें सरकार असफल साबित हुई मुख्यमंत्री के बस्तर प्रवास से बस्तरवासियों को उम्मीद थी की कुछ ठोस घोषणा करेंगे लेकिन उन्होंने निराश किया।
अनवर खान ने शासन से मांग की है कि प्रभावित परिवारों को तत्काल आवास योजना का लाभ उपलब्ध कराकर ऋण माफ किया जाए और खेती-किसानी के समस्त लाभ व सुविधाएं प्रदान की जाएं ताकि प्रभावित परिवारों का जीविकोपार्जन हो सके. नुकसान की भरपाई के लिए सर्वेक्षण और शासन द्वारा निर्धारित रकम का वितरण जल्द से जल्द की जाय, सरकार बस्तर संभाग के बाढ़ प्रभावित लोगों को विशेष राहत पैकेज दें।
ओबीसी महासभा ने बुलंद की 27 फीसदी आरक्षण और जातिगत जनगणना की मांग
दिल्ली में बड़ा आंदोलन करने की चेतावनी
दिनेश यदु के नेतृत्व में रैली निकालकर डिप्टी कलेक्टर को ज्ञापन
नवंबर तक मांग पूरी नहीं होने पर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का ऐलान
जगदलपुर ओबीसी वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण और जातिगत जनगणना की मांग को लेकर शनिवार को ओबीसी महासभा बस्तर संभाग ने जोरदार तरीके से आवाज बुलंद की। ओबीसी महासभा के प्रदेश अध्यक्ष राधेश्याम साहू के निर्देश पर संभागीय अध्यक्ष दिनेश यदु के नेतृत्व में बड़ी संख्या में समाजजनों ने शहर के कृष्णा मंदिर से बाइक कार रैली निकाली और कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रधानमंत्री के नाम डिप्टी कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा।

ओबीसी महासभा ने मांग की है कि आगामी जनगणना-2027 के फॉर्मेट में एससी-एसटी की तरह ओबीसी वर्ग के लिए अलग कॉलम निर्धारित कर जातिगत जनगणना कराई जाए तथा प्रदेश में ओबीसी वर्ग के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण लागू किया जाए। संभागीय अध्यक्ष दिनेश यदु ने कहा कि ओबीसी महासभा द्वारा इस मांग को लेकर कई बार राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल, मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपे जा चुके हैं, बावजूद इसके आज तक मांगें पूरी नहीं हुई हैं। उन्होंने कहा कि ओबीसी समाज की वास्तविक जनसंख्या का आंकड़ा सामने आए बिना सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक स्थिति का सही आकलन संभव नहीं है। जातिगत जनगणना के आंकड़े ही भविष्य की नीतियों, योजनाओं और आरक्षण व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण आधार बनेंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि आगामी सत्र तक मांगों पर विचार नहीं किया गया तो लोकसभा सत्र के दौरान दिल्ली के जंतर-मंतर पर ओबीसी महासभा द्वारा उग्र आंदोलन किया जाएगा।जिला अध्यक्ष रघुवंश यादव ने कहा कि आज ज्ञापन सौंपा गया है, यदि नवंबर माह तक हमारी मांगें पूरी नहीं हुई तो संगठन उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होगा। ज्ञापन सौंपने के पश्चात संभागीय अध्यक्ष दिनेश यदु के नेतृत्व में बड़ी संख्या में पदाधिकारी एवं समाजजन कोंडागांव में आयोजित सर्व पिछड़ा वर्ग ओबीसी महासभा की आमसभा में शामिल होने जगदलपुर से कोंडागांव रवाना हुए। इस अवसर पर संभागीय उपाध्यक्ष तुलसीराम ठाकुर, जिला अध्यक्ष रघुवंश यादव, शहर अध्यक्ष मनमोहन यादव, रामेश्वर बिसाई, हरीश साहू, योगेश्वरी साहू, चंपा ठाकुर, अंतूराम सेठिया, ओमप्रकाश साहू, गेंदालाल सोनी, मनोज कुमार ठाकुर, प्रेमसागर, प्रकाश ठाकुर, गजेंद्र ठाकुर, देवनाथ ठाकुर, कुणाल पटेल, लक्की, गणपति, संतोष यादव सहित बड़ी संख्या में समाजजन मौजूद रहे।
ओबीसी महासभा ने बुलंद की 27 फीसदी आरक्षण और जातिगत जनगणना की मांग
दिल्ली में बड़ा आंदोलन करने की चेतावनी
दिनेश यदु के नेतृत्व में रैली निकालकर डिप्टी कलेक्टर को ज्ञापन
नवंबर तक मांग पूरी नहीं होने पर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का ऐलान
जगदलपुर। ओबीसी वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण और जातिगत जनगणना की मांग को लेकर शनिवार को ओबीसी महासभा बस्तर संभाग ने जोरदार तरीके से आवाज बुलंद की। ओबीसी महासभा के प्रदेश अध्यक्ष राधेश्याम साहू के निर्देश पर संभागीय अध्यक्ष दिनेश यदु के नेतृत्व में बड़ी संख्या में समाजजनों ने शहर के कृष्णा मंदिर से बाइक कार रैली निकाली और कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रधानमंत्री के नाम डिप्टी कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा।

ओबीसी महासभा ने मांग की है कि आगामी जनगणना-2027 के फॉर्मेट में एससी-एसटी की तरह ओबीसी वर्ग के लिए अलग कॉलम निर्धारित कर जातिगत जनगणना कराई जाए तथा प्रदेश में ओबीसी वर्ग के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण लागू किया जाए। संभागीय अध्यक्ष दिनेश यदु ने कहा कि ओबीसी महासभा द्वारा इस मांग को लेकर कई बार राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल, मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपे जा चुके हैं, बावजूद इसके आज तक मांगें पूरी नहीं हुई हैं। उन्होंने कहा कि ओबीसी समाज की वास्तविक जनसंख्या का आंकड़ा सामने आए बिना सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक स्थिति का सही आकलन संभव नहीं है। जातिगत जनगणना के आंकड़े ही भविष्य की नीतियों, योजनाओं और आरक्षण व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण आधार बनेंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि आगामी सत्र तक मांगों पर विचार नहीं किया गया तो लोकसभा सत्र के दौरान दिल्ली के जंतर-मंतर पर ओबीसी महासभा द्वारा उग्र आंदोलन किया जाएगा।जिला अध्यक्ष रघुवंश यादव ने कहा कि आज ज्ञापन सौंपा गया है, यदि नवंबर माह तक हमारी मांगें पूरी नहीं हुई तो संगठन उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होगा। ज्ञापन सौंपने के पश्चात संभागीय अध्यक्ष दिनेश यदु के नेतृत्व में बड़ी संख्या में पदाधिकारी एवं समाजजन कोंडागांव में आयोजित सर्व पिछड़ा वर्ग ओबीसी महासभा की आमसभा में शामिल होने जगदलपुर से कोंडागांव रवाना हुए। इस अवसर पर संभागीय उपाध्यक्ष तुलसीराम ठाकुर, जिला अध्यक्ष रघुवंश यादव, शहर अध्यक्ष मनमोहन यादव, रामेश्वर बिसाई, हरीश साहू, योगेश्वरी साहू, चंपा ठाकुर, अंतूराम सेठिया, ओमप्रकाश साहू, गेंदालाल सोनी, मनोज कुमार ठाकुर, प्रेमसागर, प्रकाश ठाकुर, गजेंद्र ठाकुर, देवनाथ ठाकुर, कुणाल पटेल, लक्की, गणपति, संतोष यादव सहित बड़ी संख्या में समाजजन मौजूद रहे।





